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करवा चौथ के व्रत को खास बनाता है अपनों का साथ और प्यार

Category Archives: ब्लॉग

करवा चौथ के व्रत को खास बनाता है अपनों का साथ और प्यार

Karwa Chauth Special: भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है, जहाँ अनेक पर्व बिना किसी भेदभाव के मनाए जाते हैं और हर कोई इन रंग-बिरंगे उत्सवों में डूब जाता है। ऐसा ही एक त्यौहार जिसे कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाता है करवा चौथ जो सुहागिन महिलाओं का सबसे प्रमुख व्रत है। इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्र देव के उदय होने तक निर्जला उपवास रखकर मनाती हैं।

महिलाओं को चिरसुहागिन का मिलता है आशीर्वाद 

हिंदू परंपरा के अनुसार यह व्रत केवल पति-पत्नी के रिश्ते को ही मजबूत नहीं करता, बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग भी खोलता है। माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक रखने वाली महिलाओं को चिरसुहागिन यानी जो सदैव अपने पति के जीवित रहते हुए सौभाग्यवती बनी रहे का आशीर्वाद मिलता है।

करवा चौथ से जुड़ी प्रसिद्ध लोककथाएँ 

करवा चौथ से जुड़ी कई लोककथाएँ प्रचलित हैं, जिनमें कुछ सबसे प्रसिद्ध हैं:

रानी वीरवती की कथा जिसमे सात भाइयों के छल के कारण समय से पहले व्रत तोड़ने पर उनके पति की मृत्यु हो गई, लेकिन देवी पार्वती की कृपा और सच्चे संकल्प से उन्हें दोबारा जीवन प्राप्त हुआ।

महाभारत कालीन कथा जिसमे द्रौपदी ने अर्जुन की कठिन तपस्या के समय भगवान कृष्ण के कहने पर करवा चौथ का व्रत रखा और पांडवों की परेशानियाँ दूर हो गई।

करवा और मगरमच्छ की कथा के अनुसार करवा नामक पत्नी ने अपने पति को मगरमच्छ से बचाने के लिए यमराज तक को श्राप देने का साहस दिखाया और पति को जीवनदान दिलाया।

सावित्री-सत्यवान की कथा को तो जगविख्यात है जिसमे सावित्री के अटूट व्रत और तपस्या के आगे यमराज को भी सत्यवान के प्राण वापस करने पड़े थे।

करवा चौथ का महत्त्व

यह पर्व पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और त्याग का प्रतीक है। ख़ासतौर से यहाँ उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में मनाया जाता है, जहाँ महिलाएँ अपने पति की सुरक्षा और लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं। करवा चौथ का समय रबी की फसल की शुरुआत के साथ भी जुड़ा है। इस दिन महिलाएँ करवा (मिट्टी के बर्तन) में गेहूँ भरकर मंगलकामना करती हैं। प्राचीन समय में यह व्रत महिलाओं को एक-दूसरे से जुड़ने और ससुराल में अकेलेपन को दूर करने का अवसर भी देता था।

अब यह पर्व केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहा। कई पति भी अपनी पत्नियों के साथ उपवास रखते हैं। यह बदलाव करवा चौथ को और भी खास बना देता है क्योंकि यह दोनों के प्रेम, सम्मान और साझेदारी का प्रतीक बन गया है। हर त्यौहार अपने आप में ख़ास है बस उसे बनाने के पीछे का कारण उसे और ख़ास बनाता है।


क्या करें जब व्रत के दौरान शरीर जवाब देने लगे?

Navratri Vrat Special: नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की उपासना और आत्म-संयम का पर्व होते हैं। व्रत रखने वाले लोग न केवल खान-पान में संयम बरतते हैं, बल्कि मन, वाणी और व्यवहार को भी सात्विक बनाते हैं। लेकिन जब नौ दिनों के उपवास का अंतिम दिन आता है और शरीर थका हुआ हो, पेट में खालीपन हो और कमजोरी महसूस हो, तो एक सवाल उठता है: “क्या अब भी भूखे ही रहना सही है?”

भूख लगना कोई दोष नहीं 

व्रत का अर्थ भूख से लड़ना नहीं है, बल्कि आत्मनियंत्रण और भक्ति के साथ संयमित जीवन जीना है। जब शरीर संकेत देने लगे कि अब उसे ऊर्जा की आवश्यकता है, तब उस पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। आख़िरकार, एक थका हुआ शरीर, ध्यान और भक्ति में कितना लग सकेगा?

क्या करें जब व्रत के दौरान बहुत भूख लगे?

1. फलाहार करें, व्रत न तोड़े

अगर व्रत में अन्न नहीं खा रहे हैं, तो व्रत के अनुकूल फल, दूध, मखाने, साबूदाना खिचड़ी या सिंघाड़े के आटे से बनी चीज़ें खा सकते हैं। इससे व्रत बना भी रहेगा और शरीर को ऊर्जा भी मिलेगी।

2. पानी और दूध का सेवन करें

कभी-कभी डिहाइड्रेशन से भी भूख और थकावट ज़्यादा लगती है। नींबू पानी (बिना नमक), नारियल पानी या ठंडा दूध पिएं। यह तुरंत राहत देगा।

3. मन से क्षमा मांगें, यदि नियम टूटे

यदि कभी अनजाने में व्रत का नियम टूट भी जाए, तो मन में अपराधबोध पालने की आवश्यकता नहीं। मां दुर्गा करुणामयी हैं। सच्चे मन से प्रार्थना करें, “माँ, मैं मन से आपके चरणों में हूँ, यदि कोई भूल हुई हो तो क्षमा करें।”

क्या न करें?

भूख से परेशान होकर कोई निषेधित चीज़ न खाएं (जैसे लहसुन, प्याज, अनाज आदि)।

भूखे रहकर चिड़चिड़ापन या क्रोध न करें, यह व्रत की पवित्रता को नष्ट कर सकता है।

दूसरों को दोष न दें या अपनी भक्ति को दिखावा न बनाएं।

जहाँ भावना, वहीं सच्ची भक्ति

भक्ति शरीर से नहीं, मन और श्रद्धा से होती है। नवरात्रि का उद्देश्य सिर्फ उपवास नहीं, बल्कि स्वयं को मां की शक्ति में लीन करना है। ऐसे में यदि शरीर थक रहा है, तो फलाहार करके, माँ का नाम लेकर, और ध्यानपूर्वक व्रत पूरा करना भी उतना ही पुण्यकारी है। भूख लगना प्राकर्तिक है तो ऐसे में मन में किसी भी तरह की ग्लानी का भाव न रखे और आगे जो ठीक लगे वही करे।

नवरात्रि का हर दिन, मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना होती है। यह सभी दिन केवल भूखे रहने का नहीं, बल्कि माँ से अपने जीवन में सिद्धि, शक्ति और शांति की कामना करने का है। अतः यदि भूख लगे, कमजोरी हो, तो खुद को दोषी न समझें। माँ की कृपा में विश्वास रखें, और अपने व्रत को श्रद्धा से पूर्ण करें। “भक्ति में नियम हैं, परंतु सबसे बड़ा नियम प्रेम है।”


कहानियों की दुनिया का जश्न और भारत के 10 शानदार पॉडकास्ट

International Podcast Day: हर साल 30 सितंबर को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस (International Podcast Day) एक ऐसा दिन है जब दुनियाभर के पॉडकास्ट प्रेमी, श्रोता और निर्माता इस माध्यम का उत्सव मनाते हैं। यह दिन केवल पसंदीदा पॉडकास्ट सुनने के लिए नहीं, बल्कि उन क्रिएटर्स का आभार जताने का भी दिन है, जो हमें हर दिन नए अनुभवों से जोड़ते हैं, चाहे वो कॉमेडी हो, इतिहास, स्वास्थ्य, या सस्पेंस से भरी कहानियाँ।

इतिहास: कैसे शुरू हुआ यह दिन?

इस दिवस की शुरुआत 2013 में स्टीव ली ने एक रेडियो शो सुनते समय की। उन्होंने सोचा, “जब सीनियर सिटीज़न डे हो सकता है, तो पॉडकास्ट डे क्यों नहीं?” फिर 2014 में National Podcast Day के रूप में अमेरिका में पहली बार इसे मनाया गया। लेकिन जल्द ही इस आइडिया ने अंतरराष्ट्रीय रूप ले लिया और आज यह दुनिया भर के 100+ देशों में मनाया जाता है।

क्यों मनाते हैं ये दिन?

पॉडकास्ट ने हमारे मीडिया उपभोग की शैली को बदल दिया है। अब सीखना, हँसना, प्रेरित होना या बस समय बिताना, सब पॉडकास्ट से संभव है। यह दिन नई कहानियाँ खोजने, श्रोताओं से जुड़ने और खुद एक पॉडकास्टर बनने की प्रेरणा देता है।

 कैसे मनाएं अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस?

 नई पॉडकास्ट खोजें, कुछ नया सुनें, कुछ नया सीखें।

पसंदीदा पॉडकास्टर को धन्यवाद कहें, सोशल मीडिया पर या ईमेल से।

#InternationalPodcastDay हैशटैग के साथ शेयर करें, अपने पसंदीदा पॉडकास्ट।

लिसनिंग पार्टी रखें, दोस्तों के साथ मिलकर पॉडकास्ट सुनें।

पॉडकास्ट को सपोर्ट करें, रिव्यू दें या सब्सक्राइब करें।

भारत के 10 बेहतरीन पॉडकास्ट चैनल्स

भारत में पॉडकास्टिंग ने बीते कुछ वर्षों में तेज़ी से ग्रोथ की है। यहां हम लाए हैं भारत के टॉप 10 पॉडकास्ट चैनल्स की सूची, जो कंटेंट, क्वालिटी और लोकप्रियता में बेजोड़ हैं:

1. The Ranveer Show – BeerBiceps

Host: रणवीर इलाहाबादिया

Genre: मोटिवेशन, लाइफ लेसन्स, बिजनेस, स्पिरिचुअलिटी

YouTube और Spotify दोनों पर लोकप्रिय।

2. The Musafir Stories

Genre: ट्रैवल और भारत की अनसुनी जगहों की कहानियाँ

ट्रैवल लवर्स के लिए बेस्ट।

3. Bhaskar Bose – By Red FM

Genre: फिक्शन, मिस्ट्री, थ्रिलर

डिटेक्टिव भास्कर बोस की आवाज़ में रोमांच।

4. Hindi Kahaniyan – Suno Kahani

Genre: शॉर्ट स्टोरीज़, लोक कथाएँ, प्रेरक कहानियाँ

पारिवारिक सुनने के लिए उपयुक्त।

5. Indian Noir – By Nikesh Murali

Genre: क्राइम, थ्रिलर, हॉरर (हिंदी और इंग्लिश दोनों में)

शानदार साउंड डिज़ाइन और वॉयस एक्टिंग।

6. The Habit Coach – By Ashdin Doctor

Genre: सेल्फ इम्प्रूवमेंट, डेली हैबिट्स

छोटे, असरदार पॉडकास्ट एपिसोड।

7. Pyaar Ka Punch – By Gaana Originals

Genre: लव, रिलेशनशिप और इमोशन्स

यंग ऑडियंस के बीच हिट।

8. Maed in India – By Mae Thomas

Genre: इंडी म्यूज़िक और आर्टिस्ट इंटरव्यू

म्यूज़िक लवर्स के लिए अनमोल।

9. Cyrus Says – By Cyrus Broacha

Genre: ह्यूमर, पॉलिटिक्स, लाइफ

फन के साथ थॉट-प्रोवोकिंग बातचीत।

10. Kahaani Express – By RJ Karan

Genre: इमोशनल कहानियाँ, जीवन से जुड़ी बातें

दिल को छू जाने वाली कहानियाँ।

अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि कहानी कहने और सुनने की कला का उत्सव है। चाहे आप पॉडकास्ट सुनते हों या बनाते हों, 30 सितंबर को कुछ समय पॉडकास्ट के लिए ज़रूर निकालें। “हर आवाज़ के पीछे एक कहानी होती है, और हर कहानी के पीछे एक पॉडकास्टर।” लोकल पॉडकास्टर को भी सुने जो इस दुनिया से जुड़े हो, उन्हें भी सुनना एक बेहतर विकल्प हो सकता है इसमें दा टाइम पास शो, आईटीजी टॉक्स, दा स्माल टाउन शो, देवभूमि डायलाग पॉडकास्ट जैसे कई नाम शुमार है।


एक कप में कितना राज़ छुपा है? नेशनल कॉफी डे पर जानिए कॉफी से जुड़े हैरान कर देने वाले तथ्य!

National Coffee Day Special: सुबह की शुरुआत हो या रात की थकान, एक कप कॉफी सब ठीक कर देती है! आपने सुना ही होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी कॉफी के पीछे ऐसे-ऐसे तथ्य छुपे हैं जो वाकई चौंका सकते हैं?आज हम बात करेंगे कॉफी से जुड़े कुछ अद्भुत, अनोखे और हैरान कर देने वाले फैक्ट्स की, जिन्हें जानकर आप अगली बार कॉफी पीते समय ज़रूर सोचेंगे!

1. कॉफी नहीं, यह एक “फल” है! 

जी हां, कॉफी एक फल से बनती है। कॉफी बीन्स दरअसल कॉफी चेरी नामक फल के बीज होते हैं। मतलब आप जब कॉफी पीते हैं, तो आप फल का अर्क ही तो ले रहे होते हैं।

 2. दुनिया का दूसरा सबसे अधिक व्यापार होने वाला उत्पाद

तेल के बाद, कॉफी दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा ट्रेड किया जाने वाला उत्पाद है।100 से अधिक देशों में कॉफी उगाई जाती है और अरबों डॉलर की इंडस्ट्री इससे जुड़ी हुई है।

 3. कॉफी कभी “हराम” भी मानी गई थी!

16वीं सदी में अरब देशों में कॉफी को “शैतान का पेय” कहकर इसपर रोक लगाई गयी थी, क्योंकि इसे पीकर लोग ज्यादा जागते और सोचते थे, जो उस समय की सत्ता को पसंद नहीं था। आज लोग कहते है कॉफी पीने के बाद भी हमे सुकून की नींद आती है।

 4. कॉफी आपके दिमाग को सचमुच तेज करती है!

कॉफी में मौजूद कैफीन, दिमाग में एक न्यूरोट्रांसमीटर (Adenosine) को ब्लॉक करता है, जिससे आपका फोकस, एकाग्रता और अलर्टनेस बढ़ती है।

 5. दिल के लिए भी अच्छी हो सकती है!

हाल के रिसर्च बताते हैं कि सीमित मात्रा में कॉफी पीने से हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज और पार्किंसन जैसी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। आज वर्ल्ड हार्ट डे पर दिल की भी सुने और पिए थोड़ा कॉफी लेकिन अति सर्वत्र वर्ज्यते यानी ज़्यादा कॉफी से नुकसान भी हो सकता है।

 6. सबसे महंगी कॉफी — “कोपी लुवाक” 

दुनिया की सबसे महंगी कॉफी “Kopi Luwak” इंडोनेशिया में बनती है। चौंकाने वाली बात है कि यह कॉफी एक जंगली जानवर (सिवेट कैट) की पाचन क्रिया से होकर निकलने के बाद तैयार की जाती है। 1 कप की कीमत $100 तक हो सकती है!

 7. कॉफी के लिए सही समय है… सुबह नहीं!

अधिकतर लोग सुबह उठते ही कॉफी पीते हैं, लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं कि सुबह 9:30 से 11:30 के बीच कॉफी पीना ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि तब आपके शरीर में कोर्टिसोल का स्तर गिरने लगता है और कॉफी ज्यादा असर करती है।

 8. कॉफी की खुशबू ही काफी है!

सिर्फ कॉफी की खुशबू सूंघने से ही इंसान के मूड में सुधार होता है और स्ट्रेस कम हो सकता है तो अगली बार थक जाएं तो एक कप पीने से पहले बस सूंघ कर देखिए!

9. कॉफी एक नेचुरल परफॉर्मेंस बूस्टर है

जिम जाने से 30 मिनट पहले कॉफी पीना आपके Stamina और Fat Burn को बेहतर करता है। इसीलिए कई एथलीट्स इसे वर्कआउट से पहले पीना पसंद करते हैं।

10. कॉफी सिर्फ पीने के लिए नहीं है!

कॉफी का इस्तेमाल स्किन स्क्रब, हेयर मास्क, एयर फ्रेशनर और यहां तक कि गार्डनिंग में खाद के रूप में भी किया जाता है।

कॉफी काफी मल्टीटास्किंग है, एक साथ कई काम बस अति से सावधान रहिए और बहुत कम लोग जानते हैं कि कॉफी के प्रोसेसिंग के दौरान उसमें अनजाने में छोटे-छोटे कीड़े, जैसे कॉकरोच या अन्य कीटों के अंश मिल सकते हैं। जब कॉफी बीन्स को खेतों से लाकर प्रोसेस किया जाता है, तो उसमें मौजूद कीड़े पूरी तरह से साफ नहीं हो पाते। अमेरिकी फूड एजेंसी (FDA) तक यह मानती है कि बेहद कम मात्रा में कीटों के टुकड़े कई प्रोसेस्ड फूड्स जैसे कॉफी, चॉकलेट, और मसालों में सामान्य हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं माने जाते। हालांकि, कॉकरोच से एलर्जी वाले लोगों को कॉफी से दिक्कत हो सकती है।


अपने अतीत से जुड़ने का समय, पूर्वजों की याद में बिताएं कुछ अनमोल पल

Ancestor Appreciation Day: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर अपने अतीत को भूल जाते हैं, विशेष रूप से उन लोगों को, जिनकी वजह से हमारा अस्तित्व है, हमारे पूर्वज। हममें से कई लोग यह नहीं जानते कि हमारे पूर्वज कौन थे, वे कैसे जीवन जीते थे, और उनके निर्णयों ने हमारी परंपराओं, संस्कारों और मूल्यों को किस प्रकार आकार दिया।

हर वर्ष 27 सितंबर को मनाया जाने वाला पूर्वज सराहना दिवस (Ancestor Appreciation Day) हमें यही याद दिलाता हैं  कि हमारे पूर्वजों की कहानियाँ, संघर्ष और संस्कार हमारे जीवन में गहरे रूप से जुड़े हुए हैं।

पूर्वज सराहना दिवस का इतिहास

हर पीढ़ी की अपनी एक अलग पहचान होती है। यह दिवस स्थापित किया गया है ताकि हम अपने पारिवारिक इतिहास के उन अध्यायों की सराहना कर सकें जिन्हें शायद कभी लिखा ही नहीं गया, परंतु वे मौखिक परंपराओं और संस्मरणों में जीवित हैं।

चाहे वह हमारी सांस्कृतिक विरासत हो या आनुवांशिक इतिहास, अपने पूर्वजों के बारे में जानना न सिर्फ आत्म-ज्ञान बढ़ाता है, बल्कि कई मामलों में स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियाँ भी प्रदान करता है। सिकल सेल, सिस्टिक फाइब्रोसिस और डायबिटीज जैसी बीमारियाँ हमारे पारिवारिक मेडिकल इतिहास से जुड़ी होती हैं।

 पूर्वज सराहना दिवस कैसे मनाएँ?

1. वंशावली (Genealogy) खोजें

इंटरनेट पर कई वेबसाइट्स उपलब्ध हैं जहां आप अपने परिवार के इतिहास को खोज सकते हैं। Ancestry.com, MyHeritage, FindMyPast, FamilySearch.org, Kulvriksh.org जैसी सेवाएं आपको अपने पारिवारिक वृक्ष (Family Tree) को विस्तार से जानने में मदद करती हैं।

 2. बुज़ुर्गों से बात करें

अगर ऑनलाइन खोज संभव न हो, तो परिवार के बुज़ुर्ग सदस्यों से बातचीत करें। उनसे कहानियाँ सुनें, पुरानी तस्वीरें देखें, और उनकी ज़ुबानी अपने पूर्वजों के बारे में जानें। यह अनुभव न सिर्फ ज्ञानवर्धक होता है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी जोड़ने वाला होता है। हमारें बड़ों द्वारा सुनाई गयी कहानियों में कई जिक्र ऐसे भी होते है जिन्हें सुनने के बाद हमे लगता है ऐसा भी होता होगा।

 3. पारिवारिक रिकॉर्ड तैयार करें

अपने परिवार के इतिहास को सुरक्षित रखने के लिए एक डायरी, ऑडियो रिकॉर्डिंग या वीडियो इंटरव्यू तैयार करें। दादा-दादी, नाना-नानी या माता-पिता से उनके अनुभवों को रिकॉर्ड करें ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।

4. स्मृति पुस्तक (Memoir) बनाएं

अगर संभव हो, तो अपने अनुभवों या पारिवारिक कहानियों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करें। यह भावी पीढ़ियों के लिए एक अनमोल धरोहर होगी।

क्यों ज़रूरी है पूर्वजों की सराहना?

अपने अतीत को जानने से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि हम कौन हैं और कहाँ से आए हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन केवल वर्तमान में नहीं, बल्कि अतीत और भविष्य के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।

अपने पूर्वजों की सराहना करके हम अपने अस्तित्व को अधिक गहराई से समझ सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत नींव रख सकते हैं।


तीसरे नवरात्रि पर मां चंद्रघंटा की विशेष कृपा, दो दिन तक मिलेगा पुण्यफल

Sharadiye Navratri Third Day: शारदीय नवरात्रि  का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा का माना जाता है, जिनकी उपासना तृतीया तिथि को की जाती है। इस बार यह तिथि विशेष संयोग के साथ 24 और 25 सितंबर को मनाई जा रही है, जिसमें महालक्ष्मी राजयोग, बुधादित्य योग और रवि योग जैसे दुर्लभ योगों का निर्माण हो रहा है।

 मां चंद्रघंटा का स्वरूप

मां चंद्रघंटा का स्वरूप सौम्य, शांत और शक्तिशाली है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। मां सिंह पर सवार हैं और उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। उनकी पूजा करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और मन को शांति, साहस और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

कैसे करे माँ चंद्रघंटा की पूजा

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए सबसे पहले स्नान कर शुद्ध होकर पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें। मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और चंदन, फूल, रोली, धूप-दीप, वस्त्र और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद उनके मंत्रों का जाप करें और आरती करें।

मां चंद्रघंटा को घंटी की ध्वनि अत्यंत प्रिय है, इसलिए नवरात्रि के तीसरे दिन यह उपाय करें

मंदिर में पीतल की घंटी का दान करें

पूरे घर में घंटी बजाकर “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे” मंत्र का जप करें

सुबह-शाम की आरती में घंटी जरूर बजाएं

मुख्य द्वार पर विंड चाइम लगाएं, ताकि घर में शुभता और समृद्धि का वास बना रहे

तृतीया तिथि का विशेष महत्व

24 सितंबर सुबह 4:52 से 25 सितंबर सुबह 7:07 तक तृतीया तिथि रहेगी। दो दिन तक मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष पुण्यकाल रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह समय सभी मानसिक परेशानियों से मुक्ति पाने, साहस बढ़ाने और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने का उत्तम अवसर है।

मां चंद्रघंटा की विशेष कृपा उन भक्तों पर सदैव बनी रहती है जो कर्म के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं और जीवन में सत्य, संयम और धर्म के मार्ग पर चलते हैं। जो भक्त सच्चे मन से कर्म करते हैं और सद्मार्ग पर चलते हैं, मां चंद्रघंटा की कृपा उनके जीवन में हर संकट को दूर करती है और उन्हें सुख, शांति और विजय प्रदान करती हैं।”


शक्ति की प्रथम स्वरूपा: जानिए मां शैलपुत्री की प्रेरक गाथा

Navratri 2025: हर वर्ष शरदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना से पूजा की शुरुआत होती है। शैलपुत्री का शाब्दिक अर्थ है, “पहाड़ की पुत्री”, और इन्हें ही देवी पार्वती, हेमवती और सती के रूप में भी पूजा जाता है। इनका वाहन नंदी (वृषभ) है, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं माता । इनका स्वरूप शांति, शक्ति और संयम का प्रतीक है।

माँ शैलपुत्री शक्ति का प्रथम स्वरूप

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में शैलपुत्री को प्रथम स्थान प्राप्त है। हिमालय राज की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया। यही देवी आगे चलकर भगवान शिव की अर्द्धांगिनी बनीं और कैलाश पर्वत की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुईं।

सती से शैलपुत्री बनने की कथा

देवी भागवत पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, मां शैलपुत्री पूर्वजन्म में माता सती थीं। एक बार उनके पिता प्रजापति दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव और माता सती को जानबूझकर नहीं बुलाया गया।

जब यह बात सती माता को पता चली, तो वे वहां बिना निमंत्रण के ही पहुंच गईं। यज्ञ स्थल पर न केवल उनके पिता ने उनका और उनके पति का अपमान किया, बल्कि सभी रिश्तेदारों ने भी व्यंग्य और तिरस्कार किया। पति शिव का अपमान सहन न कर पाने के कारण माँ सती ने योगाग्नि में कूदकर अपनी आहुति दे दी।

इस पीड़ा से दुखी होकर भगवान शिव ने उस यज्ञ का विध्वंस कर दिया और स्वयं को तप में लीन कर लिया। कालांतर में सती ने हिमालय के घर में पार्वती के रूप में जन्म लिया और कठोर तपस्या के बाद शिव को पुनः अपने पति रूप में प्राप्त किया। इस रूप में उन्हें शैलपुत्री कहा गया।

माता शैलपुत्री की पूजा का महत्व

नवरात्रि का पहला दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू होता है। मान्यता है कि इनकी विधिवत आराधना से व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य, मानसिक शांति, और जीवन में स्थायित्व प्राप्त होता है।  जो भक्त मां शैलपुत्री की कथा श्रद्धा से सुनते हैं, उन्हें जीवन में कठिन परिस्थितियों से उबरने की शक्ति मिलती है। यह भी माना जाता है कि बिना शैलपुत्री की कथा के पूजा अधूरी मानी जाती है।

आत्मसम्मान और तपस्या का प्रतीक 

मां शैलपुत्री की कथा केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि नारी शक्ति, आत्मसम्मान और तपस्या की प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि अपमान सहने से अच्छा है, आत्मसम्मान के लिए बलिदान देना। मां का यह स्वरूप प्रत्येक भक्त को संयम, साहस और आत्मबल की प्रेरणा देता है। इस नवरात्रि, आइए मां शैलपुत्री की आराधना से अपने जीवन को एक नई दिशा दें।


नेशनल वुमन रोड वॉरियर डे: महिलाएं जीवन के हर सफ़र को बनाती है बेमिसाल

National Women Road Warrior Day: हर साल मनाया जाने वाला “नेशनल वुमन रोड वॉरियर डे” उन बहादुर और मेहनती महिलाओं को समर्पित है, जो काम के सिलसिले में लगातार सफर करती हैं, कभी क्लाइंट मीटिंग्स के लिए, तो कभी नए अवसरों की तलाश में। ये वे महिलाएं हैं जो हवाई अड्डों, होटल लॉबी और कॉर्पोरेट मीटिंग्स के बीच अपने करियर को गति देती हैं, बिना थके, बिना रुके। “हर सफर खूबसूरत होता है, और महिलाएं जीवन के हर मोड़ पर इस बात को साबित करती हैं। चाहे घर हो या बाहर, वे अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं।

हर यात्रा एक कहानी ‘रोड वॉरियर्स’ की  

ये महिलाएं न सिर्फ़ तेज़ चलती हैं, बल्कि हर कदम पर आत्मविश्वास लेकर चलती हैं। इनके हर सूटकेस में एक कहानी होती है, और हर यात्रा किसी जीत की गवाही देती है। चाहे कार चला रही हों या विमान पकड़ रही हों ये महिलाएं दिखाती हैं कि सब कुछ मुमकिन हैं।

जीवन हमेशा आसान नहीं होता

सफर में देरी, नेटवर्क की समस्या, अनगिनत घंटे और परिवार से दूरी, इन सबके बावजूद ये महिलाएं डटी रहती हैं। कई बार ये प्रोफेशनल ज़िम्मेदारियों के साथ साथ परिवार में संतुलन बनाने की पूरी कोशिश करती हैं। इनके हौसले और जज़्बे को यह दिन एक मंच देता है, ताकि हम सभी उनके प्रयासों को खुले दिल से सराह सकें।

कैसे मनाएं नेशनल वुमन रोड वॉरियर डे

एक धन्यवाद संदेश भेजें, एक छोटा सा ईमेल, हैंडरिटन नोट या वॉइस मैसेज, जो भी तरीका हो, उसे खास बनाइए। उन्हें बताइए कि आप उनकी मेहनत को देखते हैं और सराहते हैं।

उनकी कहानी साझा करें

किसी महिला सहकर्मी या दोस्त की कहानी सोशल मीडिया पर शेयर करें। उनकी यात्राओं, संघर्षों और सफलताओं को सामने लाइए और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित कीजिए।

महिला नेतृत्व वाले बिज़नेस को सपोर्ट करें

ऐसी किसी महिला की सर्विस लें जो अक्सर ट्रैवल करती हैं, या फिर किसी महिला उद्यमी का प्रोडक्ट खरीदें। एक अच्छा रिव्यू दें, दूसरों को भी बताएं आपका यह छोटा कदम उनकी बड़ी उड़ान का हिस्सा बन सकता है।

एक बातचीत की शुरुआत करें

ऑफिस में एक कैज़ुअल मीटिंग रखें, जहां महिलाएं अपनी ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर कर सकें। उनकी बातों से नई पॉलिसी आइडियाज, सहानुभूति और समझ दोनों बढ़ सकती है।

क्यों शुरू हुआ यह दिन?

2003 में Insight Vacations नामक ट्रैवल कंपनी ने इस दिन की शुरुआत की। मकसद था कि उन महिलाओं को पहचान देना जो ऑफिस की चारदीवारी से बाहर निकलकर देश-दुनिया में बिज़नेस को आगे बढ़ा रही हैं। ये महिलाएं सिर्फ यात्राएं नहीं करतीं, ये अपने आत्मबल, अनुशासन और प्रोफेशनलिज्म से हर मील पर मिशन पूरा करती हैं।

नेशनल वुमन रोड वॉरियर डे सिर्फ तारीख नहीं, एक सम्मान है। ये उन तमाम महिलाओं को सलाम करने का दिन है जो सड़कों, हवाई अड्डों और बिज़नेस मीटिंग्स के बीच देश और दुनिया को आगे बढ़ा रही हैं। हर वो महिला जो “ऑन द रोड” है, अपने सपनों, जिम्मेदारियों और लक्ष्यों के साथ वो इस दिन की असली हीरो है। हर दिन सड़को पर आपको नज़र आता होगा एक चेहरा जो किसी पुरुष का नहीं महिला का होगा, घर की जिम्मेदारियों के साथ वो खुद को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही होगी।


TIMES UP DAY: रिश्तों में कैसे घोले मिठास और बनाए इस दिन को खास

कभी कभी ऐसा नहीं लगता की आज तो इस मुद्दे को और न खीचते हुए टाइम्स अप ही कर दे, तो ये दिन आप सबके लिए बेस्ट है। हर साल 17 सितंबर को मनाया जाने वाला टाइम्स अप डे हमें यह याद दिलाता है कि ज़िंदगी शिकायतों और गिले-शिकवों में उलझने के लिए बहुत छोटी है। यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम अपने मतभेदों को पीछे छोड़ें, सुलह की ओर कदम बढ़ाएँ और रिश्तों को एक नई शुरुआत दें।

टाइम्स अप डे का महत्व

यह दिन हमें सिखाता है कि जीवन में झगड़े और मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें दिल में दबाकर रखना रिश्तों को और बिगाड़ देता है। जब हम माफी मांगते हैं या किसी पुराने विवाद को खत्म करते हैं, तो न सिर्फ रिश्ते बेहतर होते हैं बल्कि जीवन भी हल्का और खुशहाल लगता है। कभी करके देखिए अच्छा लगेगा।

परिवार के झगड़े हों, दोस्तों के बीच दूरियाँ हों या पेशेवर जीवन में मनमुटाव टाइम्स अप डे बताता है कि समझदारी और बातचीत से हर विवाद को खत्म किया जा सकता है।

इतिहास के पन्नों में टाइम्स अप डे

वैसे तो हर दिन हम ये कर सकते हें पर जैसे हमारे जीवन का एक ख़ास दिन होता हैं वैसे ही टाइम्स अप डे की शुरुआत थॉमस और रूथ रॉय ने की थी, जिन्होंने 1980 के दशक के अंत में नए त्योहार और विशेष दिनों को बनाने की परंपरा शुरू की। उनका मानना था कि पुराने मतभेदों को भुलाकर रिश्तों को सुधारना ही जीवन को बेहतर बना सकता है। इसीलिए उन्होंने यह खास दिन दुनिया को दिया।

कैसे मनाएँ टाइम्स अप डे?

इस दिन को मनाने के कई अनोखे तरीके हैं। ज़रूरी नहीं कि बड़े आयोजन हों, बल्कि छोटी-छोटी पहल भी रिश्तों में जादू भर सकती है।

कलम उठाइए, दिल से लिख डालिए

कभी-कभी एक साधारण चिट्ठी या नोट आपके मन की बात कह सकता है। दिल से लिखे शब्द कई बार सबसे गहरी खाई को भी भर देते हैं।

सॉरी कहना बना सकता है दिन खास

“सॉरी” कहने का सबसे स्वादिष्ट तरीका है किसी को उनके पसंदीदा खाने पर बुलाना। अगर अच्छा खाना बनाना नहीं आता तो उनके पसंदीदा रेस्टोरेंट से टिफिन मंगा लीजिए। साथ बैठकर खाना साझा करना रिश्तों में मिठास घोल देता है। खाना तो अक्सर दो दिल हो या तहजीब दोनों को जोड़ता आया हैं।

साथ चलें और बातें करें तो बने बात

किसी पार्क में टहलते हुए बातचीत करना कठिन मुद्दों को हल्का बना देता है। कंधे से कंधा मिलाकर चलना मतभेदों को पिघलाने का आसान तरीका है।

सॉरी प्लेलिस्ट भी एक अच्छा तरीका 

अगर आप संगीत प्रेमी हैं, तो एक “सॉरी प्लेलिस्ट” बनाइए। ऐसे गाने चुनिए जो आपके रिश्ते की याद दिलाते हों या जिनमें माफी और दोस्ती की भावना हो। इसे साझा करना सुलह की ओर एक प्यारा कदम हो सकता है।

टाइम्स अप डे हमें यही याद दिलाता है कि रिश्ते शिकायतों से नहीं, बल्कि संवाद और समझ से आगे बढ़ते हैं। चाहे वह चिट्ठी हो, भोजन हो, सैर हो या गाने  सबसे अहम है पहला कदम उठाना। हर कोई उस पहले कदम की शुरुआत करने से डरता है क्योंकि हर किसी का अहम बीच में आ जाता है।

आइए, इस टाइम्स अप डे पर हम सब किसी ऐसे रिश्ते को फिर से जोड़ें, जिसमें कभी मतभेद आ गया था। क्योंकि जीवन सचमुच बहुत छोटा है, और रिश्ते उसे खूबसूरत बनाते हैं। हम अकेले जरुर आए थे पर हम एक दूसरे से जुड़ें हुए है।


आओं मिलकर बचाएं हम, पृथ्वी की जीवनरक्षक ढाल ओजोन को अपने छोटे छोटे कदमों से

International Ozone Layer Preservation Day: ओज़ोन परत हमारी पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाती है। यह एक नाज़ुक लेकिन बेहद महत्वपूर्ण गैसीय परत है, जो पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है और आज हम इसी परत के दुश्मन बन चुके हैं, इसका सबसे बड़ा प्रमाण है हमारी दिनचर्या। विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक थीम 2025 को साकार करे हम, आओं मिलकर पृथ्वी की जीवनरक्षक बनाए हम।

ओज़ोन परत क्या है?

ओज़ोन परत वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में स्थित है। इसमें ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं (O3) से बनी गैस हाई कंसंट्रेशन में पाई जाती है। जब ओज़ोन परत समताप मंडल में होती है, तब यह हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है। लेकिन जब यह पृथ्वी की सतह के नज़दीक यानी क्षोभ मंडल (Troposphere) में होती है, तो यह प्रदूषक के रूप में काम करती है और पौधों, जानवरों और मनुष्यों के लिए हानिकारक बन जाती है।

ओज़ोन परत में छेद और उसके दुष्प्रभाव

वैज्ञानिकों ने पाया है कि पोलर रीजन , विशेषकर अंटार्कटिका और आर्कटिक के ऊपर, ओज़ोन परत में छेद मौजूद है। वसंत ऋतु के दौरान यह छेद और बड़ा हो जाता है, जिससे सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुँचती हैं। इसके कारण त्वचा कैंसर, आँखों में मोतियाबिंद, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, वनस्पति और समुद्री जीवन पर दुष्प्रभाव जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

ओज़ोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले प्रमुख कारक

मानव गतिविधियाँ इस समस्या को और बढ़ाती हैं। इनमें प्रमुख हैं, CFCs (क्लोरोफ्लोरोकार्बन), हैलोजेनेटेड हाइड्रोकार्बन, नाइट्रस ऑक्साइड, मीथाइल ब्रोमाइड ये गैसें वातावरण में पहुँचकर ओज़ोन अणुओं को नष्ट करती हैं और छेद को बड़ा करती हैं।

ओज़ोन परत संरक्षण दिवस का इतिहास

16 सितंबर 1987 को “मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल” पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसी को स्मरण करते हुए हर वर्ष 16 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षण दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1994 में इस दिन को आधिकारिक मान्यता दी। इसका उद्देश्य है, ओज़ोन परत के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना,समाधान तलाशना और पर्यावरण हितैषी नीतियों को बढ़ावा देना

हम सबके छोटे पर महत्वपूर्ण कदम

हर व्यक्ति अपनी ओर से छोटे-छोटे कदम उठाकर ओज़ोन परत की रक्षा में योगदान दे सकता है:

वाहन का कम से कम प्रयोग करें, पैदल चलें या साइकिल का इस्तेमाल करें।

कारपूलिंग को बढ़ावा दें। कारपूलिंग का मतलब है जब भी आप किसी सफ़र में गाड़ी चलाकर जाए तो अकेले कभी न जाए, सभी को साथ लेकर जाए इससे खर्चा भी बटेगा और पृथ्वी को जो क्षति पहुच रही है उसमे कमी आयगी।

ऐसे घरेलू और सफाई उत्पाद चुनें जिनमें हानिकारक रसायन न हों। हमारे आस पास केमिकल उत्पादों का भंडार है ऐसे में आर्गेनिक प्रोडक्ट्स को ढूँढना चुनौती तो है पर मुश्किल नहीं।

स्थानीय उत्पादों को खरीदें ताकि लंबी दूरी तक माल ढुलाई से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।

ओज़ोन को नुकसान पहुँचाने वाली गैसों वाले प्रोडक्ट्स जैसे एरोसोल स्प्रे से बचें।

ओज़ोन परत पृथ्वी की प्राकृतिक ढाल है। यदि यह कमजोर हुई तो न केवल मानव जीवन बल्कि पूरा इकोसिस्टम संकट में पड़ सकता है। अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। आइए, हम सब मिलकर इस जीवनदायिनी परत की रक्षा का संकल्प लें। हम सबका कर्तव्य हैं कि आने वाले समय में पृथ्वी को हो रहे नुकसान में कमी लाई जाए।


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