Monday, September 28th, 2026

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भारतीय दवा कंपनियों के लिए खुशखबरी, अमेरिका में इन दवाओं पर नहीं लगेगा टैरिफ

Monthly Archives: September 2026

भारतीय दवा कंपनियों के लिए खुशखबरी, अमेरिका में इन दवाओं पर नहीं लगेगा टैरिफ

जानिए किन दवाओं को मिली छूट

वॉशिंगटन। भारत की दवा कंपनियों को अमेरिका से बड़ी राहत मिली है। अमेरिका ने भारत से आयात की जाने वाली कुछ विशेष दवाओं और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर शून्य प्रतिशत टैरिफ लागू करने का फैसला किया है। इससे भारतीय फार्मा कंपनियों को अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों की आपूर्ति करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह छूट सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी। अमेरिका ने इसके लिए कुछ खास दवाओं और चिकित्सा उत्पादों की सूची जारी की है।

किन दवाओं को मिलेगी टैरिफ से छूट?

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने यह सूची ऐसे समय में जारी की है, जब अमेरिका 29 सितंबर से कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे संबंधित सामग्री के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, भारत से निर्यात होने वाले सभी फार्मास्युटिकल उत्पादों को इस फैसले का लाभ नहीं मिलेगा। यह छूट केवल उन्हीं दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों पर लागू होगी, जिन्हें अप्रैल में जारी अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश में शामिल किया गया था।

इस सूची में दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं (ऑर्फन ड्रग्स), न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा से तैयार थेरेपी, प्रजनन क्षमता से जुड़ी दवाएं, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स शामिल हैं। इसके अलावा रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से निपटने के लिए इस्तेमाल होने वाले चिकित्सा उत्पादों के साथ पशु स्वास्थ्य से जुड़े कुछ उत्पादों को भी इस छूट के दायरे में रखा गया है।

भारत के अलावा इन देशों को भी मिलेगी छूट

अमेरिकी वाणिज्य विभाग की ओर से जारी सूची में भारत के साथ कई अन्य देशों को भी शामिल किया गया है। इनमें अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।

अमेरिकी विभाग के अनुसार, इन देशों से आयात किए जाने वाले पात्र उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैरिफ लागू किया जा सकता है। इसके पीछे अमेरिका के साथ मौजूदा या भविष्य में होने वाले व्यापार और सुरक्षा समझौतों को आधार बनाया गया है।

ट्रंप के टैरिफ आदेश से जुड़ा है फैसला

दवाओं पर टैरिफ में छूट का यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अप्रैल में जारी किए गए आदेश के तहत लिया गया है। इस आदेश में ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के अंतर्गत फार्मास्युटिकल उत्पादों और उनसे संबंधित सामग्री के आयात पर नए नियम लागू किए गए थे।

इसके तहत कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले घटकों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया। यह व्यवस्था सूची में शामिल कुछ कंपनियों के लिए 31 जुलाई से लागू हो चुकी है, जबकि अन्य कंपनियों के लिए इसे 29 सितंबर से लागू किया जाना है।

हालांकि, अमेरिकी वाणिज्य विभाग के नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जेनेरिक दवाओं और उनसे जुड़े कच्चे माल पर धारा 232 के तहत लगाए गए दवा टैरिफ लागू नहीं होंगे। भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि अमेरिका को होने वाले भारतीय दवा निर्यात में जेनेरिक दवाओं की बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां पेटेंट वाली दवाओं, सक्रिय औषधीय घटकों और विशेष उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का भी उत्पादन करती हैं।

भारतीय फार्मा कंपनियों को क्या होगा फायदा?

अमेरिका के इस फैसले से भारतीय दवा निर्माता कंपनियों को कुछ महंगी और विशेष चिकित्सा उपचारों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का निर्यात बिना अतिरिक्त टैरिफ के जारी रखने का अवसर मिलेगा। इससे अमेरिकी बाजार में इन उत्पादों की आपूर्ति करने वाली भारतीय कंपनियों को राहत मिल सकती है।

भारत दुनिया के प्रमुख जेनेरिक दवा निर्माताओं में शामिल है और अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। भारतीय कंपनियां अमेरिका को तैयार दवाओं के साथ-साथ सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई) की भी आपूर्ति करती हैं। इनका इस्तेमाल वहां के अस्पतालों, फार्मेसियों और मरीजों के इलाज में किया जाता है।

ऐसे में अमेरिका का यह फैसला भारत और अमेरिका के बीच दवा व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, टैरिफ से मिली राहत सीमित उत्पादों तक ही रहेगी। दूसरी ओर, अमेरिका अपनी घरेलू दवा निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए आयात पर शुल्क लगाने की नीति पर भी काम कर रहा है।


एशियन गेम्स 2026- भारत-अफगानिस्तान क्वार्टर फाइनल रद्द, सेमीफाइनल में पहुंचा भारत

एक अक्टूबर को खेले जाएंगे सेमीफाइनल मुकाबले

नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने बिना मैदान पर उतरे ही सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत और अफगानिस्तान के बीच खेला जाने वाला क्वार्टर फाइनल मुकाबला बारिश और मैदान गीला होने के कारण रद्द कर दिया गया। मैच में टॉस तक नहीं हो सका। आईसीसी टी20 रैंकिंग में बेहतर स्थान पर होने के कारण भारतीय टीम को अगले दौर में प्रवेश मिल गया। अब भारत की नजरें सेमीफाइनल में जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक की ओर कदम बढ़ाने पर होंगी।

बारिश के कारण नहीं हो सका भारत-अफगानिस्तान का मुकाबला

भारत और अफगानिस्तान के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबला निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में खेला जाना था। हालांकि, सुबह से लगातार हो रही बारिश के कारण मैदान की स्थिति खराब हो गई। पूरे मैदान को कवर्स से ढका गया था। दोनों टीमें स्टेडियम पहुंचीं, तब बारिश थम चुकी थी, लेकिन आसमान में घने बादल छाए हुए थे। मैदान की स्थिति मैच कराने के अनुकूल नहीं होने के कारण अधिकारियों ने मुकाबला रद्द करने का फैसला लिया।

मैदान गीला होने के कारण खेल शुरू कराने की कोई संभावना नहीं बची थी। निर्धारित समय में मुकाबले को छोटा करके कराने का विकल्प भी व्यावहारिक नहीं रह गया था। इससे पहले इसी मैदान पर पाकिस्तान और हॉन्गकॉन्ग के बीच खेला जाने वाला क्वार्टर फाइनल भी बारिश के चलते बिना टॉस के रद्द हो चुका था।

आईसीसी रैंकिंग के आधार पर सेमीफाइनल में पहुंचा भारत

एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट मुकाबलों में नॉकआउट चरण के लिए रिजर्व डे की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में बारिश के कारण क्वार्टर फाइनल का परिणाम नहीं निकलने पर बेहतर आईसीसी टी20 रैंकिंग वाली टीम को अगले दौर में पहुंचाने का नियम है।

भारत इस समय आईसीसी टी20 रैंकिंग में पहले स्थान पर है, जबकि अफगानिस्तान की टीम 10वें पायदान पर है। इसी अंतर के चलते मुकाबला रद्द होने के बाद भारतीय टीम को सेमीफाइनल में प्रवेश मिल गया। इस तरह भारतीय खिलाड़ियों को बिना कोई गेंद खेले ही अंतिम चार में जगह मिल गई।

स्वर्ण पदक बचाने की चुनौती बरकरार

भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम एशियन गेम्स की मौजूदा चैंपियन है। वर्ष 2023 में हांगझोउ में आयोजित एशियन गेम्स में भी भारत ने अफगानिस्तान को हराकर स्वर्ण पदक जीता था। उस समय दोनों टीमों के बीच फाइनल मुकाबला बारिश के कारण पूरा नहीं हो पाया था और बेहतर सीडिंग के आधार पर भारत को विजेता घोषित किया गया था।

अब 2026 के एशियन गेम्स में भी भारतीय टीम का सामना अफगानिस्तान से बारिश के कारण नहीं हो सका। हालांकि, भारत का स्वर्ण पदक बचाने का अभियान जारी है। सेमीफाइनल में भारतीय टीम का मुकाबला श्रीलंका और नेपाल के बीच 29 सितंबर को होने वाले क्वार्टर फाइनल के विजेता से होगा।

एक अक्टूबर को खेले जाएंगे सेमीफाइनल मुकाबले

एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट के दोनों सेमीफाइनल मुकाबले एक अक्टूबर को खेले जाएंगे। दूसरे सेमीफाइनल में पाकिस्तान का सामना बांग्लादेश और मलयेशिया के बीच होने वाले क्वार्टर फाइनल के विजेता से होगा। सेमीफाइनल में जीतने वाली दोनों टीमें स्वर्ण पदक के लिए भिड़ेंगी, जबकि हारने वाली टीमों के बीच कांस्य पदक का मुकाबला खेला जाएगा।

बारिश ने खत्म किया अफगानिस्तान का सफर

अफगानिस्तान की टीम ने ग्रुप चरण में अपने प्रदर्शन के दम पर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। हालांकि, भारत के खिलाफ अहम मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ने से उसका एशियन गेम्स में सफर समाप्त हो गया। इस तरह भारतीय टीम ने नियमों के आधार पर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया, जबकि अफगानिस्तान को बिना मुकाबला खेले ही टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।


जौनपुर में 52 वर्षीय व्यक्ति की हत्या, नुकीले हथियार से वार कर उतारा मौत के घाट

जौनपुर। सिकरारा-बरईपार मार्ग पर गोदाम चौराहा के पास रविवार रात भभौरी गांव निवासी 52 वर्षीय उदयराज यादव की नुकीले हथियार से हत्या कर दी गई। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस के अधिकारी फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की पड़ताल शुरू की। हत्या के पीछे की वजह और वारदात में शामिल लोगों का पता लगाने के लिए परिवार के सदस्यों से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उदयराज की हत्या किसने और किस वजह से की।

आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही संदिग्धों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच सभी संभावित बिंदुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आवश्यक कार्रवाई जारी है। घटना के बाद उदयराज के परिवार में शोक का माहौल है, वहीं वारदात से गांव और आसपास के इलाके में भी चिंता का माहौल बना हुआ है।


सिंहस्थ 2028 की तैयारी में उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर तनाव, भारी पुलिसकर्मी तैनात, हाईकोर्ट में सुनवाई आज

उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने का काम जारी है। करीब 900 मीटर लंबे इस मार्ग पर चौड़ीकरण की जद में आ रहे 60 धार्मिक स्थलों में से अधिकांश को हटाया जा चुका है। हालांकि, शाही मस्जिद और खड़े हनुमान मंदिर के पास स्थित मजार को लेकर विरोध के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान पथराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में करीब दो हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया। मौके पर जेसीबी और पोकलेन मशीनें भी पहुंचाई गईं।

कार्रवाई की आशंका के बीच शनिवार रात मुस्लिम समाज के लोग शाही मस्जिद परिसर और आसपास के इलाकों में जुटने लगे। इस दौरान नारेबाजी भी हुई और विरोध रविवार रात तक जारी रहा। स्थिति को देखते हुए कंठाल-गोपाल मंदिर मार्ग पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोक दी गई। सुरक्षा व्यवस्था के तहत इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के साथ ड्रोन से निगरानी की गई।

शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को चौड़ीकरण की कार्रवाई से बचाने के लिए मुस्लिम समाज की ओर से इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मामले में सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।

प्रशासन और नगर निगम की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अदालत से किसी तरह की कानूनी रोक नहीं लगने की स्थिति में सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले अन्य बाधक धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। फिलहाल इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती जारी है।


24 साल पुराने ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा, गुरुग्राम से आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 24 साल पुराने हत्या के मामले में फरार चल रहे आरोपी फिरोज उर्फ ख्वाजा को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है। आरोपी आईएमटी मानेसर की एक रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री में दर्जी के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, पुरानी रंजिश और भाई की मौत का बदला लेने के लिए उसने हत्या की वारदात को अंजाम दिया था।

डीसीपी हर्ष इंदौरा के अनुसार, बिहार के पश्चिमी चंपारण निवासी फिरोज और कलाम अंसारी वर्ष 2001 में रोजगार की तलाश में दिल्ली आए थे। बाद में दोनों के बीच विवाद हो गया और रंजिश शुरू हो गई।

18 फरवरी 2002 को तुगलकाबाद किला के पास डीडीए के जंगल से करीब 35 वर्षीय कलाम अंसारी का सड़ा-गला शव बरामद हुआ था। मामले में ओखला औद्योगिक क्षेत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

पुलिस जांच में सामने आया कि फिरोज के भाई साहबजान की शादी कलाम के गांव में हुई थी। साहबजान की पत्नी उसके साथ रहने से इनकार कर रही थी। इसी विवाद के दौरान साहबजान ने कलाम के घर के सामने आत्महत्या कर ली थी। फिरोज को शक था कि उसके भाई की मौत के लिए कलाम का परिवार जिम्मेदार है। इसी रंजिश में उसने कलाम की हत्या की साजिश रची।

पुलिस के मुताबिक, 15 फरवरी 2002 को फिरोज कलाम को बहाने से तुगलकाबाद के जंगल में ले गया। वहां पत्थरों से सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद वह बिहार भाग गया और कलाम के परिजनों को उसके बारे में गुमराह करने वाली जानकारी दी।

मामले की जांच आगे बढ़ने पर आरोपी फरार हो गया। लंबे समय तक गिरफ्तारी नहीं होने के बाद केस क्राइम ब्रांच को सौंपा गया। इसके बाद एसीपी सतेंद्र मोहन और इंस्पेक्टर विनय कुमार के नेतृत्व में टीम ने बिहार में करीब 30 स्थानों पर दबिश दी।

पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने के साथ तकनीकी निगरानी और फील्ड जांच के जरिए आरोपी के संभावित ठिकानों का पता लगाया। आखिरकार मिली पुख्ता सूचना के आधार पर टीम ने फिरोज को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया।


चीड़बासा स्लाइडिंग जोन में संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर 1500 यात्रियों को सुरक्षित पहुंचाया गौरीकुंड

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चीड़बासा के पास देर रात स्लाइडिंग के चलते फंसे करीब 1500 यात्रियों को SDRF, NDRF और DDRF की संयुक्त टीमों ने सुरक्षित रेस्क्यू कर गौरीकुंड पहुंचाया।

दिनांक 27 सितम्बर 2026 की देर रात DCR रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग पुलिस को सूचना मिली कि गौरीकुंड से करीब तीन किलोमीटर आगे चीड़बासा क्षेत्र में स्लाइडिंग के कारण कई यात्री मार्ग के दूसरी ओर फंस गए हैं। सूचना मिलते ही SDRF सोनप्रयाग की टीम सब इंस्पेक्टर आशीष डिमरी के नेतृत्व में तत्काल मौके के लिए रवाना हुई।

मौके पर पहुंचने पर टीम को चीड़बासा हैलीपैड के समीप मार्ग पर स्लाइडिंग के कारण मलबा जमा मिला। इसके साथ ही पहाड़ी से लगातार पत्थर गिर रहे थे, जिससे यात्रियों की आवाजाही बेहद जोखिमपूर्ण हो गई थी। हालात को देखते हुए SDRF, NDRF और DDRF की टीमों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

रेस्क्यू टीमों ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्लाइडिंग जोन को सावधानीपूर्वक पार कराया। इस दौरान करीब 1500 यात्रियों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाकर गौरीकुंड रवाना किया गया।

लगातार पत्थर गिरने और स्लाइडिंग के खतरे के बावजूद रेस्क्यू टीमों ने समन्वय के साथ अभियान को पूरा किया।


दिल्ली में प्रवासी बुद्धिजीवियों से CM धामी का संवाद, कहा- उत्तराखण्ड के विकास में प्रवासियों की महत्वपूर्ण भागीदारी

देहरादून/नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास में उत्तराखण्ड के प्रवासी बुद्धिजीवियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास की प्राथमिकताएं साझा कीं, वहीं विभिन्न संस्थानों से जुड़े प्रवासी उत्तराखण्डवासियों ने प्रदेश के विकास को लेकर अपने सुझाव दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में प्रवासी उत्तराखण्डवासियों और प्रबुद्धजनों की महत्वपूर्ण भागीदारी है। कार्यक्रम में मिले सुझावों को राज्य के विकास के लिए तैयार की जाने वाली नीतियों में शामिल किया जाएगा।

रिवर्स पलायन और रोजगार पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने विकास को गति देने के लिए बजट को बढ़ाकर 1.12 लाख करोड़ रुपये किया है। ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को प्रदेश के विकास में उपयोगी बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

कनेक्टिविटी और निवेश को बताया ताकत

मुख्यमंत्री ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, हवाई सेवाओं और औद्योगिक क्षेत्रों को उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर औद्योगिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं, जबकि पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि नीति आयोग की एसडीजी रैंकिंग में उत्तराखण्ड ने शीर्ष स्थान हासिल किया है और पर्वतीय एवं पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में निवेश के लिए बेहतर नीतिगत वातावरण तैयार करने की दिशा में भी राज्य अग्रणी रहा है।

35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी का दावा

युवाओं और रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। पेपर लीक और नकल के मामलों में कठोर कार्रवाई की गई तथा नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 100 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया। मुख्यमंत्री के अनुसार 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है।

उन्होंने कहा कि होमस्टे, छोटे होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से युवा और महिलाएं स्वरोजगार की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

पर्यटन को बताया अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार

मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों से सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के बाद उत्तराखण्ड की खेल क्षेत्र में बन रही नई पहचान का भी उल्लेख किया।

UCC और शिक्षा व्यवस्था पर भी रखी सरकार की बात

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता को सुशासन और समान अधिकारों की दिशा में राज्य की महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों को राज्य की अस्मिता और डेमोग्राफी की रक्षा से जोड़ते हुए सरकार की नीति स्पष्ट की।

शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने मदरसा बोर्ड समाप्त कर उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री के अनुसार निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे 250 से अधिक मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों तक सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार, धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना तथा युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

कार्यक्रम में प्रसून जोशी, प्रो. प्रदीप जोशी, अश्विनी लोहानी, प्रो. हर्ष वी. पंत, सुभाष धुलिया, प्रो. धनंजय जोशी, सुष्मिता रावत, डॉ. सरिता पाठक, कुलानंद जोशी, निर्मल पाठक, हरिसुमन बिष्ट, देव रतूड़ी, डॉ. सुषमा रावत, डॉ. निधि गुसाईं, देवेंद्र गुसाईं, डॉ. के.के. पाण्डेय, विनोद बछेती, डी.एस. रावत, डॉ. सरोज पाण्डेय, शंकर पाण्डेय, प्रो. दिनेश सकलानी, प्रो. पवन कुमार जोशी, वीरेंद्र सिंह नेगी, पवन कुमार मैठानी, हरेंद्र असवाल, संजय जोशी, डॉ. भुवन चंद्र पाण्डेय, विजय जोशी, डॉ. मेघा बिष्ट, लक्ष्मी रावत सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. गोविंद सिंह ने किया।


निवेश में मोटे मुनाफे का झांसा देकर ₹69.90 लाख की साइबर ठगी, STF ने ग्रेटर नोएडा से आरोपी दबोचा

देहरादून। निवेश के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देकर देहरादून निवासी से ₹69.90 लाख की साइबर ठगी के मामले में उत्तराखंड STF की साइबर टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने मामले में संलिप्त एक आरोपी को गौतमबुद्धनगर, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था।

शिकायतकर्ता के अनुसार फेसबुक पर Anand Rathi Shares And Stock Brokers Limited से संबंधित निवेश विज्ञापन के जरिए उससे संपर्क किया गया। इसके बाद उसे व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़कर अधिक लाभ का झांसा दिया गया और अलग-अलग बैंक खातों में करीब ₹69,90,000 जमा कराए गए।

शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मु0अ0सं0 23/2026, धारा 318(4), 61(2) बीएनएस और 66(D) आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF के निर्देश पर टीम गठित कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। इस दौरान सामने आया कि कोटक बैंक के एक खाते में साइबर ठगी से संबंधित ₹10 लाख की धनराशि पहुंची थी। बैंक खाते और उससे जुड़े मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच के बाद आरोपी की लोकेशन गौतमबुद्धनगर में मिली।

STF टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से ग्रेटर नोएडा के ओमीक्रॉन-1 स्थित HIG अपार्टमेंट में दबिश देकर मुनिन्द्र भाटी पुत्र रविन्द्र भाटी को गिरफ्तार कर लिया। STF के अनुसार आरोपी अपने मूल पते पर न रहकर परिवार के साथ ग्रेटर नोएडा में रह रहा था।

यह था ठगी का तरीका

साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को निवेश के नाम पर ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता था। इसके बाद ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी। आरोपी के खाते में भी ₹10 लाख पहुंचे थे। पूछताछ में आरोपी रकम के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे सका। STF अब उसके मोबाइल और बैंक खाते से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है तथा नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ जारी है।

आरोपी से बरामद

i-Phone 13 मोबाइल फोन

02 सिम कार्ड

01 आधार कार्ड

01 कोटक बैंक का खाली चेक

गिरफ्तार आरोपी: मुनिन्द्र भाटी पुत्र रविन्द्र भाटी, मूल निवासी ग्राम रौनी अस्तौली, नोएडा, उत्तर प्रदेश; हाल निवासी ओमीक्रॉन-1, ग्रेटर नोएडा।

STF की अपील

STF ने लोगों से अपील की है कि निवेश के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देने वाले संदिग्ध ऑफर से सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते, OTP, मोबाइल या बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज करें।


रेड-ऑरेंज अलर्ट पर मुख्य सचिव का बड़ा निर्देश, 24×7 अलर्ट मोड में रहें सभी विभाग

देहरादून। मौसम विभाग द्वारा जारी रेड और ऑरेंज अलर्ट के मद्देनजर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने रविवार देर शाम राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) पहुंचकर प्रदेश में बारिश से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करें।

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में वर्षा, नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों, विद्युत-पेयजल आपूर्ति और संचार व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने जिलाधिकारियों को वर्षा एवं अतिवृष्टि से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर शीघ्र USDMA को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि राहत एवं पुनर्स्थापना कार्यों में तेजी लाई जा सके।

15 अक्टूबर तक सड़कें गड्ढामुक्त करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए सभी जिलों को 15 अक्टूबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने के अभियान को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने को कहा। उन्होंने क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों और जनहानि का आकलन कर प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा जल्द उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

मौसम देखकर ही संचालित हो चारधाम यात्रा

मुख्य सचिव ने कहा कि मौसम की वास्तविक स्थिति को देखते हुए ही चारधाम यात्रा संचालित की जाए। अत्यधिक बारिश या मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और स्थिति सामान्य होने के बाद ही यात्रा आगे बढ़ाई जाए।

नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी रखने तथा डैम और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से सूचना देकर सतर्क करने के निर्देश भी दिए गए।

संवेदनशील लोगों की विशेष निगरानी

गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता पड़ने पर समय रहते सुरक्षित स्थानों अथवा चिकित्सा सुविधाओं वाले स्थानों पर पहुंचाने तथा जरूरत के अनुसार हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने को कहा गया।

डेंगू की रोकथाम के लिए जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच किट, दवाइयां, रक्त, बेड और पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

28 सितंबर सुबह 6 बजे से शुरू होगा ट्रेकर्स रेस्क्यू

मुख्य सचिव ने उत्तरकाशी और बागेश्वर में हाई एल्टीट्यूड ट्रेकिंग के दौरान फंसे ट्रेकर्स के राहत एवं बचाव अभियान की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सोमवार, 28 सितंबर को सुबह 6 बजे से हेलीकॉप्टरों के माध्यम से रेस्क्यू अभियान शुरू किया जाए।
यूकाडा के माध्यम से पर्याप्त संख्या में हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। रेस्क्यू के दौरान ट्रेकर्स से लगातार संपर्क बनाए रखने तथा उनकी लोकेशन और स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहने को कहा गया।

रेस्क्यू के बाद सभी ट्रेकर्स की तत्काल मेडिकल स्क्रीनिंग कराई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर बेहतर उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य सचिव ने विशेष रूप से कहा कि रेस्क्यू अभियान में शामिल हर हेलीकॉप्टर में सैटेलाइट फोन अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए, ताकि ऊंचाई वाले और संचारविहीन क्षेत्रों में भी रेस्क्यू टीमों से लगातार संपर्क बना रहे।


परिणाम आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों को रोजगार के साथ रोजगार सृजन के लिए तैयार करना जरूरी: कुलपति

नई शिक्षा नीति-2020, कौशल विकास, स्टार्टअप और नवाचार पर शिक्षकों ने किया मंथन

देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू) में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से ‘परिणाम आधारित शिक्षा श्रृंखला-1’ के तहत कार्यशाला आयोजित की गई। एसबीएएस सभागार में आयोजित कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, कौशल आधारित शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

विश्वविद्यालय के प्रेजीडेंट श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज ने कार्यशाला की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। कुलपति डॉ. विपिन चंद्र घिल्डियाल ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल, दक्षता, नवाचार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि परिणाम आधारित शिक्षा विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने के साथ-साथ रोजगार सृजनकर्ता बनने के लिए भी प्रेरित कर सकती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कौशल आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए उन्होंने शिक्षा और कौशल के बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।

मुख्य विशेषज्ञ वक्ता डॉ. मीनाक्षी सूद, एसएमआईईईई, आईई एवं एसोसिएट डीन (आउटरीच एवं रिसोर्स जेनरेशन), एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ ने परिणाम आधारित शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए कोर्स आउटकम (CO), प्रोग्राम आउटकम (PO), शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया और मूल्यांकन के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी है।

डॉ. सूद ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ऐसे ज्ञान, कौशल और दक्षताओं का विकास करना है, जिनका वे वास्तविक जीवन में प्रभावी उपयोग कर सकें।

कार्यशाला में शिक्षकों ने परिणाम आधारित शिक्षा, मूल्यांकन प्रणाली, कौशल विकास, स्टार्टअप, नवाचार और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ के साथ संवाद किया।

कार्यक्रम की शुरुआत आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सोनिया गंभीर के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि आउटकम बेस्ड एजुकेशन का मूल उद्देश्य शिक्षा को बदलावकारी, मापन योग्य और सार्थक बनाना है।

कार्यक्रम के अंत में आईक्यूएसी उपनिदेशक प्रो. अरुण कुमार ने विश्वविद्यालय के प्रेजीडेंट श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज, कुलपति डॉ. विपिन चंद्र घिल्डियाल, रजिस्ट्रार प्रो. सोनिका कंडारी, विशेषज्ञ वक्ता, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. ज्योति कालरा सहित विभिन्न स्कूलों के डीन और शिक्षक मौजूद रहे।


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