Friday, October 2nd, 2026

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डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें, मैग्नीशियम की कमी पूरी करने में मिल सकती है मदद

Daily Archives: 02/10/2026

डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें, मैग्नीशियम की कमी पूरी करने में मिल सकती है मदद

आज की तेज रफ्तार जिंदगी और बदलती खानपान की आदतों के बीच लोगों में थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे शरीर में मैग्नीशियम की कमी एक बड़ी वजह हो सकती है। यह जरूरी मिनरल मांसपेशियों, नसों, दिल और शरीर में ऊर्जा उत्पादन को सुचारू रखने में अहम भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को लगातार थकान महसूस होती है, नींद पूरी नहीं होती, मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन रहती है, तो उसे अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अच्छी बात यह है कि मैग्नीशियम की कमी को दूर करने के लिए महंगे सप्लीमेंट्स की नहीं, बल्कि संतुलित और पौष्टिक आहार की जरूरत होती है।

हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों और चौलाई जैसी सब्जियों को मैग्नीशियम के अच्छे स्रोतों में गिना जाता है। इन्हें सब्जी, सूप या अन्य व्यंजनों के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है।

केला: केले में मैग्नीशियम के साथ पोटैशियम भी पाया जाता है। इसे नाश्ते या दिन के दूसरे समय फल के तौर पर खाया जा सकता है।

नट्स और सीड्स: बादाम, काजू, अखरोट के अलावा कद्दू और सूरजमुखी के बीज भी मैग्नीशियम प्रदान करते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर और वसा भी मौजूद होती है।

दालें और बीन्स: चना, राजमा, लोबिया, मसूर और मूंग जैसी दालें मैग्नीशियम के साथ प्रोटीन और फाइबर भी देती हैं। इन्हें नियमित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

डार्क चॉकलेट: कोको की अधिक मात्रा वाली डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम के साथ एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं। हालांकि इसे सीमित मात्रा में लेना बेहतर माना जाता है, क्योंकि कई उत्पादों में चीनी और कैलोरी अधिक हो सकती है।

मैग्नीशियम शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन लगातार थकान, ऐंठन या कमजोरी के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर डॉक्टर की सलाह लेना उचित है। संतुलित आहार के जरिए शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।


मंदिर की जमीन और दुकानों के विवाद में फायरिंग का आरोप, फायरिंग के बाद एक्टिवा-बाइक छोड़कर भागे युवक

अमृतसर – बांसावाला बाजार की गली नंबर-4 में फायरिंग की सूचना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी 112 हेल्पलाइन के माध्यम से पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम और संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

पीड़ित परिवार की बुजुर्ग महिला और स्थानीय युवाओं ने आरोप लगाया कि इलाके में लंबे समय से जुआ, सट्टा और कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बिक्री जैसी गतिविधियां चल रही हैं। उनका कहना है कि गली में शराब पीने और अन्य गतिविधियों का विरोध करने पर करीब 10 लोगों ने उनके बेटों को घेर लिया। आरोप है कि इसी दौरान करीब चार राउंड फायरिंग की गई और आरोपी मौके से फरार हो गए।

स्थानीय लोगों ने दावा किया कि इन गतिविधियों को लेकर पहले भी पुलिस थाने में लिखित शिकायतें दी गई थीं। उनका आरोप है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण आरोपियों के हौसले बढ़े। परिवार ने मंदिर परिसर में दुकानों को हटाने और निर्माण कार्य को लेकर चल रहे विवाद को भी घटना से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि बाहर से कुछ युवकों को बुलाकर हमला कराया गया।

बताया गया कि घटना के बाद कथित हमलावर अपनी एक्टिवा और मोटरसाइकिल मौके पर ही छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर उनके मालिकों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, 112 से सूचना मिलने के बाद टीम तुरंत मौके पर पहुंची थी। शुरुआती जांच में किसी व्यक्ति के गोली लगने, घायल होने या धारदार हथियार से चोट लगने की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों पक्षों को थाने बुलाकर उनके विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

पुलिस ने प्रभावित परिवार से कहा है कि यदि घटनास्थल से कोई खाली कारतूस या अन्य साक्ष्य मिलता है तो उसे जांच टीम को उपलब्ध कराया जाए। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में मंदिर अध्यक्ष के चुनाव, आपसी विवाद और मंदिर की जमीन पर दुकानों के निर्माण को लेकर पुरानी रंजिश की बात सामने आ रही है। मंदिर ट्रस्ट और संपत्ति से जुड़े कानूनी पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि थाने के रिकॉर्ड में जुआ या सट्टे से संबंधित कोई पिछली लिखित शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, घटना के बाद लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जबकि मौके से मिली गाड़ियों के आधार पर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

पुलिस ने कहा है कि जांच में तथ्य सामने आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


बिग बॉस 20 में मिड-वीक एविक्शन ने चौंकाया, रीति तिवारी हुई घर से बेघर

रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ में इन दिनों लगातार नए मोड़ देखने को मिल रहे हैं। शो आगे बढ़ने के साथ कंटेस्टेंट्स के बीच मुकाबला भी तेज होता जा रहा है। इसी बीच मेकर्स ने मिड-वीक एविक्शन का ऐलान कर दर्शकों को चौंका दिया। इस फैसले के बाद एक कंटेस्टेंट का बिग बॉस के घर का सफर अचानक खत्म हो गया।

कौन हुआ ‘बिग बॉस 20’ से बाहर?

मिड-वीक एविक्शन के तहत मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी को शो से बाहर कर दिया गया। उनका एविक्शन ऐसे समय हुआ है, जब हाल ही में वीकेंड का वार के दौरान सलमान खान ने उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठाए थे और शो में उनके योगदान पर भी चर्चा की थी।

दरअसल, लेटेस्ट एपिसोड में माही विज, यंग और उदिति सिंह को कैप्टेंसी टास्क के लिए चुना गया। टास्क से पहले तीनों को कन्फेशन रूम में बुलाया गया, जहां उनसे नॉमिनेटेड कंटेस्टेंट्स में से उस सदस्य का नाम बताने को कहा गया, जिसका गेम में योगदान सबसे कम रहा है।

माही विज ने मैरी कॉम का नाम लिया, जबकि यंग ने अमन गांधी को चुना। वहीं, उदिति सिंह ने रीति तिवारी का नाम लिया। बाद में दोनों अन्य कंटेस्टेंट्स ने भी उदिति की राय से सहमति जताई। उदिति ने रीति का नाम लेने की वजह बताते हुए कहा कि उनके लिए रीति की पर्सनैलिटी को समझ पाना मुश्किल रहा है।

काजी के साथ विवाद के बाद चर्चा में आई थीं रीति

रीति तिवारी इससे पहले एक डिस बैटल टास्क के दौरान काजी के साथ विवाद को लेकर सुर्खियों में आई थीं। इस दौरान दोनों के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी। रीति ने काजी को लेकर नाराजगी जाहिर की थी और उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल भी किया था।

इसके बाद वीकेंड का वार में सलमान खान ने भी रीति के व्यवहार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से ही रीति का गेम और शो में उनका योगदान चर्चा का विषय बना हुआ था।

रीति के एविक्शन पर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

रीति तिवारी के मिड-वीक एविक्शन के बाद सोशल मीडिया पर दर्शकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ दर्शकों ने उनके एविक्शन को सही बताया और कहा कि वह शो में अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पा रही थीं। वहीं, कुछ यूजर्स ने उनके अचानक बाहर होने पर सवाल भी उठाए।

कुछ दर्शकों का मानना है कि रीति धीरे-धीरे अपने गेम में सुधार कर रही थीं और उन्हें थोड़ा और समय मिलना चाहिए था। हालांकि, शो के नियमों के मुताबिक कंटेस्टेंट्स के लिए गेम में सक्रिय भागीदारी बनाए रखना अहम माना जाता है।

क्या सीक्रेट रूम में जाएंगी रीति?

रीति के एविक्शन के बाद अब एक और सवाल उठने लगा है कि क्या वह वास्तव में शो से बाहर हो चुकी हैं या फिर मेकर्स ने उनके लिए कोई नया ट्विस्ट तैयार किया है। सोशल मीडिया पर कुछ दर्शक कयास लगा रहे हैं कि रीति को सीधे घर से बाहर भेजने के बजाय सीक्रेट रूम में रखा जा सकता है।

फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अब आने वाले एपिसोड में ही साफ होगा कि रीति तिवारी का ‘बिग बॉस 20’ का सफर यहीं खत्म हुआ है या मेकर्स उनके लिए कोई नया ट्विस्ट लेकर आने वाले हैं।

(साभार)


जन्मदिन पर लवलीना ने रचा इतिहास, चीन की मुक्केबाज को 5-0 से हराकर जीता स्वर्ण पदक

मैरी कॉम के बाद लवलीना का जलवा, 12 साल बाद भारत को मिला महिला बॉक्सिंग में एशियाड गोल्ड

नई दिल्ली। भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन के लिए 2 अक्टूबर का दिन दोहरी खुशियां लेकर आया। अपने 29वें जन्मदिन पर उन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में लवलीना ने चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने न केवल अपने एशियाई खेलों के पदकों का रंग बदला, बल्कि इस भार वर्ग में भारत को पहली बार स्वर्ण पदक भी दिलाया।

फाइनल में लवलीना का शानदार प्रदर्शन, चीन की मुक्केबाज को नहीं दिया मौका

स्वर्ण पदक के मुकाबले में लवलीना का सामना चीन की बाओ जियी से हुआ। दोनों मुक्केबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। बाओ ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया, लेकिन लवलीना ने धैर्य और सूझबूझ के साथ उनका सामना किया।

भारतीय मुक्केबाज ने अपनी रणनीति के मुताबिक दूरी बनाए रखी और सही समय पर सटीक पंच लगाए। उन्होंने चीनी मुक्केबाज के आक्रमण से बचते हुए मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत की। आखिरकार पांचों जजों ने लवलीना के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्होंने 5-0 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक हासिल कर लिया।

जन्मदिन पर मिला करियर का यादगार तोहफा

2 अक्टूबर 1997 को असम में जन्मीं लवलीना के लिए इस बार जन्मदिन बेहद खास बन गया। 29 साल की उम्र में उन्होंने एशियाई खेलों का पहला स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली।

इससे पहले 2022 में आयोजित हांगझोउ एशियाई खेलों में लवलीना ने रजत पदक जीता था। अब 2026 के आइची-नागोया एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने पिछले प्रदर्शन को और बेहतर कर लिया है। वह लगातार दो एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज भी बनीं।

75 किलोग्राम भार वर्ग में भारत को पहली बार मिला स्वर्ण

लवलीना की इस जीत ने भारतीय महिला मुक्केबाजी के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग में भारत को एशियाई खेलों में पहली बार स्वर्ण पदक मिला है।

इससे पहले इस भार वर्ग में भारतीय मुक्केबाजों ने कांस्य और रजत पदक जीते थे। वर्ष 2010 में ग्वांगझू एशियाई खेलों में कविता गोयत ने कांस्य पदक हासिल किया था। इसके बाद 2014 में इंचियोन में पूजा रानी ने कांस्य पदक जीता। 2022 के हांगझोउ एशियाई खेलों में लवलीना ने रजत पदक अपने नाम किया था। अब 2026 में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर भारत का इंतजार खत्म कर दिया।

महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में भारत के पदक

वर्ष एशियाई खेल खिलाड़ी पदक
2010 ग्वांगझू कविता गोयत कांस्य
2014 इंचियोन पूजा रानी कांस्य
2022 हांगझोउ लवलीना बोरगोहेन रजत
2026 आइची-नागोया लवलीना बोरगोहेन स्वर्ण

मैरी कॉम के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज

लवलीना बोरगोहेन ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम के साथ अपना नाम दर्ज करा लिया है। भारत को महिला मुक्केबाजी में पहला एशियाड स्वर्ण पदक 2014 में मैरी कॉम ने दिलाया था। उन्होंने इंचियोन एशियाई खेलों में 51 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।

इसके बाद भारतीय महिला मुक्केबाजों को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक के लिए 12 साल का इंतजार करना पड़ा। लवलीना ने 2026 में 75 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण जीतकर इस इंतजार को खत्म किया। वह मैरी कॉम के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई हैं।

लवलीना की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि वह एशियाई खेलों में स्वर्ण और रजत दोनों पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बन गई हैं। मैरी कॉम ने भी एशियाई खेलों में दो पदक जीते थे, लेकिन उनके खाते में एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक है।

सेमीफाइनल में कजाखस्तान की मुक्केबाज को दी थी मात

फाइनल से पहले लवलीना को सेमीफाइनल में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। उनका मुकाबला कजाखस्तान की नताल्या बोगदानोवा से हुआ, जो 70 किलोग्राम भार वर्ग की विश्व चैंपियन रह चुकी हैं।

दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। शुरुआती दौर में संघर्ष करने के बाद लवलीना ने शानदार वापसी की और मुकाबले के अंतिम चरण में आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई।

सेमीफाइनल में जीत के साथ ही लवलीना लगातार दो एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई थीं। इसके बाद उन्होंने फाइनल में भी अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए चीन की बाओ जियी को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।

ओलंपिक पदक से विश्व चैंपियन बनने तक का सफर

लवलीना ने अपने करियर में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने 2018 और 2019 की विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते। इसके बाद टोक्यो ओलंपिक 2020 में महिलाओं के 69 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया।

इस उपलब्धि के साथ वह ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की तीसरी मुक्केबाज और मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं।

इसके बाद लवलीना ने 75 किलोग्राम भार वर्ग में अपना प्रदर्शन जारी रखा। वर्ष 2022 की एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। 2023 की विश्व चैंपियनशिप में भी वह स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं। इसी वर्ष हांगझोउ एशियाई खेलों में उन्होंने रजत पदक हासिल किया। 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी उनके खाते में रजत पदक आया।

लवलीना बोरगोहेन की प्रमुख उपलब्धियां

प्रतियोगिता वर्ष पदक भार वर्ग
विश्व चैंपियनशिप 2018 कांस्य 69 किग्रा
विश्व चैंपियनशिप 2019 कांस्य 69 किग्रा
टोक्यो ओलंपिक 2020 कांस्य 69 किग्रा
एशियाई चैंपियनशिप 2021 कांस्य वेल्टरवेट
एशियाई चैंपियनशिप 2022 स्वर्ण 75 किग्रा
एशियाई खेल 2022 रजत 75 किग्रा
विश्व चैंपियनशिप 2023 स्वर्ण 75 किग्रा
राष्ट्रमंडल खेल 2026 रजत 75 किग्रा
एशियाई खेल 2026 स्वर्ण 75 किग्रा

लवलीना को वर्ष 2020 में अर्जुन पुरस्कार और 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2022 में उन्हें असम पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) नियुक्त किया गया।

भारत की पदक तालिका में जुड़ा 12वां स्वर्ण

लवलीना के स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही एशियाई खेलों में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या 12 हो गई है। भारत ने अब तक कुल 70 पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें 12 स्वर्ण, 24 रजत और 34 कांस्य पदक शामिल हैं।

पदक तालिका में भारत सातवें स्थान पर है। भारतीय खिलाड़ियों ने तीरंदाजी, निशानेबाजी, एथलेटिक्स, कबड्डी और क्रिकेट समेत विभिन्न खेलों में पदक हासिल किए हैं। लवलीना के स्वर्ण ने भारतीय दल के पदकों की संख्या में एक और इजाफा किया है।


मुजफ्फरनगर कॉलेज में 12वीं के छात्र ने 10वीं के छात्र पर चलाई गोली, तमंचा-कारतूस के साथ गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर- मुजफ्फरनगर के श्री कुंद-कुंद जैन इंटर कॉलेज में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब 12वीं कक्षा के एक छात्र ने कथित तौर पर पुराने विवाद का बदला लेने के लिए 10वीं के छात्र पर तमंचे से फायर कर दिया। हालांकि, गोली की चपेट में आने से छात्र बाल-बाल बच गया। घटना के बाद आरोपी छात्र ने प्रधानाचार्य पर भी तमंचा तान दिया, लेकिन शिक्षकों ने उसे बातों में उलझाकर पकड़ लिया।

जानकारी के मुताबिक, 12वीं कक्षा का छात्र फीस जमा करने की बात कहकर कॉलेज पहुंचा था। उसके पास तमंचा और दो कारतूस थे। कॉलेज में पहुंचने के बाद वह 10वीं कक्षा के छात्र की क्लास में गया और उस पर फायरिंग कर दी। गोली चलने की आवाज से कक्षा में मौजूद छात्रों में दहशत फैल गई।

आवाज सुनकर प्रधानाचार्य अनुराग जैन और शिक्षक मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोपी छात्र को पकड़ने की कोशिश की तो उसने प्रधानाचार्य पर भी तमंचा तान दिया। छात्र ने कथित तौर पर बताया कि 10वीं के छात्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की थी। इसी विवाद का बदला लेने के लिए वह तमंचा लेकर आया था।

प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने छात्र को बातचीत में उलझाए रखा और मौका मिलते ही उसे पकड़ लिया। सूचना पर पुलिस टीम भी कॉलेज पहुंची और आरोपी छात्र को हिरासत में लेकर थाने ले गई। तलाशी के दौरान उसके पास से तमंचा और दो कारतूस बरामद किए गए।

प्रधानाचार्य के अनुसार, आरोपी छात्र कॉलेज में फीस जमा कराने की बात कहकर आया था, इसलिए किसी को उस पर संदेह नहीं हुआ। छात्रों के प्रवेश के बाद कॉलेज का मुख्य द्वार बंद कर दिया जाता है। इसी वजह से आरोपी छात्र को मौके से भागने का अवसर नहीं मिला।

बताया गया कि दो दिन पहले 10वीं कक्षा के छात्र और उसके साथियों ने आरोपी छात्र के साथ डंडे से मारपीट की थी। इससे पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। पुलिस के अनुसार, इसी पुराने विवाद को लेकर 12वीं के छात्र ने 10वीं के छात्र पर फायरिंग की। घटना में छात्र गोली लगने से बच गया।


पांच दिन से लापता युवक का ओबरा डैम में मिला शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

ओबरा- सोनभद्र के ओबरा में पांच दिन से लापता 24 वर्षीय युवक का शव गुरुवार शाम ओबरा डैम के पानी में मिला। शव पानी में उतराता देखकर मछली पकड़ने गए बच्चों ने ग्रामीणों को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाकर जांच शुरू की।

जुगैल थाना क्षेत्र के गोठानी गांव निवासी सुरेंद्र मिश्रा का बेटा हिमांशु मिश्रा 25 सितंबर से लापता था। घर से निकलने के कुछ समय बाद उसने अपनी मां को फोन किया था। बातचीत के दौरान उसने खुद को ओबरा डैम पर बताते हुए अपनी जिंदगी के अंतिम समय की बात कही थी। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया और वह घर वापस नहीं लौटा।

बेटे के लापता होने के बाद पिता ने उसी दिन जुगैल थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस के मुताबिक, गुमशुदगी दर्ज होने के बाद से ही हिमांशु की तलाश की जा रही थी।

इसी बीच गुरुवार शाम ओबरा डैम में मछली पकड़ने गए बच्चों की नजर पानी में उतराते शव पर पड़ी। जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।

परिजनों ने मामले में हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि शिकायत में कुछ लोगों के नाम भी दिए गए थे और आरोप लगाया गया था कि संबंधित लोग हिमांशु को जान से मारने की धमकी दे रहे थे।

पुलिस का कहना है कि फिलहाल मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण का पता चल सकेगा। जुगैल थाना पुलिस ने बताया कि परिजनों की शिकायत और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


केजीएमयू के नर्सिंग अधीक्षक के लापता होने की जांच में नया खुलासा, घाघरा नदी में तलाश

लखनऊ- लखनऊ में केजीएमयू के आर्थोपेडिक विभाग के नर्सिंग अधीक्षक पवन कुमार गर्ग के लापता होने के मामले की जांच में पुलिस को अहम जानकारी मिली है। जांच के मुताबिक, 27 सितंबर की रात पवन अपने मित्र सचिन के साथ कार से इटौंजा की तरफ गए थे। इटौंजा टोल प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज में उनकी कार टोल पार करती नजर आई है।

पुलिस के अनुसार, इसके बाद दोनों लुधौली गांव में कुछ परिचितों के साथ शराब पार्टी में पहुंचे। यहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ और मारपीट में पवन और सचिन के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब दोनों की तलाश सीतापुर-बहराइच सीमा के पास घाघरा नदी में कर रही है।

मड़ियांव के केशव नगर निवासी पवन 27 सितंबर की रात घर से कार लेकर निकले थे। देर रात तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल बंद मिलने के बाद 29 सितंबर को मड़ियांव थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। जांच के दौरान पुलिस को कार के लखनऊ-सीतापुर मार्ग की ओर जाने की जानकारी मिली।

इटौंजा टोल प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज में कार चला रहे व्यक्ति का चेहरा साफ नहीं दिखाई दे रहा है। हालांकि पुलिस ने उसके कपड़ों का मिलान पवन के कपड़ों से किया है। फुटेज में चालक के बगल वाली सीट पर एक अन्य युवक भी बैठा नजर आ रहा है।

मंगलवार को पवन की कार सीतापुर के कमलापुर क्षेत्र में जयरामपुर मार्ग पर चदेहरा बाजार के पास लावारिस हालत में मिली। पुलिस ने मामले में कुछ संदिग्धों से पूछताछ की। पूछताछ में सामने आया कि 27 सितंबर की रात पवन और सचिन के साथ शराब पार्टी हुई थी।

पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान विवाद के बाद दोनों के साथ मारपीट की गई और उन्हें गंभीर हालत में कार में छिपाया गया। आरोप है कि अगले दिन दोनों को सीतापुर-बहराइच सीमा के पास नदी में फेंक दिया गया। पुलिस ने कार बरामद कर ली है और अब घाघरा नदी में दोनों की तलाश के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। तलाशी अभियान में फायर विभाग और एसडीआरएफ की भी मदद ली जा रही है।


महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर मुख्यमंत्री ने किया भावपूर्ण स्मरण

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनके चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और मानवता के सिद्धांत सदैव समाज को प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी शांति, सद्भाव और सामाजिक समरसता के लिए प्रासंगिक हैं।

मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का स्मरण करते हुए कहा कि उनका सादगीपूर्ण जीवन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका ‘जय जवान, जय किसान’ का उद्घोष देश के जवानों और किसानों के सम्मान तथा राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सदैव रेखांकित करता रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों महान विभूतियों के आदर्श हमें राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।


मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि

राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान से ही उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण संभव हुआ- मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को शहीद स्थल कचहरी परिसर, देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी शहीदों की पुण्य स्मृति में उनके चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि उनके संघर्ष, त्याग और बलिदान से ही अलग उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण संभव हो सका। राज्य निर्माण में उनके योगदान को सदैव स्सीमरण रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों एवं शहीद आंदोलनकारियों के परिजनों के सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का निर्माण ही शहीद आंदोलनकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास भी मौजूद थे।


देहरादून में श्रद्धा एवं हर्षाेल्लास के साथ मनाई गई गांधी जयंती और शास्त्री जयंती

गांधी और शास्त्री के आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

सत्य, अहिंसा, सादगी और स्वच्छता के संदेश को आत्मसात करने का आह्वान

देहरादून। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती जनपदभर में श्रद्धा एवं हर्षाेल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर जिला कार्यालय परिसर में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में बापू के प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ का सामूहिक गायन किया गया। इस दौरान दोनों महापुरुषों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।

अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा ने महात्मा गांधी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बापू ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर न केवल देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान दिया, बल्कि संपूर्ण मानवता को प्रेम, सद्भाव और नैतिकता का संदेश भी दिया। उनका सादा जीवन और उच्च विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों का अनुसरण कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

अपर जिलाधिकारी स्मृता परमार ने कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसा को अपना मूल मंत्र बनाकर स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण और उनके जीवन मूल्य सदैव प्रेरणा देते रहेंगे। वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी ने स्वच्छता के प्रति गांधीजी की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि बापू स्वच्छ परिवेश और स्वस्थ समाज के पक्षधर थे। उन्होंने लोगों को अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान समय में भी स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए गांधीजी के विचार प्रासंगिक हैं।

इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को भी याद किया गया। उनकी सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण को अनुकरणीय बताते हुए उनके प्रसिद्ध नारे ‘जय जवान, जय किसान’ के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम में एसडीएम रविन्द्र ज्वांठा सहित कलेक्ट्रेट परिसर के तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


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