Tuesday, February 24th, 2026

Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल-2026 को भव्य बनाने की तैयारी तेज

Daily Archives: 24/02/2026

नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल-2026 को भव्य बनाने की तैयारी तेज

मुख्य विकास अधिकारी ने की तैयारियों की समीक्षा, विभागों को दिए समयबद्ध कार्य पूरे करने के निर्देश

पौड़ी-  सतपुली-बिलखेत में 26 से 28 फरवरी तक आयोजित होने वाले नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल-2026 को सफल एवं भव्य बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की और सभी तैयारियां समय से पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि तीन दिवसीय इस आयोजन को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे यादगार बनाया जाएगा। उन्होंने रेखीय विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यक्रम स्थल पर अपने-अपने विभागों के स्टॉल अनिवार्य रूप से स्थापित करें, ताकि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक सीधे पहुंच सके। साथ ही संबंधित विभाग लाभार्थियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित करें, जिससे उन्हें योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

मुख्य विकास अधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि आयोजन के दौरान चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य टीम की तैनाती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया जाए, जिससे स्थानीय लोग निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण करा सकें। इसके अतिरिक्त उन्होंने समाज कल्याण विभाग को दिव्यांगजनों के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने पर्यटन विभाग को निर्देशित किया कि कार्यक्रम स्थल के अतिरिक्त प्रमुख स्थानों पर होर्डिंग, पोस्टर एवं बैनर के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिकाधिक पर्यटक और स्थानीय लोग कार्यक्रम में सहभागिता कर सकें। साथ ही संस्कृति विभाग को सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, जिससे आयोजन में सांस्कृतिक रंग भी जुड़ सके।

उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाय। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं आम जनता को भी आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बिलखेत विकासखंड कल्जीखाल, एकेश्वर, द्वारीखाल और कोट का केंद्र है। उन्होंने इन क्षेत्रों के खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विकासखंड क्षेत्रों में आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शिव मोहन शुक्ला, पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, डीपीआरओ जितेंद्र कुमार, जिला पर्यटन विकास अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक रणजीत सिंह नेगी, ग्रामोत्थान परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट, जिला युवा कल्याण अधिकारी रविन्द्र फोनिया, जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविंद कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी जयबीर सिंह रावत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


साकार होगा पौड़ी की विरासत को संजोने का सपना, जिलाधिकारी ने हेरिटेज म्यूजियम की प्रगति की समीक्षा की

पांच दीर्घाओं से म्यूजियम को बनाया जाएगा आकर्षक, जनपद के सांस्कृतिक इतिहास पर रहेगा जोर: जिलाधिकारी

पौड़ी के गौरवशाली इतिहास को मिलेगा स्थायी मंच, हेरिटेज म्यूजियम की तैयारियां तेज

पौड़ी। जनपद पौड़ी के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने जिला मुख्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में हेरिटेज म्यूजियम की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान निर्माणदायी संस्था ने पीपीटी के माध्यम से प्रस्तावित स्वरूप और प्रदर्शित की जाने वाली सामग्रियों की जानकारी दी, जिस पर जिलाधिकारी ने म्यूजियम को जनपद की पहचान के अनुरूप विकसित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित म्यूजियम पौड़ी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास को एक समग्र रूप में प्रस्तुत करेगा। उन्होंने निर्देशित किया कि इसमें पारंपरिक ढोल-दमाऊ, प्राचीन आभूषण एवं वेशभूषा, दुर्लभ छायाचित्र, हिमालय से जुड़ी थ्री-डी प्रस्तुतियां और अन्य महत्वपूर्ण धरोहरों को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाए, जिससे आगंतुकों को जनपद की विरासत का वास्तविक अनुभव हो सके।

बैठक में प्रस्तावित हेरिटेज म्यूजियम की अवधारणा को और अधिक समृद्ध एवं आकर्षक बनाने के उद्देश्य से इसकी विभिन्न थीम आधारित दीर्घाओं (हॉल) पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि म्यूजियम में ‘विरासत भूमि हॉल’ के माध्यम से जनपद के ऐतिहासिक विकास, प्राचीन सभ्यता और महत्वपूर्ण पड़ावों को प्रदर्शित किया जाएगा, वहीं ‘वीर भूमि हॉल’ में वीरभूमि पौड़ी के शहीदों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं सैन्य परंपरा से जुड़े गौरवशाली योगदान को सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाएगा। ‘लोक संस्कृति हॉल’ में जनपद की समृद्ध लोक परंपराओं, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, वेशभूषा, आभूषण, लोक कला एवं रीति-रिवाजों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जबकि ‘तपोभूमि हॉल’ में जनपद के प्राचीन मंदिरों, आध्यात्मिक स्थलों, ऋषि-मुनियों की तपस्थली और धार्मिक महत्व को दर्शाया जाएगा। इसके अतिरिक्त ‘प्राकृतिक हॉल’ में हिमालय की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता, नदियों, वन संपदा और प्राकृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि म्यूजियम परिसर में आगंतुकों के लिए कैफेटेरिया की भी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जिसमें पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को शामिल किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले पर्यटक न केवल जनपद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो सकें, बल्कि स्थानीय खान-पान की विशिष्टता का अनुभव भी कर सकें। यह कैफेटेरिया स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन का माध्यम भी बनेगा।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि म्यूजियम में जनपद के प्रमुख आंदोलनों, ऐतिहासिक घटनाओं और सामाजिक योगदानों को भी समुचित स्थान दिया जाए। साथ ही भवन को पारंपरिक स्वरूप प्रदान करते हुए पठाल का फर्श, प्राचीन उपयोगी वस्तुएं तथा मंदिरों के इतिहास को भी शामिल किया जाए। उन्होंने प्रमाणिक जानकारी संकलित करने के लिए विषय विशेषज्ञों से समन्वय स्थापित करने और 28 फरवरी तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि कार्य समयबद्ध रूप से प्रारंभ किया जा सके।

इस अवसर पर अधिशासी अभियंता लोनिवि रीना नेगी, सहायक अभियंता पुरातत्व अनिल सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, चुनावी राजनीति नहीं- मोहन भागवत

अग्निवीर योजना में सुधार पर मंथन जरूरी- भागवत

देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के उत्तराखंड प्रवास के दूसरे दिन पूर्व सैनिकों एवं पूर्व सेना अधिकारियों के साथ प्रमुख जन गोष्ठी एवं समन्वित संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, चुनावी राजनीति नहीं।

भागवत ने अग्निवीर योजना को एक प्रयोग बताते हुए कहा कि अनुभव के आधार पर इसमें सुधार की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। कश्मीर के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सतर्क नीति आवश्यक है।

भागवत ने कहा कि भारतीय समाज “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना पर आधारित है और समाज में सभी के लिए समान अवसर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कटुता के बजाय संवाद की परंपरा को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने संस्कार, बचत और समाज के प्रति योगदान की भावना विकसित करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्व मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल अजय कोठियाल और कर्नल मयंक चौबे ने भागवत को शाल ओढ़ाकर और पारंपरिक टोपी पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में सेना का नेतृत्व कर चुके छह सेवानिवृत्त जनरल, एक वाइस एडमिरल, डीजी कॉस्ट गार्ड, ब्रिगेडियर और 50 से अधिक कर्नल रैंक के अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा कप्तान और हवलदार रैंक से सेवानिवृत्त सैकड़ों पूर्व सैनिक सैन्य वेशभूषा में उपस्थित रहे। मंच संचालन राजेश सेठी ने किया।
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में समाज की केंद्रीय भूमिका होती है। समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि संगठित और चरित्रवान समाज ही राष्ट्र को स्थायी शक्ति प्रदान करता है।

संवाद सत्र में अग्निवीर, कश्मीर, सामाजिक समरसता और पलायन पर चर्चा की गई। संवाद सत्र में पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, अग्निवीर योजना, सामाजिक समरसता, पलायन और युवाओं से जुड़े विषयों पर प्रश्न पूछे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारी आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति की परंपरा निरंतर चलती रही है। पलायन के मुद्दे पर कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय उद्यमिता के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे। समान नागरिक संहिता को उन्होंने राष्ट्रीय एकात्मता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

भागवत ने पूर्व सैनिकों से सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


क्या लो ब्लड शुगर हाई ब्लड शुगर से ज्यादा खतरनाक है? आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

डायबिटीज से जुड़ी चर्चाओं में अक्सर हाई ब्लड शुगर पर ही ध्यान दिया जाता है, लेकिन लो ब्लड शुगर यानी हाइपोग्लाइसीमिया कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। यह ऐसी स्थिति है जो अचानक आती है और समय पर संभाला न जाए तो कुछ ही मिनटों में जानलेवा बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना और तुरंत कदम उठाना बेहद जरूरी है।

हाइपोग्लाइसीमिया तब होता है जब शरीर में ग्लूकोज का स्तर 70 mg/dL से नीचे गिर जाता है। इस स्थिति में दिमाग को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे व्यक्ति बेहोशी या कोमा में जा सकता है। अक्सर लोग इसके शुरुआती लक्षणों—जैसे पसीना आना, कंपकंपी और घबराहट—को नजरअंदाज कर देते हैं, जो गंभीर गलती साबित हो सकती है।

यह समस्या खासकर तब ज्यादा खतरनाक हो जाती है जब मरीज सो रहा हो या अकेला हो। ऐसे में समय पर मदद मिलना मुश्किल हो सकता है, इसलिए हर डायबिटीज मरीज और उसके परिवार को इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।

लो ब्लड शुगर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दवाओं या इंसुलिन की ज्यादा मात्रा लेना, समय पर खाना न खाना, जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत करना या खाली पेट शराब का सेवन करना इसके प्रमुख कारण हैं। कई बार मरीज दवा लेने के बाद पर्याप्त भोजन नहीं करते, जिससे शरीर का ग्लूकोज संतुलन बिगड़ जाता है।

इसके लक्षण तेजी से सामने आते हैं। अत्यधिक पसीना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर कांपना, धुंधला दिखना या अचानक तेज भूख लगना—ये सभी संकेत हैं कि शुगर लेवल गिर रहा है। कुछ मामलों में चिड़चिड़ापन, भ्रम या बोलने में दिक्कत भी देखी जाती है। अगर समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई जरूरी है। मरीज होश में हो तो उसे तुरंत मीठी चीजें—जैसे ग्लूकोज, जूस या टॉफी—देनी चाहिए। कुछ समय बाद शुगर दोबारा जांचें और जरूरत पड़ने पर यही प्रक्रिया दोहराएं। शुगर सामान्य होने के बाद संतुलित भोजन देना भी जरूरी है, ताकि स्तर फिर से न गिरे।

विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज मरीजों को हमेशा अपने साथ कोई मीठी चीज और पहचान से जुड़ी जानकारी रखनी चाहिए। दवाओं की मात्रा में खुद बदलाव न करें और नियमित रूप से शुगर की जांच करते रहें। याद रखें, जहां हाई शुगर को नियंत्रित करने के लिए समय मिलता है, वहीं लो शुगर में हर पल महत्वपूर्ण होता है।

(साभार)


डीएम ने पकड़ा कूटरचित दस्तावेज से भूमि क्रय-विक्रय मामला, बिल्डर्स क्रेता-विक्रेता पर मुकदमा दर्ज

कोर्ट से प्रतिबंधित जमीन की फर्जी बिक्री, भू-माफियाओं पर कसा शिकंजा

देहरादून। देहरादून में प्रतिबंधित भूमि के अवैध क्रय-विक्रय से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिस पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले का संज्ञान लेते हुए क्रेता और विक्रेता के खिलाफ थाना शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

प्राथमिक जांच में सामने आया कि मौजा आमवाला तरला की विवादित भूमि, जिस पर न्यायालय द्वारा पहले ही खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई गई थी, उसे फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री कर दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित भूमि पीएसीएल (Pearls Agro Tech Corporation Limited) से जुड़ी प्रतिबंधित श्रेणी में आती है। इसके बावजूद विक्रेता ने वास्तविक तथ्य छिपाकर विलेख संख्या 8614/2025 और 8615/2025 का पंजीकरण करा लिया।

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि भूमि का संबंध Golden Forests से जुड़ी परिसंपत्तियों से हो सकता है, जिन पर पहले से विभिन्न स्तरों पर प्रतिबंध लागू हैं। इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने रजिस्ट्रार कार्यालय और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर रजिस्ट्रार देहरादून और उप जिलाधिकारी सदर को विलेखों की दोबारा जांच करने को कहा गया है। साथ ही, यदि इन विलेखों के आधार पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी हुई है, तो उसे तत्काल निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 83 के तहत कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने के आरोप में संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


कृषि मंत्री गणेश जोशी ने ‘कृषि कुम्भ’ में प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित

देहरादून में ‘कृषि कुम्भ-2026’ का समापन, गणेश जोशी रहे मुख्य अतिथि

देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आज देवभूमि उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय प्रेमनगर द्वारा आयोजित ‘कृषि कुम्भ-2026’ के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने मेले में लगाए गए विभिन्न कृषि, बागवानी एवं नवाचार आधारित स्टालों का अवलोकन किया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। साथ ही मंत्री जोशी ने कृषि वानिकी पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया।

अपने संबोधन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है और गाँवों की आत्मा हमारे किसान हैं। किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के सशक्त स्तंभ, पर्यावरण के संरक्षक और संस्कृति के संवाहक भी हैं। उन्होंने कहा कि जब विश्व खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भारतीय किसान अपनी मेहनत, नवाचार और संकल्प से समाधान प्रस्तुत कर रहा है।

कृषि मंत्री जोशी ने कहा कि प्रदेश के किसानों ने जैविक खेती, बागवानी, औषधीय पौधों, श्री अन्न (मिलेट्स), मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन एवं पशुपालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि “किसान मेला” केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव और नवाचार का संगम है, जहाँ किसान, वैज्ञानिक, छात्र और उद्यमी एक मंच पर संवाद कर कृषि के भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा और खेत के बीच की दूरी जितनी कम होगी, कृषि उतनी ही प्रगति करेगी। आज कृषि तकनीक आधारित, वैज्ञानिक और बाज़ार उन्मुख क्षेत्र बन चुकी है। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक, सटीक खेती, मिट्टी परीक्षण, स्मार्ट सिंचाई, जैव उर्वरक एवं डिजिटल मार्केटिंग आधुनिक कृषि के महत्वपूर्ण आयाम हैं।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग, मंडुवा और झंगोरा जैसे मोटे अनाज का प्रसंस्करण, हर्बल उत्पाद, फल प्रसंस्करण, शहद एवं मशरूम उद्योग में अपार संभावनाएँ हैं। राज्य सरकार स्टार्टअप, मुद्रा योजना, आत्मनिर्भर भारत अभियान और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे केवल रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनें और कृषि को उद्यम के रूप में अपनाकर राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

इस अवसर पर कुलपति प्रो० अजय कुमार, रितिका मेहरा, अमन बंसल, पूर्व पार्षद मंजीत रावत सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं एवं कृषकगण शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।


मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित हुई REAP की उच्चाधिकार एवं मार्गदर्शन समिति की बैठक

677.75 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना को मिली मंजूरी

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में ग्रामीण वेग वृद्धि परियोजना (REAP) की उच्चाधिकार एवं मार्गदर्शन समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सचिव डी.एस. गर्ब्याल द्वारा वर्ष 2025-26 की वार्षिक कार्ययोजना के सापेक्ष प्रगति एवं अनुपालन रिपोर्ट तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट का प्रस्तुतीकरण किया गया।

समिति ने वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 677.75 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट को अनुमोदित किया। प्रस्तावित कार्ययोजना में स्वरोजगार, आजीविका संवर्द्धन, आय सृजन गतिविधियों, स्थानीय संसाधन विकास, कृषि एवं सहायक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने संबंधी कार्यक्रमों को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।

2.5 लाख ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य

मुख्य सचिव ने वर्ष 2026-27 के लिए 2.5 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने निर्देश दिए कि REAP परियोजना से लाभान्वित महिलाओं को अन्य विभागीय एवं केंद्र/राज्य योजनाओं से भी जोड़ा जाए तथा सभी योजनाओं का समेकित विवरण संकलित किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण हेतु विभिन्न योजनाओं के साथ प्रभावी कन्वर्जेंस सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीण परिवारों को सतत रूप से ऊपर उठाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने और गहन होमवर्क करने के निर्देश भी दिए गए।

समान प्रकृति के स्वयं सहायता समूहों की पहचान व महिला किसान वर्ष 2026 पर विशेष रणनीति

मुख्य सचिव ने समान कार्य प्रकृति वाले महिला स्वयं सहायता समूहों की पहचान कर उन्हें आजीविका एवं स्वरोजगार की दृष्टि से बेहतर सहयोग देने की रणनीति तैयार करने को कहा। वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में देखते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि ‘लखपति दीदी’ योजना के अंतर्गत महिलाओं को विशेष वित्तीय, तकनीकी, पूंजीगत एवं संस्थागत प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाए। सभी जनपदों में स्वयं सहायता समूहों एवं हितधारकों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित कर उनके मुद्दों को समझते हुए समाधान आधारित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

अनउपयोगी ग्रोथ सेंटर होंगे सक्रिय, पलायन रोकथाम पर फोकस
मुख्य सचिव ने ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ग्रोथ सेंटर की पहचान करने के निर्देश दिए, जिनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि इन अनउपयोगित ग्रोथ सेंटरों को ‘हाउस ऑफ हिमालय’ के माध्यम से प्रभावी रूप से उपयोग में लाने हेतु ठोस योजना तैयार की जाए।

विदित है कि ग्रामीण उद्यम त्वरण परियोजना (ग्रामोत्थान) राज्य के सभी जनपदों में ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुदृढ़ करने और पलायन की रोकथाम के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत कृषि, गैर-कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण जैसे लघु उद्यमों को वित्तीय सहायता एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने के परिप्रेक्ष्य में इस वित्तीय वर्ष महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

इस दौरान बैठक में अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत, नवनीत पांडेय, झरना कमठान व संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।


अनिल कपूर की आगामी फिल्म ‘सूबेदार’ का ट्रेलर हुआ रिलीज

सूबेदार का ट्रेलर रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है, जिसमें अनिल कपूर एक दमदार और अलग अवतार में नजर आ रहे हैं। बड़े पर्दे के बाद अब वह ओटीटी पर अपने एक्शन और इमोशन का नया रंग दिखाने के लिए तैयार हैं। ट्रेलर में उनका लुक, संवाद और एक्शन सीक्वेंस दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं।

फिल्म ‘सूबेदार’ एक्शन और इमोशन का संतुलित मिश्रण है, जिसमें कहानी एक रिटायर्ड फौजी की है, जो एक ऐसे शहर में पहुंचता है जहां अपराध और भय का माहौल हावी है। मोना सिंह फिल्म में एक प्रभावशाली माफिया महिला ‘दीदी’ के किरदार में हैं, जबकि राधिका मदान भी अहम भूमिका निभा रही हैं। कहानी तब मोड़ लेती है जब सूबेदार के साथ अपमानजनक घटना होती है और इसके बाद अन्याय के खिलाफ उसकी लड़ाई शुरू होती है। ट्रेलर में जहां भावनात्मक गहराई दिखती है, वहीं जोरदार एक्शन भी देखने को मिलता है।

फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है, जबकि अनिल कपूर इस प्रोजेक्ट के सह-निर्माता भी हैं। सहायक भूमिकाओं में सौरभ शुक्ला और फैसल शेख भी नजर आएंगे। यह फिल्म 5 मार्च को ओटीटी प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी।

अनिल कपूर के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं। वह War 2 के बाद अब Alpha और King जैसी फिल्मों में भी दिखाई देंगे, जिससे उनके फैंस को लगातार बड़े सरप्राइज मिलने वाले हैं।

(साभार)


रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस जंगल में क्रैश, सात लोगों की दर्दनाक मौत

खराब मौसम बना हादसे की वजह? उड़ान के कुछ देर बाद टूटा संपर्क

रांची। रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस की उड़ान एक बड़े हादसे में बदल गई। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र में विमान के क्रैश होने से उसमें सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। यह हादसा न  सिर्फ एक परिवार के सपनों को तोड़ गया, बल्कि पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो गया। जानकारी के मुताबिक, एयर एंबुलेंस ने शाम करीब 7 बजे रांची से उड़ान भरी थी और उसे रात तक दिल्ली पहुंचना था। लेकिन उड़ान के कुछ ही समय बाद विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया। बाद में पता चला कि विमान सिमरिया के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

विमान में एक गंभीर रूप से घायल मरीज संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। कुछ दिन पहले आग की घटना में वह बुरी तरह झुलस गए थे और उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। परिवार ने बड़ी मुश्किलों के बीच एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी, ताकि उन्हें बेहतर चिकित्सा मिल सके।

इस उड़ान में मरीज के साथ उनकी पत्नी और अन्य परिजन भी मौजूद थे। इसके अलावा मेडिकल टीम और पायलट दल भी सवार था। लेकिन किसे पता था कि यह जीवन बचाने की कोशिश एक दर्दनाक अंत में बदल जाएगी।

बताया जा रहा है कि खराब मौसम के चलते पायलट ने रास्ता बदलने की अनुमति भी मांगी थी। कुछ समय तक संपर्क बना रहा, लेकिन अचानक विमान रडार से गायब हो गया। इसके बाद कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका और थोड़ी देर बाद दुर्घटना की खबर सामने आई।

इस हादसे में मरीज, उनके परिजन, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और दोनों पायलटों समेत कुल सात लोगों की मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर आपातकालीन सेवाओं की चुनौतियों और हवाई सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और प्रशासन हादसे के कारणों की जांच में जुट गया है।


कुंभ मेला 2027 के लिए केंद्र ने दिए 500 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री धामी ने जताया आभार

कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक समरसता का विश्वविख्यात महापर्व है- मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के लिए भारत सरकार द्वारा 500 करोड़ रुपये की धनराशि जारी किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक समरसता का विश्वविख्यात महापर्व है।

केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह धनराशि कुंभ मेला 2027 को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, यातायात प्रबंधन, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री ने पूर्व में प्रधानमंत्री से कुंभ में सहायता हेतु अनुरोध किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार निरंतर उत्तराखंड के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। चारधाम परियोजना, ऑल वेदर रोड, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार सहित विभिन्न विकास कार्यों में केंद्र का सहयोग राज्य के लिए संबल सिद्ध हुआ है। कुंभ मेला 2027 के सफल आयोजन के लिए यह सहयोग राज्य सरकार के संकल्प को और मजबूती प्रदान करेगा।

धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से कुंभ मेला 2027 ऐतिहासिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन के रूप में स्थापित होगा तथा देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्ता पूर्ण कार्य सुनिश्चित करते हुए दिव्य और भव्य कुंभ मेला 2027 आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp