Monday, February 16th, 2026

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स्पोर्ट्स स्कूल कल्चर से खेल भूमि बनेगा उत्तराखंड- रेखा आर्या

Daily Archives: 16/02/2026

स्पोर्ट्स स्कूल कल्चर से खेल भूमि बनेगा उत्तराखंड- रेखा आर्या

समीक्षा बैठक में खेल मंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश

देहरादून। सब कुछ सही रहा तो जल्द ही प्रदेश में स्पोर्ट्स स्कूल खिलाड़ियों को तैयार करते दिखाई देंगे। खेल मंत्री रेखा आर्या ने विभाग को इस कॉन्सेप्ट पर तेजी से काम करने की निर्देश दिए हैं ताकि छोटी उम्र से बच्चों को खेल पर फोकस कराया जा सके।

सोमवार को यमुना कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय पर आयोजित समीक्षा बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश को खेल भूमि के रूप में विकसित करने के लिए यह जरूरी है कि छोटी उम्र से बच्चों को खेल का विशेष प्रशिक्षण मिले। उन्होंने कहा कि अभी हमारे पास 14 स्पोर्ट्स हॉस्टल हैं लेकिन यह पुराना कॉन्सेप्ट आज की जरूरत के हिसाब से उतना कारगर नहीं है। इसलिए इन स्पोर्ट्स हॉस्टल को स्पोर्ट्स स्कूल के रूप में विकसित किया जाए, जहां 6 साल की उम्र से बच्चे खेल के मैदान में रच बस सकें।

बैठक में खेल मंत्री ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर को भी इस तरह के स्कूल शुरू करने के लिए सरकारी मदद कैसे दी जाएगी, इसका प्रस्ताव तैयार करें । साथ ही स्पोर्ट्स नर्सरी बनाने का प्रस्ताव भी अधिकारी जल्द तैयार करें।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि “एक जनपद एक खेल” परिकल्पना के तहत हर जिले में ज्यादा प्रचलित खेल को उस जनपद की पहचान के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए भी प्रस्ताव जल्द कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए गए हैं।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि फिट उत्तराखंड ऐप पर अभी तक प्रदेश के हर उम्र के 1 लाख 22 हजार से ज्यादा एथलीट रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस ऐप पर यह लोग अपनी खेल गतिविधियों के जो वीडियो अपलोड कर रहे हैं, इन वीडियो का विश्लेषण कर इन्हें ऑनलाइन कोचिंग देने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि अग्नि वीर भर्ती प्रशिक्षण केंद्र या ओपन जिम के लिए स्कूल कॉलेज के ग्राउंड का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके अलावा बैठक में खेल मंत्री ने कहा कि हल्द्वानी के खेल विश्वविद्यालय में इसी जुलाई से कक्षाएं शुरू करने की तैयारी पूरी की जाए।

बैठक में विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक आशीष चौहान, अपर निदेशक अजय अग्रवाल, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश मंमगाई आदि उपस्थित रहे।


चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियाँ तेज- गढ़वाल आयुक्त ने स्टेकहोल्डर्स संग की अहम बैठक

चारधाम यात्रा प्रबंधन पर व्यापक चर्चा, पुलिस प्रशासन ने साझा की रणनीति

मुख्यमंत्री के संकल्प के अनुरूप ‘अतिथि देवो भवः’ के साथ चारधाम यात्रा की तैयारियों शुरू

प्रशासन का संकल्पः श्रद्धालुओं को मिले सरल, सुगम और सुरक्षित यात्रा अनुभव

देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा 2026 के सफल, सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित संचालन के उद्देश्य से गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने सोमवार को ट्रांजिट कैम्प, ऋषिकेश में होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों, टूर एंड ट्रेवल्स यूनियन तथा डंडी-कंडी संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में यात्रा के दौरान संभावित चुनौतियों एवं उनके व्यावहारिक समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई। विभिन्न स्टेकहोल्डर्स ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं एवं सुझावों को प्रस्तुत किया। बैठक में गढ़वाल पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप भी मौजूद थे।

गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संकल्प ‘अतिथि देवो भवः’ के अनुरूप चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियाँ व्यापक स्तर पर की जा रही हैं। चारों धामों के कपाट खुलने की तिथियां घोषित हो चुकी हैं। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 19 अप्रैल 2026 को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे, जबकि श्री केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 तथा श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे।

आयुक्त ने कहा कि यात्रा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा। होटल एसोसिएशन, टूर एंड ट्रेवल्स यूनियन तथा डंडी-कंडी संचालकों द्वारा उठाई गई व्यवहारिक समस्याओं के समाधान हेतु अपर आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। समिति की संस्तुतियाँ प्राप्त होते ही एक-दो दिवस के भीतर आवश्यक निर्णय लेते हुए चारधाम पंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ करने का प्रयास किया जाएगा।

होटल एसोसिएशन की मांग पर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष यात्रियों की संख्या सीमित नहीं की जाएगी, यद्यपि प्रत्येक यात्री के लिए पंजीकरण अनिवार्य रहेगा। फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाने हेतु न्यूनतम पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया जाएगा। साथ ही, पंजीकरण प्रक्रिया को सरल, सुगम एवं पारदर्शी बनाया जाएगा।

टूर एंड ट्रेवल्स यूनियन की मांग पर आयुक्त ने निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा में स्थानीय वाहनों को ही प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। आयुक्त ने परिवहन विभाग को निजी वाहनों द्वारा अवैध रूप से किराए पर सवारी ढोने की प्रवृत्ति पर कठोर प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, जिससे अधिकृत वाहन संचालकों के हितों की रक्षा हो तथा यात्रियों की सुरक्षा एवं व्यवस्था सुचारू बनी रहे। इसके अतिरिक्त जिन होटलों में यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था होगी, उन्हीं परिसरों में वाहनों की पार्किंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। डंडी-कंडी संचालकों के साथ हुई वार्ता में आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को उनके पंजीकरण, सत्यापन एवं शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान होटल एसोसिएशन द्वारा पंजीकरण प्रक्रिया को समय पर प्रारंभ करने, चारों धाम की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को प्राथमिकता देने, होटल बुकिंग कराने वाले यात्रियों को वरीयता प्रदान करने तथा पंजीकरण प्रणाली को अधिक सुगम बनाने के सुझाव दिए गए। वहीं टूर एंड ट्रेवल्स यूनियन ने बाहरी ट्रेवल एजेंसियों के वाहनों पर प्रतिबंध लगाने एवं निजी वाहनों द्वारा सवारी ढोने पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।

गढ़वाल आयुक्त ने सभी स्टेक होल्डर्स को आश्वस्त किया कि उनके महत्वपूर्ण सुझावों को अमल में लाकर चारधाम यात्रा को सरल, सुगम एवं सुरक्षित बनाया जाएगा तथा यात्रा के सफल संचालन हेतु हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

बैठक में पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग विशाल मिश्रा, अपर आयुक्त प्रशासन उत्तम सिंह चौहान, सभागीय परिवहन अधिकारी देहरादून संदीप सैनी, उप निदेशक पर्यटन अमित लोहनी, नियंत्रक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मन महोन सिंह रावत, अध्यक्ष चारधाम एशोसिएशन राजेश मेहता, शैलेन्द्र मठूडा, शैलेश ध्यानी, सचिव होटल एशोसिएशन मनोज सेमवाल, निखिलेश सेमवाल, बीपी नैथानी, सुभाष सिंह, धीरज सेमवाल, अनिल कुमार, विनोद डिमरी, अमर बेलवाल सहित चारधाम यात्रा से जुड़े विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं होटल एशोसिएशन, टूर एंड ट्रेवल्स व डंडी-कडी संचालकों के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।


डी-रेगुलेशन कम्प्लायंस में उत्तराखंड को देश में पांचवां स्थान

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (फेज-2) के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा

देहरादून। केंद्र सरकार द्वारा कारोबार में सुगमता बढ़ाने के लिए गठित टास्क फोर्स की अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मीता राजीव लोचन तथा मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (फेज-2) के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई।

मीता राजीव लोचन ने बताया कि उत्तराखंड ने डी-रेगुलेशन 1.0 कम्प्लायंस रिडक्शन में देश में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने सिंगल विंडो सिस्टम, भूमि उपयोग, होम स्टे, उद्यमिता और श्रम सुधार के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि फेज-2 के तहत राज्य के लिए भूमि उपयोग, भवन एवं निर्माण स्वीकृति हेतु सिंगल विंडो सिस्टम, पर्यावरण और पर्यटन क्षेत्र में नवाचार सहित कुल 9 प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैं। इनका उद्देश्य विकास कार्यों को गति देना, निवेश और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना तथा नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योगों से संबंधित प्रस्तावों को निर्धारित समय सीमा के भीतर स्वीकृति देने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही छोटे उद्योगों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन प्रणाली लागू कर निवेश को बढ़ावा दिया जाए।

उन्होंने बताया कि राज्य का विनिर्माण क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में 26 प्रतिशत योगदान दे रहा है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इस क्षेत्र का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित किया जा रहा है। कुशल मानव संसाधन, उच्च साक्षरता दर, बेहतर जीवन गुणवत्ता और प्राकृतिक वातावरण के कारण उत्तराखंड निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन रहा है।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। भवन एवं निर्माण, बिजली, श्रम, अग्निशमन, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। निवेश बढ़ाने के लिए नियमों को निवेशकों के अनुकूल बनाया जा रहा है।

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस फेज-2 के तहत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का समयबद्ध और समन्वित ढंग से पालन सुनिश्चित किया जाए, जिससे राज्य में निवेश का माहौल और अधिक सरल और अनुकूल बनाया जा सके।

बैठक में केंद्रीय अपर सचिव राहुल शर्मा, राजेश शर्मा, सचिव आर. राजेश कुमार, श्रीधर बाबू अदांकी, रंजीत सिन्हा, रविशंकर, विशेष सचिव मधुकर पराग धकाते, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव, डॉ. सौरभ गहरवार, अभिषेक रोहेला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


सुदीप्तो सेन की आगामी फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ का टीजर हुआ रिलीज

निर्देशक सुदीप्तो सेन की आगामी फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ का टीजर जारी कर दिया गया है। टीजर सामने आते ही फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि में रची गई यह फिल्म अंधविश्वास, रूढ़ परंपराओं और आस्था के नाम पर होने वाले अमानवीय कृत्यों पर तीखे सवाल उठाती नजर आती है।

टीजर में दिखी डर और आस्था की टकराहट

टीजर की शुरुआत चरक मेले के रहस्यमय और भयावह माहौल से होती है, जहां एक समुदाय यह मानता है कि यह पर्व उनकी अधूरी मनोकामनाओं को पूरा करने का आखिरी अवसर है। जैसे-जैसे अनुष्ठान आगे बढ़ते हैं, कहानी गहराती जाती है और दर्शकों के सामने ऐसी परंपराओं की झलक आती है, जो आस्था और क्रूरता के बीच की सीमा को धुंधला कर देती हैं।

तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास की परतें

फिल्म भारतीय तांत्रिक परंपराओं के उस संसार को टटोलने की कोशिश करती है, जो आमतौर पर रहस्य और भय से घिरा रहता है। टीजर में अघोरी साधना, तंत्र-मंत्र और बलि जैसी प्रथाओं की झलक दिखाई गई है, जो दर्शकों को असहज करने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर करती है। यह कहानी केवल डर पैदा नहीं करती, बल्कि विश्वास और विवेक के बीच के संघर्ष को भी उभारती है।

दमदार कलाकारों की मौजूदगी

शीलादित्य मौलिक के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अंजली पाटिल, सुब्रत दत्ता, नलनीश नील सहित कई अनुभवी कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। सभी कलाकारों के किरदार टीजर में मनोवैज्ञानिक रूप से गहरे और प्रभावशाली दिखाई देते हैं।

6 मार्च को होगी सिनेमाघरों में रिलीज

‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ 6 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। टीजर से साफ है कि यह फिल्म आस्था, परंपरा और कट्टरता के बीच की पतली रेखा पर सवाल उठाते हुए दर्शकों को एक असहज लेकिन जरूरी सिनेमाई अनुभव देने वाली है। टीजर के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

(साभार)


मसूरी की माल रोड पर दौड़ेंगी 54 गोल्फ कार्ट, परिवहन व्यवस्था होगी आधुनिक

“दो चालक–एक गोल्फ कार्ट” मॉडल से सुरक्षित रहेगी रिक्शा चालकों की आजीविका

मसूरी। पर्यटन नगरी मसूरी की पहचान मानी जाने वाली माल रोड पर जल्द ही आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था का विस्तार होने जा रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर माल रोड में कुल 54 गोल्फ कार्ट संचालित की जाएंगी, जिससे पर्यटकों को सुविधाजनक आवागमन मिलेगा और स्थानीय रिक्शा चालकों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी।

“दो चालक–एक गोल्फ कार्ट” मॉडल लागू

जिला प्रशासन ने रिक्शा चालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए “दो चालकों पर एक गोल्फ कार्ट” मॉडल लागू करने का निर्णय लिया है। इससे परंपरागत रोजगार पर कोई असर नहीं पड़ेगा और चालक आधुनिक परिवहन व्यवस्था से भी जुड़ सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि यह मॉडल रोजगार सुरक्षा और तकनीकी विकास के बीच संतुलन स्थापित करेगा।

14 से बढ़कर 54 होगी गोल्फ कार्ट की संख्या

वर्ष 2024 में इस योजना की शुरुआत केवल चार गोल्फ कार्ट के साथ की गई थी। वर्तमान में 14 गोल्फ कार्ट संचालित हो रही हैं, जबकि अब 40 नई गोल्फ कार्ट शामिल किए जाने से इनकी कुल संख्या 54 हो जाएगी। इससे पर्यटकों को सुरक्षित, आरामदायक और प्रदूषण रहित परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

सीएसआर से मिली 3.36 करोड़ की स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप जिलाधिकारी द्वारा इस योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया था। लगभग नौ महीने की प्रक्रिया और कई दौर की बैठकों के बाद भारत सरकार की संस्था आरईसी लिमिटेड से सीएसआर मद में 3.36 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली।

बिना सरकारी खर्च के साकार हुई योजना

जिला प्रशासन के अनुसार, इस योजना से राज्य सरकार के खजाने पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। गोल्फ कार्ट संचालन से जहां मसूरी में आधुनिक और सुव्यवस्थित यातायात प्रणाली विकसित होगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्थानीय चालकों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

प्रशासन का कहना है कि यह पहल मसूरी को आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी।


सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने निर्माणाधीन सैन्य धाम के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने आज कैंप कार्यालय में देहरादून के गुनियाल गांव में निर्माणाधीन सैन्य धाम के अंतिम चरण के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक के दौरान मंत्री गणेश जोशी ने लोकार्पण से पूर्व सभी निर्माण कार्यों को समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि सैन्य धाम केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि वीर शहीदों के सम्मान और प्रदेश की गौरवशाली सैन्य परंपरा का प्रतीक है, इसलिए कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

सैनिक कल्याण मंत्री ने अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि लोकार्पण कार्यक्रम गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। उन्होंने कहा कि सैन्य धाम उत्तराखंड के वीर जवानों के शौर्य और बलिदान को समर्पित है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्थल बनेगा। इस दौरान सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उपनल (UPNL) के अधिकारियों को विदेशों में रोजगार के अवसरों के संबंध में आवश्यक प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्थाओं के तहत 50 प्रतिशत पद पूर्व सैनिकों तथा शेष 50 प्रतिशत पदों पर गैर-सैनिक युवाओं को अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि दोनों वर्गों को समान रूप से लाभ मिल सके।

इस अवसर पर सचिव सैनिक कल्याण दीपेंद्र चौधरी, अपर सचिव सैनिक कल्याण श्याम सिंह, उपनल एमडी ब्रिगेडियर जेएनएस बिष्ट, उपनिदेशक विंग कमांडर निधि बधानी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।


प्रदेश में एक बार फिर करवट ले सकता है मौसम, कुछ जिलों में हल्की बारिश व बर्फबारी की संभावना

इन जिलों में बदल सकता है मौसम

देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक मंगलवार को प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश व बर्फबारी के आसार हैं।

मंगलवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में हल्की वर्षा और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। विशेष रूप से 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ गिरने के आसार हैं।

मैदानी इलाकों में रहेगा साफ मौसम

मौसम विभाग के अनुसार राज्य के मैदानी और निचले क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना रहेगा। 18 फरवरी को भी पहाड़ी जिलों में इसी तरह का मौसम रहने की संभावना है, जबकि 19 से 21 फरवरी तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ और शुष्क रहने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव का तापमान पर बहुत अधिक असर पड़ने की संभावना नहीं है।

धूप से बढ़ा तापमान

रविवार को मैदान से लेकर पहाड़ तक खिली तेज धूप ने गर्मी का अहसास करा दिया। राजधानी देहरादून में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से करीब चार डिग्री अधिक बढ़कर 26.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी सामान्य से दो डिग्री ऊपर 11.2 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी तापमान में इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई।


इयरफोन की लत बना सकती है आपको बहरा, समय रहते हो जायें सावधान

आज के स्मार्टफोन और डिजिटल गैजेट्स के दौर में इयरफोन और हेडफोन हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं। कामकाज, पढ़ाई, मनोरंजन या सफर—हर जगह इनका इस्तेमाल आम हो गया है। लेकिन जिस सुविधा ने जीवन को आसान बनाया है, वही आदत अगर लापरवाही से अपनाई जाए तो सुनने की क्षमता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

तेज आवाज से बढ़ता बहरापन का खतरा

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक तेज आवाज में इयरफोन या हेडफोन लगाने से कान के अंदर मौजूद बेहद संवेदनशील कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। खासतौर पर 85 डेसिबल से अधिक की आवाज को लगातार सुनना सुनने की शक्ति को धीरे-धीरे कमजोर करता है। इस स्थिति को ‘नॉइज-इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस’ कहा जाता है, जो अक्सर स्थायी होती है।

धीरे-धीरे उभरते हैं लक्षण

बहरापन किसी एक दिन में नहीं होता। शुरुआत में कान में भारीपन, सीटी जैसी आवाज, या बातचीत के दौरान शब्द साफ न सुनाई देना जैसे संकेत दिखते हैं। अगर इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, तो कम उम्र में ही गंभीर श्रवण समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

इयरफोन से कानों को कैसे पहुंचता है नुकसान

इयरबड्स सीधे कान की नली में फिट होते हैं, जिससे ध्वनि और कान के पर्दे के बीच कोई दूरी नहीं रहती। तेज आवाज का सीधा दबाव अंदर मौजूद तरल और नसों को प्रभावित करता है। लगातार ऐसा होने पर सुनने वाली नसें कमजोर हो जाती हैं और सामान्य आवाजें भी अस्पष्ट लगने लगती हैं।

कानों की सुरक्षा का आसान उपाय: 60/60 नियम

विशेषज्ञों की सलाह है कि हेडफोन या इयरफोन का इस्तेमाल करते समय ‘60/60 नियम’ अपनाना चाहिए। यानी, वॉल्यूम को अधिकतम 60 प्रतिशत से ऊपर न रखें और लगातार 60 मिनट से ज्यादा इस्तेमाल न करें। हर घंटे के बाद 10–15 मिनट का ब्रेक देना कानों के लिए जरूरी है, ताकि वे खुद को रिकवर कर सकें।

इयरफोन या हेडफोन—कौन सा बेहतर?

स्वास्थ्य के लिहाज से ओवर-द-इयर हेडफोन को इयरबड्स से थोड़ा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि वे कान के पर्दे से कुछ दूरी पर रहते हैं और बाहरी शोर को भी कम करते हैं। इससे तेज वॉल्यूम की जरूरत कम पड़ती है। हालांकि, गलत इस्तेमाल दोनों ही मामलों में नुकसानदायक हो सकता है।

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

अगर कान में दर्द, झनझनाहट, बार-बार आवाज समझने में परेशानी या बातचीत के दौरान शब्द गुम हो जाने जैसी दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत इयरफोन का इस्तेमाल कम करें और विशेषज्ञ से सलाह लें। याद रखें, सुनने की शक्ति एक बार चली जाए तो उसे वापस पाना बेहद मुश्किल होता है।

निष्कर्ष:
डिजिटल दुनिया में रहते हुए तकनीक से दूरी बनाना मुश्किल है, लेकिन थोड़ी सावधानी और सही आदतें अपनाकर हम अपनी सुनने की अनमोल शक्ति को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।

(यह लेख सामान्य मेडिकल जानकारियों और विशेषज्ञ सलाह पर आधारित है।)

(साभार)


बर्तन की दुकान में गैस सिलेंडर फटने से लगी भीषण आग, इलाके में मची अफरा-तफरी

दमकल विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू

ऋषिकेश। शहर के चंद्रेश्वर नगर क्षेत्र में सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक बर्तन की दुकान में रखे गैस सिलेंडर में अचानक विस्फोट हो गया। तेज धमाके के साथ दुकान से आग की ऊंची लपटें और घना धुआं उठने लगा, जिससे आसपास के रिहायशी इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह के समय हुए जोरदार धमाके से आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय लोगों ने तुरंत दुकानदार को सूचना दी और अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत दमकल विभाग को मौके पर बुलाया गया।

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि, तब तक दुकान में रखा बर्तनों का पूरा सामान जलकर राख हो चुका था, जिससे दुकानदार को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

गनीमत यह रही कि घटना के समय दुकान में कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। बड़ा हादसा टलने पर स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।


आरएसएस के समर्थन के बिना कमजोर है भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व- प्रियांक खरगे

कर्नाटक में सियासी घमासान, मंत्री प्रियांक खरगे का आरएसएस पर तीखा हमला

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में सियासी तापमान एक बार फिर चढ़ गया है। मंत्री प्रियांक खरगे ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोलते हुए उसे भारतीय जनता पार्टी की “वैचारिक धुरी” बताया। उन्होंने संघ की फंडिंग, कानूनी हैसियत और संवैधानिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

“भाजपा छाया है, असली ताकत आरएसएस”

खरगे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व संघ के समर्थन के बिना कमजोर पड़ जाता है। उनके मुताबिक, यदि आरएसएस का वैचारिक और सांगठनिक सहयोग न हो, तो भाजपा की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में केवल “छाया” से नहीं, बल्कि असली शक्ति केंद्र से सवाल पूछने की जरूरत है।

फंडिंग और जवाबदेही पर सवाल

मंत्री ने संघ की आय के स्रोतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “गुरु दक्षिणा” के नाम पर होने वाले चंदे की पारदर्शिता स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और संस्थाओं को अपने वित्तीय लेन-देन का हिसाब देना पड़ता है, तो संघ इससे अलग कैसे हो सकता है। खरगे ने कहा कि बिना पंजीकरण और स्पष्ट कानूनी ढांचे के कोई भी संस्था जवाबदेही से बच नहीं सकती।

पंजीकरण और कानून का मुद्दा

खरगे ने आरएसएस की कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संगठन कानून और संविधान के दायरे में आता है या नहीं। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरएसएस खुद को केवल व्यक्तियों का समूह मानता है, तो फिर क्लबों और एसोसिएशनों की तरह उसका पंजीकरण और कर दायित्व क्यों नहीं है।

धार्मिक विमर्श पर टिप्पणी

धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बोलते हुए खरगे ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की मूल भावना और आज की व्याख्याओं में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा या विभाजन को बढ़ावा देना किसी भी रूप में उचित नहीं है।


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