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आस्था के रास्ते पर परेशानी! केदारनाथ यात्रा मार्ग पर गंदगी से श्रद्धालु परेशान

आस्था के रास्ते पर परेशानी! केदारनाथ यात्रा मार्ग पर गंदगी से श्रद्धालु परेशान

आस्था के रास्ते पर परेशानी! केदारनाथ यात्रा मार्ग पर गंदगी से श्रद्धालु परेशान

आयुषी

देवभूमि उत्तराखंड में आस्था का सबसे बड़ा पर्व मानी जाने वाली चारधाम यात्रा इस समय करोड़ों श्रधालुओं की भावनाओं का केंद्र बनी हुई है|लेकिन भगवान के दर्शन की इस पवित्र यात्रा में श्रधालुओं को अब प्रकृति की कठिनाइयों से ज्यादा जूझना पड़ रहा है घोड़ों और खच्चरों की लीद,कीचड़ और दुर्गंध से|खासकर केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के पैदल मार्गों पर हालात ऐसे बन गए हैं कि श्रधालुओं की भक्ति अब परीक्षा में बदलती दिखाई दे रही है|

सुबह से लेकर देर शाम तक हजारों यात्री इन संकरे और भीड़भाड़ वाले रास्तों पर आगे बढ़ते हैं,लेकिन हर कुछ कदम पर फैली लीद,कीचड़ और बदबूदार रास्ते उनकी यात्रा को बेहद कठिन बना रहे हैं|बारिश के बाद स्तिथि और भयावह हो जाती है|कई जगहों पर रास्ते इतने फिसलन भरे हो चुके हैं कि बुजुर्ग,महिलाएं,औए बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे हैं|मीडिया पर लगातार वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं,जिनमें श्रद्धालु बदबू और गंदगी के बीच यात्रा करने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं|

कई यात्रियों ने सवाल उठाया है कि जब हर साल लाखों श्रद्धालु चारधाम पहुंचते है तो आखिर व्यवस्थाओं में स्थायी सुधार क्यों नहीं हो पा रहा| कुछ श्राद्धलुओं ने तो यहां तक कहा कि कई स्थानों पर “ऑक्सीजन से ज्यादा बदबू महसूस हो रही है|”पैदल मार्गों पर उड़ती धूल,कीचड़ और लीद का मिश्रण संक्रमण के खतरे को भी बढ़ा रहा है|स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार गंदगी और नमी के कारण बैक्टीरिया और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है|

“सरकार का दावा है कि रोपवे बनेगा तो बलेगी तस्वीर”
इस पूरे मुद्दे पर उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा गई कि सरकार लगातार यात्रा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है|उन्होंने कहा कि आने वाले समय में केदारनाथ और अन्य धामों के लिए रोपवे परियोजनाएं बड़ी राहत साबित होंगी|रोपवे बनने के बाद घोड़ों और खच्चरों पर निर्भरता कम होगी और यात्रा मार्ग अधिक स्वच्छ और सुगम बन पाएंगे|

मंत्री ने यह भी बताया कि घोड़ों और खच्चरों की लीद से बायो-ब्रिकेट (फायरब्रिक) बनाने की योजना पर काम शुरू किया जा चुका है | इसके लिए विशेष चूल्हे भी मंगवाए गए हैं ताकि कचरे को उपयोगी ईंधन में बदला जा सके|सरकार का दावा है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यात्रा मार्गों की सफाई में भी मदद मिलेगी|

सतपाल महाराज का यह बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है जिसमें उन्होंने कहा कि “चारधाम तपस्या की भूमि है, थोड़ा कष्ट तो उठाना ही पड़ेगा।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है।चारधाम यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान और करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधा सुनिश्चित करना अब सरकार और प्रशासन दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।


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