Tuesday, September 15th, 2026

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वजन घटाने के लिए कर रहे हैं इंटरमिटेंट फास्टिंग? पहले जान लें इसके फायदे और नुकसान

Daily Archives: 15/09/2026

वजन घटाने के लिए कर रहे हैं इंटरमिटेंट फास्टिंग? पहले जान लें इसके फायदे और नुकसान

आज के दौर में तेजी से वजन कम करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन काफी बढ़ गया है। इस तरीके में व्यक्ति दिन के कुछ तय घंटों में ही भोजन करता है और बाकी समय उपवास रखता है। वजन नियंत्रित करने के साथ-साथ कुछ शोधों में इसके ब्लड प्रेशर और आराम की अवस्था में दिल की धड़कन पर सकारात्मक प्रभाव के संकेत भी मिले हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या उपयुक्त है।

खासकर पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों या नियमित रूप से दवाइयां लेने वालों को इसे शुरू करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। लंबे समय तक भोजन न करने से कुछ लोगों में सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर या ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए वजन घटाने के लिए फास्टिंग शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग से मिल सकते हैं ये फायदे

इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे प्रमुख उद्देश्य खाने की अवधि को सीमित करना है। इससे कई लोगों में कुल कैलोरी का सेवन कम हो सकता है, जिसके चलते वजन घटाने में मदद मिल सकती है।

कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिला है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और आराम की अवस्था में दिल की धड़कन कम करने में मदद कर सकती है। एक अध्ययन में 16 घंटे तक उपवास रखने वाले पुरुषों में शरीर की चर्बी कम होने के संकेत देखे गए थे।

हालांकि, इन अध्ययनों के परिणामों को हर व्यक्ति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। फास्टिंग का असर व्यक्ति की उम्र, वजन, खान-पान, जीवनशैली और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

लंबे समय तक खाना न खाने से सिरदर्द की समस्या

इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने के बाद कुछ लोगों को सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। लंबे समय तक भोजन न मिलने के कारण शरीर में होने वाले बदलाव इसके पीछे एक कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों को इसके साथ कमजोरी या चक्कर भी महसूस हो सकते हैं।

2020 में प्रकाशित एक समीक्षा में भी इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वाले लोगों में सिरदर्द की समस्या सामने आई थी। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में समान नहीं होता। किसी व्यक्ति को हल्का सिरदर्द हो सकता है, जबकि किसी अन्य को ज्यादा परेशानी महसूस हो सकती है।

अगर फास्टिंग के दौरान बार-बार या तेज सिरदर्द की समस्या हो रही है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

डायबिटीज के मरीज रहें विशेष सावधान

डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करना सामान्य लोगों की तुलना में अधिक सावधानी की मांग करता है। लंबे समय तक भोजन न करने से ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है।

खासकर इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली दवाइयां लेने वाले लोगों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का जोखिम बढ़ सकता है।

ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को केवल वजन कम करने के उद्देश्य से अपने स्तर पर फास्टिंग शुरू नहीं करनी चाहिए। उन्हें पहले डॉक्टर से सलाह लेकर यह तय करना चाहिए कि उनके लिए किस तरह का खान-पान और भोजन का समय सुरक्षित रहेगा।

नियमित दवा लेते हैं तो पहले डॉक्टर से पूछें

अगर कोई व्यक्ति ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की दवाइयां नियमित रूप से ले रहा है, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

फास्टिंग के कारण भोजन करने का समय बदल जाता है और ऐसे में कुछ दवाइयों के सेवन का समय भी प्रभावित हो सकता है। वहीं, कुछ दवाइयां भोजन के साथ लेना जरूरी होता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने पर कमजोरी या चक्कर जैसी समस्या भी हो सकती है।

इसलिए किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति या नियमित दवा लेने वाले लोगों के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करना सही नहीं माना जाता। वजन कम करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे सुरक्षित तरीके से करना उससे भी ज्यादा जरूरी है।

नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्टों और अध्ययनों में सामने आई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या नियमित दवा के मामले में फास्टिंग शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लें।


दून पुलिस का शराब तस्करों पर शिकंजा, चार आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर अवैध शराब और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ दून पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में ऋषिकेश और पटेलनगर थाना क्षेत्रों में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पांच पेटी से अधिक अवैध देसी शराब बरामद की गई। वहीं, शराब तस्करी में इस्तेमाल टाटा ऐस (छोटा हाथी) वाहन को सीज कर दिया गया।

एसएसपी दून ने सभी अधीनस्थ अधिकारियों को अपने-अपने थाना क्षेत्रों में मादक पदार्थों और अवैध शराब की तस्करी में लिप्त आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों के अनुपालन में पुलिस टीमों द्वारा लगातार चेकिंग और कार्रवाई की जा रही है।

ऋषिकेश में तीन आरोपी गिरफ्तार

कोतवाली ऋषिकेश की अलग-अलग टीमों ने 15 सितंबर 2026 को चेकिंग के दौरान पुराने रेलवे स्टेशन गेट, डाकघर आईडीपीएल के सामने और परशुराम चौक से तीन आरोपियों को अवैध शराब की तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोबिन कुमार पुत्र नरेश कुमार, सौरब पुत्र रमेश कुमार और भोले पुत्र सुरेश के रूप में हुई है। तीनों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किया गया है। पुलिस ने शराब तस्करी में प्रयुक्त टाटा ऐस वाहन संख्या यूके-14-सीए-2855 को सीज कर दिया।

पुलिस के अनुसार, रोबिन कुमार के कब्जे से 27 ट्रेटा पैक माल्टा मसालेदार देसी शराब, सौरब के कब्जे से 35 ट्रेटा पैक माल्टा मसालेदार देसी शराब और भोले के कब्जे से 110 ट्रेटा पैक माल्टा देसी शराब बरामद हुई।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण:

रोबिन कुमार, निवासी 134 अवधूत मार्ग, वाल्मीकि नगर, ऋषिकेश, उम्र 40 वर्ष।
सौरब, निवासी तुलसी विहार कॉलोनी, हनुमान मंदिर के पास, श्यामपुर, ऋषिकेश, उम्र 25 वर्ष।
भोले, निवासी गोविंद नगर झुग्गी-झोपड़ी, परशुराम चौक, ऋषिकेश, उम्र 29 वर्ष।

पटेलनगर में 86 टेट्रा पैक शराब के साथ आरोपी गिरफ्तार

पटेलनगर पुलिस ने 15 सितंबर 2026 को मुखबिर की सूचना पर महाराणा प्रताप ग्राउंड, आईएसबीटी पटेलनगर के पास से अमित पुत्र मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 86 टेट्रा पैक देसी मसालेदार शराब बरामद की गई।

आरोपी अमित, निवासी टर्नर रोड, लेन नंबर-1, क्लेमनटाउन, उम्र 38 वर्ष के खिलाफ थाना पटेलनगर में मु0अ0सं0-639/2026, धारा 60 आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किया गया है।

इस कार्रवाई में दून पुलिस ने ऋषिकेश और पटेलनगर क्षेत्र से कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 258 ट्रेटा पैक देसी शराब बरामद की है।


बांग्लादेश में अवामी लीग के 7 बड़े नेताओं को फांसी की सजा

2024 के छात्र आंदोलन में हिंसा भड़काने और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के आरोप में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-2 ने सुनाया फैसला

ढाका। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-2 ने मंगलवार को प्रतिबंधित अवामी लीग के सात वरिष्ठ नेताओं को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई। अदालत ने इन नेताओं को 2024 में छात्र नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने, उसका समर्थन करने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश देने से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया। सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चला।

बड़े नेताओं को सुनाई गई फांसी की सजा

तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मोहम्मद नजरुल इस्लाम चौधरी ने की। मौत की सजा पाने वालों में अवामी लीग के महासचिव और पूर्व सड़क परिवहन मंत्री ओबैदुल कादेर, संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम और पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात शामिल हैं।

इसके अलावा जुबो लीग के अध्यक्ष शेख फजले शम्स परश, महासचिव मैनुल हुसैन खान निखिल, बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष साद्दाम हुसैन और महासचिव शेख वली आसिफ एनान को भी ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान सातों आरोपियों की ओर से सरकार द्वारा नियुक्त बचाव पक्ष के वकील अदालत में मौजूद रहे।

यह पूरा मामला 2024 में हुए छात्र नेतृत्व वाले प्रदर्शनों से जुड़ा है। इन्हीं प्रदर्शनों को ‘जुलाई विद्रोह’ के नाम से जाना गया और बाद में इसी आंदोलन ने शेख हसीना की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था।

फरवरी से शुरू हुई थी सुनवाई

ट्रिब्यूनल ने 22 जनवरी को सातों आरोपियों के खिलाफ सात आरोप तय किए थे। इसके बाद 17 फरवरी से मामले की सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश जारी किए, भड़काऊ बयान दिए और ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया, जहां हिंसा की योजनाओं पर चर्चा हुई।

आरोपियों पर हथियारबंद हमलों, व्यापक दमन और अलग-अलग स्थानों पर मीडिया को नियंत्रित करने के प्रयासों में शामिल होने के भी आरोप लगाए गए। अभियोजन पक्ष के मुताबिक इन गतिविधियों के चलते हत्या, हत्या के प्रयास और देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई।

5 अगस्त 2024 को सत्ता से बाहर हुई थीं शेख हसीना

छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुए प्रदर्शन ने बांग्लादेश की तत्कालीन सरकार के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया था। आखिरकार 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा और वह बांग्लादेश से भारत चली गईं। इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं।

नवंबर 2025 में इसी ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी छात्र आंदोलनों के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी। ट्रिब्यूनल ने हसीना को ‘सुपीरियर कमांड रिस्पॉन्सिबिलिटी’ के सिद्धांत के तहत दोषी माना था और कहा था कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल की अनुमति दी।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के अनुमान के अनुसार, 15 जुलाई से 5 अगस्त 2024 के बीच प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी।

हसीना की सजा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठे सवाल

शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठे थे। कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने मुकदमे की निष्पक्षता और अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई थी।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि मुकदमे और सजा की प्रक्रिया से न्याय सुनिश्चित नहीं हुआ। वहीं ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी निष्पक्ष सुनवाई को लेकर सवाल उठाए थे। संगठन ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई थी कि हसीना को अपनी पसंद के वकील के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला।

इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की स्थापना शेख हसीना सरकार ने वर्ष 2010 में 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए मानवता के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए की थी। हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने ट्रिब्यूनल के कानून में बदलाव किए। इन संशोधनों के तहत राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े संगठनों के खिलाफ भी कार्रवाई का अधिकार दिया गया।

अवामी लीग नेताओं पर बड़ी संख्या में मामले

शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद अवामी लीग के नेताओं, मंत्रियों, सांसदों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से कई मामलों में अभी सुनवाई शुरू नहीं हुई है।

इस बीच शेख हसीना ने पिछले महीने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के लिए दृढ़ हैं और देश को ‘सही रास्ते’ पर लाना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि जेल जाने या मौत की सजा का खतरा उन्हें पीछे नहीं हटा सकता।


तमिलनाडु में सीएम विजय की टिप्पणी को लेकर विवाद, डीएमके के ए राजा समेत तीन नेताओं पर केस

तमिलनाडु। मुख्यमंत्री विजय को लेकर तमिलनाडु की सियासत में विवाद बढ़ता जा रहा है। हालिया पार्टी प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणी करने के आरोप में डीएमके के वरिष्ठ नेता ए राजा, पीके सेकर बाबू और विधायक वसंतम कार्तिकेयन के खिलाफ पुलिस ने अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की।

पुलिस के अनुसार, तीनों नेताओं के खिलाफ 12 सितंबर को कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर अलग-अलग थानों में शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की गई है।

डीएमके के हार्बर विधायक और चेन्नई ईस्ट जिला सचिव पीके सेकर बाबू के खिलाफ बी1 नॉर्थ बीच पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, मुख्यमंत्री के खिलाफ पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कथित अपमानजनक टिप्पणी करने की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

सैदापेट पुलिस ने डीएमके नेता ए राजा के खिलाफ टीवीके पदाधिकारी कार्तिक की शिकायत पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान राजा ने ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आरएन निर्मल कुमार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

राजा ने इस मामले में सत्तारूढ़ टीवीके को चुनौती देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के योगदान और आपातकाल के दौरान MISA के तहत उनकी गिरफ्तारी को स्वीकार किया है।

कलकुरिची पुलिस ने ऋषिवंधियम से डीएमके विधायक वसंतम कार्तिकेयन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। उन पर मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।

दरअसल, डीएमके ने मुख्यमंत्री विजय की विधानसभा में की गई उन टिप्पणियों के विरोध में राज्यभर में प्रदर्शन किए थे, जिनमें उन्होंने एमके स्टालिन की आपातकाल के दौरान MISA के तहत हिरासत का जिक्र किया था। विजय ने डीएमके पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए स्टालिन की गिरफ्तारी का उल्लेख किया था। इस दौरान उन्होंने जबड़े से इशारा भी किया था, जिस पर विधानसभा में डीएमके सदस्यों ने तत्काल आपत्ति जताई थी।

इसके बाद ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आरएन निर्मल कुमार ने विधानसभा में मुख्यमंत्री की टिप्पणी का समर्थन किया। उन्होंने स्टालिन के 1975-77 के आपातकाल के दौरान MISA के तहत गिरफ्तार किए जाने के लंबे समय से चले आ रहे दावे पर सवाल उठाया।

मंत्री ने कहा था कि स्टालिन के MISA बंदी होने को साबित करने वाला कोई आधिकारिक हिरासत आदेश उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया था कि अगर स्टालिन को MISA के तहत गिरफ्तार किया गया था तो उस गिरफ्तारी का आधिकारिक आदेश कहां है। निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि डीएमके इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर स्टालिन को राजनीतिक शहीद के तौर पर प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है।


पत्नी की हत्या के लिए शिक्षक ने दी साढ़े तीन लाख की सुपारी, प्रिंटर देखने के बहाने घर में घुसे हमलावरों ने चलाईं छह गोलियां

दिल्ली। नंगली एक्सटेंशन की गली नंबर-1 में रविवार सुबह पत्नी की हत्या की साजिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी स्कूल के टीजीटी कंप्यूटर शिक्षक संदीप ने अपनी पत्नी संध्या की हत्या के लिए अपने बचपन के दोस्त अरविंद को साढ़े तीन लाख रुपये की सुपारी दी। इसके बाद अरविंद ने अपने भाई दीपक और उसके दोस्त आकाश को वारदात के लिए भेजा।

पुलिस के अनुसार, रविवार सुबह करीब छह बजे दीपक और आकाश प्रिंटर देखने के बहाने संध्या के घर में दाखिल हुए। दोनों करीब 40 मिनट तक प्रिंटर देखने और उसे खोलकर जांच करने के बहाने घर में रुके रहे। इसके बाद जब संध्या दोनों के लिए पानी लेकर आई तो उन्होंने उस पर गोलियां चला दीं। हमलावरों ने कुल छह गोलियां चलाईं, जिनमें से तीन संध्या को लगीं।

गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल संध्या को अस्पताल में भर्ती कराया। समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बच गई और फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

पुलिस ने जांच के दौरान हमलावरों की पहचान कर मंगलवार को दीपक और आकाश को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, संध्या के पति संदीप को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, संदीप और संध्या की शादी करीब तीन वर्ष पहले हुई थी और दोनों नंगली एक्सटेंशन की गली नंबर-1 में रहते हैं। संदीप सरकारी स्कूल में टीजीटी कंप्यूटर शिक्षक है।

पुलिस के अनुसार, साजिश में शामिल संदीप का बचपन का दोस्त अरविंद फरार है। आरोप है कि संदीप ने पत्नी की हत्या के लिए अरविंद को साढ़े तीन लाख रुपये की सुपारी दी थी, जिसके बाद अरविंद ने अपने भाई दीपक और उसके दोस्त आकाश को वारदात के लिए भेजा।

पुलिस अब संदीप और फरार अरविंद की भूमिका, सुपारी की रकम के लेनदेन और हत्या की साजिश तैयार करने से लेकर हमलावरों को भेजने तक की पूरी कड़ी की जांच कर रही है। अरविंद की गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।


पटना में छात्रों का प्रदर्शन, अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे अभ्यर्थी

दरोगा भर्ती परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने और बीपीएससी 70वीं परीक्षा में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग

रोमित के परिजनों ने भी सरकार से लगाई न्याय की गुहार

बिहार। पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी मांगों को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर उतर आए। बिहार दरोगा भर्ती, बीपीएससी 70वीं परीक्षा और बीएसएससी समेत विभिन्न परीक्षाओं से जुड़ी 13 सूत्री मांगों को लेकर छात्रों ने गांधी मैदान से राजभवन की ओर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जेपी गोलंबर के पास पुलिस और सीआरपीएफ ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कुछ अभ्यर्थी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई।

जेपी गोलंबर पर पुलिस ने रोका मार्च

गांधी मैदान से निकला छात्रों का मार्च जेपी गोलंबर पहुंचा तो पुलिस ने आगे का रास्ता बंद कर दिया। मौके पर पटना पुलिस के साथ सीआरपीएफ के जवान भी तैनात किए गए थे। बैरिकेडिंग के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी उस पर चढ़कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इसके बाद कुछ छात्र एग्जीबिशन रोड होते हुए डाक बंगला चौराहे की तरफ बढ़ने लगे, लेकिन वहां भी पुलिस ने उन्हें रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई थी।

दरोगा भर्ती परीक्षा रद्द करने की मांग

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने 1799 पदों के लिए आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है और मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू कर रही है। अभ्यर्थियों की मांग है कि जब परीक्षा की अनियमितताओं की जांच चल रही है तो इसे रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए।

छात्रों ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा में बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ी हुई, लेकिन इसके बावजूद परीक्षा को रद्द नहीं किया गया। इसके अलावा बीएसएससी की परीक्षा से जुड़े मुद्दे भी प्रदर्शनकारियों की मांगों में शामिल रहे।

‘सिर्फ जांच का आश्वासन, कार्रवाई नहीं’

अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं पर सरकार की ओर से लगातार जांच का भरोसा दिया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और अनियमितताओं के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी 13 सूत्री मांगों पर सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

रोमित के परिजन भी आंदोलन में पहुंचे

दरोगा भर्ती के अभ्यर्थी रोमित की आत्महत्या के बाद उनके परिजन भी मंगलवार को छात्रों के आंदोलन में शामिल होने पटना पहुंचे। रोमित की मां और भाई ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से न्याय की गुहार लगाई। परिजनों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को खत्म करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।

परिजनों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर रोक लगाना जरूरी है, ताकि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आयोजित की जानी चाहिए।

‘आज मैंने अपना बेटा खोया, कल बिहार कई बेटे न खो दे’

रोमित की मां ने भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्होंने अपना बेटा खो दिया है, लेकिन वह नहीं चाहतीं कि बिहार के किसी दूसरे परिवार को भी ऐसा दर्द सहना पड़े। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार और कथित धांधली पर रोक लगाना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी और छात्र को इतना बड़ा कदम न उठाना पड़े।

परिजनों के मुताबिक रोमित पढ़ाई में काफी होनहार था और उसने नेट की परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। उसका सपना दरोगा बनने का था। परिवार का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार तनाव और मानसिक दबाव के बीच रोमित ने अपनी जान दे दी।

परिवार के लिए एक करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी की मांग

आंदोलन कर रहे दरोगा भर्ती के अभ्यर्थियों ने रोमित के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि रोमित की मौत ने प्रतियोगी परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की कि छात्रों की समस्याओं और भर्ती परीक्षाओं में सामने आ रही कथित गड़बड़ियों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी 13 सूत्री मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


पीएम आवास के मकान का आवंटन कराने के नाम पर 6 हजार की रिश्वत लेते आउटसोर्सिंग कर्मचारी गिरफ्तार

मेरठ। प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान का आवंटन कराने के नाम पर रिश्वत मांगना आवास विकास के आउटसोर्सिंग कर्मचारी को भारी पड़ गया। मेरठ एंटीकरप्शन यूनिट की टीम ने छह हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए अभिनव शर्मा को गिरफ्तार किया है।

आरोप है कि अभिनव शर्मा प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान के आवंटन के बदले छह हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। शिकायत मिलने के बाद एंटीकरप्शन टीम ने मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने पर टीम ने जाल बिछाया और रिश्वत लेते हुए अभिनव शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपित की गिरफ्तारी के बाद एंटीकरप्शन यूनिट की ओर से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


मुख्यमंत्री धामी ने की चारधाम यात्रा-2026 की व्यवस्थाओं की समीक्षा

यात्रियों की सुरक्षा, सुगम यात्रा एवं बेहतर यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश

14 सितम्बर तक 50.56 लाख श्रद्धालु कर चुके हैं दर्शन, 66.07 लाख यात्रियों का पंजीकरण

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चारधाम यात्रा-2026 की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने यात्रा से जुड़े जनपदों के जिलाधिकारियों से यात्रा मार्गों, यातायात, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यात्रा मार्गों पर मौसम एवं भूस्खलन की स्थिति की निरंतर निगरानी करने, संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था रखने तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए होल्डिंग एरिया में आवश्यक सुविधाएं सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था ऐसी हो कि श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने यमुनोत्री धाम में भीड़ एवं आवागमन को देखते हुए धाम से लगभग 500 मीटर पहले दूसरा घोड़ा पड़ाव विकसित करने, डंडी-कंडी सेवाओं को व्यवस्थित करने तथा खरसाली से वैकल्पिक मार्ग के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने पैदल मार्ग पर यात्रियों और घोड़े-खच्चरों की आवाजाही सुव्यवस्थित रखने तथा सूर्यकुंड क्षेत्र में प्रभावी भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने घोड़े-खच्चरों के संचालन में निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने, पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। केदारनाथ पैदल मार्ग के चीरबासा एवं भैरव ग्लेशियर क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर यात्रियों, घोड़े-खच्चरों एवं डंडी-कंडी की आवाजाही व्यवस्थित रखी जाए
आवश्यकता पड़ने पर तत्काल रेस्क्यू की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने यमुनोत्री पैदल मार्ग के चौड़ीकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा गंगोत्री मार्ग पर चौड़ीकरण एवं गड्ढामुक्त करने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने यात्रा मार्गों के भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की निरंतर निगरानी करने तथा स्यानाचट्टी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने ज्योतिर्मठ – मारवाड़ी मार्ग पर प्रभावी यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने तथा मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में उसे शीघ्र खोलने के लिए आवश्यक मशीनरी की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने चारों धामों में मौसम की स्थिति को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए अलाव सहित आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से श्री केदारनाथ और श्री बदरीनाथ यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन तथा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर स्वच्छता की बेहतर व्यवस्था रखने तथा घोड़े-खच्चरों की लीद का समुचित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था प्रभावी बनाए रखने को कहा।

मुख्यमंत्री ने मोबाइल नेटवर्क की समस्या वाले क्षेत्रों में आपातकालीन संचार व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों एवं दूरसंचार कंपनियों के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने यात्रा मार्गों पर पर्याप्त शौचालय, पेयजल, विद्युत, प्रकाश एवं शटल सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा शौचालयों की नियमित सफाई और औचक निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने हेली सेवाओं के टिकट निर्धारित दरों पर ही उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्धारित दर से अधिक वसूली अथवा अनधिकृत टिकट बिक्री की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर हेली सेवाओं का संचालन किया जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों एवं संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा से किसी भी स्तर पर समझौता न हो। यात्रा मार्गों एवं संवेदनशील स्थलों की निरंतर निगरानी करते हुए किसी भी समस्या की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि चारधाम यात्रा-2026 के लिए अब तक 66,07,749 यात्रियों का पंजीकरण हो चुका है। 14 सितम्बर 2026 की शाम 7 बजे तक 50,56,160 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इनमें यमुनोत्री में 7,08,407, गंगोत्री में 7,89,773, श्री केदारनाथ में 14,98,544, श्री बदरीनाथ में 17,36,619 तथा श्री हेमकुंड साहिब में 3,22,817 श्रद्धालु शामिल हैं।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, गृह सचिव शैलेश बगौली सहित शासन, प्रशासन एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


पुरानी पेंशन प्रकरण को लेकर मातृ-शिशु एवं कल्याण संगठन का शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिला

देहरादून। मातृ-शिशु एवं कल्याण संगठन की महिला कार्मिकों के पुरानी पेंशन योजना (OPS) से जुड़े प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (NOPRUF), उत्तराखंड के प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने करीब 86 एएनएम महिला कार्मिकों की पेंशन संबंधी समस्या मुख्यमंत्री के सामने रखी।

शिष्टमंडल ने बताया कि संबंधित महिला कार्मिकों की नियुक्ति वर्ष 2004 में जारी विज्ञप्ति के आधार पर वर्ष 2006 में हुई थी, लेकिन उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पाया। वहीं समान नियुक्ति और सेवा परिस्थितियों में कार्यरत स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य विभागों के कार्मिकों को पुरानी पेंशन का लाभ मिल रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने इसे पेंशन से जुड़ी गंभीर विसंगति बताते हुए मामले का नियमानुसार परीक्षण कर पात्र कार्मिकों को OPS का लाभ देने की मांग की।

शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष कहा कि कर्मचारियों की मांग केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। NOPRUF ने कहा कि वर्षों तक सरकारी सेवा करने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन केवल निवेश से मिलने वाला रिटर्न नहीं हो सकती।

संगठन ने कहा कि कर्मचारियों के बुढ़ापे की सुरक्षा बाजार के उतार-चढ़ाव या पेंशन कॉर्पस पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। NOPRUF ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा— “NPS नहीं, UPS नहीं, केवल OPS।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिष्टमंडल की बात गंभीरता से सुनी और संबंधित सचिव को प्रकरण की तत्काल आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता को प्रतिनिधिमंडल ने सकारात्मक बताया।

शिष्टमंडल ने उम्मीद जताई कि करीब 86 महिला कार्मिकों की पेंशन संबंधी विसंगति का जल्द न्यायोचित समाधान होगा।

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर NOPRUF ने आगामी कार्यक्रम भी निर्धारित किए हैं। इसके तहत 1 अक्टूबर 2026 को रुद्रप्रयाग में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर रैली और 2 नवंबर 2026 को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच किया जाएगा।

NOPRUF ने प्रदेश के अधिकारी, शिक्षक और कार्मिकों से इन कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है।

शिष्टमंडल में हीरा ऐठानी, पार्वती खेतवाल, हरि बिष्ट, बिनाव बिष्ट, अमिता बिष्ट, लक्ष्मी बिष्ट, मधु रावत और सुजाता समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।


गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइक राइडर को टक्कर मारने का आरोपी गिरफ्तार, दौसा से दबोचा

गुरुग्राम। गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइक राइडर सिया की बाइक को कार से टक्कर मारने के मामले में फरार चल रहे आरोपी कार चालक कल्याण बैंसला को गुरुग्राम पुलिस ने राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। मामले में हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

गुरुग्राम पुलिस ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए थाना सेक्टर-56 में अभियोग दर्ज किया था। शुरुआत में लापरवाही से वाहन चलाने के संबंध में बीएनएस की धारा 281 और 125 के तहत केस दर्ज किया गया था।

घटना से जुड़े वीडियो फुटेज का गहन विश्लेषण करने पर पुलिस के सामने आया कि कार चालक ने सिया की बाइक की तरफ जानबूझकर कार मोड़ी थी। इसके बाद मामले में बीएनएस की धारा 109 यानी हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी गई।

13 सितंबर को हुई घटना के बाद कल्याण बैंसला फरार हो गया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर तलाश शुरू की और तीन विशेष टीमों का गठन किया गया। अब राजस्थान के दौसा से गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से घटना को लेकर पूछताछ करेगी।

सिया अपनी Aprilia RS 457 बाइक से अन्य राइडरों के साथ जा रही थीं। घटना का वीडियो इंस्टाग्राम पर प्रसारित हुआ था। बाद में सिया ने भी वीडियो जारी कर कार चालक पर जानबूझकर टक्कर मारने का आरोप लगाया था।

सिया के अनुसार, कार चालक ने पहले उन्हें रुकने का इशारा किया था। जब वह नहीं रुकीं तो चालक ने कार उनकी बाइक की तरफ मोड़कर टक्कर मार दी।

पुलिस के अनुसार मामले में जोड़ी गई बीएनएस की धारा 109 में 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर घटना के पूरे क्रम और वीडियो फुटेज से सामने आए तथ्यों की जांच आगे बढ़ाएगी।


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