Wednesday, September 2nd, 2026

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उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद में आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान का किया दौरा

Daily Archives: 02/09/2026

उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद में आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान का किया दौरा

 उत्तराखंड के मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जैसे स्थानीय अनाजों के पोषक तत्वों पर शोध जारी: डॉ. भारती कुलकर्णी

कम उम्र से ही स्वस्थ खान-पान की आदतों का विकास किया जाना चाहिए: डॉ. भारती कुलकर्णी, निदेशक (आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान)

आईसीएमआर-एनआईएन ने पोषण अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा और राष्ट्रीय नीतियों में योगदान की दी जानकारी

देहरादून/हैदराबाद – बुधवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित हैदराबाद प्रेस दौरे के दूसरे दिन उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन), हैदराबाद का दौरा किया। इस दौरे के दौरान पत्रकारों को पोषण अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा तथा राष्ट्रीय नीतियों एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों के निर्माण में संस्थान के योगदान की जानकारी मिली।

प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए हैदराबाद स्थित आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने खाद्य संरचना, पोषक तत्वों की आवश्यकताओं तथा आहार संबंधी दिशा-निर्देशों पर वैज्ञानिक प्रमाण तैयार करने में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इंडियन फूड कंपोजिशन टेबल्स देश में उपलब्ध विभिन्न खाद्य पदार्थों में ऊर्जा, प्रोटीन, सूक्ष्म पोषक तत्वों और खनिजों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराती हैं। यह जानकारी शोधकर्ताओं, खाद्य उद्योग तथा जन स्वास्थ्य नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में उपयोगी है।

डॉ. कुलकर्णी ने भारतीयों के लिए पोषक तत्वों आवश्यकता और रिकमेंडेड डायटरी प्लान के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ये विभिन्न आयु वर्गों एवं शारीरिक अवस्थाओं के लिए पोषण संबंधी आवश्यकताओं का आधार निर्धारित करते हैं।

भारतीयों के लिए आहार संबंधी दिशा-निर्देश के प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि स्वस्थ खान-पान की आदतों का विकास बचपन की शुरुआती अवस्था से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के आहार में अतिरिक्त चीनी के सेवन से बचने संबंधी दिशा-निर्देश का उल्लेख किया।

कुपोषण के दोहरे बोझ पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. कुलकर्णी ने विशेष रूप से बच्चों में बढ़ते अधिक वजन और मोटापे की समस्या का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निष्क्रिय जीवनशैली तथा वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन इस समस्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल भोजन की उपलब्धता पोषण संबंधी बेहतर स्थिति सुनिश्चित नहीं करती। इसके लिए आहार में विविधता तथा व्यवहार में सकारात्मक बदलाव भी आवश्यक हैं।

डॉ. कुलकर्णी ने बताया कि उत्तराखंड के स्थानीय कृषि उत्पादों एवं मोटे अनाजों, जिनमें मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा शामिल हैं, के विशिष्ट पोषक तत्वों का अध्ययन करने के लिए शोध किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रागी (फिंगर मिलेट) के सेवन से एनीमिया में कमी पर इसके प्रभाव का आकलन करने के लिए नैदानिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन भी जारी हैं।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन के पोषण सूचना, संचार एवं स्वास्थ्य शिक्षा प्रभाग के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-जी डॉ. सुब्बा राव द्वारा आयोजित तकनीकी सत्रों में भी भाग लिया।

डॉ. सुब्बा राव ने वर्तमान पोषण संबंधी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए अल्पपोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तथा जीवनशैली से संबंधित चयापचय संबंधी विकारों के एक साथ मौजूद होने की स्थिति को समझाया। उन्होंने वैज्ञानिक पोषण संबंधी जानकारी और आम लोगों की दैनिक खान-पान की आदतों के बीच अंतर को पाटने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से खाद्य संबंधी भ्रांतियों को दूर करने तथा प्रमाण-आधारित आहार संबंधी आदतों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार पत्रकारिता करने का आह्वान किया।

प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया तथा शोधकर्ताओं के साथ संवाद कर खाद्य विश्लेषण एवं लिपिड रसायन विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

इस दौरे पर प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद प्रेस टूर के सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत सालार जंग संग्रहालय का दौरा किया। जहां पत्रकारों ने हैदराबाद की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत तथा संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक एवं अभिलेखीय संग्रहों के बारे में जानकारी प्राप्त की।


नशामुक्ति अभियान के तहत स्टेट नर्सिंग कॉलेज में छात्र-छात्राओं ने ली नशे से दूर रहने की शपथ

नशामुक्त उत्तराखंड के निर्माण में युवाशक्ति की भूमिका अहम- डॉ. धन सिंह रावत

देहरादून। प्रदेश में चल रहे 100 दिवसीय नशामुक्ति अभियान को गति देने के लिए बुधवार को देहरादून स्थित स्टेट नर्सिंग कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने नशे से पूरी तरह दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की शपथ ली।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने छात्र-छात्राओं को नशे के खिलाफ संकल्प दिलाते हुए कहा कि युवा शक्ति देश और प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है। नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या का असर केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे परिवार और समाज भी प्रभावित होते हैं।

डॉ. रावत ने कहा कि युवाओं को खुद नशे से दूर रहने के साथ अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को भी इसके नुकसान के बारे में जागरूक करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से नर्सिंग और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विद्यार्थी लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के साथ नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

नशे के खिलाफ अभियान को जनांदोलन बनाने की अपील

कैबिनेट मंत्री ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को जनांदोलन का रूप देने में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं का संकल्प, व्यवहार और जागरूकता समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

इस दौरान नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे और अपने परिवार, दोस्तों तथा समाज के अन्य लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे। विद्यार्थियों ने स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त उत्तराखंड के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम में नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार मनीषा ध्यानी, स्टेट नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्य ममता कपरुवाण समेत विभागीय अधिकारी, नर्सिंग फैकल्टी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


मुख्यमंत्री धामी ने 26 मदरसों को प्रदान किए मान्यता प्रमाण-पत्र

“ आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य बनेगा उज्ज्वल”

देहरादून। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। देहरादून के आईआरडीटी सभागार में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम की थीम “नई पहचान, नया सम्मान, आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य” रखी गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से 26 संस्थानों को मान्यता मिलना शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक शुरुआत है। उन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थानों के प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना भी जरूरी है।

बच्चों को आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा पर जोर

सीएम धामी ने कहा कि वर्तमान दौर विज्ञान, तकनीक, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। ऐसे में बच्चों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक ज्ञान और तकनीकी दक्षता से जोड़ना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे बच्चों की प्रतिभा सामने आए और वे अपनी रुचि के अनुसार डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक, वैज्ञानिक या किसी अन्य क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकें।

उन्होंने कहा कि आज केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बच्चों को व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा देने के साथ शोध और नई तकनीकों को समझने की क्षमता विकसित करनी होगी।

किसी वर्ग को निशाना बनाना सरकार का उद्देश्य नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य किसी व्यक्ति या वर्ग को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने समान नागरिक संहिता और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराने और हर बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर देने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की रही है। सरकार व्यक्ति की पहचान या वर्ग के बजाय उसके कार्य और योगदान को महत्व देती है।

अवैध कब्जों पर कार्रवाई का भी किया जिक्र

सीएम धामी ने सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। सरकार का उद्देश्य किसी गरीब व्यक्ति को परेशान करना नहीं है। उन्होंने कहा कि वैध दस्तावेज, रजिस्ट्री और स्वीकृत मानचित्र के साथ जमीन रखने वाले व्यक्ति को परेशान करने का कोई सवाल नहीं है।

युवाओं और बेटियों को आगे बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को हुनर और रोजगार से जोड़ने के लिए ऋण सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। बेटियों को भी आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी क्षमता साबित कर रहे हैं, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने का काम सरकार कर रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और विकास के माध्यम से समाज को आगे ले जाने के लिए पुरानी सोच में बदलाव जरूरी है। बच्चों के भविष्य को राजनीतिक उद्देश्य से ऊपर रखते हुए उनकी शिक्षा और प्रतिभा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

शिक्षण संस्थानों से धरातल पर बदलाव की अपेक्षा

सीएम धामी ने मान्यता प्राप्त संस्थानों से कहा कि नई व्यवस्था केवल प्रमाण-पत्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसका वास्तविक असर बच्चों की शिक्षा, उनके व्यक्तित्व विकास और भविष्य के अवसरों में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से गांव-गांव और घर-घर तक आधुनिक शिक्षा का संदेश पहुंचाने की अपेक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका समाज में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे आने वाली पीढ़ियों का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सहयोग किया जाएगा, लेकिन संस्थानों को भी पूरी जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।

देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर के संस्थान शामिल

समारोह में देहरादून जनपद के 6, हरिद्वार के 19 और ऊधमसिंहनगर के एक अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इनमें मदरसा जामिया इस्लामिया, जामिया दारूल उलूम रमजानिया, जामिया सबीलुर्रशाद, जामिया सय्यिदा फातिमातुज्जाहरा, जामिया रहीमिया प्राईमरी स्कूल, मदरसा अरबिया तालीमुल कुरआन समेत अन्य संस्थान शामिल हैं।

हरिद्वार जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के कई मदरसों और शिक्षण संस्थानों को भी मान्यता दी गई। वहीं ऊधमसिंहनगर के एम.जी.एन. पब्लिक स्कूल, केलाखेड़ा को नवीन मान्यता प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड विभिन्न क्षेत्रों में नई पहल के जरिए देश के सामने उदाहरण पेश कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में शुरू हुई यह पहल भी आगे चलकर प्रदेश को नई पहचान दिलाएगी।

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव विक्रम सिंह यादव सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।


छात्राओं के उत्साह के बीच कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय तिरपालीसैंण पहुंचीं जिलाधिकारी, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

छात्राओं से आत्मीय संवाद कर जानी पढ़ाई-लिखाई व सुविधाओं की स्थिति, शौचालय मरम्मत, रंगरोगन और जल निकासी के कार्यों के प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश

पौड़ी- जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने विकासखंड थलीसैंण के दूरस्थ कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, तिरपालीसैंण का निरीक्षण कर छात्राओं के लिए उपलब्ध आवासीय एवं शैक्षणिक व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया। जिलाधिकारी के विद्यालय पहुंचने पर छात्राएं उत्साह से भर उठीं और उन्होंने उनका आत्मीयता से स्वागत किया। जिलाधिकारी ने भी छात्राओं से सहज एवं आत्मीय संवाद करते हुए उनकी पढ़ाई-लिखाई, दैनिक दिनचर्या और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।

जिलाधिकारी ने छात्राओं के रहने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, भोजन, स्वच्छता सहित विद्यालय की अन्य मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्राओं से उनके दैनिक जीवन, पढ़ाई, भोजन तथा विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी लेते हुए उनके सुझाव भी सुने।

जिलाधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी को विद्यालय में शौचालय की आवश्यक मरम्मत शीघ्र कराने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यालय भवन के रंगरोगन के लिए प्राक्कलन तैयार कर प्रस्ताव भेजने को कहा, ताकि आवश्यक कार्य समयबद्ध रूप से कराया जा सके।

विद्यालय परिसर में जल निकासी व्यवस्था का जायजा लेते हुए जिलाधिकारी ने नाली निर्माण एवं सुधार से संबंधित प्रस्ताव भी तैयार कर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवासीय विद्यालय में रहने वाली छात्राओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए, ताकि छात्राओं को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिल सके।

छात्राओं ने जिलाधिकारी से संवाद के दौरान उत्साहपूर्वक अपनी बातें साझा कीं और विद्यालय से जुड़ी आवश्यकताओं के बारे में जानकारी दी। जिलाधिकारी ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने तथा अपनी रुचि और प्रतिभा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी, संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात, खंड शिक्षा अधिकारी विवेक पंवार, विद्यालय की प्रधानाचार्या सुधा गौड़ सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


दून पुलिस का नशा तस्करों पर शिकंजा, चरस और अवैध शराब के साथ तीन गिरफ्तार

देहरादून। नशे के कारोबार के खिलाफ दून पुलिस का अभियान लगातार जारी है। पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए चरस और अवैध देशी शराब की तस्करी में शामिल तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 380 ग्राम चरस, 85 पाउच माल्टा मसालेदार देशी शराब और शराब तस्करी में इस्तेमाल स्कूटी बरामद की है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर जिले के सभी थाना क्षेत्रों में मादक पदार्थ और अवैध शराब की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में राजपुर, विकासनगर और ऋषिकेश पुलिस ने यह कार्रवाई की।

राजपुर में 380 ग्राम चरस के साथ युवक गिरफ्तार

थाना राजपुर पुलिस की टीम ने एक फरवरी 2026 को सीएसआई तिराहा, ओल्ड मसूरी रोड के पास चेकिंग के दौरान अमरनाथ नामक व्यक्ति को 380 ग्राम अवैध चरस और इलेक्ट्रॉनिक तराजू के साथ गिरफ्तार किया। आरोपित के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह खुद भी नशे का आदी है। उसके अनुसार, वह उत्तरकाशी के एक स्थानीय व्यक्ति से चरस सस्ते दामों पर खरीदकर लाया था और राजपुर क्षेत्र में इसे महंगे दामों पर बेचने की तैयारी में था। इससे पहले ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपित की पहचान अमरनाथ (35), निवासी सपेरा बस्ती, थाना राजपुर, देहरादून के रूप में हुई है।

विकासनगर में 53 पाउच शराब के साथ आरोपी पकड़ा

कोतवाली विकासनगर पुलिस ने एक सितंबर 2026 को बस अड्डा बाजार के पास चेकिंग के दौरान चंदन (38) को 53 पाउच माल्टा मसालेदार देशी शराब के साथ गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, चंदन पहले भी आबकारी अधिनियम और अन्य आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है। उसके खिलाफ वर्ष 2023 से 2026 तक आबकारी अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं।

ऋषिकेश में स्कूटी से शराब ले जाते पकड़ा

कोतवाली ऋषिकेश पुलिस ने एमडी रोड पर चेकिंग के दौरान अमित (39) को स्कूटी से अवैध शराब ले जाते हुए गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 32 ट्रेटा पैक माल्टा मसालेदार देशी शराब बरामद हुई। शराब परिवहन में इस्तेमाल एक्टिवा स्कूटी संख्या UK-14-L-2595 को भी पुलिस ने सीज कर दिया है।

अमित के खिलाफ कोतवाली ऋषिकेश में आबकारी अधिनियम की धारा 60(1)/72 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। वह अपर गंगा नगर, ऋषिकेश का निवासी बताया गया है।

पुलिस का कहना है कि जिले में नशे और अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।


पाकुड़ में ज्वेलर्स दुकान में दिनदहाड़े डकैती, लाखों के सोने-चांदी के जेवर लेकर फरार अपराधी

पाकुड़। अमड़ापाड़ा मुख्य बाजार स्थित किशुन वर्मा ज्वेलर्स में बुधवार को दिनदहाड़े अपराधियों ने डकैती की वारदात को अंजाम दिया। अपराधी दुकान से सोने और चांदी के लाखों रुपये मूल्य के आभूषण लेकर फरार हो गए। व्यस्त बाजार में हुई इस वारदात से आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया।

घटना की सूचना मिलते ही अमड़ापाड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने ज्वेलर्स दुकान का निरीक्षण करने के साथ ही वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पूरी वारदात कैमरे में रिकॉर्ड हुई है। पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

मुख्य बाजार में दिनदहाड़े ज्वेलर्स दुकान को निशाना बनाए जाने के बाद व्यापारियों में दहशत का माहौल है। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस से आरोपितों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है।

लोगों का कहना है कि व्यस्त बाजार में इस तरह की वारदात होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस अब आसपास के इलाकों में भी संदिग्ध गतिविधियों और आने-जाने वाले लोगों की जानकारी जुटा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अपराधी दुकान से सोने और चांदी के आभूषण ले गए हैं। हालांकि, चोरी गए जेवरात की कुल मात्रा और उनकी वास्तविक कीमत का आकलन अभी किया जा रहा है। दुकान संचालक और पुलिस की ओर से स्टॉक का मिलान किए जाने के बाद ही नुकसान का सही आंकड़ा सामने आएगा।

पुलिस दुकान के अलावा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वारदात में कितने लोग शामिल थे, वे किस वाहन से आए थे और घटना के बाद किस दिशा में फरार हुए।

पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की जांच जारी है।


कानपुर में BSF कांस्टेबल परीक्षा के दौरान बवाल, तकनीकी खामी से भड़के अभ्यर्थी, परीक्षा रद्द

18 सितंबर को अब दोबारा होगी परीक्षा

कानपुर। कानपुर के चकेरी इलाके में बुधवार को बीएसएफ कांस्टेबल (मिनिस्ट्रियल) भर्ती परीक्षा के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब परीक्षा केंद्र पर तकनीकी अव्यवस्थाओं को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। श्याम नगर स्थित एमडी इन्फोटेक परीक्षा केंद्र पर परीक्षा शुरू होने के बाद सिस्टम में दिक्कत आने और व्यवस्थाओं को लेकर अभ्यर्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया और केंद्र पर तोड़फोड़ की स्थिति बन गई।

अभ्यर्थियों के मुताबिक पहली पाली की परीक्षा शुरू होने के बावजूद करीब 40 मिनट तक कई कंप्यूटर सिस्टम काम नहीं कर सके। सिस्टम शुरू होने के बाद भी कुछ अभ्यर्थियों के कीबोर्ड और माउस काम नहीं कर रहे थे, जबकि केवल सीपीयू चालू होने की बात कही गई। इसके अलावा परीक्षा कक्ष में बिजली की समस्या के कारण पंखे और लाइट भी बंद होने की शिकायत की गई।

बिना जांच प्रवेश देने का भी आरोप

परीक्षा देने के लिए दूसरे शहरों से पहुंचे अभ्यर्थियों ने केंद्र की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए। मुंबई से कानपुर पहुंची अभ्यर्थी शालिनी बागुन ने आरोप लगाया कि केंद्र पर परीक्षार्थियों की उचित जांच किए बिना ही प्रवेश दिया गया। उमस और बारिश के बीच बिजली कटौती की समस्या को लेकर अभ्यर्थियों ने जब केंद्र प्रबंधन से जवाब मांगा तो उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली।

अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया में इस तरह की अव्यवस्था से उनका समय और मेहनत दोनों प्रभावित हुए। नाराज अभ्यर्थियों ने केंद्र में मौजूद सिस्टम में तोड़फोड़ शुरू कर दी और परीक्षा को लेकर तत्काल स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।

कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची

हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह और एसीपी चकेरी आशुतोष कुमार सिंह समेत चकेरी, कैंट, जाजमऊ, नौबस्ता और रेलबाजार थानों से पुलिस बल को मौके पर भेजा गया।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि अभ्यर्थी इस बात पर अड़े रहे कि जब तक बीएसएफ के आधिकारिक पोर्टल पर परीक्षा की नई तारीख की घोषणा नहीं होती, तब तक वे प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे।

18 सितंबर को दोबारा होगी परीक्षा

स्थिति बिगड़ती देख पुलिस कमिश्नर ने बीएसएफ के एडीजी मकरंद देवेशकर से बातचीत की। इसके बाद परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया और नई परीक्षा की तारीख 18 सितंबर निर्धारित की गई।

मौके पर पहुंचीं एसीएम-2 कैंट शिखा शुक्ला ने भी परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही सामने आने वाले केंद्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसे केंद्रों को ब्लैकलिस्ट किए जाने की जरूरत है। उन्होंने मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपने की बात कही।

बताया जा रहा है कि राजस्थान और जयपुर के कुछ परीक्षा केंद्रों से भी परीक्षा में अव्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं। मामले को लेकर अब संबंधित स्तर पर जांच और आगे की कार्रवाई की उम्मीद है।


पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप, पति और प्रेमिका गिरफ्तार

पीलीभीत। पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में फरार चल रहे पति और उसकी प्रेमिका को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मामला जहानाबाद थाना क्षेत्र के सैंजना गांव का है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान महेश कुमार और गायत्री देवी के रूप में हुई है। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

मामले में मिलक बननपुरी निवासी गंगाराम ने 15 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी सोमवती की शादी करीब 15-16 वर्ष पहले सैंजना निवासी महेश कुमार से हुई थी। दंपती के दो बच्चे हैं।

परिजनों के मुताबिक, पिछले करीब छह महीने से महेश का गांव की ही एक विवाहित महिला गायत्री देवी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आरोप है कि दोनों कुछ समय के लिए गांव छोड़कर रुद्रपुर चले गए थे, जहां वे पति-पत्नी की तरह रहने लगे थे।

आरोप है कि आठ अगस्त को महेश गायत्री को लेकर अपने घर सैंजना पहुंचा। उस समय उसकी पत्नी सोमवती घर पर मौजूद थी। महेश कथित तौर पर पत्नी पर गायत्री को स्वीकार करने का दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई।

परिजनों ने महेश को समझाने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। तहरीर में महेश के भाई कृष्णपाल, बहन कुसुम और बहनोई पप्पू पर भी सोमवती को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है।

परिजनों के अनुसार, लगातार प्रताड़ना से परेशान सोमवती ने 14 अगस्त की सुबह जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर स्वजन उसे नवाबगंज के आर्य अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।

प्रभारी निरीक्षक जयशंकर सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर छह लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई थी। मामले की विवेचना उप निरीक्षक विवेक कुमार कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में महेश ने गायत्री के साथ प्रेम प्रसंग की बात स्वीकार की है। महेश और गायत्री को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।


सिगरेट का धुआं सिर्फ फेफड़ों नहीं, किडनी को भी पहुंचा सकता है नुकसान, बढ़ सकता है गंभीर बीमारी का खतरा

धूम्रपान को अक्सर फेफड़ों की बीमारी और कैंसर से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका असर शरीर के कई दूसरे महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ सकता है। सिगरेट के धुएं के साथ शरीर में पहुंचने वाले हानिकारक रसायन रक्त प्रवाह के जरिए अलग-अलग अंगों तक पहुंचते हैं। इनमें किडनी भी शामिल है, जो शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक तंबाकू का सेवन शरीर के लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का जोखिम भी बढ़ सकता है।

किडनी तक कैसे पहुंचता है सिगरेट का नुकसान?

किडनी लगातार रक्त को फिल्टर करने का काम करती है। इसके साथ ही यह शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखने तथा ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। ऐसे में रक्त प्रवाह से जुड़ी किसी भी समस्या का असर किडनी के कामकाज पर पड़ सकता है।

सिगरेट में मौजूद निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और किडनी तक रक्त पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहती है। धूम्रपान शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी बढ़ावा दे सकता है, जो लंबे समय में किडनी के ऊतकों और उनकी कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

कुछ अध्ययनों में धूम्रपान और क्रॉनिक किडनी डिजीज के बीच संबंध पाया गया है। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या है, उनमें धूम्रपान किडनी से जुड़े जोखिम को और बढ़ा सकता है।

रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है असर

धूम्रपान का प्रभाव केवल किडनी के फिल्टरिंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहता। सिगरेट का धुआं रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाने वाली प्रक्रियाओं को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ने और रक्त संचार प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

किडनी को अपना काम ठीक से करने के लिए पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन की जरूरत होती है। लंबे समय तक रक्त वाहिकाओं पर पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव किडनी की सामान्य कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।

दिल और दिमाग पर भी बढ़ता है खतरा

धूम्रपान का असर शरीर के पूरे कार्डियोवस्कुलर सिस्टम पर पड़ सकता है। रक्त वाहिकाओं के प्रभावित होने से हृदय और मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली नसों पर भी असर पड़ सकता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा धूम्रपान शरीर में ट्राइग्लिसराइड और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित कर सकता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है।

सिर्फ लंग कैंसर तक सीमित नहीं है खतरा

सिगरेट को फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है, लेकिन तंबाकू का नुकसान केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है। तंबाकू के धुएं में हजारों रसायन मौजूद होते हैं, जिनमें कई स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माने जाते हैं। लंबे समय तक तंबाकू के संपर्क में रहने से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

धूम्रपान का असर इम्यून सिस्टम, मुंह और मसूड़ों की सेहत, प्रजनन क्षमता और हड्डियों सहित शरीर की कई अन्य प्रणालियों पर भी पड़ सकता है।

धूम्रपान छोड़ना क्यों जरूरी?

धूम्रपान से होने वाले नुकसान को देखते हुए इसे छोड़ना स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या पहले से किडनी संबंधी समस्या वाले लोगों के लिए तंबाकू से दूरी बनाना बेहद जरूरी है।

नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य संबंधी अध्ययनों में सामने आई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या धूम्रपान छोड़ने के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।

(साभार)


सोनीपत में प्रेम विवाह करने वाले दंपती के शव मिले, पति फंदे पर लटका मिला और पत्नी बेड के पास मृत पड़ी थी

सोनीपत। कबीरपुर में दो साल पहले प्रेम विवाह करने वाले दंपती के शव बुधवार को घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मिले। पति ऋतिक का शव फंदे पर लटका हुआ था, जबकि पत्नी सिमरन की लाश बेड के पास पड़ी थी। उसके गले में भी फंदा लगा हुआ था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भेज दिया।

प्रारंभिक जांच में दोनों के आत्महत्या करने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, उन्होंने यह कदम क्यों उठाया, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार, ऋतिक और सिमरन ने करीब दो साल पहले प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद दोनों अपने परिवार के साथ कबीरपुर में रह रहे थे। बुधवार को घर में दोनों के शव मिलने की सूचना पुलिस को दी गई।

मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच की तो ऋतिक का शव फंदे से लटका मिला। वहीं सिमरन बेड के पास मृत अवस्था में पड़ी थी और उसके गले में भी फंदा लगा हुआ था। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भेज दिया।

बताया जा रहा है कि ऋतिक मूल रूप से गन्नौर क्षेत्र के तेवड़ी गांव का रहने वाला था, जबकि सिमरन राठधाना गांव की निवासी थी। दोनों की शादी को करीब दो वर्ष हुए थे।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद या तनाव तो नहीं था। पुलिस सभी संभावित पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा।


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