Thursday, June 18th, 2026

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SIR अभियान को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ली राजनैतिक दलों की राय, ASDD श्रेणी में 76 हजार से ज्यादा मतदाता चिन्हित

Daily Archives: 18/06/2026

SIR अभियान को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ली राजनैतिक दलों की राय, ASDD श्रेणी में 76 हजार से ज्यादा मतदाता चिन्हित

देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी. वी. आर. सी. पुरुषोत्तम ने सचिवालय में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में अभियान की प्रगति, गणना फार्म वितरण और फील्ड स्तर पर चल रहे पुनरीक्षण कार्यों की समीक्षा की गई।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनैतिक दलों से SIR अभियान में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को सहयोग देने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गणना फार्म वितरण का कार्य 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जबकि करीब 20 प्रतिशत फार्म का डिजिटाइजेशन भी किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि 8 जून से शुरू हुए अभियान के तहत BLO द्वारा फील्ड विजिट के दौरान अब तक 76,754 मतदाताओं को ASDD श्रेणी में चिन्हित किया गया है। राजनैतिक दलों से अपील की गई है कि वे अपने बूथ लेवल एजेंट (BLA) के माध्यम से ASDD सूची में शामिल मतदाताओं को खोजने में सहयोग करें, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटने से बचाया जा सके।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर SIR प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। इसके बाद 14 जुलाई से 13 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। दावों के निस्तारण की प्रक्रिया 11 सितंबर तक चलेगी और 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 11,733 पोलिंग बूथों के सापेक्ष राजनैतिक दलों की ओर से 22,900 से अधिक BLA तैनात किए जा चुके हैं। बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी सहित भाजपा, कांग्रेस, बीएसपी, आम आदमी पार्टी और सीपीआई (एम) के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


बागेश्वर में बनेगा आधुनिक राज्य अतिथि गृह, मुख्यमंत्री धामी की घोषणा को मिली गति

45 नाली भूमि पर विकसित होगा अत्याधुनिक अतिथि गृह, डीपीआर जल्द तैयार करने के निर्देश

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में राज्य संपत्ति विभाग ने बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह निर्माण परियोजना को गति दे दी है। गुरुवार को राज्य सचिवालय में सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में परियोजना की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बागेश्वर के ग्राम ठेलापालन में बनने वाले राज्य अतिथि गृह की डीपीआर वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणा से जुड़ी इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और निर्माण कार्य गुणवत्ता व समयबद्धता के साथ कराया जाए।

प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह लगभग 0.900 हेक्टेयर (45 नाली) भूमि पर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पर्वतीय जनपद में सरकारी कार्यक्रमों, वीआईपी दौरे और प्रशासनिक गतिविधियों के दौरान बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कार्यदायी संस्था प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग, बागेश्वर को निर्देश दिए कि डीपीआर में पर्याप्त अतिथि कक्ष, बैठक कक्ष, प्रशासनिक कक्ष सहित सभी जरूरी सुविधाओं का प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा कि भवन को इस तरह तैयार किया जाए कि आने वाले वर्षों में भी इसकी उपयोगिता बनी रहे।

बैठक में पार्किंग व्यवस्था, फर्नीचर, विद्युत उपकरण और अन्य आधारभूत सुविधाओं को भी परियोजना में शामिल करने पर जोर दिया गया। सचिव ने कहा कि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करते हुए मितव्ययता के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

अधिकारियों को डीपीआर के साथ स्थल चयन समिति की रिपोर्ट, ले-आउट स्वीकृति और अन्य आवश्यक अनुमतियां संलग्न करने के निर्देश दिए गए, जिससे स्वीकृति प्रक्रिया में देरी न हो।
बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी लक्ष्मण सिंह, उप सचिव हनुमान प्रसाद तिवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहीं लोक निर्माण विभाग बागेश्वर के अधिकारियों ने परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया।


टीबी मुक्त भारत अभियान में धीमी प्रगति पर मुख्य सचिव सख्त, कई जिलों के सीएमओ को प्रतिकूल प्रविष्टि के निर्देश

देहरादून। टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान प्रदेश के कुछ जनपदों में धीमी प्रगति पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने नाराजगी जताई है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की प्रगति की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिन जनपदों में मरीजों की सामान्य जांच का आंकलन 60 प्रतिशत से कम रहा है, वहां के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाए। उन्होंने अगले एक सप्ताह के भीतर मरीजों की सामान्य जांच प्रक्रिया को 100 प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान को प्रभावी बनाने के लिए उच्च संवेदनशील और जोखिम वाले गांवों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर स्क्रीनिंग बढ़ाई जाए। साथ ही डीजी हेल्थ स्तर पर अभियान की प्रतिदिन समीक्षा और निगरानी करने को कहा गया।

बैठक में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने गर्भावस्था की पहली तिमाही में पंजीकरण बढ़ाने, एएनसी जांचों को मजबूत करने और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान कर बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने मानसून सीजन को देखते हुए दूरस्थ क्षेत्रों की हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को बर्थ वेटिंग होम्स में शिफ्ट करने को कहा, ताकि मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सके। उन्होंने सभी जनपदों में जन्म प्रतीक्षा गृहों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग समेत शासन के वरिष्ठ अधिकारी और सभी जनपदों के जिलाधिकारी मौजूद रहे।


1500 रुपये के विवाद में युवक की हत्या, पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

जमशेदपुर: मानगो के ओलीडीह ओपी क्षेत्र में मंगलवार रात को महज 1500 रुपये के पुराने बकाए को लेकर एक 21 वर्षीय युवक देवदास गौड़ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज कुछ ही घंटों के भीतर इस खूनी खेल का पर्दाफाश कर दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी व जमीन कारोबारी नीरज प्रधान, उसके भाई शिवा गौड़ और मृतक के सगे चचेरे भाई देवाशीष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल थार कार, देशी पिस्तौल और खून से सने कपड़े भी बरामद कर लिए हैं।

 पटमदा डीएसपी दयानंद कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मृतक देवदास अपने चचेरे भाई देवाशीष के साथ शंकोसाई रोड नंबर चार स्थित आरोपी नीरज प्रधान के घर गया था। वहां चारों ने एक साथ बैठकर शराब पी। नशा बढ़ने पर देवदास और नीरज के बीच 1500 रुपये के लेन-देन को लेकर नोकझोंक शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि नीरज ने शिवा की देशी पिस्तौल निकालकर देवदास की गर्दन पर बेहद करीब से गोली दाग दी।

 गोली चलने के बाद घबराए आरोपी सबूत मिटाने की नीयत से गंभीर रूप से घायल देवदास को अपनी थार कार में लादकर एमजीएम (MGM) अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने नाजुक हालत देखते हुए उसे तुरंत टीएमएच (टाटा मेन हॉस्पिटल) ले जाने की सलाह दी। लेकिन पुलिस के डर से आरोपियों ने समय बर्बाद किया और अत्यधिक खून बह जाने के कारण बुधवार तड़के देवदास की मौत हो गई।

 अस्पताल से सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस को आरोपियों ने गुमराह करने की कोशिश की और बार-बार घटनास्थल बदलते रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया, जिसने सख्ती से पूछताछ कर सच उगलवा लिया। इस मामले में शुरुआत में एक एएसआई (ASI) का नाम सामने आने से हड़कंप मचा था, लेकिन जांच के बाद पुलिस ने साफ किया कि उनकी इस हत्याकांड में कोई संलिप्तता नहीं है और उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है। मृतक देवदास सरायकेला-खरसावां के राजनगर का रहने वाला था और अपने बूढ़े माता-पिता का इकलौता सहारा था।


उत्तराखंड में जमीन नियमों में बड़ा बदलाव

आयुषी

उत्तराखंड सरकार ने राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भूमि संबंधी प्रक्रियाओं में बड़ा बदलाव किया है। अब उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि खरीदने वाले निवेशकों को गैर-कृषि (नॉन-एग्रीकल्चर) अनुमति के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने नई व्यवस्था लागू करते हुए भूमि खरीद और भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और समयबद्ध बना दिया है। इसके तहत भूमि खरीद की अनुमति मिलने के बाद गैर-कृषि उपयोग से जुड़ी प्रक्रिया अधिकतम सात दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आवेदन स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य में निवेश का माहौल बेहतर होगा और उद्योगों की स्थापना में आने वाली प्रशासनिक बाधाएं काफी हद तक कम होंगी।राज्य में उद्योग स्थापना के लिए कृषि भूमि खरीदने के मामलों में पहले अनुमति देने का अधिकार जिला स्तर पर था। अब इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए अनुमति की प्रक्रिया को शासन स्तर पर केंद्रीकृत कर दिया गया है। इच्छुक निवेशकों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसके बाद शासन स्तर पर उसकी जांच और परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण के उपरांत भूमि खरीद (धारा-154) की अनुमति जारी की जाएगी।अब तक भूमि खरीद की अनुमति मिलने के बाद आवेदक को भूमि को गैर-कृषि उपयोग में परिवर्तित कराने के लिए धारा-143 के तहत अलग से आवेदन करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में कई बार महीनों का समय लग जाता था, जिससे उद्योग स्थापना की योजनाएं प्रभावित होती थीं।

राजस्व परिषद ने इस प्रक्रिया को सरल बनाते हुए धारा-143 को ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ दिया है। अब जैसे ही किसी निवेशक को भूमि खरीद की अनुमति मिलेगी, उसी समय ई-भू अनुमति पोर्टल पर गैर-कृषि उपयोग के लिए आवेदन का विकल्प स्वतः उपलब्ध हो जाएगा।आवेदन दर्ज होते ही संबंधित जिले के राजस्व विभाग को इसकी सूचना ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हो जाएगी और प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी।राजस्व परिषद सचिव रंजना राजगुरु के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत संबंधित राजस्व अधिकारी को आवेदन प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। यह समय सीमा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने और निवेशकों को अनावश्यक देरी से राहत देने के उद्देश्य से तय की गई है।

यदि किसी कारणवश निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन पर फैसला नहीं लिया जाता है, तो आवेदन स्वतः स्वीकृत माना जाएगा। यह व्यवस्था अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी मदद करेगी।विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि संबंधी अनुमतियों में देरी किसी भी औद्योगिक परियोजना की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक होती है। नई व्यवस्था लागू होने से निवेशकों को समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी। साथ ही परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और उद्योगों की स्थापना का समय कम होगा।इसका सीधा लाभ विनिर्माण, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, फार्मास्यूटिकल और सेवा क्षेत्र से जुड़े निवेशकों को मिलने की उम्मीद है।नई ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि आवेदकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। सभी चरणों की ऑनलाइन निगरानी होने से प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी।

राज्य सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित यह व्यवस्था निवेशकों के लिए बेहतर कारोबारी वातावरण तैयार करेगी और उत्तराखंड को निवेश के लिए अधिक आकर्षक राज्य बनाने में मदद करेगी।उत्तराखंड सरकार पिछले कुछ वर्षों से निवेश को आकर्षित करने के लिए विभिन्न सुधारात्मक कदम उठा रही है। सिंगल विंडो सिस्टम, डिजिटल मंजूरी प्रक्रिया और उद्योग अनुकूल नीतियों के बाद भूमि उपयोग परिवर्तन की समयबद्ध व्यवस्था को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है, तो राज्य में नए उद्योग स्थापित होने की गति बढ़ेगी, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई मजबूती मिलेगी।


साल में दो बार लिया जाएगा P-SAT, हर शनिवार होगी वर्चुअल ट्रेनिंग: रेखा आर्या

देहरादून । प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की प्रगति पर अब पहले से अधिक बारीकी से नजर रखी जाएगी। मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के तहत खिलाड़ियों का P-SAT (फिजिकल स्टैंडर्ड एप्टीट्यूड टेस्ट) वर्ष में दो बार लिया जाएगा, जबकि प्रत्येक शनिवार को ‘खेलोक’ पोर्टल के माध्यम से दो घंटे की वर्चुअल ट्रेनिंग भी आयोजित होगी। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि इन कदमों से खिलाड़ियों की क्षमता का बेहतर आकलन होने के साथ उनके प्रदर्शन में भी निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना को और अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। योजना के नियमों और चयन प्रक्रिया में सुधार के लिए कुछ संशोधनों का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो वर्तमान में शासन स्तर पर विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम निर्णय होने तक चयन एवं अन्य सभी प्रक्रियाएं पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार निर्बाध रूप से जारी रहेंगी।

उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य फोकस खिलाड़ियों की वास्तविक प्रगति की निगरानी करना है। इसी उद्देश्य से अब प्रदेश के बालक एवं बालिका खिलाड़ियों का P-SAT स्कोर वर्ष में दो बार अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाएगा, जिससे उनकी शारीरिक दक्षता और खेल क्षमता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके।

रेखा आर्या ने कहा कि जमीनी स्तर पर बेहतर खेल वातावरण तैयार करने के लिए सभी जिलों के जिला क्रीड़ा अधिकारियों को विभिन्न खेल प्रशिक्षकों तथा शारीरिक शिक्षा अध्यापकों के साथ सक्रिय समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकेंगे और खेल गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

खेल मंत्री ने बताया कि खिलाड़ियों को आधुनिक खेल तकनीकों और प्रशिक्षण पद्धतियों से जोड़ने के लिए डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘खेलोक’ पोर्टल पर दो घंटे का वर्चुअल प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से खिलाड़ियों को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा और इसके लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिला क्रीड़ा अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों का तत्काल और कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं, ताकि प्रदेश का कोई भी प्रतिभावान खिलाड़ी आगे बढ़ने के अवसर से वंचित न रहे।


धामी कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर लगी मुहर

देखें धामी कैबिनेट के फैसले 

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पद्मश्री निशानेबाज जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखकर की गई।

कैबिनेट ने शिक्षा, रोजगार, कृषि, पर्यटन, कारागार प्रशासन और चारधाम यात्रा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इनमें उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने, उपनल कर्मचारियों को राहत देने और चारधाम यात्रा में संचालित घोड़ा-खच्चरों के लिए बीमा सहायता उपलब्ध कराने जैसे फैसले प्रमुख रहे।

‘कैबिनेट द्वारा लिये गये अहम निर्णय’

1. गौ-वंशीय पशुओं में नस्ल सुधार हेतु भ्रूण प्रत्यारोपण कर शुद्ध पशुओं के उत्पादन व दुग्ध वृद्धि की पायलट परियोजना को मंत्रीमण्डल ने दी अनुमति।

पशुपालन विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु उच्च आनुवंशिकी के पशु शीघ्रता से उत्पादित हो। इस दृष्टि से प्रदेश में गौ-वंशीय पशुओं में नस्ल सुधार हेतु भ्रूण प्रत्यारोपण कर शुद्ध पशुओं के उत्पादन व दुग्ध वृद्धि की पायलट परियोजना प्रस्तावित की गई, जिसे मंत्रीमण्डल द्वारा स्वीकृति दी गई।

2. चार धाम यात्रा में प्रयोग किये जाने वाले अश्ववंशीय पशुओं का बीमा प्रीमियम की 20 प्रतिशत धनराशि राज्य सैक्टर के अन्तर्गत वहन किये जाने पर कैबिनेट ने लगाई मोहर।

राज्य सरकार ने केदारनाथ, यमुनोत्री और हेमकुण्ड साहिब यात्रा मार्ग पर चलने वाले घोड़े-खच्चरों (अश्ववंशीय पशुओं) के स्वामियों को बड़ी राहत देते हुए बीमा प्रीमियम की 20 प्रतिशत धनराशि खुद वहन करने का निर्णय लिया है, जबकि शेष 80 प्रतिशत धनराशि पशु स्वामियों द्वारा दी जाएगी। इस योजना के तहत वर्ष 2026 की यात्रा के लिए अनुमानित 15,000 पंजीकृत घोड़े-खच्चरों को कवर किया जाएगा, जहां प्रति पशु ₹ 70,000 की कीमत पर 5 प्रतिशत बीमा दर के अनुसार कुल ₹525 लाख के प्रीमियम में से राज्य सरकार अपने हिस्से के ₹ 105 लाख का वित्तीय भार उठाएगी। इस पर मंत्रीमण्डल द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई।

3. उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान चिन्हित आन्दोलनकारियों तथा उनके आश्रितों को राज्याधीन सेवाओं में प्राप्त 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के तहत अधिसूचना संख्या 244 दिनांक 18.08. 2024 के प्रख्यापन तथा एतत् सम्बन्धी शासनादेश संख्या 139, दिनांक 24.11.2024 के जारी होने के मध्य उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा विज्ञाप्ति तीन भर्ती परीक्षाएं कनिष्ठ सहायक एवं अन्य पदों हेतु भर्ती परीक्षा, 2024, आरक्षी जनपदीय पुलिस (पुरूष) तथा आरक्षी पीएसी/आईआरबी (पुरूष) भर्ती परीक्षा, 2024 एवं अपर निजी सचिव, वैयक्तिक सहायक, आशुलिपिक एवं अन्य पदों की भर्ती परीक्षा, 2024 में आवेदन जमा किये जाने की अंतिम तिथि के पश्चात् निर्धारित प्रारूप पर राज्य आंदोलनकारी आरक्षण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने वाले अभ्यर्थियों को सन्निरीक्षा (Document Verification) के दौरान एक बार के लिए अनुमन्य किये जाने का मंत्रीमण्डल द्वारा निर्णय लिया गया।

4. बिटुमिनस् की कीमतों में हुई अत्यधिक वृद्धि के दृष्टिगत बिटुमिनस् कार्यों हेतु अनुबंधों में मूल्य समायोजन किये जाने के संबंध में मंत्रिमण्डल ने दी सहमति।

मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत में पेट्रोलियम प्रोडेक्ट की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि से बिटुमिन की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो जाने के फलस्वरूप मात्र बिटुमिनस् कार्यों हेतु कार्यहित में निर्धारित प्राविधानों के अनुसार उत्तराखण्ड लोक निर्माण विभाग में दिनांक 01-04-2026 से पूर्व गठित बिटुमिनस् कार्य के ऐसे सभी अनुबन्धों, जिनमें अनुबन्ध की समयावधि उपलब्ध है तथा बिटुमिनस् कार्य किये जाने शेष हैं, में संशोधन करते हुये, दिनांक 01-05-2026 से दिनांक 30-06-2026 तक की अवधि के लिये मात्र बिटुमिनस् कार्यों हेतु मूल्य समायोजन (price adjustment) किये जाने के संबंध में दिशा-निर्देश निर्गत किये जाने पर मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गई है।

5. आबकारी नीति विषयक नियमावली, 2025-26, 2026-27 व 2027-28 (त्रिवर्षीय आबकारी नीति) से सम्बन्धित शासन की अधिसूचना संख्याः 112/दिनांक 31 मार्च, 2026 के परिशिष्ट ‘क‘ एवं ‘ख‘ में अंकित उपकर को वैट अधिनियम, 2005 के प्राविधानों के अन्तर्गत वैट गणना का भाग बनाए जाने एवं नियम 12.2 सम्बन्धी तालिका में होलोग्राम शुल्क के दोहराव की स्थिति उत्पन्न होने के दृष्टिगत उक्त अधिसूचना के परिशिष्ट ‘ख‘ के क्रमांक 4 में सम्मिलित किए गए होलोग्राम शुल्क को विलोपित करते हुए संशोधन/प्रतिस्थापन किए जाने पर मंत्रीमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गई।

6. Trade Infrastructure for Export Scheme (TIES) योजनान्तर्गत सगन्ध तेलों/उत्पादों में मिलावट की जांच हेतु सगन्ध पौधा केन्द्र, सेलाकुई में अत्याधुनिक Accelerator Mass Spectrometry (AMS) Machine के संचालन के लिए पी.एम.यू. गठन किए जाने हेतु 05 पद सृजित किए जाने हेतु त्रीमण्डल ने दी स्वीकृति।

राज्य के प्राकृतिक उत्पादों यथा-ऑयल्स/एक्स्ट्रैक्ट एवं अन्य प्रकार के सगन्ध/हर्बल/ फार्मास्यूटिकल्स उत्पादों में मिलावट की जांच उपरान्त सिंथेटिक एवं प्राकृतिक उत्पादों के मध्य प्रमाणिकता को सिद्ध करते हुए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्यात को बढ़ावा दिए जाने के लिए सगन्ध पौधा केन्द्र, सेलाकुई में कृषकों/उद्योगों/संस्थानों से क्रय किये जाने वाले विभिन्न प्रकार के सगन्ध तेलों/उत्पादों में मिलावट की जांच Accelerator Mass Spectrometry (AMS) Machine से की जानी है। इस मशीन संचालन के लिए पी.एम.यू. गठन किए जाने हेतु 05 विशेषज्ञ पद (Project Scientist-III, Senior Project Associate, Project Associate-II, 02 Technical Assistant) सृजित किए जाने के प्रस्ताव पर मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई स्वीकृति।

7. उत्तराखण्ड राज्य में पर्यटन को बढ़ावा दिये जाने के उददेश्य से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजन किया जाना अतिआवश्यक है, जिससे उत्तराखण्ड राज्य अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन की दृष्टिकोण से अपना स्थान बना सकें। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय हिमालयन कार रैली का आयोजन किया जा रहा है, जिस हेतु अनुभवी संस्था का चयन किया जाना अतिआवश्यक है। उक्त रैली में कुल 120 से अधिक एन्ट्री को शामिल किये जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 25 अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिभागी, 25 एशिया कॉस कन्ट्री रैली, 20 क्लासिक कार रैली, 50 भारतीय राष्ट्रीय रैली चौम्पियनशिप शामिल हैं। हिमालयन कार रैली के आयोजन हेतु संस्था का चयन एकल स्रोत के माध्यम से किये जाने को लेकर मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमति प्रदान की गई।

8. मा. उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड नैनीताल द्वारा पारित आदेश दिनांक 20.04.2026 के क्रम में उपनल के माध्यम से योजित कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन प्रदान किये जाने हेतु पूर्व में निर्धारित पात्रता की कट ऑफ डेट की तिथि (12.11.2018) को संशोधित कर मा. सर्वाेच्च न्यायालय नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश दिनांक 15.10.2024 तिथि निर्धारित किये जाने के प्रस्ताव पर मा. मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गई।

9. ‘उत्तराखण्ड कारागार (संशोधन) नियमावली, 2026‘ के प्रख्यापन को मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई सहमति।

मा. सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 03.10.2024 के अनुपालन में उत्तराखण्ड कारागार नियमावली, 2023 में अभ्यस्त अपराधी, जिसे इस नियमावली के प्रारंभ होने से पूर्व या पश्चात् उत्तर प्रदेश अभ्यस्त अपराधी प्रतिरोध, अधिनियम, 1952 की अनुसूची में उल्लिखित किसी एक या अन्य अपराध के लिये कम से कम तीन पृथक-पृथक अवसरों पर मौलिक अवधि के कारावास का दण्ड दिया गया हो और ऐसा दण्डादेश अपील अथवा पुनरीक्षण में अपास्त न कर दिया गया हो, में संशोधन हेतु उत्तराखण्ड कारागार (संशोधन) नियमावली, 2026 प्रख्यापित किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई सहमति प्रदान की गई।

10. उत्तराखण्ड कारागार कारापाल अधीनस्थ (राजपत्रित) सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई सहमति।

कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखण्ड की संरचना में अधीनस्थ कारागारों हेतु कारापाल के कुल 14 पद सृजित हैं, जो स्थायी उप कारापालों से पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने वाले पद हैं। वर्तमान में कारागार विभाग में उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश जेल कारागार कार्यपालक अधीनस्थ (राजपत्रित) सेवा नियमावली, 1980) अनुकूलन उपान्तरण आदेश, 2002 लागू है। उत्तराखण्ड राज्य गठन के पश्चात कारागार विभाग में पृथक से कारापाल सेवा नियमावली को प्रख्यापित नहीं किया गया है। विभागीय एवं कर्मचारी हित में उत्तराखण्ड कारागार कारापाल अधीनस्थ (राजपत्रित) सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन के प्रस्ताव पर मंत्रीमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी।

11. उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा (संशोधन) विनियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंत्रीमण्डल की सहमति।

राज्य में संस्कृत विद्यालयों को मान्यता प्रदान करने, पाठ्यक्रम निर्धारण एवं परीक्षा संचालन हेतु उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा परिषद् को विधि द्वारा गठित संस्था के रूप में स्थापित करने के सम्बन्ध में उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा अधिनियम, 2014 प्रख्यापित किया गया। उक्त अधिसूचना के कार्यान्वयन हेतु उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा विनियमावली, 2023 प्रख्यापित की गयी, जिसमें कतिपय संशोधन/परिर्वतन के दृष्टिगत उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा (संशोधन) विनियमावली, 2026 प्रख्यापित किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिमण्डल सहमति प्रदान की गई।

12. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप साक्षरता के मानकों के आधार पर उत्तराखण्ड राज्य को पूर्णतः साक्षर राज्य (Fully Literate State) घोषित किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रीमण्डल ने सहमति प्रदान की।

13. राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड) के तहत विभिन्न चिकित्सालयों में लम्बित बिलों के भुगतान के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य विभाग को वित्तीय सहायता उपलब्ध करायेगी।

वर्षों से लंबित‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनाए जाने पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।


मानसून से पहले अलर्ट मोड में देहरादून; प्रमुख सचिव ने की आपदा तैयारियों एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा

आपदा प्रबंधन पर फोकस प्रमुख सचिव ने जलभराव, भूस्खलन और बाढ़ सुरक्षा कार्यों की प्रगति परखी; कार्लीगाड मझाड़ा पुनर्वास कार्यों का किया निरीक्षण

मानसून पूर्व तैयारियों की बड़ी समीक्षा, संवेदनशील स्थलों पर अग्रिम इंतजाम सुनिश्चित करने के प्रमुख सचिव ने दिए निर्देश

देहरादून-  प्रमुख सचिव एवं जनपद प्रभारी, देहरादून डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में जिला कार्यालय सभागार में मानसून पूर्व तैयारियों एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान के नेतृत्व में संबंधित विभागों के अधिकारियों द्वारा मानसून तैयारी के दृष्टिगत जनपद में संचालित विभिन्न कार्यों, संवेदनशील स्थलों पर की गई व्यवस्थाओं, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में चल रहे शमन कार्यों तथा गत वर्ष की आपदाओं एवं जलभराव से प्राप्त अनुभवों के आधार पर की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई।

बैठक में सौंग नदी परियोजना, नंदा की चौकी क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा कार्यों, नदी सफाई कार्यों तथा अन्य बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने मानसून आरंभ होने से पूर्व सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही खनन गतिविधियों से संबंधित आवश्यक कार्यवाहियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने को कहा।

मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु जनपद में उपलब्ध 39 डी-वॉटरिंग पंपों की तैनाती योजना की समीक्षा की गई।
गत वर्ष जलभराव एवं जनहानि से प्रभावित स्थलों का पुनः आकलन कर संवेदनशील क्षेत्रों में अग्रिम व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आईएसबीटी क्षेत्र में जलनिकासी संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु एमडीडीए, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग एवं जिला प्रशासन की संयुक्त टीम गठित कर समन्वित कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके अतिरिक्त जनपद के 12 प्रमुख नालों की सफाई एवं सुधार कार्यों को शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में अल्प अवधि में होने वाली अत्यधिक वर्षा (शॉर्ट ड्यूरेशन हाई इंटेंसिटी रेनफॉल) वाले क्षेत्रों का डेटा आधारित विश्लेषण करने तथा संभावित जलभराव स्थलों की अग्रिम पहचान सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। आठ संवेदनशील नदी एवं नाला क्षेत्रों में चल रहे शमन कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को नियमित मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

भूस्खलन एवं भू-संवेदनशील क्षेत्रों की समीक्षा करते हुए जनपद में चिन्हित 12 लैंडस्लाइड जोन तथा क्रॉनिक स्लिप जोन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। किमाड़ी सहित संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी समाधान विकसित करने तथा जोखिम कम करने हेतु दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही क्लाउड बर्स्ट की संभावनाओं वाले क्षेत्रों में निगरानी एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।

बैठक में जोखिमयुक्त एवं आपदा संभावित विद्यालयों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को ऐसे विद्यालयों की पहचान कर शेष मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यकता अनुसार अस्थायी एवं स्थायी दोनों प्रकार के समाधान विकसित करने को कहा गया। इसी प्रकार उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निवासरत गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनके लिए स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षित आवागमन तथा अन्य आवश्यक सहायता पूर्व से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा के दौरान डेंगू, मलेरिया एवं चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम हेतु व्यापक अभियान चलाने, नियमित फॉगिंग, जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित करने तथा जलभराव वाले स्थलों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि लीकेज मैपिंग के दौरान 18 स्थानों पर रिसाव चिन्हित किए गए हैं, जिनके निराकरण की कार्यवाही प्रगति पर है।

बैठक में अवगत कराया गया कि जनपद में 169 नाले हैं जिनमें से 153 पर सफाई कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा शेष पर सफाई कार्य गतिमान है। मानसून अवधि के दौरान 89 स्कूलों का चिन्हिकरण किया गया है, जिनमें बरसात के समय नदी-नाले पड़ते है, तथा 73 गांव ऐसे है, जहां पर समुचित कनैक्टीविटी नही है, ऐसे गांव की गर्भवती महिलाओं को पहले ही नजदीकी चिकित्सालय भर्ती कराने की व्यवस्था की गई है जहां गर्भवती महिला एवं तीमारदार के भोजन आदि व्यवस्था विभाग की रहेगी।
प्रमुख सचिव ने संभावित वृक्ष गिरने की घटनाओं की रोकथाम के लिए चिन्हित स्थलों पर समयबद्ध कार्रवाई करने तथा अन्य जर्जर एवं जोखिमयुक्त वृक्षों की भी पहचान कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त रैन बसेरों, राहत शिविरों तथा अन्य आपदा राहत व्यवस्थाओं को पूर्ण रूप से तैयार रखने को कहा गया।

प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि मानसून अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में त्वरित एवं समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना सभी विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देशित किया कि संवेदनशील स्थलों की नियमित निगरानी, पूर्व चेतावनी तंत्र की प्रभावी कार्यप्रणाली तथा राहत एवं बचाव संसाधनों की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित की जाए, जिससे जनहानि एवं संपत्ति की क्षति को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वार रूम एवं नियंत्रण कक्ष को 24×7 सक्रिय रखने तथा सभी विभागों के मध्य प्रभावी समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए।

बैठक में गत वर्ष की आपदाओं से हुई क्षति, उपलब्ध वित्तीय संसाधनों, आपदा उपरांत क्षति आकलन रिपोर्टों तथा कृषि क्षेत्र की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। कृषि विभाग को निर्देशित किया गया कि बीज एवं अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता तथा वितरण में किसी प्रकार की देरी न होने दी जाए।

बैठक उपरांत प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम ने जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान एवं संबंधित अधिकारियों के साथ कार्लीगाड़ एवं माझाड़ा क्षेत्र सहित आपदा प्रभावित स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर क्षेत्र में पुनर्वास कार्य, नदी चैनलाईजेशन कार्य, पुनर्वास व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान, मुख्य नगर आयुक्त आलोक कुमार पाण्डेय, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, अपर जिलाधिकारी वि/रा के.के मिश्रा, प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ मनोज कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, जिला पूर्ति अधिकारी के.के अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता जल संस्थान नमित रमोला सहित अधिशासी अभियंता लोनिवि, सिचंाई, पेयजल, विद्युत आदि सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


रायबरेली में चौकीदार हत्याकांड का खुलासा, प्रेम प्रसंग में मौसेरे भाई ने की हत्या

रायबरेली: बछरावां थाना क्षेत्र के ठकुराइन खेड़ा गांव में पानी की टंकी पर सो रहे चौकीदार बिंदा प्रसाद की नृशंस हत्या के मामले को सुलझाते हुए पुलिस और एसओजी (SOG) टीम ने बड़ा खुलासा किया है। घटना के महज तीन दिन के भीतर पुलिस ने हत्यारे को गिरफ्तार कर लिया है, जो कोई और नहीं बल्कि मृतक का सगा मौसेरा भाई निकला। हत्या की वजह मृतक की पत्नी से आरोपी के अवैध प्रेम संबंध और एकतरफा जिद थी।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 15 जून की सुबह गांव से करीब एक किलोमीटर दूर पानी की टंकी परिसर में बिंदा प्रसाद का खून से लथपथ शव चारपाई पर पड़ा मिला था। अज्ञात हमलावर के खिलाफ मामला दर्ज कर जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो परिजनों और ग्रामीणों से कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने मृतक और उसकी पत्नी के मोबाइल की कॉल डिटेल (CDR) खंगाली, जिससे शक की सुई मौसेरे भाई राज किशोर पर जाकर टिकी।

 क्षेत्राधिकारी महराजगंज प्रदीप कुमार ने बताया कि हिरासत में लिए गए आरोपी राज किशोर (निवासी बाबूखेड़ा, उन्नाव) ने कड़ाई से की गई पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। अविवाहित आरोपी राज किशोर के अपनी भाभी (मृतक की पत्नी) के साथ पिछले तीन साल से प्रेम संबंध थे। वह उसे अपने साथ भगा ले जाना चाहता था, लेकिन महिला ने अपने पति और बच्चों का हवाला देकर जाने से साफ मना कर दिया।

इसके बाद आरोपी ने बिंदा प्रसाद को अपने रास्ते से हटाने की साजिश रची। रविवार की देर रात वह चुपके से पानी की टंकी परिसर पहुंचा और चारपाई पर गहरी नींद में सो रहे बिंदा प्रसाद के सिर पर बांके (धारदार हथियार) से ताबड़तोड़ वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।


योग भारत की प्राचीन संस्कृति और ज्ञान परंपरा का अमूल्य उपहार है- ऋतु खण्डूडी

कोटद्वार। आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आज कोटद्वार के प्राइड मॉल के सभागार में विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड एवं विधायक कोटद्वार ऋतु खण्डूडी भूषण ने क्षेत्रवासियों के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया।

इस अवसर पर ऋतु खण्डूडी भूषण ने योग के महत्व एवं इसके स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति और ज्ञान परंपरा का अमूल्य उपहार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप आज योग को वैश्विक पहचान मिली है तथा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को शांति और जीवन को संतुलन प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग जन-जन के जीवन का हिस्सा बन रहा है और स्वस्थ भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज विश्व के अनेक देश योग को अपनाकर इसके सकारात्मक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों को योगा मैट वितरित किए गए तथा नियमित योगाभ्यास करने के लिए प्रेरित किया गया।  ऋतु खण्डूडी भूषण ने क्षेत्रवासियों से आगामी 21 जून, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले योग कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक यदि योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए, तो स्वस्थ एवं सशक्त भारत के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष राज गौरव नौटियाल, मंडल अध्यक्ष प्रेमा खंतवाल, आशीष रावत, विकासदीप मित्तल, पार्षद सौरव नौडियाल, राजेंद्र बिष्ट, सिमरन बिष्ट, सांता बमराडा, राजेश देवरानी, मोहन सिंह नेगी, बीना रावत तथा योगाचार्य राकेश कंडवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।


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