Thursday, September 24th, 2026

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पर्वतारोहियों का साहस, अनुशासन और टीम भावना युवाओं के लिए प्रेरणादायी- मुख्यमंत्री

Daily Archives: 24/09/2026

पर्वतारोहियों का साहस, अनुशासन और टीम भावना युवाओं के लिए प्रेरणादायी- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के सफल पर्वतारोहण अभियानों का किया फ्लैग-इन

माउंट एकांकागुआ के साथ नुन-कुन पर्वत श्रृंखला की तीन चोटियों पर सफल आरोहण करने वाले दलों को दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM), उत्तरकाशी द्वारा संचालित चार सफल पर्वतारोहण अभियानों का फ्लैग-इन किया। इनमें जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (JIM&WS), पहलगाम के साथ संयुक्त रूप से संचालित माउंट एकांकागुआ अभियान भी शामिल था।

मुख्यमंत्री ने सभी पर्वतारोहियों को सफल अभियानों के लिए बधाई देते हुए चुनौतीपूर्ण उच्च पर्वतीय परिस्थितियों में उनके साहस, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और टीम भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहियों की ये उपलब्धियां उत्तराखण्ड के साथ ही देश के युवाओं को साहसिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने पर्वतारोहण, साहसिक खेलों, युवा विकास और उच्च हिमालयी प्रशिक्षण के क्षेत्र में देश और प्रदेश में महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। संस्थान द्वारा युवाओं को पर्वतारोहण एवं साहसिक गतिविधियों के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ उनमें साहस, नेतृत्व, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता भी विकसित की जा रही है।

माउंट एकांकागुआ (6,961 मीटर), अर्जेंटीना के लिए NIM और JIM&WS के संयुक्त अभियान का नेतृत्व कर्नल हेम चंद्र सिंह ने किया। छह सदस्यीय अभियान दल ने 22 फरवरी 2026 को माउंट एकांकागुआ के शिखर पर सफल आरोहण किया। इस संयुक्त अभियान को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक से फ्लैग ऑफ किया था।

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के नुन-कुन अभियान-2026 का नेतृत्व संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल एस.एस. राजपुरोहित ने किया। अभियान दल ने 15 अगस्त 2026 को माउंट कुन की 7,077 मीटर ऊंची चोटी पर सफल आरोहण किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हासिल की गई यह उपलब्धि अभियान दल के लिए विशेष रही। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए दल ने 26 अगस्त 2026 को माउंट डेल्टा-41 की 5,908 मीटर ऊंची चोटी तथा 31 अगस्त 2026 को माउंट नुन की 7,135 मीटर ऊंची चोटी पर भी सफल आरोहण किया। इस प्रकार अभियान दल ने एक ही अभियान के दौरान नुन-कुन पर्वत श्रृंखला की तीन चोटियों पर सफल आरोहण की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की।

मुख्यमंत्री ने सभी अभियान सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियां पर्वतारोहण और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं प्रदान करती हैं। पर्वतारोहियों की ऐसी उपलब्धियां युवाओं को साहसिक खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करने के साथ ही उत्तराखण्ड की पहचान को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करती हैं।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल एवं युवा कल्याण अमित कुमार सिन्हा, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल एस.एस. राजपुरोहित, जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स, पहलगाम के प्रधानाचार्य कर्नल हेम चंद्र सिंह, कैप्टन जी. संतोष कुमार सहित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के अधिकारी एवं विभिन्न पर्वतारोहण अभियानों के सदस्य उपस्थित थे।


टिहरी झील को ग्लोबल डेस्टिनेषन के रूप में विकसित करने को लेकर मुख्य सचिव ने ली बैठक

टिहरी लेक एरिया का मास्टर प्लान और जोनल प्लान तैयार करने के दिए निर्देश

बेतरतीब विकास रोकने के लिए पूरे क्षेत्र का किया जाए मास्टर प्लान तैयार

वर्षभर पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए फेजवाइज प्लानिंग पर दिया जोर

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग के साथ बैठक के दौरान टिहरी झील को ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के लिए समग्र मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि टिहरी लेक क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए पूरे क्षेत्र की दीर्घकालिक और सुनियोजित प्लानिंग की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील के आसपास के लगभग 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सम्मिलित करते हुए समग्र मास्टर एवं जोनल प्लान तैयार किया जाए। इसमें सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार की भूमि को शामिल किया जाए। उन्होंने बेतरतीब विकास को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार करने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवश्यकतानुसार जोन निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान तैयार करते समय सभी सम्बन्धित स्टेकहोल्डर्स से विचार-विमर्श किया जाए, ताकि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार की जा सके। मास्टर प्लानिंग के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली एवं एसपीए, भोपाल से तकनीकी सहयोग लेने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने के लिए पूरे लेक एरिया में विभिन्न पर्यटन गतिविधियों को समाहित करते हुए आकर्षण के प्रमुख केंद्र (मैगनेट एरिया) विकसित किए जाएं। इसके लिए फेजवाइज योजना तैयार की जाए, ताकि प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न परियोजनाओं को विकसित किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि टिहरी लेक में ऐसी पर्यटन गतिविधियों की विस्तृत योजना तैयार की जाए, जिससे पर्यटक क्षेत्र में कम से कम एक-दो दिन या उससे अधिक समय तक क्षेत्र में ठहर सकें। वाटर स्पोर्ट्स के साथ ही एडवेंचर, ट्रैकिंग, नेचर, कल्चर, विलेज टूरिज्म सहित विभिन्न गतिविधियों को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अप्रैल, मई और जून में जलस्तर कम रहने के दौरान भी पर्यटकों के लिए पर्याप्त गतिविधियां उपलब्ध रहें, इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। वर्षभर पर्यटन गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित करने के लिए मौसम एवं जलस्तर के अनुसार गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने टिहरी झील क्षेत्र में नए ट्रैकिंग रूट्स एवं ट्रेल्स विकसित करने तथा आसपास के गांवों को पर्यटन से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए विलेज एवं कल्चरल विजिट की व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिससे उन्हें स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन से परिचित होने का अवसर मिले और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि टिहरी लेक को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार की जाए, जिसे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। मुख्य सचिव ने अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी आमंत्रित करने के निर्देश दिए, ताकि झील क्षेत्र के विकास से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर समन्वित रूप से चर्चा की जा सके।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना,  अभिषेक रोहिला एवं जिलाधिकारी टिहरी श्रीमती नितिका खण्डेलवाल उपस्थित थीं।


NEET UG फर्जी दस्तावेज मामले में एक और गिरफ्तारी, एमबीबीएस दाखिले के नाम पर 5.58 लाख रुपये बरामद

देहरादून। NEET UG 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव को वाहन समेत गिरफ्तार किया है। उसके पास से 5 लाख 58 हजार 100 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

मामले में 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा सरकार पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने और जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद मुकदमे दर्ज किए गए थे। रायपुर थाने में मुकदमा संख्या 380/26 और क्लेमेंटाउन थाने में मुकदमा संख्या 86/26 दर्ज किया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। जांच के दौरान एसआईटी ने संबंधित दस्तावेजों और अभ्यर्थियों से जुड़े रिकॉर्ड कब्जे में लेकर उनकी जांच की। पुलिस के अनुसार, दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। संबंधित शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड जुटाने के बाद अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी सामने आई।

इस मामले में पुलिस ने इससे पहले 21 सितंबर को रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, रूपेश की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने के एवज में लिए गए 8 लाख रुपये बरामद किए गए थे।

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने धीरज कुमार श्रीवास्तव को भी गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके कब्जे से टाटा नेक्सॉन कार बरामद की, जिसकी तलाशी के दौरान 5,58,100 रुपये नकद मिले। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में धीरज ने बताया कि यह रकम उसे रूपेश पंडित ने फ्रीडम फाइटर कोटे के माध्यम से कुछ छात्रों का एमबीबीएस में दाखिला कराने के एवज में कमीशन के तौर पर दी थी।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि धीरज श्रीवास्तव भोपाल के इंद्रपुरी क्षेत्र में ‘MBBS WAY’ नाम से कार्यालय संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम समेत अन्य पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला कराने का काम करता था।

पुलिस के मुताबिक, धीरज की मुलाकात करीब दो साल पहले रूपेश पंडित से उत्तरकाशी स्थित मंजरी देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में हुई थी। इसके बाद दोनों लगातार संपर्क में थे।

जांच में पुलिस को जानकारी मिली कि अरविंद ने अपनी बेटी और दो परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इसके बाद रूपेश ने धीरज से बात की। आरोप है कि धीरज ने अपने एक अन्य संपर्क के माध्यम से कम मेरिट वाले छात्रों के दाखिले की जानकारी जुटाई। इसी दौरान उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के तहत दाखिले की बात सामने आई।

पुलिस के अनुसार, इसके बाद धीरज ने रूपेश और अन्य साथियों के साथ मिलकर तीन अभ्यर्थियों के लिए कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला लिया।

एसआईटी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बरामदगी:

  • धीरज श्रीवास्तव से 5,58,100 रुपये नकद
  • रूपेश पंडित की निशानदेही पर 8 लाख रुपये नकद
  • टाटा नेक्सॉन कार

मोहाली में नंदू गैंग के दो शूटर गिरफ्तार, मोरिंडा में फायरिंग की तैयारी का आरोप

मोहाली। दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग से जुड़े दो कथित शूटरों को मोहाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों मोरिंडा में फायरिंग की वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं।

खरड़ सीआईए इंस्पेक्टर प्रदीप बजवा की टीम को सूचना मिली थी कि नंदू गैंग से जुड़े दो शूटर मोरिंडा से खरड़ की ओर आ रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने खरड़-कुराली रोड स्थित शिवजोत एन्क्लेव के पास नाकाबंदी कर वाहनों की जांच शुरू की।

इसी दौरान हरियाणा नंबर की काले रंग की स्कॉर्पियो को रोककर उसमें सवार दो युवकों को पकड़ा गया। उनकी पहचान सोनीपत के गोपालपुर निवासी अनीकेत छिकारा और पानीपत की हुडा कॉलोनी निवासी ईशान के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार करने के साथ स्कॉर्पियो भी कब्जे में ले ली।

पुलिस के मुताबिक, आरोपितों के पास से दो अत्याधुनिक हथियार और कारतूस बरामद हुए हैं। दोनों के खिलाफ हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में हत्या, डकैती और आर्म्स एक्ट सहित सात से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि दोनों आरोपित कथित तौर पर मोरिंडा में फायरिंग की वारदात की तैयारी कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, रेकी करने के बाद दोनों खरड़ की तरफ लौट रहे थे, तभी उन्हें पकड़ लिया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फायरिंग के लिए किसे निशाना बनाया जाना था, उन्हें किसने भेजा था और साजिश में गैंग के अन्य कौन लोग शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक, कपिल सांगवान उर्फ नंदू दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय गैंग से जुड़ा है और फिलहाल विदेश से गैंग की गतिविधियां संचालित करने की बात सामने आती रही है। दिसंबर 2024 में पंचकूला के बुर्जकोटियां स्थित एक क्लब के बाहर हुए ट्रिपल मर्डर की जांच में भी नंदू गैंग का नाम सामने आया था।

अब मोहाली पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपितों से पूछताछ कर उनके स्थानीय संपर्कों, संभावित टारगेट और मोरिंडा में प्रस्तावित फायरिंग की साजिश से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।


हिसार में घरेलू विवाद में पति की हत्या, पत्नी पर ईंट-डंडों से हमला करने का आरोप

हिसार। उकलाना मंडी की रविदास कॉलोनी में घरेलू विवाद के बाद 32 वर्षीय बलजीत की हत्या का मामला सामने आया है। बुधवार सुबह रेलवे लाइन के पास खेतों में उसका खून से लथपथ शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मृतक की पत्नी मनप्रीत को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक बलजीत मजदूरी करता था और शराब पीने का आदी था। इसी वजह से उसका पत्नी मनप्रीत के साथ अक्सर विवाद होता रहता था। परिवार के अनुसार करीब 10 दिन पहले भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था, जिसके बाद मनप्रीत ने पुलिस थाने में शिकायत दी थी।

बुधवार सुबह एक बच्चे की नजर खेत में पड़े बलजीत के शव पर पड़ी। उसने घर पहुंचकर इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे तो बलजीत के सिर और चेहरे से खून निकल रहा था। उसके सिर, चेहरे और पेट पर चोट के निशान मिले। सूचना मिलने पर पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भेज दिया।

मृतक के बड़े भाई कुलदीप के अनुसार बलजीत के एक बेटा और एक बेटी है। परिजनों ने आरोप लगाया कि पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद रहता था। उन्होंने मनप्रीत के किसी अन्य व्यक्ति के साथ प्रेम-प्रसंग होने की बात भी पुलिस को बताई है। पुलिस इस पहलू को भी जांच में शामिल कर रही है।

पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मनप्रीत के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में पति-पत्नी के बीच विवाद की बात सामने आई है। हत्या की वास्तविक वजह और वारदात में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की स्थिति और स्पष्ट होगी।


दिशा सालियान केस में पिता सतीश आज CBI को सौंपेंगे अहम सबूत, आरोपितों से जल्द पूछताछ की मांग

मुंबई। दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में जांच को लेकर उनके पिता सतीश सालियान गुरुवार को मुंबई स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के कार्यालय पहुंचेंगे। वह अपने वकील के साथ जांच से जुड़े कुछ अहम सबूत जांच एजेंसी को सौंपेंगे। सतीश सालियान की ओर से संबंधित लोगों को जल्द पूछताछ के लिए बुलाने और दोष साबित होने पर कानूनी कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सतीश सालियान और शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे के बीच कानूनी विवाद चल रहा है। सतीश सालियान ने आदित्य ठाकरे को 500 करोड़ रुपये के मानहानि का नोटिस भेजा था। इसके जवाब में ठाकरे ने नोटिस में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है।

आदित्य ठाकरे की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिन्हा ने कानूनी जवाब भेजा है। जवाब में कहा गया है कि 16 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में सतीश सालियान का नाम या ऐसा कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था, जिससे पोस्ट को सीधे उनके खिलाफ माना जा सके। ठाकरे ने पोस्ट वापस लेने, माफी मांगने और 500 करोड़ रुपये का मुआवजा देने से भी इनकार किया है।

ठाकरे के कानूनी पक्ष ने 500 करोड़ रुपये की मांग के आधार पर भी सवाल उठाया है। जवाब में कहा गया कि नोटिस में इस राशि की गणना, कथित आर्थिक नुकसान या मुआवजे के लिए कोई ठोस आधार नहीं बताया गया है। वहीं, सतीश सालियान के वकील की ओर से पहले कहा गया था कि नोटिस में माफी के साथ 500 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है।

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। दोनों की मौत के बीच कुछ दिनों का अंतर होने के कारण दिशा का मामला लंबे समय से सार्वजनिक और कानूनी चर्चा में रहा है। हालिया घटनाक्रम में CBI जांच और दोनों पक्षों के बीच कानूनी कार्रवाई को लेकर मामला फिर चर्चा में है।


समस्तीपुर में लड़की से अभद्र व्यवहार का वीडियो वायरल, पुलिस ने छह घंटे में चार आरोपितों को दबोचा

समस्तीपुर। कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव के पास सड़क पर एक लड़की के साथ अभद्र व्यवहार का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। वीडियो सामने आने के करीब छह घंटे के भीतर पुलिस ने मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया निगरानी के दौरान वीडियो सामने आया था। तकनीकी सत्यापन के बाद घटनास्थल की पहचान जगतसिंहपुर बांध के समीप सड़क के रूप में की गई। प्रारंभिक जांच में वीडियो करीब एक सप्ताह पुराना बताया जा रहा है। वीडियो में तीन-चार युवक लड़की के साथ अभद्र व्यवहार करते नजर आ रहे हैं।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान जगतसिंहपुर गांव निवासी विकास कुमार, राहुल कुमार, रामबाबू सहनी और बिजौलिया गांव निवासी अवधेश पासवान के रूप में हुई है। पुलिस ने वीडियो के आधार पर आरोपितों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया।

वीडियो में दिखाई दे रही लड़की प्रथमदृष्ट्या नाबालिग प्रतीत हो रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने पीड़िता की पहचान स्थापित होने का इंतजार किए बिना पुलिस पदाधिकारी के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की। कर्पूरीग्राम थाना कांड संख्या 117/26 में बीएनएस, पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।

पुलिस अब पीड़िता की पहचान करने के साथ वीडियो के स्रोत और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

समस्तीपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वीडियो या उससे संबंधित पोस्ट को आगे साझा न करें। पुलिस ने विशेष रूप से पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने से बचने को कहा है। पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की भी निगरानी कर रही है और वीडियो के प्रसार से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।


हर बार खाना खाने के बाद क्यों फूल जाता है पेट? जानिए गैस बनने की असली वजह

खाना खाने के कुछ देर बाद पेट फूलना, डकार आना, भारीपन महसूस होना या गैस की शिकायत होना काफी आम है। कई बार खान-पान की आदतों या कुछ खास खाद्य पदार्थों के कारण ऐसा हो सकता है। लेकिन अगर हर बार भोजन करने के बाद पेट में गैस बनने लगे या यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अक्सर लोग गैस और एसिडिटी को एक ही समस्या समझ लेते हैं, जबकि दोनों के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। गैस की समस्या के पीछे खाने का तरीका, ज्यादा भोजन करना, कब्ज, कुछ खाद्य पदार्थों से संवेदनशीलता या दूध न पचना जैसी वजहें हो सकती हैं। वहीं, अगर गैस के साथ लगातार पेट दर्द, उल्टी, वजन कम होना, मल में खून आना या खाना निगलने में परेशानी हो रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

खाना खाने के बाद गैस बनने की प्रमुख वजहें

1. जल्दबाजी में खाना खाना

अगर आप खाना बहुत तेजी से खाते हैं तो भोजन के साथ अधिक हवा भी पेट में जा सकती है। इससे डकार आने और पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए भोजन को आराम से और अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए।

2. कुछ खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन

राजमा, छोले, चना और कुछ सब्जियां कई लोगों में गैस बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा कार्बोनेटेड पेय भी पेट फूलने और डकार की समस्या को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के शरीर पर खाद्य पदार्थों का असर अलग-अलग हो सकता है।

3. जरूरत से ज्यादा भोजन करना

एक बार में बहुत अधिक खाना खाने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है। इसके चलते भारीपन, पेट फूलना और गैस जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। इसलिए भोजन की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

4. दूध या डेयरी उत्पाद न पचना

कुछ लोगों के शरीर में लैक्टोज को पचाने की क्षमता कम होती है। ऐसे लोगों को दूध या कुछ डेयरी उत्पाद लेने के बाद गैस, पेट फूलने या दस्त की शिकायत हो सकती है।

5. कब्ज की समस्या

कब्ज होने पर आंतों में गैस फंस सकती है, जिससे पेट फूला हुआ और भारी महसूस हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना, फाइबर युक्त भोजन लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है।

6. अपच या एसिड रिफ्लक्स

खाना खाने के बाद पेट के ऊपरी हिस्से में असहजता, जलन या खट्टी डकार जैसी शिकायत केवल गैस की वजह से नहीं हो सकती। ये लक्षण अपच या एसिड रिफ्लक्स से भी जुड़े हो सकते हैं। इसलिए लगातार होने वाली परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गैस की समस्या से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें
खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं।
एक बार में बहुत ज्यादा भोजन करने से बचें।
जिन खाद्य पदार्थों से बार-बार गैस बनती है, उनका सेवन कम करें।
कार्बोनेटेड पेय पदार्थों से दूरी बनाएं।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
रोजाना हल्की शारीरिक गतिविधि या पैदल चलने की आदत डालें।

गैस बनने पर क्या करें?

अगर खाना खाने के बाद पेट में गैस या भारीपन महसूस हो रहा है तो गुनगुना पानी धीरे-धीरे पी सकते हैं। भोजन के बाद करीब 10 से 15 मिनट हल्की वॉक करना भी मददगार हो सकता है। इस दौरान बहुत अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन तथा कार्बोनेटेड पेय लेने से बचना बेहतर है।

हालांकि, अगर गैस की शिकायत बार-बार होती है या इसके साथ तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, मल में खून, निगलने में परेशानी या बिना वजह वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लें।

(साभार)


कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग और M3M फाउंडेशन के बीच हुआ एमओयू

उत्तराखंड के युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को मिलेगा विस्तार

देहरादून, हल्द्वानी, काशीपुर और पिथौरागढ़ में शुरू होंगे प्रशिक्षण केंद्र; ईवी, ऑटोमोबाइल, आईओटी और प्लंबिंग जैसे ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण

रोजगार क्षमता बढ़ाने के साथ प्लेसमेंट और टिकाऊ आजीविका पर रहेगा फोकस

देहरादून।उत्तराखंड के युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित कर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल और मार्गदर्शन में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग तथा एम3एम फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के साथ उन्हें आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में बेहतर प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग की ओर से निदेशक (प्रशिक्षण) संजय कुमार और एम3एम फाउंडेशन की ओर से मैनेजिंग ट्रस्टी एवं प्रेसिडेंट डॉ. ऐश्वर्य महाजन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

चार शहरों में प्रशिक्षण केंद्रों को प्राथमिकता

एमओयू के शुरुआती चरण में देहरादून, हल्द्वानी, काशीपुर और पिथौरागढ़ में प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जाने को प्राथमिकता दी गई है। परियोजना की जरूरत, स्थानीय परिस्थितियों और संभावित लाभार्थियों की उपलब्धता के आधार पर अल्मोड़ा और बड़कोट को भी अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में शामिल किया जा सकता है।

प्रत्येक प्रशिक्षण केंद्र पर स्थानीय उद्योगों की मांग और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कम से कम दो पाठ्यक्रम संचालित किए जाने प्रस्तावित हैं। प्रशिक्षण के साथ-साथ युवाओं को उद्योगों से जोड़ने, प्लेसमेंट सहायता उपलब्ध कराने और प्रशिक्षण के बाद टिकाऊ आजीविका के अवसर तैयार करने पर भी जोर रहेगा।

इन आधुनिक तकनीकी ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण

युवाओं को आधुनिक और रोजगारपरक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने की योजना है। प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में जूनियर टेक्नीशियन-इलेक्ट्रिक व्हीकल, जूनियर टेक्नीशियन-ऑटो इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस, जूनियर टेक्नीशियन-ऑटोमोबाइल रिपेयर एंड मेंटेनेंस, जूनियर टेक्नीशियन-इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और जूनियर टेक्नीशियन-प्लंबिंग शामिल हैं।

इन पाठ्यक्रमों का चयन स्थानीय उद्योगों की जरूरतों और उपलब्ध रोजगार अवसरों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसके अलावा उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर प्लेसमेंट के अवसर बढ़ाने और प्रशिक्षण के बाद युवाओं के रोजगार परिणामों की निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

रोजगार के साथ टिकाऊ आजीविका पर जोर

एम3एम फाउंडेशन की चेयरपर्सन एवं ट्रस्टी डॉ. पायल कनोडिया ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ना इस साझेदारी का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि विभाग और फाउंडेशन के बीच यह सहयोग कौशल विकास को अधिक उद्योग-केंद्रित और रोजगारपरक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि साझेदारी के माध्यम से युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, बेहतर रोजगार अवसर और टिकाऊ आजीविका के रास्ते उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।

कार्यक्रम में उप निदेशक सेवायोजन चंद्रकांता, उप निदेशक (प्रशिक्षण) निरंजन खुगशाल, प्रधानाचार्य श्रेणी-1 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान निरंजनपुर देहरादून दिनकर रौतेला, नोडल अधिकारी यूकेएसडीएम विनीता बडोनी, एम3एम प्रतिनिधि अरविंद कुमार शर्मा सहित विभाग और प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।


गोरखपुर में महिला से बाइक सवार बदमाशों ने झपटा बैग, मोबाइल-गहने और नकदी समेत जरूरी दस्तावेज ले गए

गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज से पत्नी के साथ घर लौट रहे एक व्यक्ति की पत्नी के हाथ से बाइक सवार दो बदमाश बैग छीनकर फरार हो गए। वारदात 22 सितंबर की रात करीब 8:30 बजे जंगल कौड़िया जीरो प्वाइंट के पास हुई। बैग में मोबाइल, नकदी, सोने के आभूषण और कई जरूरी दस्तावेज रखे थे।

जिंदापुर गांव निवासी रविंद्र कुमार अपनी पत्नी के साथ गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से घर जा रहे थे। जंगल कौड़िया जीरो प्वाइंट के पास पीछे से बाइक पर पहुंचे दो युवकों ने महिला के हाथ में मौजूद बैग पर झपट्टा मारा और उसे छीन लिया। अचानक हुई घटना से दंपती कुछ समझ पाते, इससे पहले दोनों बदमाश बाइक से तेज गति में मौके से निकल गए।

बैग में मोबाइल फोन के अलावा सोने की चेन, लॉकेट, अंगूठी, करीब आठ हजार रुपये की घड़ी, नकदी, एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, मोटरसाइकिल की आरसी सहित अन्य सामान रखा था। महिला के शोर मचाने पर आसपास के लोगों ने बदमाशों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वे फरार हो चुके थे।

घटना के बाद रविंद्र कुमार ने पीपीगंज थाने पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने दो अज्ञात बाइक सवार बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके साथ ही बदमाशों के आने और वारदात के बाद भागने वाले रास्तों की फुटेज भी जांची जा रही है।


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