Friday, June 19th, 2026

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मऊ पोक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: 4 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले सद्दाम चूड़ीवाला को 20 साल की कठोर जेल

Daily Archives: 19/06/2026

मऊ पोक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: 4 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले सद्दाम चूड़ीवाला को 20 साल की कठोर जेल

मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की एक विशेष पोक्सो (POCSO) अदालत ने मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) छांगुर राम की अदालत ने 4 साल की मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा करने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी सद्दाम चूड़ीवाला को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास (कठोर कारावास) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी पर 23 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

यह सनसनीखेज मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 20 सितंबर 2019 को शहर कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली एक 4 वर्षीय अबोध बच्ची को अंधा मोड़ (भीटी) निवासी सद्दामू चूड़ीवाला बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था और उसके साथ इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने मामले की गहनता से विवेचना करने के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी।

 न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक विमल कुमार श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार मिश्रा और रामचंद्र चौहान ने दमदार पैरवी की। सरकारी वकीलों ने कोर्ट के सामने कुल 8 गवाहों को पेश कर आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत रखे। हालांकि, बचाव पक्ष ने दो गवाह पेश कर आरोपी को झूठा फंसाए जाने की दलील दी, जिसे अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर खारिज कर दिया।

विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद सद्दाम चूड़ीवाला को पोक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि दोषी 23 हजार रुपये का अर्थदंड नहीं चुकाता है, तो उसे 2 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, जुर्माना राशि जमा होने पर उसकी 75 प्रतिशत धनराशि पीड़ित मासूम बच्ची को बतौर मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया गया है।


टिहरी बांध में घटा पानी, बिजली उत्पादन प्रभावित

आयुषी

\उत्तराखंड के टिहरी बांध पर इस बार बढ़ती गर्मी और बारिश की कमी का असर साफ दिखाई देने लगा है। देश के प्रमुख जलविद्युत प्रोजेक्ट में शामिल टिहरी बांध की झील का जलस्तर लगातार घटते हुए न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। जलस्तर में आई इस गिरावट का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है, वहीं दूसरी ओर कई राज्यों को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने की चुनौती भी बढ़ गई है।गर्मी बढ़ने के साथ ही बारिश की कमी ने टिहरी झील की स्थिति को प्रभावित किया है। वर्तमान में झील का जलस्तर घटकर आरएल 742.79 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य दिनों में झील का अधिकतम जलस्तर आरएल 830 मीटर तक रहता है।

यानी इस समय झील का जलस्तर करीब 88 मीटर तक नीचे गिर चुका है।करीब 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली टिहरी झील में पानी की कमी का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। पानी की उपलब्धता कम होने के कारण टिहरी बांध और कोटेश्वर परियोजना से होने वाले विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है।सामान्य परिस्थितियों में टीएचडीसी द्वारा टिहरी और कोटेश्वर बांध से करीब 1000 से 1200 मेगावाट तक बिजली उत्पादन किया जाता है, लेकिन वर्तमान में पानी की कमी के कारण टिहरी बांध से लगभग 500 मेगावाट और कोटेश्वर बांध से करीब 200 मेगावाट ही बिजली उत्पादन हो पा रहा है।कम जलस्तर के चलते बांध प्रबंधन को टरबाइन संचालन में भी बदलाव करना पड़ा है।

जहां पहले चार टरबाइन संचालित की जाती थीं, वहीं अब पानी की उपलब्धता को देखते हुए केवल तीन टरबाइन चलाकर बिजली उत्पादन किया जा रहा है।टिहरी बांध से निकलने वाला पानी सिर्फ बिजली उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि कई राज्यों की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। गर्मी के मौसम में उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे राज्यों को सिंचाई और पीने के लिए पानी उपलब्ध कराना बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।

फिलहाल टिहरी झील से करीब 140 क्यूमेक्स पानी सिंचाई और पेयजल जरूरतों के लिए छोड़ा जा रहा है। वहीं झील में पानी की आवक भी लगातार कम बनी हुई है। भागीरथी नदी से करीब 126 क्यूमेक्स, भिलंगना नदी से 55 क्यूमेक्स और सहायक नदियों से करीब 54.32 क्यूमेक्स पानी ही पहुंच रहा है।टीएचडीसी अधिकारियों के अनुसार गर्मियों में जलस्तर कम होना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इस बार कम बारिश और बढ़ते तापमान के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मानसून आने के बाद झील का जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है, जिससे बिजली उत्पादन भी दोबारा सामान्य स्तर पर लौट सकता है।फिलहाल टिहरी झील का गिरता जलस्तर न सिर्फ बिजली उत्पादन के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह बदलते मौसम और बढ़ते जल संकट की ओर भी एक बड़ा संकेत दे रहा है।


हरिद्वार भूमि घोटाले में बड़ा प्रहार, 10 पर मुकदमा, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी की संस्तुति

धामी सरकार का भ्रष्टाचार पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह पर मेजर पनिशमेंट, एसडीएम की तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश

विजिलेंस जांच में धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप प्रथम दृष्टया साबित, सरकार का संदेश- ‘भ्रष्टाचारियों को नहीं मिलेगी राहत’

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति का कड़ा संदेश दिया है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में भूमि खरीद में गंभीर अनियमितताओं, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए जाने के बाद सरकार ने 10 लोगों के खिलाफ अभियोग दर्ज कराने का फैसला किया है। साथ ही तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त किए जाने की संस्तुति तथा तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट की कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मुख्यमंत्री धामी ने मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने को मंजूरी दे दी है। इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के सबसे कड़े कदमों में से एक माना जा रहा है।

इन 10 लोगों पर दर्ज होगा अभियोग
जांच में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्राण, संपत्ति लिपिक वेदपाल और मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनके अलावा भूमि विक्रेता सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ भी अभियोग दर्ज किया जाएगा। विजिलेंस जांच में सामने आया कि भूमि क्रय-विक्रय की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। जांच रिपोर्ट में इसे सुनियोजित अनियमितता और पद के दुरुपयोग का मामला माना गया है।

डीएम पर मेजर पनिशमेंट, एसडीएम भी नहीं बचे
सरकार ने तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) की संस्तुति की है। वहीं उस समय के एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार के अधीन सेवाओं से जुड़े अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

शुरुआत से सख्त रहे मुख्यमंत्री
हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरुआत से ही सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ियों के संकेत मिलने पर तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह और नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और वित्तीय ऑडिट के माध्यम से पूरे मामले की तह तक जाने का प्रयास किया गया। जांच पूरी होने के बाद अब सरकार ने दोषियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है।

भ्रष्टाचार पर कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोहराया है कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जनधन के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि वह जनहित और सरकारी धन के साथ खिलवाड़ करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।

हरिद्वार भूमि घोटाला : एक नजर में

1- 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी
2- पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की संस्तुति
3- तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह पर मेजर पनिशमेंट
4- तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की 3 वेतनवृद्धियां रोकी जाएंगी
5- विजिलेंस जांच में धोखाधड़ी और षड्यंत्र के आरोप प्रमाणित
6- मुख्यमंत्री धामी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई
7- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा।


विशेष गहन पुनरीक्षण -2026 की प्रगति पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों संग डीएम/डीईओ की बैठक सम्पन्न

जिले में 98.22 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित, 2.06 लाख से अधिक मतदाताओं का डिजिटाइजेशन पूर्ण

देहरादून- जनपद में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के सफल सम्पादनार्थ जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में आज जिला कार्यालय देहरादून में राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों, मंत्रियों, प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की प्रगति, मतदाता गणना प्रपत्र वितरण, डिजिटाइजेशन कार्य तथा राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए-1 एवं बीएलए-2 की स्थिति की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं त्रुटिरहित ढंग से सम्पन्न करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करने तथा मतदाताओं को गणना प्रपत्र भरने एवं समय पर उपलब्ध कराने के लिए जागरूक करने का आह्वान किया।

निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं राजनीतिक दलों की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक मतदान स्थल पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा बीएलए-2 की नियुक्ति की जा रही है। बैठक में बताया गया कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा 1,847, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा 1,765, तथा सीपीआई(एम) द्वारा 463 बीएलए-2 नियुक्त किए गए हैं। जिलाधिकारी ने अन्य राजनीतिक दलों से भी बीएलए-1 एवं बीएलए-2 की नियुक्ति कर सूची उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।

जिलाधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 08 जून से 07 जुलाई 2026 तक बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित किए जा रहे हैं। इसके उपरांत 14 जुलाई को प्रारूप निर्वाचक नामावली का प्रकाशन किया जाएगा तथा दावा एवं आपत्ति की प्रक्रिया पूर्ण कर 15 सितम्बर 2026 को अंतिम निर्वाचक नामावली प्रकाशित की जाएगी।

बैठक में अवगत कराया गया कि जनपद में कुल 13,76,813 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 17 जून 2026 तक 13,52,297 मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का 98.22 प्रतिशत है। साथ ही 2,06,444 मतदाताओं का डिजिटाइजेशन कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है।

विधानसभावार समीक्षा में चकराता विधानसभा में सर्वाधिक 99.46 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरण दर्ज किया गया, जबकि मसूरी विधानसभा में 99.83 प्रतिशत वितरण कार्य पूर्ण हो चुका है। जनपद में कुल 1,881 बीएलओ विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में कार्यरत हैं।

बैठक में बताया गया कि जिन मतदाताओं को गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें बीएलओ के माध्यम से प्रपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसे मतदाता जो अपने पते पर उपलब्ध नहीं मिल रहे हैं, उनके संबंध में बीएलओ द्वारा नियमानुसार सत्यापन की कार्रवाई की जाएगी। जिन मतदाताओं तक गणना प्रपत्र नहीं पहुँच पाया है, उनके संबंध में स्थानीय जांच के आधार पर कारणों का अभिलेखीकरण करते हुए अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा डुप्लीकेट प्रविष्टियों की सूची तैयार कर सार्वजनिक की जाएगी।

विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित शिकायतों एवं जानकारी के लिए जिला मुख्यालय में कंट्रोल रूम/हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है। हेल्प डेस्क के दूरभाष नंबर 0135-1950 एवं 0135-2726066 तथा मोबाइल नंबर 8273702146 पर संपर्क किया जा सकता है।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), निर्वाचन से जुड़े अधिकारी, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी/उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह, सीपीआईएम से अनंत आकाश, बीएसपी से सत्येन्द्र सिंह, सतेन्द्र चौपड़ा, बीजेपी से अरविन्द जैन, उमेश तिवारी, संदीप मुखर्जी, सत्यपाल, आम आदमी पार्टी से चौधरी रविन्द्र कुमार, अशोक सेमवाल, प्रभारी सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली आदि उपिस्थत रहे।


लुधियाना में प्रेमी जोड़े पर हमला, जान बचाने के लिए नहर में कूदे युवक-युवती

लुधियाना: पंजाब के लुधियाना में कूमकलां थाना क्षेत्र के अंतर्गत नीलो नहर पुल के पास दबंगई और हैवानियत का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां घात लगाए बैठे कुछ बदमाशों ने एक प्रेमी जोड़े का रास्ता रोककर उन पर जानलेवा हमला कर दिया। बदमाशों के चंगुल से अपनी आबरू और जान बचाने के लिए युवती ने चलती नहर में छलांग लगा दी। उसे डूबता देख उसका दोस्त भी पानी में कूद गया, लेकिन आरोपियों की दरिंदगी इसके बाद भी खत्म नहीं हुई।

 शिकायतकर्ता हरमनदीप सिंह ने बताया कि वह बुधवार को अपनी सहेली के साथ मोटरसाइकिल से गुजर रहा था, तभी कटाणी कलां गांव के दीपी, सुक्खी, रवि और उनके अज्ञात साथियों ने उन्हें घेर लिया। नहर में कूदने के बाद आरोपियों ने दोनों को पानी से बाहर खींचा और फिर किनारे पर लाते ही लोहे की रॉड और लाठियों से युवक (हरमनदीप) पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आने के कारण युवक अधमरा होकर बेहोश हो गया।

 आरोपी यहीं नहीं रुके; वे लहूलुहान युवक को एक ऑटो में डालकर सिटी सेंटर के सामने ले आए। घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित की बुजुर्ग मां जसविंदर कौर अपने बेटे की जान की भीख मांगने वहां पहुंचीं। जब मां ने बेटे को छुड़ाने की कोशिश की, तो बेरहम बदमाशों ने उनके साथ भी मारपीट और धक्का-मुक्की की, उन्हें सड़क पर घसीटा और सरेआम अपमानित किया। जाते-जाते आरोपी युवक का मोबाइल भी लूट ले गए।

घायल युवक की मां और उसके बयान के आधार पर थाना कूमकलां पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ आईपीसी/भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है और जल्द ही सभी दबंगों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।


त्रैमासिक लक्ष्य जल्द IFMS पोर्टल पर करें अपलोड, मुख्य सचिव ने विभागों को दिए निर्देश

वाइब्रेंट विलेज में आजीविका योजनाओं पर फोकस

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में विभिन्न विभागों के वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत केंद्र पोषित योजनाओं, वाह्य सहायतित योजनाओं, नाबार्ड और स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने त्रैमासिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए आईएफएमएस पोर्टल पर शीघ्र अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने वित्त विभाग को नाबार्ड के अंतर्गत पशुपालन, फिशरीज आदि आजीविका से संबंधित विभागों में बजट की कोई सीलिंग ना रखे जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आजीविका से संबंधित इन योजनाओं को वाइब्रेंट विलेज में भी अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए, ताकि इन क्षेत्रों में अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

मुख्य सचिव ने नियोजन और वित्त विभाग को सभी विभागों से समन्वय बनाते हुए लगभग 2 से 3 हज़ार करोड़ के प्रस्तावों को तैयार रखे जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि योजनाओं को शोर्ट लिस्ट करते हुए प्राथमिकता के आधार पर टेंटेटिव लिस्ट तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि विभागों द्वारा भी लगातार अच्छे प्रस्ताव तैयार करते हुए शासन को भेजे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किस योजना के लिए फंडिंग कहाँ से की जाएगी इस पर आगे विचार कर लिया जाएगा परंतु विभागों द्वारा प्रस्ताव तो लगातार तैयार किए जाने चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए आधारभूत संरचनाओं के विकास में विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए नाबार्ड के अंतर्गत ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (RIDF) के तहत की जा सकती है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग को स्कूल और अस्पताल भवनों को सुदृढ़ किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को सौंग और जमरानी बांध निर्माण कार्य की फाइनेंसियल टाइमलाइन तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टाइमलाइन निर्धारित कर लगातार मॉनिटरिंग की जाए ताकि टाइमलाइन का अनुपालन किया जा सके।

मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग और उत्तराखण्ड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण UREDA को पीएम कुसुम प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान अभियान का लाभ अधिक से अधिक किसानों को पहुँचाये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए प्रमुख सचिव ऊर्जा को सिंचाई और UREDA के साथ शीघ्र समन्वय बैठक आयोजित किये जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग को प्रदेश के चारधाम यात्रा मार्गों सहित अन्य सभी महत्त्वपूर्ण यात्रा मार्गों को ईवी चार्जिंग स्टेशन से संतृप्त किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा की प्रदेश में आने वाले पर्यटक अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल लेकर यात्रा कर सकें इसके लिए इन चार्जिंग स्टेशंस की लोकेशन को गूगल मैप पर भी प्रदर्शित किया जाए ताकि लोगों का लंबे पहाड़ी रास्तों पर इलेक्ट्रिक व्हीकल लाने का विश्वास पैदा हो सके।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, पीसीसीएफ कपिल लाल, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर. सी. पुरुषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ . वी. षणमुगम, डॉ. आर. राजेश कुमार, सी. रविशंकर, युगल किशोर पंत एवं डॉ. एस.एन. पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


महाराज के अथक प्रयासों से 12341.56 लाख की स्यूंसी झील की टेण्डरिंग प्रक्रिया शुरू

पौड़ी। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज के ड्रीम प्रोजेक्ट सतपुली झील निर्माण की स्वीकृति के पश्चात अब उनके विशेष प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र चौबट्टाखाल के अन्तर्गत विकासखण्ड बीरोंखाल में स्यूंसी झील जिसकी लागत 12341.56 लाख है की ई-टेण्डरिंग प्रक्रिया की भी शुरुआत हो चुकी है।

प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने कहा कि क्षेत्रीय जनता की मांग पर मुख्यमंत्री घोषणा के अन्तर्गत जनपद पौडी गढवाल के विकासखण्ड बीरोंखाल में पूर्वी नयार नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय स्यूंसी बैराज, जलाशय निर्माण की योजना भी अब शीघ्र ही धरातल पर उतारने जा रही है। उन्होंने प्रसन्नता जाहिर करते हुए इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है। जनपद मुख्यालय से लगभग 135 किमी० की दूरी पर एन०एच० 121 पर स्यूंसी बाजार के समीप बंगार झूला पुल के डाऊनस्ट्रीम में स्यूंसी बैराज 06 मी० ऊचाई एवं 60 मी0 चौड़ाई में प्रस्तावित है जिसमें 10×6.5मी0 के 6 नं० गेट प्रस्तावित किये गये है। बैराज के निर्माण से लगभग 0.700 किमी0 लम्बाई में झील का निर्माण होगा।

महाराज ने कहा कि प्रस्तावित स्यूंसी बैराज का निर्माण सिंचाई, पेयजल, मत्स्य, नौकायन एवं पर्यटन को विकसित करने हेतु किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैराज निर्माण के पश्चात् 44 हैक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा तथा 56 गांवों को निरंतर पेयजल आपूर्ति सम्भव हो सकेगी। बैराज के निर्माण से जल सवर्द्धन एवं जल संरक्षण भी किया जा सकेगा।

कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक महाराज ने बताया कि योजना की हाइड्रोलिक एवं स्ट्रेक्चर डिजाइन आई०आई०टी० रुड़की द्वारा उपलब्ध कराया गया है। स्यूंसी बैराज में प्रस्तावित टू लेन पुल व टू लेन एप्रोच रोड से बंगार ग्राम को राष्ट्रीय राजमार्ग-309 से जोडे जाने का प्राविधान है, जिससे कि पूर्वी नयार नदी के दांये तट पर स्थित बंगार, मंगरौ के ग्रामीणों को चिकित्सा, शिक्षा एवं आपातकालीन स्थितियों में बेहतर Connectivity प्राप्त हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि 12341.56 लाख की धनराशि से निर्मित होने वाली यह योजना शासन को स्वीकृति हेतु प्रेषित कर दी गयी है, जिस पर प्रशासनिक स्वीकृति एवं वित्तीय स्वीकृति की कार्यवाही गतिमान है, तथा स्वीकृति अपेक्षा में ई-टेण्डरिंग की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।


मुख्यमंत्री धामी से रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट

उत्तराखंड में रेल परियोजनाओं को गति देने पर जोर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। इस दौरान राज्य में रेलवे अवसंरचना के विस्तार, विभिन्न रेल परियोजनाओं की प्रगति तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में रेलवे कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण राज्य के समग्र विकास, पर्यटन, तीर्थाटन, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को राज्य की महत्वाकांक्षी और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए इसके कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना चारधाम यात्रा, विशेषकर बदरीनाथ और केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवागमन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाएगी।

बैठक में टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने बताया कि परियोजना का सर्वेक्षण और डीपीआर तैयार की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नवंबर 2026 तक इस परियोजना पर ठोस प्रगति दिखाई देगी। उन्होंने कर्णप्रयाग-बागेश्वर तथा किच्छा-खटीमा रेल लाइन परियोजनाओं को भी क्षेत्रीय संतुलित विकास और भविष्य की जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए इन पर आगे कार्रवाई करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में तीर्थाटन और पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाना आवश्यक है। उन्होंने गढ़वाल मंडल के देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की तथा कुमाऊँ मंडल के हल्द्वानी, काठगोदाम, रामनगर और टनकपुर रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने आगामी कुंभ और कांवड़ मेले के मद्देनजर हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेष सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से श्रद्धालुओं और यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव उपलब्ध कराया जा सकता है।

बैठक में हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण (डबल लाइन) की दिशा में प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण से राज्य में निवेश, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने कहा कि बैठक में जिन बिंदुओं पर चर्चा हुई है, उन पर पूरी गंभीरता के साथ कार्य किया जाएगा।
बैठक में सचिव बृजेश कुमार संत और अपर सचिव रीना जोशी भी मौजूद रहे।


मलेशिया से डिपोर्ट किए गए दो वांछित आरोपी पंजाब पुलिस की गिरफ्त में, आतंकी नेटवर्क की जांच तेज

चंडीगढ़-  पंजाब पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को देश विरोधी ताकतों के खिलाफ एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय कामयाबी मिली है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स’ (KZF) के दो मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादियों को मलेशिया से डिपोर्ट (प्रत्यर्पित) कराकर भारत लाया गया है। पंजाब पुलिस ने दोनों को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही अपनी हिरासत में ले लिया।

 पकड़े गए आतंकियों की पहचान अंबाला के गुरविंदर सिंह और पटियाला के मंजीत सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, ये दोनों आरोपी केजेडएफ (KZF) समर्थित उस खतरनाक आतंकी मॉड्यूल के मुख्य साजिशकर्ता हैं, जो पंजाब में ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (Dedicated Freight Corridor) लाइनों समेत रेलवे के बेहद जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की साजिश रच रहा था।

 गौरतलब है कि पंजाब पुलिस ने पहले भी इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। यह ग्रुप 23 जनवरी को फतेहगढ़ साहिब के सरहिंद के पास रेलवे फ्रेट कॉरिडोर लाइन पर हुए आईईडी (IED) धमाके और 27 अप्रैल को पटियाला के शंभू के पास उसी कॉरिडोर पर ब्लास्ट की नाकाम कोशिश के लिए जिम्मेदार था। उस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 4 आरोपियों को दबोचकर भारी मात्रा में आरपीजी (RPG) लॉन्चर, आरडीएक्स (RDX), आईईडी और हैंड ग्रेनेड बरामद किए थे।

जांच में खुलासा हुआ है कि मलेशिया में बैठे केजेडएफ के हैंडलर्स विदेशी खातों के जरिए पंजाब में सक्रिय गुर्गों तक आतंकी फंड पहुंचा रहे थे। ये दोनों आरोपी उसी टेरर फंडिंग नेटवर्क को संचालित कर रहे थे, जिसका मुख्य मकसद पंजाब की शांति और कानून-व्यवस्था को भंग करना था। 18 जून को दोनों आरोपियों को पटियाला की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इनके पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।


नंदग्राम में दिनदहाड़े फायरिंग, छात्र को लगी गोली, पांच हमलावर फरार

गाजियाबाद: दिल्ली से सटे गाजियाबाद के नंदग्राम इलाके में शुक्रवार दोपहर कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए सरेराह गैंगवार और फायरिंग की वारदात सामने आई है। नंदग्राम थाने के बिल्कुल नजदीक, व्यस्त 100 फुटा रोड पर स्थित एक होटल में खाना खाने आए छात्र तरुण भैया पर बाइक सवार बदमाशों ने दिनदहाड़े अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। इस हमले में एक गोली तरुण के दाएं हाथ (बाजू) में जा धंसी। वारदात के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आरोपी मौके से फरार हो गए।

 एसीपी नंदग्राम ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि दोपहर के समय दो बाइकों पर सवार होकर 5 युवक होटल पर पहुंचे। वहां पहले से खाना खा रहे तरुण और उसके साथी के साथ आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। जब तरुण ने इसका विरोध किया, तो दोनों गुट सड़क पर ही आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों तरफ से जमकर पथराव होने लगा। इसी बीच बाइक सवार युवकों ने अपनी पिस्टल निकालकर 3 से 4 राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें से एक गोली तरुण को लग गई।

 लहूलुहान हालत में छात्र तरुण को तुरंत एमएमजी (MMG) अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को पहले से जानते हैं और इनके बीच पुराना विवाद चल रहा है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही सभी हमलावर सलाखों के पीछे होंगे।


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