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भारत ने श्रीलंका को पहले टेस्ट मैच में 165 रन से हराया

Category Archives: खेल

भारत ने श्रीलंका को पहले टेस्ट मैच में 165 रन से हराया

मानव सुथार की फिरकी का कहर, 10 विकेट लेकर भारत को दिलाई शानदार जीत

नई दिल्ली। भारत ने अपने ऐतिहासिक 600वें टेस्ट मैच को यादगार बनाते हुए श्रीलंका को गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में 165 रन से हरा दिया। भारत की ओर से मानव सुथार ने दूसरी पारी में शानदार गेंदबाजी करते हुए छह विकेट झटके और श्रीलंका की पूरी टीम 206 रन पर सिमट गई। इस जीत के साथ शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है।

भारत ने श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रन का लक्ष्य रखा था। पांचवें दिन श्रीलंका ने चार विकेट पर 84 रन से आगे खेलना शुरू किया, लेकिन भारतीय गेंदबाजों के सामने उसकी पारी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। कप्तान धनंजय डिसिल्वा और सोनल दिनुषा ने पांचवें विकेट के लिए 95 रन जोड़कर कुछ देर भारतीय टीम को परेशान जरूर किया, लेकिन उनके आउट होते ही श्रीलंका की पारी बिखर गई।

धनंजय 59 रन बनाकर रवींद्र जडेजा का शिकार बने, जबकि सोनल दिनुषा 84 रन की पारी खेलकर आउट हुए। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने लगातार विकेट निकालते हुए श्रीलंका को 206 रन पर ऑलआउट कर दिया। मानव सुथार ने छह विकेट लिए, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा को दो और जडेजा तथा मोहम्मद सिराज को एक-एक सफलता मिली।

भारत ने पहली पारी में बनाए थे 462 रन

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने पहली पारी में 462 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 167 रन की बड़ी पारी खेली। उनके अलावा केएल राहुल ने 82 और ध्रुव जुरेल ने 51 रन बनाए।

जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर समाप्त हुई। सोनल दिनुषा ने 100 और निरोशन डिकवेला ने 80 रन बनाकर टीम को फॉलोऑन से बचाया। भारत को पहली पारी में 178 रन की बढ़त मिली।

दूसरी पारी में पंत ने संभाला मोर्चा

भारत की दूसरी पारी 193 रन पर समाप्त हुई। ऋषभ पंत ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 66 रन बनाए, जबकि देवदत्त पडिक्कल ने 44 और केएल राहुल ने 35 रन का योगदान दिया। कप्तान शुभमन गिल आठ रन बनाकर आउट हुए।

पहली पारी की बढ़त को मिलाकर भारत ने श्रीलंका के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा। श्रीलंकाई गेंदबाजों में असिथा फर्नांडो ने चार विकेट लिए, जबकि प्रभात जयसूर्या को तीन सफलता मिलीं।

गॉल में भारत ने दोहराया 2017 का प्रदर्शन

इस जीत के साथ भारत ने गॉल में लगातार दूसरी टेस्ट जीत दर्ज की है। इससे पहले भारतीय टीम ने जुलाई 2017 में इसी मैदान पर श्रीलंका को 304 रन से हराया था। गॉल में भारत और श्रीलंका के बीच अब तक छह टेस्ट हुए हैं, जिनमें दोनों टीमों ने तीन-तीन मुकाबले जीते हैं।

गौर करने वाली बात यह भी है कि 2014 के बाद गॉल में खेले गए 28 टेस्ट मैचों में केवल एक मुकाबला ड्रॉ रहा है। बाकी मैचों में हार-जीत का फैसला हुआ है।

मानव सुथार बने जीत के हीरो

भारत की जीत में मानव सुथार का प्रदर्शन सबसे खास रहा। उन्होंने पूरे मैच में 10 विकेट अपने नाम किए। पहली पारी में सुथार ने चार विकेट लिए थे, जबकि दूसरी पारी में छह बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा।

हालांकि मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले देवदत्त पडिक्कल को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने पहली पारी में 167 रन बनाने के बाद दूसरी पारी में भी 44 रन की उपयोगी पारी खेली।

अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का दूसरा और आखिरी टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा। भारत की नजरें सीरीज जीतकर श्रीलंका दौरे का शानदार अंत करने पर होंगी।


उत्तराखंड में सितंबर से शुरू होगा खेल महाकुंभ-2026, न्याय पंचायत से राज्य स्तर तक होंगी प्रतियोगिताएं

खेल महाकुम्भ-2026 की विस्तृत कार्ययोजना जारी

देहरादून। उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं को मंच देने के लिए खेल महाकुंभ-2026 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत ‘खेल महाकुंभ-2026- मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी’ के आयोजन का कार्यक्रम तय कर दिया है। प्रतियोगिताएं न्याय पंचायत से लेकर विधानसभा, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तर तक आयोजित की जाएंगी।

न्याय पंचायत स्तर की स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताएं 1 से 10 सितंबर तक होंगी। इसके बाद 11 से 20 सितंबर के बीच विधानसभा स्तर पर विधायक चैंपियनशिप ट्रॉफी, 21 से 30 सितंबर तक संसदीय क्षेत्र स्तर पर सांसद चैंपियनशिप ट्रॉफी और 10 सितंबर से 30 अक्टूबर तक राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

इन खेलों में प्रतिभाग करेंगे खिलाड़ी

न्याय पंचायत स्तर पर अंडर-14 और अंडर-19 बालक-बालिका वर्ग में कबड्डी, एथलेटिक्स, खो-खो और मुर्गा झपट जैसी प्रतियोगिताएं होंगी। विधानसभा स्तर पर वॉलीबाल और पिट्टू सीधे तथा न्याय पंचायत स्तर से चयनित खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

संसदीय क्षेत्र स्तर पर मलखंभ, रस्साकशी, गोली-कंचा, फुटबाल और बैडमिंटन की प्रतियोगिताएं होंगी। इनमें कुछ प्रतियोगिताओं में सीधे प्रतिभागिता होगी, जबकि अन्य में विधानसभा स्तर से चयनित खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।

राज्य स्तर पर इन खेलों पर रहेगा फोकस

राज्य स्तर पर जूडो, बॉक्सिंग, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, कराटे, बास्केटबाल, हॉकी, हैंडबाल, योगासन, तैराकी, तीरंदाजी, फेंसिंग, कुश्ती, पेंचक सिलाट, पावरलिफ्टिंग, वेटलिफ्टिंग, बेसबाल और लॉन टेनिस समेत कई खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

इसके अलावा महिला ओपन वर्ग और दिव्यांगजन महिला-पुरुष ओपन वर्ग के लिए भी विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं निर्धारित की गई हैं। निदेशक युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल दीप्ति सिंह की ओर से आयोजन को लेकर विस्तृत कार्ययोजना जारी की गई है। उन्होंने संबंधित विभागों से प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन में सहयोग की अपेक्षा की है।

ग्रामीण प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि खेल महाकुंभ का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं की खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है। इसके जरिए ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराने के साथ ही खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।


भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज का आगाज कल से, स्पिन ट्रैक पर टीम इंडिया के सामने बड़ी चुनौती

नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगा। इसके बाद दोनों टीमें 23 अगस्त से कोलंबो में दूसरे टेस्ट में आमने-सामने होंगी। गॉल टेस्ट भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे शुरू होगा। भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रीलंकाई परिस्थितियों और स्पिन गेंदबाजों से निपटने की होगी।

गॉल की पिच पर मैच आगे बढ़ने के साथ स्पिनरों को मदद मिलने की संभावना रहती है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक और धैर्य की कड़ी परीक्षा होगी। हाल के टेस्ट मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजों को स्पिन के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा है। न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में मिली निराशा के बाद टीम इंडिया अब श्रीलंका दौरे पर वापसी की कोशिश करेगी।

गंभीर के लिए भी अहम होगा दौरा

श्रीलंका के खिलाफ यह टेस्ट सीरीज मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीमित ओवरों के क्रिकेट में टीम इंडिया ने उनके कार्यकाल में कई बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है।

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र में भारत को अब अपने बचे हुए मुकाबलों में लगातार बेहतर प्रदर्शन करना होगा। ऐसे में श्रीलंका दौरा टीम के लिए अपनी टेस्ट रणनीति को मजबूत करने का अहम अवसर है।

गॉल में आसान नहीं होगी राह

गॉल में श्रीलंका का रिकॉर्ड मेहमान टीमों के लिए चिंता का विषय रहा है। यहां घरेलू टीम को स्पिन गेंदबाजों का फायदा मिलता रहा है। मुथैया मुरलीधरन और रंगना हेराथ के दौर के बाद भी श्रीलंका के पास प्रभात जयसूर्या और रमेश मेंडिस जैसे प्रभावी स्पिनर मौजूद हैं।

भारतीय बल्लेबाजों के लिए इन दोनों से निपटना बड़ी चुनौती होगी। टीम इंडिया के पास हालांकि श्रीलंका में अच्छे प्रदर्शन का अनुभव है। 2017 में विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को टेस्ट सीरीज में 3-0 से हराया था।

गिल की कप्तानी में नई शुरुआत

शुभमन गिल की अगुआई वाली मौजूदा भारतीय टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ कई युवा चेहरे भी शामिल हैं। कप्तान गिल खुद बल्लेबाजी क्रम में टीम के लिए अहम भूमिका निभाएंगे। उनके अलावा केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल और देवदत्त पडिक्कल से बड़ी पारियों की उम्मीद होगी।

साई सुदर्शन के चोटिल होने के बाद पडिक्कल के नंबर तीन पर उतरने की संभावना मजबूत हुई है। अभ्यास मैच में शतक लगाकर उन्होंने अपनी दावेदारी भी मजबूत की है।

जुरेल या सरफराज पर नजर

मध्यक्रम में ध्रुव जुरेल और सरफराज खान के बीच चयन को लेकर भी चर्चा है। हालिया प्रदर्शन को देखते हुए टीम प्रबंधन जुरेल को मौका दे सकता है। ऋषभ पंत से भी टीम को बड़ी पारी की उम्मीद होगी। श्रीलंकाई स्पिनरों के खिलाफ मध्यक्रम का प्रदर्शन मैच का रुख तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

तीन स्पिनरों के साथ उतर सकती है टीम इंडिया

गॉल की परिस्थितियों को देखते हुए भारत तीन बाएं हाथ के स्पिनरों—रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार—के साथ मैदान में उतर सकता है। गेंदबाजी कोच मोर्ने मॉर्कल भी इस संयोजन को उपयोगी बता चुके हैं।

तेज गेंदबाजी में मोहम्मद सिराज का खेलना लगभग तय माना जा रहा है। उनके साथ प्रसिद्ध कृष्णा या गुरनूर बराड़ में से किसी एक को मौका मिल सकता है। अंतिम फैसला मैच के दिन लिया जाएगा।

श्रीलंका भी भारत को देने की कोशिश करेगा कड़ी टक्कर

मेजबान श्रीलंका भी इस सीरीज में मजबूत चुनौती पेश करना चाहेगा। टीम लंबे अंतराल के बाद टेस्ट क्रिकेट खेल रही है और कप्तान धनंजय डिसिल्वा पर टीम को एकजुट रखने की जिम्मेदारी होगी।

भारत और श्रीलंका दोनों ही टेस्ट क्रिकेट में खुद को मजबूत स्थिति में लाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में गॉल में होने वाला पहला मुकाबला दोनों टीमों के लिए सीरीज की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

भारत का स्क्वॉड: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन, आकिब नबी और सरफराज खान।

श्रीलंका का स्क्वॉड: धनंजय डिसिल्वा (कप्तान), लाहिरू उदारा, निशान मदुश्का, कामिंदु मेंडिस, दिनेश चांदीमल, पासिंदु सूरियाबंडारा, सोनल दिनूषा, निरोशन डिकवेला, रमेश मेंडिस, प्रभात जयसूर्या, केशारा नुवंथा, मिलन रत्नायके, असिथ फर्नांडो, लाहिरू कुमारा, विश्व फर्नांडो और दिलशान मदुशंका।


18 अगस्त से शुरू होगा सुब्रतो कप, दिल्ली-NCR और बेंगलुरु में सजेगा फुटबॉल का महासंग्राम

107 टीमें लेंगी हिस्सा

नई दिल्ली। देश के प्रतिष्ठित स्कूली फुटबॉल टूर्नामेंट सुब्रतो कप इंटरनेशनल फुटबॉल टूर्नामेंट का 65वां संस्करण इस बार बड़े स्तर पर आयोजित होने जा रहा है। प्रतियोगिता के मुकाबले 18 अगस्त से 24 सितंबर तक नई दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु के विभिन्न मैदानों पर खेले जाएंगे। टूर्नामेंट के आयोजन की औपचारिक घोषणा एयर मार्शल एस. शिवकुमार वीएसएम की मौजूदगी में की गई। इस संस्करण में देशभर के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की 107 टीमें भाग लेंगी। इसके अलावा श्रीलंका की टीम अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी के रूप में टूर्नामेंट में हिस्सा लेगी। तीन आयु वर्गों में 215 से अधिक मुकाबले खेले जाने हैं।

तीन आयु वर्गों में होगी खिताबी जंग

इस बार सुब्रतो कप में अंडर-17 जूनियर गर्ल्स, अंडर-15 सब-जूनियर बॉयज और अंडर-17 जूनियर बॉयज वर्ग में मुकाबले होंगे। सबसे पहले 18 अगस्त से नई दिल्ली-एनसीआर में जूनियर गर्ल्स अंडर-17 के मैच शुरू होंगे, जो 27 अगस्त तक चलेंगे।

इसके बाद 1 से 9 सितंबर तक बेंगलुरु में सब-जूनियर बॉयज अंडर-15 वर्ग के मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। टूर्नामेंट का समापन चरण 15 से 24 सितंबर तक नई दिल्ली-एनसीआर में जूनियर बॉयज अंडर-17 वर्ग के मुकाबलों के साथ होगा।

युवा खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा मंच

एयर मार्शल एस. शिवकुमार, जो एयर ऑफिसर-इन-चार्ज एडमिनिस्ट्रेशन और सुब्रतो मुखर्जी स्पोर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी के उपाध्यक्ष हैं, ने कहा कि भारतीय वायु सेना और एसएमएसईएस का उद्देश्य हर वर्ष प्रतियोगिता को नए स्तर तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि सुब्रतो कप युवा फुटबॉल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराता है।

उन्होंने प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई करने वाली सभी टीमों को शुभकामनाएं दीं और खिलाड़ियों से खेल भावना तथा अनुशासन के साथ मैदान पर उतरने की अपील की। कार्यक्रम में भारतीय फुटबॉलर आशालता देवी लोइतोंगबम गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में मौजूद रहीं।

इन मैदानों पर होंगे मुकाबले

नई दिल्ली-एनसीआर में मुकाबले अंबेडकर स्टेडियम, तेजस फुटबॉल ग्राउंड, सुब्रतो पार्क फुटबॉल ग्राउंड, पिंटो पार्क फुटबॉल ग्राउंड और राजोकरी फुटबॉल ग्राउंड में खेले जाएंगे।

वहीं बेंगलुरु में एयर फोर्स स्कूल जलाहल्ली, एयर फोर्स स्कूल येलाहंका और सुब्रतो फुटबॉल ग्राउंड जलाहल्ली को मुकाबलों के लिए चुना गया है।

प्रतियोगिता का शेड्यूल
जूनियर गर्ल्स अंडर-17: 18 से 27 अगस्त
सब-जूनियर बॉयज अंडर-15: 1 से 9 सितंबर
जूनियर बॉयज अंडर-17: 15 से 24 सितंबर

इस संस्करण में बड़ी संख्या में टीमों की भागीदारी और 215 से अधिक मुकाबलों के चलते सुब्रतो कप युवा फुटबॉल प्रतिभाओं के लिए एक बड़ा प्रतिस्पर्धी मंच बनने जा रहा है।


मिचेल मार्श ने रचा इतिहास, एक साल में 1500 टी20 रन बनाने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई खिलाडी बने

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के टी20 कप्तान मिचेल मार्श का बल्ला साल 2026 में लगातार जमकर बोल रहा है। दुनियाभर की टी20 लीग में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का जलवा दिखा रहे मार्श ने अब एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। वह एक कैलेंडर वर्ष में 1500 टी20 रन का आंकड़ा पार करने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने यह कारनामा द हंड्रेड में सनराइजर्स लीड्स की ओर से खेलते हुए किया।

वेल्श फायर के खिलाफ सोमवार को लीड्स में खेले गए मुकाबले में मार्श ने महज 34 गेंदों में 50 रन की तेज पारी खेली। उनकी इस पारी के साथ ही 2026 में उनके टी20 रनों की संख्या बढ़कर 1502 रन हो गई। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के टिम डेविड का पिछला रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

टिम डेविड का रिकॉर्ड हुआ ध्वस्त

ऑस्ट्रेलिया की ओर से एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा टी20 रन बनाने का रिकॉर्ड इससे पहले टिम डेविड के नाम था। उन्होंने 2022 में कुल 73 टी20 मुकाबले खेलते हुए सात अलग-अलग टीमों का प्रतिनिधित्व किया था और 1461 रन बनाए थे। अब मार्श ने इस आंकड़े को पार करते हुए नया ऑस्ट्रेलियाई रिकॉर्ड कायम कर दिया है।

मार्श ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए खेलने के अलावा दुनिया की कई बड़ी फ्रेंचाइजी टी20 प्रतियोगिताओं में भी नजर आते हैं। उनकी तेजतर्रार बल्लेबाजी और बड़े शॉट लगाने की क्षमता उन्हें टी20 क्रिकेट में एक प्रभावशाली खिलाड़ी बनाती है।

आईपीएल से लेकर द हंड्रेड तक मचाया धमाल

2026 में मिचेल मार्श के प्रदर्शन पर नजर डालें तो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए सात टी20 मैचों में 230 रन बनाए हैं। वहीं आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स की तरफ से खेलते हुए उन्होंने 13 मुकाबलों में 563 रन बनाए।

इसके अलावा बिग बैश लीग में पर्थ स्कॉर्चर्स के लिए मार्श ने आठ मैचों में 335 रन जोड़े। द हंड्रेड के मौजूदा सीजन में भी उनका बल्ला खूब चला है। अब तक सात मुकाबलों में वह 374 रन बना चुके हैं। इन सभी टूर्नामेंटों के प्रदर्शन को जोड़ने के बाद उनके 2026 के टी20 रनों का आंकड़ा 1500 के पार पहुंच गया है।

द हंड्रेड में भी बड़ा रिकॉर्ड निशाने पर

मिचेल मार्श के पास अब द हंड्रेड के एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम करने का भी मौका है। फिलहाल यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के बल्लेबाज जेम्स विंस के नाम दर्ज है, जिन्होंने 2024 में सदर्न ब्रेव के लिए खेलते हुए एक सीजन में 424 रन बनाए थे।

मार्श मौजूदा सीजन में 374 रन बना चुके हैं और विंस के रिकॉर्ड से महज 50 रन दूर हैं। अगर वह आगामी मुकाबलों में 51 रन और जोड़ लेते हैं, तो द हंड्रेड के एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे।

इस तरह मिचेल मार्श के पास 2026 में दो बड़े रिकॉर्ड अपने नाम करने का शानदार मौका है। एक ओर वह ऑस्ट्रेलिया के लिए एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक टी20 रन बनाने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं, वहीं अब उनकी नजर द हंड्रेड के सीजन रिकॉर्ड पर है।


55 साल, 5000 मैच और अनगिनत रिकॉर्ड… जानिए कैसे बदलता गया पुरुष वनडे क्रिकेट का रोमांच

भारत के नाम सबसे ज्यादा मुकाबले

नई दिल्ली। पुरुष वनडे क्रिकेट ने अपने इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज कर ली है। स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच शुक्रवार को खेले गए मुकाबले के साथ ही वनडे क्रिकेट में 5000 मैच पूरे हो गए। जनवरी 1971 में शुरू हुआ यह फॉर्मेट अब 55 साल का सफर तय कर चुका है। इस दौरान वनडे क्रिकेट ने कई बदलाव देखे और कई बार इसके भविष्य को लेकर सवाल भी उठे, लेकिन यह आज भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अहम हिस्सा बना हुआ है।

टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत वनडे से करीब 94 साल पहले, 1877 में हुई थी। वहीं टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट का पहला मुकाबला 2005 में खेला गया। जहां टेस्ट अभी 3000 मैचों के आंकड़े तक नहीं पहुंचा है, वहीं टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले 4000 का आंकड़ा पार कर चुके हैं। वनडे ने इस बीच 5000 मैचों का ऐतिहासिक पड़ाव छू लिया है।

24 साल में हुए पहले 1000 मैच

वनडे क्रिकेट के शुरुआती दौर में 1000 मुकाबले पूरे करने में 24 साल लगे। 1995 में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच नॉटिंघम में खेला गया मुकाबला 1000वां वनडे था। इसके बाद खेल की लोकप्रियता बढ़ती गई और अगले 4000 मैच महज 31 साल में खेले गए।

दूसरे 1000 वनडे पूरे होने में सिर्फ आठ साल लगे। 2007 में एक कैलेंडर वर्ष में 191 वनडे खेले गए थे। यह रिकॉर्ड 2023 में टूट गया, जब वनडे विश्व कप वाले साल में 218 मुकाबले खेले गए। हालांकि, पांचवें 1000 मैचों के दौर में 3065 दिन लगे। कोरोना महामारी, टी20 लीग की बढ़ती लोकप्रियता और द्विपक्षीय सीरीज के छोटे होने जैसे कारणों से वनडे मैचों की संख्या प्रभावित हुई।

बल्लेबाजों का बढ़ा दबदबा, स्कोरिंग रेट में इजाफा

समय के साथ वनडे क्रिकेट में रन बनाने की रफ्तार भी तेज हुई है। पहले 1000 मैचों में पहली पारी का औसत स्कोर 213.90 रन था, जो दूसरे दौर में बढ़कर 232.62 और तीसरे में 240.43 रन हो गया। चौथे 1000 मैचों में यह आंकड़ा 250.68 तक पहुंचा। हालांकि, पांचवें दौर में मामूली गिरावट के साथ औसत 249.97 रन रहा।

बड़े स्कोर भी अब वनडे का नियमित हिस्सा बन चुके हैं। हाल के 1000 मैचों में 300 या उससे ज्यादा रन के 321 स्कोर बने। इनमें 86 बार टीमों ने 350 रन का आंकड़ा पार किया, जबकि 14 बार स्कोर 400 के पार पहुंचा।

छक्कों की संख्या तीन गुने से ज्यादा

वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजी के आक्रामक अंदाज का अंदाजा छक्कों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। शुरुआती 1000 मुकाबलों में 2729 से ज्यादा छक्के लगे थे, जबकि 4001 से 4998वें मैचों के दौर में यह संख्या बढ़कर 9274 हो गई।

हाल के 1000 मैचों में प्रति मुकाबला औसतन 9.29 छक्के लगे। वहीं शुरुआती दौर में यह आंकड़ा काफी कम था। बल्लेबाजी औसत भी पहले 1000 मैचों के 26.39 से बढ़कर हालिया दौर में 29.03 हो गया है। स्ट्राइक रेट 66.15 से बढ़कर 83.4 तक पहुंच चुका है।

हेंस और अकरम से लेकर होप और जैम्पा तक

वनडे के अलग-अलग दौर में अलग-अलग खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। शुरुआती 1000 मैचों में डेसमंड हेंस 8648 रन के साथ शीर्ष बल्लेबाज रहे। इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने 9149 रन बनाकर यह स्थान हासिल किया।

गेंदबाजी में शुरुआती दौर में वसीम अकरम 273 विकेट के साथ सबसे आगे थे। बाद में मुथैया मुरलीधरन ने उन्हें पीछे छोड़ा और आज भी वनडे में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।

हालिया 1000 वनडे में शाई होप 5391 रन के साथ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे, जबकि एडम जैम्पा 156 विकेट के साथ शीर्ष गेंदबाज रहे।

सबसे ज्यादा वनडे खेलने वाली टीम भारत

टीमों के रिकॉर्ड की बात करें तो भारत ने सबसे ज्यादा 1081 वनडे मुकाबले खेले हैं। इनमें टीम को 575 मैचों में जीत मिली है। ऑस्ट्रेलिया 1025 मैचों में 619 जीत के साथ सबसे सफल टीम है। पाकिस्तान ने 1002 मैचों में 529 जीत दर्ज की हैं।

विदेशी मैदानों पर भी भारत का रिकॉर्ड मजबूत रहा है। भारत ने 695 वनडे बाहर खेलते हुए 340 मुकाबले जीते हैं। वहीं घरेलू मैदान पर भारत ने 386 मैचों में 235 जीत हासिल की हैं।

विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा

वनडे विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया सबसे सफल टीम है। उसने अब तक छह बार विश्व कप का खिताब जीता है। ऑस्ट्रेलिया ने 1987, 1999, 2003, 2007, 2015 और 2023 में ट्रॉफी अपने नाम की।

भारत और वेस्टइंडीज दो-दो बार विश्व चैंपियन बन चुके हैं। इंग्लैंड, पाकिस्तान और श्रीलंका ने एक-एक बार विश्व कप जीता है।

रोहित शर्मा के नाम सबसे बड़ी पारी

वनडे क्रिकेट में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिकॉर्ड भारतीय बल्लेबाज रोहित शर्मा के नाम है। उन्होंने 2014 में श्रीलंका के खिलाफ 264 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। यह रिकॉर्ड आज भी कायम है।

इस सूची में मार्टिन गप्टिल 237 नाबाद रन के साथ दूसरे, वीरेंद्र सहवाग 219 रन के साथ तीसरे और क्रिस गेल 215 रन के साथ चौथे स्थान पर हैं।

चामिंडा वास का गेंदबाजी रिकॉर्ड कायम

एक वनडे पारी में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड श्रीलंका के चामिंडा वास के नाम है। उन्होंने 2001 में जिम्बाब्वे के खिलाफ सिर्फ 19 रन देकर आठ विकेट लिए थे। वनडे में यह अब तक का इकलौता आठ विकेट वाला गेंदबाजी प्रदर्शन है।

सबसे ज्यादा वनडे विकेट लेने वालों की सूची में मुथैया मुरलीधरन 534 विकेट के साथ शीर्ष पर हैं। वसीम अकरम 502 विकेट के साथ दूसरे और वकार यूनिस 416 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर हैं।

सबसे ज्यादा रन सचिन के नाम, शतकों में कोहली आगे

वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम है। उन्होंने 463 मैचों में 18,426 रन बनाए हैं। विराट कोहली 14,941 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं।

हालांकि, सबसे ज्यादा वनडे शतक लगाने के मामले में विराट कोहली अब सचिन तेंदुलकर से आगे निकल चुके हैं। कोहली के नाम 54 शतक हैं, जबकि सचिन ने 49 शतक लगाए हैं। रोहित शर्मा 34 शतकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं।

31 गेंदों में शतक का रिकॉर्ड

वनडे में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स के नाम है। उन्होंने 2015 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सिर्फ 31 गेंदों में शतक जड़ा था। इसी मुकाबले में उन्होंने 16 गेंदों में अर्धशतक भी पूरा किया था।

सबसे तेज अर्धशतक के मामले में भी डिविलियर्स 16 गेंदों के साथ शीर्ष पर हैं। मैथ्यू फोर्ड ने 2025 में 16 गेंदों में अर्धशतक लगाकर इस रिकॉर्ड की बराबरी की।

कप्तानी में पोंटिंग सबसे आगे

वनडे में कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग के नाम है। उन्होंने 230 मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी करते हुए 165 मुकाबले जीते।

भारत की ओर से एमएस धोनी सबसे सफल कप्तान हैं। धोनी ने 200 वनडे में कप्तानी की और 110 मैचों में टीम को जीत दिलाई।


महिला टी20 एशिया कप 2026 का शेड्यूल जारी

जानिए कब होगा भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला

नई दिल्ली। महिला टी20 एशिया कप 2026 का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) द्वारा घोषित शेड्यूल के अनुसार टूर्नामेंट का आयोजन 28 अगस्त से 13 सितंबर तक दुबई में होगा। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत थाईलैंड के खिलाफ करेगी, जबकि क्रिकेट प्रेमियों की नजरें भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज मुकाबले पर टिकी रहेंगी।

एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) ने महिला टी20 एशिया कप 2026 के मुकाबलों का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इस बार आठ टीमें खिताब के लिए चुनौती पेश करेंगी और सभी मुकाबले दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे। भारत को ग्रुप-ए में पाकिस्तान, थाईलैंड और हांगकांग (चीन) के साथ रखा गया है, जबकि ग्रुप-बी में मौजूदा चैंपियन श्रीलंका, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और मेजबान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं।

भारतीय टीम अपने अभियान का आगाज 30 अगस्त को थाईलैंड के खिलाफ करेगी। इसके बाद 3 सितंबर को उसका मुकाबला हांगकांग (चीन) से होगा, जबकि बहुप्रतीक्षित भारत-पाकिस्तान मैच 5 सितंबर को खेला जाएगा। इस मुकाबले को टूर्नामेंट के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक माना जा रहा है।

टूर्नामेंट में सभी आठ टीमों को दो समूहों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक ग्रुप से शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। पहला सेमीफाइनल 10 सितंबर और दूसरा 11 सितंबर को खेला जाएगा, जबकि चैंपियन का फैसला 13 सितंबर को होने वाले फाइनल मुकाबले में होगा।

टूर्नामेंट का उद्घाटन मैच 28 अगस्त को थाईलैंड और हांगकांग (चीन) के बीच खेला जाएगा। मौजूदा चैंपियन श्रीलंका अपने अभियान की शुरुआत 29 अगस्त को यूएई के खिलाफ करेगा, जबकि बांग्लादेश 31 अगस्त को इंडोनेशिया से भिड़ेगा। पाकिस्तान अपनी अन्य लीग मुकाबलों में 1 सितंबर को थाईलैंड और 7 सितंबर को हांगकांग (चीन) का सामना करेगा। वहीं श्रीलंका 2 सितंबर को इंडोनेशिया और 6 सितंबर को बांग्लादेश के खिलाफ मैदान में उतरेगा।

टूर्नामेंट के सभी 15 मुकाबले, जिनमें दोनों सेमीफाइनल और फाइनल भी शामिल हैं, फ्लडलाइट्स में दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे। सबसे सफल टीम भारत एक बार फिर खिताब जीतकर एशियाई महिला क्रिकेट में अपना वर्चस्व बरकरार रखने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी।


कॉमनवेल्थ 2026 के विजेताओं का सम्मान, खिलाड़ियों को खेल अकादमी खोलने की सलाह

मांडविया बोले- पदक के साथ नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी तैयार करें चैंपियंस

नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों का नई दिल्ली में भव्य सम्मान किया गया। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बॉक्सिंग, जूडो और पैरा एथलेटिक्स के पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया और उन्हें भविष्य में युवा खिलाड़ियों के मार्गदर्शक बनने का संदेश दिया।

नई दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक सफलता हासिल करने वाले भारतीय खिलाड़ियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धियां पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं और अब उनकी जिम्मेदारी अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने की भी है। उन्होंने खिलाड़ियों से भविष्य में अपनी खेल अकादमियां शुरू करने और उभरती प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने का आह्वान किया।

पदक विजेताओं को मिला नकद पुरस्कार

समारोह में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 30 लाख रुपये, रजत पदक विजेताओं को 20 लाख रुपये और कांस्य पदक हासिल करने वालों को 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। खेल मंत्री ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों को हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

बॉक्सिंग में भारत का दबदबा

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक अपने नाम किए। टीम ने 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक जीतकर बॉक्सिंग की पदक तालिका में पहला स्थान हासिल किया।

स्वर्ण पदक विजेता

प्रीति पवार (54 किग्रा)
जैसमीन लम्बोरिया (57 किग्रा)
साक्षी चौधरी (51 किग्रा)
प्रिया घांघस (60 किग्रा)
अरुंधति चौधरी (70 किग्रा)
सचिन सिवाच (60 किग्रा)
अंकुश पंघाल (80 किग्रा)

रजत पदक विजेता

जादुमणि सिंह (55 किग्रा)
लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा)
नरेंद्र बेरवाल (90+ किग्रा)

महिला मुक्केबाजों द्वारा जीते गए सात स्वर्ण पदक भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहे।

जूडो में पहली बार बना इतिहास

भारतीय जूडो टीम ने भी इस बार रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक जीते। खेलो इंडिया से जुड़े खिलाड़ियों अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने भारत को जूडो में पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण दिलाकर नया इतिहास रचा। अस्मिता पहली भारतीय महिला और हर्ष सिंह पहले भारतीय पुरुष जूडोका बने जिन्होंने इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।

पैरा एथलीटों की भी हुई सराहना

सम्मान समारोह में पैरा एथलेटिक्स खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। खेल मंत्री ने ग्लासगो में भारतीय पैरा खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भारतीय पैरा खेलों के विकास की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया।

युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का आह्वान

डॉ. मांडविया ने कहा कि खिलाड़ियों का लक्ष्य केवल पदक जीतना या सरकारी नौकरी पाना नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेल जीवन समाप्त होने के बाद अनुभवी खिलाड़ी देश में नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएं और अपने अनुभव का लाभ युवाओं तक पहुंचाएं।

उन्होंने बताया कि सरकार ने संशोधित खेलो इंडिया योजना के तहत 36 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे देशभर में खेलों का बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

एशियाई खेलों के लिए दिया नया लक्ष्य

खेल मंत्री ने खिलाड़ियों को एशियाई खेल 2026 में भी इसी तरह का प्रदर्शन दोहराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रजत और कांस्य पदक विजेताओं से स्वर्ण जीतने का लक्ष्य रखने और स्वर्ण पदक विजेताओं से अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने की अपील की।

कोचों के योगदान को बताया अमूल्य

उन्होंने खिलाड़ियों को अपने प्रशिक्षकों के योगदान को हमेशा याद रखने की सलाह देते हुए कहा कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे उसके गुरु का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

सरकारी योजनाओं से मिला मजबूत समर्थन

कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS), एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन (ACTC) और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों में प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी और विशेषज्ञ कोचिंग जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला, जिसने उनके प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।


कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन, 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा देश

ऑस्ट्रेलिया 171 पदकों के साथ शीर्ष पर रहा

ग्लास्गो। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 39 पदकों के साथ अपना अभियान समाप्त किया। भारतीय खिलाड़ियों ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। हालांकि अंतिम दिन भारतीय दल कोई नया पदक नहीं जोड़ सका, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में मुक्केबाजी, जूडो और पैरा एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन ने देश का गौरव बढ़ाया।

ग्लास्गो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 का समापन रंगारंग समारोह के साथ हुआ। भारत ने प्रतियोगिता में कुल 39 पदक जीतकर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा के बाद चौथा स्थान हासिल किया। भारत के खाते में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक आए। अंतिम दिन जूडो और ट्रैक साइकिलिंग में भारतीय खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद थी, लेकिन वे पोडियम तक पहुंचने में सफल नहीं हो सके।

इस बार भारतीय दल का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन मुक्केबाजी में देखने को मिला, जहां खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड सात स्वर्ण सहित कुल 10 पदक जीते। जूडो में भी भारत ने पहली बार दो स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा। वहीं पैरा एथलेटिक्स और एथलेटिक्स में भी खिलाड़ियों ने कई यादगार प्रदर्शन किए, जिससे भारत का अभियान मजबूत रहा।

समापन समारोह में भारतीय संस्कृति की भव्य झलक दुनिया को देखने को मिली। सितार वादक ऋषभ रिखीराम और गायक शंकर महादेवन ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह के दौरान 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी का औपचारिक हस्तांतरण भारत को किया गया और दुनिया को अहमदाबाद आने का निमंत्रण दिया गया।

भारत की प्रस्तुति का मुख्य विषय ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ रहा, जिसमें देश की सांस्कृतिक विविधता, परंपराओं और आधुनिक भारत की झलक दिखाई गई। अभिनेत्री मानुषी छिल्लर के नेतृत्व में हुई प्रस्तुति और शंकर महादेवन के संगीत ने समारोह को यादगार बना दिया।

पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया 171 पदकों के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर रहे। मेजबान स्कॉटलैंड और भारत दोनों ने 39-39 पदक जीते, लेकिन स्वर्ण पदकों के आधार पर भारत चौथे स्थान पर रहा।

हालांकि अंतिम दिन भारत को जूडो और ट्रैक साइकिलिंग में निराशा हाथ लगी, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने यह साबित किया कि देश अब पारंपरिक खेलों के अलावा नए खेलों में भी लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। अब खेल प्रेमियों की निगाहें 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों पर हैं, जिनकी मेजबानी अहमदाबाद करेगा।


कॉमनवेल्थ गेम्स 2026- भारत के हर्ष सिंह का कमाल, जूडो में स्वर्ण पदक जीतकर बनाया नया रिकॉर्ड

जूडो में भारत को मिला पहला पुरुष गोल्ड

नई दिल्ली। ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के युवा हर्ष सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। जूडो के पुरुष वर्ग में 60 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष वरीय खिलाड़ी को हराकर उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो के पुरुष वर्ग में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।

23 वर्षीय हर्ष सिंह की यह उपलब्धि भारतीय जूडो के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है। वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने ग्लास्गो में वह कर दिखाया, जिसका भारतीय जूडो लंबे समय से इंतजार कर रहा था।

हर्ष ने अपने खेल की शुरुआत कम उम्र में ही कर दी थी। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार दमदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में जगह मिली, जहां उनके खेल में और निखार आया। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए खुद को मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले हर्ष ने टोक्यो ग्रैंड स्लैम 2025, ताशकंद ग्रैंड स्लैम 2026 और एशियाई चैंपियनशिप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया। इन प्रतियोगिताओं ने उन्हें बड़े मुकाबलों का अनुभव दिया, जिसका फायदा ग्लास्गो में साफ दिखाई दिया।

ग्लास्गो में हर्ष का अभियान शानदार रहा। पहले मुकाबले में उन्होंने मलावी के चिकोंडी काथेवेरा को इप्पोन से हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में वानुआतु के एलन मोंथोएल को मात देकर अंतिम चार में जगह बनाई। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो के खिलाफ उन्होंने वाजा-आरी के दम पर जीत दर्ज कर फाइनल का टिकट हासिल किया।

स्वर्ण पदक मुकाबले में हर्ष का सामना ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष वरीय जूडोका जोशुआ काट्ज़ से हुआ। कड़े मुकाबले के बीच भारतीय खिलाड़ी ने अंतिम चरण में शानदार तकनीक का प्रदर्शन करते हुए निर्णायक बढ़त बनाई और 10-0 के अंतर से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

हर्ष सिंह की इस ऐतिहासिक जीत ने भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई है। इससे पहले महिला 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता डे भी स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं। दोनों खिलाड़ियों की सफलता के साथ भारत ने पहली बार किसी एक कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में दो स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाया।

हर्ष की उपलब्धि पर देशभर में खुशी की लहर है। उनकी जीत को भारतीय जूडो के उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत माना जा रहा है। खेल जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की दावेदारी को और मजबूत करेगी।


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