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राजाजी में फिर गूंजेगी बाघों की दहाड़

Daily Archives: 25/06/2026

राजाजी में फिर गूंजेगी बाघों की दहाड़

आयुषी

उत्तराखंड में बाघ संरक्षण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने की योजना को नई गति मिल गई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से पांच और बाघों के स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। इनमें तीन बाघिन और दो बाघ शामिल हैं। इन बाघों के आने से राजाजी के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने हाल ही में एनटीसीए के समक्ष दूसरे चरण की बाघ पुनर्वास योजना का प्रस्तुतीकरण दिया था। इसके बाद प्राधिकरण ने कॉर्बेट से पांच और बाघों को स्थानांतरित करने पर सहमति प्रदान कर दी। वन अधिकारियों का मानना है कि इससे पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ेगी और प्राकृतिक प्रजनन को भी बढ़ावा मिलेगा।राजाजी के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करने के लिए वर्ष 2020 में बाघ पुनर्वास परियोजना शुरू की गई थी। परियोजना के पहले चरण में वर्ष 2020 से 2025 के बीच कॉर्बेट से कुल पांच बाघों को यहां स्थानांतरित किया गया।

इनमें तीन बाघिन और दो बाघ शामिल थे। सभी बाघों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद उन्हें सैटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा गया था ताकि उनकी गतिविधियों और स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके।पहले चरण के तहत 24 दिसंबर 2020 को पहला बाघ मोतीचूर रेंज में छोड़ा गया था। इसके बाद नौ जनवरी 2021 को एक बाघिन, 20 मई 2023 को दूसरी बाघिन, 16 मार्च 2024 को तीसरी बाघिन और एक मई 2025 को एक बाघ को स्थानांतरित किया गया।

मई 2025 में पांचवें बाघ को छोड़े जाने के साथ परियोजना का पहला चरण पूरा हो गया था।हालांकि इस दौरान चुनौतियां भी सामने आईं। वर्ष 2024 में पश्चिमी क्षेत्र में एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया, जिससे परियोजना को बड़ी सफलता माना गया। लेकिन बाद में दो शावकों का गुलदार ने शिकार कर लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गुलदार के हमले की पुष्टि हुई थी। वहीं अन्य दो शावकों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। इसके अलावा पिछले पांच वर्षों में स्थानांतरित किए गए पांच बाघों में से तीन के पार्क क्षेत्र से बाहर चले जाने की आशंका भी जताई गई है।वर्तमान में राजाजी टाइगर रिजर्व में लगभग 55 बाघ हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश पूर्वी क्षेत्र में पाए जाते हैं। पूर्वी हिस्सा कॉर्बेट लैंडस्केप से जुड़ा होने के कारण बाघों की आवाजाही यहां बनी रहती है। इसके विपरीत पश्चिमी क्षेत्र लंबे समय तक लगभग बाघ विहीन रहा है। गंगा नदी, चीला नहर, सड़कें और अन्य मानव निर्मित अवरोध बाघों की आवाजाही में बाधा बने हुए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी क्षेत्र में पर्याप्त वन संसाधन उपलब्ध हैं और यह बड़ी संख्या में बाघों को सहारा देने की क्षमता रखता है।

राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी हिस्से में हरिद्वार, कांसरो, मोतीचूर, धोलखंड, बेरीबाड़ा, चीलावाली और रामगढ़ रेंज शामिल हैं। वन विभाग को उम्मीद है कि नए बाघों के आगमन से इस क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ेगी और आने वाले वर्षों में यहां एक मजबूत एवं स्थायी बाघ आबादी विकसित हो सकेगी।बाघ पुनर्वास परियोजना के दूसरे चरण को मंजूरी मिलने के बाद अब सभी की निगाहें नए बाघों के स्थानांतरण और उनके सफल पुनर्वास पर टिकी हैं। यदि यह प्रयास सफल रहा तो राजाजी का पश्चिमी क्षेत्र उत्तर भारत के महत्वपूर्ण बाघ आवासों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकता है।


अब शादी और VIP कार्यक्रमों में नहीं दिखेगी गंदगी, दून निगम ने बनाया खास प्लान

पूजा भट्ट

देहरादून में बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ रहे कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए नगर निगम ने नई पहल शुरू की है। अब शादी समारोह, जन्मदिन पार्टियां, धार्मिक आयोजन, भंडारे और वीआईपी कार्यक्रमों के बाद उत्पन्न होने वाले कचरे के उठान और निस्तारण की जिम्मेदारी नगर निगम की विशेष क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) संभालेगी। इसके लिए नगर निगम ने शहर को पांच जोन में विभाजित कर प्रत्येक जोन में अलग टीम गठित की है, ताकि किसी भी आयोजन के दौरान नियमित सफाई व्यवस्था प्रभावित न हो। अभी तक ऐसी स्थितियों में नगर निगम को वार्डों में तैनात सफाई कर्मचारियों और वाहनों को दूसरी जगह भेजना पड़ता था, जिससे संबंधित क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो जाती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब आयोजनों और विशेष कार्यक्रमों के लिए अलग टीम काम करेगी।

नगर निगम के अनुसार, प्रत्येक क्यूआरटी टीम सुपरवाइजर की निगरानी में काम करेगी और इसमें पर्यावरण मित्रों को शामिल किया गया है। इन टीमों को अलग पहचान देने के लिए विशेष वर्दी दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर पेड़ हटाने या आपात स्थितियों से निपटने के लिए कटर मशीन समेत अन्य आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। यह टीमें केवल आयोजनों का कचरा नहीं उठाएंगी, बल्कि आपदा या वीआईपी कार्यक्रमों के दौरान भी त्वरित सफाई और सहयोग का काम करेंगी। निगम का उद्देश्य पुलिस और आपदा प्रबंधन की तर्ज पर स्वच्छता के क्षेत्र में भी त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करना है।

नई व्यवस्था के तहत यदि शहर में कहीं शादी, पार्टी, धार्मिक कार्यक्रम या अन्य आयोजन हो रहा है और वहां बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होने की संभावना है, तो आयोजक नगर निगम के कंट्रोल रूम या संबंधित कार्यालय को सूचना दे सकेंगे। निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद क्यूआरटी टीम मौके पर पहुंचेगी और एक घंटे के भीतर कचरा उठाने की प्रक्रिया पूरी करेगी। नगर निगम ने छोटे आयोजनों के लिए दो हजार रुपये और बड़े आयोजनों के लिए पांच हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया है। इसके लिए टीमों को विशेष वाहन भी उपलब्ध कराए गए हैं, जो मौके पर पहुंचकर रसीद जारी करने के बाद कचरा उठान का कार्य करेंगी।

नगर निगम का कहना है कि देहरादून की आबादी वर्तमान में लगभग 15 लाख तक पहुंचने का अनुमान है और इसके साथ ही शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। फिलहाल नगर निगम रोजाना करीब 600 टन कचरे का उठान कर रहा है। महानगर में बड़ी संख्या में सामाजिक, पारिवारिक, धार्मिक और सरकारी कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनसे बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। कई मामलों में आयोजनकर्ता नगर निगम की मदद लेते हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर कचरा खुले प्लॉट, नदी-नालों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर फेंक दिया जाता है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होती है। नगर निगम का मानना है कि नई QRT व्यवस्था से आयोजनों के बाद कचरे के वैज्ञानिक और समयबद्ध निस्तारण को बढ़ावा मिलेगा, शहर की नियमित सफाई व्यवस्था बनी रहेगी और देहरादून को अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने में मदद मिलेगी।


धामी सरकार की बड़ी सौगात, मात्र 3 लाख रुपये में मिलेगा आधुनिक फ्लैट

तैयार हुई उत्तराखंड की सबसे बड़ी EWS आवासीय परियोजनाओं में से एक

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत रुद्रपुर के बागवाला में साकार हो रहा 1872 परिवारों का आशियाने का सपना, जल्द लाभार्थियों को सौंपी जाएंगी चाबियां

देहरादून।  गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने के संकल्प के साथ उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार मिलकर एक ऐसी आवासीय परियोजना को अंतिम रूप दे रही हैं, जो हजारों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाली है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के ग्राम बागवाला में 1872 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की सतत निगरानी में विकसित यह परियोजना राज्य में गरीब परिवारों के लिए सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण (उधमसिंह नगर) द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को अपना घर उपलब्ध कराना है, जिनके पास अब तक पक्का मकान नहीं है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद हजारों लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार होने जा रहा है।

गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की नई बस्ती
‘अपना घर, अपना स्वाभिमान’ की भावना के साथ तैयार की गई इस परियोजना में कुल 1872 आवासों का निर्माण किया गया है। इनमें से 832 फ्लैट पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि 512 अतिरिक्त फ्लैटों में अंतिम चरण के छोटे-मोटे कार्य तेजी से चल रहे हैं। सरकार की योजना शीघ्र ही परियोजना का लोकार्पण कर लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपने की है। सबसे बड़ी बात यह है कि छह लाख रुपये लागत वाले इन आधुनिक फ्लैटों के लिए लाभार्थी को मात्र तीन लाख रुपये ही देने होंगे। शेष राशि भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार द्वारा डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सब्सिडी के रूप में वहन की जाएगी। इससे सीमित आय वाले परिवारों को भी सम्मानजनक आवास प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस आवासीय परिसर
करीब 6.0281 हेक्टेयर भूमि पर विकसित इस आवासीय परियोजना का निर्माण क्षेत्रफल लगभग 39,220 वर्ग मीटर है। योजना में कुल 23 बहुमंजिला आवासीय ब्लॉक बनाए गए हैं, जिनमें आधुनिक शहरी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक फ्लैट में एक बेडरूम, ड्राइंग रूम, किचन, टॉयलेट, बाथरूम और बरामदा उपलब्ध कराया गया है। लगभग 28 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले इन आवासों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि छोटे परिवारों को पर्याप्त सुविधा और बेहतर जीवन स्तर मिल सके। परियोजना की विशेषता यह है कि सभी भवन भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित किए गए हैं। इसके साथ ही चौड़ी सड़कों, पर्याप्त पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर विशेष जोर
बागवाला आवासीय परियोजना को केवल मकानों का समूह नहीं, बल्कि एक आधुनिक और टिकाऊ आवासीय परिसर के रूप में विकसित किया गया है। परिसर में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), सीवरेज सिस्टम और अत्याधुनिक एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की व्यवस्था की गई है।परियोजना में हरे-भरे पार्क, बच्चों के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र और सौंदर्यीकरण के व्यापक कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। हॉर्टिकल्चर का कार्य पूर्ण होने से परिसर का वातावरण आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल बन गया है।

बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ेगी सुविधा
आवासीय परिसर का स्थान भी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। बागवाला स्थित यह परियोजना मुख्य बाजार और प्रमुख मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर है। बस स्टेशन छह किलोमीटर और रेलवे स्टेशन आठ किलोमीटर दूर स्थित है। बेहतर सड़क संपर्क और शहर के प्रमुख क्षेत्रों से नजदीकी के कारण यहां रहने वाले परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।

पारदर्शी होगी आवंटन प्रक्रिया
सरकार ने आवास आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। पात्र लाभार्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। आवेदन के लिए आवेदक का प्रधानमंत्री आवास योजना के एमआईएस पोर्टल पर पंजीकृत होना आवश्यक है। साथ ही आवेदक को 17 जून 2015 से पूर्व का उत्तराखंड निवासी होना चाहिए तथा उसकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। मात्र पांच हजार रुपये जमा कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। शेष राशि के भुगतान के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों पर खरा परिसर
परियोजना में सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। परिसर में आरसीसी बाउंड्री वॉल और मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण पूरा हो चुका है। सभी ब्लॉकों में विद्युत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं तथा यूपीसीएल द्वारा इलेक्ट्रिकल सेफ्टी जांच भी पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा फायर डिपार्टमेंट द्वारा फायर फाइटिंग सिस्टम का सफल परीक्षण किया जा चुका है। जलापूर्ति व्यवस्था के लिए अंडरग्राउंड टैंक और ओवरहेड टैंक स्थापित किए गए हैं, जबकि एसटीपी भी परीक्षण चरण में पहुंच चुका है।

धामी सरकार की समावेशी विकास सोच का उदाहरण
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकसित बागवाला परियोजना उत्तराखंड में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार ऐसी योजनाओं को गति दे रही है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों और विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिल रहा है। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की निगरानी में तेजी से आगे बढ़ी यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में जब हजारों परिवार अपने नए घरों में प्रवेश करेंगे, तब यह केवल मकानों का हस्तांतरण नहीं होगा, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की एक नई शुरुआत होगी। बागवाला की यह आवासीय बस्ती उत्तराखंड में गरीब परिवारों के जीवन स्तर को बदलने वाली एक नई पहचान बनने जा रही है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के बागवाला में विकसित की गई यह परियोजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना में गुणवत्ता, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरे किए गए हैं। शीघ्र ही पात्र लाभार्थियों को आवासों का आवंटन कर चाबियां सौंपी जाएंगी, जिससे हजारों परिवारों का अपने घर का सपना साकार होगा।


करनाल में जमीन विवाद ने ली जान, पोते ने दादा को घर में घुसकर मारी गोली

करनाल (हरियाणा): करनाल के बड़ा गांव में जमीन के विवाद को लेकर रिश्तों को तार-तार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक कलयुगी पोते ने अपने ही 70 वर्षीय बुजुर्ग दादा दर्शन सिंह की घर में घुसकर गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी ने बुजुर्ग के सीने में बेहद नजदीक से गोली मारी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत और मातम का माहौल है।

परिजनों के मुताबिक, परिवार में जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। मृतक दर्शन सिंह के बड़े बेटे की मौत के बाद, उनके परिवार को हिस्से के बदले धनराशि दे दी गई थी। इसके बाद दर्शन सिंह ने अपना पुराना हलफनामा रद्द करके अपनी करीब 5 एकड़ जमीन को सभी वारिसों में बराबर-बराबर बांटने का फैसला किया था। दर्शन सिंह के इसी फैसले से उनका पोता सोनू बेहद नाराज चल रहा था और इसी रंजिश के चलते उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।

घटना के समय दर्शन सिंह अपने घर पर ही मौजूद थे, तभी आरोपी सोनू वहां पहुंचा और सीधे उनके सीने पर फायर झोंक दिया। गोली की आवाज सुनकर जब तक आसपास के लोग मौके पर पहुंचते, आरोपी सोनू अपनी बाइक पर सवार होकर फरार हो चुका था। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी बुढाखेड़ा क्षेत्र तक बाइक से गया और फिर वहां बाइक छोड़कर किसी अन्य साधन से भाग निकला।

घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और डीएसपी सतीश गौतम मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अब आरोपी की तलाश के लिए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी कड़ियों को जोड़ रही है।

डीएसपी सतीश गौतम का बयान: परिजनों के बयान दर्ज कर हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में हत्या की वजह जमीनी विवाद ही सामने आई है। आरोपी सोनू की धरपकड़ के लिए 4 विशेष टीमें गठित की गई हैं, उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


अमृतसर में हथियार-हेरोइन और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़, अफगान नागरिक समेत 7 गिरफ्तार

अमृतसर: अमृतसर शहरी पुलिस और एक केंद्रीय एजेंसी ने संयुक्त अभियान (Joint Operation) चलाकर सीमा पार से संचालित होने वाले एक बड़े अवैध हथियार, नशीले पदार्थ और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए एक अफगान नागरिक और एक नाबालिग सहित कुल सात आरोपियों को दबोच लिया है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में अवैध सामान और नकदी बरामद की है, जिसमें शामिल हैं:

10 अत्याधुनिक हथियार (जिनमें दो खतरनाक सब-मशीन गन भी शामिल हैं)

5.048 किलोग्राम हेरोइन (इंटरनेशनल ड्रग मार्केट में इसकी कीमत करोड़ों में है)

30.38 लाख रुपये की नकदी (हवाला कारोबार से जुड़ी हुई)

अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पकड़े गए आरोपियों के तार सीधे विदेश में बैठे गैंगस्टर्स और तस्करों से जुड़े हुए थे। यह पूरा सिंडिकेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए ऑपरेट किया जा रहा था।

विदेशों से ड्रोन या अन्य माध्यमों से आने वाली नशीले पदार्थों और हथियारों की खेप को ये आरोपी अलग-अलग ठिकानों पर रिसीव करते थे और फिर उन्हें आगे आपराधिक तत्वों तक सप्लाई करते थे। इस पूरे अवैध कारोबार के वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) के लिए हवाला चैनलों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

इस बड़ी रिकवरी के बाद अमृतसर के थाना इस्लामाबाद में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि नशा तस्करी, अवैध हथियारों की डीलिंग और संगठित अपराध के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा। फिलहाल पुलिस की टीमें इस नेटवर्क के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज खंगाल रही हैं ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जा सके।


दूरस्थ गांवों तक पहुंचीं जिलाधिकारी, अस्पताल, बाजार और चौपालों में पहुंचकर जानी लोगों की समस्याएं

स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, रोजगार एवं विकास कार्यों की समीक्षा; व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं से किया सीधा संवाद

ब्लॉक प्रमुख, ज्येष्ठ उप प्रमुख एवं जिला पंचायत सदस्य के साथ किया आंगनबाड़ी केंद्र का किया शुभारंभ, ग्रामीणों से सीधे संवाद कर कई समस्याओं के मौके पर दिए समाधान, मातृशक्ति और युवाओं का बढ़ाया उत्साह

पौड़ी- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “सरलीकरण, समाधान और निस्तारण” के विजन को धरातल पर उतारते हुए जनपद पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया अधिकारियों के साथ लगातार दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचकर प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम कर रही हैं। जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों के भ्रमण के दूसरे दिन उन्होंने धुमाकोट, संगलिया और आसपास के गांवों का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल व्यवस्थाओं, आजीविका गतिविधियों तथा विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान आयोजित चौपालों में उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और अनेक मामलों में मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए।

भ्रमण की शुरुआत जिलाधिकारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धुमाकोट के निरीक्षण से की। उन्होंने अस्पताल की ओपीडी, इमरजेंसी सेवाओं, प्रसव कक्ष, औषधि भंडारण, एएनसी सेवाओं, फायर सेफ्टी व्यवस्था और विभिन्न अभिलेखों की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं में पाई गई कमियों पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए सुधार के स्पष्ट निर्देश दिए। एक्सपायर होने वाली दवाओं का पृथक रिकॉर्ड रखने, उनका समयबद्ध निस्तारण करने तथा स्टॉक रजिस्टर को नियमित रूप से अद्यतन रखने को कहा।

औषधि प्रबंधन पोर्टल के संचालन में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित फार्मासिस्ट के वेतन आहरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए। अस्पताल के बजट संबंधी अभिलेख उपलब्ध न होने पर भी उन्होंने जवाबदेही तय करने को कहा। वहीं मरीजों और तीमारदारों से सीधे संवाद कर उपचार, दवा उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली तथा व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जर्जर अवसंरचना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने धुमाकोट तथा नैनीडांडा स्वास्थ्य संस्थानों की मरम्मत एवं आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए आगणन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। महिला चिकित्साधिकारी के स्थानांतरण के कारण उत्पन्न समस्या को देखते हुए उन्होंने नैनीडांडा से अस्थायी रूप से महिला चिकित्साधिकारी की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।

धुमाकोट बाजार में जिलाधिकारी ने व्यापार सभा के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। व्यापारियों ने कूड़ा निस्तारण, पार्किंग और बाजार क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे रखे। जिलाधिकारी ने कूड़ा पृथक्करण की व्यवस्था विकसित करने तथा बीडीओ को बड़े कूड़ादान स्थापित करने तथा नियमित उठान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही व्यापारियों की अन्य मांगों को प्राथमिकता के आधार पर प्रस्तावित करने का आश्वासन दिया।

इसके बाद राजकीय प्राथमिक विद्यालय संगलिया में आयोजित चौपाल में पहुंचीं जिलाधिकारी का स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों ने पारंपरिक आत्मीयता के साथ स्वागत किया। चौपाल में लोगों ने खुलकर अपनी समस्याएं और सुझाव साझा किए। जिलाधिकारी ने भी धैर्यपूर्वक प्रत्येक व्यक्ति की बात सुनी और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश दिए।

चौपाल के दौरान पेयजल, आजीविका, शिक्षा, खेल, कृषि तथा आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने रिंगलाणा, तिमुलडुरा, कोचियार, कौला तल्ला और पलासी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्थाओं की स्थिति का जायजा लेते हुए जल गुणवत्ता और विद्यालयों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जल निगम की तकनीकी टीम की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को बेहतर और सुचारु पेयजल सुविधाएं मिल सकें।

ग्रामीणों द्वारा वन्यजीवों से सुरक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने संबंधी सुझाव रखे गए, जिस पर जिलाधिकारी ने संवेदनशील क्षेत्रों में तारबाड़ लगाने तथा युवाओं को स्वरोजगार एवं रोजगार योजनाओं से जोड़ने के लिए सेवायोजन, युवा कल्याण और विकास विभाग को समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। चौपाल में कीवी उत्पादन के माध्यम से सफल स्वरोजगार स्थापित करने वाले कुलदीप सिंह रावत को सम्मानित करते हुए उन्होंने स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने पर बल दिया।

जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की मांग पर खेल मैदान हेतु भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करने तथा किसान सम्मान निधि से वंचित पात्र किसानों के लिए विशेष शिविर आयोजित कर ई-केवाईसी पूर्ण कराने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामसभा भवन को पुस्तकालय के रूप में शीघ्र जीर्णोद्धार कर विकसित करने का आश्वासन दिया। चौपाल में शिक्षा एवं आधारभूत सुविधाओं के अंतर्गत विद्यालयों की आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने, दैवीय आपदा से प्रभावित विद्यालय भवनों की मरम्मत, प्राथमिक विद्यालय पीपली में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने तथा संपर्क मार्गों पर जल निकासी व्यवस्था सुधारने के निर्देश भी दिए गए।

महिलाओं ने आजीविका गतिविधियों एवं पीरूल संग्रहण भुगतान से जुड़े विषय जिलाधिकारी के समक्ष रखे, जिस पर उन्होंने वन विभाग को संबंधित फर्म की नोटिस जाती करते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि महिला समूहों, किसानों, युवाओं और ग्रामीणों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे पर प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी ताकि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी ने ब्लॉक प्रमुख, ज्येष्ठ उप प्रमुख तथा जिला पंचायत सदस्य के साथ संगलिया बिचला में नव निर्मित आंगनबाड़ी केंद्र का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं और बच्चों से संवाद कर केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की। महिलाओं ने क्षेत्र में पहली बार किसी जिलाधिकारी के इस प्रकार गांव तक पहुंचकर समस्याएं सुनने और समाधान कराने के प्रयासों की प्रशंसा की।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्यालयों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चौपालों में प्राप्त प्रत्येक शिकायत पर निर्धारित समयावधि में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को उसका वास्तविक लाभ मिल सके।

इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य मुन्नी ध्यानी, ब्लॉक प्रमुख प्रकीर्ण नेगी, ज्येष्ठ उप प्रमुख रेखा देवी, ग्राम प्रधान नरेंद्र रावत, डीडीओ मनविंदर कौर, डीएसटीओ राम सलोने, एसडीएम श्रेष्ठ गुनसोला, बीडीओ प्रमोद चंद्र पांडेय सहित सभी अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।


4098 बालिकाओं को मिले 19.23 करोड़- रेखा आर्या

कैबिनेट मंत्री ने जारी किया नंदा गौरा योजना का बकाया धन

देहरादून। नंदा गौरा योजना के तहत गुरुवार को हरिद्वार और उत्तरकाशी जनपद की 4098 पात्र बालिकाओं को लाभान्वित किया गया। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने डीबीटी के माध्यम से इन बालिकाओं के बैंक खातों में करीब 19.23 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित की।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि 2025-26 में प्रदेश की 33,251 पात्र बालिकाओं को 26 फरवरी 2026 को ही योजना का लाभ दिया जा चुका था। हरिद्वार और उत्तरकाशी जनपद की कुछ पात्र बालिकाओं की आवश्यक औपचारिकताएं एवं जनपद स्तरीय समिति से अनुमोदन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी थी, जिसके कारण उन्हें उस समय लाभ नहीं मिल पाया था।

प्रक्रिया पूरी होने के बाद गुरुवार को यमुना कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय में इन 4098 बालिकाओं को योजना की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई।

मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि प्रदेश की कोई भी पात्र बेटी योजना के लाभ से वंचित न रहे। नंदा गौरा योजना बेटियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल है।

आज लाभान्वित बालिकाओं में जन्म के समय सहायता पाने वाली 417 बालिकाएं और 12वीं उत्तीर्ण कर स्नातक में प्रवेश लेने वाली 3681 बालिकाएं शामिल हैं।

गौरतलब है कि नंदा गौरा योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश की कुल 4,11,035 बालिकाओं को करीब 1314 करोड़ रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से वितरित की जा चुकी है।


लापता बबीता की तलाश के लिए प्रशासन खाली करा रहा है गहरी झील, भालुओं की गुफाओं में भी सर्चिंग तेज

उत्तरकाशी: दयारा बुग्याल ट्रेक पर ट्रेकिंग के दौरान लापता हुई युवती बबीता पांडे की तलाश में अब उत्तराखंड प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। समय बीतने के साथ ही इस सर्च ऑपरेशन का दायरा और अधिक बढ़ा दिया गया है। लापता बबीता का कोई भी सुराग हाथ न लगने के बाद, अब रेस्क्यू टीमें बेहद दुर्गम इलाकों, घने जंगलों और प्राकृतिक आश्रयों की खाक छान रही हैं।

इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अब एक नया और बड़ा कदम उठाया गया है। गोई पड़ाव क्षेत्र में स्थित लगभग साढ़े सात फीट गहरी और 50 मीटर से अधिक चौड़ी एक प्राकृतिक झील को खाली करने का काम शुरू किया गया है। खोज टीम को अंदेशा है कि बबीता से जुड़ा कोई अहम सुराग, उनका मोबाइल फोन या अन्य कोई सामान इस झील में गिरा हो सकता है। इस संभावना को देखते हुए मौके पर दो भारी-भरकम वाटर पंप लगाए गए हैं, जिनकी मदद से बुधवार शाम तक झील का एक बड़ा हिस्सा खाली कर दिया गया था।

लापता युवती की तलाश के लिए पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त टीमें बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रही हैं। चूंकि यह इलाका वन्य जीवों से भरा है, इसलिए रेस्क्यू टीमें उन संभावित गुफाओं और प्राकृतिक आश्रयों को भी दोबारा खंगाल रही हैं जहाँ भालुओं की मौजूदगी की आशंका रहती है। अधिकारियों का साफ कहना है कि इस मामले में किसी भी छोटी से छोटी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए खाइयों और घने वन क्षेत्रों के हर कोने की गहन जांच की जा रही है।

प्रशासन के मुताबिक, बबीता पांडे को सुरक्षित ढूंढ निकालने के लिए सभी आधुनिक तकनीकी माध्यमों और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है और यह खोजी अभियान बिना रुके लगातार जारी रहेगा।


ईसागढ़ रोड पर खड़ी कार में मिले युवक-युवती के खून से लथपथ शव, अंदर मिली पिस्टल, कुल्हाड़ी और कटर

अशोकनगर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के अशोकनगर में ईसागढ़ रोड पर बुधवार देर रात एक सुनसान जगह पर खड़ी कार के अंदर युवक-युवती के शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। महाना गांव के पास खड़ी कार की अगली सीट पर रितिक सोनी (26) और मुस्कान जैन (24) की खून से लथपथ लाशें मिली हैं। कार के अंदर से पिस्टल, कुल्हाड़ी, कटर और पिछली सीट पर जलने के निशान मिलने के बाद पुलिस हत्या और आत्महत्या, दोनों ही पहलुओं से मामले की तफ्तीश कर रही है।

परिजनों के मुताबिक, रितिक और मुस्कान बुधवार शाम को घर से निकले थे। देर रात तक जब दोनों वापस नहीं लौटे और उनके मोबाइल बंद आए, तो परेशान परिवार देहात थाने पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में गुमशुदगी दर्ज करने में लापरवाही बरती, जिसके बाद उन्होंने खुद लोकेशन ट्रेस कराई।

लोकेशन ईसागढ़ रोड पर मिलने के बाद रात करीब 3 बजे जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो कार के अंदर दोनों के शव बरामद हुए। युवक के सिर में गोली लगने का निशान था, जबकि युवती के शरीर पर गहरी चोटें थीं।

रितिक के पिता ने बताया कि उनके बेटे का चेहरा झुलसा हुआ था और कार की पिछली सीट भी जली हुई मिली। इसके अलावा:

कार से करीब 50 फीट दूर तीन मोबाइल फोन और कुछ टोपियां बिखरी पड़ी थीं।

कार के अंदर से खून लगी कुल्हाड़ी और कटर बरामद हुआ।

पिता का आरोप है कि घटनास्थल के साक्ष्य साफ तौर पर एक सुनियोजित हत्या (Planned Murder) की ओर इशारा कर रहे हैं।

परिजनों के अनुसार, रितिक और मुस्कान दो-तीन साल पहले इंदौर की एक निजी कंपनी में साथ काम करते थे और तभी से दोनों के बीच दोस्ती थी। रितिक इंदौर में ही कार इंटीरियर का बिजनेस करता था और 15 दिन पहले अशोकनगर आया था। मुस्कान भी अशोकनगर की ही रहने वाली थी। हालांकि, दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था या नहीं, इस पर परिवार ने अभी कुछ नहीं कहा है।

देहात थाना प्रभारी भुवनेश शर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला बेहद संदिग्ध है। कार से मिली पिस्टल, कुल्हाड़ी और कटर को फोरेंसिक जांच (FSL) के लिए भेज दिया गया है। जिला अस्पताल में दोनों शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। फिलहाल साइबर टीम कॉल डिटेल्स और लोकेशन हिस्ट्री खंगाल रही है।


चारधाम यात्रा में मीडिया की भूमिका पर मंथन, उत्कृष्ट कार्य करने वालों का हुआ सम्मान

जिला पत्रकार संघ (ट्रस्ट) के दो दिवसीय अधिवेशन में पत्रकार हितों, सुशासन और सामाजिक योगदान पर हुई चर्चा

बड़कोट, उत्तरकाशी। जिला पत्रकार संघ (ट्रस्ट) के तत्वावधान में बड़कोट में आयोजित दो दिवसीय अधिवेशन एवं सम्मान समारोह में जनपद के पत्रकारों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमलेश उपाध्याय तथा उत्तरांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष अजय राणा ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात आयोजित अधिवेशन में “चारधाम यात्रा में मीडिया की भूमिका” विषय पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें पत्रकारिता की जिम्मेदारियों, चुनौतियों और समाज में मीडिया की सकारात्मक भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।

अधिवेशन के दौरान समाज में प्रेरणादायी कार्य करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। रवांई क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों को देशभर में पहचान दिलाने वाली “रवांई रसोई” की संचालिका श्रीमती जमुना रावत को गढ़ भोज गौरव सम्मान-2026 से नवाजा गया।

चारधाम यात्रा के सफल संचालन एवं बेहतर व्यवस्थाओं के लिए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमलेश उपाध्याय को उत्कृष्ट सुशासन गौरव सम्मान-2026 प्रदान किया गया। वहीं जनपद में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से उल्लेखनीय सेवाओं के लिए जिला सूचना अधिकारी कर्मवीर शर्मा को उत्कृष्ट सेवा गौरव सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय से उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकार सूरत सिंह रावत, सुरेंद्र भट्ट, श्रीमती रमा भट्ट, डॉ. रामचन्द्र उनियाल, दिनेश रावत एवं राधेकृष्ण उनियाल को देवऋषि नारद गौरव सेवा सम्मान-2026 से सम्मानित कर संगठन ने एक नई परंपरा का शुभारंभ किया।

अपने संबोधन में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण ने कहा कि पत्रकार समाज के ऐसे पुरोधा हैं जो समाज को सही दिशा और दशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि जिला पत्रकार संघ की एकजुटता और पत्रकार हितों के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं तथा यह संगठन जनपद में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।

उत्तरांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष अजय राणा ने पत्रकारों से तथ्यपरक और संतुलित पत्रकारिता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाचार प्रकाशित करने से पूर्व दोनों पक्षों की बात को महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जनपद के प्रेस क्लबों एवं यमुनोत्री प्रेस क्लब को उत्तरांचल प्रेस क्लब से संबद्ध किए जाने की दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि पत्रकार प्रशासन और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं। पत्रकार प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा कर कमियों को उजागर करते हैं और सुधार का मार्ग भी सुझाते हैं। उन्होंने सभी पत्रकारों से जनहित और समाज हित में सकारात्मक पत्रकारिता करने का आह्वान किया।

पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमलेश उपाध्याय ने कहा कि पत्रकार समाज का आईना होते हैं और जनता उनकी खबरों पर विश्वास करती है। इसलिए पत्रकारों को अफवाहों एवं दुर्भावनापूर्ण खबरों से बचते हुए निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता करनी चाहिए। उन्होंने सम्मान के लिए जिला पत्रकार संघ का आभार भी व्यक्त किया।

इस अवसर पर जिला पत्रकार संघ (ट्रस्ट) के अध्यक्ष सुनील थपलियाल ने राज्य एवं जनपद के पत्रकारों का आभार व्यक्त करते हुए पत्रकार हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तरकाशी जनपद के सभी श्रमजीवी पत्रकारों के लिए 50 लाख रुपये का बीमा, जिला पत्रकार संघ भवन का निर्माण तथा तहसील एवं ब्लॉक मुख्यालय स्तर पर कार्यरत पत्रकारों को सरकारी मान्यता प्रदान करने की मांग सरकार के समक्ष रखी।

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय संगठन पदाधिकारियों द्वारा किया गया। अधिवेशन सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ तथा पत्रकारों की एकजुटता और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का संदेश देकर समाप्त हुआ।
इस अवसर पर महामंत्री सुरेंद्र नौटियाल, वरिष्ठ पत्रकार राजेश बहुगुणा (पोलखोल), शिवराज सिंह सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे दर्जनों पत्रकार उपस्थित रहे।


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