Wednesday, October 14th, 2026

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उत्तराखंड कांग्रेस में शामिल हुए कई नेता, 2027 चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की तैयारी

Category Archives: राजनीति

उत्तराखंड कांग्रेस में शामिल हुए कई नेता, 2027 चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की तैयारी

गणेश गोदियाल और प्रीतम सिंह ने किया नए नेताओं का स्वागत

देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। बुधवार को देहरादून स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कई नेताओं ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने सभी नए सदस्यों का स्वागत किया।

कांग्रेस नेताओं ने पार्टी में शामिल हुए नेताओं को फूल-मालाएं पहनाकर सदस्यता दिलाई। इस दौरान पार्टी नेतृत्व ने विश्वास जताया कि नए सदस्यों के जुड़ने से संगठन को मजबूती मिलेगी और आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका लाभ मिलेगा।

भाजपा सरकार पर साधा निशाना

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता की विचारधारा के साथ देशहित में काम करती रही है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, पलायन और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार के लिए परेशान होना पड़ रहा है और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने उनके भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने महिला सुरक्षा, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उनका कहना था कि प्रदेश की जनता भाजपा सरकार की नीतियों से परेशान है और आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन चाहती है।

प्रीतम सिंह बोले- नए साथियों से संगठन को मिलेगी ऊर्जा

चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी लोकतंत्र, संविधान और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों के नेताओं का कांग्रेस में शामिल होना पार्टी की विचारधारा के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए सदस्यों को संगठन में सम्मान दिया जाएगा और उनके अनुभवों का उपयोग पार्टी को मजबूत करने में किया जाएगा। प्रीतम सिंह ने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड के गठन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है तथा नए साथियों के आने से आगामी चुनाव की तैयारियों को गति मिलेगी।

हरक सिंह रावत ने भी भाजपा सरकार को घेरा

प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि भाजपा सरकार बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दों पर ठोस समाधान देने में नाकाम रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब सरकार के वादों से निराश है और कांग्रेस की ओर उम्मीद से देख रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव पूरी एकजुटता के साथ लड़ेगी। नए नेताओं के पार्टी में शामिल होने से संगठन का जनाधार बढ़ेगा और सरकार के खिलाफ चल रहे जनसंघर्ष को मजबूती मिलेगी।

इन नेताओं ने ली कांग्रेस की सदस्यता

कांग्रेस में शामिल होने वालों में चकराता विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी दर्शन लाल डोभाल, सेवानिवृत्त पुलिस आईजी अनन्तराम चौहान, कैप्टन ताजवर सिंह नेगी, कैप्टन नारायण सिंह रावत, कैप्टन गंगा सिंह, कैप्टन हीरा बल्लभ पांडे, कैप्टन सोबन सिंह, जितेंद्र सिंह और शशांक भट्ट सहित अन्य नेता शामिल रहे।

इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने और संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि आने वाले दिनों में अन्य राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।

कार्यक्रम में विधायक लखपत सिंह बुटोला, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष लालचन्द शर्मा, महामंत्री अभिषेक सिंह, राजेन्द्र शाह, नवीन जोशी, विनोद चौहान, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, प्रदेश सचिव अमेन्द्र बिष्ट, अखिलेश उनियाल, प्रशांत खंडूरी और नरेशानन्द नौटियाल समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।


एसआईआर पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी, 10 करोड़ नाम हटाने का दावा कर उठाए सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े मौजूदा कानून को समाप्त करने की मांग की 

लखनऊ। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े मौजूदा कानून को समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भी शामिल किया जाना चाहिए। ओवैसी का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था से चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

ओवैसी ने कहा कि जब यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, तभी उन्होंने इसके प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताई थी। उनके मुताबिक, कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को सेवानिवृत्ति के बाद कानूनी संरक्षण देने की व्यवस्था भी चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि इस कानून को वापस लेकर नियुक्ति प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव किए जाएं, ताकि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और जनता का भरोसा कायम रह सके।

एसआईआर को लेकर भी जताई नाराजगी

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने इसकी प्रक्रिया और उद्देश्य पर आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि अब तक 10 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। साथ ही, फॉर्म-6 के जरिए नए मतदाताओं के पंजीकरण के दौरान आवेदकों की मैपिंग पर जोर दिए जाने को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। ओवैसी ने एसआईआर की प्रक्रिया बंद करने की मांग की।

इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन से बनाई दूरी

इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा कि विरोध दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सुप्रीम कोर्ट भी इस अधिकार को मान्यता दे चुका है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने गठबंधन के प्रदर्शन और उसकी रणनीति पर टिप्पणी करने से दूरी बनाए रखी।

सीजेआई से मुलाकात के मुद्दे पर उठाया सवाल

इंडिया गठबंधन के नेताओं की भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की पहल पर भी ओवैसी ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सांसद विधायिका का हिस्सा होते हैं, कार्यपालिका का नहीं। यदि उनकी शिकायत केंद्र सरकार से जुड़ी है, तो उन्हें प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि सांसद मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कैसे कर सकते हैं।

ओवैसी ने इस मामले में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तीनों संस्थाओं की अपनी अलग-अलग भूमिकाएं हैं और उनके बीच संवैधानिक सीमाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़ी स्थायी समिति के सुप्रीम कोर्ट से मुलाकात के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी शक्तियों के बंटवारे को लेकर सवाल उठे थे। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में तीनों संस्थाओं के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना जरूरी है।


सीजेपी के प्रदर्शन को संबित पात्रा ने बताया ‘फ्लॉप शो’, विपक्ष पर लगाए अराजकता फैलाने के आरोप

राष्ट्रपति को सड़क की लड़ाई में घसीटने की कोशिश! राहुल गांधी पर संबित पात्रा का तीखा हमला

नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदर्शन से पहले अभिजीत दिपके समेत कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने और प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोके जाने के बाद मामला गरमा गया। इस बीच भाजपा सांसद संबित पात्रा ने प्रदर्शन को पूरी तरह विफल बताते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन की आड़ में राजधानी में अराजकता फैलाने, आगजनी कराने और सड़कों पर टकराव की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई। पात्रा ने कहा कि लोकतंत्र के सामने भीड़तंत्र की एक नहीं चली और फिलहाल दिल्ली में हालात नियंत्रण में हैं।

राष्ट्रपति को राजनीतिक टकराव में घसीटने का आरोप
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग राजनीतिक समूहों की ओर से प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर देश में लगातार तनावपूर्ण माहौल बनाने की कोशिश क्यों हो रही है। पात्रा के मुताबिक, विपक्षी दलों और उनके नेताओं के बीच प्रदर्शन का श्रेय लेने की होड़ भी मची हुई है।

उन्होंने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक खींचतान का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर भी हमला बोला। पात्रा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति भवन से लौटने के बाद राहुल गांधी ने जिस तरह की टिप्पणी की, वह राजनीतिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को सड़क पर होने वाली राजनीतिक लड़ाई में खींचने का प्रयास पहले कभी इस तरह नहीं देखा गया। भाजपा सांसद ने इसे विपक्ष की गैर-जिम्मेदाराना राजनीति करार दिया।

प्रदर्शन स्थल की सुविधाओं पर भी उठाए सवाल
संबित पात्रा ने प्रदर्शन स्थल पर डॉक्टर और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने वाले लोगों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब इन सुविधाओं को लेकर अदालत में याचिका दायर की गई थी, तब कथित वोट चोरी का मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया। पात्रा ने विपक्ष से पूछा कि यदि चुनाव में वास्तव में गड़बड़ी हुई थी, तो संबंधित तथ्यों और सबूतों को अदालत के सामने क्यों नहीं रखा गया।

भाजपा सांसद ने हालिया उपचुनावों के नतीजों का उल्लेख करते हुए भी विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि चार सीटों पर आए नतीजों के बाद भाजपा सभी सीटों पर जीती है। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के रेजिनगर में मतदाताओं की संख्या को लेकर उठे विवाद पर अपनी बात रखी।

रेजिनगर में वोटों की संख्या को लेकर क्या बोले पात्रा?
पश्चिम बंगाल के रेजिनगर में मतदाताओं और प्राप्त वोटों की संख्या को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर संबित पात्रा ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी ने वहां कुल 772 वोट होने का दावा किया था, जबकि भाजपा को 909 वोट मिलने की बात कही गई। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले में कथित गड़बड़ी और ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका जताई थी।

पात्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि रेजिनगर में कुल 1,109 मतदाता पंजीकृत हैं। उन्होंने विपक्ष पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने और लोगों के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा सांसद के मुताबिक, इस तरह के बयानों के जरिए राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

एक साल से वोट चोरी के आरोप लगा रहा विपक्ष: पात्रा
संबित पात्रा ने कहा कि विपक्षी नेता पिछले एक साल से लगातार वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं, लेकिन अब तक इन दावों को साबित करने वाले ठोस प्रमाण सामने नहीं रखे गए हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की मांग की। पात्रा ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले लोग ही आज लोकतंत्र की रक्षा की बात कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र कर विपक्ष पर साधा निशाना
भाजपा सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए भी विपक्ष पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री यह कह दें कि सांस लेना जरूरी है, तो विपक्ष इसका भी विरोध करने लगेगा। पात्रा ने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अशांति का माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर सरकार नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों की राजनीति देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही है।


चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का हल्लाबोल, बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी, लहराया तिरंगा

‘वोट चोर, गद्दी छोड़ो’ के लगे नारे

नई दिल्ली। संसद से मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकालकर चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। विपक्षी नेता निर्वाचन सदन की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन संसद मार्ग पर दिल्ली पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी सांसद बैरिकेड के पास पहुंच गए।

मार्च के दौरान राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़ गए और तिरंगा लहराकर विरोध जताया। उनके साथ कई अन्य युवा सांसद भी आगे बढ़े। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए।

विपक्ष ने क्यों निकाला मार्च?

विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों और फॉर्म-6 से जुड़े संशोधनों को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है।

बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी

संसद मार्ग पर नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे। रास्ता रोके जाने के बाद राहुल गांधी कुछ देर सड़क पर धरने पर बैठे। इसके बाद वह अचानक बैरिकेड पर चढ़ गए और हाथ में तिरंगा लेकर उसे लहराया। इस दौरान कई सांसद भी उनके साथ नजर आए।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेते हुए लिखा, ‘ज्ञानेश, हो गया भाई… अब इस्तीफा देने का समय आ गया है।’ प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़ो’ जैसे नारे भी लगाए।

कई सांसद हिरासत में लिए गए

प्रदर्शन आगे बढ़ने पर दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लेने की कोशिश की। पुलिस उन्हें बस में ले जाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन सांसदों ने इसका विरोध किया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बस से उतरकर आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट की ओर चले गए।

आकाशवाणी भवन के बाहर डटे विपक्षी नेता

विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में एक पेड़ के नीचे बैठकर विरोध जताते रहे। चुनाव आयोग का मुख्यालय आकाशवाणी भवन से करीब 270 मीटर की दूरी पर स्थित है। विपक्ष का कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से निर्वाचन सदन तक मार्च करना चाहता था, लेकिन पुलिस की भारी बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया।

फिलहाल राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत विपक्षी सांसद आकाशवाणी भवन परिसर में मौजूद हैं। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई को लेकर स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।


उत्तराखंड में एसआईआर पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

कांग्रेस एसआईआर कमेटी के अध्यक्ष मनोज रावत ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और आयोग से वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की

देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड कांग्रेस की एसआईआर कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक मनोज रावत ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में करीब 13.85 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने कहा कि प्री-एसआईआर और एसआईआर के दौरान हुई मतदाता कटौती के वास्तविक आंकड़े निर्वाचन आयोग की ओर से सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं।

कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में मनोज रावत ने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 को ऑटो जनरेट करने, भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित शिकायतों को आधार बनाने और शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने से एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के मामले में निर्वाचन आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत रही है।

रावत ने कहा कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में करीब 14 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाया जाना गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर न्यायालय का रुख करेगी। उनके मुताबिक कांग्रेस के बीएलओ की सक्रियता के कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बरकरार रह सके।

उन्होंने आगामी दिनों में फॉर्म-6 के जरिए नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। रावत ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। साथ ही निर्वाचन आयोग को एसआईआर से संबंधित सभी वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश महासचिव राजेंद्र भंडारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (अल्पसंख्यक) हाजी सुलेमान अंसारी, मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी, एसआईआर कमेटी के सदस्य अमेंद्र बिष्ट और अधिवक्ता संदीप चमोली मौजूद रहे।


सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा तैनात; पुलिस ने लाउडस्पीकर से प्रदर्शनकारियों से जगह खाली करने की अपील की

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर शनिवार को वामपंथी छात्र संगठनों के आह्वान पर प्रदर्शन और मार्च के चलते दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रदर्शनकारी विट्ठल हाउस से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे हैं। इस दौरान पुलिस ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और नेहा बोरा समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस की ओर से लगातार प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई जारी है।

प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर और आसपास का क्षेत्र खाली करने की अपील कर रही है। प्रदर्शनकारियों के आने-जाने वाले मार्गों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।

बताया गया है कि आइसा की अगुवाई में विट्ठल हाउस से जंतर-मंतर तक मार्च निकाला जा रहा है। मार्च का नेतृत्व नेहा बोरा और कपिल सिब्बल कर रहे हैं। मार्च के दौरान पुलिस ने कई लोगों को रोककर हिरासत में लिया है।

इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की थीं। इनमें दो मामले संसद मार्ग थाने और एक मामला कनॉट प्लेस थाने में दर्ज किया गया है।

पुलिस ने इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223, 221, 132 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है। इन धाराओं में निषेधाज्ञा के उल्लंघन, लोक सेवकों के काम में बाधा डालने और गैरकानूनी जमावड़े से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, मामलों की जांच की जा रही है।

पिछले जुलाई में हुए प्रदर्शन के अनुभव को देखते हुए इस बार दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के साथ-साथ वहां पहुंचने वाले प्रमुख रास्तों पर भी सुरक्षा बढ़ाई है। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही इलाके में पुलिस का कड़ा घेरा बनाया गया था। लुटियंस दिल्ली की तरफ आने वाले रास्तों पर पूछताछ और निगरानी बढ़ाई गई, जबकि कुछ दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर भी आवाजाही प्रभावित रही।


उत्तराखंड में वोटर लिस्ट को लेकर कांग्रेस का बड़ा ऐलान, वैध मतदाता का नाम कटा तो होगा सीधा ऐक्शन

देश के चुनाव आयोग को ज्ञानेश कुमार ने बना दिया पंगु- सूर्यकांत धस्माना

देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश में किसी भी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाया गया तो पार्टी इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेस ने कहा कि ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से घेराव, प्रदर्शन और अन्य आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने यह बात कही। उन्होंने एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित चुनाव आयोग से जुड़ी खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। धस्माना ने कहा कि रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों को बल मिलता है।

धस्माना ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त केंद्र सरकार के प्रभाव में काम कर रहे हैं और भाजपा व आरएसएस के एजेंडे के अनुरूप लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावों का जिक्र करते हुए दावा किया कि बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और बाद में कई नाम वापस जोड़े गए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्रदेश कांग्रेस ने एसआईआर के दौरान कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीआरसी पुरुषोत्तम को कई बार प्रमाणों के साथ शिकायतें दी हैं। कांग्रेस का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते उसके पारंपरिक समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। धस्माना ने कहा कि यदि किसी वैध मतदाता का नाम हटाया गया तो कांग्रेस इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेगी।

तिलक राज बेहड़ पर हमले को लेकर भी भाजपा पर निशाना

धस्माना ने ऊधमसिंह नगर के किच्छा में पूर्व मंत्री एवं किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ पर हुए हमले की घटना को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पूर्व विधायक के नेतृत्व में भाजपा से जुड़े अराजक और आपराधिक तत्वों ने विधायक पर हमला किया।

धस्माना ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा उत्तराखंड को बिहार और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कथित ‘जंगल राज’ की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस तरह की घटनाओं को स्वीकार नहीं करेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि किच्छा नगर निकाय चुनाव में संभावित हार को देखते हुए भाजपा बौखलाहट में इस तरह की कार्रवाई कर रही है। कांग्रेस नेता ने घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।


कांग्रेस ने अग्निवीर योजना पर सरकार को घेरा, युवाओं के भविष्य को लेकर उठाए सवाल

गणेश गोदियाल बोले- युवाओं को चार साल की नौकरी नहीं, पक्की नौकरी चाहिए

देहरादून। कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना को लेकर सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड जैसे सैन्य बहुल राज्य में इस योजना का युवाओं और सैन्य परिवारों पर विशेष प्रभाव पड़ा है। कांग्रेस ने सरकार से अग्निवीरों के भविष्य और चार वर्ष की सेवा के बाद रोजगार की ठोस व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित दीपोत्सव को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई और बेरोजगारी के बीच आम लोगों के लिए दो वक्त का चूल्हा जलाना मुश्किल हो रहा है, ऐसे समय में हजारों टन तेल खर्च कर दीप जलाने की होड़ उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जनता सरकार के कार्यों से खुश होकर दीप जलाती तो स्थिति अलग होती।

गणेश गोदियाल ने अग्निवीर योजना को युवाओं के स्थायी रोजगार के अवसरों को सीमित करने वाली व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा सेना में स्थायी नौकरी की उम्मीद लेकर वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन अग्निवीर व्यवस्था में अधिकांश युवाओं का सैन्य करियर चार वर्ष बाद समाप्त हो जाता है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती होने वाला युवा चार वर्ष बाद करीब 21-22 वर्ष की उम्र में दोबारा रोजगार की तलाश में पहुंच जाता है तो उसके भविष्य और परिवार की आर्थिक सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।

उन्होंने नियमित सैनिकों और अग्निवीरों के बीच सेवा अवधि, वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा में अंतर का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस का कहना है कि देश की सुरक्षा के लिए समान जोखिम उठाने वाले जवानों के लिए दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा पर स्पष्ट नीति होनी चाहिए।

प्रीतम सिंह ने कहा कि अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सैन्य परंपरा गौरवशाली रही है और पहाड़ी क्षेत्रों के हजारों परिवार पीढ़ियों से सेना में रोजगार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा चार वर्ष की नौकरी नहीं, बल्कि स्थायी और सुरक्षित रोजगार चाहते हैं।

प्रीतम सिंह ने पेंशन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि सेवा से बाहर होने वाले 75 प्रतिशत युवाओं के लिए रोजगार का स्थायी रोडमैप क्या है और सरकार उनके पुनर्वास की किस तरह व्यवस्था करेगी।

डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि केवल अलग-अलग विभागों में आरक्षण या प्राथमिकता देने की घोषणा पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि वास्तव में कितने अग्निवीरों को सेवा समाप्त होने के बाद स्थायी रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सैन्य बाहुल्य राज्य है और यहां सेना से जुड़ाव परिवारों की भावनाओं से भी जुड़ा है। उनके अनुसार सेना की भर्ती को केवल रोजगार के आंकड़े सुधारने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने नियमित सेना भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने, रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने और युवाओं को पर्याप्त भर्ती अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही उत्तराखंड के लिए विशेष भर्ती नीति और सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए अलग पैकेज की मांग भी उठाई गई।

सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने दावा किया कि पहले प्रतिवर्ष करीब 80 हजार युवाओं को सेना में रोजगार मिलता था, जो अब घटकर करीब 47 हजार रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि इनमें से 25 प्रतिशत युवाओं को ही आगे नियमित सेवा में लिया जाता है तो करीब 12 हजार युवाओं को स्थायी सेवा मिलती है। उन्होंने इस संबंध में सरकार से आधिकारिक आंकड़े स्पष्ट करने की मांग की।

कांग्रेस ने सरकार के सामने कई सवाल रखे। इनमें चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए रोजगार की व्यवस्था, अब तक स्थायी सरकारी रोजगार पाने वाले अग्निवीरों की संख्या, सेना में रिक्त पदों को भरने की समयसीमा और उत्तराखंड के कितने युवाओं को अग्निवीर योजना के तहत भर्ती मिली, जैसे मुद्दे शामिल रहे।

कांग्रेस ने यह भी पूछा कि क्या सरकार अग्निवीर योजना की स्वतंत्र समीक्षा कराने और अग्निवीरों को भविष्य में नियमित सैनिकों के समान सम्मानजनक सेवा-सुरक्षा देने पर विचार करेगी।

पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह समेत अन्य कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।


6000 बीघा सरकारी जमीन को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, 90 साल की लीज पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री धामी के जन्मदिन पर कांग्रेस का बड़ा हमला, सरकारी जमीनों को निजी हाथों में देने का लगाया आरोप

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिवस के अवसर पर कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को सरकारी जमीनों और संपत्तियों को निजी हाथों में दिए जाने के आरोपों को लेकर पत्रकार वार्ता आयोजित की। देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता को महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी, प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी और प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।

महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जल्द ही रुद्रप्रयाग जिले के लोक निर्माण विभाग के तीन महत्वपूर्ण निरीक्षण भवनों—दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी—को कम कीमत पर अपने चहेतों को नीलाम करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से प्रदेश की हजारों बीघा जमीन और संपत्तियों को 90 साल तक के लिए निजी हाथों में सौंपने जा रही है।

कांग्रेस के अनुसार, यूआईआईडीबी ने नैनीताल के पटुवा डांगर की 14 एकड़ भूमि पर प्रीमियम रिजॉर्ट विकसित करने के साथ ही हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश के लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड के तहत सितारा होटल के रूप में विकसित करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं।

डॉ. गोगी ने कहा कि सरकार के कथित फैसले को जनता तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस ने प्रदेशभर में पत्रकार वार्ताएं आयोजित की हैं। उन्होंने कहा कि रुद्रप्रयाग जिले के दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी स्थित निरीक्षण भवन ऐसे क्षेत्रों में हैं, जहां सड़क संपर्क और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि आसपास भूमि की उपलब्धता सीमित है। ऐसे में कांग्रेस ने इन संपत्तियों को केदार घाटी की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए इन्हें निजी हाथों में सौंपे जाने का विरोध किया।

प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब तक यूआईआईडीबी को सरकारी विभागों की करीब 1200 एकड़ यानी 6000 बीघा से अधिक भूमि सौंपे जाने से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दे चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि कई हजार बीघा भूमि के प्रस्ताव अभी मुख्यमंत्री की अनुमति के लिए लंबित हैं।

भंडारी ने कहा कि अब तक जारी तीन निविदाओं की शर्तों से कांग्रेस को आशंका है कि सरकार इन जमीनों और संपत्तियों को राज्य से बाहर के बड़े निजी समूहों को आसान शर्तों पर देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 90 साल की लीज अवधि पूरी होने के बाद संबंधित लीजधारक मालिकाना हक का दावा कर सकते हैं।

प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों के अलावा लोक निर्माण विभाग के करीब 25 निरीक्षण भवनों और पर्यटन विभाग के कुछ होटलों को भी जल्द निजी हाथों में लीज पर देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में मंत्रिमंडल ने राज्य की जमीनों और संपत्तियों को यूआईआईडीबी के माध्यम से निजी हाथों में देने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया था।

कांग्रेस नेताओं ने मसूरी के हाथीपांव स्थित पार्क एस्टेट का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में करीब 142 एकड़ सरकारी भूमि को ‘राजस एरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड’ को 15 साल की लीज पर दिया गया था। कांग्रेस ने भूमि के बाजार मूल्य और लीज राशि को लेकर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2018 में तत्कालीन सरकार के दौरान भू-कानून में किए गए बदलावों के बाद राज्य की निजी जमीनों की बिक्री का रास्ता आसान हुआ। पार्टी ने दावा किया कि बाद में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भी औद्योगिक प्रयोजन, होटल और शिक्षण संस्थानों आदि के लिए खरीदी गई भूमि की प्लॉटिंग कर बिक्री का रास्ता खोल दिया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि निजी जमीनों के बाद अब सरकार की नजर राज्य के महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित सरकारी जमीनों और संपत्तियों पर है। पार्टी ने कहा कि वह सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में दिए जाने के खिलाफ प्रदेशभर में आंदोलन करेगी।

कांग्रेस ने बताया कि रुद्रप्रयाग जिला कांग्रेस कार्यकर्ता दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी स्थित तीनों संपत्तियों पर रक्षा सूत्र बांधकर इन्हें निजी हाथों में दिए जाने के विरोध में आंदोलन शुरू करेंगे। पार्टी ने कहा कि वह केदार भूमि की जमीनों और संपत्तियों को निजी हाथों में जाने से रोकने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।


7000 बीघा सरकारी जमीन पर घमासान, कांग्रेस ने धामी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री नाम से, प्रॉपर्टी डीलर काम से- करन माहरा

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की चार्जशीट कमेटी ने प्रदेश की सरकारी और बेशकीमती जमीनों के कथित प्रबंधन को लेकर धामी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। होटल इन्द्रलोक में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य की बहुमूल्य भूमि को निजी और कॉरपोरेट हितों के लिए इस्तेमाल कर रही है। पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा सहित कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में प्रदेश की बेशकीमती सरकारी भूमि को चुनिंदा लोगों और कंपनियों के हित में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर सरकारी संपत्तियों को कम कीमत पर निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे राज्य के हितों को नुकसान पहुंच रहा है।

चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड के माध्यम से करीब 7,000 बीघा सरकारी भूमि को निजी निवेशकों को दीर्घकालीन पट्टे पर देने की तैयारी की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिकों के लिए भूमि खरीद की सीमा निर्धारित है, तो चुनिंदा कॉरपोरेट कंपनियों को हजारों बीघा सरकारी जमीन लंबे समय के लिए देने का आधार क्या है।

माहरा के मुताबिक, सरकार ने उद्यान विभाग, आलू परियोजना, प्रजनन उद्यान सहित विभिन्न विभागों की खाली अथवा कम उपयोग वाली करीब 7,000 बीघा भूमि को चिह्नित कर भूमि बैंक तैयार किया है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित व्यवस्था में जमीन को 90 वर्ष तक की दीर्घकालीन लीज पर देने, होटल, रिसॉर्ट, विला, व्यावसायिक टाउनशिप, वेलनेस सेंटर और निजी स्कूल जैसी परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।

उन्होंने यह भी दावा किया कि लीज पर ली गई जमीन को आगे उप-पट्टे पर देने और बैंकों के पास बंधक रखकर ऋण लेने की अनुमति दिए जाने का प्रावधान है। कांग्रेस ने इन प्रावधानों को बड़े कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में बताया है। माहरा ने कंपनियों की पात्रता से जुड़ी शर्तों, भुगतान व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को लेकर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि व्यावसायिक उपयोग के लिए दी जाने वाली जमीन का लीज किराया कृषि भूमि के सर्किल रेट के आधार पर तय किया जा रहा है। उनका कहना था कि व्यावसायिक और कृषि भूमि की दरों में अंतर के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है और निजी कंपनियों को जमीन अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल सकती है।

माहरा ने इसे राज्य के भू-कानून की मूल भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि एक ओर आम लोगों के लिए भूमि खरीद पर सीमाएं निर्धारित की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े कॉरपोरेट समूहों को हजारों बीघा सरकारी जमीन लंबे समय के लिए देने की तैयारी है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में लीज की जमीन को स्थायी स्वामित्व में बदलने का रास्ता भी खुल सकता है। कांग्रेस ने मांग की कि ऐसी जमीनों पर स्थानीय युवाओं, ग्राम पंचायतों और सहकारी संस्थाओं के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट को लेकर भी उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर जल, जंगल और जमीन से जुड़े स्थानीय अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों को कॉरपोरेट घरानों के हित में इस्तेमाल करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

आर्य ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला उठाते हुए कहा कि एशियाई विकास बैंक के ऋण से करोड़ों रुपये खर्च कर वहां पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं विकसित की गईं। कांग्रेस का आरोप है कि करीब 142 एकड़ क्षेत्र और विकसित सुविधाओं को 15 वर्ष के लिए निजी कंपनी को लगभग एक करोड़ रुपये वार्षिक शुल्क पर दिया गया।

कांग्रेस ने इस प्रक्रिया में टेंडर और कंपनियों के बीच संभावित कारोबारी संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि क्या टेंडर प्रक्रिया में वास्तविक और स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हुई थी। इसके साथ ही कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों में शामिल कुछ इकाइयां बाद में विजेता कंपनी की हिस्सेदार कैसे बनीं और क्या इस पूरे घटनाक्रम की सरकार अथवा संबंधित अधिकारियों ने जांच कराई।

जॉर्ज एवरेस्ट जाने वाली सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली के विवाद का भी कांग्रेस ने उल्लेख किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा था। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली की स्थिति कैसे बनी और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई या नहीं।

अस्पताल के लिए जमीन आवंटन निरस्त करने पर सवाल

चार्जशीट कमेटी के सदस्य मनोज रावत ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े भूमि आवंटन के एक मामले को उठाते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग को विश्वास में लिए बिना बड़े अस्पताल के लिए प्रस्तावित जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया गया।

रावत के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे और अस्पताल निर्माण के लिए करीब 23,137 वर्गमीटर यानी लगभग 5.7 एकड़ भूमि चिन्हित की गई थी। उनका आरोप है कि 13 दिसंबर 2024 के घटनाक्रम के बाद 25 फरवरी 2025 को स्वास्थ्य विभाग को पूर्व सूचना या जानकारी दिए बिना भूमि आवंटन रद्द कर दिया गया।

कांग्रेस ने इस मामले में संबंधित कंपनियों की पात्रता और वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। रावत ने आरोप लगाया कि भूमि आवंटन और विकास प्रक्रिया से जुड़ी कुछ कंपनियों के पास रियल एस्टेट या बुनियादी ढांचा विकास का पर्याप्त अनुभव नहीं था।

उन्होंने सिक्का डेवलपर्स से जुड़े कथित वित्तीय मामलों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि कंपनी के खिलाफ नोएडा प्राधिकरण की ओर से बड़ी राशि की वसूली के आदेश जारी किए जा चुके हैं। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि कंपनी से जुड़े कुछ मामलों में देश के अन्य राज्यों में भी कानूनी विवाद सामने आए हैं।

रावत ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी रूप से अयोग्य ठहराए जाने के बावजूद संबंधित कंपनी वित्तीय बोली के चरण तक पहुंची और उसे भूमि का अनंतिम आवंटन भी किया गया। कांग्रेस ने इसे समानता के अधिकार और निविदा नियमों के विपरीत बताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की।

पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने कहा कि सरकारी भूमि से जुड़े सभी फैसलों में पारदर्शिता, सार्वजनिक हित और स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पार्टी ने सरकार से भूमि आवंटन, लीज की शर्तों, टेंडर प्रक्रिया और संबंधित कंपनियों की पात्रता से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी और अमरजीत सिंह भी मौजूद रहे।


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