Thursday, June 18th, 2026

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दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय बाल तस्करी नेटवर्क का किया पर्दाफाश, 12 आरोपी गिरफ्तार, 5 नवजात शिशु सुरक्षित बरामद

Daily Archives: 18/06/2026

दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय बाल तस्करी नेटवर्क का किया पर्दाफाश, 12 आरोपी गिरफ्तार, 5 नवजात शिशु सुरक्षित बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट टीम को मानव तस्करी के खिलाफ एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने एक बेहद सक्रिय अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए पांच नवजात शिशुओं को तस्करों के चंगुल से सुरक्षित बचा लिया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जिला दिल्ली पुलिस के पुलिस उपायुक्त  जल्द ही एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता  करने जा रहे हैं। इस प्रेस वार्ता में डीसीपी इस गिरोह के तौर-तरीकों, शिशुओं को कहाँ से लाया जा रहा था और इन्हें कहाँ बेचने की योजना थी, जैसे तमाम अहम खुलासों से पर्दा उठाएंगे। पुलिस अब इस बात की जांच में जुटी है कि इस नेटवर्क के तार देश के और किन-किन राज्यों से जुड़े हुए हैं।


सीएम धामी के विजन को एमडीडीए ने दी रफ्तार, बंशीधर तिवारी का एक्शन मोड- हरियाली भी, बुलडोजर भी

सिटी फॉरेस्ट, कालसी घाट, आमवाला तरला से धौलास आवासीय योजना तक उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का मैराथन निरीक्षण

प्रधानमंत्री मोदी के ‘सूर्य घर’ और हरित ऊर्जा अभियान को बढ़ावा, सिटी फॉरेस्ट पार्क में सोलर प्लांट बना मिसाल

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सुशासन, पर्यावरण संरक्षण और नियोजित शहरी विकास के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने विकास कार्यों की रफ्तार तेज कर दी है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने अधिकारियों के साथ विभिन्न विकास परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया और स्पष्ट संदेश दिया कि गुणवत्ता, समयबद्धता और जनहित से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान हरित विकास, आधुनिक सुविधाओं, ऊर्जा संरक्षण, आवासीय योजनाओं और अवैध निर्माणों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर विशेष जोर दिया गया।

सिटी फॉरेस्ट बनेगा प्रकृति और आधुनिकता का संगम
सहस्त्रधारा रोड स्थित सिटी फॉरेस्ट का निरीक्षण करते हुए उपाध्यक्ष ने इसे उत्तराखंड के सबसे आकर्षक शहरी पार्कों में विकसित करने का खाका सामने रखा। उन्होंने पुराने ट्री हाउस का नवीनीकरण, पैदल मार्गों के दोनों ओर बारहमासी रंग-बिरंगे फूलों का रोपण, नदी किनारे मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बांस के पौधे लगाने, लोटस फाउंटेन विकसित करने और भारत माता मंदिर के निर्माण के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि पार्क में स्थापित 120 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र बिजली खर्च में लगभग 90 प्रतिशत तक की बचत कर रहा है, जिसे हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है।

जुलाई से आमवाला तरला आवासीय योजना में मिलेगा आशियाना
रिकॉर्ड समय में तैयार की गई आमवाला तरला आवासीय योजना का निरीक्षण करते हुए उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को जुलाई माह से लाभार्थियों को कब्जा सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। परिसर में उन्होंने स्वयं पौधारोपण किया तथा छायादार और फलदार वृक्षों की संख्या बढ़ाने पर बल दिया। इसके अलावा खुली पार्किंग को कवर करने और पूरे परिसर की ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि भविष्य में जलभराव जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

कूड़े से संसाधन बनाने की दिशा में नई पहल
सहस्त्रधारा रोड स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड के निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष ने वहां पड़े ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक पुनः उपयोग की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस दिशा में नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के साथ संयुक्त बैठक आयोजित कर ठोस रणनीति बनाने का निर्णय लिया गया है। उद्देश्य यह है कि कचरे को बोझ नहीं बल्कि संसाधन के रूप में विकसित किया जाए और पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक उपयोगिता भी सुनिश्चित हो।

कालसी घाट का जुलाई में होगा लोकापर्ण
कालसी यमुना नदी तट पर विकसित किए जा रहे घाट का निरीक्षण करते हुए उपाध्यक्ष ने कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए घाट पर मजबूत चेन लगाने, आसपास व्यापक पौधारोपण और हरित क्षेत्र विकसित करने तथा जुलाई तक सभी शेष कार्य पूर्ण कर लोकार्पण की तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को जल्द मिलेगी सौगात
धौलास में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन परियोजना का निरीक्षण करते हुए बताया गया कि 15 में से 10 टावरों का निर्माण पूरा हो चुका है। उपाध्यक्ष ने निर्देश दिए कि जिन टावरों का कार्य पूर्ण हो चुका है, उनमें 30 जुलाई से लाभार्थियों को कब्जा सौंपने की प्रक्रिया हर हाल में शुरू कर दी जाए। इससे सैकड़ों परिवारों का अपने घर का सपना साकार होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ेगा।

“हर परियोजना समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरी होगी”- बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप एमडीडीए केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, हरित ऊर्जा, आधुनिक शहरी सुविधाओं और सुव्यवस्थित विकास के नए मानक स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि सिटी फॉरेस्ट, कालसी घाट, आवासीय योजनाएं और अन्य परियोजनाएं जनसुविधाओं को बेहतर बनाने की दृष्टि से विकसित की जा रही हैं। अवैध प्लॉटिंग और निर्माण के खिलाफ भविष्य में भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी तथा किसी भी प्रकार की नियमविरुद्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं तय समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरी हों और आमजन को उनका लाभ शीघ्र मिल सके।

“जनहित और गुणवत्ता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता”- मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण की सभी विकास योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और प्रत्येक परियोजना को निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवासीय योजनाओं में बुनियादी सुविधाओं, जल निकासी, हरित क्षेत्र और पार्किंग व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता मिल सके। साथ ही अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी और नियोजित विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।


सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गदरपुर से युवक गिरफ्तार, एसटीएफ की जांच जारी

देहरादून/ऊधमसिंहनगर। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सोशल मीडिया के माध्यम से कथित तौर पर कट्टरपंथी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ के अनुसार आरोपी की पहचान गदरपुर निवासी मो. सलाउद्दीन पुत्र अब्दुल मलिक के रूप में हुई है।

एसटीएफ को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर आरोपी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सिग्नल पर कुछ ऐसे समूह, चैट और सामग्री मिलने का दावा किया गया है, जिनकी जांच कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े होने के एंगल से की जा रही है।

एसटीएफ के मुताबिक प्रारंभिक जांच में आरोपी के कुछ संदिग्ध संपर्कों और नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। मामले में अंतरराज्यीय नेटवर्क की संभावना को देखते हुए उत्तर प्रदेश में भी संभावित जुड़े लोगों के संबंध में दबिश दी गई है।

एसटीएफ ने बताया कि देर रात चलाए गए सर्च अभियान के दौरान आरोपी की निशानदेही पर एक इंग्लिश पिस्तौल, पांच कारतूस, चार डेटोनेटर और दो एके-47 के कारतूस बरामद किए गए हैं। बरामद सामान की भी जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 152, 61(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियों को भी मामले से अवगत कराया गया है।

एसटीएफ ने आमजन से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को देश विरोधी गतिविधियों से जुड़ी कोई जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।


टिहरी जिले के दिव्यांग पुनर्वास केंद्र पर ताला लटकने के आसार, बजट के अभाव में संचालन ठप

एक साल से नहीं मिला बजट, ग्रामीण क्षेत्र विकास समिति ने संचालन से खड़े किए हाथ

नई टिहरी। टिहरी जिले में दिव्यांगजनों को सहारा देने वाला जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) बजट संकट से जूझ रहा है। पिछले करीब एक साल से बजट नहीं मिलने के कारण केंद्र का संचालन कर रही ग्रामीण क्षेत्र विकास समिति (राड्स) ने अब संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में जिले के हजारों दिव्यांगजनों को मिलने वाली पुनर्वास सेवाएं प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।

समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र पिछले कई वर्षों से दिव्यांगजनों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। केंद्र में दिव्यांग प्रमाण पत्र, सहायक उपकरण, फिजियोथैरेपी, स्पीच थैरेपी, विशेष शिक्षा, मानसिक दिव्यांगजनों के लिए पुनर्वास सेवाएं सहित कई सुविधाएं दी जाती हैं।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार टिहरी जिले में करीब 15 हजार दिव्यांगजन पंजीकृत हैं, जिनमें लगभग 11 हजार शारीरिक और करीब चार हजार मानसिक दिव्यांग शामिल हैं। केंद्र बंद होने से इन लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी सेवाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

डीडीआरसी में फिजियोथैरेपिस्ट, स्पीच थैरेपिस्ट, विशेष शिक्षक, पुनर्वास कार्यकर्ता सहित अन्य विशेषज्ञ सेवाएं देते हैं। केंद्र के माध्यम से दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद की जाती है।

वहीं संचालन संस्था राड्स ने बजट उपलब्ध न होने के कारण आगे केंद्र चलाने में असमर्थता जताई है। इस संबंध में जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि जल्द ही जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर केंद्र संचालन को लेकर निर्णय लिया जाएगा।


उत्तराखंड जल्द बनेगा ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य, कैबिनेट में रखा जाएगा प्रस्ताव: डॉ. धन सिंह रावत

देहरादून। उत्तराखंड शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश को ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य घोषित करने का प्रस्ताव जल्द ही राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शासन को शीघ्र भेजने के निर्देश दिए हैं।

रावत ने बताया कि केंद्र सरकार के उल्लास(Understanding Lifelong Learning for All in Society) कार्यक्रम के तहत तय साक्षरता मानकों को उत्तराखंड पूरा कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुकी है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने के करीब है। कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे भारत सरकार को भेजा जाएगा, जिसके बाद प्रदेश को ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य का दर्जा मिल सकता है।

मंत्री ने बताया कि उल्लास कार्यक्रम के तहत वयस्कों के लिए बुनियादी साक्षरता, जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल और सतत शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट इकाइयों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लेकर निरक्षर वयस्कों को शिक्षित किया गया। इसमें महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित वर्गों को प्राथमिकता दी गई।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में महिला साक्षरता दर कम थी, वहां विशेष अभियान चलाए गए। अब तक देश के पांच राज्य—मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम—पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल कर चुके हैं।

क्या होता है पूर्ण साक्षर राज्य?

केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के अनुसार जब किसी राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की साक्षरता दर लगभग 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है और गैर-साक्षर लोगों तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा हो जाता है, तब उसे ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य माना जाता है।


मेरठ से ऋषिकेश तक दौड़ेगी नमो भारत ट्रेन, हाईस्पीड कनेक्टिविटी का सपना होगा साकार

मोदीपुरम से लक्ष्मणझूला तक 150 किमी लंबे आरआरटीएस कॉरिडोर का होगा सर्वे, डीपीआर की तैयारी शुरू

देहरादून। उत्तराखण्ड के लिए तेज और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ी पहल होने जा रही है। मेरठ के मोदीपुरम से ऋषिकेश के पास लक्ष्मणझूला तक हाईस्पीड नमो भारत ट्रेन (आरआरटीएस) के विस्तार की योजना पर सहमति बन गई है।

उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के बीच इस परियोजना को आगे बढ़ाने को लेकर सहमति बनी है। जल्द ही प्रस्तावित कॉरिडोर की डीपीआर तैयार करने के लिए सर्वे शुरू किया जाएगा।

दिल्ली से मेरठ के मोदीपुरम तक नमो भारत ट्रेन का संचालन इसी वर्ष फरवरी में शुरू हो चुका है। इसके बाद इस सेवा को ऋषिकेश तक विस्तार देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार प्रयास कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर इस संबंध में प्रस्ताव भी सौंपा था।

प्रस्तावित आरआरटीएस कॉरिडोर करीब 150 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें 72 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश और 78 किलोमीटर हिस्सा उत्तराखण्ड में आएगा। यह ट्रैक मेरठ के मोदीपुरम से शुरू होकर मुजफ्फरनगर होते हुए उत्तराखण्ड में प्रवेश करेगा। इसके बाद रुड़की, हरिद्वार स्थित हर की पैड़ी से होते हुए ऋषिकेश के अंतिम छोर लक्ष्मणझूला तक पहुंचेगा।

नमो भारत ट्रेन की रफ्तार करीब 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसके शुरू होने के बाद दिल्ली से ऋषिकेश का सफर सड़क मार्ग से लगने वाले पांच से छह घंटे की जगह लगभग ढाई से तीन घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे तीर्थ यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी।

परियोजना को गति देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने अपर सचिव रीना जोशी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, जबकि एनसीआरटीसी की ओर से भी नोडल अधिकारी नामित किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी परियोजना को लेकर सहमति दे दी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेरठ से ऋषिकेश तक नमो भारत ट्रेन का विस्तार उत्तराखण्ड की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा। इससे राज्य में पर्यटन, विकास और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और एनसीआरटीसी के साथ मिलकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने के लिए काम कर रही है।


जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में ग्रामीण विकास कार्यों की समीक्षा, जनसमस्याओं के समाधान पर जोर

देहरादून। जिला पंचायत अध्यक्ष सुखविंदर कौर की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभागार में जिला पंचायत बोर्ड की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष अभिषेक, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं जिला पंचायत सदस्य मौजूद रहे।

बैठक में जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ी जनसमस्याओं और विकास कार्यों के प्रस्तावों को बैठक में रखा।

जनप्रतिनिधियों ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल से संबंधित समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। जिला पंचायत अध्यक्ष सुखविंदर कौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध पूरा किया जाए और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जाए।

उन्होंने कहा कि जिला पंचायत और विभागीय अधिकारियों के बेहतर समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति मिलेगी।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने विभागों द्वारा संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी देते हुए अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्ता और समय सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

बैठक में उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।


यमकेश्वर के अरविन्द पयाल ने गांव में ही तलाशा रोजगार का रास्ता, मुर्गी पालन से बने आत्मनिर्भर

यमकेश्वर(पौड़ी गढ़वाल )। पहाड़ों से पलायन के दौर में यमकेश्वर ब्लॉक के दोषण गांव निवासी अरविन्द पयाल ने गांव में रहकर स्वरोजगार की ऐसी राह चुनी है, जो युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। अरविन्द ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का जरिया बनाया और मेहनत के दम पर इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

अरविन्द बताते है की वह खुद एक निजी कंपनी में काम करते है लेकिन उन्हें लगा की वह गांव में कुछ स्वरोजगार कर सकते है ऐसे में उन्होंने मुर्गी पालन का विकल्प चुना।

साथ ही उनका कहना है की यदि सरकार और प्रोत्साहन दे उद्यान विभाग के द्वारा तो गांव में जो भी लोग खुद का स्वरोजगार करना चाहते है तो वह और अधिक आत्मनिर्भर बन सकते है।उन्होंने बताया की आज उनके पोल्ट्री फार्म से ऋषिकेश, देहरादून और हरिद्वार में उनके द्वारा उत्पादित मुर्गीयों के अंडो की भारी डिमांड है जो की कम पड़ जाती है।

रोजगार के लिए शहरों की ओर जाने के बजाय अरविन्द ने अपने गांव में ही अवसर तलाशे। मुर्गी पालन शुरू कर उन्होंने न सिर्फ खुद को रोजगार से जोड़ा, बल्कि यह भी दिखाया कि पहाड़ों में रहकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है।

(वीडियो में देखें अरविन्द पयाल की स्वरोजगार कहानी, कैसे मुर्गी पालन से उन्होंने बनाई अपनी अलग पहचान, वह चाहते है की सरकार उनके जैसे लोगो को और अधिक प्रोत्साहित करें ..)

अरविन्द बताते हैं कि शुरुआत छोटे स्तर से की गई थी, लेकिन धीरे-धीरे अनुभव और मेहनत के साथ काम को बढ़ाया गया। उनका प्रयास है कि अधिक से अधिक युवा स्वरोजगार को अपनाएं और अपने क्षेत्र में रहकर आगे बढ़ें।

आज अरविन्द पयाल की यह पहल उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर होते हैं। उनकी कहानी संदेश देती है कि अगर सोच सकारात्मक हो और मेहनत करने का जज्बा हो तो गांव में रहकर भी सफलता हासिल की जा सकती है।

यमकेश्वर के अरविन्द पयाल ने साबित किया है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत अपने घर-गांव से भी की जा सकती है।


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