Friday, February 20th, 2026

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दून पुलिस की बड़ी कार्रवाई- 1 किलो से अधिक गांजे के साथ युवक गिरफ्तार

Daily Archives: 20/02/2026

दून पुलिस की बड़ी कार्रवाई- 1 किलो से अधिक गांजे के साथ युवक गिरफ्तार

ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के तहत तस्करों पर शिकंजा

देहरादून। उत्तराखंड को “ड्रग्स फ्री देवभूमि” बनाने के लक्ष्य के तहत पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जिलेभर में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

इसी क्रम में सहसपुर थाना क्षेत्र की पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने उस्मानपुर कब्रिस्तान के पास से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए अभियुक्त की पहचान अजय (32 वर्ष) के रूप में हुई है, जिसके कब्जे से 1 किलो 178 ग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह खुद भी नशे का आदी है और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वह कम दामों में गांजा खरीदकर अधिक कीमत पर बेचने की योजना बना रहा था। हालांकि, इससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में नशे के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।


मसूरी में अतिरिक्त गोल्फकार्ट संचालन लिए जिला प्रशासन और आरईसी लिमिटेड के बीच इसी माह होगा एमओयू

गोल्फकार्ट योजना से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिलेगी सुरक्षित व सुविधाजनक यात्रा

देहरादून। पर्यटन नगरी मसूरी में यातायात व्यवस्था को सुगम और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। जल्द ही शहर को 40 नए गोल्फकार्ट की सुविधा मिलने जा रही है, जिससे कुल संख्या बढ़कर 54 हो जाएगी। यह पहल जिला प्रशासन और आरईसी लिमिटेड (भारत सरकार) के सहयोग से लागू की जा रही है। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच जल्द ही औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रिक्शा यूनियन के पदाधिकारियों की उपस्थिति रहेगी।

जिलाधिकारी सविन बंसल के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य मसूरी में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना, प्रदूषण रहित परिवहन को बढ़ावा देना और पर्यटकों व स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना है। खासतौर पर माल रोड और कैमलबैक रोड पर जाम की समस्या को कम करने में यह कदम अहम साबित होगा। इस पहल से स्थानीय रिक्शा चालकों को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें गोल्फकार्ट संचालन का प्रशिक्षण देकर बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और पर्यटकों को भी इससे बड़ी राहत मिलेगी।

जिला प्रशासन ने गोल्फकार्ट संचालन के लिए मार्ग निर्धारण, पार्किंग, चार्जिंग स्टेशन और सुरक्षा मानकों की व्यवस्था समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया कि इस परियोजना के लिए सीएसआर फंड के तहत करीब 3.36 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इससे पहले दिसंबर 2024 में मसूरी में गोल्फकार्ट सेवा की शुरुआत की गई थी, जो अब विस्तार के साथ एक बड़े स्तर पर लागू की जा रही है।

प्रशासन का मानना है कि यह पहल मसूरी को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।


जनसहभागिता से तैयार होगा जनोन्मुखी बजट, सुझावों को मिलेगा नीतियों में स्थान- मुख्यमंत्री

जनपद मुख्यालय में बजट पूर्व संवाद- संवाद, सहयोग, सुझाव और सहभागिता उत्तराखंड की ताकत

मुख्यमंत्री के आगमन से पौड़ी में दिखा उत्साह, विकास और बजट पर हुआ सीधा संवाद

जनसहभागिता से तैयार होगा जनता का बजट, रांसी में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में व्यापक मंथन

पर्वतीय विकास, रोजगार और आधारभूत संरचना पर केंद्रित रहा बजट पूर्व संवाद

पौड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल, जनसहभागिता से आकार लेगा भविष्य का बजट

समावेशी, पारदर्शी और दूरदर्शी बजट की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल

मुख्यमंत्री के पौड़ी दौरे से विकास को मिली नई दिशा, जनअपेक्षाओं पर हुआ सीधा संवाद

पौड़ी। जनपद पौड़ी के रांसी स्थित बहुउद्देश्यीय भवन में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंडल मुख्यालय पहुंचने पर मुख्यमंत्री का जोर शोर से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए जनप्रतिनिधियों, कृषकों, उद्यमियों, व्यापारियों, महिला समूहों, पर्यटन व्यवसायियों, मत्स्य पालकों, कृषि वैज्ञानिकों, स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों ने सहभागिता करते हुए आगामी बजट के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा जनहितकारी बजट तैयार करना है, जो प्रदेश की जमीनी आवश्यकताओं, क्षेत्रीय विशेषताओं और जनअपेक्षाओं के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण का रोडमैप है, जिसमें प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने इस संवाद में शामिल होकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव देने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि समाज के प्रत्येक वर्ग जैसे पर्यटन व्यवसायियों, व्यापारियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों और उद्यमियों की अपेक्षाएं और आवश्यकताएं बजट में समुचित रूप से परिलक्षित हों। उन्होंने कहा कि इस संवाद के दौरान अनेक व्यावहारिक और दूरदर्शी सुझाव प्राप्त हुए हैं, जो राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य के निर्माण का रोडमैप होता है। उन्होंने कहा कि बजट निर्माण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सहभागी और जनोन्मुखी बनाने का संकल्प लिया है। सीमांत क्षेत्रों सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर संवाद कर सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है और व्यापार, उद्योग, पर्यटन, कृषि एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में होमस्टे, स्वरोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिला है। सरकार का लक्ष्य किसानों को उद्यमी के रूप में विकसित करना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट पूर्व संवाद के दौरान प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण कर उन्हें आगामी बजट और नीतिगत निर्णयों में यथासंभव शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा बजट प्रस्तुत करना है, जो आकार में व्यापक, प्रभाव में ठोस और पूरी तरह जनहित पर केंद्रित हो, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को आत्मनिर्भर एवं अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश ने वित्तीय अनुशासन और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता से तैयार होने वाला यह बजट राज्य की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करते हुए समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संवाद के दौरान ग्रामीण विकास को गति देने के लिए अनुदान में वृद्धि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था सुदृढ़ करने, सीवर लाइन एवं शौचालय निर्माण, पंचायतों को सशक्त बनाने, बंजर भूमि के उत्पादक उपयोग तथा ग्राम स्तर पर सोलर प्लांट संचालन जैसे सुझाव प्राप्त हुए। शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निकायों के संसाधन बढ़ाने, सोलर सिटी की अवधारणा को बढ़ावा देने, पार्किंग व सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने तथा शहरी आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया गया।

कृषि एवं उद्यान क्षेत्र में पर्वतीय कृषि को प्रोत्साहन, बागवानी एवं उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा हेतु प्रभावी उपाय, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, कोल्ड स्टोरेज एवं क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने के सुझाव सामने आए। कृषकों के तकनीकी प्रशिक्षण, जिला स्तर पर प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना तथा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

उद्योग एवं एमएसएमई क्षेत्र में पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग स्थापना हेतु पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज अनुदान, मशीनरी पर विशेष छूट, सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा तथा स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन की मांग रखी गई। आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों को उद्योगों से सीधे जोड़ने, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और पलायन रुके, इस पर भी सुझाव दिए गए।

महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने तथा स्थानीय सेवाओं में महिलाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई। गौशालाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने, जैविक खाद उत्पादन को प्रोत्साहन देने तथा मत्स्य पालन के लिए आधुनिक तकनीकों एवं बायोफ्लॉक टैंकों को बढ़ावा देने के सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।

पर्यटन क्षेत्र में होमस्टे के लिए रियायती ऋण सुविधा, हैली सेवा का विस्तार, वैकल्पिक मार्गों का निर्माण, छोटे पर्यटन स्थलों का विकास, संस्कृत ग्रामों एवं सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटक ग्राम के रूप में विकसित करने, नेचर एवं एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा देने तथा स्थानीय उत्पादों के विपणन के लिए ठोस नीति बनाने की आवश्यकता बताई गई।

ऊर्जा क्षेत्र में ऊर्जा नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने, कृषि एवं उद्योग आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने हेतु कर एवं शुल्क में राहत तथा ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के सुझाव भी प्राप्त हुए।

बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम में स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि जनसहभागिता के आधार पर तैयार होने वाला बजट ही प्रदेश के समग्र विकास की नींव बनेगा। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, कृषि, लघु उद्योग एवं आधारभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आगामी बजट जनअपेक्षाओं के अनुरूप होगा और पौड़ी सहित पूरे प्रदेश के संतुलित विकास को नई दिशा देगा।

वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सभी होमस्टे संचालकों, एमएसएमई उद्यमियों, लखपति दीदियों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संवाद का उद्देश्य आगामी बजट को जनभावनाओं, स्थानीय आवश्यकताओं और विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप दिशा देना है, ताकि वित्तीय संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए अधिकतम जनकल्याण सुनिश्चित किया जा सके। राज्य में आधारभूत संरचना, पर्यटन, कनेक्टिविटी, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर सकारात्मक प्रगति हो रही है, जिससे विकास की नई संभावनाएं साकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रत्येक रुपया पारदर्शिता के साथ सही व्यक्ति तक पहुंचे और उसका अधिकतम जनहित में उपयोग हो। बजट पूर्व संवाद इसी सहभागी सोच का महत्वपूर्ण माध्यम है। आप सभी से अपेक्षा है कि अपने संक्षिप्त, व्यवहारिक एवं दूरदर्शी सुझाव प्रस्तुत कर आगामी बजट को और अधिक जनोन्मुखी, प्रभावी एवं विकासोन्मुख बनाने में सक्रिय योगदान दें।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने सभी जनप्रतिनिधियों, हितधारकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के संवाद से जनता की सहभागिता और विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझाव प्रदेश के संतुलित, समावेशी एवं सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होंगे।

बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का संचालन अपर सचिव मनमोहन मैनाली द्वारा किया गया। कार्यक्रम में कृषि, उद्योग, व्यापार, पंचायत, शहरी विकास आदि से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। जिला पंचायत पौड़ी की अध्यक्षा रचना बुटोला, मेयर नगर निगम श्रीनगर आरती भंडारी, ऋषिकेश शंभू पासवान, कोटद्वार शैलेन्द्र रावत, रुड़की अनीता देवी अग्रवाल, नगर पालिकाध्यक्ष पौड़ी हिमानी नेगी, आयुक्त गढ़वाल/सचिव उद्योग विनय शंकर पांडे, पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, संयुक्त सचिव सुरेन्द्र सिंह रावत, आयुक्त ग्राम विकास अनुराधा पाल, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. सौरभ गहरवार, अभिषेक रोहिला, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, अपर ज़िलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिलाध्यक्ष भाजपा कमल किशोर रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषक, उद्यमी, जनप्रतिनिधि तथा हितधारक मौजूद रहे।


एआई समिट के दौरान यह प्रदर्शन अचानक नहीं, बल्कि पूरी योजना के तहत किया गया- संबित पात्रा

भारतीय युवा कांग्रेस के प्रदर्शन पर बवाल, भाजपा ने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला 

नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चल रहे एआई शिखर सम्मेलन के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस घटना के बाद सियासी माहौल गरमा गया है और भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन अचानक नहीं, बल्कि पूरी योजना के तहत किया गया था। उनका कहना है कि इसमें शामिल लोग पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी थे, जिन्होंने पहले से रजिस्ट्रेशन कर कार्यक्रम स्थल में प्रवेश लिया और बाद में विरोध प्रदर्शन किया। पात्रा ने दावा किया कि इस पूरी घटना की रणनीति शीर्ष स्तर पर तैयार की गई थी।

भाजपा ने इस घटना को देश की छवि से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना साधा। पार्टी ने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं। भाजपा के अनुसार, जब देश वैश्विक स्तर पर तकनीकी नेतृत्व को प्रदर्शित कर रहा है, तब इस तरह के विरोध से गलत संदेश जाता है।

वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस समय दुनिया भारत की तकनीकी प्रगति को देख रही थी, उस समय इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय छवि को प्रभावित करने वाले कदम उचित नहीं हैं।

पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर भाजपा इसे देश की छवि से जुड़ा मुद्दा बता रही है, तो वहीं विपक्ष की ओर से इस पर प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। अब देखना होगा कि यह विवाद आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ता है।


“फ्लोरल हीलिंग” थीम पर होगा वसंतोत्सव, फूलों के जरिए स्वास्थ्य और प्रकृति का संदेश

लोक भवन में 27 फरवरी से 1 मार्च तक चलेगा ‘वसंतोत्सव’

देहरादून। देहरादून में बसंत ऋतु के स्वागत के लिए इस बार भी रंग-बिरंगा ‘वसंतोत्सव’ आयोजित होने जा रहा है। लोक भवन में 27 फरवरी से 1 मार्च तक चलने वाले इस उत्सव की थीम “फ्लोरल हीलिंग” रखी गई है, जिसका उद्देश्य फूलों के जरिए प्रकृति, स्वास्थ्य और मानसिक सुकून के महत्व को उजागर करना है। यह आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि स्थानीय उत्पादों और किसानों को भी एक मजबूत मंच प्रदान करता है।

इस संबंध में गुरमीत सिंह ने बताया कि वसंतोत्सव अब देहरादून की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव पुष्प पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन को भी नई दिशा देता है। 27 फरवरी को सुबह 11 बजे उद्घाटन के बाद पहले दिन दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक और बाकी दिनों में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक आम लोगों के लिए प्रवेश निशुल्क रहेगा।

उत्सव में इस बार कुल 15 प्रमुख प्रतियोगिताएं और 55 उपश्रेणियां शामिल होंगी, जिनमें कट फ्लावर, पॉटेड प्लांट और हैंगिंग गार्डन जैसी आकर्षक श्रेणियां होंगी। विजेताओं को कुल 165 पुरस्कार दिए जाएंगे। खास बात यह है कि दिव्यांग बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी, वहीं पहली बार हाइड्रोपोनिक तकनीक पर आधारित प्रतियोगिता को भी शामिल किया गया है।

तकनीक का इस्तेमाल भी इस बार वसंतोत्सव की खास पहचान होगा। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय और आईटीडीए मिलकर एक विशेष ऐप के जरिए आगंतुकों की संख्या और उनकी भावनात्मक प्रतिक्रिया (इमोशनल मैपिंग) का अध्ययन करेंगे। इसके अलावा एनआईईपीवीडी के छात्र रिदमिक योगा का लाइव प्रदर्शन भी करेंगे।

कार्यक्रम में फूड कोर्ट में मिलेट्स आधारित व्यंजन, आर्ट गैलरी, डाक टिकट प्रदर्शनी और कई सांस्कृतिक गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले तीन किसानों और तीन महिला किसानों को ‘गवर्नर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाएगा।

कुल मिलाकर, वसंतोत्सव न केवल फूलों की खूबसूरती का उत्सव है, बल्कि यह प्रकृति, नवाचार, कृषि और संस्कृति के संगम का भी एक खास अवसर बनकर उभर रहा है।


डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान—एलियंस और UFO से जुड़ी फाइलें होंगी सार्वजनिक

बराक ओबामा के बयान पर बवाल, ट्रंप ने उठाए सवाल

वाशिंगटन। एलियंस और UFO को लेकर लंबे समय से चल रही बहस एक बार फिर सुर्खियों में है। डोनाल्ड ट्रंप ने अब बड़ा कदम उठाते हुए एलियंस और अनआइडेंटिफाइड एरियल फेनोमेना (UAP) से जुड़ी सरकारी फाइलों को सार्वजनिक करने की बात कही है। इस घोषणा के बाद दुनियाभर में जिज्ञासा और चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि लोग लंबे समय से इन रहस्यमयी घटनाओं के सच को जानना चाहते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर किए गए अपने पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वह पेंटागन और अन्य एजेंसियों को निर्देश देंगे कि वे UFO और एलियन से जुड़ी फाइलों की पहचान कर उन्हें सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू करें। उन्होंने इसे “लोगों की दिलचस्पी से जुड़ा अहम मुद्दा” बताते हुए पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।

इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर आरोप लगाया कि उन्होंने एलियंस के विषय में सार्वजनिक टिप्पणी कर संवेदनशील जानकारी को उजागर किया। हालांकि, ट्रंप ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ओबामा की बात खुफिया जानकारी पर आधारित थी, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला हो सकता है।

दरअसल, एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान ओबामा से एलियंस के अस्तित्व को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा था कि ब्रह्मांड की विशालता को देखते हुए अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उन्होंने खुद कभी एलियंस को नहीं देखा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में एलियंस के पृथ्वी से संपर्क का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।

ट्रंप की इस घोषणा और ओबामा के बयानों के बाद UFO और एलियन से जुड़े रहस्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गए हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या वाकई इन फाइलों के सार्वजनिक होने से दशकों पुराने रहस्यों से पर्दा उठ पाएगा या यह मुद्दा सिर्फ अटकलों तक ही सीमित रहेगा।


उत्तराखंड में पहली बार ईसीएचएस द्वारा एनए एवं एएलसी दवाओं की घर-घर आपूर्ति

ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून द्वारा उत्तराखंड में वरिष्ठ पूर्व सैनिकों एवं व्हाइट कार्ड धारकों के लिए पहली बार दवाओं की होम डिलीवरी सेवा शुरू

देहरादून। भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के अंतर्गत संचालित ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक (टाइप ‘A’) देहरादून की स्थापना वर्ष 2004 में रीजेनल सेंटर ईसीएचएस, लखनऊ के अधीन ओल्ड मिलिट्री हॉस्पिटल (एमएच) देहरादून परिसर में की गई थी। 19 नवंबर 2007 को पॉलीक्लिनिक को ईसीएचएस मुख्य भवन में स्थानांतरित किया गया तथा बाद में इसे रीजेनल सेंटर ईसीएचएस देहरादून के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया।

ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून ने उत्तराखंड में एक नई पहल करते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थियों एवं व्हाइट कार्ड धारकों के लिए नॉन-अवेलेबिलिटी (NA) एवं एएलसी दवाओं की पहली बार अपने स्तर पर होम डिलीवरी सेवा प्रारंभ की है। यह राज्य में अपनी तरह की पहली सुविधा है।

इस पहल के अंतर्गत 11 फरवरी 2026 को गढ़ी कैंट स्थित मानद सूबेदार मेजर प्रेम चंद ठाकुर (91 वर्ष) तथा 13 फरवरी 2026 को रायपुर के ग्राम रंज्हावाला निवासी मानद कैप्टन सुरेंद्र सिंह छेत्री (76 वर्ष) को उनके निवास स्थान पर दवाओं की सफलतापूर्वक आपूर्ति की गई।

ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून, देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली और पौड़ी जनपदों के ईसीएचएस लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है। इसके अतिरिक्त विकासनगर, रायवाला और क्लेमेंट टाउन स्थित पॉलीक्लिनिक से संदर्भित मामलों को मिलिट्री हॉस्पिटल (एमएच) देहरादून तथा सूचीबद्ध अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था भी यहीं से की जाती है। व्यापक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता के कारण हिमाचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी लाभार्थी उपचार हेतु यहां आते हैं।

वर्तमान में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून पर कुल 1,49,052 लाभार्थी निर्भर हैं, जिनमें 51,912 प्राथमिक लाभार्थी एवं 97,140 आश्रित शामिल हैं। पॉलीक्लिनिक में प्रतिमाह औसतन 850 से 950 मरीज उपचार हेतु आते हैं।

यह पहल वरिष्ठ नागरिकों एवं प्राथमिकता श्रेणी के लाभार्थियों सहित पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


बदलते मौसम का असर- सर्दी-खांसी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी, जानिए खुद को कैसे रखें सुरक्षित

मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव के साथ वायरल संक्रमण के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। दिन में बढ़ती गर्मी और सुबह-शाम की हल्की ठंड शरीर पर असर डाल रही है, जिससे लोग सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में गले में खराश, नाक बंद, छींक और हल्के बुखार की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, तापमान में उतार-चढ़ाव शरीर के लिए एक तरह का दबाव (थर्मल स्ट्रेस) पैदा करता है। ऐसे में शरीर को नए मौसम के अनुसार खुद को ढालने में समय लगता है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है। यही स्थिति वायरस को संक्रमण फैलाने का मौका देती है। इसी वजह से मौसम बदलते ही फ्लू, वायरल फीवर और सर्दी-खांसी के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं।

जनरल फिजिशियन डॉ अरविंद शर्मा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में ओपीडी में वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। मरीजों में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, गले में खराश, खांसी और कमजोरी जैसे लक्षण सामान्य रूप से देखे जा रहे हैं। कई लोगों में स्वाद और गंध की क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हो रही है, हालांकि ज्यादातर मामलों में यह कुछ दिनों में ठीक हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक मौसम परिवर्तन वायरस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। इसके अलावा भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाना, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना और स्वच्छता में कमी संक्रमण के खतरे को बढ़ा देती है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

वायरल फीवर मुख्य रूप से इन्फ्लूएंजा जैसे वायरस के कारण फैलता है, जो खांसने-छींकने से निकलने वाली बूंदों या संक्रमित सतहों के संपर्क से तेजी से फैल सकता है। बदलते मौसम में यह संक्रमण ज्यादा सक्रिय हो जाता है।

बचाव के लिए डॉक्टर संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम पर जोर देते हैं। हाथों की सफाई बनाए रखना, भीड़-भाड़ में मास्क पहनना और बीमार लोगों से दूरी रखना भी जरूरी है। अगर बुखार तीन दिन से ज्यादा बना रहे, सांस लेने में दिक्कत हो या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सावधानी और मजबूत इम्युनिटी के जरिए इस मौसमी वायरल संक्रमण से काफी हद तक बचा जा सकता है।

(साभार)


अब AI कंटेंट पर लगाना होगा लेबल, भारत सरकार के नए नियम लागू

3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट

नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने डिजिटल कंटेंट को लेकर नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। 10 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के बाद ये नियम अब 20 फरवरी से प्रभावी हो गए हैं। भारत सरकार के इस फैसले के तहत अब एआई से तैयार किसी भी फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि लोगों को असली और नकली कंटेंट में फर्क समझने में आसानी हो।

इन नए नियमों के मुताबिक, एआई जनरेटेड कंटेंट पर “AI Generated” जैसे स्पष्ट निशान दिखाना जरूरी होगा। इसके अलावा हर फाइल के मेटाडेटा में उसकी पूरी जानकारी दर्ज रहेगी—जैसे कंटेंट कब बना, किस टूल से तैयार हुआ और पहली बार कहां अपलोड किया गया। इसे एक तरह का “डिजिटल डीएनए” माना जा रहा है, जिससे जांच एजेंसियों को जरूरत पड़ने पर कंटेंट के स्रोत तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि एआई कंटेंट से जुड़े लेबल या तकनीकी जानकारी के साथ छेड़छाड़ करना अब गैर-कानूनी होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी जिससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ को रोका जा सके या संदिग्ध कंटेंट स्वतः हटाया जा सके। इसके साथ ही यूजर्स को कंटेंट अपलोड करते समय यह बताना भी जरूरी होगा कि वह एआई से तैयार किया गया है या नहीं।

नए नियमों में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। अब किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ 3 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा, जबकि पहले इसके लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। इस बदलाव से डिजिटल स्पेस में जवाबदेही और सख्ती दोनों बढ़ेंगी।

एक दिन पहले आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डिजिटल कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाद्य उत्पादों पर जानकारी दी जाती है, वैसे ही डिजिटल सामग्री पर भी उसकी प्रकृति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि लोग भ्रमित न हों।

सरकार ने खास तौर पर डीपफेक और आपत्तिजनक सामग्री पर सख्त रुख अपनाया है। अगर एआई का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान की नकल करने, फर्जी वीडियो बनाने, बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री फैलाने या धोखाधड़ी के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का कहना है कि इन नियमों का मकसद एक सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट व्यवस्था तैयार करना है, जिससे एआई के दुरुपयोग पर लगाम लगाई जा सके और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता बढ़े।


एक्शन से भरपूर, ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स’ का टीजर हुआ रिलीज

‘केजीएफ’ फेम स्टार यश की मोस्ट अवेटेड फिल्म टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स का टीजर रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है। लंबे इंतजार के बाद सामने आए इस टीजर ने फिल्म की झलक जरूर दिखाई है, लेकिन कहानी को लेकर सस्पेंस बरकरार रखा गया है। टीजर में जबरदस्त एक्शन की भरमार है, जिससे साफ है कि फिल्म पूरी तरह हाई-ऑक्टेन स्टाइल में दर्शकों के सामने आने वाली है।

करीब 1 मिनट 55 सेकंड के इस टीजर में शुरुआत से अंत तक तेज रफ्तार एक्शन सीक्वेंस देखने को मिलते हैं। बर्फीले पहाड़ों से लेकर डांस बार तक, हर लोकेशन पर लड़ाई और मिशन की झलक दिखाई गई है। हालांकि, फिल्म की कहानी या किरदारों के बैकग्राउंड के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आती। पूरे टीजर में मुख्य रूप से यश का ही दबदबा देखने को मिलता है, जबकि अन्य कलाकारों को फिलहाल छुपाकर रखा गया है।

टीजर के आखिरी हिस्से में एक दिलचस्प ट्विस्ट नजर आता है, जहां एक अलग अंदाज में एक किरदार फाइट की ट्रेनिंग करता दिखाई देता है। उसका चेहरा पूरी तरह साफ नहीं दिखाया गया, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि यह भी यश का ही दूसरा अवतार हो सकता है। इसी वजह से फिल्म में उनके डबल रोल की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इसमें कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मणी वसंत जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

खास बात यह है कि बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म का मुकाबला धुरंधर 2 से होगा, जिसमें रणवीर सिंह लीड रोल में हैं। दोनों बड़ी फिल्मों के एक ही दिन रिलीज होने से सिनेमाघरों में जबरदस्त टक्कर देखने को मिल सकती है, जिसे लेकर दर्शकों के बीच अभी से उत्साह बना हुआ है।

(साभार)


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