Wednesday, October 14th, 2026

Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

देहरादून में जमीन की धोखाधड़ी के मामले में दो साल से फरार आरोपी गिरफ्तार, फर्जी आधार कार्ड से तैयार किया था मुख्तारनामा

Daily Archives: 14/10/2026

देहरादून में जमीन की धोखाधड़ी के मामले में दो साल से फरार आरोपी गिरफ्तार, फर्जी आधार कार्ड से तैयार किया था मुख्तारनामा

देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून जिले में जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने करीब दो साल से फरार चल रहे एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर जमीन के असली मालिक के नाम पर फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार किए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जमीन का फर्जी मुख्तारनामा बनाकर उसकी रजिस्ट्री कराने की साजिश रची गई थी। पुलिस ने आरोपी को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान 33 वर्षीय उदित कुमार वर्मा, निवासी धोबी घाट, तोता चौक, सिवेन्द्र विहार कॉलोनी, थाना मंडी, सहारनपुर के रूप में हुई है। इस मामले में विकासनगर कोतवाली में वर्ष 2024 में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस अन्य आरोपियों की भूमिका और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी कर चुकी है।

पुलिस के अनुसार, 28 जून 2024 को हरियाणा के फरीदाबाद निवासी अरुण कुमार ने विकासनगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गुरुबचन, मनुष, कमल सिंह, चमन कुमार और पूरण सिंह ने कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड तैयार कर जमीन के असली मालिक की जगह दूसरे व्यक्ति को खड़ा किया। इसके बाद जमीन का फर्जी मुख्तारनामा बनाकर उसे दूसरे व्यक्ति के नाम बेचने की प्रक्रिया पूरी की गई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा संख्या 215/2024 दर्ज किया था। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के बाद 26 फरवरी 2026 को नामजद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।

जांच के दौरान सामने आया कि मुख्तारनामे में अरुण कुमार के स्थान पर फर्जी पहचान का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति गिरफ्तारी से बच रहा था। उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने कथित फर्जी आधार कार्ड पर लगी तस्वीर को नेटग्रिड पोर्टल के माध्यम से जांचा।

पोर्टल से प्राप्त जानकारियों के आधार पर संभावित पहचान का सत्यापन किया गया। इसके बाद पुलिस ने तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति की पहचान उदित कुमार वर्मा के रूप में की। जानकारी की पुष्टि होने पर पुलिस टीम सहारनपुर पहुंची और 13 अक्टूबर 2026 को मंडी क्षेत्र से उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की पूछताछ के अनुसार, उदित कुमार पहले सुनार का काम करता था और चांदी के सामान की बिक्री के सिलसिले में विकासनगर, सहसपुर तथा सेलाकुई क्षेत्र में आता-जाता रहता था। इसी दौरान उसकी पहचान गुरुबचन सिंह उर्फ बब्बू सरदार से हुई।

पुलिस के मुताबिक, उदित ने पूछताछ में बताया कि उसे हरबर्टपुर क्षेत्र में स्थित जमीन का फर्जी मालिक बनकर मुख्तारनामा तैयार कराने के बदले मोटी रकम देने का लालच दिया गया था। इसके बाद कथित तौर पर असली मालिक अरुण कुमार के नाम से फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए। आधार कार्ड पर असली मालिक की तस्वीर के स्थान पर उदित की फोटो इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।

जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, वर्ष 2022 में जमीन का कथित फर्जी मुख्तारनामा तैयार किया गया था। इसी दस्तावेज के आधार पर 18 जुलाई 2022 को जमीन की रजिस्ट्री गुरुबचन के नाम कराए जाने और बाद में दाखिल-खारिज भी करवाने का आरोप है।

जब जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया, तब उसके वास्तविक मालिक को कथित धोखाधड़ी की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की और मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

देहरादून पुलिस के अनुसार, जमीन धोखाधड़ी के इस मामले में गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जमीन से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन कर आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


मुजफ्फरनगर में पति की हत्या के मामले में देवर-भाभी को उम्रकैद, 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पति की हत्या के मामले में अदालत ने उसकी पत्नी और सौतेले भाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. विजय कुमार तालियान ने दोनों दोषियों पर 55-55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों ने कथित अवैध संबंधों का विरोध करने पर युवक की गला घोंटकर हत्या की थी और शव को निर्माणाधीन शौचालय के गड्ढे में छिपा दिया था।

अभियोजन पक्ष के सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष कुमार त्यागी के अनुसार, पुरकाजी क्षेत्र के मांडला गांव निवासी असलम ने 7 जून 2023 को साकर पुत्र फरीद के लापता होने की सूचना पुलिस को दी थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली, जिसके आधार पर जांच आगे बढ़ी।

पुलिस ने 15 जून 2023 को मामले का खुलासा करते हुए साकर की पत्नी आसिया और उसके सौतेले भाई सुहैल को गिरफ्तार किया। उनकी निशानदेही पर निर्माणाधीन शौचालय के गड्ढे से साकर का शव बरामद किया गया था। इसके बाद मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई।

अभियोजन के मुताबिक, सुहैल के सऊदी अरब से लौटने के बाद आसिया के साथ उसके कथित अवैध संबंध हो गए थे। 6 जून 2023 को साकर ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। आरोप था कि इसी बात को लेकर दोनों ने उसकी हत्या करने का फैसला किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, रात में जब साकर चारपाई पर सो रहा था, तब सुहैल ने उसकी पत्नी की चुनरी से उसका गला कस दिया, जबकि आसिया ने उसके हाथ पकड़ रखे थे। युवक की मौत के बाद शव को निर्माणाधीन शौचालय के गड्ढे में डाल दिया गया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई चुनरी सहित अन्य साक्ष्य भी बरामद किए थे।

मामले की सुनवाई के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट महत्वपूर्ण साबित हुईं। पोस्टमार्टम में साकर के गले की हड्डी टूटी होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा, चुनरी और मिट्टी से संबंधित फॉरेंसिक जांच को भी अभियोजन पक्ष ने अदालत में पेश किया।

अभियोजन ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए 11 गवाह प्रस्तुत किए। हालांकि, इनमें से कुछ गवाह बाद में अपने बयानों से मुकर गए थे। इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

मंगलवार को दोनों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आसिया और सुहैल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर अलग-अलग 55 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया, जिससे कुल जुर्माना 1.10 लाख रुपये हो गया।

दोनों आरोपी 16 जून 2023 से जिला कारागार में बंद थे। अदालत के फैसले के साथ करीब तीन साल पहले सामने आए इस हत्याकांड में महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई पूरी हुई।


देहरादून में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, 456 प्रतिबंधित कैप्सूल के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड में नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत दून पुलिस ने डोईवाला क्षेत्र में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से कुल 456 प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल बरामद किए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कैप्सूल कलियर से खरीदकर लाने और स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों पर बेचने की योजना की जानकारी दी है।

यह कार्रवाई 13 अक्टूबर 2026 को लक्ष्मण मंदिर रोड, हर्रावाला के पास की गई। पुलिस के मुताबिक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर जिले में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री के खिलाफ जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान मिली सूचना के आधार पर डोईवाला कोतवाली की टीम ने दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 30 वर्षीय सोवित कम्बौज, निवासी कम्बौज मोहल्ला, बुल्लावाला, डोईवाला और 40 वर्षीय पवन कुमार मिश्रा, निवासी शुगर मिल रोड के पास, घिस्सरपड़ी, डोईवाला के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, सोवित के कब्जे से 216 कैप्सूल बरामद किए गए, जिनमें डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड, ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड और एसिटामिनोफेन के संयोजन वाले कैप्सूल शामिल हैं। वहीं, पवन कुमार मिश्रा के पास से डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड और एसिटामिनोफेन के संयोजन वाले 240 कैप्सूल मिले।

इस तरह पुलिस ने दोनों आरोपियों से कुल 456 कैप्सूल जब्त किए हैं। मामले में बरामद दवाओं की प्रकृति और उनके अवैध इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे कैप्सूल कलियर से खरीदकर लाए थे। उनकी योजना इन्हें नशे के आदी स्थानीय लोगों को अधिक कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाने की थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं और प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति कहां से की जा रही थी।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में पवन कुमार मिश्रा का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ वर्ष 2016 में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 और वर्ष 2024 में आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मामले दर्ज होने का रिकॉर्ड बताया गया है। मौजूदा मामले में भी उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है।

डोईवाला कोतवाली में दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा संख्या 311/2026 दर्ज किया गया है। मामला एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 के तहत पंजीकृत किया गया है। पुलिस बरामदगी और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

यह कार्रवाई उत्तराखंड सरकार के ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’ अभियान के तहत की गई है। पुलिस अधिकारियों ने मादक पदार्थों की अवैध बिक्री और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।


रात में नाभि पर सरसों का तेल लगाने का चलन, जानिए त्वचा और पेट से जुड़े दावों की सच्चाई

बदलते मौसम के साथ त्वचा में रूखापन, होंठों का फटना और शरीर में खिंचाव जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में कई लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। भारतीय परिवारों में सरसों के तेल का इस्तेमाल लंबे समय से मालिश और त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। इन्हीं उपायों में रात को सोने से पहले नाभि में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालना भी शामिल है। हालांकि, इस नुस्खे से जुड़े सभी स्वास्थ्य लाभ वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं।

त्वचा का रूखापन कम करने में कैसे मदद कर सकता है तेल?

सरसों के तेल में फैटी एसिड होते हैं, जो त्वचा को मुलायम बनाने में मदद कर सकते हैं। तेल त्वचा की सतह पर एक परत बनाकर नमी के नुकसान को कुछ हद तक कम कर सकता है। सर्द और शुष्क मौसम में इससे त्वचा को आराम मिल सकता है।

हालांकि, नाभि में तेल लगाने से पूरे शरीर की त्वचा का रूखापन दूर होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। बेहतर परिणाम के लिए प्रभावित हिस्से पर सीधे मॉइस्चराइजर लगाना अधिक उपयोगी हो सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सरसों के तेल से जलन या एलर्जी भी हो सकती है।

क्या नाभि में तेल लगाने से फटे होंठ ठीक होते हैं?

सर्दियों और शुष्क मौसम में होंठों की नमी कम होने से वे फटने लगते हैं। घरेलू नुस्खों में नाभि पर तेल लगाने को होंठों की देखभाल से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस दावे की पुष्टि करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

फटे होंठों की देखभाल के लिए पेट्रोलियम जेली या बिना खुशबू वाला लिप बाम लगाना बेहतर विकल्प है। होंठों को बार-बार चाटने से बचना और पर्याप्त पानी पीना भी मददगार हो सकता है।

पेट की परेशानी और मासिक धर्म के दर्द में कितना फायदा?

पेट के आसपास हल्के हाथों से मालिश करने पर कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है। मालिश से मिलने वाली गर्माहट और सुकून मांसपेशियों के तनाव को अस्थायी रूप से कम करने में मदद कर सकते हैं। मासिक धर्म के दौरान पेट के निचले हिस्से पर हल्की मालिश भी कुछ महिलाओं को राहत दे सकती है।

हालांकि, नाभि में सरसों का तेल डालने से पाचन संबंधी समस्याएं दूर होने या पेट की परेशानी ठीक होने का पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यदि पेट दर्द लगातार बना रहता है या उसके साथ अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

नाभि में तेल लगाने का सही तरीका क्या है?

यदि आप त्वचा की देखभाल के लिए इस उपाय को आजमाना चाहते हैं, तो कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है।

सबसे पहले नाभि और उसके आसपास की त्वचा को साफ करके अच्छी तरह सुखा लें।

सरसों के तेल की थोड़ी-सी मात्रा लेकर नाभि के आसपास हल्के हाथों से लगाएं।

तेल को नाभि में अधिक मात्रा में भरने या जोर से रगड़ने से बचें।

पहली बार इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करें।

जलन, खुजली, लालिमा या सूजन होने पर तेल का इस्तेमाल बंद कर दें।

ध्यान रखें कि नाभि में तेल लगाना जरूरी नहीं है और इससे विशेष स्वास्थ्य लाभ मिलने की गारंटी नहीं है।

किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी?

जिन लोगों को सरसों के तेल से एलर्जी है या जिनकी त्वचा संवेदनशील है, उन्हें इसका इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। नाभि के आसपास घाव, कट, लालिमा या संक्रमण होने पर वहां तेल लगाने से बचें। छोटे बच्चों की त्वचा पर भी बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसे घरेलू प्रयोग नहीं करने चाहिए।


Indian Army TES-57 Recruitment 2026: सेना में अधिकारी बनने का मौका, आवेदन शुरू; 12 नवंबर तक करें अप्लाई

नई दिल्ली। भारतीय सेना में तकनीकी अधिकारी बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आवेदन का अवसर सामने आया है। सेना की 10+2 टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES-57) के तहत जुलाई 2027 में शुरू होने वाले पाठ्यक्रम के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 14 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रही है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 12 नवंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले भर्ती से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना में पात्रता और चयन प्रक्रिया की शर्तें ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है।

कौन कर सकता है आवेदन?
TES-57 के लिए अविवाहित पुरुष उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। अभ्यर्थियों का 12वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित (PCM) विषयों के साथ उत्तीर्ण होना जरूरी है। इसके अलावा, उम्मीदवारों के लिए JEE Main 2026 में शामिल होना भी अनिवार्य बताया गया है।

आयु सीमा की बात करें तो उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की उम्र साढ़े 16 वर्ष से साढ़े 19 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हालांकि, केवल उम्र के आधार पर पात्रता तय नहीं होगी। उम्मीदवारों को आधिकारिक अधिसूचना में निर्धारित जन्मतिथि की सीमा और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी सभी शर्तों को पूरा करना होगा।

लगभग 90 पदों पर भर्ती की संभावना
इस प्रवेश योजना के तहत करीब 90 पद होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, रिक्तियों की यह संख्या संभावित है। पदों की वास्तविक संख्या और अन्य महत्वपूर्ण विवरणों की पुष्टि भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अधिसूचना से करना जरूरी है।

TES के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके बाद निर्धारित मानकों को पूरा करने पर सेना में अधिकारी के रूप में सेवा देने का अवसर मिलता है।

लिखित परीक्षा नहीं, SSB इंटरव्यू से होगा चयन
इस भर्ती प्रक्रिया में अलग से लिखित परीक्षा आयोजित नहीं किए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग 12वीं के PCM विषयों में प्रदर्शन और JEE Main 2026 के आधार पर की जाएगी।

शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को सेवा चयन बोर्ड (SSB) के इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद चयन प्रक्रिया के तहत मेडिकल परीक्षण भी होगा। उम्मीदवारों को निर्धारित चिकित्सा मानकों और सेना की अन्य शर्तों पर खरा उतरना होगा।

ध्यान रखें कि आवेदन जमा करने मात्र से भर्ती में चयन सुनिश्चित नहीं होता। अंतिम चयन निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही किया जाएगा।

ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
उम्मीदवार भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार है:
1. सबसे पहले भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाएं।
2. वेबसाइट पर TES-57 भर्ती से संबंधित लिंक खोजें।
3. दिए गए निर्देशों के अनुसार रजिस्ट्रेशन पूरा करें।
4. आवेदन फॉर्म में व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी दर्ज करें।
5. सभी विवरणों को ध्यानपूर्वक जांचें और फॉर्म सबमिट करें।
6. भविष्य में उपयोग के लिए आवेदन की डिजिटल कॉपी या प्रिंटआउट सुरक्षित रखें।

अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आवेदन से पहले आधिकारिक विज्ञापन में दी गई जन्मतिथि, शैक्षणिक योग्यता, अंकों और अन्य पात्रता शर्तों की पुष्टि जरूर कर लें।


‘खोसला का घोसला 2’ की रिलीज डेट बदली, अब इस दिन सिनेमाघरों में दस्तक देगी फिल्म

दर्शकों के बीच चर्चित फिल्म ‘खोसला का घोसला’ के सीक्वल का इंतजार कर रहे लोगों के लिए नई जानकारी सामने आई है। ‘खोसला का घोसला 2’ की रिलीज तारीख आगे बढ़ा दी गई है। पहले यह फिल्म 28 अगस्त 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसे अगले साल सिनेमाघरों में उतारा जाएगा।

5 मार्च 2027 को रिलीज होगी फिल्म

फिल्म के निर्माताओं ने सोशल मीडिया पर नया पोस्टर जारी कर रिलीज की नई तारीख का खुलासा किया है। घोषणा के मुताबिक, ‘खोसला का घोसला 2’ अब 5 मार्च 2027 को बड़े पर्दे पर दस्तक देगी। मेकर्स ने पोस्ट के साथ लिखा, ‘सौदा पक्का! खोसला परिवार सिनेमाघरों पर कब्जा करने के लिए तैयार है।’

पुरानी स्टारकास्ट फिर आएगी नजर

इस सीक्वल में पहली फिल्म के कई लोकप्रिय कलाकार अपनी भूमिकाओं में वापसी करेंगे। फिल्म में अनुपम खेर, बोमन ईरानी, रणवीर शौरी, किरण जुनेजा और परवीन डबास नजर आएंगे। इसके अलावा, पहली फिल्म का हिस्सा रहीं तारा शर्मा भी सीक्वल में दिखाई देंगी। पुरानी स्टारकास्ट की वापसी से फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है।

जमीन के विवाद ने दिलाई थी पहली फिल्म को पहचान

साल 2006 में रिलीज हुई ‘खोसला का घोसला’ का निर्देशन दिबाकर बनर्जी ने किया था। फिल्म की कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द बुनी गई थी, जो जमीन पर कब्जे और धोखाधड़ी की समस्या से जूझता है। अपनी संपत्ति वापस पाने के लिए परिवार कई कोशिशें करता है।

कॉमेडी, पारिवारिक रिश्तों और जमीन से जुड़े विवादों को दिलचस्प अंदाज में पेश करने वाली इस फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। समय के साथ यह फिल्म कल्ट क्लासिक के रूप में पहचान बनाने में सफल रही। अब इसके दूसरे भाग से भी दर्शकों को मनोरंजन और पुरानी कहानी के नए अंदाज की उम्मीद है।


ऋषिकेश में अवैध शराब की बड़ी खेप बरामद, क्रेटा कार से 100 व्हिस्की की बोतलें और 24 बीयर जब्त; मेरठ का युवक गिरफ्तार

देहरादून/ऋषिकेश। उत्तराखंड में अवैध शराब की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने गढ़ी श्यामपुर के पास एक कार से शराब की खेप बरामद की है। हुंडई क्रेटा कार में ले जाई जा रही शराब पर डिफेंस कैंटीन और चंडीगढ़ में बिक्री के लिए होने के लेबल लगे हुए थे। शुरुआती जांच में बोतलों पर लगे होलोग्राम और लेबल संदिग्ध पाए गए हैं। मामले में मेरठ निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया गया है।

आबकारी विभाग की ऋषिकेश टीम और देहरादून के जनपदीय प्रवर्तन दल ने आबकारी निरीक्षक प्रेरणा बिष्ट के नेतृत्व में मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। टीम ने गढ़ी श्यामपुर के पास वाहन की तलाशी ली, जिसमें कुल 10 पेटी शराब बरामद हुई। इनमें रॉयल स्टैग व्हिस्की की 100 बोतलें और बडवाइजर बीयर की 24 बोतलें शामिल थीं।

जांच के दौरान व्हिस्की की बोतलों पर ‘फॉर सेल डिफेंस पर्सनल ऑनली’ और बीयर की बोतलों पर ‘फॉर सेल इन चंडीगढ़ ओनली’ लिखा मिला। आबकारी विभाग के अनुसार, प्रारंभिक जांच में बोतलों पर चस्पा लेबल और होलोग्राम नकली होने की आशंका सामने आई है। इनकी वास्तविकता की पुष्टि के लिए आगे की जांच की जा रही है।

विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि शराब कहां से लाई गई थी और उसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के लेबल लगाकर शराब को कैंटीन से खरीदी गई शराब के रूप में पेश करने की कोशिश की जा सकती है।

आबकारी विभाग के अनुसार, गिरफ्तार युवक की पहचान निशांत शर्मा, पुत्र राकेश शर्मा, निवासी मोदीपुरम, मेरठ (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि शराब मेरठ से लाई गई थी और बोतलों पर डिफेंस से संबंधित लेबल इसलिए लगाए जाते थे, ताकि आम लोगों को यह कैंटीन की शराब लगे।

विभाग को आशंका है कि शराब की इस खेप को मौजूदा शादी और पार्टी के सीजन में खपाने की योजना थी। हालांकि, शराब की आपूर्ति से जुड़े अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाने के लिए जांच जारी है।

आबकारी विभाग ने आरोपी को अवैध शराब के परिवहन के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 63/72 के तहत ऋषिकेश आबकारी क्षेत्र में मुकदमा दर्ज किया गया है। विभाग के अनुसार, आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। बरामद शराब के लेबल और होलोग्राम की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस अभियान में आबकारी निरीक्षक प्रेरणा बिष्ट के साथ देहरादून जनपदीय प्रवर्तन दल के आबकारी निरीक्षक जयवीर सिंह, उप आबकारी निरीक्षक आशीष प्रकाश उनियाल और अर्जुन सिंह सहित आबकारी विभाग के अन्य कर्मचारी शामिल रहे।


फरुखनगर में महिला की संदिग्ध मौत, पति पर गला दबाकर हत्या का आरोप; 10 महीने के बच्चे को लेकर फरार

गुरुग्राम- फरुखनगर स्थित वार्ड-2 में 27 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका के परिजनों ने उसके पति पर मारपीट करने और गला दबाकर हत्या करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद पति महिला के शव को सेक्टर-88 स्थित एक निजी अस्पताल में छोड़कर कथित तौर पर अपने 10 महीने के बच्चे को साथ लेकर फरार हो गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

मृतका की पहचान भावना शर्मा के रूप में हुई है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुवा गांव की रहने वाली थी। दिसंबर 2024 में उसकी शादी मोकलवास निवासी गौतम शर्मा से हुई थी। विवाह के बाद दोनों फरुखनगर के वार्ड-2 में अपने मकान में रह रहे थे। दंपती का एक 10 महीने का बच्चा भी है।

परिजनों के मुताबिक, मंगलवार शाम भावना ने फोन करके उन्हें बताया था कि उसका पति उसके साथ मारपीट कर रहा है और गला दबाने की कोशिश कर रहा है। परिवार के लोग इस सूचना से चिंतित थे, लेकिन कुछ समय बाद ही गौतम का फोन आया। उसने बताया कि भावना ने जहरीला पदार्थ निगल लिया है।

इसके बाद गौतम भावना को गुरुग्राम के सेक्टर-88 स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि महिला की मौत की सूचना के बाद पति अस्पताल से चला गया और उसका कोई पता नहीं चला।

घटना की जानकारी मिलने पर भावना के मायके पक्ष के लोग फरुखनगर स्थित उसके घर पहुंचे। परिजनों के अनुसार, घर के भीतर सामान बिखरा हुआ था। इस दौरान उन्हें 10 महीने का बच्चा भी नहीं मिला। परिवार ने आशंका जताई कि गौतम बच्चे को अपने साथ लेकर गया है।

भावना के मायके वालों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोपी पति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। महिला की मौत को लेकर लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।

पुलिस ने महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पति की तलाश की जा रही है और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए ग्रामीण आजीविका मॉडल को मजबूत करने पर मंथन

वनाग्नि की रोकथाम, कार्बन फाइनेंस और पर्यावरण संरक्षण के जरिए ग्रामीण समुदायों की आजीविका सुदृढ़ करने पर जोर

देहरादून: राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन तथा इकोलॉजी से संबंधित पहल के तहत उत्तराखंड में ग्रामीण आजीविका के सुदृढ़ीकरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के उद्देश्य से मंगलवार को होटल फेयरफील्ड, देहरादून में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जलवायु-अनुकूल आजीविका मॉडल विकसित करने, ग्रामीण समुदायों की आय बढ़ाने, वनाग्नि की रोकथाम और कार्बन फाइनेंस की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला में उत्तराखंड शासन के वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव सी. रविशंकर तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की उप सचिव डॉ. सुचित्रा करल उपस्थित रहीं। इस अवसर पर निदेशक, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन श्री एस.पी. सुबुद्धि सहित विभिन्न विभागों, संस्थानों और संबंधित परियोजनाओं के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के ऐसे मॉडल विकसित करना रहा, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के साथ ही स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण में सहायक हों। इस दौरान ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में शशि वैभव कुमार साह, संयुक्त निदेशक, द्वारा वनाग्नि की रोकथाम में कार्बन फाइनेंस की भूमिका एवं संभावनाओं से संबंधित जानकारी साझा की गई। उन्होंने बताया कि कार्बन फाइनेंस के माध्यम से वन संरक्षण, वनाग्नि के जोखिम को कम करने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने तथा जलवायु-अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को सहयोग मिल सकता है। साथ ही, ग्रामीण समुदायों को इन पहलों से जोड़कर आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

कार्यशाला में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की गई:

जलवायु-अनुकूल आजीविका मॉडल का विस्तार: उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीतियों पर विचार किया गया।

ग्रामीण आजीविका का सशक्तीकरण: कृषि, बागवानी, पशुपालन, बीज उत्पादन तथा अन्य ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने पर जोर दिया गया।

वनाग्नि की रोकथाम एवं कार्बन फाइनेंस: वन क्षेत्रों के संरक्षण, वनाग्नि के जोखिम को कम करने और कार्बन फाइनेंस के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन: संबंधित विभागों, संस्थानों और परियोजना प्रतिनिधियों के बीच समन्वय स्थापित कर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के उपायों पर मंथन किया गया।

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए ग्रामीण समुदायों को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का सतत उपयोग और समुदायों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला में प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा करते हुए जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप आजीविका के नए अवसर विकसित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।


मुख्यमंत्री धामी की दो टूक संदेश—सड़कें गड्ढामुक्त हों, विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री आवास में देर रात तक जिलाधिकारियों और एसएसपी के साथ ली चार घंटे से अधिक मेराथन बैठक

त्योहारों में सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था में कोई चूक नहीं—मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में देर रात्रि तक प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (डीएम) एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) के साथ लगभग चार घंटे लंबी मैराथन उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में प्रदेश में विकास कार्यों की प्रगति, जनसुविधाओं, कानून-व्यवस्था, आगामी त्योहारों की तैयारियों, आपदा प्रबंधन, निर्वाचन संबंधी कार्यों, जिला योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा हरिद्वार कुंभ-2027 की तैयारियों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में गृह सचिव, गढ़वाल एवं कुमाऊँ मंडल के आयुक्तों तथा दोनों पुलिस परिक्षेत्रों के पुलिस महानिरीक्षकों सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप सभी कार्य समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुखी तरीके से पूरे किए जाएं। जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनावश्यक विलंब अथवा जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना और प्रदेश में सुशासन की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना है। अधिकारियों को केवल कार्यालयों तक सीमित न रहकर नियमित रूप से फील्ड में जाने, जमीनी स्थिति का आकलन करने तथा समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने में लापरवाही पर होगी जवाबदेही तय

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सड़कों की स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने जनपदों में सड़कों का स्थलीय निरीक्षण कर लंबित मरम्मत कार्यों को तत्काल शुरू कराया जाए। सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के अभियान में तेजी लाते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं स्वयं भी बहुत जल्द पूरे प्रदेश का दौरा सड़क मार्ग से करूंगा। यदि कहीं भी सड़क टूटी हुई मिली या मरम्मत कार्य में लापरवाही सामने आई, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केवल कागजों पर प्रगति दिखाने के बजाय धरातल पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित कार्यों की नियमित समीक्षा करें और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराएं।

एक नवंबर तक पूरे हों सीवर और पेयजल पाइपलाइन के अधूरे कार्य

मुख्यमंत्री ने सीवर एवं पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधूरे कार्यों को **एक नवंबर तक पूर्ण कर खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित की जाए**, ताकि आम नागरिकों, व्यापारियों और यात्रियों को आवागमन में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय बैठक कर कार्यों की नियमित समीक्षा करें। आगामी त्योहारों को देखते हुए बाजारों, आवासीय क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी विभाग की लापरवाही के कारण जनसामान्य को असुविधा न हो।

SIR के अंतर्गत पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने और निर्वाचन आयोग के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतर्गत मतदाता सूची से संबंधित कार्यों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने तथा अपात्र प्रविष्टियों के नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया में पूरी सावधानी और पारदर्शिता बरती जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मतदाताओं को आवश्यक जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया से अनावश्यक रूप से वंचित न रहे। संबंधित अधिकारी निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें और पुनरीक्षण से संबंधित कार्यों की नियमित निगरानी करें।

ऑपरेशन कालनेमि और सत्यापन अभियान में लाई जाए तेजी

मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन कालनेमि एवं सत्यापन अभियान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि आगामी त्योहारों तथा हरिद्वार कुंभ-2027 को ध्यान में रखते हुए इन अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। धार्मिक स्थलों, पर्यटन क्षेत्रों, भीड़भाड़ वाले स्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए।

उन्होंने संदिग्ध गतिविधियों और आपराधिक तत्वों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सत्यापन अभियान प्रभावी तरीके से संचालित किया जाए तथा थाना एवं चौकी स्तर पर पुलिस की सक्रियता बढ़ाई जाए।

मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार और ऋषिकेश के लिए पहले से तैयार हो ट्रैफिक प्लान

मुख्यमंत्री ने शीतकालीन पर्यटन एवं यात्रा सीजन को देखते हुए मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश सहित प्रदेश के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों के लिए अग्रिम यातायात योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त पुलिस बल, पार्किंग स्थलों, वैकल्पिक मार्गों और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने यातायात संबंधी सूचनाएं समय पर जारी करने तथा प्रमुख मार्गों पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

कुंभ-2027 की तैयारियों की हर सप्ताह होगी समीक्षा

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार कुंभ-2027 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करें। सड़कों, पुलों, घाटों, पेयजल, सीवरेज, स्वास्थ्य सुविधाओं, पार्किंग और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि कुंभ जैसे महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारियों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। प्रत्येक परियोजना के लिए समयसीमा निर्धारित की जाए और कार्यों की प्रगति की नियमित निगरानी हो। किसी परियोजना में देरी होने पर उसके कारणों का तत्काल समाधान किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

आपदा प्रभावितों को तत्काल राहत और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराएं

मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए। प्रभावितों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं तथा सुरक्षित आवास की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित हो।

उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण है। प्रभावित परिवारों को सहायता के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े। अधिकारी स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करें और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की नियमित निगरानी करें।

प्रभारी सचिव प्रत्येक 15 दिन में करेंगे जनपदों का भ्रमण, विकासखंडवार होगी समीक्षा

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संबंधित जनपदों के प्रभारी सचिव प्रत्येक 15 दिन में आवंटित जनपद का भ्रमण करें। भ्रमण के दौरान जनपदवार और विकासखंडवार समीक्षा करते हुए विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं, जनसुविधाओं, कानून-व्यवस्था तथा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की प्रगति का आकलन किया जाए।

उन्होंने कहा कि समीक्षा केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। जहां भी कोई समस्या, बाधा या अनावश्यक विलंब सामने आए, वहां संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर उसका समाधान सुनिश्चित किया जाए।

अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही होगी तय

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से फील्ड में जाकर कार्यों की प्रगति का निरीक्षण करें। जनहित से जुड़े कार्यों में समन्वय की कमी, लापरवाही या अनावश्यक विलंब को गंभीरता से लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। जनता को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराना, शिकायतों का समाधान करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना प्रशासन की कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुरूप काम करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने और जिम्मेदारी से बचने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों से जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने की अपेक्षा की।

बैठक में गृह सचिव, गढ़वाल एवं कुमाऊँ मंडल के आयुक्त, प्रदेश के सभी जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गढ़वाल एवं कुमाऊँ परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp