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कम नंबर, गायब पन्ने और गलत कॉपियां! CBSE के डिजिटल मूल्यांकन पर विवाद

कम नंबर, गायब पन्ने और गलत कॉपियां! CBSE के डिजिटल मूल्यांकन पर विवाद

कम नंबर, गायब पन्ने और गलत कॉपियां! CBSE के डिजिटल मूल्यांकन पर विवाद

पूजा भट्ट

सीबीएसई के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर देशभर में चर्चा और विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक इस नई मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। कई छात्रों का आरोप है कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं, जबकि कुछ ने दावा किया कि उन्हें किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका दिखाई गई। वहीं, कुछ विद्यार्थियों ने यह भी शिकायत की कि उनकी कॉपियों के कुछ पन्ने जांच के दौरान मौजूद नहीं थे।

इन बढ़ती शिकायतों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने OSM प्रणाली का समर्थन करते हुए इसे आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई प्रतिष्ठित संस्थान इस तरह की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं। मंत्री ने स्वीकार किया कि नई व्यवस्था होने के कारण शुरुआती स्तर पर कुछ दिक्कतें सामने आई हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और उसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

इस बार सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बड़े पैमाने पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) लागू किया। इस प्रक्रिया में छात्रों की कॉपियों को स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में परीक्षकों के पास भेजा गया, जहां ऑनलाइन माध्यम से अंक दिए गए। हालांकि, रिजल्ट जारी होने के बाद कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें अपेक्षा से काफी कम अंक मिले हैं।

इसके बाद जब विद्यार्थियों ने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं डाउनलोड कीं, तो कई तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी शिकायतें सामने आने लगीं। कुछ छात्रों का कहना है कि उनकी कॉपियों की स्कैनिंग स्पष्ट नहीं थी, जबकि कई जगह पन्ने कटे या अधूरे दिखाई दिए। कुछ विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका दिखाई गई। वहीं, कई छात्रों का कहना है कि सही उत्तर लिखने के बावजूद उन्हें अंक नहीं दिए गए।

सीबीएसई के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर उठे विवाद के बीच बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच की मांग की है। बोर्ड के अनुसार इस वर्ष करीब 17 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि कुल 98 लाख कॉपियों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें औसतन 40 पन्ने थे। इस तरह लगभग 40 करोड़ पन्नों की स्कैनिंग और डिजिटल जांच की गई।

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि करीब 4 लाख छात्रों ने री-चेकिंग के लिए आवेदन किया है, जिसके तहत लगभग 11 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा समीक्षा की जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आने के बाद सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने OSM प्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि यह व्यवस्था छात्रों के हित और पारदर्शिता को ध्यान में रखकर लागू की गई है। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम से छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका देखने का अवसर मिलता है। मंत्री ने माना कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर इस तकनीक को लागू करने के कारण कुछ विसंगतियां सामने आई हैं, लेकिन हर शिकायत का समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई विश्वविद्यालय और संस्थान अब डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की ओर बढ़ रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीएसई ने कई तकनीकी एजेंसियों की मदद लेनी शुरू कर दी है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, केंद्र सरकार की टेक्निकल जांच एजेंसियां भी पूरे मामले की निगरानी कर रही हैं। यदि जांच में किसी तरह की तकनीकी गलती या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों की सहायता के लिए सीबीएसई ने 24 घंटे सक्रिय रहने वाला ‘पोस्ट-रिजल्ट सपोर्ट सिस्टम’ भी शुरू किया है। इसके तहत छात्र रिजल्ट, कॉपी जांच, मानसिक तनाव और अन्य समस्याओं को लेकर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। बोर्ड ने इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-11-8004 जारी किया है। साथ ही छात्र आधिकारिक ईमेल आईडी info.cbse@nic.in और result.cbse2026@cbseshiksha.in पर भी संपर्क कर सकते हैं। बोर्ड का कहना है कि छात्रों की हर शिकायत का जल्द समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।


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