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भीषण गर्मी में बढ़ रहा लो बीपी का खतरा, जानें अचानक ब्लड प्रेशर गिरने पर क्या करें

Category Archives: फिटनेस

भीषण गर्मी में बढ़ रहा लो बीपी का खतरा, जानें अचानक ब्लड प्रेशर गिरने पर क्या करें

देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच लोगों में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी सिर्फ हीट स्ट्रोक ही नहीं, बल्कि लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) का जोखिम भी बढ़ा सकती है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में शरीर को सामान्य तापमान पर बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं। इस प्रक्रिया के कारण कई लोगों का ब्लड प्रेशर सामान्य से नीचे जा सकता है। इसके अलावा लगातार पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी, चक्कर और बेहोशी जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में व्यक्ति को अचानक उठने-बैठने में परेशानी हो सकती है। कई बार आंखों के सामने अंधेरा छाना, शरीर में अत्यधिक थकान महसूस होना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई भी इसके संकेत हो सकते हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो इसका असर हृदय, मस्तिष्क और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ सकता है।

गर्मियों में लो बीपी क्यों होता है?

गर्म मौसम में शरीर से अधिक मात्रा में पसीना निकलता है, जिससे पानी के साथ सोडियम और पोटैशियम जैसे आवश्यक खनिज भी कम हो जाते हैं। यही कारण है कि शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ने लगता है और ब्लड प्रेशर गिर सकता है। लंबे समय तक धूप में रहने, पर्याप्त पानी न पीने और भोजन छोड़ने की आदत भी इस समस्या को बढ़ा सकती है।

लो बीपी होने पर क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति को अचानक चक्कर आने, कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो तो सबसे पहले उसका ब्लड प्रेशर जांचना चाहिए। यदि बीपी सामान्य से कम हो तो उसे आरामदायक स्थिति में लिटाकर पैरों को थोड़ा ऊंचा रखें। इससे रक्त का प्रवाह मस्तिष्क तक बेहतर तरीके से पहुंच पाता है।

इसके अलावा शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस घोल, नारियल पानी या नमक-चीनी वाला पेय दिया जा सकता है। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना और शरीर को ठंडे वातावरण में रखना भी राहत पहुंचा सकता है।

किन बातों का रखें ध्यान?

लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में व्यक्ति को अचानक खड़ा होने या तेजी से चलने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गिरने या बेहोश होने का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने से भी बीपी कम हो सकता है, इसलिए समय-समय पर हल्का और पौष्टिक भोजन लेना जरूरी है।

यदि लो बीपी के साथ सांस लेने में परेशानी, बार-बार बेहोशी या स्थिति लगातार बिगड़ती नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचाव करना और संतुलित आहार लेना इस समस्या से बचने के सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।

(साभार)


स्वाद बढ़ाने वाली टोमैटो सॉस कहीं सेहत के लिए खतरा तो नहीं? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, समोसा और चाउमीन जैसे फास्ट फूड के साथ टोमैटो सॉस का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। इसका खट्टा-मीठा स्वाद खाने का मजा बढ़ा देता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाली यह सॉस आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में मिलने वाली कई टोमैटो सॉस और केचप में टमाटर के अलावा चीनी, नमक, प्रिजर्वेटिव्स और कृत्रिम रंगों की मात्रा काफी अधिक हो सकती है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

हापुड़ में नकली सॉस बनाने का मामला आया सामने

हाल ही में उत्तर प्रदेश के हापुड़ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एक स्थान पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नकली टोमैटो सॉस बरामद की। जांच के दौरान अधिकारियों ने सैकड़ों बोतलें जब्त कीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सॉस तैयार करने में गाजर, स्टार्च, अधिक मात्रा में चीनी, नमक, कृत्रिम रंग और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार ऐसे उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

अधिक चीनी और नमक बढ़ा सकते हैं जोखिम

पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में उपलब्ध कई सॉस में चीनी और सोडियम की मात्रा अपेक्षा से ज्यादा होती है। नियमित रूप से अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा प्रोसेसिंग के दौरान मिलाए जाने वाले कुछ प्रिजर्वेटिव्स और फ्लेवरिंग एजेंट्स पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर सकते हैं।

पाचन और एलर्जी की समस्या

विशेषज्ञों का मानना है कि कम गुणवत्ता वाले सॉस में मौजूद कृत्रिम रंग और रसायन कुछ लोगों में एलर्जी, पेट दर्द, गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे उत्पादों का सेवन शरीर में सूजन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी बढ़ा सकता है।

बच्चों की सेहत पर ज्यादा असर

बच्चों में टोमैटो सॉस का इस्तेमाल सबसे ज्यादा देखा जाता है। फ्राइज, बर्गर, पिज्जा और अन्य जंक फूड के साथ सॉस खाने की आदत उन्हें अधिक चीनी और नमक का आदी बना सकती है। इससे कम उम्र में ही वजन बढ़ना, ब्लड शुगर असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही यह आदत बच्चों को पौष्टिक भोजन से दूर भी कर सकती है।

सॉस खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सॉस खरीदते समय उसके लेबल को ध्यान से पढ़ें। ऐसे उत्पाद चुनें जिनमें टमाटर की मात्रा अधिक हो और अतिरिक्त चीनी, नमक तथा कृत्रिम प्रिजर्वेटिव्स कम हों। खुले में बिकने वाले या अत्यधिक चमकीले रंग वाले सॉस से बचना बेहतर है। यदि संभव हो तो घर पर तैयार की गई सॉस का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प माना जाता है।

नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और उपलब्ध चिकित्सा रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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चाय के साथ सिगरेट पीना पड़ सकता है भारी, जान लीजिये इसके नुकसान

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में चाय और सिगरेट का साथ कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। ऑफिस में काम के दबाव के बीच या दोस्तों के साथ बैठकों में लोग अक्सर चाय के साथ सिगरेट पीना पसंद करते हैं। खासकर युवाओं में इसे तनाव कम करने और रिलैक्स महसूस करने का आसान तरीका माना जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यह आदत धीरे-धीरे शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

डॉक्टरों के अनुसार चाय में मौजूद कैफीन और सिगरेट में पाया जाने वाला निकोटिन मिलकर शरीर पर दोगुना असर डालते हैं। शुरुआत में यह कॉम्बिनेशन ताजगी और राहत का एहसास देता है, लेकिन लंबे समय में यह कई बीमारियों की वजह बन सकता है। आइए जानते हैं कि चाय और सिगरेट का एक साथ सेवन शरीर को किस तरह प्रभावित करता है।

दिल की सेहत पर बढ़ता है खतरा

सिगरेट में मौजूद निकोटिन दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है। वहीं चाय में मौजूद कैफीन भी शरीर को उत्तेजित करता है। दोनों का एक साथ सेवन करने से हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ सकता है।

फेफड़ों को होता है नुकसान

सिगरेट का धुआं फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। लगातार धूम्रपान करने से सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों में सूजन और ऑक्सीजन क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। चाय के साथ सिगरेट पीने की आदत इस नुकसान को और बढ़ा देती है।

बढ़ सकती है लत

निकोटिन और कैफीन दोनों ही दिमाग के रसायनों को प्रभावित करते हैं। इससे व्यक्ति को बार-बार चाय और सिगरेट लेने की इच्छा होने लगती है। धीरे-धीरे यह आदत मानसिक और शारीरिक निर्भरता में बदल सकती है।

पाचन तंत्र पर पड़ता है असर

खाली पेट चाय और सिगरेट का सेवन पेट में एसिड की मात्रा बढ़ा सकता है। इससे गैस, एसिडिटी, पेट दर्द और जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लंबे समय तक ऐसा करने से पेट की अंदरूनी परत भी कमजोर हो सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

कई लोगों को लगता है कि चाय और सिगरेट तनाव कम करते हैं, लेकिन यह राहत कुछ समय के लिए ही होती है। निकोटिन और कैफीन का असर खत्म होने के बाद बेचैनी, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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क्या है डायरिया, गर्मियों में क्यों बढ़ जाते हैं इसके मामले? जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

देशभर में भीषण गर्मी का असर अब लोगों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। तापमान लगातार बढ़ने के साथ पेट से जुड़ी बीमारियों के मामलों में तेजी आई है। अस्पतालों और क्लीनिकों में डायरिया, उल्टी, फूड पॉइजनिंग और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में खानपान और साफ-सफाई में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है।

गर्मी के मौसम में शरीर से अधिक पसीना निकलने के कारण पानी की कमी जल्दी होने लगती है। ऐसे में दूषित पानी, खुले में बिकने वाला खाना और लंबे समय तक रखा बासी भोजन संक्रमण का खतरा बढ़ा देता है। यही कारण है कि इस मौसम में डायरिया के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका खतरा अधिक माना जाता है।

क्या है डायरिया?
डायरिया यानी बार-बार पतले दस्त होना। यह आमतौर पर संक्रमित भोजन या गंदा पानी पीने से होता है। कई बार बैक्टीरिया, वायरस या खराब खानपान के कारण पाचन तंत्र प्रभावित हो जाता है, जिससे पेट खराब होने की समस्या शुरू हो जाती है। सड़क किनारे मिलने वाले कटे फल, खुला खाना और अस्वच्छ पेय पदार्थ इस संक्रमण का बड़ा कारण बनते हैं।

गर्मियों में क्यों बढ़ता है खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक गर्म तापमान में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं। खाना जल्दी खराब हो जाता है और उसमें संक्रमण पैदा होने लगता है। कई घंटे तक रखा भोजन, दूषित बर्फ और बिना ढका खाना पेट संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देता है। ई-कोलाई, साल्मोनेला और रोटावायरस जैसे संक्रमण डायरिया के प्रमुख कारण माने जाते हैं।

डायरिया के लक्षण
डायरिया की स्थिति में दिन में कई बार पतले दस्त होना सबसे सामान्य संकेत है। इसके अलावा पेट दर्द, ऐंठन, उल्टी, मतली, कमजोरी और हल्का बुखार भी हो सकता है। लगातार दस्त होने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है, जिससे चक्कर आना, मुंह सूखना और कमजोरी महसूस हो सकती है।

तुरंत क्या करें?
डॉक्टरों का कहना है कि डायरिया होने पर शरीर में पानी की कमी पूरी करना सबसे जरूरी होता है। ओआरएस का घोल पीना काफी फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थ भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। मरीज को हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन देना चाहिए।

कैसे करें बचाव?
गर्मियों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। खाने से पहले और टॉयलेट के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिए। हमेशा साफ और फिल्टर किया हुआ पानी पीना बेहतर माना जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और बासी खाने से बचना चाहिए।

नोट: यह जानकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है।

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बार- बार छींक आना, नाक बहना सर्दी-जुकाम ही नहीं, ‘हे फीवर’ का भी हो सकता है संकेत

मौसम में बदलाव होते ही अगर आपको लगातार छींक आना, नाक बहना या आंखों में खुजली जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं, तो इसे हल्के में लेने की गलती न करें। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये एलर्जी से जुड़ी एक बीमारी ‘हे फीवर’ का संकेत भी हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण के कारण इस समस्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

Hay Fever यानी एलर्जिक राइनाइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली धूल, परागकण, फफूंदी या जानवरों के बाल जैसी सामान्य चीजों को खतरनाक मानकर प्रतिक्रिया देने लगती है। इसके कारण शरीर में एलर्जी संबंधी लक्षण दिखाई देने लगते हैं। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई वायरल संक्रमण नहीं बल्कि एलर्जी से जुड़ी समस्या है, जो लंबे समय तक परेशान कर सकती है।

हे फीवर के लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम से काफी मिलते-जुलते हैं। इसमें बार-बार छींक आना, नाक बंद होना या बहना, आंखों में पानी आना और खुजली जैसी समस्याएं आम हैं। कुछ लोगों को गले में खराश, सिरदर्द और अत्यधिक थकान भी महसूस हो सकती है। जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है, उनमें यह परेशानी सांस लेने में दिक्कत और खांसी को और बढ़ा सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस के कारण होता है और आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, जबकि हे फीवर एलर्जी पैदा करने वाली चीजों के संपर्क में आने तक बना रह सकता है। वायरल फीवर में हल्का बुखार और शरीर दर्द भी होता है, लेकिन हे फीवर में आमतौर पर बुखार नहीं आता।

डॉक्टरों के अनुसार, हे फीवर से बचने का सबसे अच्छा तरीका एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से दूरी बनाना है। मौसम बदलने के दौरान बाहर कम निकलना, घर की नियमित सफाई करना, धूल से बचाव रखना और बाहर से आने के बाद हाथ-मुंह धोना काफी फायदेमंद माना जाता है। अगर एलर्जी के कारण सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या लगातार लक्षण बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बार-बार होने वाली एलर्जी को नजरअंदाज करने के बजाय सही समय पर जांच और इलाज कराना जरूरी है, ताकि समस्या गंभीर रूप न ले सके।

नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है।

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किडनी स्टोन में बीयर पीना फायदेमंद या नुकसानदायक? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर

आजकल किडनी स्टोन यानी पथरी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह बीमारी जितनी आम होती जा रही है, उतनी ही इसके इलाज को लेकर गलतफहमियां भी फैल रही हैं। कई लोग मानते हैं कि बीयर पीने से पथरी जल्दी निकल जाती है और इसी वजह से दर्द होने पर लोग इसे घरेलू इलाज की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं। सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़े कई दावे देखने को मिलते हैं, लेकिन डॉक्टरों की राय इससे अलग है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बीयर को किडनी स्टोन का इलाज मानना सही नहीं है। हालांकि यह पेशाब की मात्रा बढ़ा सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इससे पथरी खत्म हो जाती है। कई मामलों में यह फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान भी कर सकती है।

क्या सच में बीयर से निकल जाती है पथरी?

डॉक्टर बताते हैं कि बीयर डाययूरेटिक की तरह काम करती है, यानी इसे पीने से बार-बार पेशाब आता है। इसी कारण कुछ छोटे स्टोन यूरिन के जरिए बाहर निकल सकते हैं। लेकिन यह प्रक्रिया केवल छोटे आकार की पथरी तक सीमित हो सकती है। मेडिकल साइंस में बीयर को किडनी स्टोन का प्रमाणित इलाज नहीं माना गया है।

अल्कोहल बढ़ा सकता है जोखिम

विशेषज्ञों के मुताबिक, बीयर में मौजूद अल्कोहल शरीर में पानी की कमी पैदा कर सकता है। डिहाइड्रेशन की वजह से यूरिन गाढ़ा हो जाता है, जिससे नई पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है। ज्यादा शराब पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ता है, जो लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकता है।

छोटे और बड़े स्टोन में होता है फर्क

डॉक्टरों का कहना है कि किडनी स्टोन का इलाज उसके आकार पर निर्भर करता है। लगभग 4 से 5 मिमी तक के छोटे स्टोन कई बार ज्यादा पानी पीने और दवाइयों की मदद से बाहर निकल सकते हैं। लेकिन बड़े स्टोन के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है, जिसमें लेजर थेरेपी या सर्जरी भी शामिल हो सकती है।

बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किडनी स्टोन से बचने के लिए रोज पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। इसके अलावा ज्यादा नमक, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और अत्यधिक शराब से दूरी बनानी चाहिए। संतुलित आहार और नियमित हेल्थ चेकअप भी किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

डॉक्टरों की अहम सलाह

यदि लगातार पेट या कमर में तेज दर्द, पेशाब में जलन या खून जैसी समस्या दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बिना मेडिकल सलाह के किसी घरेलू उपाय या शराब पर निर्भर रहना खतरे से खाली नहीं हो सकता। सही समय पर जांच और उपचार ही किडनी स्टोन से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

नोट: यह जानकारी मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है।

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क्या है गोंद कतीरा? जानें इसके फायदे, नुकसान और सेवन करने का तरीका

गर्मियों का बढ़ता तापमान और चिलचिलाती धूप लोगों की सेहत पर असर डालने लगी है। ऐसे मौसम में शरीर को ठंडक और हाइड्रेशन देने वाले घरेलू उपायों की मांग बढ़ जाती है। इन्हीं में गोंद कतीरा इन दिनों लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। आयुर्वेद में इसे शरीर को अंदर से ठंडा रखने वाला प्राकृतिक सुपरफूड माना जाता है, जो गर्मी से राहत देने के साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी पहुंचाता है।

गोंद कतीरा एक प्राकृतिक गोंद है, जिसे ट्रागाकैंथ पौधे से प्राप्त किया जाता है। पानी में भिगोने के बाद यह फूलकर जेली जैसा बन जाता है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर को ठंडक देने, कमजोरी दूर करने और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें मौजूद गुण पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और पेट की गर्मी कम करने में भी मददगार साबित हो सकते हैं।

गोंद कतीरा का सेवन कई तरह से किया जाता है, लेकिन इसका ड्रिंक सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसे बनाने के लिए 1 से 2 चम्मच गोंद कतीरा को करीब 4 से 6 घंटे पानी में भिगोया जाता है। इसके बाद इसमें ठंडा पानी या दूध मिलाकर स्वादानुसार शहद, चीनी, गुलाब जल या इलायची डाली जा सकती है। तैयार ड्रिंक को ठंडा करके पीने से शरीर को ताजगी महसूस होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में दिन में एक बार, खासकर दोपहर के समय इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है। साथ ही एसिडिटी, पेट की जलन और थकान जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाने में सहायक माना जाता है। कुछ लोग इसे वजन नियंत्रित करने और त्वचा को हेल्दी बनाए रखने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं।

हालांकि, गोंद कतीरा का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में लेने से पेट संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। डायबिटीज मरीजों को इसमें मीठा कम मिलाने की सलाह दी जाती है, जबकि गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और सामान्य स्वास्थ्य जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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बार-बार छींक आती है तो हो जाएं सावधान, हो सकता है किसी बीमारी का संकेत

छींक आना शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो नाक के जरिए धूल, बैक्टीरिया और अन्य बाहरी कणों को बाहर निकालने का काम करती है। बदलता मौसम, धूल-मिट्टी, तेज गंध या एलर्जी जैसी वजहों से कभी-कभार छींक आना सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर छींकें लगातार और बार-बार आने लगें, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में इसे नजरअंदाज करना सही नहीं माना जाता।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिन में कुछ बार छींक आना आम बात है और यह शरीर की सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा होता है। हालांकि, जब छींक के साथ नाक बहना, आंखों में जलन, बुखार या सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें जुड़ने लगें, तो यह एलर्जी, वायरल संक्रमण या साइनस जैसी समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि छींक कब सामान्य है और कब डॉक्टर की सलाह लेने की जरूरत पड़ सकती है।

दिन में कितनी छींकें सामान्य मानी जाती हैं?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिन में 2 से 5 बार छींक आना सामान्य स्थिति मानी जाती है। कई बार लगातार 3-4 छींकें एक साथ आना भी कोई गंभीर बात नहीं होती। यह शरीर का तरीका है जिससे नाक में मौजूद धूल या एलर्जन बाहर निकल जाते हैं।

कब बढ़ सकती है परेशानी?
अगर छींकें लगातार कई दिनों तक आती रहें या दिनभर बार-बार छींकने की समस्या बनी रहे, तो यह एलर्जिक राइनाइटिस, साइनस इंफेक्शन या वायरल बीमारी का संकेत हो सकता है। खासतौर पर मौसम बदलने के दौरान यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।

किन लक्षणों पर डॉक्टर से मिलना जरूरी?

लगातार छींकें आना

छींक के साथ तेज नाक बहना

बुखार या गले में खराश

सांस लेने में तकलीफ

आंखों में खुजली और जलन

सिरदर्द और कमजोरी महसूस होना

छींक आने के आम कारण

धूल और प्रदूषण

मौसम में बदलाव

परागकण और एलर्जी

वायरल इंफेक्शन

साइनस से जुड़ी समस्या

बचाव के लिए क्या करें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि धूल और धुएं से बचाव करें और बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें। घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना भी जरूरी है। अगर किसी खास चीज से एलर्जी है, तो उससे दूरी बनाकर रखें। समस्या ज्यादा बढ़ने पर बिना देरी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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ज्यादा सोया चाप खाना पड़ सकता है भारी, जान लीजिये इसके नुकसान

आजकल युवाओं के बीच स्ट्रीट फूड का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है और सोया चाप भी उन्हीं लोकप्रिय फूड्स में शामिल हो गया है। स्वाद और प्रोटीन के नाम पर लोग इसे काफी पसंद कर रहे हैं। रेस्टोरेंट्स से लेकर सड़क किनारे स्टॉल तक, सोया चाप हर जगह आसानी से मिल जाता है। कई लोग इसे हेल्दी ऑप्शन मानकर अपनी डाइट का हिस्सा बना लेते हैं, लेकिन क्या इसका ज्यादा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्वाद के साथ-साथ इसकी क्वालिटी और बनाने का तरीका भी समझना जरूरी है।

दरअसल, सोया चाप पूरी तरह प्राकृतिक फूड नहीं माना जाता। इसे तैयार करने में कई तरह की प्रोसेसिंग की जाती है, जिसमें सोया के साथ मैदा, स्टार्च और अन्य सामग्री मिलाई जाती है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स इसके अधिक सेवन से बचने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि जरूरत से ज्यादा प्रोसेस्ड फूड शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

कैसे तैयार की जाती है सोया चाप?
सोया चाप बनाने के लिए सोया प्रोटीन को अलग-अलग प्रोसेस से गुजारा जाता है। इसके बाद इसमें मैदा और अन्य बाइंडिंग सामग्री मिलाकर इसे खास आकार दिया जाता है। कई जगहों पर स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें अतिरिक्त मसाले और प्रिजर्वेटिव्स भी डाले जाते हैं। यही कारण है कि इसे सीमित मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है।

पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोया चाप में इस्तेमाल होने वाली रिफाइंड सामग्री और स्टार्च पेट के लिए भारी साबित हो सकते हैं। इसका अधिक सेवन गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और अपच जैसी दिक्कतें पैदा कर सकता है। जिन लोगों का डाइजेशन कमजोर है, उन्हें खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

डीप फ्राई होने से बढ़ता है खतरा
अधिकतर स्ट्रीट स्टॉल्स पर सोया चाप को तेल में डीप फ्राई करके तैयार किया जाता है। इससे इसमें ट्रांस फैट और अतिरिक्त कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ज्यादा ट्रांस फैट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

वजन बढ़ने का बन सकता है कारण
सोया चाप को अगर बार-बार और ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो यह वजन बढ़ाने का कारण बन सकता है। खासकर बटर, क्रीम और ज्यादा मसालों के साथ बनी सोया चाप शरीर में अतिरिक्त फैट जमा कर सकती है। लंबे समय तक इसका अधिक सेवन मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।

सीमित मात्रा में सेवन बेहतर
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सोया चाप अच्छी क्वालिटी की हो और कम तेल में घर पर बनाई जाए तो इसे कभी-कभार खाया जा सकता है। हालांकि, इसे रोजाना डाइट का हिस्सा बनाना सेहत के लिए सही नहीं माना जाता।

नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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धूम्रपान बन रहा हार्ट अटैक का बड़ा कारण, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

दिल की बीमारियां आज के समय में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हो चुकी हैं। अनियमित दिनचर्या, तनाव और गलत खान-पान के साथ-साथ धूम्रपान की आदत लोगों के हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बीड़ी-सिगरेट का सेवन न सिर्फ फेफड़ों बल्कि दिल और रक्त वाहिकाओं के लिए भी बेहद खतरनाक साबित होता है। लगातार धूम्रपान करने वालों में हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।

धूम्रपान बना दिल का सबसे बड़ा दुश्मन

विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं में तेजी से बढ़ रही स्मोकिंग की आदत चिंता का विषय बनती जा रही है। तंबाकू और सिगरेट में मौजूद निकोटिन व कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे जहरीले तत्व शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। धूम्रपान की हर कश दिल की धड़कनों पर अतिरिक्त दबाव डालती है और रक्त संचार प्रणाली को कमजोर करती है।

डॉक्टर बताते हैं कि निकोटिन शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन का स्तर बढ़ा देता है, जिससे हार्ट रेट तेज हो जाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। वहीं सिगरेट के धुएं में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देती है। इससे दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और हृदय की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं।

रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है गंभीर असर

धूम्रपान का असर सिर्फ दिल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक सिगरेट में मौजूद रसायन ब्लड वेसल्स की अंदरूनी परत को कमजोर कर देते हैं, जिससे उनमें कठोरता आने लगती है। इस स्थिति को एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बड़ा कारण बन सकती है।

लगातार स्मोकिंग करने वालों में खून के थक्के बनने का खतरा भी बढ़ जाता है। ये थक्के रक्त प्रवाह को बाधित कर अचानक हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।

शरीर को कई दूसरी बीमारियों का भी खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान पूरे शरीर के लिए नुकसानदायक है। इससे फेफड़ों का कैंसर, सीओपीडी, स्ट्रोक और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर संक्रमण की आशंका भी बढ़ाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते धूम्रपान की आदत छोड़ना बेहद जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और तंबाकू से दूरी बनाकर दिल की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

(साभार)


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