Saturday, September 5th, 2026

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10 सितंबर को आईटीआई श्रीनगर में आयोजित होगा लघु रोजगार मेला

Daily Archives: 05/09/2026

10 सितंबर को आईटीआई श्रीनगर में आयोजित होगा लघु रोजगार मेला

लगभग 2000 रिक्त पदों पर रोजगार के अवसर, 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थी कर सकेंगे प्रतिभाग

पौड़ी- जनपद के युवक-युवतियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, लैंसडाउन द्वारा 10 सितंबर 2026 को प्रातः 10 बजे से राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), श्रीनगर में लघु रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले में विभिन्न निजी कंपनियों द्वारा योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा तथा लगभग 2000 रिक्त पदों पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी लैंसडाउन अजय सिंह ने बताया कि रोजगार मेले में 10 से 15 कंपनियों के प्रतिभाग करने की संभावना है। इनमें एनटीटीटी, सीआईपीईटी, कैंप-108, एसआईएस इंडिया, आरएसपीएल, क्वेस कॉर्प लिमिटेड, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस एवं नील मेटल प्रोडक्ट सहित अन्य अधिष्ठान शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि रोजगार मेले में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, आईटीआई, स्नातक, बी.फार्मा, डी.फार्मा, एएनएम एवं जीएनएम शैक्षिक योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी प्रतिभाग कर सकते हैं। अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा 18 से 45 वर्ष निर्धारित की गयी है। साक्षात्कार में चयनित अभ्यर्थियों को पद एवं योग्यता के अनुसार लगभग 12 हजार से 40 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाएगा।

मेले में रोजगार के अवसरों के साथ अभ्यर्थियों को कौशल प्रशिक्षण, कैरियर काउंसलिंग एवं सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। इससे युवाओं को रोजगार के साथ अपने कौशल विकास एवं कैरियर निर्माण के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी ने जनपद के पात्र बेरोजगार युवक-युवतियों से शैक्षिक प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, बायोडाटा एवं पासपोर्ट आकार के फोटो साथ लेकर रोजगार मेले में प्रतिभाग करने की अपील की है, ताकि वे उपलब्ध रोजगार अवसरों का अधिकतम लाभ उठा सकें। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय द्वारा रोजगार मेले की जानकारी अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने के लिए दूरभाष एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। साथ ही, अन्य नियोजकों से संपर्क कर रोजगार के अवसर बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।


बरेली में प्रतिबंधित मांझे पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नौ गिरफ्तार; 15 चरखी बरामद

बरेली। प्रतिबंधित मांझे से लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद किला थाना पुलिस ने इसके निर्माण और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर प्रतिबंधित मांझा तैयार करने वाले नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से 15 चरखी प्रतिबंधित मांझा, कांच मिश्रित घोल, सफेद और काला पाउडर समेत अन्य सामान बरामद किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से कई लोग घायल हो चुके हैं। कुछ मामलों में लोगों की जान पर भी बन आई। इसके बाद पुलिस ने मांझा बनाने और बेचने वालों पर निगरानी बढ़ा दी थी।

तीन सितंबर को मुखबिर से सूचना मिली कि किला थाना क्षेत्र में कुछ लोग प्रतिबंधित मांझा तैयार कर रहे हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान नौ लोग प्रतिबंधित मांझा बनाते हुए मिले, जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।

तलाशी के दौरान पुलिस ने 15 चरखी प्रतिबंधित मांझा, कांच मिश्रित घोल, सफेद पाउडर और काला पाउडर बरामद किया। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे चोरी-छिपे कांच लेपित घोल और पाउडर का इस्तेमाल कर मांझा तैयार करते थे। इसके बाद इसे बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे।

पुलिस ने सभी आरोपितों को मुचलका पाबंद कर जमानत पर रिहा कर दिया है। पुलिस का कहना है कि यदि भविष्य में वे दोबारा प्रतिबंधित मांझा तैयार करते या बेचते पाए गए तो मुचलके की धनराशि वसूलने की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने लोगों से प्रतिबंधित मांझे का इस्तेमाल नहीं करने की अपील करते हुए कहा कि इससे राहगीरों के साथ-साथ पशु-पक्षियों की जान को भी खतरा रहता है।

गिरफ्तार आरोपित

पुलिस ने स्वालेनगर निवासी मो. नवाज, उस्मान और मोहम्मद यासीन, जखीरा निवासी मो. कासिम खान, बाकरगंज निवासी मो. वसीम, बाकरगंज खड्ड निवासी मो. रशीद, पपीते वाली गली निवासी सलीम, इमामबाड़ा निवासी जाहिद और पीली कोठी निवासी दिलशाद को गिरफ्तार किया है।


महानिदेशक ने स्वास्थ्य महानिदेशालय की समीक्षा बैठक में समयबद्ध कार्य-निस्तारण एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के दिए कड़े निर्देश

देहरादून। महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डॉ. सुनीता टम्टा की अध्यक्षता में आज स्वास्थ्य महानिदेशालय में कार्यरत समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में महानिदेशालय के विभिन्न अनुभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधार, पारदर्शिता एवं समयबद्ध कार्य-निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

महानिदेशक ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि कार्यालय में प्राप्त किसी भी पत्रावली अथवा प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए तथा प्रत्येक प्रकरण का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। यदि किसी प्रकरण के निस्तारण में विलंब पाया जाता है तो संबंधित अनुभाग के प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी तथा विलंब के कारणों का स्पष्ट उत्तरदायित्व तय किया जाएगा।

डॉ. सुनीता टम्टा ने संयुक्त निदेशक एवं सहायक निदेशक स्तर के अधिकारियों को अपने-अपने अनुभागों में संचालित कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा प्रत्येक लंबित प्रकरण की समीक्षा कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने अनुभागों की कार्यप्रणाली के प्रति पूर्ण जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा और किसी भी स्तर पर अनावश्यक लंबित प्रकरण नहीं रहना चाहिए।

बैठक में सूचना का अधिकार (RTI) अनुभाग के कार्यों की भी विशेष रूप से समीक्षा की गई। महानिदेशक ने निर्देश दिए कि RTI से संबंधित सभी प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निस्तारण किया जाए, ताकि आवेदक/अपीलकर्ता को समय पर वांछित सूचना उपलब्ध हो सके।

कार्यालयीन अनुशासन एवं समयपालन सुनिश्चित करने के निर्देश

महानिदेशक ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्धारित कार्यालय समय में अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनधिकृत अनुपस्थिति अथवा विलंब से कार्यालय पहुंचने की स्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि एक प्रभावी एवं उत्तरदायी कार्यालय व्यवस्था के लिए समयपालन, अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक हैं। प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं गंभीरता से करना होगा।

महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा अनावश्यक विलंब न किया जाए। विभागीय कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निष्ठा, अनुशासन, पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए।

बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशालय के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


सीतामढ़ी में किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, तीन युवकों पर वारदात का शक

सीतामढ़ी। नगर थाना क्षेत्र के भासर पिकेट इलाके में गुरुवार देर शाम एक किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। घटना के बाद पीड़िता की मां उसे लेकर नगर थाने पहुंची और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने किशोरी को इलाज और मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल भेजा।

बताया जा रहा है कि पीड़िता रीगा थाना क्षेत्र की रहने वाली है। उसकी मां के अनुसार, वह बेटी का उपचार कराने के लिए सीतामढ़ी शहर आई थी। इसी दौरान किशोरी भटककर भासर पिकेट क्षेत्र की ओर चली गई। आरोप है कि इसी दौरान कुछ युवकों ने उसे जबरन टेंपो में बैठाया और सुनसान इलाके की ओर ले गए।

परिजनों के आरोप के मुताबिक, सरेह में तीन युवकों ने किशोरी के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपी उसे मौके पर छोड़कर फरार हो गए। घटना के बाद किशोरी की हालत देखकर उसकी मां उसे लेकर पुलिस के पास पहुंची।

सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी। सदर डीएसपी समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे और पीड़िता व उसकी मां से घटना की जानकारी ली। पुलिस की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर भी जांच की और संभावित साक्ष्य जुटाए।

पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया है। डॉक्टरों की निगरानी में उसकी मेडिकल जांच कराई जा रही है। साथ ही पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाकर आरोपियों की पहचान करने में लगी है।

एसएसपी आशीष आनंद ने बताया कि मामले से जुड़े तकनीकी और अन्य पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


नैनीडांडा विकासखंड के शिक्षक गबर सिंह बिष्ट राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विज्ञान भवन में प्रदान किया राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान, विद्यालयी शिक्षा में उत्तराखंड से इस वर्ष रहे एकमात्र सम्मानित शिक्षक

पौड़ी- राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 प्रदान किए। उत्तराखंड के लिए यह गौरव का विषय है कि पौड़ी जिले के नैनीडांडा विकासखंड स्थित राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुस्याखाँद के प्रधानाध्यापक गबर सिंह बिष्ट को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में इस वर्ष उत्तराखंड से वह एकमात्र शिक्षक हैं, जिन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है।

गबर सिंह बिष्ट वर्ष 2003 से लगातार राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुस्याखाँद में निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे हैं और वर्तमान में विद्यालय के प्रधानाध्यापक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दूरस्थ क्षेत्र में रहते हुए उन्होंने विद्यार्थियों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए निरंतर नवाचारों को अपनाया। गणित एवं विज्ञान जैसे विषयों को सरल एवं रुचिकर ढंग से समझाने के साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बेहतर मार्गदर्शन दिया। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय के विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में उपलब्धियां प्राप्त की हैं।

गबर सिंह बिष्ट ने शिक्षण कार्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं आईसीटी का प्रभावी उपयोग किया। उन्होंने ई-कंटेंट एवं पीपीटी तैयार करने के साथ प्रोजेक्टर, डिजिटल बोर्ड और गूगल मीट जैसे तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखा। कोरोना काल में भी उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई को निरंतर जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ उन्होंने अवसंरचना विकास एवं शैक्षिक नवाचारों पर भी विशेष ध्यान दिया। तकनीकी एवं शैक्षिक नवाचारों के प्रति उनकी सक्रियता और शिक्षण के प्रति समर्पण ने उन्हें दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए निरंतर बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने में सक्षम बनाया है।

गबर सिंह बिष्ट को इससे पूर्व राज्यपाल पुरस्कार एवं शैलेश मटियानी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए उनका चयन उनके शिक्षण, विद्यालय प्रबंधन, नवाचार, आईसीटी के उपयोग, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन तथा शिक्षा के क्षेत्र में समग्र योगदान के आधार पर हुआ है।

मुख्य शिक्षाधिकारी अत्रेश सयाना ने गबर सिंह बिष्ट को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि कोरोना काल जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया। दूरस्थ क्षेत्र में रहकर भी शिक्षा के प्रति उनका निरंतर समर्पण अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय है। उन्होंने जनपद के शिक्षकों से नवाचार एवं तकनीकी माध्यमों का प्रभावी उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गबर सिंह बिष्ट की उपलब्धि न केवल पौड़ी जनपद बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है। शिक्षकों के समर्पित प्रयासों और सकारात्मक नवाचारों से विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिलते हैं तथा उनके भविष्य को नयी दिशा मिलती है।


आवारा पशुओं पर डीएम सख्त, सर्वे कर पोर्टल पर अपलोड होगा पूरा डेटा

एबीसी-एआरवी कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के निर्देश, पालतू श्वानों का अनिवार्य पंजीकरण कराने पर जोर

देहरादून। मा. उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में एबीसी-एआरवी कार्यक्रम तथा निराश्रित एवं पालतू गोवंशीय पशुओं के प्रभावी प्रबंधन को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शनिवार को अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने नगर निकायों को आवारा पशुओं एवं श्वानों की संख्या का विस्तृत सर्वेक्षण कर समग्र डेटा तैयार करने और उसे पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रमाणिक डेटा के आधार पर आवारा श्वानों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से बंध्याकरण, टीकाकरण एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

जिलाधिकारी ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) एवं एंटी रेबीज वैक्सीनेशन (एआरवी) अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश देते हुए कहा कि पालतू कुत्तों का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराया जाए। उन्होंने डोईवाला, विकासनगर और ऋषिकेश में श्वानों के बंध्याकरण एवं शल्य चिकित्सा के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा।

सड़कों पर गोवंश छोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने सभी नगर निकायों को सड़कों पर विचरण कर रहे निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निराश्रित गोवंश को तत्काल कांजीहाउस में पहुंचाकर उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित की जाए। साथ ही सड़कों पर गोवंश को लावारिस छोड़ने वाले लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

55 हजार से अधिक स्ट्रीट डॉग का बंध्याकरण
बैठक में सीनियर वेटरनरी ऑफिसर डॉ. वरुण अग्रवाल ने बताया कि देहरादून नगर निगम क्षेत्र में अब तक 55,487 स्ट्रीट डॉग का बंध्याकरण किया जा चुका है। वर्तमान में 72 डॉग केनल बनाए गए हैं, जबकि 144 केनल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इनके पूरा होने के बाद करीब 300 श्वानों को रखने की क्षमता उपलब्ध हो जाएगी। नगर निगम क्षेत्र में निराश्रित श्वानों के लिए वर्तमान में 25 डॉग फीडिंग स्पॉट बनाए गए हैं, जबकि पालतू श्वानों के 1,117 लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं।

883 निराश्रित गोवंश कांजीहाउस में संरक्षित
निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए केदारपुरम स्थित कांजीहाउस में वर्तमान में 347 गोवंशीय पशुओं की देखभाल की जा रही है। वहीं सेलाकुई के शंकरपुर स्थित कांजीहाउस में 536 पशु रखे गए हैं। निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) के साथ चार पशुवाहन तैनात किए गए हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि नगर निगम देहरादून क्षेत्र में मार्च 2026 से अब तक 109 बंदरों को पकड़कर सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ा गया है।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) केके मिश्रा, एसडीएम अपर्णा ढौंडियाल, सीनियर वेटरनरी ऑफिसर डॉ. वरुण अग्रवाल, एमएनए विजय नाथ शुक्ल सहित सभी नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारी उपस्थित रहे।


मनचाहे कॉलेज में दाखिला नहीं मिला तो छात्र ने खुद को मारी गोली, तमंचे को लेकर जांच में जुटी पुलिस

मेरठ। मनचाहे कॉलेज में दाखिला नहीं मिलने से परेशान 18 वर्षीय छात्र ने टीपीनगर थाना क्षेत्र के दिनेश विहार में खुद को गोली मारकर घायल कर लिया। परिजन उसे तत्काल सुभारती अस्पताल लेकर पहुंचे। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि छात्र के पास तमंचा कहां से आया।

पुलिस के अनुसार, दिनेश विहार निवासी दीपक कुमार का हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ के सामने हॉस्टल है। मेरठ स्थित घर में उनकी पत्नी, दो बेटियां और 18 वर्षीय बेटा हनी रहता है। हनी ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा पास की है।

शुक्रवार शाम मनचाहे कॉलेज में दाखिला नहीं मिलने को लेकर हनी का अपनी मां से विवाद हो गया। इसके बाद वह दूसरे कमरे में चला गया और कथित तौर पर तमंचे से अपने पेट में गोली मार ली। गोली चलने की आवाज सुनकर परिजन कमरे में पहुंचे तो हनी खून से लथपथ पड़ा था। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए सुभारती अस्पताल ले गए।

परिजनों ने घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को नहीं दी थी। बाद में सूचना मिलने पर टीपीनगर पुलिस अस्पताल पहुंची और छात्र से जुड़ी जानकारी जुटाई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

इंस्पेक्टर अरुण मिश्रा के मुताबिक, शुरुआती जांच में कॉलेज में दाखिला नहीं मिलने को लेकर मां-बेटे के बीच विवाद की बात सामने आई है। उपचार के बाद छात्र से तमंचे के संबंध में पूछताछ की जाएगी। परिवार के लोग भी तमंचे के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। पुलिस को आशंका है कि छात्र ने यह तमंचा किसी दोस्त से लिया हो सकता है। इस पहलू की भी जांच की जा रही है।


जन्माष्टमी कार्यक्रम में गया परिवार, पीछे से घर में घुसे चोर; पांच लाख के जेवर चोरी

सिद्धार्थनगर। गोल्हौरा थाना क्षेत्र के सेहुड़ा गांव में जन्माष्टमी कार्यक्रम के दौरान चोरों ने एक घर को निशाना बनाकर करीब पांच लाख रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। परिवार के लोग गांव में आयोजित कार्यक्रम देखने गए थे। इसी दौरान चोर छत के रास्ते घर में दाखिल हुए और कमरे में रखा जेवरों से भरा बक्सा लेकर फरार हो गए।

पीड़ित गोपाल शुक्ल के मुताबिक, रात में गांव में जन्माष्टमी का कार्यक्रम चल रहा था। परिवार के सभी सदस्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए घर से बाहर गए थे। इसी दौरान चोरों ने पतरे के रास्ते छत पर पहुंचकर घर में प्रवेश किया और कमरे में रखा जेवर से भरा बक्सा उठा लिया।

चोर बक्से को लेकर गांव के पश्चिम सिवान में पहुंचे। वहां उन्होंने बक्सा खोलकर उसमें रखे जेवर निकाल लिए और खाली बक्सा वहीं छोड़कर फरार हो गए। कार्यक्रम से लौटने के बाद परिवार को घर में चोरी होने की जानकारी मिली। परिजनों ने घर और आसपास काफी तलाश की, लेकिन बक्सा नहीं मिला।

सुबह गांव के पश्चिम सिवान में खाली बक्सा पड़ा मिला। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस को सूचना देते हुए तहरीर दी। तहरीर के अनुसार, चोर करीब पांच लाख रुपये के जेवरात ले गए हैं। चोरी हुए सामान में छह ग्राम की बिंदिया, करीब 10-10 ग्राम के दो मंगलसूत्र, करीब 15 ग्राम की चेन और अंगूठी, दो अन्य मंगलसूत्र, करीब छह ग्राम की दो अंगूठियां, पांच ग्राम की झुमकी, बच्चों के तीन लॉकेट, चांदी की पाजेब, दो पतली पायल और दो नथिया शामिल हैं।

थानाध्यक्ष संजय मिश्र ने बताया कि चोरी की तहरीर मिली है। उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। फिलहाल घटनास्थल से चोरी से संबंधित कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और चोरों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।


देश में बढ़ रहा स्वाइन फ्लू का खतरा, बुखार नहीं तो भी इन संकेतों पर रहें अलर्ट

देश के कई हिस्सों में इन दिनों इन्फ्लुएंजा-ए के H1N1 वायरस को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। अगस्त के अंत तक दिल्ली में संक्रमितों का आंकड़ा 3200 के पार पहुंच गया था, जबकि उत्तर प्रदेश में 2 सितंबर तक H1N1 के 685 मामलों की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हो चुकी थी। कुछ राज्यों में संक्रमण से मौत के मामले भी सामने आए हैं।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मरीजों में संक्रमण के लक्षण हल्के होते हैं और घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज के मरीजों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है।

सिर्फ तेज बुखार को न मानें फ्लू का संकेत

स्वाइन फ्लू का नाम आते ही आमतौर पर तेज बुखार, खांसी और बदन दर्द जैसे लक्षण ध्यान में आते हैं। लेकिन H1N1 संक्रमण की पहचान केवल बुखार के आधार पर नहीं की जा सकती। कई मामलों में व्यक्ति को बुखार नहीं होता, फिर भी वह इन्फ्लुएंजा से संक्रमित हो सकता है।

अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार कुछ लोगों में फ्लू से जुड़े सांस संबंधी लक्षण बुखार के बिना भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में लगातार खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द और असामान्य थकान जैसे संकेतों को सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर टालना ठीक नहीं है।

हर मरीज में एक जैसे लक्षण नहीं होते

H1N1 संक्रमण के लक्षण व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। बुजुर्गों में फ्लू होने के बावजूद बुखार न आना संभव है। ऐसे मरीजों में भूख कम लगना, कमजोरी या अन्य सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

वहीं बच्चों में सांस से जुड़े लक्षणों के साथ उल्टी और दस्त जैसी परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं। इसलिए केवल किसी एक लक्षण की मौजूदगी या अनुपस्थिति से H1N1 संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती।

लक्षण दिखने पर खुद से न करें बीमारी का अनुमान

फैमिली फिजिशियन डॉ. अरविंद डबास के मुताबिक खांसी, गले में खराश, नाक बंद होना और थकान जैसे लक्षण केवल फ्लू में ही नहीं, बल्कि कई दूसरे सांस संबंधी संक्रमणों में भी हो सकते हैं। ऐसे में सिर्फ लक्षणों के आधार पर यह तय करना मुश्किल है कि मरीज H1N1 से संक्रमित है या नहीं।

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर फ्लू की पुष्टि के लिए जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए रैपिड फ्लू टेस्ट के अलावा मॉलिक्यूलर टेस्ट भी उपलब्ध हैं। मॉलिक्यूलर टेस्ट वायरस के आनुवंशिक पदार्थ यानी वायरल RNA की पहचान करता है और आमतौर पर रैपिड एंटीजन टेस्ट की तुलना में ज्यादा संवेदनशील माना जाता है।

हालांकि प्रत्येक मरीज के लिए जांच जरूरी नहीं होती। डॉक्टर मरीज के लक्षण, संक्रमण के संपर्क में आने की संभावना और उसकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए जांच की जरूरत तय करते हैं।

सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत लें डॉक्टर की सलाह

विशेषज्ञों के मुताबिक बुखार न होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को फ्लू नहीं हो सकता। खासतौर पर बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में बिना बुखार के भी इन्फ्लुएंजा संक्रमण हो सकता है। कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है।

यदि फ्लू जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हों, सांस लेने में परेशानी हो, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या हालत बिगड़ती नजर आए तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कुछ मरीजों में डॉक्टर की सलाह पर एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

संक्रमण फैलने के खतरे को भी समझें

H1N1 को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि संक्रमित व्यक्ति को बीमारी का स्पष्ट पता चलने से पहले भी वायरस दूसरों तक पहुंच सकता है। संक्रमण के शुरुआती दिनों में इसके फैलने की संभावना अधिक रहती है।

इसलिए फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर केवल बुखार का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है। खांसी, गले में खराश, नाक संबंधी परेशानी और असामान्य थकान जैसे संकेतों पर भी ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार किया गया है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न माना जाए।

(साभार)


23 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था वारंटी, ‘ऑपरेशन प्रहार’ में दून पुलिस ने किया गिरफ्तार

देहरादून। दून पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे एक वारंटी अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। आरोपी जगदीश पिछले 23 वर्षों से फरार था। उसके खिलाफ वर्ष 2003 में बसंत विहार थाने में मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले में न्यायालय के समक्ष पेश नहीं होने पर उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे।

एसएसपी देहरादून के निर्देश पर वर्तमान में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत सभी थाना पुलिस को न्यायालय से जारी गैर जमानती वारंटों की शत-प्रतिशत तामीली के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में बसंत विहार पुलिस ने वर्ष 2003 में दर्ज मुकदमे में फरार चल रहे आरोपी की तलाश तेज की।

पुलिस के अनुसार, थाना बसंत विहार में मु0अ0सं0 45/03, धारा 323, 504 और 506 आईपीसी के तहत जगदीश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में वाद संख्या 209/03 के तहत एसीजेएम चतुर्थ कोर्ट से आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। इसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी, लेकिन आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा।

पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश के लिए लगातार सुरागरसी-पतारसी करते हुए स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी देहरादून आया हुआ है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने 5 सितंबर 2026 को बसंत विहार क्षेत्र में दबिश देकर वारंटी अभियुक्त जगदीश को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान जगदीश पुत्र स्वर्गीय मंगल सिंह, निवासी ग्राम तिलहिया, थाना चतरा, झारखंड, हाल निवासी शास्त्रीनगर खाला, थाना बसंत विहार, देहरादून, उम्र 55 वर्ष के रूप में हुई है।

पुलिस टीम में अपर उप निरीक्षक विजय प्रकाश, कांस्टेबल दीपक और कांस्टेबल विपिन शामिल रहे।


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