Monday, March 9th, 2026

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कृषि विभाग में अनियमितताओं के प्रकरण में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दिए जांच के आदेश

Daily Archives: 09/03/2026

कृषि विभाग में अनियमितताओं के प्रकरण में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दिए जांच के आदेश

देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने विगत दिनों दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों का गंभीरता से संज्ञान लिया है, जिनमें कृषि विभाग के अंतर्गत निर्धारित कानूनों का पालन न किए जाने तथा इससे किसानों, आमजन, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न होने की बात कही गई है।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रकाशित समाचार के अनुसार विभाग द्वारा नियमों के विरुद्ध अपात्र व्यक्तियों एवं फर्मों को पेस्ट कंट्रोल के लाइसेंस जारी करने तथा कुछ दुकानों पर प्रतिबंधित कीटनाशकों की अवैध बिक्री किए जाने के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने विभागीय सचिव को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और यदि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।


नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्यपाल के अभिभाषण को बताया निराशाजनक और दिशाहीन

यशपाल आर्य ने कहा, अपने लंबे जीवन में उन्होंने इतना कमजोर और वास्तविकता से कटा हुआ अभिभाषण पहले कभी नहीं सुना

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इसे निराशाजनक, दिशाहीन, संकल्पविहीन और विकास विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक और संसदीय जीवन में उन्होंने इतना कमजोर और वास्तविकता से कटा हुआ अभिभाषण पहले कभी नहीं सुना।

यशपाल आर्य ने कहा कि यह अभिभाषण “सफेद कागज पर झूठ की काली स्याही से लिखी गई इबारत” जैसा है। इसमें प्रदेश की वास्तविक समस्याओं, जनता की पीड़ा और राज्य के सामने खड़ी चुनौतियों का कहीं भी उल्लेख नहीं दिखाई देता।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की प्राथमिकताओं, नीतियों और लक्ष्यों का दस्तावेज होता है और इसमें पिछले वर्ष की उपलब्धियों का भी उल्लेख होता है। लेकिन इस बार सरकार ने यह बताने की आवश्यकता भी नहीं समझी कि पिछले चार वर्षों में निर्धारित लक्ष्यों में से कितने पूरे हुए और कितने अधूरे रह गए।

आर्य ने कहा कि वर्ष 2022 में भाजपा सरकार बनने के बाद यह राज्यपाल का पाँचवाँ अभिभाषण है, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी सरकार के पास बताने के लिए ठोस उपलब्धियाँ नहीं हैं। सरकार हर वर्ष अपने लक्ष्य बदल देती है या अपने ही घोषित लक्ष्यों से पीछे हट जाती है। यही कारण है कि प्रदेश को उपलब्धियों के नाम पर कुछ भी ठोस नहीं मिल पा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार इस वर्ष भी अपनी प्रमुख उपलब्धि के रूप में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने का दावा कर रही है। सरकार के अनुसार इस कानून के अंतर्गत 5 लाख 27 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन आर्य का आरोप है कि इनमें से अधिकांश आवेदन सरकारी कर्मचारियों के हैं, जिन्हें प्रशासनिक दबाव या वेतन रोकने के भय से पुराने विवाहों का पुनः पंजीकरण कराने के लिए बाध्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि यूसीसी में लिव-इन रिलेशन से जुड़े प्रावधानों के दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। लिव-इन संबंधों में रह रही युवतियों की हत्या की घटनाएँ तथा बच्चों के जन्म के बाद महिलाओं को परित्यक्त छोड़ देने जैसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि यह कानून राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इससे जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आशंकाएँ भी पैदा हो रही हैं।

आर्य ने अभिभाषण में किए गए “लखपति दीदी” संबंधी दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का दावा है कि प्रदेश में ढाई लाख महिलाएँ लखपति बन चुकी हैं। यदि यह दावा सही है तो सरकार इन महिलाओं की सूची सार्वजनिक करे। उनका आरोप है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के बजाय उन्हें कर्ज के बोझ तले दबा दिया गया है।

उन्होंने पर्यटन और चारधाम यात्रा व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना है कि सरकार शीतकालीन यात्रा को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि पिछले दो यात्रा सीजन में अव्यवस्था और कुप्रबंधन के कारण होटल व्यवसायी, टैक्सी चालक, घोड़ा-खच्चर संचालक और छोटे व्यापारी प्रभावित हुए हैं।
आर्य ने कहा कि बागवानी और कृषि योजनाओं में भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। सब्सिडी और प्रोत्साहन के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन कई किसानों को अपनी लागत तक नहीं मिल पाई, जिससे वे आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार चार वर्षों की वास्तविक उपलब्धियाँ बताने के बजाय वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र और विकसित प्रदेश बनाने जैसे दूरगामी नारों के माध्यम से जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। वर्तमान समस्याओं का समाधान किए बिना दूर के सपने दिखाना केवल जनता को भ्रमित करना है।
आर्य ने कहा कि इस अभिभाषण को “विजन डॉक्यूमेंट” के बजाय “कन्फ्यूजन डॉक्यूमेंट” कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनका कहना है कि उत्तराखंड की जनता अब सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच का अंतर समझ चुकी है और समय आने पर इसका जवाब देगी।


‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत, दूरस्थ महिलाओं को न्याय दिलाने की बड़ी पहल

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने देहरादून में सुनी 25 फरियादें; घरेलू हिंसा से लेकर लैंड फ्रॉड के मामलों पर कड़ा रुख

महिला कल्याणकारी योजनाओं की ग्राउंड लेवल पर करें मॉनिटरिंग, अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष पर महिला सशक्तिकरण के संकल्प को धरातल पर उतारने हेतु राष्ट्रीय महिला आयोग के अभियान ‘महिला आयोग आपके द्वार’ के अंतर्गत आज उत्तराखंड में इस विशेष मुहिम की औपचारिक शुरुआत की गई। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत देहरादून जनपद के जिलाधिकारी कार्यालय परिसर स्थित कोषागार सभागार में एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई का आयोजन किया गया। राज्य महिला ​आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता और सदस्य विमला नैथानी की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में कुल 25 फरियादियों ने अपनी समस्याओं को आयोग के सम्मुख रखा।

जनसुनवाई के दौरान घरेलू हिंसा, आर्थिक सहायता, संपत्ति विवाद और लैंड फ्रॉड जैसे कई गंभीर मामले सामने आए। अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कई संवेदनशील मामलों का मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया, जबकि कुछ जटिल प्रकरणों को आगामी कार्रवाई हेतु प्रस्तावित करते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।

इस जनसुनवाई के दौरान घरेलू हिंसा के दो मामलों में महिला आयोग के अध्यक्ष द्वारा गंभीरता दिखाते हुए उन्हें सुलझाने का प्रयास किया गया तथा दोनों परिवारों को समझाते हुए कुशलता के साथ रहने की सलाह दी गई तथा एक माह बाद उन्हें पुनः आयोग के सम्मुख उपस्थित होने के निर्देश दिए है।

वही अपर सारथी विहार देहरादून से एक सीनियर सिटीजन द्वारा आयोग की अध्यक्ष से उनकी 93 वर्षीय माता की पेंशन निकालने के लिए बैंक कर्मचारियों को घर न आने की शिकायत की गई जबकि पूर्व मे कर्मचारी घर आया करते थे। अध्यक्ष कुसुम कंडवाल द्वारा बैंक मेनेजर से वार्ता कर वृद्धा की समस्या के निस्तारण के आदेश दिए गए।

वही एक मामले में पीड़िता द्वारा बताया गया कि उनकी शादी को 7 साल हो गए हैं पति द्वारा उनकी तबीयत खराब होने पर तुरंत उनके मायके छोड़ दिया जाता है देखभाल नहीं की जाती है नहीं अच्छा खान-पान दिया जाता है, इस पर आयोग की अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए पीड़िता के पति को ₹5000/- प्रति माह व्यक्तिगत खर्च के लिए देने के निर्देश दिए है।

जनसुनवाई के दौरान एक पीड़िता ने फरियाद लगाते हुए बताया कि उसके एक मुकदमे में उसकी आरोप पत्र की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई जबकि वह पिछले डेढ़ साल से उसके लिए परेशान घूम रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने एसएचओ नेहरू कॉलोनी को तत्काल निर्देश दिए कि पीड़िता को उक्त मुकदमे के आरोप पत्र की प्रति अविलंब उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय में अनावश्यक विलंब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एक पीड़िता द्वारा पर फरियाद लगाते हुए बताया गया कि उनकी बेटी पिछले कई दिनों से लापता है जिसकी गुमशुद की दर्ज कराई गई है परंतु अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है जिसके लिए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने सीओ रीना राठौर को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए उनकी बेटी को जल्द से जल्द ढूंढ कर सकुशल वापस लाने के निर्देश दिए हैं।

इस जनसुनवाई का एक विशेष पहलू यह रहा कि महिलाओं के साथ-साथ पत्नी से प्रताड़ित कुछ पुरुषों ने भी आयोग के सामने उपस्थित होकर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मदद की गुहार लगाई। अध्यक्ष ने इन मामलों को भी पूरी संवेदनशीलता से सुना और पारिवारिक सामंजस्य एवं उचित परामर्श के निर्देश दिए।

अध्यक्ष कुसुम कंडवाल का कहना है कि जो महिला दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं या पीड़िताएं अपनी पहुंच आयोग के मुख्यालय देहरादून तक नहीं बना सकती उनके लिए महिला आयोग द्वारा महिला आयोग आपके द्वार अभियान के तहत जनसुनवाई का आयोजन किया जा रहा है, ताकि समाज के अंतिम छोर पर बैठी पीड़िता को भी समयबद्ध और सुलभ न्याय प्राप्त हो सके। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि उत्तराखंड सरकार द्वारा महिलाओं के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, ग्राउंड स्तर पर उनकी मॉनिटरिंग की जाए ताकि पात्र महिलाओं को उनका वास्तविक लाभ मिल सके।

​अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने आगामी जनसुनवाई कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि वे स्वयं प्रदेश के 5 जनपदों में उपस्थित रहकर जनसुनवाई की कमान संभालेंगी, ​10 मार्च को जनपद पौड़ी गढ़वाल, 11 मार्च को जनपद हरिद्वार, ​12 मार्च को जनपद चंपावत, ​13 मार्च को जनपद उधम सिंह नगर सहित ​प्रदेश के अन्य जनपदों में आयोग की उपाध्यक्ष एवं सदस्य उपस्थित रहकर जनसुनवाई करते हुए शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करेंगे।

अध्यक्ष ने जोर दिया कि प्रशासन और पुलिस ग्रामीण क्षेत्रों की शिकायतों पर पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।

जनसुनवाई के दौरान आयोग की सदस्य विमला नैथानी, अपार जिलाधिकारी केके मिश्रा, आयोग की सदस्य सचिव उर्वशी चौहान, उपजिलाधिकारी न्यायिक, एसडीएम सदर देहरादून, डोईवाला, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अधिवक्ता स्वाति शर्मा एवं प्रियंका बिष्ट, पुलिस विभाग से पुलिस क्षेत्रअधिकारी रीना राठौर, महिला एवं बाल कल्याण विभाग से प्रोफेशन अधिकारी मीना बिष्ट एवं शिखा कंडवाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार, विधि अधिकारी दयाराम सिंह, सहित शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पर्यटन विभाग, लोक निर्माण विभाग अन्य विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।


मुख्यमंत्री धामी ने पेश किया ₹1.11 लाख करोड़ का बजट

पिछले साल के मुकाबले बजट में 10.41% की बढ़ोतरी

गैरसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वर्ष 2026–27 का बजट प्रस्तुत किया। लगभग ₹1,11,703.21 करोड़ के इस बजट में जहां विकास की गति को बढ़ाने पर जोर है, वहीं मजबूत राजकोषीय प्रबंधन की झलक भी स्पष्ट दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 के सापेक्ष 10.41 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सीएम धामी ने भोजनावकाश के बाद पेश किए बजट को उत्तराखंड में वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन को मजबूत करने वाला बजट बताया।

देखें बजट की मुख्य बातें

1.11 लाख करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा बजट

गांव-गरीब, युवा और महिला सशक्तिकरण पर जोर

पर्यटन, कृषि, तकनीक और आधारभूत ढांचे में बड़े निवेश का ऐलान

सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं को भी मजबूती

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। यह राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने इस बजट के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, युवाओं को रोजगार से जोडऩे, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और आधारभूत ढांचे के विकास पर खास फोकस किया है।

विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से हुई, जिसमें सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का खाका रखा गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सदन में बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। सरकार ने बजट में कृषि, पर्यटन, उद्योग और तकनीकी विकास को राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख इंजन के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला-बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए भी बड़े प्रावधान किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए सड़क, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों के निर्माण और सुधार के लिए 1,050 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि गड्ढा मुक्त सड़क अभियान के लिए 400 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं। सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग में 1,642.20 करोड़ रुपये और पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए 1,491 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष योजनाओं को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे राज्य के लोगों को कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रहेगी। वहीं वृद्ध, विधवा और दिव्यांगों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत 1,327.73 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। महिला और बाल कल्याण के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को बजट में शामिल किया है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के लिए 598.33 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री पोषण मिशन के लिए 149.45 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट, आंचल अमृत और वात्सल्य योजना के लिए भी अलग-अलग बजट प्रावधान किए गए हैं।

सरकार ने तकनीकी विकास पर भी जोर देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन के लिए 25 करोड़ रुपये और राज्य के डेटा सेंटर को मजबूत बनाने के लिए 105 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इसके अलावा आईटी विकास एजेंसी को 25 करोड़ रुपये का अनुदान देने की घोषणा की गई है। उद्योग और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 60 करोड़ रुपये और एमएसएमई सेक्टर के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मिशन एप्पल के लिए 42 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का उदाहरण -सीएम

राज्य सरकार ने बजट में वित्तीय जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखते हुए FRBM अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया है। बजट के अनुसार राज्य में राजस्व आधिक्य (Revenue Surplus) की स्थिति बनी हुई है, जो दर्शाता है कि सरकार की आय उसके राजस्व व्यय से अधिक है। यह स्थिति किसी भी राज्य की मजबूत वित्तीय सेहत का संकेत मानी जाती है। बजट में 2536.33 करोड़ का राजस्व सरप्लस दिखाया गया है।

राजकोषीय अनुशासन के तहत राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर रखा गया है। इसी प्रकार लोक ऋण भी जीएसडीपी के 32.50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के अंदर बनाए रखा गया है। यह दर्शाता है कि सरकार विकास कार्यों पर खर्च करते हुए भी ऋण प्रबंधन और वित्तीय संतुलन पर पूरा ध्यान दे रही है।

राजस्व आधिक्य, सीमित राजकोषीय घाटा और नियंत्रित सार्वजनिक ऋण जैसे संकेतक बताते हैं कि राज्य सरकार ने वित्तीय प्रबंधन में सावधानी और दूरदर्शिता अपनाई है। इससे भविष्य में विकास परियोजनाओं को स्थिर वित्तीय आधार मिलने की संभावना और मजबूत होगी।

कुल मिलाकर यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


इंडोनेशिया में बड़ा हादसा, भारी बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर ढहा, पांच लोगों की मौत

मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी

जकार्ता। इंडोनेशिया में भारी बारिश के बाद एक बड़े लैंडफिल में कचरे का विशाल ढेर अचानक ढह गया, जिससे बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव दल मौके पर लगातार अभियान चला रहे हैं।

यह हादसा इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के पास बेकासी शहर में स्थित बंटारगेबांग वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी में हुआ। लगातार हो रही तेज बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर अचानक खिसककर गिर गया और आसपास मौजूद कई लोग इसकी चपेट में आ गए।

घटना के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए 300 से अधिक बचावकर्मियों को तैनात किया गया है। बचाव दल भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं।

जकार्ता सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस की प्रमुख देसियाना कार्तिका बहारी के मुताबिक कचरे के ढेर अभी भी अस्थिर स्थिति में हैं, इसलिए बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ काम कर रहे हैं ताकि किसी और हादसे से बचा जा सके।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में जान गंवाने वालों में दो कचरा ट्रक चालक और दो खाद्य स्टॉल संचालक शामिल हैं, जो उस समय लैंडफिल के पास मौजूद थे। वहीं चार लोग सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। पुलिस, सेना और स्वयंसेवी संगठनों की टीमें अभी भी तीन लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

बंटारगेबांग लैंडफिल जकार्ता का सबसे बड़ा कचरा निस्तारण स्थल है, जहां शहर का अधिकांश घरेलू कचरा डाला जाता है। लंबे समय से इसकी क्षमता से अधिक कचरा जमा होने को लेकर चेतावनी दी जाती रही है। इससे पहले भी ऐसे हादसों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए पिछले साल के अंत में इस लैंडफिल को साफ करने की योजना बनाई थी, जिसके तहत कचरे को ऊर्जा में बदलने की परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि खुले में कचरा जमा करने की पुरानी व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म किया जा सके।


कान साफ करने के लिए ईयरबड्स का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

कान हमारे शरीर का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग है, जिसकी सही देखभाल करना जरूरी है। अक्सर लोग कानों की सफाई के लिए कॉटन वाले ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सुरक्षित नहीं मानते। डॉक्टरों के मुताबिक, गलत तरीके से कान साफ करना कई बार संक्रमण, चोट और सुनने की समस्या तक पैदा कर सकता है। इसलिए कानों की सफाई को लेकर सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे कान खुद को साफ रखने की प्राकृतिक क्षमता रखते हैं। कान के अंदर बनने वाला ईयरवैक्स (मैला) कई लोगों को गंदगी लगता है, जबकि वास्तव में यह कानों के लिए एक सुरक्षात्मक परत का काम करता है। यह धूल, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्वों को कान के अंदर जाने से रोकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग कान साफ करने के लिए कॉटन प्लग या ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह तरीका सुरक्षित नहीं है। इससे अक्सर वैक्स बाहर निकलने की बजाय और अंदर की ओर चला जाता है, जिससे कान में ब्लॉकेज बनने की आशंका बढ़ जाती है। इस स्थिति में कान बंद होने जैसा महसूस होना, सुनाई कम देना और असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि कान के अंदर की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है। ऐसे में ईयरबड्स या किसी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल करने से कान के अंदर खरोंच या चोट लग सकती है। यदि कान में चोट लग जाए तो वहां बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कान केवल सुनने के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर के संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए कान में किसी भी तरह की चोट या समस्या होने पर चक्कर आना या संतुलन बिगड़ने जैसी परेशानी भी हो सकती है।

इसके अलावा, अगर कॉटन प्लग गलती से ज्यादा अंदर चला जाए तो यह कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। कई मामलों में ईयरबड्स के गलत इस्तेमाल से कान के पर्दे को नुकसान पहुंचने तक की स्थिति बन जाती है। बार-बार ईयरबड्स इस्तेमाल करने से कान में सूखापन, खुजली और ज्यादा वैक्स बनने की समस्या भी हो सकती है।

डॉक्टरों की सलाह है कि कानों की सफाई के लिए ईयरबड्स का नियमित इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। यदि कान में ज्यादा वैक्स जमा हो जाए, दर्द हो या सुनने में परेशानी महसूस हो तो खुद से उपचार करने के बजाय किसी ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

(साभार)


गैरसैंण में यूकेडी का प्रदर्शन, विधानसभा घेराव की कोशिश पर पुलिस से झड़प

पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को लिया हिरासत में

गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। स्थायी राजधानी की घोषणा, अंकिता भंडारी हत्याकांड और अन्य जन मुद्दों को लेकर कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानसभा घेराव का प्रयास किया।

सोमवार को दिवालीखाल क्षेत्र में बड़ी संख्या में यूकेडी कार्यकर्ता एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्थायी राजधानी घोषित करने सहित विभिन्न मांगों को उठाते हुए रैली निकाली। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता पुलिस को चकमा देकर विधानसभा की ओर बढ़ गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने करीब 10 से 15 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को पुलिस वाहनों से ले जाया जा रहा था, तभी अन्य कार्यकर्ताओं ने वाहनों को रोक दिया और अपने साथियों को उतारने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।


आलिया भट्ट की आगामी फिल्म ‘अल्फा’ का पोस्टर जारी, रिलीज डेट का भी हुआ एलान

अल्फा से जुड़ी नई अपडेट सामने आई है। आलिया भट्ट स्टारर इस स्पाई थ्रिलर फिल्म का नया पोस्टर जारी कर दिया गया है, जिसके साथ इसकी रिलीज डेट का भी खुलासा किया गया है। यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की यह पहली महिला-प्रधान जासूसी एक्शन फिल्म मानी जा रही है।

यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की बहुप्रतीक्षित फिल्म अल्फा का नया पोस्टर जारी कर दिया गया है। अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फिल्म की झलक साझा करते हुए इसकी रिलीज डेट की घोषणा की। पोस्टर में आलिया भट्ट का इंटेंस लुक दिखाई दे रहा है, जिसने दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है।

निर्माताओं के अनुसार यह फिल्म 10 जुलाई 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। पोस्टर में फिल्म का टाइटल ‘Alpha’ उभरकर सामने आता है, जो इसके हाई-ऑक्टेन एक्शन और जासूसी मिशन की झलक देता है।

फिल्म की स्टारकास्ट की बात करें तो इसमें आलिया भट्ट के साथ अनिल कपूर, शरवरी वाघ और बॉबी देओलअहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन शिव रवैल कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि फिल्म में बॉबी देओल खलनायक की भूमिका निभाते दिखाई देंगे।

यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की यह फिल्म एक हाई-ऑक्टेन जासूसी एक्शन थ्रिलर है, जिसमें दो महिला एजेंट्स के मिशन और उनके साहसिक ऑपरेशन को दिखाया जाएगा। फिल्म की घोषणा के बाद से ही दर्शकों के बीच इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।

(साभार)


पश्चिम एशिया में तनाव पर सरकार चिंतित, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता- एस जयशंकर

राज्यसभा में बोले एस जयशंकर, पश्चिम एशिया के हालात पर सरकार सतर्क

नई दिल्ली। राज्यसभा में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वहां फंसे भारतीय नागरिकों के मुद्दे पर चर्चा के दौरान विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सदन में बयान देते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भारत ने पहले ही चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और संबंधित मंत्रालय आपसी समन्वय के साथ आवश्यक कदम उठा रहे हैं।

जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं और यह क्षेत्र देश की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत भी है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जबकि ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। ऐसे में क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा संकट के कारण सुरक्षा हालात प्रभावित हुए हैं और इसका असर आम जनजीवन पर भी पड़ा है। इस दौरान भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है, जबकि एक नाविक अभी भी लापता बताया जा रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा के लिए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार सक्रिय है। वहां पढ़ रहे छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने में मदद की जा रही है और जरूरतमंद नागरिकों को पड़ोसी देशों के रास्ते स्वदेश लौटने में सहायता दी जा रही है। अब तक हजारों भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा हालात में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना चुनौतीपूर्ण है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत के सहयोग के लिए आभार जताया है। भारत ने मानवीय आधार पर ईरान के युद्धपोत ‘लवन’ को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी थी, जिसके लिए ईरान ने धन्यवाद दिया है।


टी20 विश्व कप 2026- भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर खिताब किया अपने नाम

टीम इंडिया ने तीसरी बार किया टी20 वर्ल्ड कप पर कब्जा

नई दिल्ली। आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में भारत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर तीसरी बार टी20 विश्व कप जीतने का गौरव हासिल किया। इस जीत के साथ भारत टी20 विश्व कप का खिताब तीन बार जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई।

फाइनल में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने दमदार प्रदर्शन किया और 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। भारत की ओर से संजू सैमसन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 46 गेंदों में 89 रन की तेजतर्रार पारी खेली, जिसमें पांच चौके और आठ छक्के शामिल रहे। उनके अलावा अभिषेक शर्मा ने 21 गेंदों में 52 और ईशान किशन ने 25 गेंदों में 54 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। अंतिम ओवरों में शिवम दुबे ने भी तेज बल्लेबाजी करते हुए आठ गेंदों में नाबाद 26 रन जोड़े। हालांकि कप्तान सूर्यकुमार यादव खाता नहीं खोल सके और हार्दिक पंड्या 18 रन बनाकर आउट हुए।

न्यूजीलैंड की ओर से गेंदबाजी में जिमी नीशम सबसे सफल रहे। उन्होंने चार ओवर में 46 रन देकर तीन विकेट हासिल किए। उनके अलावा रचिन रविंद्र और मैट हेनरी को एक-एक सफलता मिली।

256 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। सलामी बल्लेबाज फिन एलन जल्दी आउट हो गए, जबकि टिम साइफर्ट ने 26 गेंदों में 52 रन बनाकर टीम को संभालने की कोशिश की। कप्तान मिचेल सैंटनर ने भी 35 गेंदों में 43 रन की पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका। पूरी कीवी टीम 19 ओवर में 159 रन पर सिमट गई।

भारत की ओर से गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार ओवर में मात्र 15 रन देकर चार विकेट लिए। अक्षर पटेल ने तीन विकेट झटके, जबकि हार्दिक पंड्या, वरुण चक्रवर्ती और अभिषेक शर्मा को एक-एक विकेट मिला।


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