Thursday, June 4th, 2026

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OSM बवाल के बाद शिक्षकों की अपील, छात्रों के लिए हो मैनुअल री-इवैल्यूएशन

Daily Archives: 04/06/2026

OSM बवाल के बाद शिक्षकों की अपील, छात्रों के लिए हो मैनुअल री-इवैल्यूएशन

पूजा भट्ट

CBSE ने 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। छात्र 6 जून तक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि बोर्ड ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि री-इवैल्यूएशन के नतीजे कब जारी किए जाएंगे। इस बीच कॉपियों की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर उठे विवाद के बाद री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है।

इस साल CBSE ने 12वीं की कॉपियों की जांच डिजिटल तरीके से OSM सिस्टम के जरिए कराई थी। परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने मार्किंग को लेकर सवाल उठाए। कुछ छात्रों का कहना था कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं, जबकि कई ने स्कैन की गई कॉपियों की गुणवत्ता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। इसी वजह से बड़ी संख्या में छात्र अब अपने अंकों की दोबारा जांच कराना चाहते हैं।

मामले को देखते हुए राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ (GSTA) ने CBSE को सुझाव दिया है कि जरूरत पड़ने पर री-इवैल्यूएशन पारंपरिक यानी मैनुअल तरीके से कराया जाए। संघ का मानना है कि तकनीकी समस्याओं के कारण कई छात्रों की शंकाएं पूरी तरह दूर नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में केवल डिजिटल प्रक्रिया पर निर्भर रहने से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाएगा।
GSTA के महासचिव अजय वीर यादव ने कहा कि 12वीं कक्षा का परिणाम छात्रों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। कॉलेजों में दाखिले, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के कई अवसरों पर एक-एक अंक का असर पड़ता है। इसलिए यह जरूरी है कि मूल्यांकन प्रक्रिया इतनी पारदर्शी और भरोसेमंद हो कि किसी भी छात्र को अपने परिणाम को लेकर संदेह न रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि बोर्ड मैनुअल री-इवैल्यूएशन का फैसला करता है तो शिक्षक इस काम में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उनके मुताबिक, OSM व्यवस्था को लागू करने से पहले विभिन्न पक्षों की ओर से जो सुझाव दिए गए थे, उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अब सामने आ रही समस्याएं उसी का परिणाम दिखाई देती हैं।

OSM को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब कई छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपियों में गड़बड़ियों की शिकायत की। कुछ ने कॉपियां धुंधली होने की बात कही, तो कुछ ने मूल्यांकन में त्रुटियों का आरोप लगाया। इन शिकायतों के बाद पूरे देश में इस व्यवस्था को लेकर बहस शुरू हो गई। बढ़ते विवाद को देखते हुए सरकार ने OSM से जुड़े टेंडर और पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो मामले की पड़ताल करेगी।

अब छात्रों और अभिभावकों की नजर री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया और जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि बोर्ड आगे ऐसे कदम उठाएगा जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर पैदा हुए सवालों का समाधान हो सके और छात्रों का भरोसा फिर से मजबूत किया जा सके।


चारधाम यात्रा और मानसून को देखते हुए बेस अस्पताल की तैयारियों का जायज़ा

मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने मरीजों से संवाद कर परखी स्वास्थ्य सेवाएं

उपकरणों, मानव संसाधनों और आपदा प्रबंधन संबंधी प्रस्ताव शीघ्र भेजने के निर्देश

पौड़ी- गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने गुरुवार को श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा व्यवस्थाओं तथा चारधाम यात्रा के दौरान मरीजों को उपलब्ध करायी जा रही सुविधाओं का विस्तृत जायज़ा लिया। उन्होंने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा अस्पताल की सभी व्यवस्थाएं हर समय सुचारु रहनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने आपातकालीन कक्ष, आईसीयू, ब्लड बैंक, माइक्रोबायोलॉजी लैब, बायोकेमिस्ट्री लैब, पैथोलॉजी लैब एवं कैथ लैब सहित विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, उपकरणों और मानव संसाधनों की जानकारी लेते हुए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा उन्हें मिल रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

मंडलायुक्त ने चिकित्सकों को निर्देशित किया कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्रत्येक मरीज को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने चारधाम यात्रा के दौरान अस्पताल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं एवं अन्य मरीजों के उपचार संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि यात्रा सीजन में अस्पताल की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में सभी व्यवस्थाएं पूर्ण रूप से सक्रिय एवं सुव्यवस्थित रहनी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। साथ ही चिकित्सकों से आवश्यक चिकित्सा उपकरणों एवं संसाधनों की जानकारी लेते हुए कहा कि जिन उपकरणों की आवश्यकता है, उनकी खरीद प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए। आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने आवश्यक चिकित्सा उपकरणों, संसाधनों तथा अतिरिक्त मानव संसाधन की मांग संबंधी प्रस्ताव जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि आपदा के समय मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा सके। उन्होंने तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए फिटर एवं विद्युत कर्मियों की आवश्यकता संबंधी प्रस्ताव भी शीघ्र भेजने को कहा।

मंडलायुक्त ने अस्पताल की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) व्यवस्था की जानकारी लेते हुए कहा कि अस्पताल को एसटीपी प्रणाली से जोड़ने हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर ब्लॉक की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेस अस्पताल श्रीनगर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान है और यहां मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

इस अवसर पर उपजिलाधिकारी नूपुर वर्मा, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. दीपा हटवाल, प्रशासनिक अधिकारी संदीप पंवार सहित अन्य चिकित्सक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।


वन भूमि हस्तांतरण के लंबित प्रकरणों में तेजी लाएं, विकास कार्यों में नहीं होनी चाहिए देरी: जिलाधिकारी

तकनीकी कमियों से बचें, प्रतिपूरक वनीकरण के प्रस्ताव मानकों के अनुरूप तैयार करें: जिलाधिकारी

सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त प्रकरणों में तेजी लाने के निर्देश, संयुक्त निरीक्षण से लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर

पौड़ी- जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में गुरुवार को जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद के विभिन्न विकास कार्यों से जुड़े लंबित वन भूमि हस्तांतरण प्रस्तावों की विभागवार समीक्षा करते हुए उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली गई तथा संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े प्रकरण सड़क, पेयजल, विद्युत, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास कार्यों की प्रगति से सीधे जुड़े हैं। इसलिए जनहित एवं विकास कार्यों को गति देने के लिए इन मामलों का समयबद्ध निस्तारण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय समन्वय एवं नियमित समीक्षा के माध्यम से सभी लंबित प्रकरणों में तेजी लाई जाए तथा प्रत्येक स्तर पर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास योजनाओं का लाभ जनता तक समय पर पहुंच पाए।

जिलाधिकारी ने प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देशित किया कि प्रतिपूरक वनीकरण से संबंधित प्रकरणों में शासन एवं भारत सरकार द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों तथा निर्धारित मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि चयन, अभिलेखों की शुद्धता, राजस्व एवं वन विभाग के बीच समन्वय तथा आवश्यक औपचारिकताओं को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए, ताकि प्रस्तावों में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रियागत त्रुटि न रहे।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रतिपूरक वनीकरण हेतु प्रस्तावित भूमि सभी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, जिससे प्रस्तावों के परीक्षण के दौरान भूमि अस्वीकृत होने की स्थिति उत्पन्न न हो। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण की गहन समीक्षा करते हुए आवश्यक दस्तावेजों एवं अभिलेखों का पूर्व सत्यापन कर लिया जाए तथा किसी भी कमी को समय रहते दूर किया जाए, ताकि वन भूमि हस्तांतरण एवं विकास कार्यों से जुड़े मामलों का निस्तारण सुचारु एवं त्वरित रूप से किया जा सके।

बैठक में जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारियों, वन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण से जुड़े वन भूमि हस्तांतरण मामलों को विशेष प्राथमिकता के साथ लिया जाए तथा जिन मामलों में स्थल निरीक्षण, अभिलेखों की पूर्ति अथवा अन्य तकनीकी औपचारिकताएं शेष हैं, उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। जिलाधिकारी ने बताया कि जिन प्रकरणों को सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, उनमें आवश्यक औपचारिकताओं को शीघ्र पूर्ण करते हुए विधिवत स्वीकृति की कार्रवाई सुनिश्चित की जाय, ताकि संबंधित विकास कार्यों को धरातल पर आगे बढ़ाया जा सके।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि खंड स्तर पर कोई भी प्रकरण अनावश्यक रूप से लंबित न रहे। उन्होंने कहा कि जिन विभागों अथवा अधिकारियों के स्तर पर मामले लंबित हैं, वे आवश्यक कार्रवाई करते हुए उन्हें शीघ्र अग्रसारित करें। यदि किसी प्रकरण में वन विभाग के नोडल अथवा उच्च स्तर पर कोई बाधा या लंबित कार्रवाई हो, तो उसकी सूचना तत्काल प्रभागीय वनाधिकारी एवं जिला कार्यालय को उपलब्ध करायी जाए, ताकि संबंधित स्तर पर प्रभावी पैरवी कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्रकरणों की नियमित निगरानी एवं सतत फॉलो-अप करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि सभी लंबित मामलों को संबंधित उपजिलाधिकारियों के संज्ञान में लाकर उनकी नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो तथा विकास कार्यों को समय पर स्वीकृतियां प्राप्त हो सकें।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी गढ़वाल महातिम यादव, सिविल सोयम पवन नेगी, लोक निर्माण विभाग के विभिन्न खंडों के अधिशासी अभियंता, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित रहे।


JEE Advanced पोर्टल में मिली गंभीर कमजोरी, 16 वर्षीय एथिकल हैकर ने किया खुलासा

पूजा भट्ट

देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में शामिल JEE Advanced 2026 से जुड़ी एक अहम साइबर सुरक्षा खामी सामने आई है। परीक्षा आयोजित करने वाले आईआईटी रुड़की के रिजल्ट पोर्टल पर क्लाउड स्टोरेज की गलत कॉन्फिगरेशन के कारण लाखों अभ्यर्थियों का डेटा सार्वजनिक रूप से एक्सेस किया जा सकता था। इस खामी का पता एक 16 वर्षीय साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर ने लगाया, जिसकी सूचना मिलने के बाद संस्थान ने तत्काल कार्रवाई करते हुए समस्या को दूर कर दिया।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर राइलेन अनिल (@DarthKermy72747) नामक युवा रिसर्चर ने JEE Advanced 2026 के परिणामों से जुड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में मौजूद एक गंभीर कमजोरी की जानकारी साझा की। उनके अनुसार, रिजल्ट पोर्टल से संबंधित क्लाउड स्टोरेज की सेटिंग्स में ऐसी त्रुटि थी, जिसके चलते संवेदनशील डेटा बिना किसी लॉग-इन या प्रमाणीकरण (Authentication) के देखा जा सकता था।

रिसर्चर के दावे के मुताबिक, इस तकनीकी खामी के कारण लगभग 1.79 लाख उम्मीदवारों के रिजल्ट रिकॉर्ड और करीब 1.87 लाख अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड तक सीधी पहुंच संभव थी। इन दस्तावेजों में उम्मीदवारों के नाम, जन्म तिथि और पंजीकृत मोबाइल नंबर जैसी व्यक्तिगत जानकारियां शामिल थीं।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार डेटा केवल देखने (Read-Only) की स्थिति में था, जिससे उसमें किसी प्रकार का बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जा सकती थी। फिर भी, इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की निजी जानकारी का सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना एक गंभीर डेटा सुरक्षा चिंता माना जा रहा है।

सुरक्षा खामी की जानकारी मिलने के बाद आईआईटी रुड़की ने मामले का संज्ञान लिया और जांच शुरू की। संस्थान ने पुष्टि की कि क्लाउड स्टोरेज की कॉन्फिगरेशन में त्रुटि थी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया गया।

समस्या का समाधान करने के बाद आईआईटी रुड़की ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी करते हुए युवा रिसर्चर के योगदान की सराहना की। संस्थान ने कहा कि क्लाउड स्टोरेज से जुड़ी इस तकनीकी त्रुटि की जानकारी देने के लिए वह रिसर्चर का आभारी है।

आईआईटी रुड़की ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि संबंधित डेटा केवल रीड-ओनली मोड में उपलब्ध था, इसलिए उसमें किसी तरह का बदलाव संभव नहीं था। साथ ही संस्थान ने जिम्मेदारीपूर्वक खामी की रिपोर्ट करने और नैतिक साइबर सुरक्षा अनुसंधान (Ethical Security Research) के लिए रिसर्चर की प्रशंसा की।

यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि बड़े शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है। समय रहते खामी की पहचान हो जाने से संभावित डेटा लीक के बड़े खतरे को टाल दिया गया, लेकिन यह मामला भविष्य में ऐसी प्रणालियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की आवश्यकता भी दर्शाता है।


कार्लीगाड़ पहुंचकर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने लिया आपदा राहत कार्यों का जायजा

15 दिन में मलबा हटाने के निर्देश

देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज मसूरी विधानसभा क्षेत्र के आपदा प्रभावित कार्लीगाड़ क्षेत्र का दौरा कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आपदा के कारण जमा हुए मलवे को हटाने के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया तथा मौके पर उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जिलाधिकारी देहरादून को निर्देशित किया कि कार्लीगाड़ क्षेत्र में जमा आपदा के मलवे को आगामी 15 दिनों के भीतर पूर्ण रूप से हटाया जाए तथा भविष्य में किसी प्रकार की क्षति से बचाव हेतु मलवे का वैज्ञानिक ढंग से चौनलाइजेशन सुनिश्चित किया जाए।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जिलाधिकारी को कार्लीगाड़ के आपदा प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास के लिए शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि जोखिम वाले क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर की जाए। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कार्लीगाड़, शेरा गांव सहित अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षात्मक एवं स्थायी सुरक्षा कार्यों को जल्द शुरू करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित लोगों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मानसून से पूर्व सभी आवश्यक सुरक्षा एवं राहत कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। इस अवसर पर जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी देहरादून डा0 आशीष चौहान, जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह चौहान, ग्राम प्रधान राकेश जवाड़ी सहित वन, लोनिवि, विद्युत, जलसंस्थान, जलनिगम, सिंचाई, पीएमजीएसवाई सहित कई विभागों के अधिकारीगण तथा स्थानीय लोग उपस्थित रहे।


आपदा प्रबंधन में यूकाड़ा की बड़ी पहल, 08 हेली कंपनी दे रही 80 घंटे की निःशुल्क उड़ान सेवा

देहरादून। आगामी मानसून सीजन के दौरान संभावित आपदाओं एवं आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश में चारधाम यात्रा के लिए संचालित प्रत्येक हेली कंपनी द्वारा यूकाडा को 10-10 घंटे के निःशुल्क फ्लाइंग ऑवर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनका उपयोग आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्यों में किया जा रहा है।

वर्तमान में चारधाम यात्रा में संचालित आठ हेली कंपनियों द्वारा कुल 80 घंटे के निःशुल्क फ्लाइंग ऑवर उपलब्ध कराए गए हैं। इन घंटों का उपयोग मेडिकल इमरजेंसी, एयर रेस्क्यू तथा दुर्गम क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। इसी व्यवस्था के तहत अप्रैल माह से अब तक 100 से अधिक श्रद्धालुओं और जरूरतमंद लोगों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। वहीं, पिछले एक वर्ष में विभिन्न आपदा एवं रेस्क्यू अभियानों के दौरान 200 से अधिक लोगों का सफलतापूर्वक बचाव किया गया है।

पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, बादल फटने, अतिवृष्टि तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं राहत एवं बचाव कार्यों की जीवनरेखा साबित होती हैं। मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन इन निःशुल्क फ्लाइंग ऑवर का तत्काल उपयोग कर प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से राहत पहुंचा सकेगा। इससे आपदा प्रभावित लोगों तक समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही राहत एवं बचाव कार्यों की गति में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में सुरक्षित एवं प्रभावी आपदा प्रबंधन सुनिश्चित करने की दिशा में यूकाडा की यह पहल एक अभिनव मॉडल के रूप में उभर रही है, जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती है।

यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि चारधाम यात्रा के लिए हेली कंपनियों के चयन की टेंडर प्रक्रिया के दौरान ही प्रत्येक कंपनी से 10 घंटे के निःशुल्क फ्लाइंग ऑवर का प्रावधान रखा गया था। इसका उद्देश्य मेडिकल इमरजेंसी, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे यात्रियों की सहायता तथा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए त्वरित हवाई सेवाएं उपलब्ध कराना था। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था आपदा प्रबंधन के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

यूकाडा के हेड ऑफ ऑपरेशन अमित शर्मा ने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान बीमार पड़ने वाले अथवा चिकित्सकीय आपात स्थिति का सामना कर रहे श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित स्थानों और अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में 200 से अधिक लोगों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है, जबकि इस वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ क्षेत्र से ही 100 से अधिक लोगों को मेडिकल इमरजेंसी के तहत एयर रेस्क्यू सुविधा प्रदान की गई है।


कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने नवनियुक्त दायित्वधारियों को किया सम्मानित 

देहरादून। गोरखा कल्याण परिषद के अध्यक्ष ज्योति कोटिया तथा उत्तराखण्ड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष शमशेर सिंह बिष्ट को सरकार में दायित्व दिये जाने पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी। काबीना मंत्री ने कहा कि अनुभवी एवं समर्पित व्यक्तित्वों को विभिन्न दायित्व सौंपे जाने से राज्य के विकास और जनहित से जुड़े कार्यों को नई दिशा मिलेगी।

गुरुवार को अपने कैंप कार्यालय में आयोजित आभार कार्यक्रम के दौरान सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने गोरखा कल्याण परिषद के अध्यक्ष पद पर नियुक्त ज्योति कोटिया तथा उत्तराखण्ड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त शमशेर सिंह बिष्ट को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने दोनों पदाधिकारियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनके सफल कार्यकाल की कामना की। मंत्री जोशी ने विश्वास व्यक्त किया कि ज्योति कोटिया और शमशेर सिंह बिष्ट अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और समर्पण के साथ करेंगे तथा पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की समस्याओं के समाधान एवं कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मंत्री जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पूर्व सैनिक समुदाय से जुड़े अनुभवी लोगों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपना इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार उनके अनुभव, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति योगदान को महत्व देती है। उन्होंने कहा कि गोरखा समाज का उत्तराखण्ड के विकास, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वहीं पूर्व सैनिकों ने अपने अनुशासन, नेतृत्व और सेवा भावना के बल पर समाज में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। ऐसे में इन संस्थाओं के माध्यम से पूर्व सैनिकों, वीर नारियों तथा उनके परिवारों के हितों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

इस अवसर पर दोनों दायित्वधारियों ने सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह उसके अनुरूप कार्य करते हुए पूर्व सैनिक समुदाय, वीर नारियों और उनके परिवारों के हितों की रक्षा तथा उनके कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष प्रदीप रावत, पार्षद कमली भट्ट, वंदना बिष्ट, सुरेंद्र राणा, दिनेश प्रधान, किरण, गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदमसिंह थापा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे


मालवीय नगर अग्निकांड: होटल मालिक लवकेश बजाज चार दिन की पुलिस रिमांड पर

नई दिल्ली। दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए होटल ‘फ्लोरिश स्टेज’ के मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को बृहस्पतिवार को साकेत कोर्ट में पेश किया गया, जहां मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने अदालत से आरोपी की पुलिस कस्टडी की मांग करते हुए कहा कि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच अभी बाकी है। पुलिस का कहना है कि घटना के कारणों, सुरक्षा मानकों और अन्य संबंधित तथ्यों की गहन पड़ताल के लिए आरोपी से पूछताछ आवश्यक है।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने पुलिस के तर्कों को सुनने के बाद चार दिन की रिमांड मंजूर कर ली। अब जांच टीम आरोपी से पूछताछ कर आग लगने की घटना से जुड़े तथ्यों और संभावित लापरवाही के पहलुओं की जानकारी जुटाएगी।

मालवीय नगर अग्निकांड को लेकर पहले से ही जांच जारी है और पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


मुख्यमंत्री ने 9.74 लाख लाभार्थियों को 176.59 करोड़ रूपये की पेंशन राशि हस्तांतरित की

राज्य स्तरीय जागरूकता कार्यशाला में नशा मुक्ति एवं वरिष्ठ नागरिक सम्मान की दिलाई शपथ

जन कल्याण और समामाजिक न्याय के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध- मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सर्वे चौक स्थित आई. आर.डी. टी सभागार में राज्य स्तरीय सामूहिक जागरूकता अभिमुखीकरण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के तहत माह मई 2026 की पेंशन वन क्लिक के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में हस्तांतरित की। 09 लाख 74 हजार 338 लाभार्थियों के खाते में कुल 176 करोड़ 59 लाख 24 हजार की धनराशि का हस्तांतरण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने नशा मुक्त अभियान एवं वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान और देखभाल की शपथ भी दिलाई। मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय सामूहिक जागरूकता कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यशाला सामाजिक कल्याण योजनाओं को समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव, देरी और बाधा के योजनाओं का लाभ प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र के साथ देश में जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना और मुफ्त राशन योजना जैसी योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ मिला है। वहीं स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम स्वनिधि, दीनदयाल अंत्योदय योजना और राष्ट्रीय आजीविका मिशन के माध्यम से वंचित वर्गों को स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक न्याय को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अंत्योदय परिवारों को प्रतिवर्ष तीन गैस सिलेंडर निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दिव्यांग कार्मिकों का वाहन भत्ता बढ़ाया गया है। स्वयं सहायता समूहों को ‘लखपति दीदी योजना’ एवं कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़कर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’, ‘मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना’, ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ तथा ‘अपणि सरकार पोर्टल’ के माध्यम से विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। राष्ट्रीय खेलों और जी-20 बैठकों के सफल आयोजन से उत्तराखंड को वैश्विक पहचान मिली है, जबकि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर रहे हैं। राज्य में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर माला मिशन पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। शारदा कॉरिडोर, ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर, यमुना कॉरिडोर, विवेकानंद कॉरिडोर एवं गोल्ज्यू कॉरिडोर पर भी कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की आर्थिकी डेढ़ गुना बढ़ी है तथा बीते एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले चार वर्षों में प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य की बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की रिकॉर्ड कमी आई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। राज्य का बजट आकार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। होम-स्टे, उद्योग, स्टार्टअप, हेलिपोर्ट एवं बिजली उत्पादन के क्षेत्र में दो से तीन गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) सूचकांक में उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। भारत सरकार के सार्वजनिक वित्तीय प्रदर्शन सूचकांक में विशेष श्रेणी राज्यों में उत्तराखंड दूसरे स्थान पर रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राज्य को ‘अचीवर्स’ तथा स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ श्रेणी प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून एवं सख्त भू-कानून लागू किए गए हैं। सरकार द्वारा 11 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद पिछले साढ़े चार वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चार सूत्रीय रणनीति पर बल देते हुए कहा कि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार, सरकारी प्रक्रियाओं का सरलीकरण, तकनीक का अधिकतम उपयोग तथा नियमित मॉनिटरिंग एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने आयोगों, परिषदों एवं समितियों के सदस्यों से जिलों और दूरस्थ क्षेत्रों का नियमित भ्रमण कर जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, भरत चौधरी, विधायक श्रीमती सविता कपूर, श्रीमती पार्वती दास, भूपाल राम टम्टा, सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र, विभिन्न्न आयोगों, परिषदों एवं समितियों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष मौजूद थे।


मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने किया बजरंग सेतु का निरीक्षण

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन व सचिव पंकज पांडे ने टिहरी गढ़वाल क्षेत्रांतर्गत तपोवन स्थित बजरंग सेतु का स्थलीय निरीक्षण किया । निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता ओम प्रकाश द्वारा सेतु की इंजीनियरिंग संरचना, तकनीकी विशेषताओं एवं निर्माण संबंधी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। मुख्य सचिव ने परियोजना की प्रगति एवं सुरक्षा मानकों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

मुख्य सचिव ने नरेंद्रनगर विकासखंड अंतर्गत प्लास्डा स्थित हिलान्स हिमालयन भोजनालय का निरीक्षण किया। हिलान्स हिमालयन भोजनालय की संचालक बीना पुंडीर द्वारा भोजनालय में प्रतिदिन आने वाले ग्राहकों एवं दैनिक बिक्री से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही रीप परियोजना से छह लाख, बैंक लोन तीन लाख एवं सीएलएफ कंट्रीब्यूशन एक लाख से अवगत कराया।

निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने भोजनालय परिसर के आसपास अधिकाधिक वृक्षारोपण सुनिश्चित करने तथा मेनू को स्पष्ट एवं सुव्यवस्थित रूप से डिस्प्ले करने के निर्देश दिए, जिससे पर्यटकों एवं आगंतुकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि स्थानीय स्तर पर पर्यटन एवं आजीविका से जुड़े ऐसे प्रयासों को और अधिक सशक्त किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिल सके।

इस निरीक्षण के दौरान डॉ पंकज कुमार पांडेय (सचिव लोक निर्माण विभाग, औद्योगिक , खनन एवं आयुष विभाग), जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल, एसएसपी श्वेता चौबे, तपोवन नगर पंचायत अध्यक्ष विनीता बिष्ट, एसडीएम नरेंद्रनगर आशीष घिडियाल, डीडीओ मो. असलम, ईओ तपोवन अंजलि, बीडीओ श्रुति वत्स आदि संबंधित उपस्थित रहे।


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