आयुषी
त्याग, बलिदान और इंसानियत का संदेश देने वाला पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार को राजधानी देहरादून समेत पूरे उत्तराखंड में धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने नमाज अदा कर मुल्क में अमन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगी।ईद को लेकर मुस्लिम समुदाय में खासा उत्साह देखने को मिला। बुधवार देर रात तक शहर के बाजारों में खरीदारी की रौनक बनी रही। कपड़े, इत्र, सेवइयां और कुर्बानी के लिए बकरों की खरीदारी को लेकर बाजारों में भारी भीड़ रही। बच्चों और युवाओं में त्योहार को लेकर अलग ही उत्साह नजर आया।
देहरादून की प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में अलग-अलग समय पर ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।मौलानाओं ने अपने संदेश में कहा कि ईद-उल-अजहा केवल कुर्बानी का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग और जरूरतमंदों की मदद का संदेश भी देता है। उन्होंने समाज में शांति और भाईचारे को मजबूत करने की अपील की।
इस बार देहरादून में ईद की नमाज के दौरान एक अलग तस्वीर भी देखने को मिली। मुस्लिम सेवा संगठन से जुड़े लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई।संगठन के सदस्यों ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार को इसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा देना चाहिए। इस पहल ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और सामाजिक सौहार्द का संदेश भी दिया।
ईद-उल-अजहा को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए दून पुलिस पूरी तरह अलर्ट रही। शहर को 5 जोन और 11 सेक्टर में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था की गई। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा, जबकि सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी गई।
पुलिस अधिकारियों ने लगातार शहर का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। ट्रैफिक को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए थे।
ईद से एक दिन पहले देहरादून के पलटन बाजार, सहारनपुर चौक और अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों में देर रात तक खरीदारी का माहौल बना रहा। मिठाइयों, कपड़ों और पारंपरिक सामान की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखने को मिली।
प्रदेशभर में ईद-उल-अजहा का पर्व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ और लोगों ने मिलकर प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश दिया।