Thursday, March 12th, 2026

Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

संसद में हर सदस्य को नियमों के तहत अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है- ओम बिरला

Monthly Archives: March 2026

संसद में हर सदस्य को नियमों के तहत अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है- ओम बिरला

संसद में कोई व्यक्ति भी नियमों से ऊपर नहीं, लोकसभा में बोले ओम बिरला

नई दिल्ली। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा के बाद स्पीकर ओम बिरला पहली बार सदन की अध्यक्षता करते हुए नजर आए। इस दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में मजबूत विपक्ष की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि संसद में हर सदस्य को नियमों के तहत अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और कोई भी व्यक्ति संसद के नियमों से ऊपर नहीं है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष के साथ-साथ एक मजबूत विपक्ष भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष या किसी भी सांसद को बोलने से रोकने की कोई मंशा नहीं रही है, बल्कि हर सदस्य को नियमों के तहत अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि सदन में पिछले दो दिनों में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, ताकि सभी दलों और सांसदों को अपनी राय रखने का मौका मिल सके। बिरला ने कहा कि लोकसभा देश के 140 करोड़ नागरिकों की भावनाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए यहां हर सांसद की आवाज अहम होती है।

स्पीकर ने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन में हर सांसद को बोलने का अवसर मिले, खासकर उन सदस्यों को जो कम बोलते हैं। उनके मुताबिक, जितनी ज्यादा चर्चा और संवाद होगा, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा।

ओम बिरला ने सभी सांसदों का आभार जताते हुए कहा कि सदन विचारों का जीवंत मंच है, जहां अलग-अलग मत और विचार सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि आलोचना भी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर सदस्य की बात को गंभीरता से सुना जाता है।

विपक्ष की ओर से उठाई गई आपत्तियों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही पूरी तरह नियमों के आधार पर चलती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है। यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी नियम 372 के तहत बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।


आईपीएल 2026 के पहले चरण का शेड्यूल जारी, 28 मार्च से होगा रोमांचक आगाज

बेंगलुरु में खेला जाएगा आईपीएल 2026 का पहला मैच, आरसीबी और हैदराबाद होगी आमने-सामने

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें सीजन के पहले चरण का कार्यक्रम जारी कर दिया है। दुनिया की सबसे लोकप्रिय टी20 लीग आईपीएल 2026 का आगाज 28 मार्च से होगा, जबकि पहले चरण के मुकाबले 12 अप्रैल तक खेले जाएंगे। इस दौरान देश के अलग-अलग शहरों में कुल 20 मैच खेले जाएंगे और कई हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिलेंगे।

आईपीएल 2026 का पहला मुकाबला 28 मार्च को बंगलूरू के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मैच में मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैदान में उतरेगी। आरसीबी इस सीजन में अपने खिताब की रक्षा करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। पिछले साल 2025 के फाइनल में आरसीबी ने पंजाब किंग्स को हराकर पहली बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की थी।

टूर्नामेंट के दूसरे दिन यानी 29 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मुकाबला खेला जाएगा, जो दर्शकों के लिए एक बड़ा आकर्षण माना जा रहा है।

आईपीएल के पहले चरण में कुल 20 मुकाबले खेले जाएंगे, जो देश के 10 अलग-अलग शहरों में आयोजित होंगे। इनमें बंगलूरू, मुंबई, गुवाहाटी, न्यू चंडीगढ़, लखनऊ, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली, अहमदाबाद और हैदराबाद शामिल हैं। इस चरण में चार डबल-हेडर मुकाबले भी रखे गए हैं, जिनमें एक ही दिन दो मैच खेले जाएंगे। दोपहर का मैच भारतीय समयानुसार 3:30 बजे और शाम का मुकाबला 7:30 बजे से शुरू होगा।

फ्रेंचाइजी टीमों के होम वेन्यू भी तय कर दिए गए हैं। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु अपने पांच घरेलू मैच बंगलूरू में और दो मुकाबले रायपुर में खेलेगी। पंजाब किंग्स के चार घरेलू मैच न्यू चंडीगढ़ में जबकि तीन मुकाबले धर्मशाला में आयोजित होंगे। वहीं राजस्थान रॉयल्स के तीन मैच गुवाहाटी और चार मुकाबले जयपुर में खेले जाएंगे।

बीसीसीआई ने फिलहाल केवल पहले चरण का कार्यक्रम जारी किया है। देश के कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पूरे टूर्नामेंट का शेड्यूल अभी घोषित नहीं किया गया है। असम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए इन राज्यों में होने वाले मैचों की तारीखें बाद में तय की जाएंगी। चुनाव कार्यक्रम स्पष्ट होने के बाद आईपीएल के शेष मुकाबलों का पूरा शेड्यूल जारी किया जाएगा।

इस बीच बंगलूरू में होने वाले मुकाबलों को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। कर्नाटक सरकार की विशेषज्ञ समिति 13 मार्च को एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान मैच डे की तैयारियों का मॉक डेमो भी किया जाएगा, जिसके बाद यह तय होगा कि स्टेडियम आईपीएल मैचों की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है या नहीं।


पीएमजीएसवाई प्रथम के अंतर्गत अवशेष सड़कों को पूरा करने की समय सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ी

ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जताया आभार

देहरादून। प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रथम चरण के अंतर्गत अवशेष सड़कों को पूरा करने की समयसीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है।

ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार के इस निर्णय से उत्तराखंड राज्य को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पीएमजीएसवाई प्रथम के अंतर्गत लगभग 55 अपूर्ण कार्यों को पूरा करने का वित्तीय भार राज्य सरकार को वहन करना प्रस्तावित था। अब केंद्र सरकार के निर्णय के बाद यह राशि केंद्र व राज्य के बीच 90:10 के अनुपात में वहन की जाएगी, जिससे राज्य सरकार पर पड़ने वाला वित्तीय भार काफी कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में सहायता मिलेगी।

ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि इस निर्णय से प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क और विकास को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।


प्रेस टूर पर देहरादून पहुंचे ओडिशा के पत्रकारों के दल ने उत्तराखंड के राज्यपाल से की भेंट

यह डेलीगेशन भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत PIB भुवनेश्वर द्वारा आयोजित उत्तराखंड के चार दिन के दौरे पर है

देवभूमि उत्तराखंड में डेलीगेशन का स्वागत करते हुए, गवर्नर ने राज्य की आध्यात्मिक विरासत, आर्थिक तरक्की और विकास की पहल पर अहम जानकारियां दी

देहरादून। देहरादून के लोक भवन में ओडिशा के एक मीडिया डेलीगेशन ने उत्तराखंड के गवर्नर, लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रि.) से बातचीत की। यह डेलीगेशन भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) भुवनेश्वर द्वारा आयोजित उत्तराखंड के चार दिन के प्रेस टूर पर है।

देवभूमि उत्तराखंड में डेलीगेशन का स्वागत करते हुए, गवर्नर ने राज्य की आध्यात्मिक विरासत, आर्थिक तरक्की और विकास की पहल पर अहम जानकारियां साझा की। उन्होंने ओडिशा और उत्तराखंड के बीच समानताओं, खासकर प्राकृतिक आपदाओं के प्रति उनकी कमज़ोरी पर ज़ोर दिया, और साइक्लोन फानी के बाद ओडिशा के अपने दौरे को याद करते हुए लोगों की हिम्मत की तारीफ़ की।

ओडिशा की तारीफ़ करते हुए, गवर्नर ने कहा कि देश खुशकिस्मत है कि राज्य ने देश को एक महिला राष्ट्रपति दी है, जो महिलाओं के एम्पावरमेंट के लिए भारत के कमिटमेंट को दिखाता है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ, “ब्रह्मांड के भगवान” के प्रति अपने आध्यात्मिक झुकाव के बारे में भी बात की, और पुरी के आध्यात्मिक महत्व पर ज़ोर दिया। “PURI” शब्द का मतलब बताते हुए, उन्होंने इसे “U – You और I – I” के रूप में समझाया, जो भगवान और भक्तों के बीच आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक है। उन्होंने ओडिशा की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं की भी तारीफ़ की और राज्य के लोगों को सीधा-सादा और मिलनसार बताया।

उत्तराखंड के राष्ट्रीय महत्व पर ज़ोर देते हुए, गवर्नर ने बताया कि राज्य में भारत सरकार के 82 इंस्टिट्यूशन हैं, जिनमें मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन (LBSNAA), देहरादून में इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट (FRI) और सर्वे ऑफ़ इंडिया जैसे खास इंस्टिट्यूशन शामिल हैं।

इस दौरे के दौरान, मीडिया डेलीगेशन ने देहरादून में सौर्य स्थल वॉर मेमोरियल, राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC) और फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट (FRI) सहित कई ज़रूरी इंस्टिट्यूशन का भी दौरा किया।

शौर्य स्थल वॉर मेमोरियल पर, डेलीगेशन ने देश की सेवा में सबसे बड़ा बलिदान देने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इंडियन आर्मी द्वारा बनाया गया यह मेमोरियल उन सैनिकों के साहस और बहादुरी की याद दिलाता है जिन्होंने ड्यूटी के दौरान अपनी जान दे दी। शौर्य स्थल वॉर मेमोरियल और RIMC के दौरे में कर्नल मनीष श्रीवास्तव, PRO डिफेंस भी साथ थे, जिन्होंने डेलीगेशन को इंस्टिट्यूशन के महत्व और इंडियन आर्म्ड फ़ोर्स की भूमिका के बारे में जानकारी दी।

बाद में डेलीगेशन ने मशहूर राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC) का दौरा किया, जहाँ RIMC के कमांडेंट राहुल अग्रवाल ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। 1922 में बना यह इंस्टीट्यूशन, इंडियन आर्म्ड फोर्सेज़ में करियर के लिए युवा कैडेट्स को तैयार करने वाले देश के सबसे बड़े इंस्टीट्यूशन्स में से एक है। अधिकारियों ने पत्रकारों को इंस्टीट्यूशन की विरासत और ट्रेनिंग फ्रेमवर्क के बारे में बताया, जिसका मकसद भविष्य के डिसिप्लिन्ड लीडर्स को तैयार करना है।

ओडिशा मीडिया डेलीगेशन ने फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूशन (FRI), देहरादून का भी दौरा किया और इसकी रिसर्च एक्टिविटीज़ और प्रोग्राम्स को समझने के लिए साइंटिस्ट्स से बातचीत की। डॉ. डी.पी. खली, GCR/हेड, फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स डिवीज़न और साइंटिस्ट-G, ने डेलीगेशन को फॉरेस्ट्री साइंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में इंस्टीट्यूशन के योगदान के बारे में बताया। डेलीगेशन ने FRI के कई म्यूज़ियम्स का भी दौरा किया, जहाँ फॉरेस्ट्री, फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स, पैथोलॉजी, एंटोमोलॉजी और टिम्बर टेक्नोलॉजी से जुड़े कलेक्शन दिखाए गए, जिससे भारत की फॉरेस्ट वेल्थ और बायोडायवर्सिटी के बारे में जानकारी मिली।

मीडिया डेलीगेशन में ओडिशा के नौ सीनियर जर्नलिस्ट शामिल हैं और उनके साथ PIB भुवनेश्वर के असिस्टेंट डायरेक्टर महेंद्र जेना और इन्फॉर्मेशन असिस्टेंट विकास रंजन दलाई भी हैं। बातचीत के दौरान PIB देहरादून के असिस्टेंट डायरेक्टर संजीव सुंदरियाल भी मौजूद रहे।


घरेलू गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं- महाराज

व्यवसायिक प्रतिष्ठान अपने स्टॉक को समझदारी से करें प्रबंधित

गैरसैंण। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित होने से होटलों, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हो रही परेशानियों को देखते हुए प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से वार्ता की है।

महाराज ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, विशेषकर पश्चिम एशिया में तनाव (ईरान-इजराइल संघर्ष), के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव के चलते अवरोध उत्पन्न हुआ है लेकिन सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल घरेलू गैस (14.2 किलोग्राम) की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है।

महाराज ने कहा कि होटलों, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित हुई है। इसलिए व्यवसायियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने स्टॉक को समझदारी से प्रबंधित करें और स्थिति सामान्य होने तक सीमित उपयोग करें।


डॉल्फिन इंस्टीट्यूट में ‘क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन सह जागरूकता कार्यक्रम’ के दूसरे दिन भीमल हस्तशिल्प और उद्यमिता पर रहा विशेष जोर

देहरादून। मांडूवाला स्थित डॉल्फिन (पी.जी.) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज में आयोजित तीन दिवसीय ‘क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन सह जागरूकता कार्यक्रम’ आज अपने दूसरे दिन में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया। यह कार्यक्रम विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ऋषिकेश नेचुरल फाइबर हैंडीक्राफ्ट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (RNHFPCL) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

मुख्य अतिथि एवं संबोधन
आज के सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि गिरीश डोभाल (उपाध्यक्ष, प्रांतीय मधुमक्खी पालन परिषद) एवं अति विशिष्ट अतिथि आशीष डोभाल (वरिष्ठ पत्रकार एवं कम्युनिटी इन्फ्लुएंसर) द्वारा किया गया।

हस्तशिल्प क्षेत्र की स्थिरता पर विचार साझा करते हुए मुख्य अतिथि गिरीश डोभाल ने कहा

“यह कार्यक्रम कारीगरों को आवश्यक उद्यमशीलता कौशल (Entrepreneurial Skills) से लैस कर उनके लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढालना और उसे वैश्विक मंच प्रदान करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”

अति विशिष्ट अतिथि आशीष डोभाल ने अपने संबोधन में स्थानीय कला के संरक्षण और डिजिटल युग में हस्तशिल्प की ब्रांडिंग के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर कंपनी की निदेशक श्रीमती बीना पुंडीर ने भी कारीगरों का उत्साहवर्धन किया।

भीमल क्राफ्ट और प्राकृतिक फाइबर का सशक्तिकरण
10 से 12 मार्च तक चलने वाले इस आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य उत्तराखंड के विलक्षण प्राकृतिक फाइबर (भीमल क्राफ्ट) को वैश्विक पहचान दिलाना है। कार्यक्रम में क्षेत्र के 20 दक्ष प्रतिभागी सम्मिलित हो रहे हैं, जिन्हें निम्नलिखित अनुभवी संसाधन व्यक्तियों (Resource Persons) द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है:

श्रीमती विमला नेगी (हस्तशिल्प विशेषज्ञ)

श्रीमती विमला चौहान (हस्तशिल्प विशेषज्ञ)

श्रीमती बसंती रावत (हथकरघा एवं हस्तशिल्प)

श्रीमती ममता नेगी (हस्तशिल्प विशेषज्ञ)

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं
इवेंट कोऑर्डिनेटर श्रीमती बीना पुंडीर (राज्य पुरस्कार विजेता) और निदेशक अनिल चंदोला के मार्गदर्शन में कार्यशाला के मुख्य आकर्षण रहे:

डिजाइन नवाचार: भीमल फाइबर से आधुनिक और उपयोगी उत्पाद बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण।

इंटरएक्टिव सत्र: उद्योग विशेषज्ञों के साथ बाजार की चुनौतियों और अवसरों पर सीधा संवाद।

सशक्तिकरण: भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ दृष्टिकोण के अनुरूप स्थानीय शिल्पकारों को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करना।

प्रबंधन और सहयोग
कार्यक्रम के सफल संचालन में संस्थान के अपर निदेशक (प्रशासन) सुनील कौल, डीन अकादमिक प्रो. ज्ञानेंद्र अवस्थी, डीन रिसर्च प्रो. वर्षा पर्चा, और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सुधीर भारती का विशेष योगदान रहा। प्रबंधन टीम में डॉ. श्रुति शर्मा, विपुल गर्ग और डॉ. आशीष रतूड़ी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह पहल न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का प्रयास है, बल्कि क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।


उत्तराखंड के हर ब्लॉक में बनेंगे मिनी स्टेडियम- मुख्यमंत्री धामी

राष्ट्रीय खेलों की सफलता के बाद खेल ढांचे के विस्तार पर जोर

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं के लिए प्रदान की ₹ 75.36 करोड की वित्तीय स्वीकृति

गैरसैंण। 38 वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य आयोजन के बाद प्रदेश की धामी सरकार जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं के और विस्तार में जुट गई है। इस क्रम में प्रदेश के हर ब्लॉक में अब मिनी स्टेडियमों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को बजट सत्र के तीसरे दिन सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर ब्लाक में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रावधान किया गया है।

वर्ष 2025 में उत्तराखंड ने न सिर्फ 38 वें राष्ट्रीय खेलों की सफल मेजबानी की थी, बल्कि 103 पदक जीतकर इस स्तर के आयोजन में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया था। इस आयोजन ने उत्तराखंड को खेलभूमि के रूप में भी पहचान दी। इस आयोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का आधारभूत खेल ढांचा विकसित किया गया। लेगेसी पॉलिसी बनाकर सरकार ने इस खेल ढांचे का इस्तेमाल एकेडमी के तौर पर करने का निर्णय लिया है। ताकि खेल प्रतिभाओं को उचित प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। इस संबंध में शासन स्तर पर कार्यवाही चल रही है।

अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए प्रावधान कर दिए जाने को भी अहम माना जा रहा है। बुधवार को प्रश्नकाल में जब खेल मंत्री रेखा आर्या पर्वतीय क्षेत्रों में खेल मैदान और मिनी स्टेडियम से संबंधित सवाल का जवाब दे रही थीं, तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन को यह अहम जानकारी दी। खेल मंत्री रेखा आर्या के अनुसार-पर्वतीय क्षेत्र में मिनी स्टेडियम के लिए 1.18 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। इसके निर्माण के लिए एक करोड़ 70 लाख रूपये दिए जाने का प्रावधान है।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं के लिए प्रदान की ₹ 75.36 करोड की वित्तीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एस.सी.एस.पी. के अन्तर्गत जनपद पौड़ी गढ़वाल के विधानसभा क्षेत्र पौड़ी के विकासखण्ड पाबौ मे बेडा का जगड मोटर मार्ग के किमी0 1.00 से 5.00 तक सुदृढीकरण एवं डामरीकरण कार्य हेतु ₹ 3.58 करोड़, जनपद हरिद्वार के राजकीय उपजिला चिकित्सालय रुड़की में विद्युत रिवाईरिंग कार्य हेतु ₹ 3.93 करोड के साथ ही राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद देहरादून के विधानसम क्षेत्र मसूरी के अन्तर्गत न्यू कैंट मोटर मार्ग किमी० 1 चै0 0.375 से चै० 1.625 (सालावाला पुल से विजय कॉलोनी पुल) तक मार्ग को दो लेन से 10.50 मी० चौडाई में परिवर्तित (अपग्रेड) किये जाने (द्वितीय चरण) हेतु कुल धनराशि ₹ 16.87 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा क्षेत्र चम्पावत के अन्तर्गत बूम से टनकपुर के शारदा नदी के दांये पार्श्व पर (तटबन्ध) बाढ़ सुरक्षा कार्य एवं शारदा नदी के दांये पार्श्व पर पर बूम व उचौलीगोठ में बाढ़ सुरक्षा कार्य हेतु ₹ 15.69 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा नगर निगम, ऋषिकेश क्षेत्रान्तर्गत एकत्रित लीगेसी वेस्ट निस्तारण हेतु ₹ 6.79 करोड़ तथा नगर निगम, पिथौरागढ़ में देवभूमि रजत जयन्ती पार्क के निर्माण हेतु ₹ 9.81 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने के साथ ही टनकपुर में मीडिया सेंटर एवं गेस्ट हाउस तथा टनकपुर में कम्यूनिटी हॉल निर्माण किये जाने हेतु ₹ 14.24 करोड स्वीकृत करते हुए प्रथम किश्त के रूप में ₹ 1.00 करोड़ अवमुक्त किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने किया श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की बेहतर सुरक्षा हेतु एआई बेस्ड सिस्टम अधिष्ठापित किये जाने का अनुमोदन

मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में स्थित चारधाम एवं मुख्य पर्यटन स्थलों पर लगातार श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी के दृष्टिगत उनकी बेहतर सुरक्षा व्यवस्था हेतु संदिग्ध तत्वों एवं गतिविधियों पर निगरानी के लिए एआई बेस्ड फेसियल रिकुनाईजेशन सिस्टम एवं डाटा एनेलेटिक्स साफ्टवेयर सिस्टम विभिन्न 05 जनपदों में अधिष्ठापित किये जाने हेतु ₹ 4.45 करोड स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।


देहरादून एसएसपी से मिलने पहुंची नन्ही बच्ची, फूल देकर जताया पुलिस के प्रति सम्मान

नन्ही मुस्कान और खाकी का सम्मान

देहरादून। पुलिस कार्यालय देहरादून में अपनी समस्याओ को लेकर आने वाले फरियादियों के बीच एक नन्ही और प्यारी सी बच्ची अपने नन्हे हाथों में रंग-बिरंगे फूलों का एक पुष्पगुच्छ थामे एसएसपी देहरादून से मिलने के लिये पहुंची, जिसके द्वारा एसएसपी देहरादून से मुलाकात के दौरान अपनी प्यारी से मुस्कान के साथ अपने साथ लाये फुलो के गुलदस्ते को उन्हें भेंट किया।

छोटी सी उम्र में कप्तान अंकल से मिलने आने का कारण पूछने पर उक्त बच्ची द्वारा मासूमियत से जवाब दिया कि चाहे दिन हो या रात पुलिस वाले अंकल हमेशा सडक पर खडे होकर हमारी रक्षा करते है, बच्ची की बातों के दौरान उसकी आँखों में पुलिस की वर्दी के प्रति डर न होकर एक सम्मान और आकर्षण था। बच्ची की मासूमियत भरी मुस्कान व पुलिस पर जताए भरोसे पर एसएसपी देहरादून द्वारा बच्ची के सिर पर हाथ रखकर उसे जीवन में खूब तरक्की करने का आशीर्वाद दिया गया।

यह छोटी सी मुलाकात केवल एक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि खाकी के प्रति उस मासूम चेहरे पर भरोसे का प्रतीक थी।


महिलाओं की समस्याओं का निस्तारण शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए- कुसुम कंडवाल

‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के तहत हरिद्वार में जनसुनवाई; वेतन रोकने वाले निजी अस्पताल प्रबंधन को चिकित्सकों की सैलरी जारी करने के निर्देश

महिला आयोग को कोई हल्के में न ले, निर्देशों पर लापरवाही हुई तो होगी कड़ी कार्रवाई — कुसुम कंडवाल

कागजी कार्रवाई नहीं, धरातल पर न्याय चाहिए; पीड़ित महिलाओं की फाइलों का प्राथमिकता से करें निस्तारण- कुसुम कंडवाल

​हरिद्वार। राष्ट्रीय महिला आयोग के अभियान ‘महिला आयोग आपके द्वार’ के तीसरे दिन आज जनपद हरिद्वार के जिलाधिकारी सभागार में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता में एक विशाल जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोग की सदस्य विमला नैथानी और कमला जोशी की गरिमामयी उपस्थिति रही। जनसुनवाई के दौरान कुल 18 फरियादियों ने अपनी समस्याओं को आयोग के सम्मुख रखा, जिनमें से कई संवेदनशील मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि चार गंभीर प्रकरणों को आगामी कार्यवाही हेतु आयोग मुख्यालय देहरादून प्रेषित किया गया। इस दौरान निजी अस्पताल(मेट्रो हॉस्पिटल) हरिद्वार में कार्यरत दो महिला चिकित्सकों ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा पिछले एक वर्ष और नौ महीनों से उनका वेतन रोका गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अस्पताल प्रबंधन समिति को कड़ा निर्देश जारी किया कि वे 16 मार्च को आयोग में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों और एक हफ्ते के भीतर दोनों महिला चिकित्सकों का बकाया वेतन, चेक के माध्यम से प्रदान करें।

​जनसुनवाई में अन्य गंभीर प्रकरण भी सामने आए, जिनमें एक महिला ने अपने पति के अतिरिक्त संबंधों और दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई। अध्यक्ष ने इस मामले में तत्काल जांच के आदेश देते हुए दोनों पक्षों को आयोग में तलब किया है। वहीं, एक अनपढ़ विधवा महिला द्वारा अपने जेठ पर संपत्ति हड़पने और हक न देने के आरोप पर अध्यक्ष ने जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देशित किया कि पीड़िता को उसके हिस्से का कब्जा दिलाने हेतु उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मनसा देवी मंदिर मार्ग पर दुकान हटाए जाने से प्रभावित निर्धन महिलाओं की आजीविका के प्रश्न पर अध्यक्ष ने नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन महिलाओं को जीवन यापन के लिए उचित स्थान पर दुकान उपलब्ध कराई जाए। इसके अतिरिक्त, आयोग द्वारा एक पीड़िता को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निशुल्क अधिवक्ता भी उपलब्ध कराया गया और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों पर नोडल अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया।

​सुनवाई के दौरान अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने उपस्थित समस्त अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में हिदायत दी कि महिला आयोग के निर्देशों को कोई भी विभाग हल्के में न ले। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग आयोग द्वारा भेजे गए पत्रों पर समयबद्ध तरीके से जांच रिपोर्ट प्रेषित करें और यदि कोई महिला कर्मचारी अपने विभाग की आईसीसी (ICC) कमेटी की जांच से संतुष्ट नहीं है, तो उसकी पुनः निष्पक्ष जांच कराई जाए। सभी विभाग पॉश (POSH) से संबंधित कार्यशालाएं अपने विभागों में अवश्य कराएं। अध्यक्ष ने सभी को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि महिलाओं की समस्याओं का निस्तारण शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

जनसुनवाई में वन स्टॉप सेंटर की समीक्षा के दौरान प्रशासिका द्वारा बताया गया कि इस वर्ष 490 पंजीकृत मामलों में से 488 का सफल निस्तारण किया जा चुका है।

​इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक वरीयता के क्रम में मुख्य विकास अधिकारी एल.एन. मिश्रा, एसपी क्राइम निशा यादव, सदस्य सचिव महिला आयोग उर्वशी चौहान, परियोजना निदेशक नलनीत घिल्डियाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी एन.के. हल्दियानी, पुलिस क्षेत्राधिकारी एस.पी. बलूनी, जिला विकास अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदोरिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी धर्मवीर सिंह, विधि अधिकारी दयाराम सिंह और लेबर इंस्पेक्टर उपस्थित रहे। इसके साथ ही अध्यक्ष महिला आयोग के निजी सचिव आधार वर्मा सहित वन, पर्यटन, विद्युत एवं अन्य संबंधित विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।


खाना खाने के बाद क्यों आती है नींद? जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

खाना खाने के बाद अचानक नींद आना, शरीर में भारीपन महसूस होना या आलस लगना कई लोगों के लिए आम बात है। अक्सर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति शरीर के मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर के स्तर से जुड़ी हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि भोजन के बाद कुछ छोटी-छोटी आदतें अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भोजन करने के बाद शरीर में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ता है। अगर इस दौरान व्यक्ति लंबे समय तक बैठे या लेटे रहता है तो मांसपेशियां उस ग्लूकोज का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पातीं। ऐसे में अतिरिक्त ग्लूकोज शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगता है, जिससे वजन बढ़ने के साथ-साथ सुस्ती और भारीपन की समस्या भी बढ़ सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि भोजन के बाद अक्सर होने वाली एसिडिटी, गैस और पेट फूलने की समस्या भी इसी कारण से जुड़ी हो सकती है। पाचन प्रक्रिया धीमी होने से व्यक्ति को थकान और नींद का अनुभव होने लगता है। इसलिए भोजन के बाद शरीर को थोड़ी सक्रियता देना जरूरी माना जाता है।

भोजन के बाद टहलना क्यों है फायदेमंद

डॉक्टरों के मुताबिक खाने के बाद हल्की वॉक करने से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं और वे बढ़ते ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने लगती हैं। इससे इंसुलिन का स्तर संतुलित रहता है और शरीर में शुगर स्पाइक की संभावना कम हो जाती है। इसके अलावा टहलने से आंतों की गति भी बढ़ती है, जिससे पाचन बेहतर होता है और पेट में भारीपन या गैस की समस्या कम होती है।

कितनी देर और कैसे करें वॉक

विशेषज्ञों का सुझाव है कि भोजन के लगभग 5 मिनट बाद हल्की वॉक शुरू की जा सकती है। 10 से 15 मिनट तक धीमी गति से टहलना पर्याप्त माना जाता है। बहुत तेज चलने से पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, इसलिए सामान्य और आरामदायक गति बनाए रखना बेहतर रहता है।

ऑफिस में क्या करें

अगर ऑफिस में बाहर टहलना संभव न हो तो अपनी सीट के पास ही थोड़ी देर चलना-फिरना या कदमताल करना भी फायदेमंद हो सकता है। यह छोटी-सी शारीरिक गतिविधि भी ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने और शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करती है।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन के बाद कुछ मिनट की हल्की वॉक को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करने से पाचन बेहतर रहता है और मोटापा व डायबिटीज जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

नोट: यह लेख विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स में दी गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

(साभार)


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp