Monday, May 4th, 2026

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नारद जयंती एवं पत्रकारिता दिवस समारोह का भव्य एवं सफल आयोजन

Daily Archives: 04/05/2026

नारद जयंती एवं पत्रकारिता दिवस समारोह का भव्य एवं सफल आयोजन

देहरादून। विश्व संवाद केंद्र, देहरादून के तत्वावधान में आई.आर.डी.टी. सभागार, सर्वे चौक, देहरादून में “नारद जयंती एवं पत्रकारिता दिवस समारोह” का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य पत्रकारिता के मूल्यों का पुनर्स्मरण करते हुए समाज में सकारात्मक, तथ्यपरक एवं राष्ट्रहितकारी पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, आदि पत्रकार देवर्षि नारद जी के चित्र पर पुष्प अर्पण तथा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इसके उपरांत अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. शैलेन्द्र  (प्रान्त प्रचारक ), चन्द्रशेखर  (सह प्रान्त प्रचारक ), लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल जी (क्षेत्र सामाजिक समरसता प्रमुख), संजय (प्रान्त प्रचार प्रमुख), धनंजय (विभाग प्रचारक) सहित अनेक सम्मानित गणमान्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया। उत्तरकाशी से प्रताप रावत जी को सम्मानित किया गया।वरिष्ठ साहित्यकार सोमवारी लाल उनियाल जी,ई टीवी के बिरो चीफ किरण कांत शर्मा , दैनिक जागरण देहरादून से आश्विनी त्रिपाठी , रुड़की से नितिन कुमार , संचित शर्मा जी (न्यूज़ स्टेट हेड), थराली प्रेस क्लब के अध्यक्ष राकेश सती , अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार आफताब अजमत सहित प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया से जुड़े अनेक पत्रकारों को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर “हिमालय हुंकार” पत्रिका के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। पत्रिका के संपादक शाक्त ध्यानी जी ने इस वर्ष के विशेषांक के विषय “हिन्दू जागरण के सौ वर्ष” पर प्रकाश डालते हुए इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया, जिसे उपस्थित जनों ने सराहा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शिव प्रकाश  (राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री, भारतीय जनता पार्टी) ने अपने उद्बोधन में कहा कि देवर्षि नारद जी को विश्व के आदि पत्रकार के रूप में स्मरण किया जाता है, जिन्होंने लोककल्याण हेतु संवाद और सूचना का कार्य किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का ध्येय केवल सूचना देना ही नहीं, बल्कि भारत के दर्शन, ज्ञान, परंपरा, नैतिक मूल्यों एवं सनातन संस्कृति को सशक्त करना भी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली माध्यम बनकर उभरा है, जिसके माध्यम से राष्ट्रविरोधी नैरेटिव का सशक्त रूप से खंडन किया जाना आवश्यक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अशोक बिंदलस जी (वरिष्ठ निदेशक, बिंदल्स बायोटेक लिमिटेड) ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सम्मानित पत्रकारों को शुभकामनाएं देते हुए पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और उसकी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में पत्रकारिता की विश्वसनीयता एवं नैतिकता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

इस आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों में अध्यक्ष सुरेन्द्र मित्तल, सचिव  राजकुमार टांक तथा ‘हिमालय हुंकार’ के संपादक रणजीत सिंह ज्याला शामिल रहे। सभी पदाधिकारियों ने कार्यक्रम के सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन में सक्रिय योगदान देते हुए उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित, अनुशासित एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ, जिसने पत्रकारिता के प्रति सम्मान एवं जागरूकता को और अधिक सुदृढ़ किया।


लेटर बम निकला ‘फुस्स’, बयान के बाद सियासत में पलटवार तेज

गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय ने लेटर को बताया झूठ का पुलिंदा

अरिवंद पांडेय के बयान के बाद बैक फुट पर कांग्रेस

गोदियाल के खिलाफ केस दर्ज करवाएगी भाजपा?

फेक नेरेटिव को लेकर गणेश गोदियाल पर उठने लगे सवाल!

देहरादून- प्रदेश की सियासत में जिस “लेटर बम” ने अचानक हलचल मचा दी थी, अब वही खुद सवालों के घेरे में खड़ा नजर आ रहा है। गदरपुर से विधायक अरविंद पांडेय ने सामने आकर पूरे मामले पर विराम लगाने की कोशिश की और साफ-साफ कहा “ना मैंने कोई पत्र लिखा है और ना ही उसमें लगाए गए आरोपों का कोई आधार है।” एक बयान ने उस पूरे सियासी तूफान की हवा निकाल दी, जिसे पिछले कई दिनों से कांग्रेस बड़ा मुद्दा बनाकर हल्ला मचा रही थी।

दरअसल, मामला तब गरमाया जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह दावा किया कि भाजपा के गदरपुर विधायक ने अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ गंभीर आरोपों वाला पत्र लिखा है। इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई, चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया और विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बनाने की पूरी कोशिश की।

लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब खुद कथित पत्र के लेखक बताए जा रहे अरविंद पांडेय ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे न सिर्फ “मनगढ़ंत” बताया, बल्कि यह भी कहा कि यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत गढ़ा गया झूठा नैरेटिव है, जिससे उनकी छवि और सरकार दोनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी घेरने का प्रयास हुआ, लेकिन पांडेय के बयान के बाद अब सियासी समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं। जिस मुद्दे के जरिए सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश थी, वही अब विपक्ष के लिए असहज स्थिति पैदा करता नजर आ रहा है।

अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह “लेटर बम” सच में कोई खुलासा था, या फिर बिना बारूद का पटाखा, जो आवाज तो करता है लेकिन असर नहीं छोड़ता? और अगर यह नैरेटिव गढ़ा गया था, तो आखिर किस आधार पर और किस जल्दबाजी में?

सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब कांग्रेस के भीतर भी इसको लेकर असंतोष की आहट सुनाई देने लगी है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि बिना ठोस सबूत के इस तरह के आरोप सार्वजनिक करना पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। पहले से जनाधार के संकट से जूझ रही कांग्रेस के लिए यह प्रकरण कहीं आत्मघाती साबित न हो जाए।

इसी बीच सियासी तापमान को और बढ़ाते हुए भाजपा खेमे में अब इस पूरे मामले को लेकर कानूनी विकल्पों पर भी विचार शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी गणेश गोदियाल के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करने पर मंथन कर रही है। यदि ऐसा होता है तो यह विवाद सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी मोड़ भी ले सकता है।

कुल मिलाकर, जो मामला सरकार के लिए मुश्किल खड़ी करने वाला बताया जा रहा था, वह अब विपक्ष के लिए ही असहज सवालों की वजह बन गया है। सियासत में ‘नैरेटिव’ जितनी तेजी से बनते हैं, उतनी ही तेजी से टूटते भी हैं और इस बार, यह टूटन काफी शोर के साथ देखने को मिल रही है।


सब रजिस्टार कार्यालय विकासनगर में डीएम का औचक निरीक्षण, पुराने विलेख पत्र जब्त

स्टांप शुल्क चोरी के 47 केस चिन्हित, प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

विकासनगर। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय विकासनगर में औचक निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। निरीक्षण के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

औचक निरीक्षण के दौरान वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक के मूल विलेख पत्र संदिग्ध परिस्थितियों में पाए गए, जिन्हें तत्काल कब्जे में लेकर जब्त कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री की गई है, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

जांच के दौरान स्टांप शुल्क की चोरी से जुड़े 47 मामले भी चिन्हित किए गए हैं, जो धारा 47-ए के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितता माने जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन मामलों में विधिक कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा कार्यालय के संचालन में पारदर्शिता की कमी, अभिलेखों के रखरखाव में लापरवाही और प्रक्रियाओं के उल्लंघन जैसी कई अन्य खामियां भी सामने आई हैं। इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जांच कर समग्र रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे शासन को भेजा जाएगा।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि वर्तमान और पूर्व में तैनात सभी सब-रजिस्ट्रार के कार्यकाल की गहन जांच की जाए। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

प्रशासन ने दो टूक कहा है कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पारदर्शी व जवाबदेह व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। निरीक्षण के दौरान अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।


कृषि मंत्री गणेश जोशी ने डिजिटल भुगतान प्रणाली (सीबीडीसी) के अनुदान वितरण प्रक्रिया का किया शुभारम्भ

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने नाबार्ड पॉलीहाउस योजना के तहत (CBDC) के माध्यम से अनुदान वितरण प्रणाली का शुभारंभ किया

देहरादून। सुबे के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने कैम्प कार्यालय में नाबार्ड पॉलीहाउस योजना के अंतर्गत डिजिटल भुगतान प्रणाली सीबीडीसी के माध्यम से अनुदान वितरण प्रक्रिया का विधिवत शुभारम्भ किया। इस दौरान उन्होंने कृषकों के खातों में प्रतीकात्मक रूप से डिजिटल भुगतान कर डिजिटल भुगतान प्रणाली सीबीडीसी का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को साकार करने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस अवसर पर कृषि मंत्री ने कहा कि उद्यान विभाग द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए नाबार्ड की आरआईडीएफ योजना के तहत क्लस्टर आधारित छोटे पॉलीहाउस स्थापना योजना में किसानों को शत-प्रतिशत पारदर्शिता के साथ लाभान्वित करने के लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू की गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत किसान “अपुणि सरकार” पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करेंगे। विभाग द्वारा आवेदन की जांच और स्थल सत्यापन के बाद पात्र किसानों को सीबीडीसी वाउचर जारी किए जाएंगे।

कृषि मंत्री ने कहा कि उद्यान विभाग के तहत सेब की अति सघन बागवानी और कीवी नीति में डिजिटल भुगतान के माध्यम से अनुदान वितरण की व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने बताया कि पॉलीहाउस निर्माण कार्य पूर्ण होने और सत्यापन तक सीबीडीसी वाउचर की राशि ‘लॉक्ड स्टेटस’ में रहेगी। सत्यापन के बाद संबंधित फर्म या कंपनी के खाते में भुगतान किया जाएगा, जिससे धनराशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि नाबार्ड की आरआईडीएफ योजना के तहत 50 से 100 वर्गमीटर आकार के छोटे पॉलीहाउस के लिए किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना के लिए 304.43 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। अनुदान तीन किस्तों में सीबीडीसी वाउचर के माध्यम से दिया जाएगा।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 25 फर्मों एवं कंपनियों का पंजीकरण किया गया है और किसान अपनी सुविधा अनुसार किसी भी पंजीकृत फर्म के माध्यम से पॉलीहाउस निर्माण करा सकते हैं। साथ ही डिजिटल वॉलेट के माध्यम से सब्सिडी सीधे लाभार्थियों तक पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से पहुंचेगी। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने विश्वास जताया कि यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति को भी गति प्रदान करेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि एवं उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं का भुगतान सीबीडीसी के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए, ताकि पारदर्शिता और समयबद्धता बनी रहे। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ देने के लिए ब्लॉक स्तर तक व्यापक प्रशिक्षण एवं जागरूकता अभियान चलाया जाए, जिससे अधिक से अधिक किसान इन योजनाओं से लाभान्वित हो सकें।

इस अवसर पर सचिव कृषि डा0 एसएन पांडेय, निदेशक उद्यान सुंदर लाल सेमवाल, आईटीडीए के निदेशक आलोक कुमार पाण्डेय, आरबीआई से अरविन्द कुमार, यूनियन बैंक के अर्चना शुक्ला, प्रांजल वाजपेयी, नाबार्ड के डीजीएम अभिनव कापड़ी, उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक डा0 रतन कुमार, महेन्द्र पाल, नरेन्द्र यादव, कैप निदेशक नृपेन्द्र चौहान सहित जनपद स्तरीय अधिकारीगण एवं किसान उपस्थित रहे।


भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली का विस्तार, 500 नए सेंसर लगाने की योजना

आपदा से निपटने के लिए तकनीकी संस्थाओं और प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली, राष्ट्रीय भूकम्प जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम, राष्ट्रीय ग्लेशियर झील विस्फोट जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम तथा भूस्खलन न्यूनीकरण के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी परियोजनाओं पर कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए संबंधित विभागों तथा संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में ग्लेशियर झील विस्फोट जोखिम न्यूनीकरण के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी द्वारा वर्तमान प्रगति एवं भविष्य की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि वाडिया संस्थान द्वारा वसुंधरा झील को एक पायलट साइट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम एवं मॉनिटरिंग मैकेनिज्म स्थापित किए जाएंगे। इस मॉडल को भविष्य में अन्य संवेदनशील ग्लेशियल झीलों पर भी लागू करने की योजना है, जिससे राज्य में ग्लेशियर झीलों से जोखिम प्रबंधन को वैज्ञानिक एवं तकनीकी रूप से सुदृढ़ किया जा सके।

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी वर्ष 2026-27 एवं 2027-28 के लिए प्रस्तावित गतिविधियों का विस्तृत टाइमलाइन प्रस्तुत करे, जिसमें स्पष्ट हो कि कब कौन से कार्य किया जाना है। इसके अतिरिक्त संस्थान को निर्देश दिए गए कि न्यूनीकरण उपायों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाए, जिसमें अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने, रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं डिसीजन सपोर्ट सिस्टम तथा स्ट्रक्चरल उपाय जैसे पानी का नियंत्रित निकास और झील का स्तर कम करने के उपाय शामिल हों।

वहीं दूसरी बैठक में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की समीक्षा की गई। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि अवगत कराया गया कि वर्तमान में 169 सेंसर एवं 112 सायरन स्थापित किए जा चुके हैं। आईआईटी रुड़की के साथ मिलकर लगातार अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में 26 फरवरी, 2026 को आईआईटी रुड़की के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके अंतर्गत 01 जनवरी, 2026 से 31 दिसंबर, 2026 तक ईईडब्ल्यूएस प्रणाली के अलर्ट प्रसारण, संचालन एवं अनुरक्षण का कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रीय भूकम्प जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत राज्य में भूकम्पीय संवेदनशील क्षेत्रों में 500 स्ट्रॉन्ग मोशन सेंसर की तैनाती की जा रही है, जिससे मौजूदा चेतावनी प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त चेतावनी प्रसार को प्रभावी बनाने के लिए 526 सेंसर (500 स्वदेशी ईईडब्ल्यूएस सायरन एवं 26 मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग सायरन) की स्थापना भी प्रस्तावित है।

सचिव सुमन ने बताया कि राष्ट्रीय भूकम्प विज्ञान केंद्र के अंतर्गत देशभर में कुल 167 सिस्मोलॉजिकल वेधशालाएं संचालित हैं, जिनमें से 8 उत्तराखण्ड में स्थापित हैं। राज्य में भूकम्पीय निगरानी को और सुदृढ़ करने के लिए रुड़की, देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, रामनगर, बागेश्वर, अल्मोड़ा, केदारनाथ एवं चकराता में नई स्थायी वेधशालाएं स्थापित करने का प्रस्ताव है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक प्रभावी, सटीक एवं त्वरित बनाया जाए तथा आमजन तक चेतावनी संदेशों का समयबद्ध एवं व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सेंसर एवं सायरन नेटवर्क के विस्तार तथा उनके नियमित अनुरक्षण पर विशेष ध्यान देने को कहा।

वहीं तीसरी बैठक में डिब्रिस फ्लो (मलबा बहाव) से संबंधित जोखिम आकलन पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। बताया गया कि चमोली, उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ़ जनपदों में कुल 48 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है। ये सभी स्थान मुख्यतः जल निकासी मार्गों (ड्रेनेज चैनल) के आसपास स्थित हैं, जिन्हें जोखिम के आधार पर उच्च, मध्यम एवं निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, ताकि प्राथमिकता के अनुसार कार्य किया जा सके।

इस कार्य के लिए विभिन्न संस्थानों को शामिल करते हुए एक संयुक्त समिति का गठन किया गया है, जिसमें उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान तथा उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र शामिल हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि चिन्हित संवेदनशील स्थलों पर प्राथमिकता के आधार पर सर्वेक्षण, निगरानी एवं आवश्यक निवारक कार्य किए जाएं। उन्होंने जिला प्रशासन एवं तकनीकी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बैठक में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ. वी.के. गहलोत, डॉ. के. लुइरेई, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. मनीष मेहता, यूसैक की वैज्ञानिक डॉ. आशा थपलियाल, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. डी.पी. कानूनगो, जेसीईओ मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी उपस्थित रहे। आईआईटी रुड़की के प्रो0 कमल, जीएसआई के निदेशक रवि नेगी तथा डाॅ. अजय चैरसिया ने ऑनलाइन बैठक में प्रतिभाग किया।


गर्मियों में भी बढ़ सकता है अस्थमा अटैक का खतरा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

हर साल मई के पहले मंगलवार को मनाया जाने वाला विश्व अस्थमा दिवस लोगों को श्वसन संबंधी बीमारी अस्थमा के प्रति जागरूक करने का अवसर देता है। इस दिन का उद्देश्य न सिर्फ बीमारी की पहचान और इलाज को बेहतर बनाना है, बल्कि बदलते मौसम में इसके खतरों से बचाव के उपायों को भी सामने लाना है।

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सांस की नलियों में सूजन के कारण सांस लेने में कठिनाई होती है। धूल, धुआं, प्रदूषण और एलर्जी इसके प्रमुख कारण हैं। आमतौर पर सर्दियों को अस्थमा के लिए ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है, लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि तेज गर्मी भी मरीजों के लिए उतनी ही चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र सचान के अनुसार, मौसम में अत्यधिक ठंड या गर्मी—दोनों ही स्थितियां अस्थमा के मरीजों के लिए खतरनाक हो सकती हैं। बढ़ते तापमान के साथ हवा में ओजोन और प्रदूषक तत्वों का स्तर बढ़ जाता है, जो सांस की नलियों को प्रभावित करते हैं और अटैक का खतरा बढ़ा देते हैं।

गर्मियों में डिहाइड्रेशन भी एक बड़ी समस्या बन जाता है। शरीर में पानी की कमी होने से फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा उमस और खराब एयर क्वालिटी भी अस्थमा को ट्रिगर करने वाले अहम कारक हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी के दिनों में अस्थमा रोगियों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। घर में साफ-सफाई बनाए रखना, एसी और कूलर के फिल्टर नियमित साफ करना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनहेलर और दवाओं का उपयोग करना और बाहर निकलते समय मास्क पहनना भी काफी हद तक जोखिम को कम कर सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के साथ सतर्कता और सही देखभाल से अस्थमा के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

(साभार)


6 लाख की हेरोइन के साथ युवक गिरफ्तार, एंटी नारकोटिक सेल की बड़ी कार्रवाई

यमुनानगर- जिले में नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। एंटी नारकोटिक सेल की टीम ने करीब 6 लाख रुपये की 126 ग्राम हेरोइन के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि हमीदा क्षेत्र के गड़ी रोड के पास एक युवक खाली प्लॉट में नशीले पदार्थों की बिक्री कर रहा है। सूचना के आधार पर एंटी नारकोटिक्स सेल के इंचार्ज अनिल कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई और मौके पर दबिश दी गई।

कार्रवाई के दौरान संदिग्ध युवक को मौके से काबू किया गया। तलाशी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में नायब तहसीलदार कुलदीप सिंह को मौके पर बुलाया गया। तलाशी लेने पर आरोपी के पास से 126 ग्राम हेरोइन बरामद हुई।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान पुराना हमीदा निवासी समीर पुत्र गुलजार के रूप में हुई है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि वह किस गिरोह से जुड़ा है और किन इलाकों में नशीले पदार्थों की सप्लाई करता था।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में नशे के कारोबार पर सख्ती से अंकुश लगाया जाएगा और ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।


वजीरपुर में दिल दहला देने वाला हत्याकांड: पिता ने पत्नी और चार बच्चों की ली जान

गुरुग्राम –  वजीरपुर गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और चार बच्चों की हत्या कर दी। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। प्रारंभिक जांच में घरेलू कलह और आर्थिक तंगी को इस घटना की मुख्य वजह माना जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी नाजिम ने कथित तौर पर अपने परिवार को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया। मृतकों में उसकी पत्नी और चार मासूम बच्चे शामिल हैं। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

जानकारी के मुताबिक, मृतका नाजमा मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली थी और उसने परिवार के विरोध के बावजूद नाजिम से शादी की थी। शादी के बाद से ही दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। पड़ोसियों ने बताया कि आरोपी नशे का आदी था और आर्थिक परेशानियों के कारण घर में आए दिन झगड़े होते थे।

बताया जा रहा है कि परिवार करीब छह महीने पहले ही वजीरपुर में किराये के मकान में रहने आया था। आरोपी गुरुग्राम के गढ़ी हरसरू इलाके में सैलून चलाता था। घटना से कुछ दिन पहले भी पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी। इस घटना ने एक बार फिर घरेलू हिंसा और मानसिक तनाव जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर कर दिया है।


शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश ही विद्यार्थियों के समग्र विकास का आधार- डॉ. धन सिंह रावत

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

श्रीनगर। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने पीएम श्री योजना के तहत पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनमें देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। विद्यालय की छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन की शिक्षा मंत्री ने सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश ही विद्यार्थियों के समग्र विकास का आधार है।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने छात्राओं को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्र सेवा की भावना को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शिक्षा मंत्री ने विद्यालय परिवार, शिक्षकों और सभी सहयोगियों को बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की।


घात लगाकर दो भाइयों पर हमला, एक की मौत, दूसरा गंभीर रूप से घायल

पुलिस ने दो को हिरासत में लिया, बाकी की तलाश जारी

रोहतास। बिहार के रोहतास जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां लंबे समय से चल रहे छोटे से विवाद ने खूनी रूप ले लिया। मामूली कहासुनी के चलते पड़ोसियों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें एक युवक की जान चली गई, जबकि उसका भाई गंभीर रूप से घायल हो गया।

यह घटना शिवसागर थाना क्षेत्र के गिरधरिया गांव की है। मृतक की पहचान पप्पू सिंह (35) के रूप में हुई है, जो स्थानीय निवासी भुवनेश्वर सिंह के पुत्र थे। जानकारी के अनुसार, बिजली के तार और पानी के उपयोग को लेकर दो परिवारों के बीच करीब दो साल से विवाद चल रहा था, जो समय-समय पर झगड़े का कारण बनता रहा।

बताया जा रहा है कि हाल ही में भी दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी, जिसके बाद मामला थाने तक पहुंचा था। इसके बावजूद तनाव खत्म नहीं हुआ और बीती रात यह विवाद हिंसा में बदल गया।

घटना के समय पप्पू सिंह अपने भाई वकील सिंह के साथ एक समारोह से लौट रहे थे। रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने दोनों पर अचानक हमला कर दिया। धारदार हथियार से किए गए इस हमले में पप्पू सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वकील सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए वाराणसी रेफर किया गया है।

घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है। मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सासाराम भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


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