Friday, June 26th, 2026

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मामूली विवाद में कार को किया आग के हवाले, पटेलनगर पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया

Daily Archives: 26/06/2026

मामूली विवाद में कार को किया आग के हवाले, पटेलनगर पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया

देहरादून। पटेलनगर क्षेत्र में मामूली विवाद के बाद एक कार में आग लगाने के मामले में दून पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि स्कूटी सवार युवकों ने विवाद के बाद कार पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, जिससे कार पूरी तरह जल गई।

जानकारी के अनुसार, 25 जून की देर रात कंट्रोल रूम के माध्यम से कोतवाली पटेलनगर पुलिस को कार में आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

पुलिस जांच में सामने आया कि टीएचडीसी कॉलोनी, प्रगतिपुर निवासी यूनेश कुमार अपनी कार (UK-08-AM-7414) से आईएसबीटी की ओर से कारगी चौक की तरफ जा रहे थे। कारगी चौक से पहले निशान शोरूम के पास विपरीत दिशा से आ रहे एक बाइक सवार को बचाने के प्रयास में उनकी कार डिवाइडर से टकरा गई।

इसी दौरान पीछे से आ रहे स्कूटी सवार दो युवकों से कार सवार लोगों का विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर दोनों स्कूटी सवारों ने कार में आग लगा दी, जिससे अल्टो कार पूरी तरह जल गई।

घटना के संबंध में पीड़ित की तहरीर पर कोतवाली पटेलनगर में मुकदमा संख्या 395/2026 धारा 326(एफ) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

हिरासत में लिए गए आरोपी:

नीरज बिष्ट पुत्र स्व. सोबन सिंह बिष्ट, निवासी नारायण विहार, देहरादून (उम्र 32 वर्ष)

ईशांत पंवार पुत्र बिजेंद्र पंवार, निवासी आदर्श विहार कारगी, देहरादून (उम्र 35 वर्ष)

वही पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।


रायपुर में लाखों की ज्वैलरी चोरी का खुलासा, दो शातिर गिरफ्तार,

दून पुलिस ने की 07 लाख रुपये की चोरी की ज्वैलरी बरामद

 

देहरादून। ऑपरेशन प्रहार के तहत दून पुलिस ने थाना रायपुर क्षेत्र में हुई चोरी की घटना का सफल अनावरण करते हुए दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई करीब 07 लाख रुपये कीमत की ज्वैलरी बरामद की है।

पुलिस के अनुसार, शांति विहार रायपुर निवासी सूरज रावत ने थाना रायपुर में तहरीर देकर बताया था कि अज्ञात चोरों ने उनके घर से ज्वैलरी चोरी कर ली है। मामले में थाना रायपुर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और संदिग्धों की तलाश शुरू की। साथ ही पूर्व में चोरी की घटनाओं में शामिल रहे अपराधियों का सत्यापन किया गया।

पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर देर रात्रि 25 जून 2026 को लाडपुर रिंग रोड जंगल क्षेत्र से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने चोरी की घटना को अंजाम देना स्वीकार किया।

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान सोएब खान पुत्र जफर खान निवासी भगत सिंह कॉलोनी, थाना रायपुर और अजहर पुत्र जफर खान निवासी भगत सिंह कॉलोनी, थाना रायपुर के रूप में हुई है।

पुलिस पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वह नशे के आदी हैं और अपनी नशे की जरूरतों को पूरा करने के लिए चोरी की घटना को अंजाम दिया था।

 

बरामदगी:

चोरी की गई लगभग 07 लाख रुपये मूल्य की ज्वैलरी

पुलिस टीम:थाना रायपुर टीम एवं एसओजी टीम की संयुक्त कार्रवाई में यह सफलता मिली।


शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार

रायपुर पुलिस ने मोथरोवाला से दबोचा, जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप

देहरादून। थाना रायपुर पुलिस ने युवती को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 5 जून 2026 को पीड़िता ने थाना रायपुर में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि अभियुक्त कमल सिंह रावत ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और मामले की जानकारी किसी को देने पर जान से मारने की धमकी दी।

पीड़िता की शिकायत के आधार पर थाना रायपुर में अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश शुरू की।

पुलिस ने सुरागरसी और मैनुअल जानकारी जुटाते हुए 25 जून 2026 को अभियुक्त कमल सिंह रावत को मोथरोवाला क्षेत्र के पास से गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार अभियुक्त:

कमल सिंह रावत पुत्र सत्येंद्र सिंह रावत

निवासी मोनाल एनक्लेव, लेन नंबर-7, बंजारावाला, थाना पटेलनगर, देहरादून

उम्र- 24 वर्ष

पुलिस टीम:

म0उ0नि0 नीमा

उ0नि0 अजय भट्ट

कांस्टेबल संकेश शुक्ला


अर्धकुंभ से पहले हरिद्वार को मिलेगी जाम से राहत, एनएचएआई की दो बड़ी परियोजनाएं अंतिम चरण में

देहरादून :आगामी अर्धकुंभ-2027 को देखते हुए हरिद्वार में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी तेज हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की दो प्रमुख परियोजनाएं अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इनके पूरा होने के बाद हरिद्वार शहर में लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

एनएचएआई द्वारा तैयार की जा रही स्पर टू हरिद्वार परियोजना का करीब 92 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 51 किलोमीटर लंबी छह लेन की यह एक्सेस कंट्रोल्ड सड़क दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे को हरिद्वार से जोड़ेगी। यह मार्ग हलगोया मुस्तकम से शुरू होकर भड़ेड़ी राजपूताना के पास मौजूदा एनएच-58 से जुड़ेगा।

परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली, मेरठ, सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले वाहनों को हरिद्वार शहर के अंदर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक तेज मार्ग मिल सकेगा।

वहीं हरिद्वार बाईपास परियोजना का भी करीब 77 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। 15 किलोमीटर लंबे इस फोर-लेन बाईपास के शुरू होने के बाद हर की पैड़ी, चंडी चौक और शंकराचार्य चौक जैसे प्रमुख इलाकों में यातायात का दबाव कम होगा।

हरिद्वार–मुजफ्फरनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी कई भीड़भाड़ वाले जंक्शनों पर फ्लाईओवर, व्हीकल अंडरपास और सर्विस रोड बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही एनएचएआई इन मार्गों पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू कर रहा है, जिससे रियल टाइम ट्रैफिक निगरानी और आपात सहायता व्यवस्था मजबूत होगी।

अर्धकुंभ-2027 से पहले इन परियोजनाओं के पूरा होने से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित, तेज और जाम मुक्त सफर की सुविधा मिलने की उम्मीद है।


देवभूमि की पहचान: चारधाम और हेमकुंट साहिब यात्रा ने सदियों से जोड़ी भाईचारे की डोर

चारधाम और हेमकुंट साहिब यात्राएं सदियों से रही हैं आस्था, समरसता और सहअस्तित्व का प्रतीक

हेमकुंट साहिब के प्रथम ग्रंथी रहे थे चमोली के भ्यूंडार गांव निवासी नंदा सिंह

देवभूमि उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालय, नदियों और प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। इसकी वास्तविक आत्मा यहां की समृद्ध आध्यात्मिक परंपराओं, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सहअस्तित्व में बसती है। चारधाम और हेमकुंट साहिब की यात्राएं इस विरासत का सबसे जीवंत और प्रेरणादायक उदाहरण हैं। सदियों से ये यात्राएं न केवल समानांतर रूप से संचालित होती रही हैं, बल्कि इन्होंने विभिन्न आस्थाओं को जोड़ते हुए भाईचारे, सहयोग और मानवीय मूल्यों को भी मजबूत किया है।

ऐसे समय में जब कुछ क्षणिक घटनाओं को आधार बनाकर सामाजिक और डिजिटल मंचों पर विभाजनकारी माहौल बनाने की कोशिशें दिखाई दे रही हैं, उत्तराखंड की इस गौरवशाली परंपरा को याद करना और उसकी रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी बन जाती है। राजनीतिक लाभ या तात्कालिक उत्तेजना के लिए यदि इस सद्भाव को ठेस पहुंचती है, तो इसका असर केवल सामाजिक ताने-बाने पर ही नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर भी पड़ सकता है।

चारधाम और हेमकुंट साहिब यात्राएं हमेशा से एक-दूसरे की पूरक रही हैं। इन दोनों यात्राओं का प्रमुख प्रवेश द्वार ऋषिकेश है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंट साहिब जाने वाले श्रद्धालु यात्रा के बड़े हिस्से में एक ही मार्ग और एक जैसी सुविधाओं का उपयोग करते हैं। यात्रा मार्ग पर स्थानीय समुदाय, गुरुद्वारे, मंदिर समितियां, स्वयंसेवी संस्थाएं और आम लोग मिलकर सेवा, सहयोग और अतिथि सत्कार की परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं। यही उत्तराखंड की वह सांस्कृतिक चेतना है, जिसमें विविध आस्थाओं का सम्मान और परस्पर सौहार्द सर्वोपरि माना गया है।

नंदा सिंह की विरासत: समरसता का जीवंत प्रतीक
इतिहास भी इस साझा विरासत की पुष्टि करता है। चमोली जिले के भ्यूंडार गांव निवासी स्वर्गीय नंदा सिंह हेमकुंट साहिब गुरुद्वारे के प्रथम ग्रंथी रहे और लगभग ढाई दशक तक इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन करते रहे। उनका जीवन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि उत्तराखंड की संस्कृति ने कभी भी आस्था के आधार पर भेदभाव नहीं किया, बल्कि सदैव समावेश और सहयोग को अपनाया है।

चारधाम और हेमकुंट साहिब यात्राएं केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की भी मजबूत आधारशिला हैं। परिवहन, होटल व्यवसाय, होम-स्टे, घोड़ा-खच्चर संचालन, स्थानीय व्यापार और हजारों परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन यात्राओं से जुड़ी हुई है। इसलिए इन यात्राओं से जुड़े सौहार्दपूर्ण वातावरण को बनाए रखना केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूरी भी है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम किसी भी घटना पर प्रतिक्रिया देते समय संयम, विवेक और उत्तराखंड की मूल सांस्कृतिक भावना को सर्वोपरि रखें। प्रश्न यह नहीं है कि किसी घटना पर आक्रोश व्यक्त किया जाए या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हम क्षणिक आवेश को बढ़ावा देंगे या फिर अपनी सदियों पुरानी समरसता, शांति और सहअस्तित्व की परंपरा को और मजबूत करेंगे।

देवभूमि की पहचान उसकी आस्था जितनी ही उसकी सहिष्णुता और भाईचारे से भी है। यह साझा आध्यात्मिक विरासत केवल हमारी धरोहर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी भी है। आइए, हम सब मिलकर इस देवतत्व, इस सद्भाव और इस सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करें।


घर में अकेली 9 साल की मासूम से दुष्कर्म, नाबालिग आरोपी हिरासत में

जमुई (बिहार): बिहार के जमुई जिले के चरकापत्थर थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक अत्यंत संवेदनशील घटना सामने आई है। यहाँ एक गाँव में 9 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। वारदात के बाद से पूरे इलाके के ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है और एक नाबालिग आरोपी को अभिरक्षा में ले लिया है।

पीड़िता की मां द्वारा थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, यह घटना 19 जून की शाम करीब 4 बजे की है। उस वक्त मासूम बच्ची घर में अकेली थी और उसकी मां राशन लेने के लिए बाहर गई हुई थी। जब मां वापस घर लौटी, तो बच्ची को कमरे के अंदर बेहोशी की हालत में पाया।वानक रूप से बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था और उसकी हालत बेहद नाजुक थी। परिजनों ने बिना वक्त गंवाए मासूम को तुरंत नजदीकी डॉक्टर के पास इलाज के लिए भर्ती कराया।

उपचार के बाद जब बच्ची होश में आई, तब उसने परिजनों को अपने साथ हुई इस दरिंदगी की जानकारी दी। पीड़िता के बयान के आधार पर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पड़ोस के ही एक लड़के ने बच्ची को बहला-फुसलाकर सूने घर का फायदा उठाया और वारदात को अंजाम दिया। चरकापत्थर थानाध्यक्ष रंजीत कुमार ने बताया कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाबालिग आरोपी को निरुद्ध (हिरासत में) कर लिया है और मामले में आगे की वैधानिक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


ड्यूटी पर सो गया सिपाही, जेब से चाबी निकालकर हवालात से भागा 50 हजार का इनामी अपराधी

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ शहर कोतवाली के हवालात में बंद 50 हजार रुपये का इनामी अपराधी सोनू मुसहर गुरुवार रात पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। शातिर अपराधी ने हवालात के पास सो रहे संतरी (सिपाही) की जेब से चाबी निकालकर ताला खोला और आसानी से रफूचक्कर हो गया। इस लापरवाही ने जिला पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार, गहमर के मनिया निवासी सोनू मुसहर को गहमर पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के हवाले किया गया था। एसओजी द्वारा आवश्यक पूछताछ पूरी होने के बाद आरोपी को शहर कोतवाली पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया था, जहां उसे हवालात में रखा गया। रात के समय वहां साल 2025 बैच के एक सिपाही की ड्यूटी लगी थी। देर रात सिपाही को नींद आ गई और वह हवालात के पास ही सो गया, जिसका फायदा उठाकर शातिर अपराधी ने उसकी जेब से चाबी चुरा ली।

50 हजार रुपये के इनामी बदमाश के इस तरह भाग निकलने से पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अभी इस मामले पर कुछ भी खुलकर बोलने से बच रहे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटना की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात लापरवाह सिपाही के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। फरार सोनू मुसहर को दोबारा पकड़ने के लिए पूरे जिले में नाकाबंदी कर दी गई है और एसओजी सहित पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं।


खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ,₹369.66 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास

पंतनगर : गांधी मैदान, रुद्रपुर में कृषि विभाग द्वारा आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कृषि एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी तथा जनपद प्रभारी मंत्री एवं परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर ₹46.32 करोड़ की लागत से निर्मित 9 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा ₹323.34 करोड़ की लागत के 32 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। इस प्रकार कुल ₹369.66 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब खेत बचेंगे तो जमीन बचेगी, जमीन बचेगी तो पृथ्वी बचेगी और पृथ्वी बचेगी तो जीवन सुरक्षित रहेगा। उन्होंने किसानों से मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि भूमि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी धरती माता है, जिसका संरक्षण हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री का दायित्व किसानों के प्रथम सेवक के रूप में कार्य करना है तथा किसानों की सेवा ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज चावल उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है तथा कृषि क्षेत्र में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

 

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, किंतु प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश प्रत्येक चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और निकट भविष्य में हॉर्टिकल्चर हब के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा। इस दिशा में भारत सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि सेब, अखरोट एवं बादाम सहित उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों के उत्पादन हेतु मुक्तेश्वर में ₹100 करोड़ की लागत से क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किया जाएगा। बड़ी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹4 करोड़ तथा छोटी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹2 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि चौबटिया (अल्मोड़ा) में ₹15 करोड़ की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त न्यूजीलैंड के सहयोग से उत्तराखंड में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹15 करोड़ की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ (फेंसिंग) कार्य हेतु ₹65 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही प्रदेश में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित करने के लिए ₹104 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की जा रही है, जिससे किसानों को मौसम की सटीक जानकारी समय पर उपलब्ध हो सकेगी तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ और अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का अधिकाधिक लाभ लेने तथा मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देकर भूमि की उर्वरा शक्ति को संरक्षित किया जा सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुरक्षित रखी जा सकती है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वस्थ किसान, स्वस्थ मिट्टी तथा स्वस्थ कृषि व्यवस्था ही विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का जनआंदोलन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती, कृषि अवसंरचना तथा डिजिटल कृषि मिशन जैसी योजनाओं से किसानों को व्यापक लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा एवं अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। यदि मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित होगा तो कृषि उत्पादन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराकर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को ₹3 लाख तक का ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है। नहरों से सिंचाई की सुविधा निःशुल्क प्रदान की जा रही है तथा फार्म मशीनरी बैंक योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को सशक्त बनाने के लिए रेनफेड फार्मिंग परियोजना भी स्वीकृत की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार फल, सब्जी एवं बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। पॉलीहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड चेन, सीए स्टोरेज तथा मेगा फूड पार्क जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार योजनाएं एवं संसाधन उपलब्ध करा सकती है, किंतु कृषि क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन किसानों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने किसानों से मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करने, प्राकृतिक खेती अपनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि का संरक्षण करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सभी अतिथियों एवं किसानों का स्वागत करते हुए घेरबाड़ के लिए ₹65 करोड़, जैविक खेती के लिए ₹10 करोड़ की सहायता उपलब्ध कराने तथा मंडुवा एवं झंगोरा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने का अनुरोध किया।

 


केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिले कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल

उत्तराखंड के विकास से जुड़े विषयों पर हुई बातचीत

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने नई दिल्ली में देश के केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के मध्य विभिन्न सामयिक एवं जनहित से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि शौर्य एवं पराक्रम की वीर भूमि उत्तराखंड के प्रति आदरणीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का विशेष स्नेह एवं आत्मीय लगाव सदैव रहा है, जिसका प्रत्यक्ष लाभ राज्य को निरंतर प्राप्त होता रहा है। उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सामरिक महत्व तथा सीमांत क्षेत्रों के सशक्तीकरण के प्रति केंद्रीय रक्षा मंत्री की प्रतिबद्धता की सराहना की।

मंत्री उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड की प्रगति एवं सुरक्षा से जुड़े विषयों पर केंद्र सरकार का निरंतर सहयोग राज्य के विकास को नई दिशा प्रदान कर रहा है। उन्होंने उत्तराखंड के प्रति केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सहयोग, मार्गदर्शन एवं समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया।


नागरिकता का सवाल: जब पासपोर्ट, वोटर आईडी और आधार भी अंतिम प्रमाण नहीं, तो भारतीय नागरिक होने की पहचान क्या है?

पूजा भट्ट

भारत में नागरिकता का सवाल अक्सर तब चर्चा में आता है, जब किसी सरकारी प्रक्रिया, दस्तावेज़ सत्यापन या कानूनी विवाद के दौरान यह पूछा जाता है—आखिर भारतीय नागरिक होने का अंतिम प्रमाण क्या है? आम धारणा यह है कि पासपोर्ट, वोटर आईडी या आधार कार्ड नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर तस्वीर इससे कहीं अधिक जटिल है।

पासपोर्ट को आमतौर पर सबसे मजबूत पहचान दस्तावेज़ माना जाता है। यह विदेश यात्रा की अनुमति देता है और सरकार द्वारा जारी किया जाता है। लेकिन कानूनी रूप से पासपोर्ट का उद्देश्य मुख्य रूप से यात्रा और पहचान से जुड़ा होता है, न कि हर परिस्थिति में नागरिकता का अंतिम और निर्विवाद प्रमाण देना।

पासपोर्ट जारी करते समय उपलब्ध दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया पर भरोसा किया जाता है, लेकिन यदि बाद में किसी स्तर पर दस्तावेजों में त्रुटि या विवाद सामने आता है, तो नागरिकता का अलग परीक्षण किया जा सकता है।

मतदाता पहचान पत्र इस बात का संकेत देता है कि व्यक्ति चुनावी सूची में दर्ज है और मतदान के लिए पात्र माना गया है। लेकिन यह भी अपने आप में नागरिकता का निर्णायक कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता। चुनाव आयोग का रिकॉर्ड और नागरिकता निर्धारण की प्रक्रिया अलग-अलग कानूनी ढांचे के तहत काम करती हैं।

आधार भारत में सबसे व्यापक पहचान प्रणालियों में से एक है, लेकिन इसकी बुनियादी संरचना ही इसे नागरिकता दस्तावेज़ नहीं बनाती। आधार का उद्देश्य किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करना है, नागरिकता नहीं। यही वजह है कि आधार संख्या होने का मतलब स्वतः भारतीय नागरिक होना नहीं माना जाता।

भारत में नागरिकता का आधार नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे जुड़े नियम हैं। नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण या क्षेत्र के भारत में शामिल होने जैसे कानूनी आधारों पर निर्धारित होती है।

व्यवहार में नागरिकता साबित करने के लिए कई दस्तावेज़ और परिस्थितियां एक साथ देखी जा सकती हैं—जैसे जन्म रिकॉर्ड, पारिवारिक दस्तावेज, सरकारी अभिलेख, निवास संबंधी प्रमाण और अन्य प्रशासनिक रिकॉर्ड।

यहीं सबसे बड़ा अंतर समझना जरूरी है—दस्तावेज़ पहचान दे सकते हैं, लेकिन नागरिकता एक कानूनी स्थिति है। कोई एक कार्ड या प्रमाणपत्र हर स्थिति में अंतिम उत्तर नहीं होता। अलग-अलग संस्थाओं के दस्तावेज़ अलग उद्देश्यों के लिए बनाए गए हैं।

आज के डिजिटल दौर में जब पहचान कई दस्तावेज़ों में बंटी हुई है, तब नागरिकता पर स्पष्ट संवाद और मजबूत रिकॉर्ड सिस्टम की जरूरत पहले से अधिक महसूस होती है। आम नागरिक के लिए यह समझना जरूरी है कि पहचान पत्र रखना और नागरिकता साबित करना हमेशा एक जैसी प्रक्रिया नहीं होती।

भारतीय नागरिकता का सवाल केवल एक कार्ड या दस्तावेज़ का नहीं, बल्कि कानून, रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रिया के संयोजन का विषय है।


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