Thursday, October 8th, 2026

Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

उत्तराखंड में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए 461.87 करोड़ की जरूरत: सतपाल महाराज

Daily Archives: 08/10/2026

उत्तराखंड में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए 461.87 करोड़ की जरूरत: सतपाल महाराज

देहरादून। उत्तराखंड में आपदा से प्रभावित सड़कों को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग को 461.87 करोड़ रुपये के बजट की आवश्यकता है। लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सड़क और पुल निर्माण में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी और गुणवत्ता खराब मिलने पर संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

यमुना कॉलोनी स्थित लोक निर्माण विभाग के सभागार में हुई बैठक में मंत्री ने वर्ष 2026-27 में आपदा से प्रभावित सड़कों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि आपदा के कारण प्रदेश में कुल 2360 मार्ग क्षतिग्रस्त हुए थे। इनमें से 2329 मार्गों को यातायात के लिए खोल दिया गया है, जबकि बाकी कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने अधिकारियों से लंबित और निर्माणाधीन सड़कों की जिलेवार प्रगति रिपोर्ट लेने को कहा। साथ ही पुलों का समय-समय पर निरीक्षण करने और उनकी स्थिति की निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया।

सतपाल महाराज ने कहा कि सड़कों और पुलों की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए निर्माण सामग्री, डामरीकरण, सड़क की निर्धारित मोटाई और लैब टेस्ट की जांच जरूरी है। उन्होंने थर्ड पार्टी क्वालिटी टेस्ट को भी प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए। गुणवत्ता में कमी सामने आने पर संबंधित अधिकारी या एजेंसी की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया।

समीक्षा के दौरान बताया गया कि प्रदेश में करीब 199 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। मंत्री ने इन स्थानों पर आवश्यक सुधार कार्य जल्द कराने के निर्देश दिए ताकि सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सके।

वहीं, गड्ढा पैचवर्क ऐप पर सड़क संबंधी 1953 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें से 1327 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि 626 शिकायतें दूसरे विभागों से संबंधित होने के कारण उन्हें भेज दी गई हैं।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 34 निष्प्रयोज्य पुलों में से 21 पुलों को दोबारा उपयोग में लाने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने अधिकारियों को वैकल्पिक मार्गों और डायवर्जन वाले स्थानों पर पर्याप्त साइन बोर्ड लगाने तथा रोड साइनेज को स्पष्ट और उचित ऊंचाई पर लगाने के निर्देश भी दिए।

बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडे, प्रमुख अभियंता राजेश चंद्र शर्मा, मुख्य अभियंता रंजीत रावत, मुकेश परमार समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


पर्यटन और तीर्थ स्थलों से जुड़ेंगे आदर्श संस्कृत ग्राम, मुख्य सचिव ने दिए अहम निर्देश

आधुनिक तकनीक के जरिए संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में गुरुवार को उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् के शासी निकाय की तीसरी बैठक आयोजित हुई। बैठक में संस्थान की गतिविधियों, वार्षिक कार्ययोजना, बजट और संस्कृत भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।

संस्कृत संस्कृति से जोड़ेंगे पर्यटन और तीर्थाटन

मुख्य सचिव ने संस्थान की गतिविधियों और संस्कृत स्पर्धाओं में लगातार बढ़ रही प्रतिभागियों की संख्या पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने आदर्श संस्कृत ग्रामों को प्रमुख पर्यटन एवं तीर्थ स्थलों के साथ जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को उत्तराखंड की संस्कृत परंपरा और संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।

आधुनिक तकनीक के जरिए संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर

मुख्य सचिव ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने संस्थान की वेबसाइट पर इंटरैक्टिव ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित करने, छोटी और उपयोगी सूचनात्मक रील्स तैयार करने के साथ ही मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया मंचों का प्रभावी उपयोग करने को कहा।

उन्होंने संस्कृत की उपयोगिता को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए मंत्र चिकित्सा, वैदिक गणित, वेद अध्ययन केंद्र और विभिन्न संगोष्ठियों जैसी गतिविधियों का विस्तार करने के भी निर्देश दिए।

संस्कृत सीखने के लिए तैयार होगा मॉडल

आनन्द बर्द्धन ने संस्कृत भाषा को सरल तरीके से सीखने के लिए आदर्श संस्कृत ग्राम मॉडल और शिक्षक कौशल विकास मॉडल तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में आयोजित होने वाले ग्रीष्मकालीन शिविरों को नियमित गतिविधि के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

इन शिविरों में स्कूली बच्चों के भ्रमण कार्यक्रम और विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ ही संस्कृत संस्थान की गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

बैठक में सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, अपर सचिव नवनीत पांडेय समेत शासी निकाय के सदस्य और संस्थान के अधिकारी मौजूद रहे।


जिलाधिकारी द्वारा पांच करोड़ से अधिक लागत वाली योजनाओं, नवाचारी प्रोजेक्ट, जिला योजना एवं 20 सूत्री कार्यक्रम की समीक्षा

विकास कार्यों को समयबद्ध पूरा करने के साथ गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें: जिलाधिकारी

पौड़ी- जनपद में संचालित विभिन्न विकास कार्यों एवं योजनाओं की प्रगति की समीक्षा को लेकर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला योजना, राज्य सेक्टर एवं केंद्र पोषित योजनाओं की प्रगति के साथ ही 20 सूत्री एवं 25 सूत्री कार्यक्रम तथा टास्क फोर्स के कार्यों की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त जनपद में पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं एवं महत्वपूर्ण फास्ट ट्रैक कार्यों की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की गयी।

पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन योजनाओं के कार्य निर्धारित समय के अनुरूप आगे नहीं बढ़ रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता के साथ गति प्रदान करते हुए समयबद्ध पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत हो चुकी है, उनके कार्यों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखने को कहा।

बैठक में अधिशासी अभियंता ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 16 कार्यों के अनुबंध हो चुके हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इन कार्यों को इसी माह प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, उनमें आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करते हुए कार्यों को धरातल पर प्रारंभ किया जाए। जिलाधिकारी ने मोहनचट्टी में निर्माणाधीन आयुर्वेदिक चिकित्सालय तथा योग विलेज के कार्य को 10 अक्टूबर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। सतपुली बैराज निर्माण कार्य की समीक्षा में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि इसे दिसंबर तक कार्य पूर्ण किया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि पौड़ी में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट एवं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्वीकृति शासन स्तर से प्राप्त हो गई है, जिससे पौड़ी नगर के निवासियों को लाभ होगा। उन्होंने इस हेतु टेंडर लगाते हुए कार्य निर्धारण के निर्देश दिए। वहीं, सतपुली नगरीय पेयजल योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि योजना का कार्य जनवरी 2027 तक पूर्ण होने की संभावना है।

सतपुली-गुमखाल संपर्क मार्ग के संबंध में पूर्व निर्गत निर्देशों के क्रम में अधिशासी अभियंता द्वारा बताया गया कि मार्ग पर ब्लैक टॉप का कार्य शुरू हो गया है तथा अधिकांश मलबा हटा लिया गया है, जिस पर जिलाधिकारी ने शेष मलबा हटाने का कार्य शीघ्र शुरू करने के साथ ही सुरक्षात्मक दीवारों की मरम्मत एवं निर्माण कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि मार्ग पर आवागमन सुचारु और सुरक्षित बना रहे। पौड़ी-श्रीनगर मार्ग पर चल रहे कार्यों की समीक्षा में बताया गया कि सुरक्षा दीवारों का कार्य प्रगति पर है तथा नालियों का कार्य शुरू हो गया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जहां पाइप शिफ्टिंग के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है, वहां संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर आपसी समन्वय से कार्य शीघ्र शुरू कराएं।

उन्होंने कहा कि जिन बड़े कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है, उनकी फोटोग्राफ एवं माप पुस्तिका उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। साथ ही शासन स्तर पर लंबित कार्यों का संबंधित विभाग नियमित फॉलोअप करें तथा वन विभाग की एनओसी के कारण लंबित कार्यों को संबंधित विभागों से समन्वय कर शीघ्र निस्तारित किया जाए। बैठक में पेयजल, पार्किंग सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं में भी आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने पौड़ी जेल संग्रहालय के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने पैठाणी स्थित राहु मंदिर तथा पौड़ी के इको एडवेंचर पार्क के कार्यों की भी समीक्षा की। राहु मंदिर में पुजारी आवास निर्माण पूर्ण हो चुका है। उन्होंने वेटिंग हॉल में फर्नीचर तथा लाइटिंग पोल में संगीत व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने सीता माता सर्किट के अंतर्गत सौंदर्यीकरण संबंधी कार्यों के लिए शीघ्र टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।

जिला योजना की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान लोनिवि की न्यून प्रगति पायी गयी तथा लोनिवि को 15 अक्टूबर एवं 31 अक्टूबर तक पाक्षिक रूप से प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया। उन्होंने जिला योजना के अंतर्गत संचालित कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा कार्यदायी संस्थाओं को सौंपे गए कार्यों की केवल वित्तीय प्रगति तक सीमित न रहकर भौतिक प्रगति भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिन विभागों द्वारा पहली किश्त के लक्ष्य में 60 प्रतिशत से अधिक प्रगति प्राप्त कर ली गई है, उन्हें दूसरी किश्त जारी करने की कार्यवाही करने को कहा गया।

पूल्ड आवासों की स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने डीएसटीओ को समिति गठित कर आवासों का निरीक्षण कराने तथा आवश्यकतानुसार मरम्मत कार्य करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने भौतिक प्रगति की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया।

20 सूत्री एवं 25 सूत्री कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करते हुए पीएमजीएसवाई तथा स्वास्थ्य विभाग की न्यून प्रगति में नाराज़गी व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने दोनों विभागों को शीघ्रता से काम में तेजी लाते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ विकास कार्यों को गति देने तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और समयबद्धता बनाए रखने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी, परियोजना निदेशक डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, जिला विकास अधिकारी रमेश चंद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेघना असवाल, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, मुख्य शिक्षाधिकारी अत्रेश सयाना, पुरातत्व अधिकारी आशीष कुमार, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई धीरज सैनी, लोनिवि के अधिशासी अभियंता विवेक सेमवाल, रीना नेगी, शिवम मित्तल, जल संस्थान के टीएस रावत, जल निगम के नवनीत कटारिया, ग्रामीण निर्माण विभाग के लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, पीएमजीएसवाई के परशुराम चमोली, मुख्य कृषि अधिकारी ऋतु कुकरेती जुयाल, सहायक निबंधक सहकारिता सुमन कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल, जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी, जिला पर्यटन अधिकारी कमल किशोर जोशी, जिला खेल अधिकारी प्रदीप कुमार, जिला मत्स्य प्रभारी अभिषेक मिश्रा, परियोजना प्रबंधक उरेडा चंद्रप्रकाश उपाध्याय, एसडीओ वन आयशा बिष्ट, एसीएमओ डॉ. अमित मेहरा, एडीपीआरओ प्रदीप सुंदरियाल, अपर समाज कल्याण अधिकारी अनिल सेमवाल सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


देहरादून में सड़क पर हुड़दंग करना पड़ा भारी, पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया

देहरादून। क्लेमेनटाउन क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क पर आपस में विवाद कर हंगामा करना तीन लोगों को भारी पड़ गया। चंद्रमणि चौक के पास दो पक्षों के बीच हुए विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति बिगड़ने से पहले तीन लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 170 BNSS के तहत कार्रवाई की है।

पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों की चंद्रमणि चौक के पास आसपास ही जूस की दुकानें हैं। बुधवार रात दुकानों पर आने वाले ग्राहकों को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मामला मारपीट तक पहुंचने की स्थिति में आ गया।

घटना की सूचना मिलते ही क्लेमेनटाउन थाना पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि वे शांत होने के बजाय एक-दूसरे से भिड़ने पर आमादा रहे।

मौके पर तनाव बढ़ता देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों के तीन लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर झगड़े और हुड़दंग के कारण शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके चलते तीनों के खिलाफ धारा 170 BNSS के तहत कार्रवाई की गई।

पुलिस ने घटना से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू कर दी है और मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।


तेंदुए के लिए लगाए पिंजरे में बंधी बकरी ही ले उड़े चोर, टूटा मिला ताला

ठाकुरद्वारा (मुरादाबाद)। इलाके में तेंदुए की मौजूदगी के चलते वन विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरे अब चोरों के निशाने पर आ गए हैं। राघूवाला स्थित गोशाला के पास तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे में वन विभाग ने बकरी को चारे के तौर पर बांधा था। रात के दौरान तेंदुआ तो नहीं पहुंचा, लेकिन चोर पिंजरे का ताला तोड़कर बकरी को ही अपने साथ ले गए।

वन विभाग के कर्मचारी अरुण कुमार के अनुसार, बुधवार शाम करीब छह बजे पिंजरे में बकरी बांधी गई थी। पिंजरे को लॉक करने के बाद वह चाबी अपने साथ ले गए थे। उस समय आसपास कई लोग भी मौजूद थे।

गुरुवार सुबह करीब आठ बजे जब अरुण कुमार बकरी को देखने पहुंचे तो पिंजरे का ताला टूटा हुआ मिला। अंदर से बकरी गायब थी। घटना की जानकारी मिलते ही गोशाला कर्मचारियों और ग्रामीणों की भीड़ मौके पर पहुंच गई।

ग्राम प्रधान मोहम्मद यामीन के अनुसार, घटना के बाद आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है। पुलिस और ग्रामीण फुटेज के जरिए आरोपितों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं।

खास बात यह है कि यह इस तरह की दूसरी घटना है। इससे एक दिन पहले मस्तलीपुर गांव में तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे का ताला तोड़कर उसमें रखी दो मुर्गियां चोरी कर ली गई थीं।

लगातार दो दिनों में पिंजरों से चारा चोरी होने के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा और निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि पिंजरों की सुरक्षा और निगरानी पर्याप्त नहीं होगी तो तेंदुए को पकड़ने की मुहिम भी प्रभावित हो सकती है।


खन्ना में बैंक के बाहर दिनदहाड़े 15 लाख की लूट, गन प्वाइंट पर आढ़ती से छीनी नकदी और कार

खन्ना। लुधियाना जिले के खन्ना में गुरुवार को दिनदहाड़े लूट की बड़ी वारदात से हड़कंप मच गया। एचडीएफसी बैंक के बाहर दो हथियारबंद बदमाशों ने एक आढ़ती को कथित तौर पर गन प्वाइंट पर लेकर करीब 15 लाख रुपये की नकदी लूट ली। वारदात के बाद आरोपी आढ़ती की वेन्यू कार लेकर मौके से फरार हो गए।

जानकारी के मुताबिक, अमलोह के गांव भद्दलथूहा निवासी आढ़ती कारोबार के सिलसिले में खन्ना स्थित एचडीएफसी बैंक पहुंचे थे। धान के सीजन के चलते किसानों की फसल का भुगतान और अन्य कारोबारी लेनदेन चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि आढ़ती बैंक से बड़ी रकम लेकर बाहर निकले और अपनी गाड़ी में बैठने लगे।

इसी दौरान दो बदमाशों ने उन्हें हथियार दिखाकर रोक लिया। आरोप है कि बदमाशों ने उनसे करीब 15 लाख रुपये की नकदी छीनी और इसके बाद उनकी कार लेकर फरार हो गए।

वारदात के बाद पुलिस को बदमाशों के मंडी गोबिंदगढ़ की तरफ भागने की सूचना मिली। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने आसपास के इलाकों में नाकाबंदी कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

खन्ना सिटी थाना-1 की पुलिस के साथ सीआईए स्टाफ की टीमें भी जांच में जुटी हैं। पुलिस घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि बदमाशों की पहचान और उनके भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके।

थाना प्रभारी हरविंदर सिंह ने लूट की घटना की पुष्टि की है। सूचना मिलते ही एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने पुलिस टीमों को सक्रिय करते हुए इलाके में नाकाबंदी के निर्देश दिए। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश के साथ-साथ वारदात से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।


हापुड़ में छेड़छाड़ से परेशान 10वीं की छात्रा ने खाया जहर, पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया केस

हापुड़। हापुड़ के निजामपुर गांव स्थित एक स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 10 की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि छात्रा को स्कूल में पढ़ने वाले कुछ युवक लगातार परेशान कर रहे थे। घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

छात्रा के पिता के मुताबिक, उनकी बेटी श्री जगपाल सिंह स्मारक हायर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ती थी। उनका आरोप है कि पिछले कुछ समय से कक्षा में पढ़ने वाले कुछ लड़के उसे परेशान कर रहे थे और उसके साथ छेड़छाड़ करते थे।

परिजनों के अनुसार, 6 अक्टूबर की शाम उन्हें इस संबंध में जानकारी मिली। यह बात छात्रा को पता चली तो वह काफी परेशान हो गई। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे तत्काल स्थानीय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर होने पर उसे यशोदा अस्पताल रेफर कर दिया।

अस्पताल में उपचार के दौरान उसी रात छात्रा की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम छा गया। छात्रा के पिता ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और बेटी को परेशान करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार सिंह के अनुसार, छात्रा के पिता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस स्कूल परिसर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। इसके अलावा छात्रा के परिजनों, स्कूल प्रबंधन और अन्य संबंधित लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


रोज की दाल-सब्जी से हो गए हैं बोर? महाराष्ट्र के इस तीखे टमाटर ठेचे से बढ़ाएं खाने का स्वाद

 रोज-रोज एक जैसा खाना खाने से अगर स्वाद में नयापन नहीं मिल रहा है, तो थाली में कोई चटपटी और तीखी डिश शामिल की जा सकती है। महाराष्ट्र का पारंपरिक टमाटर ठेचा ऐसी ही एक रेसिपी है, जिसे कम सामग्री में तैयार किया जा सकता है। इसका तीखा स्वाद और मूंगफली का क्रंच दाल-चावल, रोटी या भाकरी के साथ खाने का मजा बढ़ा देता है।

ठेचा बनाने के लिए चाहिए ये सामग्री

इस चटपटे ठेचे के लिए 3-4 टमाटर, 5-6 हरी मिर्च, 10-12 लहसुन की कलियां, 2 बड़े चम्मच भुनी मूंगफली, 1 छोटा चम्मच जीरा, स्वादानुसार नमक, 1-2 बड़े चम्मच तेल और थोड़ा हरा धनिया चाहिए। मिर्च की मात्रा अपने स्वाद और तीखापन सहने की क्षमता के अनुसार कम या ज्यादा रख सकते हैं।

सबसे पहले भूनें मिर्च और लहसुन

रेसिपी की शुरुआत पैन या तवे पर तेल गर्म करके करें। इसमें जीरा, लहसुन और साबुत हरी मिर्च डालकर मध्यम आंच पर भूनें। जब लहसुन हल्का सुनहरा होने लगे और मिर्च अच्छी तरह सिक जाए, तो सभी चीजों को निकालकर अलग रख दें।

टमाटर को करें नरम

अब उसी पैन में कटे हुए टमाटर डालें और थोड़ा नमक मिलाएं। टमाटर को तब तक पकाएं, जब तक वे पूरी तरह नरम न हो जाएं और उनका छिलका ढीला पड़ने लगे। इसके बाद गैस बंद कर दें और टमाटर को थोड़ा ठंडा होने दें।

असली स्वाद के लिए दरदरा रखें मिश्रण

ठेचे की खासियत इसकी दरदरी बनावट होती है। भुनी हुई मिर्च, लहसुन और पके टमाटर को खलबत्ते या ओखली में डालकर दरदरा कूटें। अगर ओखली उपलब्ध नहीं है तो मिक्सी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन मिश्रण को बिल्कुल महीन पेस्ट न बनाएं। कुछ सेकंड पल्स करने से भी मनचाही बनावट मिल सकती है।

मूंगफली देगी जबरदस्त क्रंच

अब तैयार मिश्रण में दरदरी कुटी हुई भुनी मूंगफली और बारीक कटा हरा धनिया डालें। जरूरत के अनुसार नमक मिलाकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें। मूंगफली ठेचे के तीखे स्वाद के साथ हल्का क्रंच देती है, जिससे इसका स्वाद और बेहतर हो जाता है।

भाकरी से लेकर दाल-चावल तक के साथ करें सर्व

महाराष्ट्रीयन टमाटर ठेचा तैयार है। इसे गरम ज्वार की भाकरी, बाजरे की रोटी, पराठे या सादे दाल-चावल के साथ परोसा जा सकता है। हालांकि मिर्च की मात्रा अधिक होने के कारण तीखा भोजन पसंद न करने वाले लोग इसे अपनी स्वाद क्षमता के अनुसार ही तैयार करें।


उद्योगों के लिए नियामक नहीं, सहयोगी और सहभागी की भूमिका निभा रही राज्य सरकार- मुख्यमंत्री

प्रदेश में 29 हजार से अधिक नई एमएसएमई इकाइयां स्थापित, 1.27 लाख युवाओं को मिला रोजगार

हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हरिद्वार में आयोजित 7वें सीआईआई उत्तराखण्ड इंडस्ट्रियल समिट एंड एक्सपो-2026 में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार आध्यात्मिक नगरी होने के साथ उत्तराखण्ड के औद्योगिक विकास का भी एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। इस प्रकार के आयोजन उद्योग, व्यापार, निवेश और नवाचार को एक साझा मंच प्रदान करने के साथ राज्य के आर्थिक विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति में उद्यमियों, व्यापारियों और निवेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उद्योगों की स्थापना से रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, नई तकनीक और नवाचार को बढ़ावा मिलता है तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड में उद्योगों के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और सरल व्यवस्था उपलब्ध हो तथा सरकार एक नियामक के बजाय सहयोगी और सहभागी की भूमिका निभाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड को विकसित, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त राज्य बनाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार से राज्य में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण बना है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम सड़क परियोजना और लगातार बेहतर हो रही कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स सुविधाओं में भी सुधार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में 29 हजार से अधिक नई एमएसएमई इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिनके माध्यम से लगभग 1.27 लाख युवाओं को रोजगार मिला है। निवेशकों और उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ‘निवेश मित्र’ की व्यवस्था की गई है। सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत करते हुए 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का युवा केवल नौकरी मांगने वाला न बने, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने वाला बने, इस उद्देश्य से स्टार्टअप और नवाचार को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उत्तराखण्ड स्टार्टअप नीति लागू करने के साथ स्टार्टअप्स को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने के लिए 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि ऊधमसिंह नगर के खुरपिया में लगभग 1,002 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति देने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास को केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष औद्योगिक पार्कों की दिशा में कार्य किया जा रहा है। छोटे उद्यमियों को आधुनिक औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरिद्वार में फ्लैटेड फैक्ट्री विकसित की जा रही है तथा भविष्य में सेलाकुई और पंतनगर में भी इस प्रकार की सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पारंपरिक उत्पादों, हस्तशिल्प और स्थानीय उद्यमों को बड़े बाजार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। फार्मा, हर्बल, आयुष, इंजीनियरिंग और ऑटो-कंपोनेंट जैसे क्षेत्रों में भी उत्तराखण्ड तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की उद्योग अनुकूल नीतियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान में उत्तराखण्ड को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में स्थान मिला है। एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स-2024 में भी उत्तराखण्ड ने अपनी श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने उद्यमियों और निवेशकों का आह्वान किया कि वे उत्तराखण्ड में उपलब्ध संभावनाओं का लाभ उठाते हुए निवेश और रोजगार सृजन में भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों को सुरक्षित वातावरण, पारदर्शी व्यवस्था, सरल प्रक्रियाएं और बेहतर निवेश अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को आध्यात्मिक शक्ति केंद्र के साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त राज्य बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है। इसमें उद्योग जगत, व्यापारियों, निवेशकों और युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सीआईआई की पूरी टीम और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा औद्योगिक इकाई द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया गया।

मुख्यमंत्री ने इससे पहले पुलिस लाइन स्थित हेलीपैड पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुलिस जवानों से मुलाकात की। उन्होंने जवानों का हालचाल जाना और प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने जवानों का हौसला बढ़ाते हुए उनका उत्साहवर्धन किया तथा पूरी लगन और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। हरिद्वार में आयोजित इंडस्ट्री कार्यक्रम उत्तराखंड के औद्योगिक विकास में नया आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए उद्योग जगत को गुणवत्ता और नवाचार के साथ आगे बढ़ना होगा। संकल्प और इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। भारत आत्मनिर्भर, स्वाभिमानी और वैश्विक स्तर पर मजबूत राष्ट्र बन सकता है। पिछले वर्षों में हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है।

कार्यक्रम में रानीपुर विधायक आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतिस्वरानंद, अध्यक्ष शिवालिकनगर नगर पालिका राजीव शर्मा, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, राज्य मंत्री आदेश सैनी, विक्रम भुल्लर, अध्यक्ष सीआईआई उत्तराखंड संजय अग्रवाल, वाइस चेयरमैन सीआईआई उत्तरखण्ड सौरव दास, इंडस्ट्री सेक्रेटरी विनय शंकर पांडे, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, प्रबंध निदेशक सिडकुल सौरव गहवार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, निदेशक सीआईआई उत्तराखंड गौरव लांबा, चेयरपर्सन सीआईआई उत्तरखण्ड सोनिया, संदीप जैन सहित उद्योग एवं व्यापार जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


इस्तांबुल एयरपोर्ट ने रचा इतिहास, हीथ्रो को पछाड़ बना दुनिया का सबसे कनेक्टेड एयरपोर्ट

350 शहरों से सीधा जुड़ा इस्तांबुल एयरपोर्ट

इस्तांबुल। यूरोप और एशिया को जोड़ने वाला तुर्की का इस्तांबुल अब वैश्विक विमानन मानचित्र पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुका है। आईजीए इस्तांबुल एयरपोर्ट ने दुनिया के सबसे बेहतर कनेक्टेड एयरपोर्ट का खिताब अपने नाम कर लिया है। ओएजी के मेगाहब्स 2026 इंडेक्स में इस्तांबुल ने लंदन के हीथ्रो को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। वहीं एम्स्टर्डम शिफोल तीसरे, कुआलालंपुर चौथे और शिकागो ओ’हारे पांचवें पायदान पर रहे।

ओएजी की यह रैंकिंग एयरपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी, उपलब्ध उड़ानों, उड़ानों के बीच संभावित कनेक्शन और वहां से जुड़े गंतव्यों की संख्या जैसे मानकों के आधार पर तैयार की गई है। इसके लिए 2 अगस्त के उड़ान आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इस्तांबुल एयरपोर्ट वर्तमान में दुनिया के करीब 350 गंतव्यों से जुड़ा हुआ है, जबकि भविष्य में इसकी कनेक्टिविटी और बढ़ने की संभावना है।

मैनहट्टन से भी बड़ा है एयरपोर्ट परिसर

इस्तांबुल एयरपोर्ट का निर्माण करीब 12 अरब डॉलर की लागत से किया गया और वर्ष 2018 में इसका संचालन शुरू हुआ। शहर के यूरोपीय हिस्से से करीब 20 मील दूर स्थित यह विशाल एयरपोर्ट लगभग 76.5 मिलियन वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है। इसका कुल क्षेत्रफल न्यूयॉर्क के मैनहट्टन से भी ज्यादा है।

एयरपोर्ट का मुख्य टर्मिनल करीब 1.4 मिलियन वर्ग मीटर में फैला हुआ है। यहां हर साल 8.4 करोड़ से अधिक यात्री आवाजाही करते हैं। हालांकि भविष्य में यात्रियों की संख्या को देखते हुए मौजूदा क्षमता को काफी बढ़ाने की तैयारी है। दीर्घकालिक योजना के तहत एयरपोर्ट को सालाना 20 करोड़ यात्रियों को संभालने लायक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

ओएजी के मुख्य विश्लेषक जॉन ग्रांट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भी इस्तांबुल की स्थिति मजबूत रह सकती है। पर्याप्त रनवे क्षमता, तुर्की एयरलाइंस का तेजी से विस्तार और मध्य एशिया के उभरते विमानन बाजारों से इसकी भौगोलिक नजदीकी एयरपोर्ट के लिए बड़ी ताकत है।

9 रनवे तैयार करने की योजना

इस्तांबुल एयरपोर्ट ने हाल ही में अपना चौथा मुख्य रनवे भी शुरू किया है। 2,820 मीटर लंबे इस रनवे की दिशा पूर्व-पश्चिम है। इससे पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानों के लिए टैक्सीिंग और उड़ान संचालन का समय कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही ईंधन की भी बचत संभव है।

एयरपोर्ट की दीर्घकालिक योजना कुल 9 रनवे विकसित करने की है। इनमें 6 मुख्य और 3 रिजर्व रनवे शामिल होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस्तांबुल दुनिया के चुनिंदा ऐसे एयरपोर्टों में शामिल है जिन्हें एक साथ तीन रनवे संचालित करने की अनुमति मिली है। इससे व्यस्त समय में अधिक उड़ानों का संचालन और समय की पाबंदी बेहतर करने में मदद मिलती है।

तुर्की एयरलाइंस बनी कनेक्टिविटी की सबसे बड़ी ताकत

इस्तांबुल एयरपोर्ट की वैश्विक कनेक्टिविटी बढ़ाने में तुर्की एयरलाइंस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। एयरपोर्ट से संचालित होने वाली उड़ानों में करीब 80 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी एयरलाइन की है।

वर्ष 2026 में तुर्की एयरलाइंस करीब 130 देशों के लिए उड़ानें संचालित कर रही है और उसके बेड़े में 500 से अधिक बोइंग और एयरबस विमान शामिल हैं। आधुनिक विमानों की बेहतर ईंधन दक्षता एयरलाइन के लिए परिचालन लागत को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। विमान ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच नया और ईंधन-कुशल बेड़ा प्रतिस्पर्धा में बढ़त देता है।

हीथ्रो और शिफोल की सीमाओं से इस्तांबुल को फायदा

यूरोप के दूसरे बड़े विमानन केंद्रों की सीमाओं ने भी इस्तांबुल एयरपोर्ट के लिए अवसर पैदा किए हैं। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट में तीसरे रनवे की योजना लंबे समय से पर्यावरणीय और स्थानीय विरोध का सामना कर रही है। दूसरी ओर, एम्स्टर्डम के शिफोल एयरपोर्ट पर उड़ानों की संख्या को लेकर सीमाएं लागू हैं।

इसके मुकाबले इस्तांबुल एयरपोर्ट शहर के बाहरी इलाके में विशाल क्षेत्र में बना है। यहां 24 घंटे संचालन की सुविधा के साथ विस्तार के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। यही कारण है कि इसे यूरोप के प्रमुख प्रतिस्पर्धी एयरपोर्टों के मुकाबले अतिरिक्त बढ़त मिल रही है।

वैश्विक संकटों के बीच भी मजबूत हुई कनेक्टिविटी

रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्यपूर्व में जारी तनाव ने वैश्विक विमानन व्यवस्था को प्रभावित किया है। क्षेत्र के कई एयरपोर्टों को उड़ानों में कमी और मार्गों में बदलाव का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद इस्तांबुल की भौगोलिक स्थिति और तुर्की के अंतरराष्ट्रीय संबंधों ने एयरपोर्ट को अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बनाए रखा।

तुर्की एयरलाइंस का स्टॉपओवर कार्यक्रम भी इस्तांबुल को पर्यटन से जोड़ने में मदद करता है। लंबी अवधि के ट्रांजिट वाले यात्रियों को इस्तांबुल में रुककर शहर घूमने और साझेदार होटलों में ठहरने की सुविधा दी जाती है। इससे एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

चीन के एयरपोर्ट दे सकते हैं बड़ी चुनौती

हालांकि आने वाले वर्षों में इस्तांबुल के सामने चीन के बड़े एयरपोर्टों से चुनौती बढ़ सकती है। ओएजी के विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से चार वर्षों में चीनी विमानन केंद्र वैश्विक कनेक्टिविटी की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

चीनी एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और नए मार्गों के बढ़ने से वहां के बड़े एयरपोर्टों की भूमिका भी मजबूत हो रही है। फिलहाल इस्तांबुल के पास अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए मजबूत भौगोलिक स्थिति, तेजी से विस्तार करती राष्ट्रीय एयरलाइन और विशाल विमानन बुनियादी ढांचा मौजूद है। यही वजह है कि इस्तांबुल एयरपोर्ट यूरोप, एशिया और मध्यपूर्व को जोड़ने वाले दुनिया के प्रमुख विमानन केंद्रों में अपनी जगह मजबूत करता जा रहा है।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp