Wednesday, June 24th, 2026

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आईवीएफ और सरोगेसी के नाम पर महाधोखा: बच्चा चोरी गैंग का पर्दाफाश, 16 गिरफ्तार, 7 नवजात बरामद

Daily Archives: 24/06/2026

आईवीएफ और सरोगेसी के नाम पर महाधोखा: बच्चा चोरी गैंग का पर्दाफाश, 16 गिरफ्तार, 7 नवजात बरामद

नई दिल्ली: नवजात बच्चों की तस्करी और खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह संतान की चाह रखने वाले बेऔलाद दंपतियों को ‘आईवीएफ तकनीक’ और ‘सरोगेसी’ (किराए की कोख) का झांसा देकर ठग रहा था। गिरोह के सदस्य बकायदा 9 महीने तक इलाज के नाम पर दंपतियों से लाखों रुपये वसूलते थे और बाद में किसी गरीब परिवार से खरीदा हुआ बच्चा उन्हें सौंप देते थे।

इसी सिलसिले में दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टाफ ने सोमवार को उत्तराखंड के ऋषिकेश में छापेमारी कर एक और नवजात को बरामद किया और एक 32 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया। हैरान करने वाली बात यह है कि गिरफ्तार महिला इस बात से पूरी तरह अनजान थी कि जो बच्चा उसकी गोद में है, वह उसका नहीं बल्कि खरीदा हुआ है।

महिला ने पूछताछ में बताया कि उसकी शादी को 12 साल हो चुके थे और पति को पैरालिसिस (लकवा) था। परिवार को बच्चे की चाह थी, जिसके बाद एक रिश्तेदार के कहने पर वे मुख्य आरोपी डॉ. विवेकी से मिले। डॉक्टर ने उन्हें आईवीएफ और सरोगेसी का झांसा दिया। करीब 9 महीने तक फर्जी इलाज के नाम पर मोटी रकम ऐंठने के बाद, 4 जून को कागजी कार्रवाई का नाटक कर उन्हें यह बच्चा सौंप दिया गया।

पुलिस इस मामले में अब तक 7 नवजात बच्चों को बरामद कर चुकी है, जबकि अस्पताल की मालकिन डॉ. विवेकी समेत 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले पुलिस ने रोहिणी (दिल्ली) से गरिमा जैन और उनके ससुर सतीश जैन को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने डॉ. विवेकी से 9.30 लाख रुपये में बच्चा खरीदा था। मामले का मुख्य सूत्रधार प्रवेश जैन फिलहाल फरार है।

मध्य जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के तार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से जुड़े हैं। गिरोह के सदस्य राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों को चंद रुपयों (10 से 15 हजार) का लालच देकर उनके नवजात बच्चे खरीद लेते थे। इसके बाद ‘प्रतिभा’ नाम की महिला और हीरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल के जरिए ऐसे बेऔलाद दंपतियों को टारगेट किया जाता था, जो कानूनी रूप से बच्चा गोद लेना चाहते थे। गिरोह इन मासूमों को 5 से 10 लाख रुपये में बेच देता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यह गिरोह पिछले डेढ़ साल में करीब 30 बच्चों का सौदा कर चुका है। फिलहाल पुलिस बिहार, आगरा और दिल्ली-एनसीआर में बेचे गए अन्य बच्चों की तलाश में जुटी है।


हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर होगा और अधिक सक्रिय

जिलाधिकारी ने त्वरित सहायता एवं सभी सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के दिए निर्देश

 

देहरादून:महिलाओं के प्रति हिंसा की घटनाओं पर संवेदनशीलता दिखाते हुए जिला प्रशासन ने सखी वन स्टॉप सेंटर को और अधिक प्रभावी एवं सक्रिय बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। समाधान दिवस के दौरान महिलाओं से संबंधित प्राप्त शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सखी वन स्टॉप सेंटर को एक्टिव मोड में संचालित करने तथा हिंसा से पीड़ित महिलाओं को त्वरित एवं समुचित सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया है कि देहरादून में सर्वे चौक के निकट कामकाजी महिला छात्रावास परिसर में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण एवं पुनर्वास से संबंधित सभी सेवाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, शोषण अथवा किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाओं को बिना विलंब आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार ने बताया कि जनपद में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। केंद्र के माध्यम से हिंसा से पीड़ित महिलाओं को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, पुलिस सहायता, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक परामर्श, रेस्क्यू सेवा, विधिक सहायता तथा अस्थायी आश्रय जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि केंद्र का उद्देश्य संकट की स्थिति में महिलाओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना तथा उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है। इसके साथ ही महिलाओं को उनके अधिकारों एवं उपलब्ध सरकारी सहायता तंत्र के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।

जिला प्रशासन ने महिलाओं से अपील की है कि किसी भी प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न अथवा संकट की स्थिति में वे बिना किसी संकोच के सखी वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं का लाभ उठाएं। प्रशासन का प्रयास है कि प्रत्येक पीड़ित महिला को समयबद्ध, संवेदनशील एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।


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