Tuesday, June 9th, 2026

Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

कनेक्टिविटी का इंतजार खत्म नहीं, 4 जी योजना के बाद भी गांव परेशान

Daily Archives: 09/06/2026

कनेक्टिविटी का इंतजार खत्म नहीं, 4 जी योजना के बाद भी गांव परेशान

पूजा भट्ट

देश के दूरदराज इलाकों तक मोबाइल और इंटरनेट सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में बीएसएनएल 4जी सेचुरेशन योजना शुरू की थी। लेकिन उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के घाड़ क्षेत्र के नौ गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में योजना के प्रभाव और जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल उठने लगे हैं।

हलजौरा, बेलकी, इनायतपुर, इब्राहिमपुर मसाई कला, गोकुलवाला, डांडा, बनवाला, शाहमंसूर और दौड़बसी गांवों में आज भी मोबाइल सिग्नल नहीं पहुंच पाया है। कुछ स्थानों पर बेहद कमजोर नेटवर्क मिलता है, जहां लोगों को बात करने के लिए घरों की छतों या ऊंचे स्थानों तक जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी वे इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी जैसी जरूरी सेवाओं से वंचित हैं। ग्राम प्रधानों ने इस समस्या को लेकर कई बार जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और दूरसंचार विभाग को ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।

हलजौरा गांव के प्रधान स्वामी घनश्याम के अनुसार, गांव में मोबाइल टावर लगाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

बीएसएनएल 4जी सेचुरेशन योजना का उद्देश्य उन गांवों तक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना है जहां कनेक्टिविटी नहीं है या बेहद कमजोर है। इसके तहत नए मोबाइल टावर स्थापित किए जा रहे हैं और पुराने 2जी-3जी टावरों को 4जी में अपग्रेड किया जा रहा है, ताकि डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं तक ग्रामीणों की पहुंच बढ़ाई जा सके।

हालांकि घाड़ क्षेत्र के इन गांवों में इसका लाभ अब तक नहीं पहुंच पाया है। इसका सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई बाधित हो रही है, सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन मुश्किल हो गया है और डिजिटल भुगतान, बैंकिंग ऐप तथा यूपीआई जैसी सेवाओं का उपयोग सीमित हो गया है।

इसके अलावा किसानों को मौसम, फसल बीमा, कृषि योजनाओं और मंडी भाव से जुड़ी जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही। आधार, पेंशन, राशन और आयुष्मान कार्ड जैसी कई ऑनलाइन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। आपात स्थिति में लोगों का तुरंत संपर्क न कर पाना अलग चुनौती बन गया है।

जानकारी के मुताबिक, हलजौरा गांव में कोई मोबाइल टावर नहीं है, जबकि निकटतम टावर करीब सात किलोमीटर दूर सिकरोढ़ा क्षेत्र में स्थित है। जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर कंचन कांत के अनुसार, एक मोबाइल टावर स्थापित करने में लगभग 20 लाख रुपये का खर्च आता है। उन्होंने बताया कि इन गांवों के लिए सेचुरेशन योजना के तहत प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है और आगे की कार्रवाई उनके स्तर से की जानी है।

डिजिटल इंडिया के दौर में इन गांवों की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि योजनाओं की घोषणा और जमीनी पहुंच के बीच की दूरी आखिर कब खत्म होगी।


मुलाकात बनी मौत! युवक की बेरहमी से हत्या

आयुषी

उत्तराखंड के टिहरी जिले के प्रतापनगर क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। एक 18 वर्षीय युवक, जो कथित तौर पर एक किशोरी के बुलावे पर उससे मिलने गया था, उसकी बेरहमी से पिटाई किए जाने के बाद मौत हो गई। घटना में उसके साथ गया दोस्त भी गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। मामले के सामने आने के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और परिजनों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

घटना प्रतापनगर ब्लॉक की ओण पट्टी के देवल गांव और खोलगढ़ गांव से जुड़ी बताई जा रही है। मृतक की पहचान केतन लाल (18) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, सात जून की रात केतन को एक किशोरी का फोन आया था, जिसमें उसे मिलने के लिए बुलाया गया।बताया गया कि केतन अपने दोस्त दिवाकर डिमरी के साथ खोलगढ़ पहुंचा। आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद किशोरी के परिजनों ने दोनों युवकों को एक कमरे में बंद कर दिया और उनके साथ लाठी-डंडों से मारपीट शुरू कर दी।परिवार का आरोप है कि दोनों युवकों को लंबे समय तक पीटा गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।मृतक के पिता धनपाल लाल ने बताया कि जब उन्हें फोन कर बुलाया गया और वे मौके पर पहुंचे तो उनका बेटा गंभीर हालत में मिला। परिजनों के अनुसार, अस्पताल ले जाते समय केतन ने उन्हें बताया कि किस तरह कमरे में बंद कर दोनों युवकों की पिटाई की गई।इसके बाद उसे इलाज के लिए सीएचसी चौंड ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।घटना में घायल दिवाकर डिमरी को जिला अस्पताल बौराड़ी में भर्ती कराया गया।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार उसकी स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है, हालांकि उससे भी घटना को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है।युवक की मौत की खबर फैलते ही परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल पहुंचे और उन्होंने विरोध जताया। परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना बेहद गंभीर है और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए। कुछ समय तक अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बनी रही।पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हत्या और अन्य संबंधित धाराओं के साथ एससी-एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। एक नामजद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले की जांच सीओ टिहरी को सौंपी गई है और सभी पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं।

पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा में है कि मृतक और किशोरी के बीच पिछले कुछ महीनों से जान-पहचान थी। हालांकि इस पहलू की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि किसी भी विवाद या पारिवारिक असहमति का समाधान कानून के दायरे में होना चाहिए— हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।


देहरादून में पहली बार ब्लूबेरी खेती की शुरुआत, 10 किसानों के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू

मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में ब्लूबेरी फार्मिंग की नई पहल, किसानों को मिलेगा लाभ

80 प्रतिशत अनुदान पर मिलेंगे 500 ब्लूबेरी पौधे, किसानों का मिलेगा बड़ा लाभ

नाबार्ड द्वारा निर्मित पॉली हाउस पर ही की जाएगी ब्लूबेरी की खेती

जिला योजना में शामिल ब्लूबेरी पायलट मिशन, जिला प्रशासन का विशेष फोकस

ब्लूबेरी फार्मिंग को बनाया जाएगा सफल मॉडल, किसानों के साथ खड़ा रहेगा प्रशासन-डीएम

देहरादून। कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में देहरादून जिला प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के नेतृत्व में जनपद में पहली बार ब्लूबेरी खेती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में जिला प्रशासन और उद्यान विभाग किसानों की आय बढ़ाने के लिए उच्च मूल्य वाली फसलों के विकल्प विकसित करने पर कार्य कर रहे हैं।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि उद्यान विभाग द्वारा सहसपुर क्षेत्र की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद ब्लूबेरी उत्पादन के लिए इसे उपयुक्त पाया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत सहसपुर ब्लॉक के 10 किसानों का चयन किया गया है, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि चयनित किसानों को 500 वर्गमीटर क्षेत्र में खेती के लिए 500 ब्लूबेरी पौधे 80 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही किसानों को वैज्ञानिक खेती, पौधों के रखरखाव, सिंचाई प्रबंधन तथा उत्पादन तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जिला प्रशासन किसानों की उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य करेगा, ताकि उन्हें उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भविष्य में इसे क्लस्टर स्तर पर विस्तारित किया जाएगा। इससे देहरादून को ब्लूबेरी उत्पादन के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दून बासमती ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है, उसी प्रकार ब्लूबेरी खेती भी किसानों के लिए आय का नया और लाभकारी स्रोत बन सकती है।

मुख्य उद्यान अधिकारी डी.के. तिवारी ने बताया कि ब्लूबेरी एक हाई-वैल्यू फसल है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 1,000 से 1,500 रुपये प्रति किलोग्राम तक रहती है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फलों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे ब्लूबेरी की व्यावसायिक संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

उन्होंने बताया कि नाबार्ड के सहयोग से सहसपुर ब्लॉक के चयनित गांवों में पॉलीहाउस स्थापित किए जाएंगे, जिनमें ब्लूबेरी की खेती की जाएगी। ब्लूबेरी के पौधे लगभग दो वर्षों में फल देना शुरू कर देते हैं। विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों में से 10 किसानों ने इस खेती को अपनाने की इच्छा जताई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नवाचार आधारित ऐसी योजनाएं किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अधिक आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करेंगी। साथ ही इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और कृषि क्षेत्र में आधुनिक एवं लाभकारी खेती को बढ़ावा मिलेगा।


उत्तराखंड में बढ़ता वाहन अग्निकांड का खतरा: चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के बीच बढ़ी चिंता

पूजा भट्ट

उत्तराखंड में इन दिनों चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के चलते सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर पहाड़ी मार्गों तक हर दिन हजारों बसें, टैक्सियां, निजी वाहन और मालवाहक वाहन संचालित हो रहे हैं। इसी बीच चलती गाड़ियों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं ने परिवहन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पिछले कुछ सप्ताह में हरिद्वार, देहरादून, विकासनगर समेत कई क्षेत्रों में चलती बसों, टैक्सियों, पिकअप वाहनों और निजी कारों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। कई मामलों में वाहन कुछ ही मिनटों में जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए। हालांकि अधिकतर घटनाओं में समय रहते यात्रियों को बाहर निकाल लिया गया, जिससे जनहानि टल गई। लेकिन पहाड़ी और संकरे मार्गों पर ऐसी घटनाएं बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ पारस मल्होत्रा के अनुसार, वाहनों में आग लगने का सबसे बड़ा कारण इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खराबी और शॉर्ट सर्किट है। पुरानी या क्षतिग्रस्त वायरिंग, बैटरी टर्मिनल की समस्या, अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अनियमित फिटिंग और गैर-मानक वायरिंग आग की वजह बन सकती है। शॉर्ट सर्किट के बाद पैदा हुई चिंगारी वाहन में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों को तेजी से आग की चपेट में ले सकती है।

इसके अलावा ईंधन प्रणाली में रिसाव भी बड़ा खतरा बनकर सामने आया है। पेट्रोल या डीजल पाइपलाइन में मामूली लीकेज भी इंजन की गर्मी के संपर्क में आकर गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। पुराने वाहनों में पाइपों का घिसना, ढीले क्लैंप और टैंक संबंधी खराबियां जोखिम बढ़ा देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन से ईंधन की गंध महसूस हो तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां भी इस जोखिम को बढ़ाती हैं। लगातार चढ़ाई, गर्म मौसम, लंबी दूरी और जाम की स्थिति में इंजन और ब्रेक सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि कूलिंग सिस्टम सही न हो तो वाहन ओवरहीट होकर आग पकड़ सकता है।

परिवहन अधिकारी निखिल शर्मा के अनुसार, कई मामलों में नियमित सर्विसिंग और तकनीकी फिटनेस की अनदेखी सामने आती है। इसी को देखते हुए 6 और 7 जून को हरिद्वार में यात्री बसों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें 45 बसों के चालान किए गए, 6 बसें सीज की गईं और 5 वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र निरस्त किए गए।

हाल के दिनों में हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर चलती बस में आग और बहादराबाद क्षेत्र में राजस्थान जा रही बस में आग लगने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि वाहन से धुआं निकले या जलने जैसी गंध आए तो तुरंत वाहन रोकें, इंजन बंद करें और यात्रियों को सुरक्षित दूरी पर ले जाएं। यदि आग शुरुआती स्तर पर हो और अग्निशामक यंत्र उपलब्ध हो तो नियंत्रण का प्रयास करें, अन्यथा तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दें। सतर्कता और नियमित वाहन जांच ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका मानी जा रही है।


दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र निकला ड्रग्स सप्लायर, 20 लाख का हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की उत्तर पश्चिम जिला एंटी नारकोटिक्स सेल ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के भीतर चल रहे एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने सत्यवती कॉलेज के स्नातक (Graduation) अंतिम वर्ष के एक छात्र को गिरफ्तार किया है, जिसके पास से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ₹20 लाख की कीमत का 195 ग्राम ‘हाइड्रोपोनिक गांजा’ बरामद हुआ है। आरोपी छात्र की पहचान मूल रूप से केरल के रहने वाले जसीम सियादुल फरसान एम पी (22) के रूप में हुई है।

विजय नगर के पार्क के पास से हुई गिरफ्तारी

उत्तर पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) आकांक्षा यादव ने बताया कि इलाके में नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के मुताबिक विजय नगर डबल स्टोरी स्थित एक पार्क के पास महंगी और हाईटेक ड्रग्स की डील होने वाली थी। इंस्पेक्टर सोमिल शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने तुरंत जाल बिछाया और मौके से आरोपी छात्र जसीम को दबोच लिया, जो इसी इलाके में किराए पर कमरा लेकर रह रहा था।

ऐशो-आराम और शॉर्टकट से अमीर बनने की चाहत

पुलिस पूछताछ में आरोपी छात्र ने कबूल किया कि वह सत्यवती कॉलेज में 8वें सेमेस्टर (अंतिम वर्ष) का छात्र है। महंगे शौक पूरे करने, ऐशो-आराम की जिंदगी जीने और जल्द पैसा कमाने के चक्कर में वह कुछ महीने पहले ही एक बड़े ड्रग्स सिंडिकेट के संपर्क में आया था। वह इस गैंग के लिए मुख्य रूप से ‘डिलीवरी बॉय’ का काम कर रहा था।

कैंपस के छात्रों को बनाता था निशाना

जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों, विशेषकर सत्यवती कॉलेज के छात्रों को इस प्रतिबंधित मादक पदार्थ (हाइड्रोपोनिक वीड) की सप्लाई करता था। आरोपी गैंग के मुख्य सरगना से ड्रग्स की खेप लेता था और फिर उसे ऊंचे दामों पर स्टूडेंट्स को बेच देता था। पुलिस ने इस संबंध में मॉडल टाउन थाने में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

मुख्य सप्लायर की तलाश जारी

डीसीपी आकांक्षा यादव ने बताया कि पुलिस अब उस मुख्य सरगना और सप्लायर की पहचान करने में जुटी है जो केरल के इस छात्र को गांजे की यह महंगी खेप पहुंचाता था। पुलिस का मानना है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस और उसके आसपास सक्रिय पूरे ड्रग सिंडिकेट का पूरी तरह से पर्दाफाश हो पाएगा।


जमीन विवाद में वृद्ध महिला की हत्या मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन और आरोपी गिरफ्तार

कनीना (नारनौल): हरियाणा के नारनौल अंतर्गत कनीना उपमंडल के गांव चेलावास में हुए सनसनीखेज ओमपति हत्याकांड में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जमीन विवाद की रंजिश में एक बुजुर्ग महिला की बेरहमी से हत्या करने के मामले में कनीना थाना पुलिस ने तीन और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान ऋतुराज (निवासी बुडौली, रेवाड़ी) तथा विनोद और संदीप (निवासी चेलावास) के रूप में हुई है। इस मामले में अब तक कुल छह गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

रेवाड़ी रेलवे स्टेशन और बुडौली से हुई गिरफ्तारी

पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए आरोपी संदीप को रेवाड़ी रेलवे स्टेशन से भागते समय दबोचा गया, जबकि ऋतुराज और विनोद को बुडौली से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश किया, जहां से संदीप और ऋतुराज को गहन पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर लिया गया है, वहीं विनोद को न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया गया है।

घातक हथियारों से लैस होकर घर में घुसे थे आरोपी

जांच में सामने आया है कि चेलावास गांव के इस परिवार में लंबे समय से जमीन को लेकर खूनी विवाद चला आ रहा था। इसी रंजिश के चलते बृहस्पतिवार की देर रात आरोपियों ने कुल्हाड़ी, फरसा, बरछी और लाठियों जैसे जानलेवा हथियारों से लैस होकर ओमपति के घर पर धावा बोल दिया था। आरोपियों ने घर के अंदर घुसकर बुजुर्ग महिला पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे वह खून से लथपथ होकर कमरे में गिर गईं।

जेठ ने बयां किया खौफनाक मंजर, ‘डायल-112’ ने बचाई जान

मृतका के जेठ सुरेंद्र ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि रात करीब 12 बजे ओमपति के बेटे जयभगवान ने फोन कर घर पर हमले की सूचना दी थी। जब सुरेंद्र मौके पर पहुंचे, तो घर के बाहर कविता और बिमला लाठियां लेकर पहरा दे रही थीं और अंदर से चीख-पुकार मच रही थी। थोड़ी देर बाद जब दरवाजा खुला, तो आरोपी लखीराम हाथ में फरसा और विनोद व संदीप बरछी लहराते हुए बाहर निकले। आरोपियों ने सुरेंद्र पर भी हमला करना चाहा, लेकिन उन्होंने भागकर अपनी जान बचाई और तुरंत ‘डायल-112’ को सूचित किया।

इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम

सूचना मिलते ही कनीना शहर थाना पुलिस महज कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल ओमपति को नागरिक अस्पताल कनीना पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें पीजीआईएमएस (PGIMS) रोहतक रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कुल 7 लोगों पर मामला दर्ज किया है और फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।


12 साल – मोदी युग में सड़क, रेल, हवाई सेवाओं का हुआ विस्तार

चारधाम ऑल वेदर रोड से लेकर दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर तक, सड़क संपर्क में ऐतिहासिक विस्तार

देहरादून। देश की बागडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में आने के बाद विगत 12 वर्षों के दौरान उत्तराखंड में सड़क, रेल से लेकर हवाई सेवाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व ने इस रफ्तार पर डबल इंजन लगाने का काम किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2016 में चारधाम सड़क परियोजना का शिलान्यास किया था। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के चारों धामों को ऑल वेदर रोड से जोड़ना है, करीब 12,000 करोड़ रुपए लागत की इस परियोजना का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जिस कारण चारधामों सहित पहाड़ के बड़े हिस्से में आवाजाही सुगम हुई है। प्रधानमंत्री ने दिल्ली -देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में एक और सौगात उत्तराखंड को दी है। 11,963 करोड़ रुपए की लागत से बने 210 किमी लंबे इस हाईवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून का सफर ढाई घंटे के अकल्पनीय समय में पूरा करना संभव हो पाया है। केंद्र सरकार के सहयोग से वर्तमान में सितारगंज–टनकपुर, पौंटा साहिब–देहरादून, भानियावाला– ऋषिकेश, काठगोदाम–लालकुआं–हल्द्वानी बाईपास तथा रुद्रपुर बाईपास जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी कार्य जारी है।

आम आदमी ने भरी उड़ान
बीते 12 वर्षों के भीतर राज्य के दूर दराज के क्षेत्रों के लिए भी हवाई सेवाएं शुरु हुई हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य के तीन बड़े एयरपोर्ट जॉलीग्रांट, पंतनगर और पिथौरागढ़ का विस्तार किया जा चुका है। साथ ही आम आदमी के सपनों का पंख देने के लिए शुरु केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत भी प्रदेश में 18 हैलीपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 12 पर सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं। डबल इंजन की सरकार के कार्यकाल में ही देहरादून एयरपोर्ट से अहमदाबाद, भुवनेश्वर, बैंगलोर, मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, पुणे, कुल्लू जैसे शहरों के लिए नियमित हवाई सेवा प्रारंभ हो चुकी है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक हवाई सेवा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री उड़न खटोला योजना संचालित कर रही है। इस योजना के तहत राज्य के पर्वतीय जिलों के लिए देहरादून और हल्द्वानी से हेली सेवा का संचालन किया जा रहा है।

पहाड़ में पहुंचने वाली है रेल
केंद्र में मोदी सरकार बनने बाद राज्य में रेल नेटवर्क में भी तेजी से विस्तार हुआ है। केंद्र सरकार के विशेष प्रयास से 125 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का 72 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सक्रिय प्रयासों से केंद्र सरकार ने टनकपुर – बागेश्वर और डोईवाला से गंगोत्री-यमुनोत्री तक रेललाइन के सर्वे पर भी सहमति प्रदान कर दी है। साथ ही प्रदेश के 11 रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का कार्यकाल उत्तराखंड के विकास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। विगत 12 वर्षों में उत्तराखंड में हर तरह की कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। अब प्रदेश के किसी भी हिस्से से कुछ घंटों में बड़े शहरों तक पहुंच संभव है। राज्य सरकार भी प्रदेश में हर तरह के यातायात साधन विकसित करने का प्रयास कर रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड


मुख्यमंत्री धामी ने ‘मेरी योजना’ पुस्तक के ऑडियो क्लिप का किया अनावरण

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग द्वारा तैयार की गई ‘मेरी योजना’ पुस्तक के ऑडियो क्लिप का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुस्तक में विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं को एक ही स्थान पर संकलित किया गया है, जिससे आम नागरिकों को योजनाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तक में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं के साथ-साथ स्वरोजगार, कौशल विकास, शिक्षा तथा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी योजनाओं की पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया को सरल एवं सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विभाग लगातार नवाचार करें तथा शासनादेशों को भी आमजन की समझ के अनुरूप सरल भाषा में जारी किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे अधिक समय तक कार्यकाल वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार लगातार नए कानूनों और नीतियों से देश की तरक्की को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड को विशेष सहयोग प्राप्त हुआ है तथा केंद्र सरकार राज्य के विकास कार्यों के लिए निरंतर वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इसके परिणामस्वरूप सड़क, रेल, हवाई संपर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक भी विकास की पहुंच सुनिश्चित हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार की कार्यशैली के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई है और प्रति व्यक्ति आय में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य सरकार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, महक क्रांति योजना, एरोमा वैली, मिशन एप्पल तथा अन्य रोजगारपरक योजनाओं के माध्यम से युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित कर रही है।

इस मौके पर सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन दीपक कुमार ने कहा कि ये ऑडियो संस्करण, आकाशवाणी सहित अन्य रेडियो स्टेशन पर प्रसारित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले विभाग मेरी योजना पुस्तक के चार संस्करण प्रकाशित कर चुका है। साथ ही इसका डिजिटल संस्करण भी जारी किया जा चुका है।

इस अवसर पर महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी भी मौजूद थे।


नाबालिग को अगवा कर पांच युवकों ने किया सामूहिक दुष्कर्म, अश्लील वीडियो बनाकर कर रहे थे ब्लैकमेल

तावड़ू –  तावड़ू सदर थाना क्षेत्र से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को अगवा कर पांच आरोपियों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) करने और उसकी अश्लील वीडियो-फोटो बनाकर ब्लैकमेल करने का संगीन अपराध हुआ है। पीड़िता के पिता की शिकायत पर नूंह महिला थाना पुलिस ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।

किराने की दुकान चलाने वाले ने रची साजिश

पीड़िता के पिता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 6 जून की सुबह करीब 5 बजे जब वह उठे तो उनकी नाबालिग बेटी घर से गायब थी। काफी खोजबीन करने के बाद उन्होंने देखा कि एक बाइक सवार दंपति उनकी बेटी को घर के पास छोड़कर फरार हो गया। जब डरी-सहमी बेटी से पूछताछ की गई, तो उसने अपने साथ हुई इस भयानक आपबीती का खुलासा किया।

पीड़िता ने बताया कि उनके घर के पास पहले किराने की दुकान चलाने वाले शौकीन नाम के युवक ने उसकी कुछ तस्वीरें और वीडियो हासिल कर लिए थे। इन्हीं फोटो-वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर वह लगातार पीड़िता को ब्लैकमेल कर रहा था। आरोपी शौकीन ने अपने साथी हसीन, अजरू, अरमान और साद के साथ मिलकर पहले भी पीड़िता के साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया था।

जंगल में ले जाकर वारदात को दिया अंजाम

ब्लैकमेलिंग का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। 5 और 6 जून की दरमियानी रात को आरोपियों ने फिर से पीड़िता को डरा-धमकाकर अगवा किया और उसे गांव बावला के जंगलों में ले गए। वहां पांचों आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और दोबारा अश्लील वीडियो बनाकर किसी को भी बताने पर जान से मारने व वीडियो वायरल करने की धमकी दी।

एक आरोपी नाबालिग, पुलिस की छापेमारी जारी

नूंह महिला थाना पुलिस ने पिता की तहरीर पर आरोपी साद, अजरू, हसीन, शौकीन और अरमान के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है। महिला थाना प्रभारी मंजू ने बताया कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस घिनौने अपराध में शामिल आरोपियों में से एक आरोपी नाबालिग (कानूनी रूप से किशोर) है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।


फरीदाबाद में फर्जी आयुर्वेदिक दवा यूनिट का खुलासा, बिना लाइसेंस चल रहा था कारोबार

फरीदाबाद:  फरीदाबाद के नवीन नगर स्थित दीपावली एंक्लेव में चल रहे एक अवैध दवा कारखाने का भंडाफोड़ हुआ है। केंद्रीय आयुष विभाग (CDSCO), आयुष विभाग हरियाणा और स्थानीय क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की। मौके से भारी मात्रा में अवैध आयुर्वेदिक दवाएं, पैकिंग सामग्री, संदिग्ध पाउडर, खाली कैप्सूल, बोतलें और दवाओं के फर्जी लेबल बरामद किए गए हैं।

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई

शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह वर्कशॉप बिना किसी वैध लाइसेंस और अनुमति के धड़ल्ले से आयुर्वेदिक दवाओं की पैकिंग और बिक्री कर रही थी, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी वर्कशॉप को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया गया है और इसके संचालकों के खिलाफ कानूनी मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

बोरों में भरा मिला पाउडर, ‘एसएस हर्बल’ की सील बरामद

संयुक्त टीम जब दीपावली एंक्लेव की गली नंबर-7 स्थित दो मंजिला भवन में निरीक्षण के लिए पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। इमारत में बड़े पैमाने पर दवा बनाने का खेल चल रहा था। बरामद की गई कुछ पैकिंग सामग्री पर ‘एसएस हर्बल’ (SS Herbal) की सील लगी हुई थी। इसके अलावा कई बोरों में संदिग्ध रासायनिक पाउडर और खाली कैप्सूल मिले। जांच में पता चला कि इस पाउडर को खाली कैप्सूलों में भरकर ऊंचे दामों पर बाजार में खपाया जाता था।

पिता-पुत्र चला रहे थे अवैध सिंडिकेट

क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस अवैध वर्कशॉप को देशबंधु और उनका बेटा संदीप कुमार मिलकर चला रहे थे। पुलिस ने फर्म के प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार को पहले ही हिरासत में ले लिया था, जिससे पूछताछ के बाद इस पूरी अवैध फैक्ट्री का राज खुला। आयुष विभाग की टीम ने मौके से बरामद दवाओं और पाउडर के 12 अलग-अलग सैंपल लिए हैं, जिन्हें परीक्षण और विश्लेषण के लिए लैब भेजा गया है। फिलहाल पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp