Tuesday, April 28th, 2026

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मामूली कहासुनी ने लिया खौफनाक रूप, किशोरों ने मिलकर युवक पर किया जानलेवा हमला

Daily Archives: 28/04/2026

मामूली कहासुनी ने लिया खौफनाक रूप, किशोरों ने मिलकर युवक पर किया जानलेवा हमला

तीन नाबालिग हिरासत

दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले में एक मामूली कहासुनी ने खौफनाक रूप ले लिया, जहां कुछ किशोरों ने मिलकर एक युवक पर जानलेवा हमला कर दिया। चाकू से किए गए इस हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है।

दरभंगा के मनीगाछी थाना क्षेत्र स्थित लहटा गांव में सोमवार रात एक छोटी सी बहस हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि तीन किशोरों ने मिलकर एक युवक पर चाकू से हमला कर दिया। हमले के दौरान चाकू का एक हिस्सा टूटकर युवक की गर्दन में ही फंस गया, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई।

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने घायल युवक को बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देखते हुए उसे दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) रेफर कर दिया। फिलहाल युवक का इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन नाबालिगों को हिरासत में ले लिया। उनसे पूछताछ की जा रही है, ताकि घटना के पूरे कारणों का पता लगाया जा सके। गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

घायल युवक रोशन कुमार ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उसका पहले से गांव के एक लड़के के साथ विवाद चल रहा था और उसे जान से मारने की धमकी भी मिली थी। सोमवार शाम जब वह तालाब के पास टहल रहा था, तभी आरोपी अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा और उस पर हमला कर दिया।

मारपीट के दौरान आरोपियों ने चाकू से वार किया, जिससे चाकू का टुकड़ा उसकी गर्दन में फंस गया और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा। इसके बाद परिजन और ग्रामीण उसे तुरंत अस्पताल लेकर गए।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। गांव में शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बैठक भी की जा रही है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।


एक ही परिवार के तीन लोगों की संदिग्ध हालात में मौत, घर के अंदर मिले शव

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और रहस्यमयी घटना सामने आई है, जहां एक ही परिवार के तीन लोगों की संदिग्ध हालात में मौत ने पूरे इलाके को दहला दिया। मां और उसके दो मासूम बच्चों के शव घर के अंदर एक साथ मिलने से गांव में भय और शोक का माहौल है।

मुजफ्फरपुर के कांटी थाना क्षेत्र स्थित बाझिला गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक घर के कमरे से महिला और उसके दो बच्चों के शव बरामद हुए। तीनों के शव एक ही रस्सी से बंधे हुए पाए गए, जिससे घटना और भी संदिग्ध बन गई है।

घटना की खबर मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजन मौके पर पहुंचे तो चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में जुट गए। पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल देखा गया।

परिजनों ने इस घटना को हत्या करार देते हुए जमीन विवाद को इसकी मुख्य वजह बताया है। उनका आरोप है कि पुराने पारिवारिक विवाद के चलते पट्टीदारों ने इस वारदात को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि जमीन को लेकर पहले भी दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ था।

मृतका के पति संतोष कुमार साह ने बताया कि वह काम के सिलसिले में घर से बाहर गए हुए थे। जब सुबह लौटे तो घर का दरवाजा बाहर से बंद मिला। शक होने पर दरवाजा खोलकर अंदर पहुंचे तो पत्नी और बच्चों के शव देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने सीधे तौर पर अपने रिश्तेदारों पर हत्या का आरोप लगाया है।

वहीं, परिवार की एक अन्य महिला सदस्य ने भी घटना को हत्या बताते हुए कहा कि सुबह उनका कमरा भी बाहर से बंद था। बाहर निकलने पर उन्होंने तीनों को मृत हालत में देखा और आरोपियों के घर में घुसकर वारदात करने की आशंका जताई।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है, ताकि हर पहलू की बारीकी से जांच की जा सके।

पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और घटना के पीछे की सच्चाई का पता लगाने में जुटी है।


शंभू ब्लास्ट केस सुलझा, ISI लिंक वाले आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़; चार गिरफ्तार

पटियाला – पटियाला पुलिस ने शंभू-अंबाला रेलवे मार्ग पर हुए बम धमाके की गुत्थी सुलझाने का दावा करते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी पंजाब के प्रमुख रेलवे मार्गों और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सोमवार रात रेलवे ट्रैक पर हुए धमाके के पीछे भी इसी मॉड्यूल का हाथ था। आरोपियों के कब्जे से पिस्तौल, जिंदा कारतूस, आईईडी बनाने की सामग्री और तकनीकी उपकरण बरामद किए गए हैं।

डीआईजी और एसएसपी ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह मॉड्यूल कथित तौर पर विदेश में बैठे हैंडलरों और पाकिस्तान स्थित नेटवर्क के इशारे पर काम कर रहा था। पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई कर संभावित बड़ी आतंकी घटनाओं को टाल दिया गया। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और विदेशी फंडिंग, आतंकी नेटवर्क व अन्य सहयोगियों के कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं।


मंत्री गणेश जोशी ने रिटायर्ड हवलदार उदय सिंह थापा को दी 100वें जन्मदिवस की शुभकामनाएं

देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून के जोहड़ी गांव स्थित कुठालवाली पहुंचकर 58 गोरखा राईफल्स के रिटायर्ड हवलदार उदय सिंह थापा को उनके 100वें जन्मदिवस के अवसर पर शुभकामनाएं दीं और उन्हें सम्मानित किया।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि हवलदार उदय सिंह थापा का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने देश की सेवा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। मंत्री ने कहा कि ऐसे वीर सैनिकों के त्याग और समर्पण के कारण ही आज देश सुरक्षित और सशक्त है। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करते हुए कहा कि समाज को उनके अनुभवों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

इस अवसर पर भाजपा महानगर उपाध्यक्ष संध्या थापा सहित परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


चारधाम यात्रा पर राजनीति न करें- सीएम धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान, कहा कि इस समय हमारे प्रदेश में चारधाम यात्रा चल रही है। लेकिन कुछ लोग रील बनाकर इसे राजनीति की भेंट चढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होने ऐसे लोगो से कहा कि वो सरकार का विरोध कर सकते हैं, बीकेटीसी का भी विरोध हो सकता है, लेकिन हमारी पवित्र चारधाम यात्रा का विरोध न करें। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम तो महादेव का स्थल है, सरकार यात्रा को हर तरह से सकुशल सम्पन्न कराने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा हमारी सामुहिक आस्था की कठिन यात्रा है। ये यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी के लिए भी लाइफलाइन का काम करती है। इसलिए नकारात्मक बातों से चारधाम यात्रा का विरोध न करें, बल्कि यात्रा और यात्रियों को प्रोत्साहन प्रदान करें।

प्रदेश में गैस संकट नहीं

मुख्यमंत्री ने गैस को लेकर उठाए गए प्रश्न पर स्पष्ट किया प्रदेश में गैस किल्लल नहीं है, इस बारे में उनकी एक दिन पहले ही केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से मुलाकात हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस समय पश्चिम एशिया में युद्ध चल रहा है। से युद्ध मात्र भारत की चुनौती नहीं है बल्कि पूरी दुनिया इससे प्रभावित है। लेकिन हमारे पास प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व है। जिनके नेतृत्व में दुनिया पर छाए युद्ध के बादल के बीच भारत में उत्सव मनाए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना के समय भी दुनिया ने भारत को लेकर ऐसी ही आशंका व्यक्त की थी कि भारत इस महामारी से नहीं संभल पाएगा। लेकिन बाद में भारत ने ना सिर्फ महामारी पर सबसे पहले अंकुश प्राप्त किया, बल्कि 100 से अधिक देशों को वैक्सीन भिजवाकर उन्हें भी इस संकट से बाहर निकालने का काम किया।


भाजपा सरकार महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर पूरी तरह विफल साबित हुई- यशपाल आर्य

उत्तराखण्ड विधानसभा के विशेष सत्र से पहले कांग्रेस का प्रदर्शन

देहरादून। विधानसभा के विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को महिला आरक्षण कानून 2023 की मूल भावना का सम्मान करते हुए वर्ष 2027 के उत्तराखण्ड विधानसभा चुनावों तथा 2029 के लोकसभा चुनावों में मौजूदा सीटों की संख्या के 33% पर महिलाओं को आरक्षण तत्काल लागू करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि इसके लिए केंद्र सरकार को संसद के दोनों सदनों में दोबारा संविधान संशोधन विधेयक लाना पड़े, तो बिना देरी के विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार जानबूझकर इस ऐतिहासिक कानून को लागू करने में टालमटोल कर रही है, जिससे यह साफ है कि उसकी नीयत महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि उन्हें इंतजार में रखने की है।

महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर कांग्रेस विधान मंडल दल ने आज विशेष सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा के प्रवेश द्वार पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने एक स्वर में महिला आरक्षण के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की भी मांग उठाई और अंकिता भंडारी सहित सभी पीड़ित बेटियों को न्याय दिलाने की मांग को दोहराया।

नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में कांग्रेस के सभी विधायकों के हस्ताक्षरों के साथ महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के अनुरूप 33% आरक्षण लागू करने का संकल्प प्रस्तुत किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस संकल्प को स्वीकार न किया जाना लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकारों के साथ खुला अन्याय है। यह साफ संकेत है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से भी डर रही है।

यशपाल आर्य ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित होने के बावजूद उसकी अधिसूचना तीन साल तक रोके रखना और फिर 16 अप्रैल 2026 को जारी करना, सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि आखिर किन दबावों या मजबूरियों के चलते इस कानून को लागू करने में इतनी देरी की गई।

उन्होंने आगे कहा कि 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में जिन तीन विधेयकों को प्रस्तुत किया गया, यदि वे पारित हो जाते और लोकसभा की सीटों में 50% की वृद्धि होती, तो संसद में उत्तराखण्ड की हिस्सेदारी 0.93% से घटकर मात्र 0.72% रह जाती। यह राज्य के अधिकारों पर सीधा प्रहार होता। उन्होंने सवाल उठाया कि उस दिन उत्तराखण्ड के भाजपा सांसद चुप क्यों रहे? क्या वे राज्य के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल नहीं हुए?

नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि ये विधेयक लागू होते, तो न केवल संसद में बल्कि उत्तराखण्ड विधानसभा में भी पर्वतीय क्षेत्रों की सीटों में भारी कमी आ जाती, जिससे पहाड़ की आवाज को दबाने की साजिश साफ नजर आती है।

महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की महिलाएं घर, सड़क और जंगल—कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। अंकिता भंडारी प्रकरण में आज तक वीआईपी आरोपी का खुलासा नहीं होना सरकार की नाकामी और मिलीभगत को उजागर करता है। चमोली, हरिद्वार और चंपावत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई मामलों में आरोपियों का संबंध सत्ता पक्ष से रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में जंगली जानवरों के हमलों में लगातार महिलाओं की जान जा रही है, लेकिन सरकार इस पर भी ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है।

नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि महिलाओं को केवल आरक्षण का वादा नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और न्याय चाहिए। यदि सरकार जल्द ही महिला आरक्षण को लागू करने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाती है, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक व्यापक आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी।


महिला आरक्षण पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा विपक्ष- सीएम धामी

‘33% आरक्षण से बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी’, सीएम धामी ने केंद्र के प्रयासों का किया समर्थन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र – ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सदन के सामने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन बिल को यथाशीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सर्वसम्मत संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही उत्तराखंड में नारी शक्ति का प्रतीक गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन, कमला पंत जैसी महिलाओं को नमन करने के साथ किया। मुख्यमंत्री ने सदन से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे उपायों का समर्थन करने में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी मानकर उसकी आराधना की जाती है। माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में हम नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान के स्वरूप का वंदन करते हैं। उन्होने कहा कि भारत के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले से लेकर अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला तक नारी शक्ति के असंख्य प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिलते हैं। नारी शक्ति अब केवल ’’सहभागिता’’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ’’नेतृत्व’’ की भूमिका निभा रही है। चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता हो, क्रिकेट का विश्व कप जीतना हो, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास-आउट होना हो, या फिर सेना और वायु सेना में अग्रिम पंक्ति के मोर्चों पर काम करना हो, ये सब नारी शक्ति के उदाहरण हैं। इसी तरह उत्तराखंड भी अदम्य साहस की प्रतीक तीलू रौतेली, उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई कही जाने वाली रानी जिया रानी और चिपको आंदोलन की अग्रदूत गौरा देवी नारी शक्ति का उदाहरण हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम युगांतकारी कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नारी शक्ति के सामर्थ्य को समझते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए थे। इस ऐतिहासिक अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। ये इन सदनों में केवल मातृशक्ति की संख्या बढ़ाने का प्रयास भर नहीं था, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी कदम था। प्रधानमंत्री ने इस विराट संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए समस्त देशवासियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों से भी सहयोग और समर्थन का आह्वान किया था। इसी कड़ी में अगले लोकसभा चुनावों तक देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक प्रयास किया। परंतु विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोकसभा में संख्या बल के कारण जब बिल पारित नहीं हो पाया तो, विपक्षी दल के नेता तालियाँ बजा रहे थे। उस दृश्य को देखकर महाभारत की वो सभा याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।

विपक्ष कर रहा भ्रम फैलाने का प्रयास

उन्होंने कहा कि विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि लोकसभा में ही गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, इसीलिए सीटें बढ़ाने का प्राविधान बिल में रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के बारे में कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पर जब पहली बार किसी ने सच्चे मन से महिलाओं के हित में कार्य करने का प्रयास किया तो उसे भी नहीं करने दिया। जबकि आदरणीय प्रधानमंत्री लोकसभा में ये स्पष्ट कह चुके थे की यदि ये बिल पास हो जाएगा तो इसका पूरा श्रेय वो विपक्ष को देने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब देश की मातृशक्ति पूरी तरह से समझ चुकी है कि कौन उनके अधिकारों के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा है।

केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में शपथ लेने के साथ ही नारी सशक्तिकरण को शासन की प्राथमिकता में रखकर कार्य करना प्रारम्भ कर दिया था। यही कारण है कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण हेतु 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2015 में शुरू हुए “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान से पिछले 11 वर्षों में लिंगानुपात और बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय परिवर्तन आए हैं। पिछले 11 वर्षों में महिला-पुरुष लिंगानुपात में 12 अंकों की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में लड़कियों का कुल नामांकन अनुपात 3 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ा है। इतना ही नहीं, बीते 11 वर्षों में संस्थागत प्रसव 61 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गया है। आज “सुकन्या समृद्धि योजना” के अंतर्गत बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 8.2 प्रतिशत की उच्च ब्याज दर के साथ टैक्स-फ्री बचत की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस योजना के तहत अब तक 4 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं और 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है।

तीन तलाक से दिलाई मुक्ति

वहीं “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना” के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, “स्वच्छ भारत मिशन” के द्वारा घर-घर शौचालयों का निर्माण कर महिलाओं को गरिमा और सुरक्षा प्रदान की गई है। जिससे खुले में शौच की समस्या से मुक्ति मिली और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सम्मान दोनों की रक्षा हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से कानूनी संरक्षण प्रदान करने का काम किया है। जबकि पूर्व में सरकारों ने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट तक बदलने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प का ही परिणाम है कि आज देश के सामान्य घरों की बेटियां रसोई से रायसीना हिल तक का सफर तय कर रही है। राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू से लेकर ‘’ऑपरेशन सिंदूर’’ में अग्रणी भूमिका निभाने वाली विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी इसका उदाहरण हैं।

उत्तराखंड को मिलता फायदा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुछ लोग उत्तराखंड में भी महिला आरक्षण पर वही झूठ और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 105 हो सकती थी, जिसमें से 35 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती थी। इसी तरह सांसदों कि संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो जाती, इससे हर किसी का फायदा ही था, फिर भी विपक्ष ने बिल पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य घरों से महिलाएं राजनीति में आ जाएंगी तो कुछ दलों की वंशवादी राजनीति की दुकानें बंद हो जाएंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी के पहले मंत्रीमंडल और राजीव गांधी की कैबिनेट में केवल एक- एक महिला मंत्री थीं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा मंत्रिमंडल में 7 महिला मंत्री हैं।

प्रदेश में मजबूत हो रही मातृशक्ति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इस वर्ष जेंडर बजट के अंतर्गत लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश सरकार द्वारा ’’उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’’ के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है।

इसके साथ ही, ’’सशक्त बहना उत्सव योजना’’ और ’‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’’ के माध्यम से हमने राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर और शक्ति प्रदान करने का काम किया है। सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण और ‘’एकल महिला स्वरोजगार योजना’’ के माध्यम से महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान कर रही है। साथ ही साथ ’’मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” के अंतर्गत महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक बहनों ने “लखपति दीदी’’ बनकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में इतिहास रचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है, वहीं, सहकारी समितियों में भी आज महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। खेल के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लोहाघाट में लगभग 256 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।

एक दिन जरूर पूरा होगा संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यूसीसी से उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। अब यूसीसी की मांग पूरे देश में उठ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने धारा 370 हटाने, अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर निर्माण और दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारने का काम किया है। उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य भी अवश्य करेगी।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक और स्पष्ट रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।


हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिजली उत्पादन पर टैक्स नहीं लगा सकती राज्य सरकार

बिजली उत्पादन पर टैक्स का अधिकार केंद्र का, उत्तराखंड सरकार को झटका

देहरादून। उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाओं से विद्युत उत्पादन पर टैक्स लगाए जाने को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। उच्च न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि बिजली उत्पादन पर टैक्स लगाने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जलविद्युत कंपनियों की ओर से दायर विशेष अपीलों पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि “जनरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी” पर टैक्स लगाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, न कि राज्य सरकार के पास। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स वैध नहीं माना जा सकता।

इस मामले में पहले एकलपीठ ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला देते हुए जलविद्युत कंपनियों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने उस समय माना था कि विधायिका को इस तरह का कानून बनाने का अधिकार है और यह टैक्स पानी के उपयोग पर नहीं बल्कि उससे होने वाले बिजली उत्पादन पर आधारित है।

हालांकि, इस फैसले को विभिन्न हाइड्रो पावर कंपनियों ने चुनौती दी और खंडपीठ में विशेष अपील दाखिल की। सुनवाई के दौरान जजों के बीच मतभेद सामने आने पर मामला पुनः विचार के लिए न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ को भेजा गया। अब उनकी अदालत ने कंपनियों के पक्ष में फैसला सुनाया है।

मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो राज्य गठन के बाद उत्तराखंड सरकार ने नदियों पर जलविद्युत परियोजनाएं स्थापित करने के लिए निजी और सरकारी कंपनियों को आमंत्रित किया था। समझौते के तहत कुल उत्पादन की 12 प्रतिशत बिजली राज्य को मुफ्त दी जानी थी, जबकि बाकी बिजली उत्तर प्रदेश को बेची जानी थी।

बाद में वर्ष 2012 में राज्य सरकार ने ‘उत्तराखंड वाटर टैक्स ऑन इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन एक्ट’ लागू कर जलविद्युत परियोजनाओं पर उनकी क्षमता के अनुसार 2 से 10 पैसे प्रति यूनिट तक टैक्स लगा दिया। इस फैसले के खिलाफ अलकनंदा पावर प्रोजेक्ट, टीएचडीसी, एनएचपीसी समेत कई कंपनियों ने अदालत का रुख किया था।

ताजा फैसले के बाद राज्य में जलविद्युत परियोजनाओं और सरकार के बीच टैक्स को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है और इसका असर भविष्य की ऊर्जा नीतियों पर भी पड़ सकता है।


सैर के दौरान अज्ञात बाइक सवार हमलावरों ने बरसाईं गोलियां, दो की मौत; एक गंभीर घायल

पुलिस जिला बटाला के अधीन आते गांव भोमा में सोमवार देर रात सैर कर रहे तीन लोगों पर मोटरसाइकिल सवार अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई और एक गंभीर घायल हो गया जिसका इलाज अस्पताल में किया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान कश्मीर सिंह और युगराज सिंह के रूप में हुई है। रात को सूचना मिलते ही बटाला पुलिस के आला अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया।

एसएसपी बटाला मेहताब सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि इस घटना का कोई भी संबंध किसी रंगदारी के मामले से नहीं है। पुलिस जांच पड़ताल में जुटी है। आसपास के सीसीटीवी कैमरा को चेक किया जा रहा है। जल्द ही इस मामले को ट्रेस कर आरोपियों को गिरफ्तार लिया जाएगा।


अबूबशहर नहर में अज्ञात महिला का शव मिलने से सनसनी, जांच में जुटी पुलिस

डबवाली- गांव अबूबशहर के पास राजकनाल नहर में अज्ञात महिला का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। मंगलवार सुबह राहगीरों ने नहर में शव तैरता देखा, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही चौटाला चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शव को बाहर निकलवाया।

घटना की सूचना पर सीन ऑफ क्राइम टीम ने भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस के मुताबिक मृतका की उम्र करीब 45 से 50 वर्ष के बीच प्रतीत हो रही है। महिला नीले रंग का सूट पहने हुई थी और उसके हाथों में चूड़ियां मिली हैं। शुरुआती जांच में शव तीन से चार दिन पुराना बताया जा रहा है, जिससे मामला संदिग्ध माना जा रहा है।

पुलिस ने शव को पहचान के लिए 72 घंटे तक नागरिक अस्पताल के शवगृह में रखवाया है। आसपास के क्षेत्रों में महिला की शिनाख्त कराने की कोशिश की जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और महिला की मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी है।


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