Thursday, September 24th, 2026

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मुख्यमंत्री धामी ने ₹108.84 करोड़ की 15 विकास योजनाओं का किया शिलान्यास

Daily Archives: 24/09/2026

मुख्यमंत्री धामी ने ₹108.84 करोड़ की 15 विकास योजनाओं का किया शिलान्यास

मुख्यमंत्री ने हल्दीघेरा, खटीमा में ₹7.23 करोड़ की लागत से निर्मित गौशाला का किया लोकार्पण

प्रदेश में 16 हजार से अधिक निराश्रित गोवंश को गौ सदनों के माध्यम से दिया जा रहा सुरक्षित आश्रय – मुख्यमंत्री

हल्दीघेरा गौशाला के विस्तार की घोषणा

खटीमा – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हल्दीघेरा, खटीमा में ₹7.23 करोड़ की लागत से नवनिर्मित गौशाला का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने ₹108.84 करोड़ की 15 विकास योजनाओं का शिलान्यास भी किया। इनमें प्रमुख रूप से ₹34.44 करोड़ की लागत से राज्य मार्ग-70 के सत्रहमील से नानकसागर प्रभाग तक 13.60 किमी मार्ग के उच्चीकरण का कार्य शामिल है।

मुख्यमंत्री ने हल्दीघेरा गौशाला के भविष्य में आवश्यकता के अनुसार विस्तार की घोषणा करते हुए कहा कि इससे अधिक से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आश्रय उपलब्ध कराया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गौशाला निराश्रित गोवंश के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिलने से जहां उनकी बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी, वहीं किसानों और स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी। इससे सड़कों पर गोवंश के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का विशेष स्थान है। गौ माता का संरक्षण केवल हमारी परंपरा ही नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य, धर्म और जिम्मेदारी भी है। देवभूमि उत्तराखण्ड सदैव गौ संरक्षण और गौ सेवा की परंपरा वाली भूमि रही है। राज्य सरकार निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गौ सदनों के माध्यम से 16 हजार से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय दिया जा रहा है। ग्राम्य गौ सेवक योजना को भी प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। शहरी विकास और पंचायती राज विभाग के सहयोग से प्रदेश में 63 स्थानों पर गौशाला निर्माण के लिए भूमि चिन्हित की गई है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण के साथ-साथ गोवंश को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। बद्री गाय के शुद्ध घी और दुग्ध उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष ग्रोथ सेंटर स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ ही पशुधन के संवर्धन की दिशा में भी अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास और जनकल्याण के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा सहित पूरे ऊधम सिंह नगर जनपद में सड़क, पुल, शिक्षा, बाढ़ सुरक्षा और अन्य अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।


250 करोड़ की साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा, कानपुर में चार साइबर ठग गिरफ्तार

कानपुर। साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान में साइबर क्राइम सेल, रावतपुर और कल्याणपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने करीब 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गुरुवार को आईआईटी गेट के पास से चार आरोपितों को गिरफ्तार किया।

जांच में सामने आया कि आरोपित कूटरचित आधार कार्ड तैयार कर उनके जरिए म्यूल बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में भेजने और उसका लेनदेन करने के लिए किया जाता था।

डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, रावतपुर थाने में धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मामले की जांच के दौरान औरैया निवासी विपिन और शिवप्रताप को गिरफ्तार किया गया।

एनसीआरपी पोर्टल पर जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसा बैंक खाता मिला, जिसमें महज तीन दिनों में करीब आठ करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। इस खाते के संबंध में अलग-अलग राज्यों में 115 शिकायतें दर्ज मिलीं। आगे की जांच में औरैया के बिधूना निवासी राजशेखर उर्फ अजीत और कानपुर देहात के रनियां निवासी हिमांशु गौतम के नाम सामने आए।

पूछताछ में पुलिस को आरोपितों से कूटरचित आधार कार्ड तैयार करने, म्यूल खाते खुलवाने और इन खातों के माध्यम से ऑनलाइन ठगी की रकम का लेनदेन करने से जुड़ी जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, राजशेखर इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड था और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए म्यूल खाते खुलवाता था।

वहीं, हिमांशु गौतम ने विजय नगर चौराहे पर ‘आर्बिट बिल्ड इंफ्रास्ट्रक्टर’ के नाम से एक कार्यालय खोल रखा था। पुलिस मामले में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की कड़ियों की भी जांच कर रही है। घटना का खुलासा करने वाली पुलिस टीम के लिए डीसीपी ने 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है।


क्रॉप कटिंग प्रयोग में ग्रामीणों के साथ खेत में उतरीं जिलाधिकारी

महिलाओं से संवाद कर जानी आजीविका की स्थिति, बुशकटर और पैदल मार्ग की मरम्मत को दी स्वीकृति

पौड़ी- जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने गुरुवार को तहसील पौड़ी के अंतर्गत राजस्व ग्राम मासौं तल्ला पहुंचकर क्रॉप कटिंग प्रयोग का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के साथ खेत में पहुंचकर कृषि कार्यों को करीब से जाना और ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका, आय के साधनों तथा गांव की दैनिक आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली।

राजस्व विभाग की टीम ने किसान वीरेंद्र नेगी के खेत में निर्धारित मानकों के अनुसार 30 वर्गमीटर क्षेत्रफल का प्लॉट तैयार कर सीसीई एग्री ऐप के माध्यम से क्रॉप कटिंग प्रयोग किया। प्रयोग के दौरान इस निर्धारित क्षेत्रफल से 11 किलोग्राम गेहूं की उपज प्राप्त हुई। जिलाधिकारी ने स्वयं भी खेत में गेहूं की कटाई की तथा ग्रामीण महिलाओं के साथ पारंपरिक मंडाई कार्य में हाथ बंटाकर उनका उत्साहवर्धन किया।

जिलाधिकारी ने बताया कि क्रॉप कटिंग प्रयोग के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग फसल की औसत उत्पादकता के आकलन में किया जाता है। निर्धारित 30 वर्गमीटर क्षेत्रफल में प्राप्त उपज के आधार पर संबंधित फसल की उत्पादकता का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाता है तथा इन आंकड़ों के आधार पर पूरे जनपद में फसल के संभावित उत्पादन का अनुमान तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया से जिले की कृषि उत्पादकता और उत्पादन संबंधी वास्तविक आंकड़े तैयार करने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है।

इस दौरान जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान पुष्पा नेगी एवं ग्रामीणों से गांव की विभिन्न आवश्यकताओं और समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। महिलाओं से संवाद के दौरान उन्होंने उनकी आय, आजीविका से जुड़े कार्यों और परिवार की दैनिक गतिविधियों के बारे में भी जानकारी ली। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि गांव के बच्चों को स्कूल जाने वाले पैदल मार्ग में झाड़ियां उग आई हैं तथा मार्ग की स्थिति भी ठीक नहीं है, जिससे बच्चों को आवागमन में परेशानी होती है।

ग्रामीणों की समस्या का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने पैदल मार्ग की मरम्मत की स्वीकृति प्रदान की। साथ ही मार्ग से झाड़ियों की सफाई के लिए तहसीलदार को अगले दिन ही बुशकटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों के आवागमन के रास्ते को सुविधाजनक बनाया जा सके।

इस अवसर पर तहसीलदार राजेंद्र गोस्वामी, एलआरओ पूरण प्रकाश, कानूनगो जगदीश चंद्र ओलिया, राजस्व उप निरीक्षक राजेंद्र पटवाल, कुलदीप नेगी, कुलदीप शाह, इंश्योरेंस कंपनी से राकेश शर्मा, सुमित सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


सीएम धामी बोले- उत्तराखंड की जनता चाहती है स्थायित्व और विकास

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता राज्य में स्थायित्व और विकास चाहती है। सरकार प्रदेश के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए जनहित से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने यह बात गुरुवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में ‘अड्डा इनसाइडर’ समाचार पत्र की ओर से आयोजित ‘उत्तराखंड-विकास, चुनौतियां और 2027 की राह’ कार्यक्रम के दौरान कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनकी पार्टी का मूल सिद्धांत ‘राष्ट्र प्रथम, संगठन द्वितीय और व्यक्ति तृतीय’ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड से जुड़ाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद वे अब तक 28 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास को भी केंद्र सरकार ने प्राथमिकता दी है। माणा में प्रधानमंत्री द्वारा सीमांत गांवों को देश का ‘प्रथम गांव’ बताए जाने से इन क्षेत्रों के विकास को लेकर सोच में बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स में राज्य ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। पर्यटन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने कहा कि राज्य फिल्म शूटिंग, एडवेंचर टूरिज्म और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है।

युवाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है और इस दिशा में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। राज्य सरकार युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें युवाओं के बीच जाकर संवाद करना पसंद है। उन्होंने कहा कि वे युवाओं से मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक दोस्त की तरह संवाद करने का प्रयास करते हैं। उनके मुताबिक, युवाओं के विचारों और आकांक्षाओं को जानने से उन्हें भी नई ऊर्जा मिलती है।

सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इससे योग्य और मेहनती युवाओं का भर्ती व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब पांच वर्षों में लगभग 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बनाए रखने और सरकारी भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए भी कार्रवाई जारी है। अब तक राज्य में 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास की प्रक्रिया को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचाना और युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।


खिलाड़ियों की मेहनत और प्रतिभा को सम्मान देना सरकार की प्राथमिकता- रेखा आर्या

अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवा का अवसर, विज्ञप्ति हुईं जारी, 9 अक्टूबर तक करें आवेदन

देहरादून। प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तराखंड के पदक विजेता खिलाड़ियों को “आउट ऑफ टर्न” सरकारी नियुक्ति प्रदान करने के लिए खेल निदेशालय, द्वारा विज्ञप्ति जारी कर दी गई है। इच्छुक एवं पात्र खिलाड़ी निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना आवेदन कर सकते हैं।इसकी अंतिम तिथि 09 अक्टूबर 2026 है।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने प्रदेश के सभी पात्र पदक विजेता खिलाड़ियों से कहा कि वे इस अवसर का लाभ उठाते हुए 09 अक्टूबर 2026 तक अपना आवेदन अनिवार्य रूप से कर लें।

आवेदन के लिए उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य

खेल मंत्री ने कहा कि आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी का उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना और अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करना अनिवार्य है। पात्रता एवं अन्य जानकारी विज्ञप्ति में उपलब्ध है। साथ ही कहा कि पात्र खिलाड़ी विज्ञप्ति से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी, शासनादेश एवं आवेदन पत्र खेल विभाग की आधिकारिक वेबसाइट sports.uk.gov.in पर प्राप्त कर सकते हैं। खिलाड़ियों से अपील की कि आवेदन करने से पूर्व विज्ञप्ति में निर्धारित पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों एवं अन्य शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य, प्रतिभा के सम्मान और उन्हें सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं और उनकी उपलब्धियों को उचित सम्मान एवं प्रोत्साहन देना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी का पदक केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होता, बल्कि वह प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन, संघर्ष और प्रतिभा से प्रदेश के युवा खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं।युवाओं को खेलों से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को अवसर देना सरकार का संकल्प है।

खेल मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को खेलों के क्षेत्र में बेहतर अवसर, सुविधाएं और आगे बढ़ने के लिए उचित मंच उपलब्ध हो इसके लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है।उन्होंने खिलाड़ियों से अपील कि की वे अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखते हुए निरंतर मेहनत करें और प्रदेश का नाम देश-दुनिया में रोशन करें।


कोटद्वार के बालागंज-लूथापुर में 2.47 किमी सड़क निर्माण का शिलान्यास

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने किया विधिवत शिलान्यास

कोटद्वार। विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण ने गुरुवार को कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 33 बालागंज-लूथापुर में 2.47 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण कार्य का विधिवत शिलान्यास किया। लंबे समय से क्षेत्रवासी सड़क निर्माण की मांग कर रहे थे। निर्माण कार्य शुरू होने से स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है।

सड़क के निर्माण से बालागंज-लूथापुर क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ ही लोगों को बेहतर और सुरक्षित सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे विद्यार्थियों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों को आवाजाही में राहत मिलेगी तथा क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।

इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा कि कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र का समग्र और संतुलित विकास उनकी प्राथमिकता है। क्षेत्र में सड़क, पेयजल, विद्युत, जल निकासी समेत मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क किसी भी क्षेत्र के विकास की महत्वपूर्ण आधारभूत जरूरत है और इस दिशा में आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ धरातल पर उतारा जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष आशीष रावत, अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह, पार्षद राजेंद्र बिष्ट, पार्षद जे.पी. बहुखंडी, पार्षद मनीष नैथानी, पार्षद प्रमोद केष्टवाल, मनीष भट्ट, पूरन खुलबे, विवेक भारती, सिमरन बिष्ट, राजीव डबराल, अर्चना गौड़, सरोज बाला और ज्योति जखमोला समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

सड़क निर्माण की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने पर क्षेत्रवासियों ने खुशी जताई और विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण का आभार व्यक्त किया।


TMC नाम-चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से मांगी अंतिम फैसले की समयसीमा

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम निर्णय की समयसीमा बताने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व वी. मोहना की पीठ ने गुरुवार को ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। ममता बनर्जी ने आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत TMC के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को फ्रीज किया गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू से पूछा कि विवाद पर अंतिम फैसला कब तक लिया जा सकता है। वहीं, ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के दौरान नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने से उनकी ओर प्रभावी राहत का विकल्प प्रभावित हुआ है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग को मामले की सुनवाई शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग जरूरत पड़ने पर कुछ समय तक रोजाना सुनवाई कर सकता है और दोनों पक्षों को अपने दस्तावेज व साक्ष्य रखने का अवसर देकर विवाद का निपटारा कर सकता है।

पश्चिम बंगाल में 6 अक्तूबर को विधानसभा उपचुनाव होना है। जस्टिस बागची ने भी सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया शुरू होने का उल्लेख किया। इस पर कपिल सिब्बल ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से चुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं की जा रही है।

चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के तहत दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए गए हैं। दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के इस्तेमाल से भी रोका गया है, जबकि मूल चुनाव चिह्न को फिलहाल सुरक्षित रखा गया है। आयोग के अनुसार, चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के तहत विस्तृत सुनवाई के बाद विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मामले में अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

चार हाईकोर्ट में 12 अतिरिक्त जज होंगे स्थायी
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट में कार्यरत 12 अतिरिक्त जजों को स्थायी जज बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की 23 सितंबर को हुई बैठक में आंध्र प्रदेश, केरल, उत्तराखंड और गुवाहाटी हाईकोर्ट से जुड़े प्रस्तावों पर फैसला लिया गया।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त जजों को स्थायी नियुक्ति देने की मंजूरी मिली है। इनमें जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम, जस्टिस थूटा चंद्र धन शेखर, जस्टिस चल्ला गुणरंजन, जस्टिस अवधनम हरिहरनाध शर्मा और डॉ. जस्टिस यदवल्ली लक्ष्मण राव शामिल हैं।

केरल हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त जजों के नाम भी स्थायी नियुक्ति के लिए मंजूर किए गए हैं। इनमें जस्टिस पी. कृष्ण कुमार, जस्टिस केवी जयकुमार, जस्टिस मुरली कृष्ण एस., जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन और जस्टिस पीवी बालकृष्णन शामिल हैं।

इसके अलावा उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस सुभाष उपाध्याय और गुवाहाटी हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस कौशिक गोस्वामी को स्थायी जज बनाए जाने के प्रस्ताव को भी कॉलेजियम ने मंजूरी दी है।

आमतौर पर अतिरिक्त जजों की नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए होती है। स्थायी नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा है। अब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नियुक्तियों को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

AAP नेता दीपक सिंगला की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का ED को नोटिस
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी नेता दीपक सिंगला की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा है। सिंगला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 9 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व वी. मोहना की पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए ईडी को नोटिस जारी किया। सिंगला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखा। ईडी ने सिंगला को 18 मई को गिरफ्तार किया था।

मामला महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी कथित बैंक धोखाधड़ी से संबंधित है। सीबीआई ने 2018 में तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के एक सहायक महाप्रबंधक की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि कंपनी ने सिंगापुर स्थित सहयोगी कंपनी, कुछ निजी लोगों और बैंक के एक अधिकारी के साथ मिलकर विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट में कथित तौर पर बदलाव किए। जांच में बैंक को करीब 155.21 करोड़ रुपये के कथित नुकसान की बात सामने आई थी, जबकि कंपनी पर मूल बकाया राशि करीब 239.46 करोड़ रुपये बताई गई। सीबीआई ने 10 अगस्त 2020 को मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।

इसके बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की। एजेंसी ने आरोप लगाया कि विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट की राशि 21.47 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 173.03 करोड़ रुपये की गई और आयात से संबंधित दस्तावेजों में भी कथित फर्जीवाड़ा हुआ।

ईडी ने अपनी दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत में सिंगला को आरोपी बनाया। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने मुख्य आरोपियों को कथित तौर पर अपराध से हासिल रकम छिपाने, अलग-अलग स्तरों पर स्थानांतरित करने और विभिन्न खातों व संस्थाओं के माध्यम से घुमाने में मदद की।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ईडी की ओर से पेश सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया सिंगला की भूमिका की जांच जरूरी दिखाई देती है। अब सुप्रीम कोर्ट ईडी का जवाब मिलने के बाद जमानत याचिका पर आगे सुनवाई करेगा।


ट्रंप के फैसले को कोर्ट का झटका, सीएनएन समेत तीनों मीडिया संस्थानों की व्हाइट हाउस में एंट्री बहाल

सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों को मिली अस्थायी राहत

वॉशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। संघीय जिला न्यायाधीश टिमोथी केली ने सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस से बाहर रखने के प्रशासन के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने प्रशासन को तीनों संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है। यह अस्थायी आदेश 14 दिनों तक प्रभावी रहेगा, जब तक अदालत की ओर से इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाता।

ट्रंप प्रशासन ने क्यों लगाया था प्रतिबंध?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के व्हाइट हाउस प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग को ‘फेक न्यूज’ बताते हुए उन पर उनके प्रशासन और राष्ट्रपति के बारे में गलत खबरें प्रकाशित करने का आरोप लगाया था। इसके अगले दिन तीनों संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश नहीं दिया गया और उनके प्रेस क्रेडेंशियल्स निष्क्रिय कर दिए गए।

इसके बाद सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको ने संघीय अदालत का रुख किया। मीडिया संस्थानों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पूर्व सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना व्हाइट हाउस से बाहर किया गया। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई प्रेस की स्वतंत्रता और उचित कानूनी प्रक्रिया से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

सुनवाई में जज ने किस मुद्दे पर सवाल उठाए?

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश टिमोथी केली ने मुख्य रूप से इस बात पर सवाल किया कि पत्रकारों के प्रेस पास रद्द करने से पहले प्रशासन ने उचित प्रक्रिया का पालन किया था या नहीं। अदालत ने पहले के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच खत्म करने से पहले उन्हें नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

इसके बाद न्यायाधीश ने तीनों मीडिया संस्थानों के पक्ष में अस्थायी राहत देते हुए प्रशासन को उनके पत्रकारों की पहुंच बहाल करने का आदेश दिया। अदालत ने माना कि मीडिया संस्थानों के पास यह दावा करने का मजबूत आधार है कि उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया से वंचित किया गया।

प्रशासन ने अदालत में क्या दलील दी?

ट्रंप प्रशासन की ओर से न्याय विभाग ने प्रतिबंध का बचाव करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस में पत्रकारों का प्रवेश असीमित अधिकार नहीं है। प्रशासन का तर्क था कि राष्ट्रपति कार्यालय और निवास परिसर में प्रवेश को लेकर कुछ नियम और सीमाएं तय की जा सकती हैं।

सरकार ने पत्रकारों की पहुंच सीमित करने के समर्थन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का भी हवाला दिया। प्रशासन का कहना था कि राष्ट्रपति को व्हाइट हाउस के संवेदनशील हिस्सों और वहां होने वाली गतिविधियों की कवरेज को नियंत्रित करने का अधिकार है।

हालांकि, अदालत ने फिलहाल प्रशासन की दलीलों के बावजूद प्रतिबंध लागू रखने की अनुमति नहीं दी और पत्रकारों के प्रेस पास बहाल करने का निर्देश दिया।

मीडिया संस्थानों ने क्या कहा?

सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको ने अदालत में कहा कि उन्हें उनके कवरेज के कारण निशाना बनाया गया और बिना उचित प्रक्रिया के व्हाइट हाउस की पहुंच छीन ली गई। तीनों संस्थानों ने अपने संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए अदालत से तत्काल राहत की मांग की थी।

मीडिया संस्थानों की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि प्रशासन ने प्रतिबंध की घोषणा करते समय रिपोर्टिंग को लेकर आपत्ति जताई थी, जबकि बाद में अदालत में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तर्क सामने रखे गए। इसी वजह से सुनवाई के दौरान प्रतिबंध के आधार और अपनाई गई प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठे।

अब आगे क्या होगा?

अदालत के ताजा आदेश के बाद सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस की पहुंच फिर से मिलनी है। हालांकि यह अंतिम फैसला नहीं है। फिलहाल अदालत ने 14 दिनों के लिए अस्थायी राहत दी है और इसी अवधि में मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन

18 सितंबर: ट्रंप ने सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको पर व्हाइट हाउस से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।

19 सितंबर: तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोका गया और उनके प्रेस पास निष्क्रिय किए गए।

21 सितंबर: तीनों संस्थानों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर कर राहत की मांग की।

23 सितंबर: सुनवाई के दौरान न्यायाधीश टिमोथी केली ने पत्रकारों की पहुंच खत्म करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

24 सितंबर: अदालत ने ट्रंप प्रशासन को तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास बहाल करने और व्हाइट हाउस पहुंच देने का आदेश दिया। अस्थायी आदेश 14 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा।

फिलहाल इस मामले में मुख्य कानूनी सवाल व्हाइट हाउस में पत्रकारों की पहुंच, प्रेस की स्वतंत्रता और सरकार की ओर से प्रेस क्रेडेंशियल्स वापस लेने की प्रक्रिया से जुड़े हैं। अदालत का ताजा आदेश इन सवालों पर अंतिम फैसला नहीं है, लेकिन इससे तीनों मीडिया संस्थानों को फिलहाल व्हाइट हाउस कवरेज जारी रखने की अनुमति मिल गई है।


CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की, 48 घंटे में कदम नहीं उठाने पर आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस वार्ता कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे। यह मांग और आरोप CJP की ओर से लगाए गए हैं।

अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने दिल्ली में भी लाखों नाम हटाए जाने का दावा किया। इन आंकड़ों को लेकर पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर आपत्ति जताई है।

CJP ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर पारदर्शिता की जरूरत है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है।

प्रेस वार्ता में पार्टी ने तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, आगामी चुनावों को रद्द करने और SIR प्रक्रिया को फ्रीज करने की मांग शामिल है। इसके अलावा पार्टी ने 2023 में लागू चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े नियमों को दोबारा लागू करने की मांग की है।

CJP प्रवक्ता सौरव दास ने युवाओं से लोकतांत्रिक सुधारों को लेकर आगे आने की अपील की। पार्टी ने कहा कि तय समय सीमा में उनकी मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को देशभर में आगे बढ़ाया जाएगा।

नोट: मतदाता सूची में नाम हटाए जाने से जुड़े आंकड़े और अन्य आरोप यहां CJP के दावों के रूप में दिए गए हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।


देहरादून में काजल हत्याकांड का खुलासा, पत्नी की हत्या के आरोप में पति गिरफ्तार

देहरादून। क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र में 21 सितंबर को हुई 26 वर्षीय काजल की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने हत्या के आरोप में उसके पति धीरज पंवार उर्फ लल्लू को गिरफ्तार किया है। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा कारतूस और खून लगी शर्ट बरामद की है।

पुलिस के मुताबिक, 21 सितंबर की सुबह 112 कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचना मिली थी कि धीरज की अपनी पत्नी काजल से हाथापाई हुई और इसी दौरान गोली लगने से उसकी मौत हो गई। सूचना पर क्लेमेंटटाउन पुलिस मौके पर पहुंची। वहां काजल का शव बिस्तर पर पड़ा था और उसके सिर व पेट पर गोली लगने के निशान थे। फॉरेंसिक टीम ने मौके से आवश्यक साक्ष्य जुटाए।

घटना के बाद काजल का पति धीरज मोबाइल फोन बंद कर फरार हो गया था। मृतका के भाई की तहरीर पर क्लेमेंटटाउन थाने में मुकदमा संख्या 91/2026, धारा 103(1) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए थाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम बनाई गई।

पुलिस के अनुसार, धीरज का कोई स्थायी ठिकाना नहीं था। शादी के बाद से वह पत्नी और बच्चों के साथ सुभाषनगर स्थित अपनी पत्नी के मायके में रह रहा था। घटना के बाद मोबाइल बंद कर फरार होने के कारण उसकी तलाश चुनौतीपूर्ण थी। पुलिस टीम ने सुरागरसी और मुखबिर तंत्र की मदद से जानकारी जुटाई और 23 सितंबर को उसे क्लेमेंटटाउन क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसकी और काजल की शादी करीब 12 साल पहले हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। पिछले करीब एक साल से दोनों के बीच अलग-अलग बातों को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस के अनुसार, पिछले तीन महीने से काजल उसे घर में प्रवेश नहीं करने दे रही थी और बच्चों से भी मिलने नहीं दे रही थी।

आरोपी ने पुलिस को बताया कि करीब एक महीने पहले उसे काजल के तलाक लेने की तैयारी करने की जानकारी मिली। इसके बाद उसने पत्नी की हत्या की योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक, योजना के तहत उसने सहारनपुर से देसी तमंचा खरीदा और घटना से एक रात पहले देहरादून पहुंच गया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी घटनास्थल के पास एक निर्माणाधीन भवन में छिपकर मौका देखता रहा। सुबह वह घर में लगे टीन के दरवाजे को तोड़कर अंदर दाखिल हुआ और बिस्तर पर सो रही काजल पर दो गोलियां चलाकर वहां से फरार हो गया।

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा कारतूस और घटना के समय पहनी गई खून लगी शर्ट बरामद की है। मामले में पुलिस की आगे की जांच जारी है।


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