Tuesday, June 2nd, 2026

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नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन में सजग इंडिया ने दिया नशामुक्ति और फिटनेस का संदेश

Daily Archives: 02/06/2026

नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन में सजग इंडिया ने दिया नशामुक्ति और फिटनेस का संदेश

28 राज्यों के 1200 खिलाड़ियों को बनाया सजग इंडिया का ब्रांड एम्बेसडर- ललित जोशी

“नशे को ना, फिटनेस को हाँ” से गूंजा नीति घाटी

28 राज्यों के 1200 खिलाड़ियों को ड्रग फ्री इंडिया बनाने के लिए किया आहवान

देहरादून। सीमांत नीति घाटी में आयोजित ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ में नशे के खिलाफ कार्य कर रही संस्था “सजग इंडिया” ने सक्रिय सहभागिता करते हुए नशामुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया। उत्तराखंड पर्यटन विभाग, भारतीय सेना, आईटीबीपी, जिला प्रशासन और सजग इंडिया के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के 28 राज्यों से आए 1000 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सदस्य एवं सजग इंडिया के अध्यक्ष एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने बताया कि सजग इंडिया विगत 15 से अधिक वर्षों से प्रदेशभर में नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चला रही है। नीति घाटी में आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन में प्रतिभाग कर संस्था ने लोगों को “नशे को ना, फिटनेस को हां” का संदेश दिया। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने-अपने राज्यों में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान भी किया।

‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ प्रतियोगिता को 75 किलोमीटर अल्ट्रा रन, 42 किलोमीटर मैराथन, 21 किलोमीटर हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर रन, 5 किलोमीटर रन तथा एमटीबी चैलेंज जैसी विभिन्न श्रेणियों में आयोजित किया गया। आयोजन 31 मई से 2 जून तक किया गया। पहले दिन रिमखिम-नीति-मलारी 75 किलोमीटर अल्ट्रा रन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें 117 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। वहीं मलारी-नीति-मलारी 42 किलोमीटर अल्ट्रा रन में 118 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। अगले दिन 5, 10 एवं 21 किलोमीटर की स्पर्धाओं का आयोजन किया गया। समापन अवसर पर गमसाली से मलारी के मध्य 30 किलोमीटर एमटीबी चैलेंज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।

इस दौरान सजग इंडिया की टीम ने सीमांत गांव नीति, गमसाली, बम्पा, मलारी एवं आसपास के 8 गांवों से आए लोगों से संवाद कर उन्हें मानसिक स्वास्थ्य, फिटनेस तथा नशे से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी। एडवोकेट जोशी ने कहा कि खेल और फिटनेस आधारित ऐसे आयोजन युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में केबिनेट मंत्री भरत चौधरी, गृह सचिव शैलेश बगोली, सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, जिला पूर्ति अधिकारी अंकित पांडेय, कर्नल शान्तनु, आर जे काव्य, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, भारतीय सेना एवं आईटीबीपी के अधिकारी-जवान, सजग इंडिया के सदस्य अभिषेक राणा, नंदनी कुमोला, योगेश चिराल, विवेक, मानसी रावत, सुहानी काला, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।


सहरसा में जमीन विवाद ने लिया हिंसक मोड़, बदमाशों ने युवक को मारी गोली

बिहार। सहरसा जिले के नवहट्टा थाना क्षेत्र में भूमि विवाद ने एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया। कथित कब्जे को लेकर हुए विवाद में एक युवक को गोली मार दी गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है, जबकि पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाकर जांच तेज कर दी है।

सहरसा के नवहट्टा क्षेत्र में जमीन को लेकर चल रहे पुराने विवाद के बीच एक युवक पर देर रात फायरिंग कर दी गई। गोली लगने से घायल युवक को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और बाद में बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र भेजा गया। फिलहाल उसका इलाज निजी अस्पताल में जारी है।

परिजनों के अनुसार, रात के समय सूचना मिली थी कि विवादित जमीन पर कुछ लोग निर्माण कार्य कर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। सूचना मिलते ही युवक मौके पर पहुंचा, जहां मौजूद लोगों से कहासुनी हो गई। इसी दौरान उस पर गोली चला दी गई, जो उसकी जांघ में लगी।

घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रेफर कर दिया। परिवार के सदस्य लगातार उसकी निगरानी में जुटे हैं।

बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। परिजनों ने इसी रंजिश को हमले की वजह बताया है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल से दो खाली कारतूस बरामद किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता भी ली जा रही है ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


वैशाली कोर्ट का बड़ा फैसला, 34 साल पुराने गोलीकांड मामले में पांच दोषियों को सजा

बिहार। वैशाली जिले में तीन दशक से अधिक पुराने आपराधिक मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। वर्ष 1992 में हुई गोलीबारी की घटना से जुड़े इस मामले में करीब 34 साल बाद न्यायालय ने सजा का ऐलान किया। फैसले को न्याय प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

वैशाली जिले के जुरवनपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 1992 में हुई गोलीबारी की घटना के मामले में अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-1) की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी पाते हुए उन्हें अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना उस समय हुई थी जब एक व्यक्ति अपने घर पर मौजूद था। इसी दौरान उसे सूचना मिली कि कुछ लोग उसके घर आने-जाने वाले रास्ते पर अवरोध पैदा कर रहे हैं। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने कथित रूप से उस पर गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया और मुकदमा न्यायालय में चला।

बताया गया कि इस मामले में शुरुआत में कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि मुकदमे की लंबी अवधि के दौरान चार आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि शेष पांच आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर सभी पांच आरोपियों को दोषी ठहराया।

सजा सुनाते हुए न्यायालय ने एक 84 वर्षीय दोषी को उनकी आयु को ध्यान में रखते हुए तीन वर्ष के कारावास की सजा दी तथा उन्हें कानूनी प्रावधानों के तहत राहत प्रदान की। वहीं अन्य चार दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि गंभीर अपराधों के मामलों में न्याय मिलने में समय भले लगे, लेकिन कानून की प्रक्रिया अंततः अपने निष्कर्ष तक पहुंचती है। न्यायालय के इस निर्णय का स्थानीय स्तर पर स्वागत किया गया है।


उत्तराखंड में आस्था का महासंगम, चारधाम में उमड़े लाखों श्रद्धालु

आयुषी

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही है| देश–विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवभूमि पहुँच रहे हैं और पवित्र धामों में दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं|यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं के बढ़ते उत्साह का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता कि अब तक चारधाम और हेमकुंड साहिब में कुल 27 लाख 67 हज़ार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं|

यात्रा के आंकड़ों के अनुसार, केदारनाथ धाम इस बार श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनकर उभरा है। बाबा केदार के दर्शन के लिए अब तक 10 लाख 18 हजार से अधिक श्रद्धालु धाम पहुंच चुके हैं। समुद्र तल से लगभग 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है। सुबह से देर शाम तक मंदिर परिसर में दर्शन के लिए लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। वहीं, भगवान बदरीविशाल के धाम बद्रीनाथ में भी श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। अब तक 7 लाख 80 हजार से अधिक श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम में दर्शन कर चुके हैं। अलकनंदा नदी के तट पर स्थित यह धाम वैष्णव परंपरा का सबसे प्रमुख तीर्थ माना जाता है। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।मां गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री धाम में भी इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अब तक 4 लाख 71 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगोत्री धाम में दर्शन कर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया है। गंगोत्री क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ पर्यटकों की आवाजाही भी लगातार बढ़ रही है।इसी तरह यमुनोत्री धाम, जो चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है, वहां भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। अब तक 4 लाख 58 हजार से अधिक यात्रियों ने मां यमुना के दर्शन किए हैं। कठिन पैदल मार्ग होने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है और प्रतिदिन हजारों लोग धाम पहुंच रहे हैं।

चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी मानी जाती है। इस वर्ष यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पर्यटन उद्योग को जबरदस्त बढ़ावा मिला है। होटल, धर्मशालाएं, होमस्टे, टैक्सी संचालक, रेस्टोरेंट, स्थानीय दुकानदार और हस्तशिल्प कारोबारियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।गढ़वाल मंडल के प्रमुख शहरों और यात्रा मार्गों पर स्थित बाजारों में रौनक बढ़ गई है। स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार और प्रशासन ने यात्रा व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत किया है। यात्रा मार्गों पर पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार तैनात हैं। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है, जबकि स्वास्थ्य केंद्रों और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।मौसम की अनिश्चितताओं को देखते हुए यात्रियों को लगातार मौसम अपडेट और सुरक्षा संबंधी सलाह जारी की जा रही है। प्रशासन श्रद्धालुओं से पंजीकरण कराने, स्वास्थ्य जांच करवाने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील भी कर रहा है।

जून माह की शुरुआत के साथ ही चारधाम यात्रा अपने चरम की ओर बढ़ रही है। स्कूलों की छुट्टियां, अनुकूल मौसम और धार्मिक आयोजनों के चलते आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और तेजी आने की संभावना है। पर्यटन और धर्मस्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस वर्ष चारधाम यात्रा कई नए रिकॉर्ड स्थापित कर सकती है।देवभूमि उत्तराखंड में उमड़ रही आस्था की यह विशाल धारा न केवल धार्मिक विश्वास की ताकत को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि चारधाम यात्रा आज भी करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है।


ऊर्जा बचत के लिए बड़ा फैसला- सरकारी दफ्तरों में AC बंद, कारपूल से चलेगा सिस्टम

पूजा भट्ट

ऊर्जा संकट के बढ़ते दबाव के बीच धामी सरकार ने अब सख्ती का रास्ता अपना लिया है। बिजली बचाने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए बड़े स्तर पर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका सीधा असर सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली पर दिखेगा।ऊर्जा संरक्षण अभियान के तहत यूपीसीएल ने 23 कड़े नियम लागू किए हैं। इन नियमों का मकसद सिर्फ बिजली की बचत ही नहीं, बल्कि फिजूलखर्ची पर भी पूरी तरह लगाम लगाना है।

सबसे बड़ा बदलाव—अब बिजली विभाग के दफ्तरों में एसी का इस्तेमाल लगभग खत्म कर दिया जाएगा। जहां एसी चलाना जरूरी होगा, वहां तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही अनावश्यक रोशनी और सजावटी लाइटिंग पर भी पूरी तरह नियंत्रण रहेगा।

सरकार ने सिर्फ दफ्तरों तक ही नहीं, बल्कि अधिकारियों की जीवनशैली में भी बदलाव लाने की कोशिश की है। अब अफसरों को कारपूलिंग अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट और एम्प्लॉई बस सर्विस का उपयोग करने के लिए कहा गया है, वहीं साइकिल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।

ईंधन और समय की बचत के लिए कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे लंच ब्रेक के दौरान बाहर जाने के बजाय दफ्तर परिसर में ही भोजन करें।खर्चों पर लगाम कसने के लिए गैर-जरूरी घरेलू और विदेशी यात्राओं पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इसके बदले वर्चुअल मीटिंग और हाइब्रिड गवर्नेंस को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी खरीद में भी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है। मेक इन इंडिया नियमों का सख्ती से पालन होगा, जबकि त्योहारों के दौरान स्थानीय हस्तशिल्प और जीआई टैग उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी।इसके अलावा, दफ्तरों की कैंटीन में भी बदलाव देखने को मिलेगा। कम तेल और स्वास्थ्यवर्धक भोजन को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

कुल मिलाकर, धामी सरकार का यह कदम सिर्फ बिजली बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े बदलाव की शुरुआत है—जहां सिस्टम से लेकर व्यवहार तक, हर स्तर पर सुधार की कोशिश की जा रही है।


पहाड़ों पर बढ़ता बोझ, सरकार के पास नहीं जवाब

आयुषी

उत्तराखंड के पर्वतीय शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी, अनियोजित निर्माण और पर्यटन गतिविधियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। चारधाम यात्रा, पर्यटन सीजन और शहरी विस्तार के कारण पहाड़ों पर मानव गतिविधियां पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये संवेदनशील पर्वतीय शहर कितना अतिरिक्त बोझ सुरक्षित रूप से झेल सकते हैं? हैरानी की बात यह है कि इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब आज भी सरकार और संबंधित विभागों के पास स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं है।जोशीमठ भू-धंसाव आपदा के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी पर्वतीय शहरों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक और तकनीकी आकलन कराने की घोषणा की थी। उद्देश्य था कि भविष्य में विकास योजनाओं, भवन निर्माण और पर्यटन प्रबंधन को वैज्ञानिक आधार पर संचालित किया जा सके। लेकिन आपदा के तीन वर्ष बाद भी यह महत्वाकांक्षी योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है।

वर्ष 2023 में जोशीमठ में जमीन धंसने और मकानों में दरारें आने की घटना ने पूरे देश का ध्यान उत्तराखंड के पर्वतीय शहरों की संवेदनशीलता की ओर खींचा था। उस समय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि पहाड़ों पर बढ़ते निर्माण, कमजोर भूगर्भीय संरचना और अनियोजित विकास भविष्य में और बड़े संकट पैदा कर सकते हैं।इसी के मद्देनजर राज्य सरकार ने सभी प्रमुख पर्वतीय नगरों की धारण क्षमता का सर्वे कराने का निर्णय लिया था। इस सर्वे के माध्यम से यह पता लगाया जाना था कि किसी शहर की भूगर्भीय स्थिति, जल संसाधन, सड़क नेटवर्क और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार वहां कितनी आबादी, निर्माण और पर्यटन गतिविधियां सुरक्षित रूप से संचालित की जा सकती हैं।हालांकि, घोषणा के बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं देती। जानकारी के अनुसार, आपदा प्रबंधन विभाग ने अभी तक इस प्रकार का कोई व्यापक सर्वे नहीं कराया है।वहीं, उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने पर्वतीय शहरों की मिट्टी और भूगर्भीय स्थिति का आकलन करने की योजना बनाई थी, ताकि भविष्य में विकास कार्यों और भवन निर्माण के लिए वैज्ञानिक मानक तय किए जा सकें। लेकिन यह योजना भी अभी प्रारंभिक स्तर से आगे नहीं बढ़ पाई है।इस पूरे मामले में विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर भी स्पष्टता नजर नहीं आती।

सचिव आवास आर. राजेश कुमार ने कहा कि यह कार्य उनके विभाग के माध्यम से नहीं कराया गया है। वहीं सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन का कहना है कि सर्वे कराने की जिम्मेदारी उनके विभाग को नहीं सौंपी गई थी।दूसरी ओर, यूएलएलएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने बताया कि संस्थान के स्तर पर शहरों की मिट्टी की धारण क्षमता का आकलन करने की योजना बनाई गई है, जिस पर आगे कार्य किया जाना है। हालांकि उन्होंने भी स्पष्ट किया कि व्यापक शहरी धारण क्षमता आकलन का कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।

उत्तराखंड के कई प्रमुख पर्वतीय शहर जैसे मसूरी, नैनीताल, जोशीमठ, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली पहले से ही सीमित संसाधनों पर निर्भर हैं। गर्मियों और यात्रा सीजन में इन शहरों में लाखों पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे जलापूर्ति, पार्किंग, यातायात, कचरा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव पड़ता है।विशेषज्ञों का मानना है कि बिना धारण क्षमता का वैज्ञानिक अध्ययन किए विकास परियोजनाओं को मंजूरी देना भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय और आपदा संबंधी जोखिम पैदा कर सकता है।
भूगर्भ वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यहां अनियंत्रित निर्माण, पहाड़ों की कटिंग और बढ़ता यातायात भू-स्खलन, भू-धंसाव और अन्य आपदाओं की आशंका को बढ़ा सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार धारण क्षमता का अध्ययन केवल आबादी या भवनों की संख्या तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें भूगर्भीय स्थिरता, जल स्रोतों की उपलब्धता, सड़क क्षमता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे कई पहलुओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है|

उत्तराखंड के पर्वतीय शहर आज विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहे हैं। धारण क्षमता का वैज्ञानिक सर्वे केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि पहाड़ों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस दिशा में कब तक ठोस कार्रवाई करती है और पर्वतीय शहरों को संभावित खतरों से बचाने के लिए कितनी गंभीरता दिखाती है।


भू-माफियाओं पर दून पुलिस का शिकंजा, मुख्य आरोपी महिला गिरफ्तार

देहरादून। देहरादून में करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि हड़पने की साजिश का पुलिस ने खुलासा किया है। फर्जी दस्तावेज तैयार कर मृत व्यक्ति के नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाने और जमीन पर स्टे लेने के मामले में पटेलनगर पुलिस ने मुख्य आरोपी महिला को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया है। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

भू-माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत देहरादून पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पटेलनगर थाना क्षेत्र में करोड़ों रुपये की भूमि पर अवैध कब्जे की कोशिश के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी महिला को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन पर दावा ठोकने और न्यायालय से स्टे हासिल करने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार पटेलनगर निवासी राहुल देव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके ममेरे दादा केवल कृष्ण ने वर्ष 2009 में वसीयत के माध्यम से अपनी संपत्ति उनके नाम कर दी थी। वर्ष 2016 में केवल कृष्ण के निधन के बाद संबंधित संपत्ति का नामांतरण वर्ष 2024 में राहुल देव के नाम दर्ज हो गया था।

शिकायतकर्ता को वर्ष 2026 में भूमि अभिलेखों की जांच के दौरान पता चला कि एक महिला ने कथित तौर पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए स्टे प्राप्त कर लिया है। मामले की जांच शुरू होने पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने करीब एक दशक पहले दिवंगत हो चुके व्यक्ति के नाम पर फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद मृतक के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को प्रस्तुत कर मुख्तारनामा तैयार कराया गया और उसी आधार पर भूमि पर स्वामित्व का दावा किया गया।

साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर रजिस्ट्री कार्यालय, राजस्व विभाग और विभिन्न वित्तीय संस्थानों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। जांच पूरी होने के बाद गठित टीम ने मुख्य आरोपी बबीता देवी, निवासी गंगोह क्षेत्र, जिला सहारनपुर को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस का कहना है कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से करोड़ों रुपये की संपत्ति पर कब्जा करने की योजना बनाई थी। मामले में शामिल अन्य नामजद आरोपियों की तलाश की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।


उत्तराखंड बना खेल आयोजनों का केंद्र- रेखा आर्या

26 राज्यों व 5 केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 खिलाड़ी ले रहे हैं हिस्सा

हल्द्वानी। गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित नेशनल यूथ मुए थाई चैंपियनशिप-2026 का  खेल मंत्री रेखा आर्या ने औपचारिक उद्घाटन किया । 1 जून से 4 जून तक आयोजित हो रही इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के 26 राज्यों एवं 5 केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं।

इस अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड अब राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनकर उभर रहा है। प्रदेश में विकसित हो रहे आधुनिक खेल ढांचे और खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के कारण देशभर के खिलाड़ी यहां अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

खेल मंत्री ने कहा कि मुए थाई केवल एक खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, शारीरिक दक्षता और मानसिक दृढ़ता का उत्कृष्ट माध्यम है। इस खेल में युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी फिटनेस और प्रतिस्पर्धात्मक खेलों के प्रति गंभीरता से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहा है।

रेखा आर्या ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की ऐसी प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का मंच प्रदान करती हैं। साथ ही विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ियों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान भी होता है, जिससे खेलों का स्तर और अधिक ऊंचा होता है।

खेल मंत्री ने प्रतिभागी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खेल भावना के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करें और अपने राज्य व देश का नाम रोशन करें।

इस अवसर पर खेल उपनिदेशक राशिका सिद्दकी, जिला खेल अधिकारी निर्मला पंत, एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज वर्मा, महासचिव राम चौधरी, उत्तराखंड अध्यक्ष सतीश जोशी, निलेश जोशी, भाजपा जिला महामंत्री बिशन कन्वाल, गणेश जलाल, पान सिंह बिष्ट, विजय भंडारी, राजेंद्र सिंह जलाल आदि उपस्थित रहे।


अमेरिका में ‘ऑपरेशन चेकमेट’ के तहत 30 भारतीय ट्रक चालक गिरफ्तार

न्यूयॉर्क। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है। अमेरिकी सीमा सुरक्षा एजेंसियों ने एक विशेष अभियान में कई अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया है, जिनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोग व्यावसायिक ट्रक चालक के रूप में काम कर रहे थे और अब उनके खिलाफ निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा एजेंसी (CBP) ने जानकारी दी है कि मई महीने में एरिजोना के युमा सेक्टर में चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन चेकमेट’ के दौरान कुल 52 लोगों को हिरासत में लिया गया। जांच में सामने आया कि इनमें से कई लोग अमेरिका में वैध आव्रजन स्थिति के बिना रह रहे थे और व्यावसायिक वाहनों का संचालन कर रहे थे।

अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए लोगों में 36 व्यक्ति ट्रक चालक थे, जिनमें 30 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य देशों के नागरिक भी इस कार्रवाई की जद में आए हैं। जांच के दौरान पाया गया कि कई लोगों के पास विभिन्न अमेरिकी राज्यों से जारी कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस थे, जबकि कुछ के पास वैध ड्राइविंग दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे।

एजेंसी का कहना है कि कई गिरफ्तार व्यक्तियों के रोजगार संबंधी दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद वे व्यावसायिक गतिविधियों में संलग्न थे। इसी आधार पर उनके खिलाफ संघीय कानूनों के तहत कार्रवाई की गई है।

सीबीपी के अनुसार ‘ऑपरेशन चेकमेट’ का उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना है जो आव्रजन नियमों का उल्लंघन करते हुए व्यावसायिक वाहन चला रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था दोनों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

युमा सेक्टर के अधिकारियों ने कहा कि अभियान का मकसद सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और ऐसे चालकों को चिन्हित करना है जो वैध दस्तावेजों के बिना सड़कों पर भारी वाहन चला रहे हैं। वहीं, अमेरिकी प्रशासन पहले भी विदेशी नागरिकों को व्यावसायिक वाहन संचालन के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपना चुका है।

हाल के वर्षों में अमेरिका में भारी वाहनों से जुड़े कई सड़क हादसों के मामलों में विदेशी मूल के चालकों के नाम सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में यह कार्रवाई भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


नारनौल में रेडीमेड कपड़ों के व्यापारी पर हमला, फिरौती नहीं देने पर दुकान में की तोड़फोड़

 नारनौल- हरियाणा के नारनौल शहर में मंगलवार को एक व्यापारी पर कथित रूप से फिरौती की मांग को लेकर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। नया बाजार स्थित एक रेडीमेड कपड़ों की दुकान में घुसे युवकों ने दुकानदार के साथ मारपीट की और दुकान में जमकर तोड़फोड़ कर दी। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

पीड़ित व्यापारी नंद किशोर, जो श्याम कॉलोनी के निवासी हैं, नया बाजार में रेडीमेड कपड़ों का कारोबार करते हैं। उनके अनुसार कुछ लोग पिछले कुछ समय से उनसे पांच लाख रुपये की मांग कर रहे थे। आरोप है कि रकम नहीं देने पर मंगलवार सुबह कई युवक लाठी-डंडों के साथ उनकी दुकान में पहुंचे और हमला कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपियों ने दुकान के सामान को नुकसान पहुंचाया और व्यापारी के साथ मारपीट की। हमले में घायल हुए दुकानदार को स्थानीय लोगों की मदद से नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही बाजार क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।


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