Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

उत्तराखंड में वोटर लिस्ट को लेकर कांग्रेस का बड़ा ऐलान, वैध मतदाता का नाम कटा तो होगा सीधा ऐक्शन

Category Archives: राजनीति

उत्तराखंड में वोटर लिस्ट को लेकर कांग्रेस का बड़ा ऐलान, वैध मतदाता का नाम कटा तो होगा सीधा ऐक्शन

देश के चुनाव आयोग को ज्ञानेश कुमार ने बना दिया पंगु- सूर्यकांत धस्माना

देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश में किसी भी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाया गया तो पार्टी इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेस ने कहा कि ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से घेराव, प्रदर्शन और अन्य आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने यह बात कही। उन्होंने एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित चुनाव आयोग से जुड़ी खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। धस्माना ने कहा कि रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों को बल मिलता है।

धस्माना ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त केंद्र सरकार के प्रभाव में काम कर रहे हैं और भाजपा व आरएसएस के एजेंडे के अनुरूप लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावों का जिक्र करते हुए दावा किया कि बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और बाद में कई नाम वापस जोड़े गए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्रदेश कांग्रेस ने एसआईआर के दौरान कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीआरसी पुरुषोत्तम को कई बार प्रमाणों के साथ शिकायतें दी हैं। कांग्रेस का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते उसके पारंपरिक समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। धस्माना ने कहा कि यदि किसी वैध मतदाता का नाम हटाया गया तो कांग्रेस इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेगी।

तिलक राज बेहड़ पर हमले को लेकर भी भाजपा पर निशाना

धस्माना ने ऊधमसिंह नगर के किच्छा में पूर्व मंत्री एवं किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ पर हुए हमले की घटना को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पूर्व विधायक के नेतृत्व में भाजपा से जुड़े अराजक और आपराधिक तत्वों ने विधायक पर हमला किया।

धस्माना ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा उत्तराखंड को बिहार और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कथित ‘जंगल राज’ की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस तरह की घटनाओं को स्वीकार नहीं करेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि किच्छा नगर निकाय चुनाव में संभावित हार को देखते हुए भाजपा बौखलाहट में इस तरह की कार्रवाई कर रही है। कांग्रेस नेता ने घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।


कांग्रेस ने अग्निवीर योजना पर सरकार को घेरा, युवाओं के भविष्य को लेकर उठाए सवाल

गणेश गोदियाल बोले- युवाओं को चार साल की नौकरी नहीं, पक्की नौकरी चाहिए

देहरादून। कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना को लेकर सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड जैसे सैन्य बहुल राज्य में इस योजना का युवाओं और सैन्य परिवारों पर विशेष प्रभाव पड़ा है। कांग्रेस ने सरकार से अग्निवीरों के भविष्य और चार वर्ष की सेवा के बाद रोजगार की ठोस व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित दीपोत्सव को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई और बेरोजगारी के बीच आम लोगों के लिए दो वक्त का चूल्हा जलाना मुश्किल हो रहा है, ऐसे समय में हजारों टन तेल खर्च कर दीप जलाने की होड़ उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जनता सरकार के कार्यों से खुश होकर दीप जलाती तो स्थिति अलग होती।

गणेश गोदियाल ने अग्निवीर योजना को युवाओं के स्थायी रोजगार के अवसरों को सीमित करने वाली व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा सेना में स्थायी नौकरी की उम्मीद लेकर वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन अग्निवीर व्यवस्था में अधिकांश युवाओं का सैन्य करियर चार वर्ष बाद समाप्त हो जाता है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती होने वाला युवा चार वर्ष बाद करीब 21-22 वर्ष की उम्र में दोबारा रोजगार की तलाश में पहुंच जाता है तो उसके भविष्य और परिवार की आर्थिक सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।

उन्होंने नियमित सैनिकों और अग्निवीरों के बीच सेवा अवधि, वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा में अंतर का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस का कहना है कि देश की सुरक्षा के लिए समान जोखिम उठाने वाले जवानों के लिए दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा पर स्पष्ट नीति होनी चाहिए।

प्रीतम सिंह ने कहा कि अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सैन्य परंपरा गौरवशाली रही है और पहाड़ी क्षेत्रों के हजारों परिवार पीढ़ियों से सेना में रोजगार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा चार वर्ष की नौकरी नहीं, बल्कि स्थायी और सुरक्षित रोजगार चाहते हैं।

प्रीतम सिंह ने पेंशन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि सेवा से बाहर होने वाले 75 प्रतिशत युवाओं के लिए रोजगार का स्थायी रोडमैप क्या है और सरकार उनके पुनर्वास की किस तरह व्यवस्था करेगी।

डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि केवल अलग-अलग विभागों में आरक्षण या प्राथमिकता देने की घोषणा पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि वास्तव में कितने अग्निवीरों को सेवा समाप्त होने के बाद स्थायी रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सैन्य बाहुल्य राज्य है और यहां सेना से जुड़ाव परिवारों की भावनाओं से भी जुड़ा है। उनके अनुसार सेना की भर्ती को केवल रोजगार के आंकड़े सुधारने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने नियमित सेना भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने, रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने और युवाओं को पर्याप्त भर्ती अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही उत्तराखंड के लिए विशेष भर्ती नीति और सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए अलग पैकेज की मांग भी उठाई गई।

सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने दावा किया कि पहले प्रतिवर्ष करीब 80 हजार युवाओं को सेना में रोजगार मिलता था, जो अब घटकर करीब 47 हजार रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि इनमें से 25 प्रतिशत युवाओं को ही आगे नियमित सेवा में लिया जाता है तो करीब 12 हजार युवाओं को स्थायी सेवा मिलती है। उन्होंने इस संबंध में सरकार से आधिकारिक आंकड़े स्पष्ट करने की मांग की।

कांग्रेस ने सरकार के सामने कई सवाल रखे। इनमें चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए रोजगार की व्यवस्था, अब तक स्थायी सरकारी रोजगार पाने वाले अग्निवीरों की संख्या, सेना में रिक्त पदों को भरने की समयसीमा और उत्तराखंड के कितने युवाओं को अग्निवीर योजना के तहत भर्ती मिली, जैसे मुद्दे शामिल रहे।

कांग्रेस ने यह भी पूछा कि क्या सरकार अग्निवीर योजना की स्वतंत्र समीक्षा कराने और अग्निवीरों को भविष्य में नियमित सैनिकों के समान सम्मानजनक सेवा-सुरक्षा देने पर विचार करेगी।

पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह समेत अन्य कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।


6000 बीघा सरकारी जमीन को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, 90 साल की लीज पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री धामी के जन्मदिन पर कांग्रेस का बड़ा हमला, सरकारी जमीनों को निजी हाथों में देने का लगाया आरोप

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिवस के अवसर पर कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को सरकारी जमीनों और संपत्तियों को निजी हाथों में दिए जाने के आरोपों को लेकर पत्रकार वार्ता आयोजित की। देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता को महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी, प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी और प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।

महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जल्द ही रुद्रप्रयाग जिले के लोक निर्माण विभाग के तीन महत्वपूर्ण निरीक्षण भवनों—दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी—को कम कीमत पर अपने चहेतों को नीलाम करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से प्रदेश की हजारों बीघा जमीन और संपत्तियों को 90 साल तक के लिए निजी हाथों में सौंपने जा रही है।

कांग्रेस के अनुसार, यूआईआईडीबी ने नैनीताल के पटुवा डांगर की 14 एकड़ भूमि पर प्रीमियम रिजॉर्ट विकसित करने के साथ ही हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश के लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड के तहत सितारा होटल के रूप में विकसित करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं।

डॉ. गोगी ने कहा कि सरकार के कथित फैसले को जनता तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस ने प्रदेशभर में पत्रकार वार्ताएं आयोजित की हैं। उन्होंने कहा कि रुद्रप्रयाग जिले के दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी स्थित निरीक्षण भवन ऐसे क्षेत्रों में हैं, जहां सड़क संपर्क और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि आसपास भूमि की उपलब्धता सीमित है। ऐसे में कांग्रेस ने इन संपत्तियों को केदार घाटी की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए इन्हें निजी हाथों में सौंपे जाने का विरोध किया।

प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब तक यूआईआईडीबी को सरकारी विभागों की करीब 1200 एकड़ यानी 6000 बीघा से अधिक भूमि सौंपे जाने से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दे चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि कई हजार बीघा भूमि के प्रस्ताव अभी मुख्यमंत्री की अनुमति के लिए लंबित हैं।

भंडारी ने कहा कि अब तक जारी तीन निविदाओं की शर्तों से कांग्रेस को आशंका है कि सरकार इन जमीनों और संपत्तियों को राज्य से बाहर के बड़े निजी समूहों को आसान शर्तों पर देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 90 साल की लीज अवधि पूरी होने के बाद संबंधित लीजधारक मालिकाना हक का दावा कर सकते हैं।

प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों के अलावा लोक निर्माण विभाग के करीब 25 निरीक्षण भवनों और पर्यटन विभाग के कुछ होटलों को भी जल्द निजी हाथों में लीज पर देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में मंत्रिमंडल ने राज्य की जमीनों और संपत्तियों को यूआईआईडीबी के माध्यम से निजी हाथों में देने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया था।

कांग्रेस नेताओं ने मसूरी के हाथीपांव स्थित पार्क एस्टेट का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में करीब 142 एकड़ सरकारी भूमि को ‘राजस एरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड’ को 15 साल की लीज पर दिया गया था। कांग्रेस ने भूमि के बाजार मूल्य और लीज राशि को लेकर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2018 में तत्कालीन सरकार के दौरान भू-कानून में किए गए बदलावों के बाद राज्य की निजी जमीनों की बिक्री का रास्ता आसान हुआ। पार्टी ने दावा किया कि बाद में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भी औद्योगिक प्रयोजन, होटल और शिक्षण संस्थानों आदि के लिए खरीदी गई भूमि की प्लॉटिंग कर बिक्री का रास्ता खोल दिया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि निजी जमीनों के बाद अब सरकार की नजर राज्य के महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित सरकारी जमीनों और संपत्तियों पर है। पार्टी ने कहा कि वह सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में दिए जाने के खिलाफ प्रदेशभर में आंदोलन करेगी।

कांग्रेस ने बताया कि रुद्रप्रयाग जिला कांग्रेस कार्यकर्ता दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी स्थित तीनों संपत्तियों पर रक्षा सूत्र बांधकर इन्हें निजी हाथों में दिए जाने के विरोध में आंदोलन शुरू करेंगे। पार्टी ने कहा कि वह केदार भूमि की जमीनों और संपत्तियों को निजी हाथों में जाने से रोकने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।


7000 बीघा सरकारी जमीन पर घमासान, कांग्रेस ने धामी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री नाम से, प्रॉपर्टी डीलर काम से- करन माहरा

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की चार्जशीट कमेटी ने प्रदेश की सरकारी और बेशकीमती जमीनों के कथित प्रबंधन को लेकर धामी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। होटल इन्द्रलोक में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य की बहुमूल्य भूमि को निजी और कॉरपोरेट हितों के लिए इस्तेमाल कर रही है। पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा सहित कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में प्रदेश की बेशकीमती सरकारी भूमि को चुनिंदा लोगों और कंपनियों के हित में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर सरकारी संपत्तियों को कम कीमत पर निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे राज्य के हितों को नुकसान पहुंच रहा है।

चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड के माध्यम से करीब 7,000 बीघा सरकारी भूमि को निजी निवेशकों को दीर्घकालीन पट्टे पर देने की तैयारी की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिकों के लिए भूमि खरीद की सीमा निर्धारित है, तो चुनिंदा कॉरपोरेट कंपनियों को हजारों बीघा सरकारी जमीन लंबे समय के लिए देने का आधार क्या है।

माहरा के मुताबिक, सरकार ने उद्यान विभाग, आलू परियोजना, प्रजनन उद्यान सहित विभिन्न विभागों की खाली अथवा कम उपयोग वाली करीब 7,000 बीघा भूमि को चिह्नित कर भूमि बैंक तैयार किया है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित व्यवस्था में जमीन को 90 वर्ष तक की दीर्घकालीन लीज पर देने, होटल, रिसॉर्ट, विला, व्यावसायिक टाउनशिप, वेलनेस सेंटर और निजी स्कूल जैसी परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।

उन्होंने यह भी दावा किया कि लीज पर ली गई जमीन को आगे उप-पट्टे पर देने और बैंकों के पास बंधक रखकर ऋण लेने की अनुमति दिए जाने का प्रावधान है। कांग्रेस ने इन प्रावधानों को बड़े कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में बताया है। माहरा ने कंपनियों की पात्रता से जुड़ी शर्तों, भुगतान व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को लेकर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि व्यावसायिक उपयोग के लिए दी जाने वाली जमीन का लीज किराया कृषि भूमि के सर्किल रेट के आधार पर तय किया जा रहा है। उनका कहना था कि व्यावसायिक और कृषि भूमि की दरों में अंतर के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है और निजी कंपनियों को जमीन अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल सकती है।

माहरा ने इसे राज्य के भू-कानून की मूल भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि एक ओर आम लोगों के लिए भूमि खरीद पर सीमाएं निर्धारित की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े कॉरपोरेट समूहों को हजारों बीघा सरकारी जमीन लंबे समय के लिए देने की तैयारी है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में लीज की जमीन को स्थायी स्वामित्व में बदलने का रास्ता भी खुल सकता है। कांग्रेस ने मांग की कि ऐसी जमीनों पर स्थानीय युवाओं, ग्राम पंचायतों और सहकारी संस्थाओं के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट को लेकर भी उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर जल, जंगल और जमीन से जुड़े स्थानीय अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों को कॉरपोरेट घरानों के हित में इस्तेमाल करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

आर्य ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला उठाते हुए कहा कि एशियाई विकास बैंक के ऋण से करोड़ों रुपये खर्च कर वहां पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं विकसित की गईं। कांग्रेस का आरोप है कि करीब 142 एकड़ क्षेत्र और विकसित सुविधाओं को 15 वर्ष के लिए निजी कंपनी को लगभग एक करोड़ रुपये वार्षिक शुल्क पर दिया गया।

कांग्रेस ने इस प्रक्रिया में टेंडर और कंपनियों के बीच संभावित कारोबारी संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि क्या टेंडर प्रक्रिया में वास्तविक और स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हुई थी। इसके साथ ही कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों में शामिल कुछ इकाइयां बाद में विजेता कंपनी की हिस्सेदार कैसे बनीं और क्या इस पूरे घटनाक्रम की सरकार अथवा संबंधित अधिकारियों ने जांच कराई।

जॉर्ज एवरेस्ट जाने वाली सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली के विवाद का भी कांग्रेस ने उल्लेख किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा था। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली की स्थिति कैसे बनी और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई या नहीं।

अस्पताल के लिए जमीन आवंटन निरस्त करने पर सवाल

चार्जशीट कमेटी के सदस्य मनोज रावत ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े भूमि आवंटन के एक मामले को उठाते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग को विश्वास में लिए बिना बड़े अस्पताल के लिए प्रस्तावित जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया गया।

रावत के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे और अस्पताल निर्माण के लिए करीब 23,137 वर्गमीटर यानी लगभग 5.7 एकड़ भूमि चिन्हित की गई थी। उनका आरोप है कि 13 दिसंबर 2024 के घटनाक्रम के बाद 25 फरवरी 2025 को स्वास्थ्य विभाग को पूर्व सूचना या जानकारी दिए बिना भूमि आवंटन रद्द कर दिया गया।

कांग्रेस ने इस मामले में संबंधित कंपनियों की पात्रता और वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। रावत ने आरोप लगाया कि भूमि आवंटन और विकास प्रक्रिया से जुड़ी कुछ कंपनियों के पास रियल एस्टेट या बुनियादी ढांचा विकास का पर्याप्त अनुभव नहीं था।

उन्होंने सिक्का डेवलपर्स से जुड़े कथित वित्तीय मामलों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि कंपनी के खिलाफ नोएडा प्राधिकरण की ओर से बड़ी राशि की वसूली के आदेश जारी किए जा चुके हैं। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि कंपनी से जुड़े कुछ मामलों में देश के अन्य राज्यों में भी कानूनी विवाद सामने आए हैं।

रावत ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी रूप से अयोग्य ठहराए जाने के बावजूद संबंधित कंपनी वित्तीय बोली के चरण तक पहुंची और उसे भूमि का अनंतिम आवंटन भी किया गया। कांग्रेस ने इसे समानता के अधिकार और निविदा नियमों के विपरीत बताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की।

पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने कहा कि सरकारी भूमि से जुड़े सभी फैसलों में पारदर्शिता, सार्वजनिक हित और स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पार्टी ने सरकार से भूमि आवंटन, लीज की शर्तों, टेंडर प्रक्रिया और संबंधित कंपनियों की पात्रता से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी और अमरजीत सिंह भी मौजूद रहे।


उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफा

हरीश रावत बोले- मेरे कारण कमजोर न हो पार्टी की लड़ाई

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हलचल बढ़ गई, जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान किया। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों में छापेमारी और बड़ी मात्रा में नकदी व आभूषण बरामद होने की खबरों के बीच रावत ने यह फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी भी निर्णय या गतिविधि का असर कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष पर पड़े।

हरीश रावत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट के माध्यम से अपने निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी सदस्य और कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब उन्होंने इन दोनों पदों से हटने की इच्छा जताई है।

रावत ने कहा कि वह फिलहाल कोई सरकारी पद नहीं संभाल रहे हैं, इसलिए सरकारी पद से इस्तीफे का सवाल नहीं उठता। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहते, जिससे पार्टी के संघर्ष को नुकसान पहुंचे।

ओएसडी के खिलाफ कार्रवाई पर रावत का बयान

ईडी की कार्रवाई 2016 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में बताई जा रही है। रावत ने अपने पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के खिलाफ लगे किसी भी गलत काम के आरोप से इनकार किया है।

उन्होंने कहा कि जीना उनके ओएसडी रह चुके हैं और पार्टी तथा सरकार में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। रावत ने उन्हें विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति से जुड़े होने के आधार पर उसके खिलाफ आरोपों को सही नहीं माना जा सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ जैसी कोई अनियमितता सामने आती है, तो उन्हें इस पर शर्मिंदगी होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस आरोप पर विश्वास नहीं करते।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी रखी अपनी बात

हरीश रावत ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उनके कार्यकाल में शीर्ष पदों पर भर्तियां कराने के साथ ही चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्र में भर्ती के लिए अलग-अलग बोर्ड बनाए गए थे।

उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में उनकी ओर से कोई गलती हुई है और उससे उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है, तो वह इसके लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगने को तैयार हैं।

रावत ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था।

यूकेएसएसएससी अध्यक्ष की नियुक्ति का किया बचाव

पूर्व मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति संबंधित व्यक्ति के पूर्व सेवा रिकॉर्ड और समाज के एक वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की सोच के आधार पर की गई थी।

रावत ने बताया कि इस नियुक्ति को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) से भी उन्हें सलाह मिली थी। उन्होंने कहा कि खंडूरी हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते रहे हैं।

रावत ने कहा कि किसी पद पर नियुक्त व्यक्ति भविष्य में गलत काम करेगा या नहीं, इसका अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि भर्ती और परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता राज्य की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ के समान है।

सबूत मिलने पर जांच एजेंसियों को देने की अपील

हरीश रावत ने कहा कि यदि किसी के पास इस बात का कोई ठोस प्रमाण है कि भर्ती या नियुक्तियों में उन्होंने किसी तरह का हस्तक्षेप किया था, तो वह प्रमाण केंद्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय या राज्य पुलिस को सौंपा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि जानबूझकर या अनजाने में उनकी किसी गलती से उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा है, तो वह इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं। रावत ने दोहराया कि यदि उनसे कोई चूक हुई है तो कानून के अनुसार उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को चुनावी माहौल से भी जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनाव नजदीक आते हैं तो जांच एजेंसियों की कार्रवाई के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जाती है। रावत ने कहा कि कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और वह नहीं चाहते कि उनके कारण इस संघर्ष की धार कमजोर हो।


नितिन नवीन के बयान पर गणेश गोदियाल का पलटवार, बोले- भाजपा को कांग्रेस को ज्ञान देने का अधिकार नहीं

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा पर ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता अब विभाजन और नफरत की राजनीति के झांसे में नहीं आएगी

देहरादून। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हल्द्वानी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से राहुल गांधी को लेकर दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने भाजपा पर धर्म, जाति और संप्रदाय के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को विभाजन की राजनीति पर ज्ञान देने का भाजपा नेताओं को कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

गोदियाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में आकर इस तरह की बयानबाजी करना भाजपा नेताओं की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने नफरत की राजनीति के खिलाफ देशभर में लंबी पदयात्राएं की हैं। कन्याकुमारी से कश्मीर और मणिपुर से मुंबई तक की यात्राओं के जरिए राहुल गांधी ने देश को जोड़ने और आपसी भाईचारा मजबूत करने का संदेश दिया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी देश में ‘मोहब्बत की दुकान’ की बात करते हैं, जबकि भाजपा कथित तौर पर ‘नफरत का बाजार’ चला रही है। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों को उनका अधिकार दिलाने के लिए जातिगत जनगणना की मांग करते हैं, तब भाजपा को उसमें भी देश के बंटवारे की राजनीति दिखाई देती है।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि नितिन नवीन हल्द्वानी में भाजपा सरकार की कथित विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का युवा बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है, महिलाएं सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग अब भी उठ रही है।

उन्होंने कहा कि इन गंभीर मुद्दों पर जवाब देने के बजाय भाजपा नेता कांग्रेस पर आरोप लगाकर जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने का प्रयास कर रहे हैं। गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड की जनता अब विभाजन और ध्रुवीकरण की राजनीति के झांसे में आने वाली नहीं है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा नेताओं से अपील की कि देवभूमि उत्तराखंड के शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल को राजनीतिक बयानबाजी के जरिए दूषित करने से बचें।


नफरत फैलाने वाली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन देवभूमि का माहौल खराब न करें- गणेश गोदियाल

राहुल गांधी पर नितिन नवीन के बयान से गरमाई सियासत, गणेश गोदियाल ने साधा भाजपा पर निशाना

हल्द्वानी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर हल्द्वानी में दिए गए बयान पर उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष के बयान की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा खुद धर्म, जाति और संप्रदाय के नाम पर राजनीति करती है और अब कांग्रेस पर देश को बांटने का आरोप लगा रही है।

गणेश गोदियाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में आकर इस तरह की विभाजनकारी बयानबाजी करना भाजपा नेतृत्व की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने नफरत की राजनीति के खिलाफ देशभर में पदयात्राएं कीं और समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने का प्रयास किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों को उनका अधिकार दिलाने के लिए जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा इसे भी राजनीतिक रूप से अलग नजरिए से पेश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की कोशिश गरीब और वंचित वर्गों से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की है।

गोदियाल ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बेरोजगारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग आज भी उठ रही है, लेकिन इन सवालों का जवाब देने के बजाय भाजपा नेता कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाना बनाकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर रोजगार, सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है। गोदियाल ने दावा किया कि राहुल गांधी देश के युवाओं, किसानों और वंचित वर्गों की आवाज बन चुके हैं और उनके नेतृत्व में चल रही एकजुटता की मुहिम को राजनीतिक बयानबाजी से रोका नहीं जा सकता।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा नेताओं से उत्तराखंड की सामाजिक एकता और सौहार्द को राजनीतिक विवादों से प्रभावित न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता विभाजन की राजनीति के बजाय विकास और जनहित के मुद्दों पर जवाब चाहती है।


भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में विकास का रोडमैप तैयार, विकसित उत्तराखंड पर हुआ मंथन

हल्द्वानी। हल्द्वानी में भाजपा की विस्तृत प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का पहला सत्र ‘विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत’ के संकल्प प्रस्ताव के अनुमोदन के साथ संपन्न हुआ। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और उत्तराखंड के विकास को लेकर पार्टी की आगामी दिशा पर विस्तार से चर्चा की गई।

रामपुर रोड स्थित एक निजी प्रतिष्ठान के हरि प्रसाद टम्टा सभागार में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मंच पर मौजूद रहे। इनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, अल्मोड़ा सांसद अजय भट्ट, टिहरी सांसद महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल और कल्पना सैनी सहित प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, दीप्ति रावत, तरुण बंसल और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक शामिल रहे।

पीएम मोदी के 25 वर्षों के कार्यकाल पर चर्चा

कार्यसमिति के पहले राजनीतिक प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। साथ ही इस दौरान भारत की विकास यात्रा और देश के लगातार आगे बढ़ने पर विस्तार से चर्चा हुई।

यह प्रस्ताव राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने प्रस्तुत किया। प्रस्ताव का अनुमोदन विधायक रेखा आर्य, सांसद अजय भट्ट, महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह और मदन कौशिक ने किया।

‘विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत’ पर जोर

बैठक में दूसरे राजनीतिक प्रस्ताव के माध्यम से उत्तराखंड को विकसित बनाकर देश के विकसित भारत के संकल्प में योगदान देने की दिशा पर मंथन किया गया। केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसका अनुमोदन राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया।

बैठक के दौरान प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम और सह प्रभारी रेखा वर्मा ने भी पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। कार्यसमिति में प्रदेश के विकास, संगठन की भूमिका और विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई।


पीएम मोदी समेत NDA सांसदों ने लहराया तिरंगा, झारखंड छात्र प्रदर्शन पर संसद में प्रदर्शन

‘वंदे मातरम’ के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम

नई दिल्ली। संसद सत्र के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों की मंगलवार को अहम बैठक हुई। संसद पुस्तकालय में आयोजित ‘मंगल मिलन’ बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष के साथ हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत NDA के कई नेता हाथों में तिरंगा लिए नजर आए।

बैठक के बाद NDA सांसदों ने संसद परिसर में झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। सांसदों ने आरोप लगाया कि झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। इस मुद्दे को संसद में भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।

छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की तैयारी

NDA सांसद संसद में पोस्टर के साथ पहुंचने की तैयारी में हैं। इन पोस्टरों के जरिए सरकार की ओर से छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा की मांग और विपक्ष के रुख को लेकर सवाल उठाए जाएंगे। साथ ही झारखंड सरकार पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया जाएगा।

NDA सांसदों का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष की ओर से लगातार हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। ऐसे में सत्ता पक्ष की रणनीति संसद में विपक्ष को इन मुद्दों पर घेरने की है।

पिछली बैठक में सरकार की उपलब्धियों पर हुई थी चर्चा

इससे पहले पिछले सप्ताह हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने सरकार के कामकाज और विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का जिक्र किया था। बैठक में रोजगार, आर्थिक विकास, खेल, गरीबी उन्मूलन और संसद की कार्यवाही जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने दावा किया था कि भारत तेजी से आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रोजगार की स्थिति में सुधार और बेरोजगारी में कमी का जिक्र करते हुए कहा था कि बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

वहीं, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के बजाय विपक्ष हंगामा कर रहा है। बैठक में सांसदों से सदन की कार्यवाही के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहने और जरूरी विधेयकों को पारित कराने में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया गया था।

क्या है ‘मंगल मिलन’ बैठक?

‘मंगल मिलन’ NDA संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीतिक बैठक का नया स्वरूप है। इसका मुख्य उद्देश्य गठबंधन के घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और संसद की कार्यवाही को लेकर साझा रणनीति तैयार करना है।

संसद सत्र के दौरान इस बैठक में आगामी कार्यवाही, महत्वपूर्ण मुद्दों और सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाती है। साथ ही सहयोगी दलों के सांसदों के बीच तालमेल और सदन में उनकी भूमिका को लेकर भी रणनीति बनाई जाती है।

बैठक में भाजपा के अलावा शिवसेना, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP), तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) समेत NDA के विभिन्न सहयोगी दलों के नेता हिस्सा लेते हैं। इसका उद्देश्य गठबंधन के सांसदों को एक साझा रणनीति के तहत संसद में प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने के लिए तैयार करना है।


महिला आरक्षण कानून पर फिर गरमाई सियासत, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

राहुल गांधी बोले- कानून लागू करने में देरी क्यों?

नई दिल्ली। महिला आरक्षण कानून को लागू करने को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले ही महिला आरक्षण कानून का समर्थन कर चुकी है। उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को लागू करने में देरी क्यों हो रही है और इसे लोकसभा परिसीमन से जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद में कांग्रेस के समर्थन से पारित हुआ था। ऐसे में अब इसे लागू करने के लिए किसी नई शर्त की जरूरत नहीं होनी चाहिए। राहुल ने सरकार से कानून को बिना शर्त लागू करने की मांग की।

रिजिजू ने कांग्रेस से मांगा था समर्थन

दरअसल, यह विवाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान के बाद सामने आया। राहुल गांधी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं की आवाज और उनकी भागीदारी के बिना देश का विकास अधूरा रहेगा।

राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने इसे कांग्रेस की ओर से सकारात्मक संदेश बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस से महिला आरक्षण विधेयक को बिना शर्त समर्थन देने की चुनौती भी दी।

कांग्रेस की आपत्ति किस बात पर है?

कांग्रेस और विपक्षी दल महिला आरक्षण के प्रावधान का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन परिसीमन के साथ इसे जोड़ने का विरोध करते हैं। विपक्ष की दलील है कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने को लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं किया जाना चाहिए।

परिसीमन के जरिए लोकसभा की सीटों की संख्या और उनके क्षेत्र का पुनर्निर्धारण किया जाना प्रस्तावित है। विपक्ष चाहता है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखते हुए इसे जल्द लागू किया जाए।

2023 में संसद से पारित हुआ था कानून

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रिया परिसीमन और उससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया से संबद्ध है।

दिए गए विवरण के मुताबिक, 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान संशोधन से जुड़ा एक विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके चलते कानून को लागू करने की आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

अब राहुल गांधी के बयान के बाद महिला आरक्षण कानून का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस जहां इसे बिना शर्त लागू करने की मांग कर रही है, वहीं केंद्र और विपक्ष के बीच परिसीमन को लेकर मतभेद बने हुए हैं।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp