Thursday, April 9th, 2026

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पालमपुर में वोल्वो बस पर हमला, चालक-परिचालक गंभीर घायल,तीन आरोपियों गिरफ़्तारी

Daily Archives: 09/04/2026

पालमपुर में वोल्वो बस पर हमला, चालक-परिचालक गंभीर घायल,तीन आरोपियों गिरफ़्तारी

थुरल (कांगड़ा)। पालमपुर के पास थुरल इलाके में बुधवार रात एक गंभीर घटना हुई। बीड़ से दिल्ली जा रही वोल्वो बस को थार गाड़ी में सवार हमलावरों ने रोककर हमला कर दिया। इस हमले में बस चालक राज कुमार (48) और परिचालक प्रवेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए।

सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने बस रोककर दोनों पर चाकू से वार किए, जिससे उनके पेट और पीठ पर गहरे घाव आए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद टांडा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।

पुलिस ने मौके से चाकू, एक पिस्तौल और नशीला पदार्थ बरामद किया है। थार गाड़ी भी जब्त कर ली गई है। एएसपी कांगड़ा बीर बहादुर ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान बलविन्दर सिंह (45) निवासी पठानकोट, निशान पाल (46) निवासी होशियारपुर और अलीश (21) निवासी पठानकोट के रूप में हुई है।


प्लास्टिक स्ट्रॉ बन सकती है सेहत की दुश्मन, जानिए इसके नुकसान

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सुविधाजनक विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन कई बार यही सुविधाएं स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाती हैं। बाजार में मिलने वाले जूस और कोल्ड ड्रिंक्स के साथ इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक स्ट्रॉ भी ऐसा ही एक उदाहरण है, जो अनजाने में शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।

प्लास्टिक स्ट्रॉ देखने में भले ही साधारण और उपयोगी लगती हों, लेकिन इनमें मौजूद केमिकल्स धीरे-धीरे शरीर में प्रवेश कर स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार उपयोग से यह कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं।

हार्मोनल असंतुलन का खतरा
प्लास्टिक स्ट्रॉ में मौजूद बिस्फेनॉल-ए (BPA) जैसे तत्व शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। इससे थायरॉइड, प्रजनन क्षमता और अन्य हार्मोन से जुड़ी समस्याएं बढ़ने की आशंका रहती है।

दिल की सेहत और वजन पर असर
प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन शरीर के मेटाबोलिज्म को प्रभावित करते हैं, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, यह मोटापे की समस्या को भी बढ़ावा दे सकते हैं।

कैंसर का बढ़ता जोखिम
लंबे समय तक प्लास्टिक के संपर्क में रहने से शरीर में हानिकारक तत्व जमा हो सकते हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। खासकर महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

बच्चों पर अधिक प्रभाव
बच्चों का शरीर अधिक संवेदनशील होता है, इसलिए प्लास्टिक स्ट्रॉ के केमिकल्स उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं। उनकी इम्युनिटी पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

क्या करें बचाव के लिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्लास्टिक स्ट्रॉ के बजाय सुरक्षित विकल्प अपनाने की सलाह देते हैं। स्टेनलेस स्टील, कांच या बायोडिग्रेडेबल स्ट्रॉ बेहतर विकल्प हैं। इनके इस्तेमाल से न केवल स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)


मिशन मोड में मातृ मृत्यु दर घटाने की पहल, संस्थागत प्रसव और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे का फोकस- हर गर्भवती महिला तक समय पर पहुंचे स्वास्थ्य सेवाएं

देहरादून। उत्तराखंड सरकार मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा राज्य में मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करने के उद्देश्य से व्यापक रणनीति के तहत लगातार समीक्षा और सख्त मॉनिटरिंग की जा रही है। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे द्वारा बीते एक सप्ताह से राज्य के सभी जनपदों की गहन समीक्षा की जा रही है ताकि जमीनी स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

जमीनी स्तर की समीक्षा से तैयार हो रही रणनीति

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में पहली बार फील्ड स्तर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एएनएम को भी जोड़ा गया। बैठक में विशेष रूप से हरिद्वार और पौड़ी जनपद की एएनएम ने सहभागिता कर जमीनी अनुभव साझा किए और ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों की जानकारी दी।

बैठक के दौरान सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के अनुरूप मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। इसके लिए संस्थागत प्रसव को मजबूत बनाना, गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण एएनसी सेवाएं उपलब्ध कराना तथा प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

शून्य होम डिलीवरी का लक्ष्य

समीक्षा बैठक में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ टीबी उन्मूलन कार्यक्रम और PCPNDT अधिनियम के क्रियान्वयन की भी विस्तृत समीक्षा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में शून्य होम डिलीवरी और शून्य रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों को मिशन मोड में कार्य करना होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि जिन क्षेत्रों में घरों पर प्रसव की घटनाएं अधिक हैं, वहां जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और उप जिलाधिकारी स्तर पर विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्वयं फील्ड विजिट कर एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

गर्भवती महिलाओं की सटीक ट्रैकिंग पर जोर

बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की सटीक लाइन लिस्टिंग और EDD आधारित ट्रैकिंग अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही समयबद्ध कॉलिंग और फॉलो-अप के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी महिला स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रह जाए। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं के साथ विभागीय वाहनों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क और समयबद्ध पिकअप एवं ड्रॉप सुविधा को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए।

ANC जांच और आवश्यक परीक्षण अनिवार्य

समीक्षा के दौरान सभी गर्भवती महिलाओं का शीघ्र पंजीकरण सुनिश्चित करने और कम से कम चार एएनसी जांच कराने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही आवश्यक लैब परीक्षण और अल्ट्रासाउंड अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए गए।

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की 100 प्रतिशत HBsAg जांच सुनिश्चित की जाए तथा पॉजिटिव मामलों में HBIG की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान कर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उनकी नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।

एनीमिया नियंत्रण के लिए विशेष अभियान

बैठक में एनीमिया नियंत्रण को भी मातृ स्वास्थ्य सुधार का महत्वपूर्ण घटक बताया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं की नियमित ट्रैकिंग, समयबद्ध फॉलो-अप और आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि गंभीर एनीमिया के मामलों की विशेष निगरानी करते हुए तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाए, ताकि मातृ मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सके।

जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी पर बल

सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक IEC और IPC गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। आशा कार्यकर्ताओं को प्रत्येक माह प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं के साथ संवाद स्थापित करने और संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा गया।

टीबी उन्मूलन अभियान की समीक्षा

बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत राज्य के सभी हाई-रिस्क 4216 ग्रामों को अनिवार्य रूप से कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य शिविरों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अधिकतम टीबी स्क्रीनिंग की जाए तथा प्रत्येक चिकित्सालय की कुल ओपीडी का कम से कम 10 प्रतिशत टीबी स्क्रीनिंग के लिए रेफर किया जाए।

PCPNDT अधिनियम के सख्त अनुपालन के निर्देश

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने PCPNDT अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में न्यूनतम छह अनिवार्य बैठकें आयोजित की जाएं तथा प्रत्येक 90 दिनों में सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि लिंग निर्धारण से संबंधित अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए डिकॉय ऑपरेशन चलाए जाएं और सूचना देने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित तथा सम्मानित किया जाए।

वार रूम से हो रही रियल टाइम मॉनिटरिंग

राज्य स्तर पर स्थापित मातृ स्वास्थ्य वार रूम के माध्यम से प्रत्येक गर्भवती महिला विशेषकर उच्च जोखिम मामलों की रियल टाइम निगरानी की जा रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से केस आधारित ट्रैकिंग, त्वरित निर्णय और समयबद्ध हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में प्रभावी प्रगति हो रही है।

समयबद्ध और परिणामोन्मुख कार्ययोजना पर जोर

बैठक के अंत में सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट कहा कि राज्य में कोई भी गर्भवती महिला एएनसी सेवाओं, आवश्यक परीक्षणों और संस्थागत प्रसव से वंचित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक होम डिलीवरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी और सभी जनपदों को समयबद्ध तथा परिणामोन्मुख कार्ययोजना बनाकर तत्काल प्रभाव से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा।

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि उत्तराखंड सरकार मातृ स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, समय पर जांच और उच्च जोखिम मामलों की पहचान कर विशेषज्ञ निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसके प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

बैठक में निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सहायक निदेशक डॉ. अमलेश, सहायक निदेशक डॉ. उमा रावत, संबंधित जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित डॉ. नितिन अरोड़ा (सीनियर कंसल्टेंट) भी उपस्थित रहे।


मंत्री रेखा आर्या ने जन मिलन कार्यक्रम में सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं

सड़क, राशन कार्ड और आर्थिक सहायता की मांगों पर मंत्री ने दिया त्वरित समाधान का आश्वासन

अल्मोड़ा। सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के गांव कंडोलिया मनान स्थित देवी मंदिर में आयोजित जन मिलन कार्यक्रम में प्रदेश की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने प्रतिभाग कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं।

इस दौरान ग्रामीणों ने सड़क निर्माण, राशन कार्ड में नाम जोड़ने और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहायता दिलाने जैसी प्रमुख मांगें मंत्री के समक्ष रखीं। मंत्री रेखा आर्या ने कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान करते हुए शेष लंबित मामलों को शीघ्र निस्तारित करने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम में मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि ग्रामवासियों की भावना के अनुरूप सड़क निर्माण एवं अन्य विकास कार्यों के लिए विधायक निधि से 13.50 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान प्राथमिकता है।

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष सुंदर राणा, विधायक प्रतिनिधि भुवन जोशी, ग्राम प्रधान मनोज कुमार, क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय राम, मंडल महामंत्री कृष्णा भंडारी, पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख गोपाल खोलिया, महेश पांडे, प्रकाश पांडे, दीपक कुमार, अशोक कुमार, पंकज बरेली, दीवान, भूपाल मेहरा, कुंदन गिरी, श्याम सिंह रौतेला, प्रकाश नेगी, हिमांशु कोहली, प्रकाश बिष्ट, नवीन उप्रेती, भागवत राम, रमेश पांडे सहित अनेक लोग मौजूद रहे।


श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के 100 करोड़ से अधिक बकाया का भुगतान जल्द: समाज कल्याण मंत्री

कैबिनेट मंत्री खजान दास ने श्री दरबार साहिब में टेका मत्था

मंत्री ने दिया भरोसा, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के सहयोग की सराहना, सरकार ने हरसंभव मदद का दिया आश्वासन

 श्री दरबार साहिब द्वारा राजपुर स्थित माँ अम्बिका देवी मंदिर के भव्य जीर्णोद्धार कार्य की खुलकर सराहना की

श्री दरबार साहिब के सज्जादे गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज से लिया आशीर्वाद, शिष्टाचार भेंट की

देहरादून। राज्य सरकार जल्द ही विभिन्न अनुबंधित स्वास्थ्य योजनाओं की 100 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि का भुगतान श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को करेगी। समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने श्री दरबार साहिब में दर्शन के दौरान कहा कि जहां अन्य अस्पतालों ने आयुष्मान, गोल्डन कार्ड और ईएसआई योजनाएं बंद कर दीं, वहीं श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने निरंतर सेवाएं जारी रखकर सरकार का हमेशा सहयोग किया, जिसके चलते सरकार भी श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को हरसंभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने श्री दरबार साहिब द्वारा राजपुर स्थित माँ अम्बिका देवी मंदिर के भव्य जीर्णोद्धार कार्य की खुलकर सराहना करते हुए इसकी प्रशंसा की।

समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने बुधवार को श्री दरबार साहिब पहुंचकर मत्था टेका और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने श्री दरबार साहिब के सज्जादे गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज से शिष्टाचार भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। भेंट के दौरान दोनों के बीच प्रदेश के समसामयिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

श्री दरबार साहिब की परंपरा के अनुसार कैबिनेट मंत्री का भव्य स्वागत किया गया। खजान दास ने श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल द्वारा प्रदान की जा रही उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान आमजन को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वहीं, श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी साझा की। कैबिनेट मंत्री बनने के बाद यह खजान दास का श्री दरबार साहिब का पहला दौरा रहा।

समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धजन, दिव्यांगजन, महिलाओं एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए चलाई जा रही योजनाएं दीर्घकालिक लाभ प्रदान कर रही हैं और आमजन के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।


मसूरी को मिलेगी ‘हरित’ सौगात, 15.5 एकड़ में बनेगा प्रकृति उद्यान

पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा नया आयाम- बंशीधर तिवारी

देहरादून- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में पर्यटन नगरी मसूरी को पर्यावरणीय दृष्टि से और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। मसूरी- देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा मसूरी के हुसैनगंज क्षेत्र में लगभग 15.5 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक प्रकृति उद्यान (ईको पार्क) का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देने वाली एक महत्वपूर्ण योजना मानी जा रही है।

मसूरी लंबे समय से उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल रही है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में पर्यटन के बढ़ते दबाव के बीच प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए एमडीडीए ने यह पहल की है, ताकि मसूरी को एक पर्यावरण-अनुकूल और संतुलित पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके।

प्रकृति के बीच आधुनिक सुविधाओं वाला उद्यान

प्रस्तावित प्रकृति उद्यान को पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल अवधारणा पर विकसित किया जाएगा। इसकी रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। उद्यान में कृत्रिम पहाड़ी जलाशय, घने पेड़ों के बीच से गुजरने वाले वन पथ, बच्चों के लिए आकर्षक बाल उद्यान तथा युवाओं के लिए साहसिक गतिविधियों वाला क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इससे यह स्थान परिवारों, बच्चों और युवाओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा।
इस परियोजना का उद्देश्य केवल मनोरंजन स्थल तैयार करना नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति के करीब लाने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी है। ऐसे प्रकृति उद्यान पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा

प्रकृति उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के स्थानीय पेड़ों और पौधों का व्यापक रोपण किया जाएगा। इससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के हरित क्षेत्र न केवल प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं, बल्कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण भी प्रदान करते हैं। इसके अलावा उद्यान में आगंतुकों के लिए आरामदायक बैठने की व्यवस्था, आकर्षक मंडप (गज़ीबो), योग पथ और भोजनालय जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इन व्यवस्थाओं से पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने के साथ-साथ स्वास्थ्य और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।

संस्कृति और प्रकृति से परिचित कराएगा संग्रहालय

परियोजना के अंतर्गत एक छोटा संग्रहालय भी स्थापित किया जाएगा। इसमें मसूरी और आसपास के क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय परंपराओं और जैव विविधता से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी। इससे आने वाले पर्यटक न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेंगे, बल्कि इस क्षेत्र के इतिहास और पर्यावरणीय महत्व को भी समझ सकेंगे। यह पहल मसूरी को पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने में भी सहायक साबित हो सकती है।

निर्माण में रखा जाएगा पर्यावरण संतुलन का ध्यान

प्रकृति उद्यान के निर्माण के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाएगा। परियोजना में न्यूनतम कंक्रीट का उपयोग किया जाएगा तथा अधिकतम स्थानीय सामग्री को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे एक ओर पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकेगा, वहीं स्थानीय संसाधनों के उपयोग से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह उद्यान न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए भी एक सुंदर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा, जहां वे प्रकृति के बीच सुकून के क्षण बिता सकेंगे।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रही योजना: बंशीधर तिवारी

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में मसूरी को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हुसैनगंज में बनने वाला यह प्रकृति उद्यान मसूरी के पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना में प्रकृति के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और स्थानीय वनस्पतियों तथा प्राकृतिक ढलानों को सुरक्षित रखते हुए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उनका कहना है कि यह उद्यान आने वाले समय में मसूरी के पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बनेगा और स्थानीय लोगों को भी प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए एक सुंदर एवं स्वच्छ सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराएगा।

विकास और संरक्षण के बीच संतुलन: मोहन सिंह बर्निया

एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि प्रकृति उद्यान की पूरी योजना पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। उद्यान के डिजाइन में प्राकृतिक ढलानों, हरियाली और स्थानीय संसाधनों को सुरक्षित रखने का विशेष ध्यान रखा गया है। उनका कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने से मसूरी में पर्यावरण- अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यह स्थान भविष्य में पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र बनेगा।


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