Thursday, September 3rd, 2026

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पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण जारी, स्टॉक, माप एवं गुणवत्ता मानकों की हुई जांच

Daily Archives: 03/09/2026

पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण जारी, स्टॉक, माप एवं गुणवत्ता मानकों की हुई जांच

भूमिगत टैंकों का स्टॉक रजिस्टर से मिलान सही, सभी नोजलों की माप निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई

उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा एवं मानक गुणवत्ता का पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताः जिला पूर्ति अधिकारी

देहरादून: जनपद में उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा एवं मानक गुणवत्ता का पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला पूर्ति विभाग द्वारा पेट्रोल पंपों का आकस्मिक निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में आज जिला पूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल के नेतृत्व में एक पेट्रोल पंप का औचक निरीक्षण कर स्टॉक, माप एवं ईंधन की गुणवत्ता संबंधी मानकों की विस्तृत जांच की गई।

निरीक्षण के दौरान पेट्रोल पंप परिसर में स्थापित भूमिगत टैंकों में उपलब्ध पेट्रोल एवं डीजल के स्टॉक का संबंधित स्टॉक रजिस्टर से मिलान किया गया। जांच में वास्तविक स्टॉक एवं अभिलेखों में दर्ज स्टॉक सही पाया गया।

जिला पूर्ति अधिकारी के नेतृत्व में टीम द्वारा पेट्रोल एवं डीजल वितरण करने वाले सभी नोजलों की माप की भी गहन जांच की गई। जांच के दौरान सभी नोजलों से दी जा रही ईंधन की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान ई-20 पेट्रोल की गुणवत्ता की भी निर्धारित प्रक्रिया एवं मानकों के अनुसार जांच की गई। जांच में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई। अधिकारियों द्वारा ईंधन की गुणवत्ता, माप व्यवस्था एवं स्टॉक रखरखाव से संबंधित अन्य अभिलेखों का भी परीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान पेट्रोल पंप के प्रतिनिधि प्रशांत रावत भी उपस्थित रहे तथा उन्होंने जांच प्रक्रिया में विभागीय टीम को आवश्यक सहयोग प्रदान किया।

जिला पूर्ति अधिकारी देहरादून के.के. अग्रवाल ने कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनपद के सभी पेट्रोल पंपों का औचक एवं नियमित निरीक्षण आगे भी जारी रखा जाएगा। निरीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आम उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा में तथा मानक गुणवत्ता का पेट्रोल एवं डीजल उपलब्ध हो।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ईंधन की आपूर्ति, माप अथवा गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जिला पूर्ति विभाग द्वारा संचालित इस प्रकार के नियमित निरीक्षणों का उद्देश्य पेट्रोल पंपों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ ही उपभोक्ताओं के अधिकारों एवं हितों का संरक्षण करना है।


गैंगस्टर एक्ट में वांछित ₹25 हजार का इनामी अभियुक्त मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार

देहरादून:  उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने वांछित एवं इनामी अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में लंबे समय से फरार चल रहे ₹25 हजार के इनामी अभियुक्त दिनेश कुमार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया है।

अभियुक्त दिनेश कुमार पुत्र ओम प्रकाश, निवासी ग्राम जय भगवानपुर, थाना छप्पार, जनपद मुजफ्फरनगर, उम्र करीब 32 वर्ष, थाना ज्वालापुर, जनपद हरिद्वार में दर्ज मु0अ0सं0 671/2023, धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट के मामले में वांछित था।

गिरफ्तारी से बचने के लिए अभियुक्त लंबे समय से फरार चल रहा था। उसके विरुद्ध न्यायालय द्वारा NBW तथा धारा 84 BNSS के तहत कार्रवाई जारी की गई थी। उसकी गिरफ्तारी पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, हरिद्वार द्वारा ₹25,000 का इनाम घोषित किया गया था।

STF टीम ने अभियुक्त की लगातार पतारसी-सुरागरसी और तकनीकी सर्विलांस की। इसी दौरान मिली महत्वपूर्ण सूचना के आधार पर उसकी लोकेशन थाना छप्पार क्षेत्र, मुजफ्फरनगर में चिन्हित की गई। सूचना पर STF टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियुक्त को थाना छप्पार क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार अभियुक्त:

दिनेश कुमार पुत्र ओम प्रकाश, निवासी 36 कुआं के पास, ग्राम जय भगवानपुर, थाना छप्पार, जनपद मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, उम्र करीब 32 वर्ष।

गिरफ्तारी करने वाली STF टीम:

निरीक्षक एन.के. भट्ट

उपनिरीक्षक विद्या दत्त जोशी

हेड कांस्टेबल सुधीर केसला

हेड कांस्टेबल अनूप भाटी

हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार

हेड कांस्टेबल महेन्द्र नेगी

कांस्टेबल कादर खान


उत्तराखंड से मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने ईएसआईसी सनथ नगर हैदराबाद का किया दौरा

ईएसआईसी सनथ नगर तेलंगाना सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में उभरा

2019 से लगातार ‘500 से अधिक बेड’ की श्रेणी में ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले ईएसआईसी अस्पताल’ के रूप में मिली है मान्यता

इस प्रेस दौरे का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों को तेलंगाना में केंद्र सरकार की प्रमुख विकास गतिविधियों और पहलों की प्रत्यक्ष जानकारी प्रदान करना रहा

देहरादून /हैदराबाद- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित हैदराबाद प्रेस दौरे पर उत्तराखंड का 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कर्मचारी राज्य बीमा निगम मेडिकल कॉलेज (ईएसआईसी) सनथ नगर हैदराबाद का दौरा किया। जिससे समस्त पत्रकारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों और कर्मचारी राज्य बीमा योजना के तहत मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं को समझने का अवसर मिला।

ईएसआईसी सनथ नगर, हैदराबाद सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा, उन्नत नैदानिक (क्लीनिकल) सेवाओं और तकनीक-आधारित मरीज देखभाल के एक अग्रणी ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में उभरा है। यह संस्थान बीमित व्यक्तियों और उनके परिवारों को किफ़ायती और व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सनथ नगर की डीन डॉ. एस. सीथालक्ष्मी ने पत्रकारों को संस्थान के स्वास्थ्य ढांचे और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तेलंगाना में ईएसआईसी का नेटवर्क क्षेत्रीय कार्यालय, हैदराबाद के तहत 4 ईएसआईएस अस्पतालों, 70 औषधालयों, 8 शाखा कार्यालयों और 10 डिस्पेंसरी-कम-ब्रांच ऑफिस के माध्यम से सभी 33 जिलों में फैला हुआ है। प्रदेश में 20,47,160 लोगों को बीमा पॉलिसी के तहत वित्तीय सुरक्षा या कवरेज मिलती है और 74,32,916 लाभार्थी हैं, जिन्हें 1,63,581 नियोक्ताओं का समर्थन प्राप्त है।

उन्होंने बताया कि सनथ नगर परिसर में एक एकीकृत 1,044-बेड वाली स्वास्थ्य सुविधा शामिल है, जिसमें 800-बेड वाला ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और 244-बेड वाला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शामिल है। परिसर में 159 आईसीयू बेड, 45 डायलिसिस बेड, 10 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और पांच उन्नत ओटी सूट मौजूद हैं। इसके अलावा यहाँ कई ब्रॉड-स्पेशलिटी और सुपर-स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध हैं। आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं।

संस्थान ने पिछले चार वर्षों में मरीज सेवाओं में निरंतर वृद्धि देखी है। वार्षिक ओपीडी उपस्थिति 2022 में 6,93,853 से बढ़कर 2025 में 9,80,925 हो गई, जबकि औसत दैनिक ओपीडी 2,354 से बढ़कर 3,248 मरीजों तक पहुंच गई। वार्षिक दाखिले 78,086 से बढ़कर 95,037 हो गए, जिसमें औसत दैनिक दाखिले 214 से बढ़कर 315 हो गए। सर्जरी की संख्या भी 2022 में 16,223 से बढ़कर 2025 में 20,117 हो गई। अस्पताल ने 2025 में 85.6 प्रतिशत की बेड ऑक्यूपेंसी दर दर्ज की, जो इसके टर्शरी-केयर (तृतीयक देखभाल) बुनियादी ढांचे के निरंतर उपयोग को दर्शाती है।

इन दोनों अस्पतालों को 2019 से लगातार ‘500 से अधिक बेड’ की श्रेणी में ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले ईएसआईसी अस्पताल’ के रूप में मान्यता दी गई है। सुरक्षित, मरीज-केंद्रित और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए संस्थान ने मजबूत गुणवत्ता प्रणालियां और मान्यता तंत्र स्थापित किए हैं।

ईएसआईसी सनथ नगर कार्डियोलॉजी, कार्डियोथोरैसिक और वैस्कुलर सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी, प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी और फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन सहित कई अन्य विशिष्टताओं में उन्नत सेवाएं प्रदान करता है।

नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग में यह अस्पताल ईएसआईसी नेटवर्क के भीतर किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) के लिए एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभरा है, जिसमें ‘ABO-असंगत’ (ABO-incompatible) किडनी ट्रांसप्लांट भी शामिल है। यहाँ जीवित-दाता (लाइव-डोनर) और शव-दाता (कैडवेरिक) दोनों प्रकार के किडनी ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। संस्थान ने 8 जून 2024 को अपना पहला इन-हाउस कैडवेरिक अंग निष्कासन (ऑर्गन रिट्रीवल) किया और अब तक 30 किडनी ट्रांसप्लांट किए हैं, जिनमें 18 लाइव-डोनर ट्रांसप्लांट शामिल हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान, हीमोडायलिसिस सुविधा से 59,868 बीमित मरीजों को लाभ हुआ, जो परिसर में उपलब्ध रीनल-केयर (गुर्दे की देखभाल) सेवाओं के पैमाने को उजागर करता है।

पैथोलॉजी विभाग एनएबीएल एंट्री-लेवल टर्शरी-केयर डायग्नोस्टिक प्रयोगशाला का संचालन करता है, जिसके परीक्षण भंडार में 162 जांचें और आठ विशेषज्ञता वर्गों में 90 से अधिक इम्युनोहिस्टोकेमिस्ट्री और आणविक (मॉलिक्यूलर) मार्कर शामिल हैं। प्रयोगशाला ने 2025-26 के दौरान 16.7 लाख से अधिक जांचें कीं, जिससे नियमित और कैंसर (ऑन्कोलॉजी) सहित विशेष नैदानिक सेवाओं के लिए व्यापक नैदानिक सहायता मिली।

परिसर ने तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य देखभाल पहलों को भी अपनाया है, जिसमें रेडियोलॉजिकल इमेजिंग सेवाओं के लिए पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्यूनिकेशन सिस्टम, ई-आईसीयू सेवाएं, ऑक्सीजन और वैक्यूम पाइपलाइन सिस्टम की रीयल-टाइम निगरानी, एक केंद्रीय सूचना प्रणाली डैशबोर्ड और रीयल-टाइम ऑनलाइन सैंपल कलेक्शन प्रणाली शामिल है। अन्य पहलों में AAA+ ऐप-आधारित ओपीडी सेवाएं, धनवंतरी मॉड्यूल का क्रियान्वयन, 100 प्रतिशत ई-ऑफिस कार्यान्वयन, आधार सीडिंग और ओपीडी में लैन कनेक्टिविटी शामिल हैं।

होम ड्रग डिलीवरी (घर पर दवा पहुंचाना), होम सैंपल कलेक्शन, AAA+ ऐप के माध्यम से ऑनलाइन परामर्श और 5G-सक्षम एम्बुलेंस सेवाओं जैसी मरीज-केंद्रित डिजिटल पहलों ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और निरंतरता को और मजबूत किया है।

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, सनथ नगर ने अपने शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र (एकेडमिक इकोसिस्टम) को भी मजबूत किया है, जिसमें 150 एमबीबीएस सीटें, 106 एमडी/एमएस सीटें, 15 एम.ची. सीटें, 12 डॉएनबी सीटें, 4 डीएनबी कार्यक्रम और 6 एफएनबी कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा, कार्डिएक और कार्डियोवैस्कुलर टेक्नोलॉजी, मेडिकल रिकॉर्ड्स साइंस, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, ऑप्टोमेट्री, रीनल डायलिसिस टेक्नोलॉजी, रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी और मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी सहित विशिष्ट विषयों में 72 एलाइड हेल्थ साइंसेज सीटें भी उपलब्ध हैं।

प्रतिनिधिमंडल को डॉ. जया कुंदन गेडाम, डॉ. रत्ना गोसाईं, डॉ. जी. लक्ष्मी प्रसाद और डॉ. जी. तिरुपति ने भी विभिन्न नैदानिक और शैक्षणिक सुविधाओं की जानकारी दी। इसके बाद मीडिया प्रतिनिधियों ने अस्पताल की प्रयोगशाला सुविधाओं का दौरा किया और परिसर में उपलब्ध उन्नत नैदानिक बुनियादी ढांचे व सेवाओं की जानकारी ली।

इस दौरे ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को ईएसआईसी सनथ नगर के कामकाज और सुलभ, किफ़ायती व उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा देने के प्रयासों के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा, विशेष नैदानिक देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने के इसके प्रयासों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया।

अपने विस्तार लेते स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे, मरीजों की बढ़ती संख्या, उन्नत प्रत्यारोपण व नैदानिक सेवाओं, मजबूत चिकित्सा शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र और तकनीक-सक्षम मरीज सेवाओं को अपनाने के साथ, ईएसआईसी सनथ नगर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा में एक मॉडल संस्थान के रूप में लगातार उभर रहा है।


फल मंडियों में कटौती से परेशान मोरी के किसान, कृषि मंत्री गणेश जोशी से लगाई गुहार

देहरादून:  उत्तरकाशी के मोरी विकासखंड के ग्राम जागटा से पहुंचे फल उत्पादक किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को कृषि मंत्री गणेश जोशी से मुलाकात कर फल मंडियों में किसानों को आ रही समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा।

किसानों ने कृषि मंत्री को अवगत कराया कि फल मंडियों में मंडी शुल्क और अन्य खर्चों के नाम पर विभिन्न प्रकार की कटौतियां की जा रही हैं। इससे फल उत्पादकों को उनकी मेहनत और उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है तथा उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने मंडियों में किसानों के लिए शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विश्राम एवं ठहरने जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। किसानों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों में लागू किसान हितैषी मंडी व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उत्तराखंड में भी सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

किसानों का कहना था कि मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता आने और अनावश्यक कटौतियों पर रोक लगने से फल उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने मंडी निदेशक/एमडी मंडी को संबंधित प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा और उनके हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी।

इस अवसर पर मनमोहन सिंह चौहान सहित किसान प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


कपकोट के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में डीएम अपूर्वा पाण्डे का स्थलीय निरीक्षण, सड़क की गुणवत्ता पर जताई नाराजगी

बागेश्वर। जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने बुधवार को कपकोट क्षेत्र के आपदा प्रभावित एवं दुर्गम आंतरिक क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अतिवृष्टि से सड़कों को हुए नुकसान और क्षेत्र की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने भराड़ी, रीठाबगड़, सोंग, हरसिंग्याबगड़, शामा सहित विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया।

डीएम ने भराड़ी-मुनार मार्ग पर भैंसखाली के समीप गदेरे से क्षतिग्रस्त सड़क तथा उदियारी गांव के पास हुए भूस्खलन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सड़क सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता और मरम्मत कार्यों का विस्तृत आकलन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

ब्रिडकुल द्वारा निर्मित लाहुर-मिकिला-खलपट्टा सड़क की खराब स्थिति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की और सड़क की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने नकौनाबसौरा क्षेत्र में वॉशआउट हुई सड़क का भी निरीक्षण किया।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में महज अस्थायी सड़क बहाली के बजाय वैज्ञानिक, सुरक्षित और टिकाऊ समाधान सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।


देहरादून में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ प्रशासन का कड़ा रुख

अब तक 953 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 306 पर चालान; 1.14 लाख रुपये जुर्माना वसूला, 306 किलो प्लास्टिक जब्त

देहरादून: पर्यावरण संरक्षण और शहर को स्वच्छ बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर नगर निगम क्षेत्र के सभी 100 वार्डों में सघन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग, भंडारण और बिक्री पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है।

इस अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने 50 सेक्टर अधिकारियों की तैनाती की है। इन अधिकारियों द्वारा अब तक शहर के विभिन्न वार्डों में कुल 953 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान 403 प्रतिष्ठानों में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग, भंडारण एवं वितरण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। इनमें 306 प्रतिष्ठानों के चालान किए गए तथा कुल 1.14 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।

प्रवर्तन अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री भी जब्त की गई। अब तक 306.12 किलोग्राम सिंगल यूज प्लास्टिक जब्त कर उसे नष्ट किया गया है। प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि प्रतिबंधित प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रभावी अंकुश लगाकर शहर को स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाना है।

जागरूकता के साथ कार्रवाई का संदेश

जिला प्रशासन की ओर से प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ आमजन को भी सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने तथा पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का संदेश दिया जा रहा है। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग से बचकर और उसके स्थान पर पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाकर आमजन स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त देहरादून के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


80 लाख की स्मैक के साथ नशा तस्कर गिरफ्तार, नशा तस्करी में पहले भी जा चुका हैं जेल 

देहरादून। ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के तहत दून पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना राजपुर और एएनटीएफ की संयुक्त टीम ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से 259 ग्राम अवैध स्मैक बरामद की है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, 02 सितंबर की देर रात जंगल मंगल तिराहा, पुरकुल रोड के पास चेकिंग अभियान के दौरान मुखबिर की सूचना पर राशिद को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया गया। आरोपी के खिलाफ थाना राजपुर में धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह एमडीडीए कॉलोनी केदारपुरम का निवासी है और शहर के अलग-अलग इलाकों में सब्जी की ठेली लगाता है। पुलिस के मुताबिक, जल्द पैसा कमाने के लालच में वह मिर्जापुर, सहारनपुर निवासी एक नशा तस्कर से स्मैक लेकर आया था और इसे स्थानीय नशा तस्करों को महंगे दामों पर बेचने की तैयारी में था।

गिरफ्तार आरोपी राशिद पुत्र शमशाद, उम्र 52 वर्ष है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पूर्व में भी मादक पदार्थों की तस्करी सहित अन्य आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है। उसके आपराधिक इतिहास और नेटवर्क के संबंध में आगे जानकारी जुटाई जा रही है।

बरामदगी:

259 ग्राम अवैध स्मैक, अनुमानित कीमत करीब 80 लाख रुपये।

पुलिस टीम:

थानाध्यक्ष राजपुर उ0नि0 पीडी भट्ट

चौकी प्रभारी कुठाल गेट उ0नि0 प्रवीण सैनी

कांस्टेबल अमित, मोहित और एएनटीएफ के कांस्टेबल गौरव


नीति निर्माण में शोध, नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाए- मुख्यमंत्री

राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शोध के निष्कर्षों का नीतियों एवं योजनाओं में हो प्रभावी उपयोग

योजनाओं के नियमित मूल्यांकन और लक्ष्यों की वार्षिक मॉनिटरिंग पर दिया जाए विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने ‘Uttarakhand at 25: A Himalayan State with Infinite Possibilities’ पुस्तक का किया विमोचन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड स्टेट सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एण्ड गुड गवर्नेंस (USCPPGG) की शासी निकाय की बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, चुनौतियों और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नीति निर्माण में शोध, नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाए। शोध एवं अध्ययन के निष्कर्षों का उपयोग राज्य की नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में किया जाए।

मुख्यमंत्री ने राज्य की उपलब्धियों और विभिन्न क्षेत्रों में किये गये उल्लेखनीय कार्यों पर आधारित केस स्टडी तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने जनपद स्तर पर अधिकारियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए उत्तराखण्ड की विशिष्ट परिस्थितियों और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजनाओं पर कार्य किया जाए। नीति निर्माण और भविष्य की कार्ययोजनाओं में डेटा एवं शोध आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के प्रतिवर्ष 10 स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को कैपस्टोन परियोजना के लिए स्टाइपेंड प्रदान किये जाने पर सहमति दी गई। इसके माध्यम से राज्य की प्राथमिकता वाले विषयों पर शोध एवं परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।

बैठक में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार समारोह का गरिमापूर्ण आयोजन किये जाने पर जोर दिया गया। सतत विकास लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण तथा इस दिशा में किये जा रहे कार्यों पर भी चर्चा की गई।

शासी निकाय के सदस्यों ने राज्य के समग्र एवं दीर्घकालिक विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये। सदस्यों ने राज्य में हाई वैल्यू-लो वॉल्यूम उत्पादों को बढ़ावा देने तथा एमएसएमई पर विशेष फोकस करने पर जोर दिया। पर्वतीय क्षेत्रों में होम टूरिज्म को बढ़ावा देने का सुझाव देते हुए कहा गया कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

सदस्यों ने राज्य के भावी विकास से जुड़े आठ प्रमुख सुधार क्षेत्रों पर विस्तृत शोध एवं अध्ययन कराने का सुझाव दिया, ताकि भविष्य की योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए बेहतर रणनीति तैयार की जा सके। लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वार्षिक मॉनिटरिंग के लक्ष्य निर्धारित करने तथा योजनाओं और कार्यों का नियमित मूल्यांकन किये जाने पर भी जोर दिया गया। नीतियों का समय-समय पर परीक्षण कर उनकी प्रभावशीलता का आकलन करने का सुझाव दिया गया।

शासी निकाय के सदस्यों ने मृदा को भी प्रमुख फोकस एरिया में रखने तथा स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूती पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया। योजनाओं एवं नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ब्लॉक स्तर तक के अधिकारियों के प्रशिक्षण और उन्हें प्रेरित करने पर जोर दिया गया। राज्य की उपलब्धियों को ओरिएंटेशन कार्यक्रमों का हिस्सा बनाने तथा प्रदेश के विश्वविद्यालयों को राज्य की प्रगति, संभावनाओं और विकास से जुड़े विषयों पर शोध एवं अध्ययन के लिए सक्रिय रूप से जोड़ने का सुझाव दिया गया। विभागों द्वारा राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान कर शोध के लिए विषय उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में विकसित उत्तराखण्ड-2047 की दिशा में राज्य की भावी विकास रणनीति पर भी चर्चा की गई। आर्थिक विकास एवं रोजगार, मानव संसाधन एवं कल्याण, वन, जैव विविधता एवं जलवायु अनुकूलन, अवस्थापना विकास, स्थानीय स्वशासन एवं क्षेत्रीय विकास तथा तकनीक आधारित सुशासन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया। राज्य की आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय संतुलन, रोजगार सृजन और सतत विकास को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में यूएससीपीपीजीजी और यूएनडीपी के सहयोग से सतत विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन के लिए किये जा रहे कार्यों पर चर्चा की गई। एसडीजी के स्थानीयकरण एवं मॉनिटरिंग, नीति मूल्यांकन तथा राज्य की प्राथमिकताओं से जुड़े विषयों पर नीतिगत अध्ययन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि सतत विकास लक्ष्यों के क्षेत्र में उत्तराखण्ड हिमालयी राज्यों में प्रथम स्थान पर है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘Uttarakhand at 25: A Himalayan State with Infinite Possibilities’ पुस्तक का विमोचन भी किया। पुस्तक में उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की यात्रा को समाहित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने शासी निकाय के सदस्यों द्वारा दिये गये महत्वपूर्ण सुझावों का परीक्षण कर उपयोगी सुझावों पर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास को गति देने के लिए शोध, नवाचार, प्रभावी नीति निर्माण, क्षमता विकास और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर निरंतर कार्य किया जाए।

बैठक में विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु एवं आर. मीनाक्षी सुन्दरम, पूर्व मुख्य सचिव एन. रविशंकर, पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.एस. कश्यप, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह, ई-ग्रो फाउंडेशन के सीईओ डॉ. चरण सिंह, आईआईटी रुड़की के प्रो. (डॉ.) आशीष पाण्डे, दून विश्वविद्यालय के प्रो. (डॉ.) आर.पी. ममगाई, आईआईएम काशीपुर के प्रोफेसर डॉ. अतुल गुहा, उत्तराखण्ड स्टेट चैप्टर फिक्की की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना, अपर सचिव नरेन्द्र भंडारी और एसीईओ सीपीपीजीजी मनोज पंत उपस्थित थे।


नाबालिग से कई बार दुष्कर्म का आरोप, विरोध पर जान से मारने की धमकी; आरोपी पर केस दर्ज

खरखौदा। नाबालिग से दुष्कर्म और उसे जान से मारने की धमकी देने के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पीड़िता की शिकायत पहले रोहतक महिला थाने में दर्ज की गई थी। मामला सोनीपत जिले से संबंधित होने के कारण जीरो एफआईआर के जरिए इसे खरखौदा थाने भेजा गया। पुलिस ने दो सितंबर को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़िता ने शिकायत में बताया कि वह बचपन से अपनी नानी के साथ गांव में रहती थी और वहीं पढ़ाई करती थी। आरोपी उसकी नानी की बहन का बेटा है, जो रिश्ते में उसका मामा लगता है। आरोप है कि आरोपी बचपन से ही उसे गलत तरीके से देखता और आपत्तिजनक इशारे करता था। विरोध करने पर वह डराता और जान से मारने की धमकी देता था।

पीड़िता के अनुसार, जब वह छठी कक्षा में पढ़ती थी, तब आरोपी ने गांव स्थित नानी के घर में उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद सोनीपत में किराये के मकान और बाद में रोहतक स्थित घर में भी उसके साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप है।

पीड़िता का कहना है कि वह जब भी विरोध करती या शोर मचाने की कोशिश करती, आरोपी उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देता था। इसी डर के कारण उसने लंबे समय तक किसी को घटना की जानकारी नहीं दी।

शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2019 में नानी के घर जाने के दौरान भी आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने इसके बाद भी कई बार यौन शोषण किए जाने का आरोप लगाया है।

पीड़िता की वर्ष 2023 में शादी हो गई। शादी के बाद उसने अपने पति को पूरी घटना के बारे में बताया। इसके बाद एक सितंबर को रोहतक महिला थाने में शिकायत दी गई। पुलिस ने प्रथम दृष्टया दुष्कर्म, धमकी और पॉक्सो एक्ट से संबंधित धाराओं में जीरो एफआईआर दर्ज की।

चूंकि घटना का क्षेत्र सोनीपत जिले से संबंधित था, इसलिए जीरो एफआईआर को खरखौदा थाने भेजा गया। पुलिस ने दो सितंबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


नौले-धारों और नदियों के पुनर्जीवन को लेकर डीएम ने दिए प्रभावी कार्ययोजना के निर्देश

सारा की जिला स्तरीय बैठक में जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर, 51 रिचार्ज शाफ्ट के कार्य पूर्ण; बांदल नदी की विस्तृत डीपीआर तैयार होगी

देहरादून। प्राकृतिक जल स्रोतों-नौले-धारों तथा नदियों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्जीवन को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (सारा) की जिला स्तरीय बैठक की। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ लक्ष्य निर्धारित कर एकीकृत दृष्टिकोण से प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने और कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत जल स्रोतों के संरक्षण, संवर्धन एवं सौंदर्यीकरण के लिए किए जा रहे कार्य धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए तथा उनका वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सारा से धनराशि प्राप्त कर चुके विभागों को आवंटित धनराशि का शीघ्र उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

वन प्रभाग मसूरी की कम वित्तीय एवं भौतिक प्रगति पर डीएम ने जताई नाराजगी
वन प्रभाग मसूरी में वित्तीय एवं भौतिक प्रगति अपेक्षाकृत कम पाए जाने पर जिलाधिकारी ने पूर्ण हो चुके कार्यों का शीघ्र सत्यापन कराने तथा सत्यापन के बाद लंबित भुगतान की कार्रवाई जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।

बैठक में लघु सिंचाई विभाग ने बताया कि विभाग द्वारा 51 रिचार्ज शाफ्ट के कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। जिलाधिकारी ने इन कार्यों से भूजल स्तर एवं जल संरक्षण पर पड़े प्रभाव का आकलन करने के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के साथ संयुक्त रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

गडूल नदी में शुरू होंगे जल संरक्षण के कार्य
‘एक जनपद, एक नदी’ योजना के अंतर्गत सोग नदी कैचमेंट की सहायक नदी गडूल नदी में कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए सारा द्वारा बजट भी अवमुक्त किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य शीघ्र शुरू करने को कहा।

जनपद में ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व के चयनित पांच धारे एवं नौले की डीपीआर तैयार करने के लिए आर्किटेक्ट को स्थलीय निरीक्षण कर शीघ्र डिजाइन एवं रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि डीपीआर समय से सारा मुख्यालय को भेजी जा सके।

बांदल नदी की विस्तृत डीपीआर तैयार होगी
बांदल नदी के समग्र विकास एवं पुनर्जीवन के लिए विस्तृत डीपीआर तैयार करने के निर्देश लघु सिंचाई, सिंचाई, वन, जल संस्थान एवं ग्राम्य विकास विभाग को दिए गए। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को समन्वय से डीपीआर तैयार कर अगली बैठक में उसका प्रस्तुतिकरण करने को कहा।

सीरीज ऑफ चेकडैम पर जोर
वर्षा जल संरक्षण के लिए सघन वृक्षारोपण, खंती, चाल-खाल, चेकडैम सहित विभिन्न जल संचयन संरचनाओं के निर्माण की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सीरीज ऑफ चेकडैम विकसित किए जाएं, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो और इसका प्रत्यक्ष लाभ स्थानीय जनता को मिल सके।

बैठक में बाण गंगा, खट्टा पानी, नौका धारा, पानी वाला बैण्ड, मालदेवता, विवेकानंद बावडी, नाला पानी, केशरवाला, सौडा सरोली, आम खाला, तुरानी खाला, पंछी खाला, कैरवान आदि जल स्रोतों की संचालित संरक्षण, संवर्धन एवं सौन्दर्यीकरण कार्यो की समीक्षा की गई।

नोडल अधिकारी लघु सिंचाई के अधिशासी अभियंता ने बताया कि जल स्रोतो के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सारा के अंतर्गत कुल 2105.09 लाख बजट स्वीकृत है। जिसमें से 374.79 बजट विभागों को अवमुक्त किया गया है। इसमें से विभागों द्वारा अब तक 344.98 लाख धनराशि व्यय की गई है।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अधीक्षण अभियंता लघु सिंचाई विनय कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता एवं सदस्य सचिव सारा, क्षेत्रीय निदेशक डॉ. प्रशांत रॉय, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार सहित वन प्रभाग देहरादून, मसूरी एवं चकराता, जल संस्थान, सिंचाई विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सारा के संबंधित अधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।


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