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पेट्रोल-डीजल के दामों में अचानक हुई बढ़ोतरी से,आम आदमी का खर्चा हुआ दुगना

पेट्रोल-डीजल के दामों में अचानक हुई बढ़ोतरी से,आम आदमी का खर्चा हुआ दुगना

पेट्रोल-डीजल के दामों में अचानक हुई बढ़ोतरी से,आम आदमी का खर्चा हुआ दुगना

पूजा भट्ट

महंगाई का सामना करने वाली आम जनता को ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण एक और बड़ा झटका लगा है| पिछले 10 दिनों मे यह चौथी बार है जब पेट्रोल और डीजल के दामों मे असामान्य बढ़ोतरी हुई है|

सोमवार, 26 मई को सीएनजी के दाम में भी 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई|25 मई को पेट्रोल मे 2.61 रुपये और डीजल मे 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई|इसके बाद देहरादून में हिंदुस्तान पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल की कीमत 100.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.90 रुपये प्रति लीटर हो गई है| वहीं पावर-95 पेट्रोल 108.93 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है|इससे पहले 15 मई को लगभग 3 रुपये, मई को करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी| कुल मिलाकर पीछले 10 दिनों में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है|

लगातार बढ़ रही कीमतों से गरीब और मध्यम वर्ग का मासिक बजट बिगड़ गया है| लोगों को रोजमर्रा के खर्च की चिंता सताने लगी है| स्थानीय नागरिकों का कहना है, “कुछ दिन पहले ही दाम बढ़े थे और अब फिर इजाफा हो गया है| कई सालों बाद पेट्रोल ने फिर से 100 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा पार कर लिया है| इसका सबसे ज्यादा प्रभाव मिडल और लोअर मिडल क्लास पर पड़ा है क्योंकि ज्यादातर लोग दुपहिया या छोटे वाहनों पर निर्भर है|देश की जनता का मानना है की वे पिछले 10-15 दिनों में चार बार दाम बढ़ने से बेहद परेशान है|

उत्तराखंड पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष मित्तल ने कहा, “फिलहाल दश में ईंधन का कोई बड़ा संकट नहीं है|भारत की तुलना में कई अन्य देशों मे हालत ज्यादा खराब है |भारत में लगातार सप्लाइ बनी हुई है| वीकेंड या छुट्टियों में डिमांड बढ़ने से कभी कभी हल्की दिक्कत आती है, लेकिन उसे संभाल लिया जाता है| कीमतों में लगातार बढ़ोतरी पर उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग दो गुनी हो चुकी हैं। तेल कंपनियां लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं। ऐसे में सरकार ने कुछ राहत देने के उद्देश्य से दाम बढ़ाने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार खुद भी बड़ा आर्थिक बोझ उठा रही है ताकि जनता पर ज्यादा दबाव न पड़े।उन्होंने आगे कहा, “पिछले कई वर्षों तक कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ, जबकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। अब डॉलर और क्रूड ऑयल दोनों महंगे हो रहे हैं। ऐसे में सरकार भी कुछ बोझ जनता के साथ साझा कर रही है। अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है तो आने वाले समय में दाम घटाए भी जा सकते हैं|”


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