Tuesday, September 22nd, 2026

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राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण को लेकर समिति की बैठक, डीएम ने दिए पारदर्शिता के साथ निस्तारण के निर्देश

Daily Archives: 22/09/2026

राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण को लेकर समिति की बैठक, डीएम ने दिए पारदर्शिता के साथ निस्तारण के निर्देश

देहरादून। राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण से संबंधित लंबित प्रकरणों के निस्तारण को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में समिति की बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में चिन्हीकरण से जुड़े विभिन्न मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण से संबंधित सभी प्रकरणों का परीक्षण शासन द्वारा निर्धारित मानकों और प्रक्रिया के अनुरूप किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले में उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों की विधिवत जांच के बाद ही नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने चिन्हीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि समिति के समक्ष प्रस्तुत प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाए। साथ ही लंबित मामलों के निस्तारण के लिए समिति के सदस्यों और संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

बैठक में समिति के सदस्यों ने राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर अपने सुझाव और विचार रखे। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवश्यक अभिलेखों की जांच पूरी करते हुए शासन की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकरणों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, उप जिलाधिकारी डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी ऋषिकेश कुमकुम जोशी सहित पुलिस विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। समिति के सदस्य राज्य आंदोलनकारी ओपी उनियाल, देवीगोदियाल, डीएस गुंसाई, विवेकानंद खण्डूड़ी, सरोज डिमरी, उर्मिला, निर्मला बिष्ट, पुष्पलता सिलमाना सहित अन्य सदस्य और संबंधित विभागों के अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।


नशे से दूर रहकर सकारात्मक एवं रचनात्मक जीवन का करें चयन- डीएम

नशा मुक्त भारत अभियान के तहत यूपीईएस में छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति किया जागरूक

छात्र-छात्राओं से संवाद कर डीएम ने कहाः जागरूकता और सामूहिक प्रयास से रोकना होगा नशे का प्रसार

देहरादून। ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग देहरादून एवं यूपीईएस के संयुक्त तत्वावधान में आज यू०पी०ई०एस० कैंपस, बिधोली, प्रेमनगर, देहरादून में छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ एवं समापन राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान के साथ हुआ।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करते हुए छात्र-छात्राओं से संवाद किया और उन्हें नशे से दूर रहने का संदेश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के पास अपने जीवन में कुछ समय और अवसर होते हैं, ऐसे में यह स्वयं तय करना आवश्यक है कि वह अपने जीवन में क्या चुनता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने भविष्य के लिए सकारात्मक, रचनात्मक एवं स्वस्थ विकल्पों का चयन करें और नशे से पूरी तरह दूर रहें।

जिलाधिकारी ने कहा कि नशे की गिरफ्त में आने वाला व्यक्ति केवल स्वयं को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि उसका प्रभाव उसके परिवार और व्यापक रूप से समाज पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स का नशा एक प्रकार का ‘डोपामेन ट्रैप’ बन सकता है, जिसमें व्यक्ति एक बार फंसने के बाद धीरे-धीरे इसकी गिरफ्त में उलझता चला जाता है। इससे बचने के लिए स्वयं का विश्लेषण, आत्म-अनुशासन और स्वयं पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज से नशे जैसी गंभीर समस्या को दूर करने के लिए सभी स्तरों पर प्रभावी एवं निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। सरकार, शासन, प्रशासन, पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, अभिभावकों तथा आम नागरिकों को मिलकर इस दिशा में योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि युवा विशेष रूप से नशे के सौदागरों के निशाने पर होते हैं। ऐसे में युवाओं को जागरूक करना और उन्हें नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नशा विरोधी जागरूकता को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए जनपद के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भी इस प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि छात्र-छात्राओं को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा सके।

कहानी के माध्यम से पुलिस अधीक्षक नगर ने किया जागरूक
कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक नगर शेखर चन्द्र सुयाल ने प्रभावी कहानी के माध्यम से छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि नशे जैसी सामाजिक समस्या को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह््वान किया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, यूपीईएस के वाइस चांसलर मनीष मदान एवं विशेष अतिथि ललित जोशी ने भी छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।

नुक्कड़ नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दिया नशा मुक्ति का संदेश
कार्यशाला के दौरान छात्र-छात्राओं को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से नशे के दुष्प्रभाव, नशे से होने वाली सामाजिक एवं पारिवारिक समस्याओं तथा नशा छोड़ने एवं दूसरों को भी नशे से बचाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं अन्य प्रतिभागियों को नशे से दूर रहने तथा नशा मुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें तथा अपने मित्रों, परिवारजनों एवं आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें। युवाओं को नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियान का सक्रिय सहभागी बनाने पर भी जोर दिया गया।

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, पुलिस अधीक्षक नगर शेखर चन्द्र सुयाल, यूपीईएस के वाइस चांसलर मनीष मदान, विशेष अतिथि ललित जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रोहित गोंडवाल, डॉ0 प्रदीप राणा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, यूपीईएस डॉ0 दीपा मेहरा रावत, डॉ0 रोहित रस्तोगी, यूपीईएस के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


हेरोइन तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में गौरव डावर गिरफ्तार, कोर्ट ने 5 दिन की ईडी कस्टडी दी

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हेडक्वार्टर ऑफिस ने ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में गौरव डावर को गिरफ्तार किया है। गौरव डावर, अशोक डावर के पिता हैं। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। मामले में आरोप है कि हेरोइन को सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क पाउडर में छिपाकर बड़े पैमाने पर भारत लाया गया था। इस नेटवर्क से जुड़े नशीले पदार्थ दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में भी बरामद किए गए थे।

गिरफ्तारी के बाद गौरव डावर को नई दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट स्थित वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में स्पेशल जज (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को पांच दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया।

ईडी ने यह जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एनआईए ने हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य के खिलाफ यूएपीए, 1967, एनडीपीएस एक्ट, 1985 और आईपीसी, 1860 के तहत ड्रग तस्करी से संबंधित मामला दर्ज किया था। एनआईए इस मामले में पहले ही छह चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आरोप लगाया गया है कि कई आरोपी अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट के संपर्क में थे।

जांच में मास्टरमाइंड वितायश कोसर उर्फ राजू दुबई, पाकिस्तानी आईएसआई एजेंटों और अफगान नागरिकों के बीच कथित गठजोड़ की बात सामने आई है। ईडी के मुताबिक, ड्रग्स की अवैध बिक्री से हासिल 74 करोड़ रुपये की रकम हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजी गई। जांच एजेंसी के अनुसार इस रकम का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग में किया गया।

ईडी की जांच में प्रतिबंधित सामान की तस्करी, ड्रग्स से हुई कमाई के बंटवारे और हवाला लेनदेन के जरिए कुल 89 करोड़ रुपये की अपराध से हुई कमाई (पीओसी) का पता चला है। इसमें एनआईए द्वारा चिन्हित 74 करोड़ रुपये की हवाला रकम भी शामिल है। अपराध से हुई अन्य आय का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

पीएमएलए के तहत मामले में कई बार तलाशी ली जा चुकी है। इनमें 15 जुलाई से 17 जुलाई के बीच की गई तलाशी भी शामिल है। जांच के मुताबिक गौरव डावर ने सह-आरोपी हरप्रीत सिंह तलवार के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट की नशीले पदार्थों की खेप को आगे पहुंचाने में मदद की। इसके बदले कथित तौर पर उन्हें सामान और हवाला के माध्यम से भुगतान किया गया।

ईडी के अनुसार, इस भुगतान में मास्टरमाइंड राजू दुबई की ओर से भेजी गई प्रतिबंधित वस्तुएं शामिल थीं। इनमें “गुडांग गरम सिगरेट” और “सुपारी” की खेप बताई गई है, जिसमें सूखे खजूर और परफ्यूम आदि शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि गौरव डावर को दुबई जाने के दौरान कई बार राजू दुबई से एईडी में नकद रकम मिलने का भी आरोप है।

जांच एजेंसी के अनुसार ड्रग्स और प्रतिबंधित सामान की तस्करी से हासिल कथित अवैध रकम को कमर्शियल हॉस्पिटैलिटी वेंचर्स, नाइट क्लबों और लग्जरी संपत्तियों में लगाया गया। ईडी का आरोप है कि गौरव डावर ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर दिल्ली के “प्लेबॉय क्लब” और “व्हाइट क्लब” में नकद निवेश किया। ये क्लब न्यूएरा फीस्ट एंड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के जरिए संचालित किए जाते थे।

ईडी के मुताबिक, गौरव डावर की गिरफ्तारी ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के तहत की गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।


प्रदेश के 243 पदक विजेता खिलाड़ियों को मिलेगी आउट ऑफ टर्न नियुक्ति

जारी हुआ शासनादेश

खेल मंत्री ने खिलाड़ियों के दी बधाई,कहा खेलेगा युवा तो आगे बढेगा युवा

प्रतिभावान खिलाड़ियों को खेल के साथ अपने भविष्य को सुरक्षित करने का मिलेगा अवसर- रेखा आर्या

देहरादून। प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। खेल नीति-2021 के अंतर्गत पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नियुक्ति प्रदान किए जाने को लेकर शासनादेश जारी कर दिया गया है। इसके तहत प्रदेश के 243 पदक विजेता खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में राजपत्रित एवं अराजपत्रित पदों पर नियुक्ति प्रदान की जाएगी।

प्रदेश की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने इस महत्वपूर्ण निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों को बधाई दी। खेल मंत्री ने कहा कि “खेलगा युवा तो आगे बढ़ेगा युवा” के संकल्प के साथ प्रदेश सरकार लगातार खिलाड़ियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि आउट ऑफ टर्न नियुक्ति से प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ अपने भविष्य को सुरक्षित करने का अवसर मिलेगा।

खेल मंत्री ने बताया कि नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ियों में 34 स्वर्ण, 115 रजत और 94 कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों को खेल एवं युवा कल्याण, गृह, परिवहन, वन तथा शिक्षा सहित विभिन्न विभागों में समायोजित किया जाएगा।

खेल मंत्री ने साथ ही कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध हो ताकि हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने के साथ अपने भविष्य को भी सुरक्षित कर सकें।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने प्रदेश के सभी खेल प्रेमियों एवं पदक विजेता खिलाड़ियों को इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। साथ ही उन्होंने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।


हाड़गंज के स्पा सेंटर में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार, 8 महिलाएं पाबंद

नई दिल्ली। पहाड़गंज इलाके में स्पा सेंटर की आड़ में कथित रूप से चल रहे सेक्स रैकेट का नबी करीम थाना पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मौके से आठ महिलाओं को भी पाबंद किया गया, जिन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों में पहाड़गंज निवासी स्पा मालिक विवेक कुमार, झारखंड निवासी मैनेजर दशरथ मंडल, छपरा निवासी अमन और गाजियाबाद निवासी गुड्डू करमाकर शामिल हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से कई आपत्तिजनक सामग्री भी मिली है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक 21 सितंबर की शाम करीब सात बजे सब इंस्पेक्टर नीरज राठी को सूचना मिली थी कि पहाड़गंज की मुल्तानी ढांडा स्थित गली नंबर तीन में प्रॉपर्टी नंबर 9139 की दूसरी और तीसरी मंजिल पर स्पा सेंटर की आड़ में अनैतिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस ने सब इंस्पेक्टर अमित को नकली ग्राहक बनाकर मौके पर भेजा। गैर-कानूनी गतिविधि की पुष्टि होने के बाद पुलिस टीम ने सेंटर पर छापा मार दिया। कार्रवाई के दौरान चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

मौके से नेपाल, बंगाल, नोएडा और पंजाब की रहने वाली आठ महिलाओं को पाबंद किया गया था। पूछताछ के बाद सभी को छोड़ दिया गया। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।


ड्रोन से डार्कनेट तक तस्करी के नए नेटवर्क पर नजर, दो दिन चलेगा एएनटीएफ सम्मेलन

नई दिल्ली। देश में बढ़ते और बदलते ड्रग तस्करी नेटवर्क से निपटने के लिए मंगलवार से राजधानी में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। 22 और 23 सितंबर को आयोजित हो रहे एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एएनटीएफ प्रमुख शामिल हो रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन का उद्घाटन किया।

सम्मेलन में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के साथ-साथ ड्रग्स की मांग कम करने, नशे से होने वाले नुकसान को घटाने और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। कार्यक्रम के दौरान नशे के खिलाफ जागरूकता से जुड़े टीवी विज्ञापन जारी किए जाने, लखनऊ और देहरादून में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के नए जोनल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखे जाने और बेहतर प्रदर्शन करने वाले एएनटीएफ को सम्मानित किए जाने का कार्यक्रम भी है। नए स्वरूप में तैयार एनसीबी की वेबसाइट भी शुरू की जाएगी।

दो दिवसीय सम्मेलन में ‘नारकोटिक्स नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट 2026-29’ के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए तय लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा की जा रही है। इस दौरान ड्रग सप्लाई कम करने, नशे की मांग घटाने और पुनर्वास से जुड़े उपायों पर भी विचार-विमर्श होगा। सम्मेलन में कुल आठ तकनीकी सत्र रखे गए हैं, जिनमें ड्रग नेटवर्क और कार्टेल को तोड़ने, सिंथेटिक ड्रग्स, प्रीकर्सर केमिकल, अवैध खेती, डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और ड्रग्स से जुड़े कानूनों के प्रभावी इस्तेमाल जैसे विषय शामिल हैं।

एनसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की भौगोलिक स्थिति ड्रग तस्करी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है। देश एक ओर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान वाले ‘गोल्डन क्रिसेंट’ तथा दूसरी ओर म्यांमार, लाओस और थाईलैंड वाले ‘गोल्डन ट्राएंगल’ के बीच स्थित है। भारत की लंबी भूमि और समुद्री सीमाएं भी निगरानी की चुनौती बढ़ाती हैं।

तस्करी के पारंपरिक रास्तों के साथ अब ड्रोन, समुद्री कंटेनर, पार्सल, डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी जैसे माध्यमों का भी इस्तेमाल सामने आया है। सरकार के 2026-29 के विजन डॉक्यूमेंट में ऑनलाइन ड्रग नेटवर्क की निगरानी और डिजिटल जांच क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब के कुछ जिलों में ड्रोन के जरिए ड्रग्स पहुंचाने के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा देश में अवैध सिंथेटिक ड्रग लैब और फार्मास्युटिकल दवाओं के दुरुपयोग को लेकर भी जांच एजेंसियों की निगरानी बढ़ी है।

एनसीबी की ओर से डार्कनेट और ऑनलाइन नेटवर्क से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की गई है। एजेंसी ने ‘ऑपरेशन मेड मैक्स’ और ‘ऑपरेशन केटामेलॉन’ समेत अलग-अलग अभियानों में ड्रग तस्करी के अंतरराष्ट्रीय और ऑनलाइन नेटवर्क का पता लगाया था। एनसीबी के आधिकारिक रिकॉर्ड में डार्कनेट से जुड़े ‘केटामेलॉन’ नेटवर्क और अवैध सिंथेटिक ड्रग लैब के खिलाफ कार्रवाई दर्ज है।

विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 में केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय पूरे ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई, सिंथेटिक ड्रग्स और प्रीकर्सर केमिकल की निगरानी, जांच एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने और नशे की मांग कम करने पर फोकस किया गया है। केंद्र सरकार ने जून 2026 में एनसीओआरडी की शीर्ष स्तरीय बैठक के दौरान यह विजन डॉक्यूमेंट जारी किया था।

डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल से होने वाली तस्करी की जांच के लिए डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर निगरानी और क्रिप्टो जांच क्षमता विकसित करने पर भी जोर है। इसके साथ ही ड्रग-फ्री जोन, जागरूकता अभियान और युवाओं, अभिभावकों तथा शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी के जरिए नशे की मांग घटाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।


NEET UG फर्जीवाड़े में दो गिरफ्तार, फर्जी प्रमाण पत्र से तीन अभ्यर्थियों को एमबीबीएस में दिलाया दाखिला

देहरादून। नीट यूजी-2025 के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस की एसआईटी ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का लाभ दिलाने के लिए कथित तौर पर कूटरचित प्रमाण पत्र तैयार कर तीन अभ्यर्थियों को अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिलाया गया।

मामले की शुरुआत 13 सितंबर 2026 को हुई, जब थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने की शिकायतें मिलीं। दस्तावेजों की जांच में इनके फर्जी पाए जाने पर दोनों थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। टीम ने जांच के दौरान संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेज और शिक्षण संस्थानों से जुड़े रिकॉर्ड कब्जे में लेकर उनका परीक्षण किया। जांच में दस्तावेजों पर दर्ज पते गलत पाए गए। इसके बाद शिक्षण संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर अभ्यर्थियों के वास्तविक पते और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी जुटाई गई।

जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए थाना रायपुर बुलाया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में रूपेश पंडित ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ करीब पांच साल से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। मेरठ में वह ‘मिकोडो (MECODO) पाठशाला’ नाम से कंपनी संचालित करता था। इसके माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काम किया जाता था।

जांच के अनुसार, अरविंद कुमार रूपेश का पुराना परिचित था। अपनी बेटी परी और दो अन्य परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस दाखिले के लिए उसने रूपेश से संपर्क किया था। आरोप है कि रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने की बात कही और प्रत्येक दाखिले के लिए 45 लाख रुपये मांगे।

पुलिस के मुताबिक, तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस के तौर पर लिए गए थे। शेष रकम एमबीबीएस में दाखिला होने और कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी।

एसआईटी जांच में आरोप है कि रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए। इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश कराया गया।

पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच जारी है। एसआईटी प्रकरण में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

गिरफ्तार आरोपित:
रूपेश पंडित, निवासी पूर्णिया, बिहार, हाल निवासी मेरठ, उत्तर प्रदेश, उम्र 30 वर्ष।
अरविंद कुमार, निवासी बहादरपुर खादर, थाना लक्सर, हरिद्वार।


बाजपुर में अवैध SIM Box टेलीकॉम गेटवे का भंडाफोड़, 114 सिम कार्ड समेत युवक गिरफ्तार

ऊधमसिंहनगर। उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर कुमाऊं यूनिट ने बाजपुर क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अवैध SIM Box के जरिए संचालित टेलीकॉम गेटवे का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, यह गेटवे विदेशी और VoIP कॉल को भारतीय मोबाइल नंबर के रूप में दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान एक युवक को गिरफ्तार कर बड़ी संख्या में सिम कार्ड और टेलीकॉम उपकरण बरामद किए गए हैं।

एसटीएफ के मुताबिक, दूरसंचार विभाग के साथ समन्वय के बाद बाजपुर के मुड़िया, ईदगाह के पास एक मकान में अवैध टेलीकॉम गेटवे संचालित होने की सूचना मिली थी। इसके आधार पर टीम ने दबिश देकर कादिर पुत्र जाबिर अली, उम्र करीब 24 वर्ष, निवासी मिलक जुम्मावाली, थाना भगतपुर, जिला मुरादाबाद को गिरफ्तार किया।

मौके से दो 32-स्लॉट SIM Box, 77 एंटीना, 114 एयरटेल सिम कार्ड, इंटरनेट राउटर, Samsung A35 मोबाइल फोन और कई अन्य टेलीकॉम उपकरण बरामद किए गए। मामले में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

जांच में सामने आया कि SIM Box के माध्यम से विदेशी और इंटरनेट आधारित VoIP कॉल को भारतीय लोकल मोबाइल कॉल के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा था। इसके चलते कॉल पाने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर विदेशी नंबर के बजाय भारतीय नंबर दिखाई देता था। पुलिस के अनुसार, इस व्यवस्था से कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान और लोकेशन छिपाने में मदद मिलती थी।

एसटीएफ के मुताबिक, गेटवे में अलग-अलग लोगों की आईडी का कथित रूप से दुरुपयोग कर हासिल किए गए सिम कार्ड लगाए गए थे। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी के बांग्लादेश के साइबर अपराधियों के संपर्क में होने और उनके जरिए आर्थिक लाभ लेने की जानकारी सामने आई है। आरोपी ने करीब सात महीने से गेटवे संचालित करने की बात बताई है।

पुलिस के अनुसार, कादिर पहले भी साइबर अपराधियों के संपर्क में रहा है। वर्ष 2023 में थाना कटघर, मुरादाबाद में SIM Box के जरिए अवैध टेलीकॉम गेटवे संचालित करने के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में वह जमानत पर था। एसटीएफ अब उसके विदेशी संपर्कों, साइबर नेटवर्क, बैंक खातों और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

पुलिस का कहना है कि SIM Box का इस्तेमाल विदेशी कॉल को लोकल नंबर के रूप में दिखाने, पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेजों पर जारी सिम कार्डों के जरिए साइबर अपराधों में किया जा सकता है। डिजिटल अरेस्ट और फर्जी अधिकारी बनकर ठगी जैसे मामलों में भी इस तकनीक के इस्तेमाल की आशंका की जांच की जा रही है।

एसटीएफ ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम उपलब्ध कराने वाले एजेंटों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


एमपैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण का कार्य सितंबर माह के अंत तक करें पूरा- डीएम

जिला सहकारी विकास समिति की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी का सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने पर जोर

न्यूनतम प्रगति वाली समितियों से स्पष्टीकरण तलब

क्लस्टर आधारित खेती, फूलों, बेमौसमी सब्जियों व मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय सहकारी समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सहकारी समितियों की कार्यप्रगति, सहकारी देयकों की वसूली, समितियों के कंप्यूटरीकरण, क्लस्टर आधारित कृषि गतिविधियों तथा किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े विषयों की विस्तृत समीक्षा की गयी।

सहकारी देयकों की वसूली की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने न्यूनतम प्रगति वाली समितियों की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित समितियों से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। उन्होंने समिति सचिवों से फोन पर संवाद कर कम वसूली के कारणों की जानकारी ली तथा स्पष्ट किया कि कार्यप्रगति में सुधार लाने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएं। उन्होंने कम प्रगति वाले मामलों की नियमित समीक्षा करने तथा सहायक जिला निबंधक को इसकी लगातार निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित समिति सचिवों का वेतन रोकने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि कम प्रगति का कारण संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो संबंधित के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने एमपैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण का कार्य सितंबर माह के अंत तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिले की 114 सहकारी समितियों के सामान्य सुविधा केंद्रों के माध्यम से विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने इन केंद्रों को ग्रामीणों और किसानों के लिए अधिक उपयोगी एवं सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने विकासखंड दुगड्डा की सिद्धबाबा कृषक उत्पादन संगठन सहकारी समिति की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए समिति के कार्यों का विस्तार कर लाभ बढ़ाने के भी निर्देश दिए। बैठक में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र एवं पशु केंद्रों के संचालन तथा अन्न भंडारण योजना के संबंध में भी चर्चा की गई।

जिन सहकारी समितियों को बहुराज्यीय सहकारी समितियों में सदस्यता नहीं मिल पाई है, जिलाधिकारी ने उनकी सूची कारण सहित प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को बेहतर तरीके से जोड़ते हुए किसानों और ग्रामीणों के लिए आय के नए अवसर विकसित किए जाएं। उन्होंने ‘कोऑपरेशन अमंग कोऑपरेटिव्स’ की भावना के अनुरूप समितियों के बीच आपसी समन्वय और सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

बैठक में माधो सिंह भंडारी सहकारी खेती योजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गयी। जिलाधिकारी ने विभागों को कन्वर्जेंस के माध्यम से कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि अलग-अलग योजनाओं और विभागीय प्रयासों को एक स्थान पर समेकित कर क्लस्टर मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने एकेश्वर के बनेखखाल, पाबौ के ढिक्वाली तथा थलीसैंण के हस्यूड़ी में क्लस्टर आधारित फूलों के उत्पादन की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों से शुद्ध लाभ की स्थिति जानी। उन्होंने इस व्यवसाय को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए उत्पादों में विविधता लाने तथा मूल्य संवर्द्धन पर ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सके और उनकी आय में वृद्धि हो।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में बेमौसमी सब्जियों एवं मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जाएगा। उन्होंने कुक्कुट वैली परियोजना के लिए एक सप्ताह के भीतर पात्र लाभार्थियों का चिन्हीकरण पूरा करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों और बाजार की मांग के अनुरूप कृषि एवं सहकारिता गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि हो।

बैठक में जानकारी दी गयी कि जिले में सभी सहकारी समितियों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। जिलाधिकारी ने समिति सदस्यों को सहकारिता से जुड़ी योजनाओं एवं गतिविधियों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया। उन्होंने सहकारी समितियों के स्तर पर माइक्रो बैंक की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में सहकारी बैंक के एटीएम स्थापित करने की दिशा में भी आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले के जिन क्षेत्रों में वर्तमान में एटीएम की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां सहकारी बैंक की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि सहकारी समितियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। विभिन्न विभागों की योजनाओं को सहकारिता से जोड़ते हुए क्लस्टर आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो और उन्हें उत्पादन से लेकर बाजार तक बेहतर लाभ मिल सके।

इस अवसर पर सहायक जिला निबंधक सहकारिता सुमन कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन सिंह भंडारी, नाबार्ड प्रबंधक हिमांक शर्मा सहित संबंधित अधिकारी एवं सहकारी समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिले – मुख्यमंत्री

लंबित विवेचनाओं और विशेष न्यायालयों में विचाराधीन मामलों की समयबद्ध समीक्षा के निर्देश

राहत राशि के भुगतान में न हो देरी, प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा एवं पुनर्वास से भी जोड़ा जाए

मामलों की प्रभावी निगरानी के लिए विकसित किया जाए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहे। यह सुनिश्चित किया जाए कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसका अधिकार मिले। इसके लिए मामलों की नियमित समीक्षा के साथ पूरी व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक अधिनियम के अंतर्गत दर्ज जिन मामलों में विवेचना लंबित है, उनके लंबित रहने के कारणों की समीक्षा करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। लंबे समय से लंबित एवं गंभीर प्रकृति के मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से प्रभावी कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की भी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यकता के अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में राहत देने में विलंब हुआ है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की सहायता केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार उन्हें चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए। गंभीर एवं संवेदनशील मामलों में पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो तथा पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षिक सहायता योजनाओं से जोड़ा जाए। प्रभावित परिवारों की काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा तथा सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में अधिनियम से संबंधित मामलों की नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की विवेचना और पीड़ितों के साथ व्यवहार के संबंध में नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। समाज कल्याण, पुलिस एवं अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से समय-समय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करें। मुख्यमंत्री ने मामलों की विवेचना, न्यायालयीन स्थिति, राहत राशि और अन्य सहायता की शासन स्तर से प्रभावी निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मामलों के निस्तारण, विवेचना अथवा राहत वितरण में अपेक्षित प्रगति नहीं है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। अच्छा कार्य करने वाले जिलों की प्रभावी व्यवस्थाओं को अन्य जिलों के साथ साझा किया जाए।

मुख्यमंत्री ने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी अधिकारों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा। यदि किसी जिले या विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन, प्रशिक्षण अथवा बजट की आवश्यकता है तो उसका प्रस्ताव शासन को शीघ्र उपलब्ध कराया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय केवल कार्यवृत्त तक सीमित न रहें। प्रत्येक निर्णय के लिए जिम्मेदारी और समय-सीमा निर्धारित करते हुए उनकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित को न्याय और सहायता के लिए भटकना न पड़े तथा शासन-प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ उसके साथ खड़ा दिखाई दे, यह सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189 और वर्ष 2025 में 157 अभियोग पंजीकृत हुए। वर्ष 2026 में 15 सितम्बर तक 116 अभियोग पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 25 प्रकरण विवेचनाधीन हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, वर्ष 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितम्बर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। मुख्य सचिव और जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बैठकों का नियमित आयोजन किया गया।

बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरू, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी.अशुमन, आईजी बरिंदरजीत सिंह, निदेशक समाज कल्याण संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।


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