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कम नंबर, गायब पन्ने और गलत कॉपियां! CBSE के डिजिटल मूल्यांकन पर विवाद

Category Archives: ब्लॉग

कम नंबर, गायब पन्ने और गलत कॉपियां! CBSE के डिजिटल मूल्यांकन पर विवाद

पूजा भट्ट

सीबीएसई के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर देशभर में चर्चा और विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक इस नई मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। कई छात्रों का आरोप है कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं, जबकि कुछ ने दावा किया कि उन्हें किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका दिखाई गई। वहीं, कुछ विद्यार्थियों ने यह भी शिकायत की कि उनकी कॉपियों के कुछ पन्ने जांच के दौरान मौजूद नहीं थे।

इन बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने OSM प्रणाली का समर्थन करते हुए इसे आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई प्रतिष्ठित संस्थान इस तरह की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं। मंत्री ने स्वीकार किया कि नई व्यवस्था होने के कारण शुरुआती स्तर पर कुछ दिक्कतें सामने आई हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और उसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

इस बार सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बड़े पैमाने पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) लागू किया। इस प्रक्रिया में छात्रों की कॉपियों को स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में परीक्षकों के पास भेजा गया, जहां ऑनलाइन माध्यम से अंक दिए गए। हालांकि, रिजल्ट जारी होने के बाद कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें अपेक्षा से काफी कम अंक मिले हैं।

इसके बाद जब विद्यार्थियों ने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं डाउनलोड कीं, तो कई तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी शिकायतें सामने आने लगीं। कुछ छात्रों का कहना है कि उनकी कॉपियों की स्कैनिंग स्पष्ट नहीं थी, जबकि कई जगह पन्ने कटे या अधूरे दिखाई दिए। कुछ विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका दिखाई गई। वहीं, कई छात्रों का कहना है कि सही उत्तर लिखने के बावजूद उन्हें अंक नहीं दिए गए।

सीबीएसई के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर उठे विवाद के बीच बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच की मांग की है। बोर्ड के अनुसार इस वर्ष करीब 17 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि कुल 98 लाख कॉपियों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें औसतन 40 पन्ने थे। इस तरह लगभग 40 करोड़ पन्नों की स्कैनिंग और डिजिटल जांच की गई।

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि करीब 4 लाख छात्रों ने री-चेकिंग के लिए आवेदन किया है, जिसके तहत लगभग 11 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा समीक्षा की जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आने के बाद सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने OSM प्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि यह व्यवस्था छात्रों के हित और पारदर्शिता को ध्यान में रखकर लागू की गई है। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम से छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका देखने का अवसर मिलता है। मंत्री ने माना कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर इस तकनीक को लागू करने के कारण कुछ विसंगतियां सामने आई हैं, लेकिन हर शिकायत का समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई विश्वविद्यालय और संस्थान अब डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की ओर बढ़ रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीएसई ने कई तकनीकी एजेंसियों की मदद लेनी शुरू कर दी है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, केंद्र सरकार की टेक्निकल जांच एजेंसियां भी पूरे मामले की निगरानी कर रही हैं। यदि जांच में किसी तरह की तकनीकी गलती या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों की सहायता के लिए सीबीएसई ने 24 घंटे सक्रिय रहने वाला ‘पोस्ट-रिजल्ट सपोर्ट सिस्टम’ भी शुरू किया है। इसके तहत छात्र रिजल्ट, कॉपी जांच, मानसिक तनाव और अन्य समस्याओं को लेकर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। बोर्ड ने इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-11-8004 जारी किया है। साथ ही छात्र आधिकारिक ईमेल आईडी info.cbse@nic.in और result.cbse2026@cbseshiksha.in पर भी संपर्क कर सकते हैं। बोर्ड का कहना है कि छात्रों की हर शिकायत का जल्द समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।


ईद-उल-अजहा पर नमाजियों की भीड़, खास मांग ने खींचा ध्यान

आयुषी

त्याग, बलिदान और इंसानियत का संदेश देने वाला पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार को राजधानी देहरादून समेत पूरे उत्तराखंड में धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने नमाज अदा कर मुल्क में अमन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगी।ईद को लेकर मुस्लिम समुदाय में खासा उत्साह देखने को मिला। बुधवार देर रात तक शहर के बाजारों में खरीदारी की रौनक बनी रही। कपड़े, इत्र, सेवइयां और कुर्बानी के लिए बकरों की खरीदारी को लेकर बाजारों में भारी भीड़ रही। बच्चों और युवाओं में त्योहार को लेकर अलग ही उत्साह नजर आया।

देहरादून की प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में अलग-अलग समय पर ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।मौलानाओं ने अपने संदेश में कहा कि ईद-उल-अजहा केवल कुर्बानी का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग और जरूरतमंदों की मदद का संदेश भी देता है। उन्होंने समाज में शांति और भाईचारे को मजबूत करने की अपील की।

इस बार देहरादून में ईद की नमाज के दौरान एक अलग तस्वीर भी देखने को मिली। मुस्लिम सेवा संगठन से जुड़े लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई।संगठन के सदस्यों ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार को इसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा देना चाहिए। इस पहल ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और सामाजिक सौहार्द का संदेश भी दिया।

ईद-उल-अजहा को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए दून पुलिस पूरी तरह अलर्ट रही। शहर को 5 जोन और 11 सेक्टर में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था की गई। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा, जबकि सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी गई।

पुलिस अधिकारियों ने लगातार शहर का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। ट्रैफिक को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए थे।
ईद से एक दिन पहले देहरादून के पलटन बाजार, सहारनपुर चौक और अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों में देर रात तक खरीदारी का माहौल बना रहा। मिठाइयों, कपड़ों और पारंपरिक सामान की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखने को मिली।

प्रदेशभर में ईद-उल-अजहा का पर्व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ और लोगों ने मिलकर प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश दिया।


वोटर लिस्ट अपडेट अभियान शुरू, BLO करेंगे घर-घर सत्यापन

पूजा भट्ट

उत्तराखंड में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रदेशभर में 29 मई से एसआईआर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है, जो 7 जून तक चलेगा। इस दौरान जिलावार बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और अन्य निर्वाचन अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।अब तक राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा चुके हैं। इसके बाद अब सभी जिलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को एसआईआर की प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन, गणना प्रपत्र भरने और अपील संबंधी नियमों की जानकारी दी जाएगी।

चुनाव आयोग के अनुसार 8 जून से बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे। मतदाताओं को यह फॉर्म भरकर वापस बीएलओ को जमा करना होगा। इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में दर्ज जानकारियों का सत्यापन किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक प्रदेश में मतदाताओं की मैपिंग और रिकॉर्ड मिलाने का कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक लगभग 89 प्रतिशत रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। वहीं, करीब 11 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो पाया है। ऐसे मतदाताओं को अपना वोट सुरक्षित रखने के लिए वर्ष 2003 से संबंधित दस्तावेज या अन्य रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होंगे।

अभियान के दौरान बीएलओ के साथ सहायक कर्मचारी भी तैनात रहेंगे, ताकि कोई भी घर और कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि सभी मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंच सके और मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध एवं अद्यतन हो सके।

सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने k कि प्रशिक्षण की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जिलावार कार्यक्रम के अनुसार अभियान संचालित किया जाएगा।


फूलों की घाटी में बिखरी प्रकृति की रंगत, 1 जून से एंट्री शुरू

आयुषी

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी एक बार फिर रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। आगामी 1 जून से घाटी आधिकारिक रूप से पर्यटकों के लिए खोल दी जाएगी। खास बात यह है कि घाटी खुलने से पहले ही यहां प्रकृति ने अपनी रंगत बिखेरनी शुरू कर दी है।वन विभाग की टीम हाल ही में घाटी का निरीक्षण कर वापस लौटी है। वन क्षेत्राधिकारी चेताना कांडपाल के नेतृत्व में गए दल ने बताया कि घाटी में इस समय दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के फूल खिल चुके हैं, जिससे पूरी घाटी रंगों की चादर ओढ़े नजर आने लगी है।

हर साल लाखों पर्यटक और ट्रेकर्स फूलों की घाटी की खूबसूरती देखने उत्तराखंड पहुंचते हैं। इस बार भी शुरुआती सीजन में ही घाटी का मनमोहक दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करने लगा है। घाटी में बर्फ पिघलने के बाद धीरे-धीरे फूलों का खिलना शुरू हो जाता है और जून से अगस्त के बीच यहां का नजारा अपने चरम पर पहुंचता है।

वन विभाग के अनुसार घाटी में इस समय कई दुर्लभ हिमालयी फूल खिल चुके हैं। आने वाले दिनों में फूलों की संख्या और विविधता तेजी से बढ़ेगी। प्राकृतिक सौंदर्य, ठंडी हवाएं और हिमालय की गोद में फैली यह घाटी फोटोग्राफर्स, नेचर लवर्स और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं मानी जाती।

वन विभाग ने घाटी खुलने से पहले व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। ट्रेक रूट, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं ताकि पर्यटकों को सुरक्षित और बेहतर अनुभव मिल सके।

प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताने की चाह रखने वालों के लिए उत्तराखंड की फूलों की घाटी इस बार भी यादगार अनुभव देने को तैयार है।


राशन स्कीम में हुए तीन बड़े सुधारों से मिलेगा देश के 80 करोड़ लोगों को लाभ

पूजा भट्ट

कैबिनेट द्वारा राशन स्कीम में किए गए तीन बड़े सुधारों का लाभ डायरेक्ट और इंडायरेक्ट तौर पर देश के 80 करोड़ लोगों को मिलेगा जो की राशन योजना का लाभ उठा रहे है|
प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के अधीन सरकार वर्ष के हर महीने 80 करोड़ लगों को राशन दे रही है| इस स्कीम को संचालित करने क लिए कैबिनेट ने सार्थक PDS योजना को जारी रखने की मंजूरी दी है और इसके तहत कुछ बड़े सुधार करे है| इस योजना का पूर्ण लाभ गरीब परिवारों को मिलेगा | इस योजना में सुधार करने के उद्देश्यों मे राज्यों को सपोर्ट देने से लेकर राशन की चोरी जैसी चीजें शामिल है|

केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया की इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश की पब्लिक डिस्ट्रब्यूशन सिस्टम (PDS) को सशक्त ,दृढ़ ,आधुनिक और पारदर्शी बनाना है| इसके लिए केंद्र सरकार नें ₹25,530 करोड़ का केन्द्रीय आवंटन मंजूर कर लिया है| इस स्कीम के तहत तीन खास बदलाव करने की बात कही गई है|

1 राज्यों की राशन ढुलाई मे सहायता करना: राज्यों में राशन पहुंचाने में मदद के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब सरकार राज्यों को पैसे देगी, ताकि वे राशन को गोदाम से दुकानों तक आसानी से पहुंचा सकें। इससे ढुलाई का खर्च कम होगा और गरीब लोगों को समय पर राशन मिल पाएगा। खासकर दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका ज्यादा फायदा होगा।

2 फेयर प्राइस शॉप: फेयर प्राइस शॉप यानी सरकार अब राशन की दुकानों को भी मदद देगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब राशन दुकानदारों को डिजिटल मशीनें, बेहतर स्टोरेज और काम चलाने के लिए सहायता मिलेगी। इससे दुकानों का काम आसान और मजबूत होगा, राशन बांटने में गड़बड़ी कम होगी और दुकानदारों को आर्थिक राहत भी मिल सकती है।

3 तीसरा बड़ा बदलावः कैबिनेट में तीसरा सुधार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) का मॉर्डनाइजेशन है| सरकार राशन की व्यवस्था को मॉर्डनाइज करने जा रही है और इसे टेक्नोलॉजी बेस्ड बनाने जा रही है| इसमें ऑटोमेशन, डिजिटल ट्रैकिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, स्मार्ट डिवाइस और ट्रांसपैरेंसी टूल शामिल है. इससे चोरी, ब्लैकमार्केटिंग कम होगी और जरूरतमंदों तक इसका सीधा लाभ मिलेगा|

सरकार का मकसद ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ जैसी योजनाओं को और बेहतर बनाना है, ताकि देशभर में राशन आसानी से और साफ तरीके से लोगों तक पहुंच सके। इससे करोड़ों लोगों को फायदा मिलेगा।


आस्था के रास्ते पर परेशानी! केदारनाथ यात्रा मार्ग पर गंदगी से श्रद्धालु परेशान

आयुषी

देवभूमि उत्तराखंड में आस्था का सबसे बड़ा पर्व मानी जाने वाली चारधाम यात्रा इस समय करोड़ों श्रधालुओं की भावनाओं का केंद्र बनी हुई है|लेकिन भगवान के दर्शन की इस पवित्र यात्रा में श्रधालुओं को अब प्रकृति की कठिनाइयों से ज्यादा जूझना पड़ रहा है घोड़ों और खच्चरों की लीद,कीचड़ और दुर्गंध से|खासकर केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के पैदल मार्गों पर हालात ऐसे बन गए हैं कि श्रधालुओं की भक्ति अब परीक्षा में बदलती दिखाई दे रही है|

सुबह से लेकर देर शाम तक हजारों यात्री इन संकरे और भीड़भाड़ वाले रास्तों पर आगे बढ़ते हैं,लेकिन हर कुछ कदम पर फैली लीद,कीचड़ और बदबूदार रास्ते उनकी यात्रा को बेहद कठिन बना रहे हैं|बारिश के बाद स्तिथि और भयावह हो जाती है|कई जगहों पर रास्ते इतने फिसलन भरे हो चुके हैं कि बुजुर्ग,महिलाएं,औए बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे हैं|मीडिया पर लगातार वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं,जिनमें श्रद्धालु बदबू और गंदगी के बीच यात्रा करने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं|

कई यात्रियों ने सवाल उठाया है कि जब हर साल लाखों श्रद्धालु चारधाम पहुंचते है तो आखिर व्यवस्थाओं में स्थायी सुधार क्यों नहीं हो पा रहा| कुछ श्राद्धलुओं ने तो यहां तक कहा कि कई स्थानों पर “ऑक्सीजन से ज्यादा बदबू महसूस हो रही है|”पैदल मार्गों पर उड़ती धूल,कीचड़ और लीद का मिश्रण संक्रमण के खतरे को भी बढ़ा रहा है|स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार गंदगी और नमी के कारण बैक्टीरिया और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है|

“सरकार का दावा है कि रोपवे बनेगा तो बलेगी तस्वीर”
इस पूरे मुद्दे पर उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा गई कि सरकार लगातार यात्रा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है|उन्होंने कहा कि आने वाले समय में केदारनाथ और अन्य धामों के लिए रोपवे परियोजनाएं बड़ी राहत साबित होंगी|रोपवे बनने के बाद घोड़ों और खच्चरों पर निर्भरता कम होगी और यात्रा मार्ग अधिक स्वच्छ और सुगम बन पाएंगे|

मंत्री ने यह भी बताया कि घोड़ों और खच्चरों की लीद से बायो-ब्रिकेट (फायरब्रिक) बनाने की योजना पर काम शुरू किया जा चुका है | इसके लिए विशेष चूल्हे भी मंगवाए गए हैं ताकि कचरे को उपयोगी ईंधन में बदला जा सके|सरकार का दावा है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यात्रा मार्गों की सफाई में भी मदद मिलेगी|

सतपाल महाराज का यह बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है जिसमें उन्होंने कहा कि “चारधाम तपस्या की भूमि है, थोड़ा कष्ट तो उठाना ही पड़ेगा।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है।चारधाम यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान और करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधा सुनिश्चित करना अब सरकार और प्रशासन दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।


उत्तराखंड में कांग्रेस का बड़ा दांव, राहुल गांधी भरेंगे चुनावी हुंकार

आयुषी

उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी करीब चार साल बाद उत्तराखंड दौरे पर आने की तैयारी में हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में बड़ी जनसभाओं को संबोधित करेंगे, जिसे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिहाज से कांग्रेस का बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।कांग्रेस संगठन इस दौरे को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश स्तर से लेकर जिला इकाइयों तक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी की रैलियों के जरिए कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं, महिला सुरक्षा और किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बना रही है।

राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। लंबे समय बाद किसी बड़े राष्ट्रीय नेता के उत्तराखंड दौरे से संगठन में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का यह दौरा पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए “बूस्टर डोज” साबित होगा।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी लगातार बैठकें कर रहे हैं और रैली स्थलों, भीड़ प्रबंधन और जनसंपर्क अभियान की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोल सकते हैं। खासकर महंगाई, युवाओं की नौकरी, अग्निपथ योजना, पलायन और पर्यटन व्यवस्थाओं को लेकर बीजेपी को घेरने की तैयारी है।वहीं बीजेपी भी राहुल गांधी के दौरे को हल्के में नहीं ले रही। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस जनता का भरोसा पहले ही खो चुकी है और राहुल गांधी का दौरा केवल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश है।

राहुल गांधी के संभावित उत्तराखंड दौरे ने प्रदेश की राजनीति को समय से पहले गर्मा दिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि राहुल गांधी अपनी सभाओं में उत्तराखंड की जनता को कौन सा नया राजनीतिक संदेश देते हैं और कांग्रेस इस दौरे को कितना बड़ा जनसमर्थन दिला पाती है।


पेट्रोल-डीजल के दामों में अचानक हुई बढ़ोतरी से,आम आदमी का खर्चा हुआ दुगना

पूजा भट्ट

महंगाई का सामना करने वाली आम जनता को ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण एक और बड़ा झटका लगा है| पिछले 10 दिनों मे यह चौथी बार है जब पेट्रोल और डीजल के दामों मे असामान्य बढ़ोतरी हुई है|

सोमवार, 26 मई को सीएनजी के दाम में भी 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई|25 मई को पेट्रोल मे 2.61 रुपये और डीजल मे 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई|इसके बाद देहरादून में हिंदुस्तान पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल की कीमत 100.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.90 रुपये प्रति लीटर हो गई है| वहीं पावर-95 पेट्रोल 108.93 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है|इससे पहले 15 मई को लगभग 3 रुपये, मई को करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी| कुल मिलाकर पीछले 10 दिनों में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है|

लगातार बढ़ रही कीमतों से गरीब और मध्यम वर्ग का मासिक बजट बिगड़ गया है| लोगों को रोजमर्रा के खर्च की चिंता सताने लगी है| स्थानीय नागरिकों का कहना है, “कुछ दिन पहले ही दाम बढ़े थे और अब फिर इजाफा हो गया है| कई सालों बाद पेट्रोल ने फिर से 100 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा पार कर लिया है| इसका सबसे ज्यादा प्रभाव मिडल और लोअर मिडल क्लास पर पड़ा है क्योंकि ज्यादातर लोग दुपहिया या छोटे वाहनों पर निर्भर है|देश की जनता का मानना है की वे पिछले 10-15 दिनों में चार बार दाम बढ़ने से बेहद परेशान है|

उत्तराखंड पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष मित्तल ने कहा, “फिलहाल दश में ईंधन का कोई बड़ा संकट नहीं है|भारत की तुलना में कई अन्य देशों मे हालत ज्यादा खराब है |भारत में लगातार सप्लाइ बनी हुई है| वीकेंड या छुट्टियों में डिमांड बढ़ने से कभी कभी हल्की दिक्कत आती है, लेकिन उसे संभाल लिया जाता है| कीमतों में लगातार बढ़ोतरी पर उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग दो गुनी हो चुकी हैं। तेल कंपनियां लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं। ऐसे में सरकार ने कुछ राहत देने के उद्देश्य से दाम बढ़ाने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार खुद भी बड़ा आर्थिक बोझ उठा रही है ताकि जनता पर ज्यादा दबाव न पड़े।उन्होंने आगे कहा, “पिछले कई वर्षों तक कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ, जबकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। अब डॉलर और क्रूड ऑयल दोनों महंगे हो रहे हैं। ऐसे में सरकार भी कुछ बोझ जनता के साथ साझा कर रही है। अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है तो आने वाले समय में दाम घटाए भी जा सकते हैं|”


एवरेस्ट की चोटी पर लहराया तिरंगा उत्तराखंड के सपूतों ने रचा इतिहास

पूजा भट्ट

जब इरादे हिमालय से भी ऊंचे हो तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी भी घुटने टेक देती है| उत्तराखंड के जांबाजों ने एक बार फिर साबित किया है की उन्हे वीरभूमि का बेटा क्यूँ कहा जाता है |23 मई की सुबह ठीक 3:26 बजे देहरादून निवासी मेजर अखिलेश भट्ट ने नैशनल सिक्युरिटी गार्ड (NSG) के 16 सदस्यों की टीम के साथ नेपाल स्थित माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर ) पर सफलतापूर्ण तिरंगा और देवभूमि का स्वाभिमान लहराकर एक नया इतिहास रच दिया है| काठमांडू से मात्र 20 दिनों में शिखर तक पहुंचना एवरेस्ट अभियानों मे एक दुर्लभ रेकॉर्ड है |

इस पूरे मिशन की कमान इंद्रपुर, देहरादून निवासी मेजर अखिलेश भट्ट के हाथों मे थी जो मूल रूप से श्री दिनेश प्रसाद भट्ट के पुत्र और घनसाली, टिहरी गढ़वाल के रहने वाले है| उनके साथ इस अभियान मे उपकप्तान की महत्वपूर्ण भूमिका पौड़ी गढ़वाल के ग्राम कंडाई निवासी सूबेदार सुरेश कुमार बेबनी ने निभाई है | चोटी पर कदम रखकर देवभूमि का मान बढ़ाने वाले उत्तरखन्ड के अन्य जाँबाज जवानों मे चमोली के ग्राम सेरा निवासी नायक राहुल सिंह(पुत्र श्री कुँवर सिंह),अल्मोड़ा के ग्राम ल्वेशाल निवासी नायक पंकज सिंह दोसाद (पुत्र श्री केशर सिंह दोसाद), और उत्तरकाशी के वीर कमांडो गौतम बूटोला शमिले रहे|

यह सफलता महीनों की कठोर सैन्य योजना, अनुशासन और तकनीकी परिशुद्धता का परिणाम थी,जिसकी शुरुआत अक्टोबर 2025 में मेजर अखिलेश के ही नेतृत्व में गढ़वाल हिमालय के माउंट सतोपंत(7,075) के सफल आरोहण से हुई थी; इसके बाद टीम ने लाहौल-स्पीति की हड्डियाँ कंपाने वाली ठंड में डोगरा स्काउट्स के साथ चरम शीतकालीन बर्फ प्रशीषण लिया और माउंट कनामों(5,975) को फतह कर एवरेस्ट विजय क रास्ता तयार किया|

NSG के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार यह मिशन उनके ध्येय वाक्य ‘सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ का एक जीवंत उदाहरण है, जिसने विपरीत हालातों में पहाड़ों की गोद में पले-बढ़े इन जवानों के अदम्य साहस को पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है और राज्य के युवाओं को यह संदेश दिया है कि अटूट संकल्प से हर असंभव लक्ष्य को पाया जा सकता है।


उत्तराखंड में पंचायतों के 3800 पद खाली, जल्द होंगे उपचुनाव

आयुषी

उत्तराखंड में पंचायत व्यवस्था इस समय बड़े स्तर पर जनप्रतिनिधियों की कमी से जूझ रही है|प्रदेशभर में ग्राम प्रधान,ग्राम पंचायत सदस्य,छेत्र पंचायत सदस्य(बीडीसी)और जिला पंचायत सदस्यों सहित 3800 से अधिक पद खाली पड़े है जिसके चलते कई छेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे है|वहीं 33 ग्राम पंचायतें अभी भी असंगठित स्तिथि में है,जिससे उन्हें केंद्र सरकार की सहायता नहीं मिल पा रही हैं|

पंचायत निदेशालय ने इन खाली पदों को भरने के लिए उपचुनाव कराने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है|प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सकती है|

जानकारी के मुताबिक ग्राम प्रधान,छेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत सदस्य समेत कई पद विभिन्न जिलों में रिक्त है|अधिकारियों का कहना है कि पंचायतों में जनप्रतिनिधियों की कमी के कारण विकास योजनओं के संचालन और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने में दिक्कतें आ रही है|

इसके अलावा प्रदेश की 33 पंचायतें अभी तक असंगठित है|इन पंचायतों में नियमित बैठकें नहीं हो पा रही हैं और न ही इन्हें केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मिल रही है|इससे ग्रामीण छेत्रों में विकास कार्यों के लिए आर्थिक सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा|

सरकार की ओर से जल्द निर्णय होने की उम्मीद जताई जा रही है,ताकि पंचायत स्तर पर प्रशासनिक और विकास कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढाया जा सके|


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