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राज्य सहकारी नीति-2026 को कैबिनेट से मिली मंजूरी

Category Archives: राष्ट्रीय

राज्य सहकारी नीति-2026 को कैबिनेट से मिली मंजूरी

ग्रामीण अर्थव्यवस्था व स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा

सात रणनीतिक स्तम्भों पर आधारित होगी नई सहकारी व्यवस्था

देहरादून- सूबे में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य कैबिनेट ने आज ‘उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026’ को मंजूरी दे ही है। इस नीति का उद्देश प्रदेश में सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास, स्थानीय उद्यमिता, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। सात रणनीतिक स्तम्भों पर आधारित यह नीति गांव-गांव में सहकारिता को बढ़ावा देने को व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है।

सहकारिता विभाग के अधिकारियों को मुताबिक राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025 की मूल भावना “सहकार से समृद्धि” को दृष्टिगत रखते हुये प्रदेश की सहकारिता नीति को तैयार किया गया है। जिसमें पर्वतीय क्षेत्रों की छोटी एवं सीमांत जोतें, बिखरी ग्रामीण आबादी, पलायन, सीमित औद्योगिकीकरण, जलवायु परिवर्तन तथा दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं की सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखा गया। नई नीति में सहकारिता को केवल ऋण वितरण की व्यवस्था तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्यमिता की मजबूती के लिये विशेष प्रबंध किये गये हैं।

सात रणनीतिक स्तंभों पर आधारित होगी नई सहकारी व्यवस्था
उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति-2026 को सात प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित किया गया है। इनमें सहकारिता की बुनियाद को मजबूत करना, सहकारी संस्थाओं की जीवंतता, भविष्य के लिए तैयारी, समावेशिता एवं पहुंच का विस्तार, नए एवं उभरते क्षेत्रों में प्रवेश, सहकारिता से युवा पीढ़ी को जोड़ना तथा आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण प्रमुख हैं।

पैक्स बनेंगे बहुउद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र
नई नीति के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी पैक्स को केवल ऋण उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय, आत्मनिर्भर और व्यावसायिक ग्रामीण आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इनके माध्यम से कृषि उद्यान, डेयरी, बागवानी, मत्स्य, भंडारण, कोल्ड-चेन, प्राथमिक प्रसंस्करण, कृषि यंत्र किराया, बीमा, पेंशन, डिजिटल बैंकिंग और अन्य ग्रामीण सेवाओं को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके अलावा हिमालयी उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए छोटे सहकारी उद्यमों को क्लस्टर मॉडल से जोड़ने पर भी विशेष जोर रहेगा।

सहकारिता में मिलेगा महिलाओं व युवाओं को नेतृत्व का अवसर
नीति में महिला और युवा भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक जनपद में महिला सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने, स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण एवं बाजार से जोड़ने तथा युवाओं के लिए सहकारी स्टार्टअप, इंटर्नशिप, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा तय की गई है। सहकारिता को युवाओं के लिए सम्मानजनक एवं आकर्षक करियर विकल्प बनाने के लिए प्रशिक्षण, शोध, प्रबंधन एवं आधुनिक कौशल विकास तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, स्वास्थ्य में सहकारिता का होगा विस्तार
नई नीति सहकारिता को पारंपरिक कृषि और ऋण व्यवस्था से आगे ले जाने का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके अंतर्गत सहकारी पर्यटन, होम-स्टे नेटवर्क, इको-टूरिज्म, एग्रो-टूरिज्म, आयुष, सौर ऊर्जा, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, कार्बन क्रेडिट, वन आधारित उत्पाद, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, स्वास्थ्य सेवाएं, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट लॉजिस्टिक्स, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहकारी मॉडल विकसित किए जाएंगे। राज्य-विशिष्ट पहल के रूप में “सहकार टैक्सी” के माध्यम से सदस्य-स्वामित्व वाली परिवहन सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की दिशा भी नीति में शामिल की गई है।

रोजगार व पलायन रोकने पर विशेष जोर
बाइब्रेंट विपेज प्रोग्राम को सहकारिता से जोड़ते हुए सीमांत एवं पर्वतीय गांवों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार और उद्यम विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य गांव में उत्पादित वस्तुओं का स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन कर उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। हब एंड स्पोक माॅडल के माध्यम से पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में सहकारी सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत किया जाएगा।

डिजिटल, पारदर्शी और आधुनिक होगी सहकारी व्यवस्था
नीति के तहत सहकारी संस्थाओं में कागजरहित कार्यप्रणाली, रियल-टाइम लेखांकन, डिजिटल बैंकिंग, नियमित वित्तीय एवं सामाजिक ऑडिट, पेशेवर प्रबंधन और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा दिया जाएगा। जिला सहकारी बैंकों में क्लाउड सीबीएस, पैक्स व बैंक एकीकरण तथा मोबाइल-फर्स्ट डिजिटल बैंकिंग जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

2026 से 2036 तक तीन चरणों में लागू होगा रोडमैप
उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति-2026 का क्रियान्वयन वर्ष 2026 से 2036 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। पहला चरण के तहत वर्ष 2026-27 तक विधिक सुधार, एमआईएस प्रशिक्षण, संस्थागत ढांचे और डिजिटलीकरण पर फोकस रहेगा। द्वितीय चरण में वर्ष 2028-31 तक ग्राम पंचायत स्तर तक सहकारी सेवाओं का विस्तार, मूल्य-श्रृंखला आधारित क्लस्टर तथा बहुउद्देशीय सहकारी सेवा नेटवर्क का विकास किया जायेगा। तीसरे चरण में वर्ष 2032-36 तक उत्तराखण्ड को पर्वतीय सहकारी उद्यमों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना तथा औषधीय उत्पाद, हस्तशिल्प, दुग्ध, मत्स्य एवं अन्य हिमालयी उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है।

नीति के माध्यम से राज्य में सशक्त एमपैक्स नेटवर्क, डिजिटल सहकारी इकोसिस्टम, महिला एवं युवा नेतृत्व में वृद्धि, सीमांत क्षेत्रों में रोजगार सृजन, पलायन में कमी और सहकारिता आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विस्तार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला एवं विभागीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था के साथ डिजिटल डैशबोर्ड आधारित मूल्यांकन प्रणाली विकसित की जाएगी।

बयान
राज्य कैबिनेट ने उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति 2026 को मंजूरी दे दी है। हमारा लक्ष्य केवल सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और सदस्य-केंद्रित संस्थाओं के रूप में विकसित करना है। सहकार से समृद्धि के मंत्र के साथ उत्तराखण्ड अपने विशिष्ट ‘हिमालयी सहकारिता मॉडल’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है।- डाॅ. धन सिंह रावत, सहकारिता मंत्री, उत्तराखंड।


मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में रक्षाबंधन व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग का विशेष अभियान

जिलाधिकारी के निर्देशन में पौड़ी व यमकेश्वर में खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 20 विधिक एवं सर्विलांस नमूने जांच के लिए भेजे गए

एक्सपायर्ड व बिना लेबल वाले खाद्य उत्पाद मौके पर नष्ट कराए, साफ-सफाई एवं भंडारण मानकों के पालन के दिए निर्देश

पौड़ी- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में आगामी रक्षाबंधन एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए जनपद में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन तथा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा विशेष जांच एवं प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण, नमूना संग्रहण तथा खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता एवं भंडारण संबंधी मानकों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

अभियान के तहत मंगलवार को पौड़ी मुख्य बाजार तथा यमकेश्वर के लक्ष्मणझूला-गीताभवन क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने प्रशासन के साथ संयुक्त रूप से विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान मिठाई, नमकीन, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, बिस्किट, सेवई सहित अन्य खाद्य पदार्थों के कुल 20 विधिक एवं सर्विलांस नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए। सभी नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अभियान के दौरान मिठाई एवं नमकीन के 10, दूध एवं दुग्ध उत्पादों के 2 तथा बिस्किट, सेवई सहित अन्य खाद्य पदार्थों के 8 नमूने लिए गए। टीमों ने मिठाई निर्माताओं, बेकरी सहित अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों के रख-रखाव एवं भंडारण संबंधी मानकों का भी निरीक्षण किया। प्रतिष्ठान संचालकों को स्वच्छता को प्राथमिकता देने तथा खाद्य पदार्थों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित परिस्थितियों में रखने के निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में बिना लेबल वाले बेकरी उत्पाद पाए गए, जिन्हें टीम द्वारा मौके पर ही नियमानुसार नष्ट कराया गया। इसके साथ ही एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री को भी अलग कर नियमानुसार नष्ट कराया गया। खाद्य कारोबारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि बिना लेबल, एक्सपायर्ड अथवा मानकों के विपरीत खाद्य सामग्री का विक्रय न किया जाए।

पौड़ी क्षेत्र में अभियान सहायक आयुक्त खाद्य पीसी जोशी, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी पौड़ी रचना लाल एवं प्रभारी नायब तहसीलदार जयकृष्ण भट्ट के नेतृत्व में चलाया गया। वहीं यमकेश्वर क्षेत्र में तहसीलदार वैभव जोशी एवं वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।

सहायक आयुक्त खाद्य ने बताया कि इससे पूर्व चलाए गए अभियान में विभिन्न खाद्य पदार्थों के कुल 10 नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए थे। इनमें विधिक जांच के लिए हल्दी पाउडर, धनिया मसाला, सोन पापड़ी, चाय पत्ती, ग्रीन चिली सॉस एवं स्प्राइट के एक-एक नमूने तथा सर्विलांस जांच के लिए सरसों तेल, नमकीन, बिस्किट एवं दूध के नमूने शामिल थे। इन नमूनों को भी प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया है।

विभाग द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत प्रवर्तन कार्रवाई भी की जा रही है। इस माह एडीएम कोर्ट में एक प्रकरण का निर्णय हुआ, जिसमें मावा विक्रेता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वर्तमान में एडीएम कोर्ट में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत 46 प्रकरण दर्ज हैं।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि त्योहारी सीजन को देखते हुए जनपद में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा को लेकर जांच एवं प्रवर्तन अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मावा, मिठाई सहित अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के साथ ही खाद्य प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, लेबलिंग एवं भंडारण संबंधी मानकों के अनुपालन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने खाद्य कारोबारियों से निर्धारित मानकों का पालन करने तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की।


आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और बाजार मूल्यों की नियमित निगरानी करें अधिकारी- मुख्यमंत्री

कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने और आम जनता को उचित दरों पर सामान उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को बाजार में वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रखने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के जरिए कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग समेत संबंधित विभागों को बाजार की स्थिति की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा कर उपभोक्ताओं से निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली नहीं होनी चाहिए। साथ ही मांग और आपूर्ति की स्थिति पर भी लगातार नजर रखते हुए जरूरत के अनुसार समयबद्ध कदम उठाने को कहा गया।

सभी जिलों में प्रशासन को नियमित बाजार निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान आवश्यक वस्तुओं के निर्धारित और प्रचलित बाजार भाव के साथ-साथ दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में उपलब्ध स्टॉक की भी जांच की जाएगी। कालाबाजारी, जमाखोरी या निर्धारित मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ता है। ऐसे में मूल्य नियंत्रण की व्यवस्था प्रभावी और पारदर्शी रहनी चाहिए। उन्होंने शासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को आपसी समन्वय से काम करते हुए बाजारों पर सतत निगरानी रखने तथा अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।


मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर में सड़क मरम्मत और सुधार कार्य युद्धस्तर पर शुरू किए जाएं- मुख्यमंत्री

देहरादून। प्रदेश में सड़कों की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति तथा उनके सुधार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में लोक निर्माण विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) समेत विभिन्न विभागों और संस्थाओं के अधीन आने वाली सड़कों के सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी पुरानी पीएमजीएसवाई सड़कों, जिनकी अनुरक्षण अवधि समाप्त हो चुकी है और नियमित रखरखाव नहीं हो पा रहा है, उनकी मरम्मत के लिए राज्य सरकार आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने पर विचार करेगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर में सड़क मरम्मत और सुधार कार्य युद्धस्तर पर शुरू किए जाएं। इसके लिए संबंधित विभाग अभी से तैयारियां पूरी करें और निविदा प्रक्रिया समय से पूरी कर लें, ताकि बारिश थमते ही निर्माण कार्य शुरू करने में कोई देरी न हो।

बैठक में नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों की सड़कों के सुधार पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय निकायों को सड़क सुधार के लिए आवश्यक संसाधन और धनराशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि शहरी क्षेत्रों की सड़कों को भी प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जा सके।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वह अक्टूबर से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का सड़क मार्ग से भ्रमण करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सड़क सुधार की समयबद्ध और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की शहरी और ग्रामीण सड़कों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा।


पटना में BPSC परीक्षा को लेकर जोरदार प्रदर्शन, सरकार से बातचीत की मांग पर अड़े अभ्यर्थी

परीक्षा में गड़बड़ी की जांच की उठी मांग

पटना। 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा को लेकर बिहार में छात्रों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्र गांधी मैदान से राजभवन की ओर मार्च करने निकले। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।

छात्र 70वीं BPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों की जांच की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उनकी मांगों पर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश

गांधी मैदान से मार्च शुरू होने के बाद प्रदर्शनकारी राजभवन की तरफ बढ़े। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर उन्हें प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से रोकने का प्रयास किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से निर्धारित क्षेत्र में ही रहने की अपील की। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्थिति में प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बातचीत के बाद भी नहीं बनी सहमति

DSP कामाख्या नारायण सिंह ने कहा कि छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की बातचीत सकारात्मक रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदर्शनकारी प्रशासन की अपील मानेंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि छात्र आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं तो पुलिस उन्हें रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

TRE-4 को लेकर भी छात्रों की नाराजगी

प्रदर्शन में शामिल छात्रों की मांगें केवल 70वीं BPSC परीक्षा तक सीमित नहीं हैं। कांग्रेस नेता सुशील कुमार ने कहा कि छात्र शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4.0 की प्रक्रिया में बदलाव की भी मांग कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि TRE-4 की परीक्षा सिंगल स्टेज में कराई जाए और नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था समाप्त की जाए।

उन्होंने सरकार से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री के साथ बातचीत का अवसर देने की मांग की। सुशील कुमार के मुताबिक, कई छात्र पिछले कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और सरकार को उनकी समस्याओं पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।

70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग

आंदोलनकारी छात्र 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने की मांग पर कायम हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और पेपर लीक से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसके साथ ही छात्र TRE-4 की परीक्षा प्रक्रिया और आधिकारिक विज्ञापन से जुड़ी स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी कर रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने सरकार से बातचीत की अपील की

BPSC विवाद के बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर छात्रों की मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील की है। उन्होंने सरकार से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की मांग की।

तेजस्वी यादव ने TRE-4 परीक्षा को एक चरण में कराने के साथ BPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में हिंदी भाषी अभ्यर्थियों से जुड़े कथित भेदभाव को खत्म करने की मांग भी उठाई।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग

तेजस्वी यादव ने BPSC, BSSC, सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने पिछली परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

उन्होंने लंबित भर्ती परीक्षाओं की तारीखों को लेकर स्पष्ट और समयबद्ध कैलेंडर जारी करने की भी मांग की। इस बीच छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए पटना में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है और पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से रोकने की कोशिश कर रही है।


सहसपुर में फिर शुरू होगी बंद पड़ी सिलाई यूनिट, ग्रामीण महिलाओं को मिलेंगे रोजगार के नए अवसर

आधुनिक मशीनों से लैस होगा सहसपुर का कॉमन फैसिलिटी सेंटर

देहरादून। जिला प्रशासन देहरादून की पहल से सहसपुर में लंबे समय से बंद पड़ी कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सिलाई यूनिट को अब दोबारा शुरू किया जा रहा है। आधुनिक मशीनों से लैस इस केंद्र के उद्घाटन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपी जाएगी, जिससे क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

सहसपुर ब्लॉक के निकट जिला उद्योग केंद्र में वर्ष 2024 में स्थापित की गई सिलाई यूनिट को अब आस्था कलेक्टर लेवल फेडरेशन, सहसपुर ब्लॉक को सौंपा गया है। केंद्र में करीब 25 से 30 आधुनिक सिलाई मशीनें उपलब्ध हैं। योजना के तहत महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें उत्पादन और बाजार से जोड़ा जाएगा।

विभिन्न उत्पाद तैयार करेंगी महिलाएं

शुरुआत में यूनिट का इस्तेमाल ग्रामीण महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण देने के लिए किया जाता था, लेकिन कुछ समय बाद इसका संचालन बंद हो गया। अब जिला प्रशासन ने इसे फिर से सक्रिय करते हुए कॉमन फैसिलिटी सेंटर के रूप में विकसित किया है। यहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जूट बैग, स्कूल ड्रेस, कार कवर, बाइक सीट कवर समेत कई अन्य उत्पाद तैयार करेंगी।

निजी कंपनियों से ऑर्डर दिलाने की तैयारी

प्रशासन की ओर से महिलाओं के उत्पादों की डिजाइन और गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही निजी कंपनियों से संपर्क कर स्वयं सहायता समूहों को नियमित ऑर्डर दिलाने की तैयारी है। भविष्य में सेलाकुई सहित आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से बड़े स्तर पर बल्क ऑर्डर प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। इससे महिलाओं को लगातार काम मिलने के साथ उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में अहम पहल

जिला प्रशासन का उद्देश्य महिलाओं को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें उत्पादन, बाजार और नियमित आय से जोड़ना है। आधुनिक मशीनों और बाजार की उपलब्धता से ग्रामीण महिलाएं अपने स्तर पर स्वरोजगार शुरू कर सकेंगी। प्रशासन को उम्मीद है कि यह केंद्र सहसपुर क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आधुनिक मशीनों का होगा बेहतर उपयोग : सीडीओ

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि सहसपुर का कॉमन फैसिलिटी सेंटर पहले प्रशिक्षण केंद्र के रूप में संचालित हो रहा था। अब इसे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के माध्यम से संचालित किया जाएगा और इसके लिए क्लस्टर का चयन भी कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र में उपलब्ध आधुनिक मशीनों का बेहतर उपयोग होगा और महिलाओं को जूट बैग, स्कूल ड्रेस समेत विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

आधुनिक मशीनें बढ़ाएंगी महिलाओं की आय

जिला परियोजना प्रबंधक रीप सोनम गुप्ता ने बताया कि सहसपुर बैरियर के पास जिला उद्योग केंद्र की ओर से स्थापित इस कॉमन फैसिलिटी सेंटर में आधुनिक सिलाई मशीनें उपलब्ध हैं। जिला प्रशासन की पहल पर अब इन मशीनों को स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सहसपुर ब्लॉक की कई ग्रामीण महिलाएं पहले से सिलाई के काम में दक्ष हैं। आधुनिक मशीनों और बेहतर बाजार उपलब्ध होने से उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।


मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने पर जोर, डीएम ने ईआरओ और बीएलओ को दिए सख्त निर्देश

एसआईआर कार्य में पारदर्शिता एवं शुद्धता के साथ करें नोटिसों की सुनवाई- डीएम

देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के तहत 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य की जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने समीक्षा की। कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित बैठक में मतदाताओं को जारी किए जा रहे नोटिस, उनकी सुनवाई, अनोमलीज और नो-मैपिंग से जुड़े मामलों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।

जिलाधिकारी ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिए कि वे राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठक और समन्वय बनाए रखें, ताकि एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित जरूरी जानकारी समय पर सभी पक्षों तक पहुंच सके। उन्होंने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के कार्यों की नियमित और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को भी कहा।

डीएम ने कहा कि अनोमलीज अथवा नो-मैपिंग की स्थिति सामने आने पर मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया जा रहा है। मतदाता आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत कर अपना पक्ष रख सकते हैं। दस्तावेजों के नियमानुसार परीक्षण और सत्यापन के बाद पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।

उन्होंने अधिकारियों और बीएलओ को निर्देशित किया कि मतदाताओं को एसआईआर प्रक्रिया, नोटिस की स्थिति, सुनवाई की प्रक्रिया और आवश्यक अभिलेखों के संबंध में स्पष्ट एवं सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। किसी भी मतदाता को प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक भ्रम या असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने दावे और आपत्तियों का निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाए तथा कार्य में पारदर्शिता, शुद्धता और समयबद्धता बनाए रखी जाए।

बैठक में डीएम ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी एसआईआर अभियान में प्रशासन और निर्वाचन तंत्र का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का शुद्ध एवं त्रुटिरहित होना निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ निर्धारित समयसीमा में एसआईआर से संबंधित कार्य पूरा करें।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली सहित सीपीआई(एम) से अनंत आकाश, कांग्रेस से डॉ. जसविन्दर सिंह, आम आदमी पार्टी से कमल राना और बहुजन समाज पार्टी से सतेन्द्र सिंह उपस्थित रहे। जनपद के सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े।


त्योहारी सीजन में मिलावटखोरी पर प्रशासन सख्त, मिठाई की दुकानों और डेयरी पर ताबड़तोड़ छापेमारी

मिलावटखोरों पर होगी कड़ी कार्रवाई

देहरादून। त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और लोगों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने संबंधित अधिकारियों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखने और मिलावटखोरी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि आमजन के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में जिले के छोटे-बड़े सभी खाद्य प्रतिष्ठानों, मिठाई की दुकानों, डेयरी, कैंटीन और रेस्टोरेंट में नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों में छापेमारी एवं निरीक्षण किया। टीम ने दुकानों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, साफ-सफाई, रख-रखाव और खाद्य सुरक्षा मानकों का जायजा लिया। इस दौरान विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए गए, जिन्हें नियमानुसार जांच के लिए भेजा जा रहा है।

अभियान के तहत आनंदम स्वीट्स, 5 स्टार, कोहली स्वीट्स, कालरा स्वीट्स समेत अन्य बड़े खाद्य एवं डेयरी प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। कार्रवाई के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री के नमूने संकलित किए गए।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि त्योहारी सीजन के दौरान सैंपलिंग और निरीक्षण की कार्रवाई लगातार जारी रखी जाए। जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिला प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि त्योहारी सीजन में मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री खरीदते समय गुणवत्ता, स्वच्छता और प्रतिष्ठान की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। किसी भी प्रकार की मिलावट या अनियमितता की जानकारी मिलने पर संबंधित विभाग को इसकी सूचना दें।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।


उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, देहरादून समेत चार जिलों में येलो अलर्ट

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। मंगलवार को भी प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, पिथौरागढ़, नैनीताल और बागेश्वर के कुछ हिस्सों में तेज बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार इन जिलों के अलावा प्रदेश के अन्य इलाकों में भी बारिश के तेज दौर देखने को मिल सकते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर सड़क और यातायात प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है।

पूर्वानुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम का मिजाज इसी तरह बना रह सकता है। 30 अगस्त तक कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


लापरवाह अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी, सीईओ ने SIR की समीक्षा में दिए सख्त निर्देश

देहरादून। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सोमवार को कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडल के आयुक्तों तथा देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। बैठक में दावे एवं आपत्तियों के निस्तारण की प्रगति और आगे की कार्ययोजना पर जिलेवार चर्चा की गई।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी दावे एवं आपत्तियों की नियमानुसार सुनवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए यथोचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिलाधिकारियों को राजनैतिक दलों और मीडिया के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के भी निर्देश दिए।

समीक्षा के दौरान सभी जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों से फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 के निस्तारण की प्रगति की जानकारी ली गई। सीईओ ने कहा कि जिन बूथों पर 4 प्रतिशत से अधिक परिवर्धन अथवा 2 प्रतिशत से अधिक अपमार्जन की संभावना है, वहां संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण एवं समीक्षा करते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप द्वारा हाल में किए गए जनपद भ्रमण का फीडबैक भी लिया। उन्होंने दोनों मंडलायुक्तों को लगातार फील्ड विजिट करते हुए SIR अभियान की प्रगति की निगरानी करने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित दोनों मंडलायुक्त और संबंधित जिलाधिकारी मौजूद रहे।


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