Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

क्या आप भी दिनभर एसी में रहते हैं? तो जान लीजिये इसके नुकसान

Category Archives: जीवन शैली

क्या आप भी दिनभर एसी में रहते हैं? तो जान लीजिये इसके नुकसान

गर्मी बढ़ने के साथ ही एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है, जिससे लोगों को राहत तो मिलती है, लेकिन इसका अधिक उपयोग स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर भी डाल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक एसी में रहना शरीर के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है, इसलिए इसका संतुलित और सावधानीपूर्वक उपयोग जरूरी है।

गर्मियों में एसी लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी ठंडी और शुष्क हवा शरीर के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। लगातार एसी में रहने से त्वचा, श्वसन तंत्र और पाचन प्रणाली पर असर पड़ता है।

सबसे पहले, एसी की सूखी हवा त्वचा और बालों की नमी को कम कर देती है, जिससे स्किन ड्राई और बेजान हो सकती है, वहीं बालों में रूखापन और टूटने की समस्या बढ़ सकती है।

इसके अलावा, ठंडी हवा का सीधा असर गले और फेफड़ों पर पड़ता है। इससे सर्दी-जुकाम, गले में खराश और एलर्जी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। खासतौर पर अस्थमा या सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है।

लंबे समय तक एसी में रहने से मांसपेशियों और जोड़ों में अकड़न और दर्द की समस्या भी सामने आती है। ठंडा वातावरण शरीर की मांसपेशियों को सख्त बना देता है, जिससे असहजता बढ़ती है।

एसी का एक और बड़ा प्रभाव शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन के रूप में देखने को मिलता है। सूखी हवा के कारण शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो सकता है, जिससे थकान, सिरदर्द और कमजोरी महसूस होती है।

इसके साथ ही, लगातार ठंडे माहौल में रहने से पाचन क्रिया भी प्रभावित होती है, जिससे गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सावधानी और बचाव के उपाय:

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एसी का तापमान 20 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें। समय-समय पर ताजी हवा में जरूर जाएं, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और एसी की नियमित सफाई कराते रहें, ताकि किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा कम हो सके।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)


प्रोटीन शेक फायदेमंद या नुकसानदायक? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है और इसमें प्रोटीन की अहम भूमिका होती है। आजकल फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते लोग प्रोटीन शेक का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं, लेकिन क्या ये वास्तव में सेहत के लिए फायदेमंद हैं या नुकसानदायक—इसे समझना जरूरी है।

प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है, जो मांसपेशियों के निर्माण, त्वचा और बालों की मजबूती के साथ-साथ एंजाइम और हार्मोन बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति को अपने वजन के अनुसार रोजाना पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए। इसकी कमी से कमजोरी, मांसपेशियों में गिरावट और इम्युनिटी कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

फिटनेस और जिम करने वालों के बीच प्रोटीन शेक काफी लोकप्रिय हैं, क्योंकि ये मांसपेशियों की रिकवरी और ग्रोथ में मदद करते हैं। इसके अलावा, प्रोटीन लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास कराता है, जिससे वजन नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है। साथ ही, यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी सहायक होता है।

हालांकि, प्रोटीन शेक दो तरह के होते हैं—एक बाजार में मिलने वाले प्रोटीन पाउडर और दूसरा घर पर बनाए गए प्राकृतिक शेक। आहार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपकी डाइट में दाल, दूध, अंडा, पनीर, सोया और नट्स जैसे स्रोत पर्याप्त हैं, तो अलग से प्रोटीन शेक लेने की जरूरत नहीं होती। वहीं, एथलीट या ज्यादा शारीरिक मेहनत करने वाले लोग डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से इसका सेवन कर सकते हैं।

बाजार में मिलने वाले प्रोटीन पाउडर को लेकर कई चिंताएं भी सामने आई हैं। कुछ अध्ययनों में इनमें भारी धातुएं, केमिकल्स और हानिकारक तत्व पाए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा, इनमें शुगर, आर्टिफिशियल फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव्स भी होते हैं, जो पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी पर भी दबाव पड़ सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से कोई समस्या हो।

ऐसे में विशेषज्ञ प्राकृतिक स्रोतों से प्रोटीन लेना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। दूध, दही, पनीर, दालें, चना, राजमा, सोयाबीन और मूंगफली जैसे खाद्य पदार्थ बेहतर विकल्प हैं। घर पर भी हेल्दी प्रोटीन शेक तैयार किए जा सकते हैं, जिसमें दूध या दही के साथ फल, नट्स और बीज मिलाकर पोषण बढ़ाया जा सकता है।

कुल मिलाकर, प्रोटीन शेक का सेवन जरूरत और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए, जबकि संतुलित और प्राकृतिक आहार को प्राथमिकता देना ही सेहत के लिए सबसे बेहतर विकल्प है।

(साभार)


पेट से जुडी सामान्य समस्याओं को न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं पेट के कैंसर के शुरुआती लक्षण

दुनियाभर में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के बीच अब पेट का कैंसर भी तेजी से फैलने वाली बीमारियों में शामिल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य पाचन समस्याओं जैसे दिखाई देते हैं, जिससे लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं और समय पर इलाज नहीं हो पाता।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पेट से जुड़े कैंसर, जिसे गैस्ट्रिक कैंसर भी कहा जाता है, के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। यह बीमारी पेट की अंदरूनी परत से शुरू होती है और धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिससे इसकी पहचान मुश्किल हो जाती है।

डॉक्टरों का कहना है कि पेट का कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआत में सामान्य गैस, अपच या एसिडिटी जैसा महसूस हो सकता है। यही कारण है कि अधिकांश लोग इसे आम समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकता है।

पेट के कैंसर के प्रमुख संकेत

1. बिना कारण वजन घटना
अगर बिना डाइटिंग या एक्सरसाइज के अचानक वजन कम हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। शरीर में कैंसर कोशिकाएं तेजी से बढ़कर पोषक तत्वों का उपयोग करती हैं, जिससे वजन कम होने लगता है।

2. लगातार अपच और जलन
लंबे समय तक अपच, पेट में जलन या खाने के बाद भारीपन महसूस होना सामान्य नहीं है। यह पेट की अंदरूनी परत में हो रहे बदलाव का संकेत हो सकता है।

3. पेट में लगातार दर्द
पेट में बार-बार दर्द, दबाव या असहजता महसूस होना भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। शुरुआत में यह हल्का हो सकता है, लेकिन समय के साथ बढ़ सकता है।

अन्य लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
अचानक भूख कम लगना या थोड़े खाने में ही पेट भर जाना
बार-बार उल्टी आना या उल्टी में खून दिखना
मल का रंग काला या असामान्य होना

विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय रहते पहचान और इलाज से इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)


क्या आपके शरीर में भी हो रही है खून की कमी? तो अपनी डाइट में शामिल करें ये चीजें

बदलती जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के चलते एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति तब पैदा होती है जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, जिससे थकान, कमजोरी, चक्कर और सांस फूलने जैसी परेशानियां सामने आती हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। समय पर ध्यान न देने पर एनीमिया गंभीर रूप भी ले सकता है। हालांकि, संतुलित आहार और सही खान-पान की आदतों से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

डाइट में शामिल करें ये चीजें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को नियमित आहार में शामिल कर हीमोग्लोबिन के स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है—

पालक का सेवन फायदेमंद
हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन का अच्छा स्रोत मानी जाती हैं। पालक में मौजूद तत्व शरीर में खून बढ़ाने में मदद करते हैं। इसे सूप या सब्जी के रूप में लेना ज्यादा लाभकारी होता है, खासकर जब इसे विटामिन C के साथ लिया जाए।

चुकंदर से बढ़ेगा हीमोग्लोबिन
चुकंदर में आयरन, फोलेट और फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक है। नियमित रूप से इसका जूस या सलाद लेने से खून की कमी दूर करने में मदद मिलती है।

अनार भी है असरदार
अनार को खून बढ़ाने वाला फल माना जाता है। इसमें आयरन और विटामिन C मौजूद होता है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर को सुधारने में मदद करता है। रोजाना इसका सेवन लाभकारी माना जाता है।

गुड़ और चना का कॉम्बिनेशन
गुड़ आयरन से भरपूर होता है, जबकि चना प्रोटीन और मिनरल्स देता है। दोनों का एक साथ सेवन करने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है और कमजोरी भी दूर होती है।

सूखे मेवे से मिलेगी ताकत
किशमिश और खजूर जैसे सूखे मेवे आयरन के साथ ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। इन्हें भिगोकर खाने से शरीर को अधिक लाभ मिलता है और यह खून की कमी को दूर करने में मददगार साबित होते हैं।

(नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।)

(साभार)


इन लोगों को ज्यादा कुट्टू का आटा खाना पड़ सकता है भारी, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

चैत्र नवरात्रि के दौरान जहां एक ओर भक्त पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखते हैं, वहीं खान-पान में भी खास बदलाव देखने को मिलता है। व्रत के दिनों में कुट्टू के आटे से बनी पूड़ी, पकौड़ी और पराठे लोगों की पहली पसंद बन जाते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर और ग्लूटेन-फ्री होने के कारण इसे हेल्दी विकल्प माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इसका अधिक या गलत सेवन सेहत के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुट्टू का आटा हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता। खासकर कुछ लोगों को इसे खाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं किन लोगों को कुट्टू के आटे का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए और व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

कमजोर पाचन वाले लोगों को सावधानी
कुट्टू का आटा फाइबर से भरपूर होता है, लेकिन जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है, उनके लिए यह भारी पड़ सकता है। ज्यादा सेवन से गैस, पेट फूलना, एसिडिटी या कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में हल्के और कम तले हुए रूप में इसका सेवन करना बेहतर माना जाता है।

लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए जोखिम
विशेषज्ञ बताते हैं कि कुट्टू का आटा शरीर में ब्लड फ्लो को प्रभावित कर सकता है। लो बीपी के मरीजों को इसका ज्यादा सेवन करने पर चक्कर, कमजोरी या थकान महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

डायबिटीज मरीजों को मात्रा पर ध्यान
कुट्टू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, लेकिन जब इसे ज्यादा तेल में तलकर खाया जाता है, तो यह ब्लड शुगर लेवल बढ़ा सकता है। डायबिटीज के मरीजों को इसे रोटी, चीला या उबले रूप में सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।

तली-भुनी चीजों से बढ़ सकता है खतरा
व्रत के दौरान कुट्टू के आटे से बनी तली हुई चीजों का ज्यादा सेवन कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के साथ-साथ वजन और दिल से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ा सकता है। खासकर हार्ट पेशेंट और मोटापे से जूझ रहे लोगों को इससे बचना चाहिए।

संतुलित आहार है जरूरी
विशेषज्ञों की सलाह है कि व्रत के दौरान सिर्फ एक ही तरह का भोजन बार-बार न खाएं। फल, दूध, दही, मेवे और हल्का आहार शामिल करने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और कमजोरी से भी बचाव होता है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)


पैरों में बार-बार होने वाली सूजन को न करें नजरअंदाज, हो सकता है दिल की बीमारी का संकेत

बदलती दिनचर्या, तनाव और असंतुलित खानपान के कारण दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार शरीर पहले ही गंभीर बीमारी के संकेत देने लगता है, लेकिन लोग उन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। पैरों में बार-बार होने वाली सूजन भी ऐसा ही एक संकेत हो सकता है, जो दिल की कमजोरी की ओर इशारा करता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर पैरों, टखनों या तलवों में लगातार सूजन बनी रहती है, तो इसे सामान्य समस्या समझकर टालना खतरनाक हो सकता है। यह स्थिति शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने का संकेत देती है, जो अक्सर दिल की कार्यक्षमता कमजोर होने से जुड़ी होती है। जब दिल सही तरीके से रक्त पंप नहीं कर पाता, तो शरीर के निचले हिस्सों में द्रव जमा होने लगता है, जिससे सूजन दिखाई देने लगती है।

मेडिकल भाषा में इस स्थिति को “एडीमा” कहा जाता है। यह समस्या सिर्फ पैरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हाथों, चेहरे और पेट में भी दिखाई दे सकती है। हालांकि, दिल से जुड़ी समस्याओं में इसका असर पैरों और टखनों में ज्यादा देखने को मिलता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि एडीमा के साथ कई अन्य लक्षण भी सामने आ सकते हैं, जैसे अचानक वजन बढ़ना, त्वचा में खिंचाव महसूस होना, सांस लेने में परेशानी, जल्दी थकान और चलने-फिरने में दिक्कत। कुछ मामलों में जूते या चप्पल का अचानक टाइट लगना भी शरीर में तरल पदार्थ बढ़ने का संकेत होता है।

डॉक्टरों की सलाह है कि अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। नमक का सेवन सीमित करना, नियमित व्यायाम करना और वजन नियंत्रित रखना इस समस्या से बचाव में मददगार हो सकता है। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेने से बचना जरूरी है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सही समय पर जांच जैसे ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी और ब्लड टेस्ट के जरिए स्थिति का पता लगाया जा सकता है। समय रहते पहचान और इलाज से गंभीर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

(साभार)


पीरियड्स के दर्द से राहत पाने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द महिलाओं की एक सामान्य लेकिन असहज समस्या है, जो हर महीने उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। कई बार यह दर्द इतना तेज होता है कि सामान्य कामकाज करना भी चुनौती बन जाता है। पेट में ऐंठन, कमर दर्द, थकान और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण इस दौरान आम हैं। हालांकि, राहत के लिए दवाइयों के अलावा कुछ आसान घरेलू उपाय भी बेहद कारगर साबित हो सकते हैं।

पीरियड्स के दर्द से राहत पाने के लिए जरूरी नहीं कि हर बार दवाइयों का सहारा लिया जाए। कुछ प्राकृतिक तरीके अपनाकर भी इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सही खानपान और हल्की-फुल्की गतिविधियां इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।

गर्म सिकाई से राहत
पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी की बोतल या हीट पैड लगाने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं। इससे ऐंठन कम होती है और दर्द में जल्दी आराम मिलता है। यह सबसे आसान और प्रभावी घरेलू उपायों में से एक है।

अदरक का सेवन फायदेमंद
अदरक में सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, जो पीरियड्स के दर्द को कम करने में मदद करते हैं। अदरक की चाय पीने से शरीर को आराम मिलता है और दर्द की तीव्रता घटती है।

हल्दी वाला दूध असरदार
हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व शरीर के अंदरूनी दर्द और सूजन को कम करते हैं। रात में हल्दी वाला दूध पीने से शरीर को आराम मिलता है और ऐंठन में कमी आती है।

डार्क चॉकलेट से मूड और दर्द दोनों बेहतर
डार्क चॉकलेट में मौजूद मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देता है और दर्द को कम करने में सहायक होता है। साथ ही, यह मूड को बेहतर बनाकर तनाव को भी कम करता है।

हल्की एक्सरसाइज जरूरी
पीरियड्स के दौरान हल्की एक्सरसाइज या योग करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे मांसपेशियों का तनाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है।

नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। किसी भी गंभीर समस्या की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

(साभार)


रोजाना दूध में मखाना मिलाकर पीने से शरीर को मिलते हैं कई स्वास्थ्य लाभ

Healthy Drink: अगर आप अपने शरीर को मजबूत, ऊर्जावान और स्वस्थ रखना चाहते हैं तो रोजाना की दिनचर्या में कुछ आसान और प्राकृतिक चीजें शामिल करना काफी फायदेमंद हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार कई बार शरीर को जरूरी पोषण महंगे सप्लीमेंट से नहीं, बल्कि साधारण घरेलू खाद्य पदार्थों से भी मिल सकता है। ऐसे ही एक पोषक विकल्प के रूप में दूध और मखाने का सेवन काफी लाभकारी माना जाता है।

मखाना पोषक तत्वों से भरपूर होता है और जब इसे दूध के साथ लिया जाता है तो यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी पहुंचा सकता है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर को प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य जरूरी खनिज मिलते हैं, जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होते हैं।

मखाना और दूध का मिश्रण हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार माना जाता है। इसमें मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन शरीर की हड्डियों और दांतों को मजबूती प्रदान करते हैं। नियमित सेवन से हड्डियों की कमजोरी कम हो सकती है और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है।

इसके अलावा यह पेय वजन संतुलित रखने में भी सहायक हो सकता है। मखाने में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। इससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है और अनावश्यक खाने से बचाव होता है।

दूध और मखाने का यह संयोजन शरीर को ऊर्जा देने में भी सहायक है। इसमें मौजूद पोषक तत्व थकान को कम करने और शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं। दिन की शुरुआत में या शाम के समय इसका सेवन शरीर को ताजगी दे सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मखाने में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व हृदय स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। यह रक्तचाप को संतुलित रखने और दिल से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

इसके साथ ही यह पेय त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। दूध और मखाने में मौजूद विटामिन और खनिज त्वचा को पोषण देने के साथ बालों को भी मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। नियमित सेवन से त्वचा में निखार और बालों की जड़ों को मजबूती मिल सकती है।


डाइट में ये छोटे बदलाव करने से घटा सकते हैं तेजी से वजन, जानिए एक्सपर्ट की सलाह

उत्तर भारत में गर्मी का असर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है और तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर लोगों की दिनचर्या और खान-पान पर भी पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों का मौसम वजन घटाने के लिए काफी अनुकूल होता है। इसी विषय पर डॉक्टर मल्हार गणला ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया है कि अगर सही खान-पान और कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए तो इस मौसम में तेजी से वजन कम किया जा सकता है।

डॉक्टर मल्हार गणला के अनुसार सर्दियों के मुकाबले गर्मियों में शरीर की ऊर्जा जरूरतें अलग होती हैं। ठंड के मौसम में जब तापमान कम होता है, तब शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा और भोजन की आवश्यकता पड़ती है। जबकि गर्मियों में बाहरी तापमान अधिक होने के कारण शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा खर्च नहीं करनी पड़ती।

ऐसी स्थिति में शरीर सूरज की गर्मी से भी ऊर्जा प्राप्त करता है, जिससे भोजन की मात्रा स्वाभाविक रूप से कम की जा सकती है। डॉक्टर का कहना है कि अगर गर्मियों में खान-पान और पानी के सेवन को सही तरीके से संतुलित रखा जाए तो वजन कम करना काफी आसान हो जाता है। उन्होंने इसके लिए तीन अहम आदतों को अपनाने की सलाह दी है।

पहला कदम: भारी और तले भोजन से दूरी
डॉक्टर के मुताबिक गर्मियों में तैलीय और डीप फ्राइड भोजन से बचना चाहिए। अधिक तेल और भारी कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ शरीर को सुस्त बनाते हैं और वजन बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। इसके बजाय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना चाहिए, जिससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

दूसरा कदम: डाइट में फलों की मात्रा बढ़ाएं
वजन कम करने के लिए भारी कार्बोहाइड्रेट की जगह फलों को डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। फल शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। डॉक्टर मल्हार के अनुसार दिन के समय स्नैक्स के रूप में ताजे फलों का सेवन करने से वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है।

तीसरा कदम: सही हाइड्रेशन और शुगर कंट्रोल
गर्मी के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि चाय और कॉफी का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसके बजाय ताजे फलों का जूस लिया जा सकता है। जूस में अतिरिक्त चीनी डालने के बजाय थोड़ा सा नमक मिलाने से शरीर को बेहतर हाइड्रेशन मिलता है और अतिरिक्त कैलोरी से भी बचाव होता है।

डॉक्टर की सलाह
डॉक्टर मल्हार गणला का कहना है कि अगर गर्मियों में हल्का भोजन, पर्याप्त फल और सही मात्रा में पानी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो वजन कम करना आसान हो सकता है। शरीर को हल्का और संतुलित रखने से मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है और वजन घटाने में मदद मिलती है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)


भोजन करने का सही तरीका कौन सा है, आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग क्या खा रहे हैं इस पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन कैसे खा रहे हैं, इस पर कम ध्यान दिया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन का तरीका और बैठने की मुद्रा भी पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है। सही पोस्चर में भोजन करना न केवल पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाव कर सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आजकल कई लोग सोफे, बिस्तर या आरामदायक मुद्रा में लेटकर या झुककर भोजन करने की आदत रखते हैं, जो पाचन तंत्र के लिए सही नहीं मानी जाती। गलत पोस्चर में भोजन करने से पेट पर दबाव बढ़ता है और शरीर को भोजन पचाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसके कारण बदहजमी, गैस, एसिडिटी और ओवरईटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि भोजन करते समय रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर बैठना सबसे बेहतर माना जाता है। पारंपरिक तरीके से पालथी मारकर यानी सुखासन में बैठकर भोजन करना पाचन के लिए लाभकारी माना जाता है। इससे पेट की मांसपेशियों को पर्याप्त जगह मिलती है और पाचन प्रक्रिया सुचारू रूप से काम करती है। यदि जमीन पर बैठना संभव न हो तो डाइनिंग टेबल पर भी सीधे बैठकर आराम से भोजन किया जा सकता है।

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए। जल्दबाजी में भोजन करने से हवा भी पेट में चली जाती है, जिससे गैस और भारीपन की समस्या बढ़ सकती है। इसके साथ ही पेट को पूरी तरह भरने के बजाय लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक ही भोजन करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।

खाना खत्म करने के तुरंत बाद उठने के बजाय कुछ देर शांत बैठना भी फायदेमंद बताया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार भोजन के बाद कुछ मिनट आराम से बैठने से शरीर पाचन प्रक्रिया के लिए तैयार होता है और भोजन बेहतर तरीके से पचता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खानपान की सही आदतों के साथ-साथ भोजन करने का सही तरीका अपनाना भी जरूरी है। यह छोटा सा बदलाव पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने के साथ-साथ शरीर को अधिक ऊर्जावान और स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकता है।

(साभार)


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp