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एक कप में कितना राज़ छुपा है? नेशनल कॉफी डे पर जानिए कॉफी से जुड़े हैरान कर देने वाले तथ्य!

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एक कप में कितना राज़ छुपा है? नेशनल कॉफी डे पर जानिए कॉफी से जुड़े हैरान कर देने वाले तथ्य!

National Coffee Day Special: सुबह की शुरुआत हो या रात की थकान, एक कप कॉफी सब ठीक कर देती है! आपने सुना ही होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी कॉफी के पीछे ऐसे-ऐसे तथ्य छुपे हैं जो वाकई चौंका सकते हैं?आज हम बात करेंगे कॉफी से जुड़े कुछ अद्भुत, अनोखे और हैरान कर देने वाले फैक्ट्स की, जिन्हें जानकर आप अगली बार कॉफी पीते समय ज़रूर सोचेंगे!

1. कॉफी नहीं, यह एक “फल” है! 

जी हां, कॉफी एक फल से बनती है। कॉफी बीन्स दरअसल कॉफी चेरी नामक फल के बीज होते हैं। मतलब आप जब कॉफी पीते हैं, तो आप फल का अर्क ही तो ले रहे होते हैं।

 2. दुनिया का दूसरा सबसे अधिक व्यापार होने वाला उत्पाद

तेल के बाद, कॉफी दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा ट्रेड किया जाने वाला उत्पाद है।100 से अधिक देशों में कॉफी उगाई जाती है और अरबों डॉलर की इंडस्ट्री इससे जुड़ी हुई है।

 3. कॉफी कभी “हराम” भी मानी गई थी!

16वीं सदी में अरब देशों में कॉफी को “शैतान का पेय” कहकर इसपर रोक लगाई गयी थी, क्योंकि इसे पीकर लोग ज्यादा जागते और सोचते थे, जो उस समय की सत्ता को पसंद नहीं था। आज लोग कहते है कॉफी पीने के बाद भी हमे सुकून की नींद आती है।

 4. कॉफी आपके दिमाग को सचमुच तेज करती है!

कॉफी में मौजूद कैफीन, दिमाग में एक न्यूरोट्रांसमीटर (Adenosine) को ब्लॉक करता है, जिससे आपका फोकस, एकाग्रता और अलर्टनेस बढ़ती है।

 5. दिल के लिए भी अच्छी हो सकती है!

हाल के रिसर्च बताते हैं कि सीमित मात्रा में कॉफी पीने से हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज और पार्किंसन जैसी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। आज वर्ल्ड हार्ट डे पर दिल की भी सुने और पिए थोड़ा कॉफी लेकिन अति सर्वत्र वर्ज्यते यानी ज़्यादा कॉफी से नुकसान भी हो सकता है।

 6. सबसे महंगी कॉफी — “कोपी लुवाक” 

दुनिया की सबसे महंगी कॉफी “Kopi Luwak” इंडोनेशिया में बनती है। चौंकाने वाली बात है कि यह कॉफी एक जंगली जानवर (सिवेट कैट) की पाचन क्रिया से होकर निकलने के बाद तैयार की जाती है। 1 कप की कीमत $100 तक हो सकती है!

 7. कॉफी के लिए सही समय है… सुबह नहीं!

अधिकतर लोग सुबह उठते ही कॉफी पीते हैं, लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं कि सुबह 9:30 से 11:30 के बीच कॉफी पीना ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि तब आपके शरीर में कोर्टिसोल का स्तर गिरने लगता है और कॉफी ज्यादा असर करती है।

 8. कॉफी की खुशबू ही काफी है!

सिर्फ कॉफी की खुशबू सूंघने से ही इंसान के मूड में सुधार होता है और स्ट्रेस कम हो सकता है तो अगली बार थक जाएं तो एक कप पीने से पहले बस सूंघ कर देखिए!

9. कॉफी एक नेचुरल परफॉर्मेंस बूस्टर है

जिम जाने से 30 मिनट पहले कॉफी पीना आपके Stamina और Fat Burn को बेहतर करता है। इसीलिए कई एथलीट्स इसे वर्कआउट से पहले पीना पसंद करते हैं।

10. कॉफी सिर्फ पीने के लिए नहीं है!

कॉफी का इस्तेमाल स्किन स्क्रब, हेयर मास्क, एयर फ्रेशनर और यहां तक कि गार्डनिंग में खाद के रूप में भी किया जाता है।

कॉफी काफी मल्टीटास्किंग है, एक साथ कई काम बस अति से सावधान रहिए और बहुत कम लोग जानते हैं कि कॉफी के प्रोसेसिंग के दौरान उसमें अनजाने में छोटे-छोटे कीड़े, जैसे कॉकरोच या अन्य कीटों के अंश मिल सकते हैं। जब कॉफी बीन्स को खेतों से लाकर प्रोसेस किया जाता है, तो उसमें मौजूद कीड़े पूरी तरह से साफ नहीं हो पाते। अमेरिकी फूड एजेंसी (FDA) तक यह मानती है कि बेहद कम मात्रा में कीटों के टुकड़े कई प्रोसेस्ड फूड्स जैसे कॉफी, चॉकलेट, और मसालों में सामान्य हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं माने जाते। हालांकि, कॉकरोच से एलर्जी वाले लोगों को कॉफी से दिक्कत हो सकती है।


अपने अतीत से जुड़ने का समय, पूर्वजों की याद में बिताएं कुछ अनमोल पल

Ancestor Appreciation Day: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर अपने अतीत को भूल जाते हैं, विशेष रूप से उन लोगों को, जिनकी वजह से हमारा अस्तित्व है, हमारे पूर्वज। हममें से कई लोग यह नहीं जानते कि हमारे पूर्वज कौन थे, वे कैसे जीवन जीते थे, और उनके निर्णयों ने हमारी परंपराओं, संस्कारों और मूल्यों को किस प्रकार आकार दिया।

हर वर्ष 27 सितंबर को मनाया जाने वाला पूर्वज सराहना दिवस (Ancestor Appreciation Day) हमें यही याद दिलाता हैं  कि हमारे पूर्वजों की कहानियाँ, संघर्ष और संस्कार हमारे जीवन में गहरे रूप से जुड़े हुए हैं।

पूर्वज सराहना दिवस का इतिहास

हर पीढ़ी की अपनी एक अलग पहचान होती है। यह दिवस स्थापित किया गया है ताकि हम अपने पारिवारिक इतिहास के उन अध्यायों की सराहना कर सकें जिन्हें शायद कभी लिखा ही नहीं गया, परंतु वे मौखिक परंपराओं और संस्मरणों में जीवित हैं।

चाहे वह हमारी सांस्कृतिक विरासत हो या आनुवांशिक इतिहास, अपने पूर्वजों के बारे में जानना न सिर्फ आत्म-ज्ञान बढ़ाता है, बल्कि कई मामलों में स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियाँ भी प्रदान करता है। सिकल सेल, सिस्टिक फाइब्रोसिस और डायबिटीज जैसी बीमारियाँ हमारे पारिवारिक मेडिकल इतिहास से जुड़ी होती हैं।

 पूर्वज सराहना दिवस कैसे मनाएँ?

1. वंशावली (Genealogy) खोजें

इंटरनेट पर कई वेबसाइट्स उपलब्ध हैं जहां आप अपने परिवार के इतिहास को खोज सकते हैं। Ancestry.com, MyHeritage, FindMyPast, FamilySearch.org, Kulvriksh.org जैसी सेवाएं आपको अपने पारिवारिक वृक्ष (Family Tree) को विस्तार से जानने में मदद करती हैं।

 2. बुज़ुर्गों से बात करें

अगर ऑनलाइन खोज संभव न हो, तो परिवार के बुज़ुर्ग सदस्यों से बातचीत करें। उनसे कहानियाँ सुनें, पुरानी तस्वीरें देखें, और उनकी ज़ुबानी अपने पूर्वजों के बारे में जानें। यह अनुभव न सिर्फ ज्ञानवर्धक होता है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी जोड़ने वाला होता है। हमारें बड़ों द्वारा सुनाई गयी कहानियों में कई जिक्र ऐसे भी होते है जिन्हें सुनने के बाद हमे लगता है ऐसा भी होता होगा।

 3. पारिवारिक रिकॉर्ड तैयार करें

अपने परिवार के इतिहास को सुरक्षित रखने के लिए एक डायरी, ऑडियो रिकॉर्डिंग या वीडियो इंटरव्यू तैयार करें। दादा-दादी, नाना-नानी या माता-पिता से उनके अनुभवों को रिकॉर्ड करें ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।

4. स्मृति पुस्तक (Memoir) बनाएं

अगर संभव हो, तो अपने अनुभवों या पारिवारिक कहानियों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करें। यह भावी पीढ़ियों के लिए एक अनमोल धरोहर होगी।

क्यों ज़रूरी है पूर्वजों की सराहना?

अपने अतीत को जानने से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि हम कौन हैं और कहाँ से आए हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन केवल वर्तमान में नहीं, बल्कि अतीत और भविष्य के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।

अपने पूर्वजों की सराहना करके हम अपने अस्तित्व को अधिक गहराई से समझ सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत नींव रख सकते हैं।


तीसरे नवरात्रि पर मां चंद्रघंटा की विशेष कृपा, दो दिन तक मिलेगा पुण्यफल

Sharadiye Navratri Third Day: शारदीय नवरात्रि  का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा का माना जाता है, जिनकी उपासना तृतीया तिथि को की जाती है। इस बार यह तिथि विशेष संयोग के साथ 24 और 25 सितंबर को मनाई जा रही है, जिसमें महालक्ष्मी राजयोग, बुधादित्य योग और रवि योग जैसे दुर्लभ योगों का निर्माण हो रहा है।

 मां चंद्रघंटा का स्वरूप

मां चंद्रघंटा का स्वरूप सौम्य, शांत और शक्तिशाली है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। मां सिंह पर सवार हैं और उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। उनकी पूजा करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और मन को शांति, साहस और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

कैसे करे माँ चंद्रघंटा की पूजा

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए सबसे पहले स्नान कर शुद्ध होकर पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें। मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और चंदन, फूल, रोली, धूप-दीप, वस्त्र और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद उनके मंत्रों का जाप करें और आरती करें।

मां चंद्रघंटा को घंटी की ध्वनि अत्यंत प्रिय है, इसलिए नवरात्रि के तीसरे दिन यह उपाय करें

मंदिर में पीतल की घंटी का दान करें

पूरे घर में घंटी बजाकर “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे” मंत्र का जप करें

सुबह-शाम की आरती में घंटी जरूर बजाएं

मुख्य द्वार पर विंड चाइम लगाएं, ताकि घर में शुभता और समृद्धि का वास बना रहे

तृतीया तिथि का विशेष महत्व

24 सितंबर सुबह 4:52 से 25 सितंबर सुबह 7:07 तक तृतीया तिथि रहेगी। दो दिन तक मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष पुण्यकाल रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह समय सभी मानसिक परेशानियों से मुक्ति पाने, साहस बढ़ाने और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने का उत्तम अवसर है।

मां चंद्रघंटा की विशेष कृपा उन भक्तों पर सदैव बनी रहती है जो कर्म के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं और जीवन में सत्य, संयम और धर्म के मार्ग पर चलते हैं। जो भक्त सच्चे मन से कर्म करते हैं और सद्मार्ग पर चलते हैं, मां चंद्रघंटा की कृपा उनके जीवन में हर संकट को दूर करती है और उन्हें सुख, शांति और विजय प्रदान करती हैं।”


शक्ति की प्रथम स्वरूपा: जानिए मां शैलपुत्री की प्रेरक गाथा

Navratri 2025: हर वर्ष शरदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना से पूजा की शुरुआत होती है। शैलपुत्री का शाब्दिक अर्थ है, “पहाड़ की पुत्री”, और इन्हें ही देवी पार्वती, हेमवती और सती के रूप में भी पूजा जाता है। इनका वाहन नंदी (वृषभ) है, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं माता । इनका स्वरूप शांति, शक्ति और संयम का प्रतीक है।

माँ शैलपुत्री शक्ति का प्रथम स्वरूप

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में शैलपुत्री को प्रथम स्थान प्राप्त है। हिमालय राज की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया। यही देवी आगे चलकर भगवान शिव की अर्द्धांगिनी बनीं और कैलाश पर्वत की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुईं।

सती से शैलपुत्री बनने की कथा

देवी भागवत पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, मां शैलपुत्री पूर्वजन्म में माता सती थीं। एक बार उनके पिता प्रजापति दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव और माता सती को जानबूझकर नहीं बुलाया गया।

जब यह बात सती माता को पता चली, तो वे वहां बिना निमंत्रण के ही पहुंच गईं। यज्ञ स्थल पर न केवल उनके पिता ने उनका और उनके पति का अपमान किया, बल्कि सभी रिश्तेदारों ने भी व्यंग्य और तिरस्कार किया। पति शिव का अपमान सहन न कर पाने के कारण माँ सती ने योगाग्नि में कूदकर अपनी आहुति दे दी।

इस पीड़ा से दुखी होकर भगवान शिव ने उस यज्ञ का विध्वंस कर दिया और स्वयं को तप में लीन कर लिया। कालांतर में सती ने हिमालय के घर में पार्वती के रूप में जन्म लिया और कठोर तपस्या के बाद शिव को पुनः अपने पति रूप में प्राप्त किया। इस रूप में उन्हें शैलपुत्री कहा गया।

माता शैलपुत्री की पूजा का महत्व

नवरात्रि का पहला दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू होता है। मान्यता है कि इनकी विधिवत आराधना से व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य, मानसिक शांति, और जीवन में स्थायित्व प्राप्त होता है।  जो भक्त मां शैलपुत्री की कथा श्रद्धा से सुनते हैं, उन्हें जीवन में कठिन परिस्थितियों से उबरने की शक्ति मिलती है। यह भी माना जाता है कि बिना शैलपुत्री की कथा के पूजा अधूरी मानी जाती है।

आत्मसम्मान और तपस्या का प्रतीक 

मां शैलपुत्री की कथा केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि नारी शक्ति, आत्मसम्मान और तपस्या की प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि अपमान सहने से अच्छा है, आत्मसम्मान के लिए बलिदान देना। मां का यह स्वरूप प्रत्येक भक्त को संयम, साहस और आत्मबल की प्रेरणा देता है। इस नवरात्रि, आइए मां शैलपुत्री की आराधना से अपने जीवन को एक नई दिशा दें।


नेशनल वुमन रोड वॉरियर डे: महिलाएं जीवन के हर सफ़र को बनाती है बेमिसाल

National Women Road Warrior Day: हर साल मनाया जाने वाला “नेशनल वुमन रोड वॉरियर डे” उन बहादुर और मेहनती महिलाओं को समर्पित है, जो काम के सिलसिले में लगातार सफर करती हैं, कभी क्लाइंट मीटिंग्स के लिए, तो कभी नए अवसरों की तलाश में। ये वे महिलाएं हैं जो हवाई अड्डों, होटल लॉबी और कॉर्पोरेट मीटिंग्स के बीच अपने करियर को गति देती हैं, बिना थके, बिना रुके। “हर सफर खूबसूरत होता है, और महिलाएं जीवन के हर मोड़ पर इस बात को साबित करती हैं। चाहे घर हो या बाहर, वे अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं।

हर यात्रा एक कहानी ‘रोड वॉरियर्स’ की  

ये महिलाएं न सिर्फ़ तेज़ चलती हैं, बल्कि हर कदम पर आत्मविश्वास लेकर चलती हैं। इनके हर सूटकेस में एक कहानी होती है, और हर यात्रा किसी जीत की गवाही देती है। चाहे कार चला रही हों या विमान पकड़ रही हों ये महिलाएं दिखाती हैं कि सब कुछ मुमकिन हैं।

जीवन हमेशा आसान नहीं होता

सफर में देरी, नेटवर्क की समस्या, अनगिनत घंटे और परिवार से दूरी, इन सबके बावजूद ये महिलाएं डटी रहती हैं। कई बार ये प्रोफेशनल ज़िम्मेदारियों के साथ साथ परिवार में संतुलन बनाने की पूरी कोशिश करती हैं। इनके हौसले और जज़्बे को यह दिन एक मंच देता है, ताकि हम सभी उनके प्रयासों को खुले दिल से सराह सकें।

कैसे मनाएं नेशनल वुमन रोड वॉरियर डे

एक धन्यवाद संदेश भेजें, एक छोटा सा ईमेल, हैंडरिटन नोट या वॉइस मैसेज, जो भी तरीका हो, उसे खास बनाइए। उन्हें बताइए कि आप उनकी मेहनत को देखते हैं और सराहते हैं।

उनकी कहानी साझा करें

किसी महिला सहकर्मी या दोस्त की कहानी सोशल मीडिया पर शेयर करें। उनकी यात्राओं, संघर्षों और सफलताओं को सामने लाइए और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित कीजिए।

महिला नेतृत्व वाले बिज़नेस को सपोर्ट करें

ऐसी किसी महिला की सर्विस लें जो अक्सर ट्रैवल करती हैं, या फिर किसी महिला उद्यमी का प्रोडक्ट खरीदें। एक अच्छा रिव्यू दें, दूसरों को भी बताएं आपका यह छोटा कदम उनकी बड़ी उड़ान का हिस्सा बन सकता है।

एक बातचीत की शुरुआत करें

ऑफिस में एक कैज़ुअल मीटिंग रखें, जहां महिलाएं अपनी ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर कर सकें। उनकी बातों से नई पॉलिसी आइडियाज, सहानुभूति और समझ दोनों बढ़ सकती है।

क्यों शुरू हुआ यह दिन?

2003 में Insight Vacations नामक ट्रैवल कंपनी ने इस दिन की शुरुआत की। मकसद था कि उन महिलाओं को पहचान देना जो ऑफिस की चारदीवारी से बाहर निकलकर देश-दुनिया में बिज़नेस को आगे बढ़ा रही हैं। ये महिलाएं सिर्फ यात्राएं नहीं करतीं, ये अपने आत्मबल, अनुशासन और प्रोफेशनलिज्म से हर मील पर मिशन पूरा करती हैं।

नेशनल वुमन रोड वॉरियर डे सिर्फ तारीख नहीं, एक सम्मान है। ये उन तमाम महिलाओं को सलाम करने का दिन है जो सड़कों, हवाई अड्डों और बिज़नेस मीटिंग्स के बीच देश और दुनिया को आगे बढ़ा रही हैं। हर वो महिला जो “ऑन द रोड” है, अपने सपनों, जिम्मेदारियों और लक्ष्यों के साथ वो इस दिन की असली हीरो है। हर दिन सड़को पर आपको नज़र आता होगा एक चेहरा जो किसी पुरुष का नहीं महिला का होगा, घर की जिम्मेदारियों के साथ वो खुद को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही होगी।


TIMES UP DAY: रिश्तों में कैसे घोले मिठास और बनाए इस दिन को खास

कभी कभी ऐसा नहीं लगता की आज तो इस मुद्दे को और न खीचते हुए टाइम्स अप ही कर दे, तो ये दिन आप सबके लिए बेस्ट है। हर साल 17 सितंबर को मनाया जाने वाला टाइम्स अप डे हमें यह याद दिलाता है कि ज़िंदगी शिकायतों और गिले-शिकवों में उलझने के लिए बहुत छोटी है। यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम अपने मतभेदों को पीछे छोड़ें, सुलह की ओर कदम बढ़ाएँ और रिश्तों को एक नई शुरुआत दें।

टाइम्स अप डे का महत्व

यह दिन हमें सिखाता है कि जीवन में झगड़े और मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें दिल में दबाकर रखना रिश्तों को और बिगाड़ देता है। जब हम माफी मांगते हैं या किसी पुराने विवाद को खत्म करते हैं, तो न सिर्फ रिश्ते बेहतर होते हैं बल्कि जीवन भी हल्का और खुशहाल लगता है। कभी करके देखिए अच्छा लगेगा।

परिवार के झगड़े हों, दोस्तों के बीच दूरियाँ हों या पेशेवर जीवन में मनमुटाव टाइम्स अप डे बताता है कि समझदारी और बातचीत से हर विवाद को खत्म किया जा सकता है।

इतिहास के पन्नों में टाइम्स अप डे

वैसे तो हर दिन हम ये कर सकते हें पर जैसे हमारे जीवन का एक ख़ास दिन होता हैं वैसे ही टाइम्स अप डे की शुरुआत थॉमस और रूथ रॉय ने की थी, जिन्होंने 1980 के दशक के अंत में नए त्योहार और विशेष दिनों को बनाने की परंपरा शुरू की। उनका मानना था कि पुराने मतभेदों को भुलाकर रिश्तों को सुधारना ही जीवन को बेहतर बना सकता है। इसीलिए उन्होंने यह खास दिन दुनिया को दिया।

कैसे मनाएँ टाइम्स अप डे?

इस दिन को मनाने के कई अनोखे तरीके हैं। ज़रूरी नहीं कि बड़े आयोजन हों, बल्कि छोटी-छोटी पहल भी रिश्तों में जादू भर सकती है।

कलम उठाइए, दिल से लिख डालिए

कभी-कभी एक साधारण चिट्ठी या नोट आपके मन की बात कह सकता है। दिल से लिखे शब्द कई बार सबसे गहरी खाई को भी भर देते हैं।

सॉरी कहना बना सकता है दिन खास

“सॉरी” कहने का सबसे स्वादिष्ट तरीका है किसी को उनके पसंदीदा खाने पर बुलाना। अगर अच्छा खाना बनाना नहीं आता तो उनके पसंदीदा रेस्टोरेंट से टिफिन मंगा लीजिए। साथ बैठकर खाना साझा करना रिश्तों में मिठास घोल देता है। खाना तो अक्सर दो दिल हो या तहजीब दोनों को जोड़ता आया हैं।

साथ चलें और बातें करें तो बने बात

किसी पार्क में टहलते हुए बातचीत करना कठिन मुद्दों को हल्का बना देता है। कंधे से कंधा मिलाकर चलना मतभेदों को पिघलाने का आसान तरीका है।

सॉरी प्लेलिस्ट भी एक अच्छा तरीका 

अगर आप संगीत प्रेमी हैं, तो एक “सॉरी प्लेलिस्ट” बनाइए। ऐसे गाने चुनिए जो आपके रिश्ते की याद दिलाते हों या जिनमें माफी और दोस्ती की भावना हो। इसे साझा करना सुलह की ओर एक प्यारा कदम हो सकता है।

टाइम्स अप डे हमें यही याद दिलाता है कि रिश्ते शिकायतों से नहीं, बल्कि संवाद और समझ से आगे बढ़ते हैं। चाहे वह चिट्ठी हो, भोजन हो, सैर हो या गाने  सबसे अहम है पहला कदम उठाना। हर कोई उस पहले कदम की शुरुआत करने से डरता है क्योंकि हर किसी का अहम बीच में आ जाता है।

आइए, इस टाइम्स अप डे पर हम सब किसी ऐसे रिश्ते को फिर से जोड़ें, जिसमें कभी मतभेद आ गया था। क्योंकि जीवन सचमुच बहुत छोटा है, और रिश्ते उसे खूबसूरत बनाते हैं। हम अकेले जरुर आए थे पर हम एक दूसरे से जुड़ें हुए है।


आओं मिलकर बचाएं हम, पृथ्वी की जीवनरक्षक ढाल ओजोन को अपने छोटे छोटे कदमों से

International Ozone Layer Preservation Day: ओज़ोन परत हमारी पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाती है। यह एक नाज़ुक लेकिन बेहद महत्वपूर्ण गैसीय परत है, जो पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है और आज हम इसी परत के दुश्मन बन चुके हैं, इसका सबसे बड़ा प्रमाण है हमारी दिनचर्या। विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक थीम 2025 को साकार करे हम, आओं मिलकर पृथ्वी की जीवनरक्षक बनाए हम।

ओज़ोन परत क्या है?

ओज़ोन परत वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में स्थित है। इसमें ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं (O3) से बनी गैस हाई कंसंट्रेशन में पाई जाती है। जब ओज़ोन परत समताप मंडल में होती है, तब यह हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है। लेकिन जब यह पृथ्वी की सतह के नज़दीक यानी क्षोभ मंडल (Troposphere) में होती है, तो यह प्रदूषक के रूप में काम करती है और पौधों, जानवरों और मनुष्यों के लिए हानिकारक बन जाती है।

ओज़ोन परत में छेद और उसके दुष्प्रभाव

वैज्ञानिकों ने पाया है कि पोलर रीजन , विशेषकर अंटार्कटिका और आर्कटिक के ऊपर, ओज़ोन परत में छेद मौजूद है। वसंत ऋतु के दौरान यह छेद और बड़ा हो जाता है, जिससे सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुँचती हैं। इसके कारण त्वचा कैंसर, आँखों में मोतियाबिंद, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, वनस्पति और समुद्री जीवन पर दुष्प्रभाव जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

ओज़ोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले प्रमुख कारक

मानव गतिविधियाँ इस समस्या को और बढ़ाती हैं। इनमें प्रमुख हैं, CFCs (क्लोरोफ्लोरोकार्बन), हैलोजेनेटेड हाइड्रोकार्बन, नाइट्रस ऑक्साइड, मीथाइल ब्रोमाइड ये गैसें वातावरण में पहुँचकर ओज़ोन अणुओं को नष्ट करती हैं और छेद को बड़ा करती हैं।

ओज़ोन परत संरक्षण दिवस का इतिहास

16 सितंबर 1987 को “मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल” पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसी को स्मरण करते हुए हर वर्ष 16 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षण दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1994 में इस दिन को आधिकारिक मान्यता दी। इसका उद्देश्य है, ओज़ोन परत के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना,समाधान तलाशना और पर्यावरण हितैषी नीतियों को बढ़ावा देना

हम सबके छोटे पर महत्वपूर्ण कदम

हर व्यक्ति अपनी ओर से छोटे-छोटे कदम उठाकर ओज़ोन परत की रक्षा में योगदान दे सकता है:

वाहन का कम से कम प्रयोग करें, पैदल चलें या साइकिल का इस्तेमाल करें।

कारपूलिंग को बढ़ावा दें। कारपूलिंग का मतलब है जब भी आप किसी सफ़र में गाड़ी चलाकर जाए तो अकेले कभी न जाए, सभी को साथ लेकर जाए इससे खर्चा भी बटेगा और पृथ्वी को जो क्षति पहुच रही है उसमे कमी आयगी।

ऐसे घरेलू और सफाई उत्पाद चुनें जिनमें हानिकारक रसायन न हों। हमारे आस पास केमिकल उत्पादों का भंडार है ऐसे में आर्गेनिक प्रोडक्ट्स को ढूँढना चुनौती तो है पर मुश्किल नहीं।

स्थानीय उत्पादों को खरीदें ताकि लंबी दूरी तक माल ढुलाई से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।

ओज़ोन को नुकसान पहुँचाने वाली गैसों वाले प्रोडक्ट्स जैसे एरोसोल स्प्रे से बचें।

ओज़ोन परत पृथ्वी की प्राकृतिक ढाल है। यदि यह कमजोर हुई तो न केवल मानव जीवन बल्कि पूरा इकोसिस्टम संकट में पड़ सकता है। अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। आइए, हम सब मिलकर इस जीवनदायिनी परत की रक्षा का संकल्प लें। हम सबका कर्तव्य हैं कि आने वाले समय में पृथ्वी को हो रहे नुकसान में कमी लाई जाए।


शक्तिमान से लेकर रामायण तक, एक से बढ़कर एक कहानियाँ जिसने दूरदर्शन को बनाया ख़ास

66 Years of Doordarshan: दूरदर्शन से जुड़ी हुई यादे कितनी पुरानी हो सकती है, 80’s-90’s का वो समय जब छत पर एंटीना हुआ करता और एक उसे ख़राब मौसम के बाद ठीक करने जाता। अब वो सब तो देखने को नहीं मिलता क्योंकि वो समय अब यादों में रह गया हैं। आज दूरदर्शन 66 साल पूरे कर चूका हैं जोकि अपने आप में एक गौरव का विषय हैं। रामायण महाभारत से लेकर ॐ नमः शिवाय का वो स्वर आज भी कई घरों में सुनाई देता होगा पर सबके मोबाइल फ़ोन में।

दूरदर्शन की स्थापना कब हुई? 

दूरदर्शन (डीडी) भारत का सार्वजनिक सेवा टेलीविजन प्रसारक है, जिसकी स्थापना 15 सितम्बर, 1959 में सरकार द्वारा की गई थी। इसका नाम दो हिंदी शब्दों ‘दूर’ और ‘दर्शन’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है “दूर की झलक”। दूरदर्शन का संचालन और प्रबंधन प्रसार भारती द्वारा किया जाता है, जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन एक ऑटोनोमस आर्गेनाईजेशन है। अपनी स्थापना के बाद लंबे समय तक यह भारत का एकमात्र टेलीविजन चैनल रहा और लगभग 30 वर्षों तक दर्शकों को समाचार, शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम उपलब्ध कराता रहा। 1980 और 1990 के दशक में दूरदर्शन अपनी लोकप्रियता के चरम पर था और उस समय यह भारतीय घर-घर का अहम हिस्सा बन चुका था। वर्तमान में यह अपने 35 से अधिक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय उपग्रह चैनलों के माध्यम से देशभर में प्रसारण करता है और सार्वजनिक सेवा प्रसारण के क्षेत्र में अब भी अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।

कौन कौन से सीरियल जिन्होंने छोड़ी एक गहरी छाप

चन्द्रमुखी जिसका फूल आज भी महकता हैं, चंद्रकांता की कहानी जो आज भी सदियों पुरानी हैं, जो कहूंगा सच कहूंगा का पत्थर पर लिखा हुआ वो नाम आज भी है, मैं बनूंगी एयर होस्टेस की वो उड़ाने हर घर में आज भी है जिंदा, ब्योमकेश बक्शी का वो जासूसी अंदाज, हम लोग एक मिडिल क्लास फैमिली के संघर्षो की कहानी, गली गली सिम के वो आनोखे करैक्टर, यहाँ के हम सिकंदर के वो प्रेरणा देते यूथ, सुपर हीरो शक्तिमान की वो सीख, रविवार की वो रंगोली जिसके गीत सुनने के लिए सभी इंतज़ार किया करते थे।

सभी एक से बढ़कर एक सीरियल जो हमेशा हम सभी के दिलों में जिंदा रहेंगे, वैसे तो दूरदर्शन आज भी हैं पर वो पुराने धारावाहिकों की यादें उन्हें आज भी एक खूबसूरत युग बनाता हैं।


UPI के नए नियम 15 सितंबर से हुए लागू, अब बड़े ट्रांजैक्शन करना हुआ आसान

UPI New Rules Start Today: आजकल एक रूपए का लेन देन हो या फिर लाखों का, हर कोई यूपीआई का इस्तमाल करता हुए नज़र आता हैं। इसी बीच अगर कोई बड़ा बदलाव होता है, तो हर कोई उसपर नजर बनाए रखता हैं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूज़र्स के लिए एक बड़ी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI ट्रांजैक्शन लिमिट में बदलाव किए हैं, जो 15 सितंबर 2025 से लागू हो गए हैं। अब इंश्योरेंस, लोन EMI, कैपिटल मार्केट निवेश और ट्रैवल जैसी श्रेणियों में ग्राहक एक दिन में 10 लाख रुपये तक का भुगतान कर सकते हैं।

पर्सन टू मर्चेंट पर लागू होंगे बदला

यह बदलाव सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M) पेमेंट्स पर लागू होंगे। व्यापारी व संस्थान को पेमेंट करते समय नई सीमा मान्य होगी। जबकि पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांसफर की सीमा पहले जैसी ही 1 लाख रुपये प्रतिदिन रहेगी। हालांकि, बैंक अपनी रिस्क पॉलिसी के आधार पर इस लिमिट को और कम तय कर सकते हैं।

नए बदलाव एक नजर में

इंश्योरेंस प्रीमियम और कैपिटल मार्केट निवेश की सीमा को  2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति ट्रांजैक्शन, दैनिक सीमा 10 लाख रुपये।

ट्रैवल बुकिंग और गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस पेमेंट्स, अब प्रति लेनदेन 5 लाख और प्रतिदिन 10 लाख रुपये तक।

लोन और EMI कलेक्शन, प्रति लेनदेन 5 लाख, जबकि दैनिक सीमा 10 लाख।

क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट अब एक बार में 5 लाख रुपये, दैनिक सीमा 6 लाख रुपये।

ज्वेलरी खरीदारी पर 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये, दैनिक सीमा 6 लाख।

बैंकिंग सेवाओं (जैसे टर्म डिपॉजिट्स डिजिटल ऑनबोर्डिंग) की अधिकतम राशि 5 लाख रुपये।

फॉरेक्स पेमेंट्स (BBPS के जरिए) अब सीमा 5 लाख रुपये तक।

NPCI ने कहा कि UPI अब छोटे भुगतानों से लेकर हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन्स तक हर जगह उपयोग में लाया जा रहा है। ऐसे में बाजार की मांग और डिजिटल लेनदेन की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई लिमिट तय की गई है, ताकि बड़े लेनदेन भी बिना किसी दिक्कत के किए जा सकें।


हिंदी दिवस विशेष: हिंदी अभिव्यक्ति का माध्यम, मात्रभाषा और एक उम्मीद

Hindi Diwas Special: हिन्दी मात्र एक भाषा नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति का माध्यम है। आज यानी 14 सितम्बर को हर साल हिन्दी दिवस मनाया जाता है। हिन्दी हम बचपन से पढ़ते आए हैं, और हम में से कई लोगों का यह पसंदीदा विषय भी रहा है। सबसे अधिक अंक अगर किसी विषय में आते हैं तो ज्यदात्तर वह विषय हिन्दी ही होता है। हिन्दी दिवस पूरे भारतवर्ष में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। स्कूल, कॉलेज और कार्यालय परिसरों में हर जगह अनेक प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

दरअसल, 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया था कि हिन्दी को भारत की राजभाषा बनाया जाए। उस समय यह माना गया कि भारत के अधिकांश क्षेत्रों में हिन्दी बोली और समझी जाती है, इसलिए इसे केन्द्र सरकार की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार करना उचित होगा। हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्थापित करने के निर्णय को जन-जन तक पहुँचाने और इसके महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से वर्ष 1953 से प्रतिवर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाने लगा।

हिन्दी दिवस की बात हो और हिन्दी साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कवियों का नाम स्मरण न किया जाए, यह संभव नहीं है। हिन्दी साहित्य की अमूल्य रचनाओं के माध्यम से अनेक कवियों ने योगदान दिया है। इनमें विशेष रूप से कबीरदास, सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई, मलिक मुहम्मद जायसी, मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा और रामधारी सिंह दिनकर का नाम प्रमुख है।

आप सभी को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। हिन्दी दिवस मनाने के कई तरीके हो सकते हैं, आप हिन्दी में एक कविता लिखकर खुद को या अपने घरवालों को सुना सकते हैं। विद्यालयों में हिन्दी पखवाड़ा भी शुरू हो चुका होगा और यह लंबे समय तक चलेगा, तो क्यों न एक दिन खुद को पूरी तरह हिन्दी के रंग में रंग दिया जाए।


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