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श्रीलंका- चक्रवात दित्वाह ने मचाई तबाही, अब तक 334 की मौत, 370 लोग लापता

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

श्रीलंका- चक्रवात दित्वाह ने मचाई तबाही, अब तक 334 की मौत, 370 लोग लापता

11 लाख से अधिक लोग प्रभावित

कोलंबो। श्रीलंका इन दिनों चक्रवात दित्वाह की विनाशकारी मार झेल रहा है, जिसने देश के कई हिस्सों में व्यापक तबाही मचा दी है। लगातार बारिश, तेज हवाओं और भारी बाढ़ के कारण हालात इतने बिगड़ गए हैं कि हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं और कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। देश के डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अब तक 334 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 370 से अधिक लोग लापता हैं। सबसे अधिक नुकसान कैंडी जिला में दर्ज किया गया है, जहां अकेले 88 लोगों की जान गई और 150 लोग अभी भी लापता हैं।

आपदा का असर कई जिलों में गहरा रहा—बादुला में 71, नुवारा एलिया में 68 और मटाले में 23 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। DMC ने बताया कि कुल 3,09,607 परिवारों के 11 लाख से अधिक लोग किसी न किसी रूप में इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ ने नदियों के जलस्तर को ऐतिहासिक स्तर तक पहुंचा दिया, जिससे कई शहर पूरी तरह जलमग्न हो गए है, बड़े पुल बह गए और कई महत्वपूर्ण सड़कें और इमारतें ढह गईं।

नेपाल की आपात सहायता

चक्रवात से जूझ रहे श्रीलंका की कठिनाइयों को देखते हुए नेपाल सरकार ने आगे आकर 2 लाख अमेरिकी डॉलर की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह राशि राहत और बचाव कार्यों को गति देने के लिए उपयोग की जाएगी। कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण संचार और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

स्टारलिंक की बड़ी घोषणा—मुफ़्त इंटरनेट

आपदा के दौरान संचार व्यवस्था को बनाए रखने की कोशिश में, स्टारलिंक ने प्रभावित क्षेत्रों में मुफ़्त इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने की घोषणा की है। कंपनी ने कहा कि दिसंबर 2025 तक नए और पुराने सभी उपयोगकर्ताओं को मुफ्त कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी, ताकि राहत और बचाव कार्यों में तेजी आ सके।

भारत का ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू

श्रीलंका की स्थिति को देखते हुए भारत ने मानवीय आधार पर ऑपरेशन सागर बंधु की शुरुआत की है। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से 21 टन राहत सामग्री, 80 से अधिक NDRF के जवान और 8 टन महत्वपूर्ण उपकरण कोलंबो पहुंचाए गए। इसके अलावा पुणे से भी NDRF की एक टीम और अतिरिक्त उपकरण एयरलिफ्ट किए गए।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ने मुश्किल हालात में भी तेज और समन्वित राहत कार्य करते हुए अपने पड़ोसी देश के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।


सुमात्रा में मूसलाधार बारिश का कहर, बाढ़–भूस्खलन से 10 की मौत, 2,000 से ज्यादा घर जलमग्न

राहत शिविर बनाए गए, लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील

मेदान सुमात्रा।  इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में लगातार हो रही तेज बारिश ने व्यापक तबाही मचा दी है। भारी बारिश से आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार पिछले सप्ताह से जारी मानसूनी बारिश के कारण कई नदियों के तटबंध टूट गए, जिससे हालात और बिगड़ गए।

स्थानीय पुलिस के मुताबिक, उत्तर सुमात्रा के पहाड़ी इलाकों में कीचड़, चट्टानों और बड़े-बड़े पेड़ों के गिरने से व्यापक क्षति हुई है। कई गांवों में घर मलबे के नीचे दब गए हैं, जिससे राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज़्यादा प्रभावित सिबोल्गा शहर में अब तक पांच शव बरामद किए गए हैं, जबकि तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, मध्य तपनौली जिले में भूस्खलन के कारण कई मकान ढह गए, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। बाढ़ से करीब 2,000 घर और सार्वजनिक भवन जलमग्न हो गए हैं।

दक्षिण तपनौली जिले में पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत और एक अन्य के घायल होने की पुष्टि की गई है। मंडेलिंग नटाल जिले में एक पुल बह गया और 470 से अधिक घर पानी में डूब गए। नियास द्वीप पर कीचड़ और मलबे के ढेर ने मुख्य सड़क को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है।

सिबोल्गा के पुलिस प्रमुख एडी इंगंटा ने बताया कि प्रशासन ने आपातकालीन राहत शिविर स्थापित कर दिए हैं और खतरे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तुरंत स्थान खाली करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार हो रही बारिश नए भूस्खलन का खतरा बढ़ा रही है। खराब मौसम और रास्तों के बाधित होने के कारण बचाव अभियान भी धीमा पड़ गया है।

उधर, राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने जावा द्वीप के दो जिलों में 10 दिनों से चल रहे राहत अभियान की समाप्ति की घोषणा की थी, लेकिन ठीक उसके बाद ही सुमात्रा में बाढ़ और भूस्खलन का नया संकट पैदा हो गया। मध्य जावा के सिलाकैप और बंजारनेगारा जिलों में भूस्खलन से हुई तबाही में अब तक 38 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।


सऊदी अरब में भीषण सड़क हादसा, यात्रियों से भरी बस में लगी आग, 40 से अधिक भारतीयों की मौत की आशंका

उमराह के लिए गए भारतीयों की बस हादसे का शिकार, पीएम मोदी ने जताया दुख; दूतावास अलर्ट पर

रियाद। सऊदी अरब में देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। उमराह के लिए गए यात्रियों को ले जा रही बस मदीना के पास एक तेल टैंकर से टकरा गई, जिसके बाद वाहन में आग लग गई। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, 40 से अधिक भारतीय यात्रियों की मौत की संभावना है, जिनमें कई हैदराबाद के निवासी बताए जा रहे हैं।

बस और डीज़ल टैंकर की जोरदार टक्कर, आग की लपटों में घिरी बस

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मक्का से मदीना जा रही बस मदीना से लगभग 160 किलोमीटर दूर मुहरास/मुफरिआत क्षेत्र में एक डीज़ल टैंकर से जा टकराई। हादसा तड़के करीब 1:30 बजे हुआ, जब अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। टक्कर के तुरंत बाद बस में आग लग गई, जिससे कई लोग बच नहीं सके। घटना की भयावहता इतनी थी कि कई शवों की शिनाख्त करना भी मुश्किल बताया जा रहा है। शुरुआती अनुमानों में कम से कम 42 लोगों के मारे जाने की सूचना है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल माने जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, दूतावास सक्रिय

हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। पीएम ने कहा कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दाह का महावाणिज्य दूतावास लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। भारतीय अधिकारी सऊदी अरब प्रशासन के संपर्क में हैं और अपडेट जुटा रहे हैं।

तेलंगाना सरकार भी हरकत में

तेलंगाना सीएमओ द्वारा जारी बयान में बताया गया कि मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और डीजीपी को तुरंत हादसे से संबंधित सभी विवरण एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मृतकों और घायलों में हैदराबाद के कितने लोग शामिल हैं। राज्य सरकार ने विदेश मंत्रालय और सऊदी दूतावास से नियमित संपर्क बनाए रखने को कहा है। सचिवालय में कंट्रोल रूम स्थापित किए जाने के भी आदेश दिए गए हैं ताकि परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके।

महावाणिज्य दूतावास ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

जेद्दाह स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने 24×7 सहायता के लिए कंट्रोल रूम की स्थापना की है। पीड़ितों से जुड़े परिवार इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
टोल फ्री: 8002440003

ओवैसी ने भी जताई चिंता, दूतावास से मांगी जानकारी

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी हादसे पर दुख जताते हुए बताया कि उन्होंने शहर की दो ट्रैवल एजेंसियों और भारतीय दूतावास के अधिकारियों से जानकारी मांगी है। सांसद ने कहा कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन अबु मैथ्यू जॉर्ज ने उनसे संपर्क में रहते हुए बताया कि विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

विदेश मंत्री जयशंकर और केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने दी प्रतिक्रिया

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार पीड़ितों की मदद के लिए तत्पर है और दूतावास हादसे से प्रभावित सभी लोगों को सहायता प्रदान कर रहा है। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और घायलों के स्वस्थ होने की कामना की।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी संवेदना जताते हुए कहा कि दूतावास अधिकारी पीड़ितों और उनके परिजनों को जानकारी उपलब्ध कराने में जुटे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नीचे दिए गए हेल्पलाइन नंबरों पर आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सकती है:

हेल्पलाइन नंबर:

8002440003 (टोल फ्री)

0122614093

0126614276

0556122301 (व्हाट्सऐप)


फिनलैंड सीमा के पास रूसी Su-30 विमान दुर्घटनाग्रस्त, दो पायलटों की मौत

घने जंगलों वाले क्षेत्र में गिरा रूसी लड़ाकू विमान

मास्को। फिनलैंड की सीमा के करीब स्थित करेलिया क्षेत्र में एक रूसी Su-30 लड़ाकू विमान प्रशिक्षण उड़ान के दौरान हादसे का शिकार हो गया। दुर्घटना में विमान के दोनों पायलटों की मौत हो गई। रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि यह एक नियमित प्रशिक्षण मिशन था, जिसके दौरान विमान अचानक नियंत्रण खो बैठा और घने जंगलों वाले निर्जन क्षेत्र में गिर गया।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दुर्घटना के समय विमान पर कोई हथियार या गोला-बारूद नहीं था। मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि विमान नियमित उड़ान के लिए रवाना हुआ था, लेकिन जल्द ही उसका संपर्क टूट गया और बाद में उसे दुर्घटनाग्रस्त पाया गया।

घटना के बाद करेलिया गणराज्य के गवर्नर आर्टुर परफेनचिकोव ने तत्काल आपातकालीन सेवाओं को संदिग्ध स्थल की ओर रवाना किया। उन्होंने बताया कि प्राथमिक जांच के अनुसार, विमान घने जंगलों में गिरने के कारण जमीन पर किसी प्रकार के नुकसान या नागरिक जनहानि की सूचना नहीं है।

आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा तलाश रही हैं और दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है। रूस के रक्षा अधिकारियों ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।


फ्लोरिडा में दर्दनाक हादसा- तेज रफ़्तार कार बार में घुसी, 4 की मौत

पुलिस से बचकर भाग रहा था युवक, 11 लोग घायल 

वॉशिंगटन। फ्लोरिडा के टेम्पा शहर में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। पुलिस से बचकर भाग रहा एक युवक तेज रफ़्तार में कार लेकर ऐसे दौड़ा कि नियंत्रण खो बैठा और गाड़ी सीधे एक भीड़भाड़ वाले बार में जा घुसी। इस भीषण टक्कर में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 लोग घायल हो गए।

टेम्पा पुलिस के अनुसार करीब रात 12.40 बजे पेट्रोलिंग टीम ने एक सेडान को लापरवाही से चलाते हुए देखा और उसे रोकने का प्रयास किया। जैसे ही पुलिस आगे बढ़ी, कार चालक ने गति और बढ़ा दी और भागने लगा। पीछा करते हुए अचानक मोड़ पर कार अनियंत्रित हो गई और पास के बार के अंदर जा घुस गई, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि एक घायल ने अस्पताल ले जाते समय अपनी जान गंवा दी। कई घायल अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें दो की हालत नाज़ुक बताई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान 22 वर्षीय सिलास सिंपसन के रूप में की गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी इससे पहले भी स्ट्रीट रेसिंग में शामिल था और जब पुलिस ने उसे दोबारा तेज रफ़्तार में देखा तो वह बचकर निकलने की कोशिश कर रहा था।

आरोपी को गिरफ्तार कर हिल्सबोरो काउंटी जेल भेज दिया गया है। उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने, पुलिस से बचकर भागने और जान से मारने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।


सरकारी शटडाउन हुए 34 दिन बीते, अमेरिका की हवाई सेवाएं चरमराईं

बिना वेतन काम कर रहे कर्मी, हवाई अड्डों पर बढ़ा संकट

वॉशिंगटन। अमेरिका में सरकारी शटडाउन हुए 34 दिन बीत चुके हैं और इसका असर अब देश की हवाई सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। एयर ट्रैफिक नियंत्रक और सुरक्षा जांच करने वाले कर्मचारी बिना वेतन के काम कर रहे हैं। कई कर्मचारी आर्थिक दबाव के कारण ड्यूटी पर नहीं आ रहे, जिससे तमाम बड़े हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, नियंत्रक अतिरिक्त काम और दूसरी तरह की नौकरी करने को मजबूर हैं ताकि रोजमर्रा का खर्च चला सकें। इसका असर हवाई अड्डों की व्यवस्था पर दिख रहा है—सुरक्षा जांच में लंबी लाइनें, यात्री परेशान और सुरक्षा का भरोसा भी कम हो रहा है।

“हवाई तंत्र हर दिन थोड़ा और असुरक्षित होता जा रहा”

नेशनल एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष निक डेनियल्स ने कहा कि लगातार बिना वेतन के काम करने से कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बहुत बढ़ गया है। उनके मुताबिक जब दिमाग में किराया, बिल और घर के खर्च की चिंता रहती है, तो सौ प्रतिशत ध्यान दे पाना संभव नहीं है और यह स्थिति हवाई सुरक्षा को प्रभावित कर रही है।

परिवहन मंत्री की सफाई — उड़ानों में देरी सुरक्षा को बचाने के लिए

अमेरिका के परिवहन मंत्री सीन डफी का कहना है कि उड़ानों में देरी करना मजबूरी है, क्योंकि स्टाफ की कमी से जोखिम बढ़ गया है। उनका कहना है कि अगर स्थिति और बिगड़ी तो पूरा वायुक्षेत्र अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ सकता है। लेकिन सुरक्षा से किसी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।

कई बड़े हवाई अड्डों पर व्यवस्था चरमराई

शिकागो, डेनवर, ह्यूस्टन और नेवार्क जैसे बड़े विमानतल पर देरी लगातार बढ़ रही है। ह्यूस्टन के हवाई अड्डे ने यात्रियों को सूचना दी है कि सुरक्षा जांच में तीन घंटे तक लग सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कई कर्मचारी अब मजबूरी में पहले अपने परिवार और जरूरतों को महत्व दे रहे हैं। कुछ नियंत्रकों ने तो कहा कि अगर वे ध्यान में कमी महसूस करते हैं, तो ड्यूटी पर न जाना ही बेहतर है ताकि हादसे का कोई जोखिम न बढ़े।

समस्या सुरक्षा से ज़्यादा भरोसे की हो गई है

यात्रा संगठनों का कहना है कि हवाई यात्रियों का भरोसा टूट रहा है, क्योंकि समय पर उड़ान और समय पर पहुंचने की उम्मीद खत्म होती जा रही है। यूनियन की ओर से फिर अपील की गई है कि सरकार को तुरंत खोला जाए। अब कर्मचारियों और यात्रियों के लिए इस स्थिति को और ज्यादा झेलना संभव नहीं है।


दक्षिण चीन में सुरक्षा मजबूती की तैयारी : फिलीपींस और कनाडा में नई डिफेंस पार्टनरशिप फाइनल

मनीला। दक्षिण चीन क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच फिलीपींस और कनाडा अब रक्षा साझेदारी को औपचारिक रूप देने की तैयारी में हैं। मनीला में रविवार को दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच बैठक के बाद एक रणनीतिक सैन्य सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के तहत दोनों देश भविष्य में संयुक्त ट्रेनिंग, एक्सरसाइज व सुरक्षा मिशन में एक–दूसरे का सहयोग करेंगे।

फिलीपींस सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य नियम आधारित व्यवस्था को मजबूती देना है ताकि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की ‘बाहरी सैन्य दबाव की कोशिशों’ का जवाब दिया जा सके। फिलीपींस पिछले कुछ सालों से अपने डिफेंस नेटवर्क को बढ़ाने में जुटा है और कई देशों के साथ मिलकर नई रक्षा कवायदें शुरू कर चुका है।

हालांकि चीन पहले भी कई बार दक्षिण चीन सागर में सैन्य मुद्राओं पर सवाल उठाता रहा है और ऐसे रक्षा सहयोगों को “अस्थिरता बढ़ाने वाला” कदम बताता रहा है।

2016 में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल दक्षिण चीन सागर में चीन के दावे को अस्वीकार कर चुका है, लेकिन चीन लगातार इस फैसले को मानने से इंकार करता रहा है। इस पूरे विवाद में वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई जैसी कई और देश भी दावेदारी रखते हैं।

फिलीपींस रक्षा मंत्रालय के अनुसार नया समझौता उन सारे मामलों में सहयोग का रास्ता तय करेगा जहां साझा सुरक्षा हित जुड़े हुए हैं, और भविष्य में क्षेत्रीय शांति के लिए यह पार्टनरशिप अहम भूमिका निभा सकती है।


शेनझेन में होगा एपीईसी शिखर सम्मेलन-2026, शी जिनपिंग ने किया ऐलान

शी जिनपिंग ने कहा- 2026 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 21 देशों के शीर्ष नेता इसी शहर में विकास और सहयोग के नए एजेंडा पर चर्चा करेंगे

बीजिंग/सियोल। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ऐलान किया कि वर्ष 2026 का एपीईसी शिखर सम्मेलन चीन के शेनझेन में आयोजित होगा। दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू में सम्पन्न एपीईसी-2025 की समापन बैठक में शी ने कहा कि एक समय मछुआरों का छोटा सा कस्बा रहा शेनझेन आज चीन के खुलेपन और तकनीकी विकास का प्रतीक अंतरराष्ट्रीय महानगर है। उन्होंने कहा कि 2026 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 21 देशों के शीर्ष नेता इसी शहर में विकास और सहयोग के नए एजेंडा पर चर्चा करेंगे।

ट्रंप-शी मुलाकात से एपीईसी-2025 में बना माहौल
इस बार के एपीईसी शिखर सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात सबसे ज्यादा चर्चा में रही। दोनों नेताओं ने टैरिफ और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स ट्रेड पर महत्वपूर्ण सहमति बनाई। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चीन पर लगे फेंटानिल से जुड़े टैरिफ को 20% से घटाकर 10% करेगा। बदले में चीन ने अमेरिका से सोयाबीन और सेमीकंडक्टर चिप्स की खरीद को हरी झंडी दी और दुर्लभ खनिजों के निर्यात नियंत्रण को नरम करने पर हामी भरी।

ट्रंप ने यह भी कहा कि वे अप्रैल 2026 में चीन की यात्रा पर आएंगे। संकेत मिले हैं कि ट्रंप भी शेनझेन में होने वाले अगले एपीईसी में शामिल हो सकते हैं।

AI, टेक्नोलॉजी और डेवलपमेंटल सपोर्ट पर जोर
शी ने सदस्य देशों से कहा कि एशिया-प्रशांत की असली ताकत उसकी एकजुटता में है। नई तकनीकों—खासतौर पर AI—में ओपन इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाए और विकसित देश विकासशील देशों को टेक्नोलॉजी, फाइनेंस और कैपेसिटी बिल्डिंग में मदद दें।

शेनझेन को APEC-2026 होस्ट का दर्जा क्यों
शेनझेन चीन का पहला स्पेशल इकोनॉमिक जोन रहा है। यही से देश की आधुनिक आर्थिक सुधार मॉडल की शुरुआत हुई। टेक स्टार्टअप्स, मैन्युफैक्चरिंग हब और समुद्री व्यापार की मजबूत पकड़ के कारण चीन इसे 2026 शिखर सम्मेलन के लिए “आदर्श स्थान” के रूप में प्रोजेक्ट कर रहा है।


अमेरिका में शटडाउन पर सियासी घमासान, ट्रंप ने उठाई ‘फिलिबस्टर खत्म’ करने की मांग

ट्रंप ने कहा– रिपब्लिकन साधारण बहुमत से पारित करें कानून, वरना देश को होगा और नुकसान

वॉशिंगटन। अमेरिका में जारी सरकारी शटडाउन को लेकर सियासी टकराव और गहरा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटरों से अपील की है कि वे ‘परमाणु विकल्प (Nuclear Option)’ अपनाकर फिलिबस्टर नियम को खत्म करें। उनका कहना है कि अगर यह कदम उठाया गया तो शटडाउन तत्काल समाप्त हो सकता है और सरकार सामान्य बहुमत से कानून पारित कर सकेगी।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “अब वक्त है कि रिपब्लिकन अपना ‘ट्रंप कार्ड’ खेलें — फिलिबस्टर खत्म करें और शटडाउन का अंत करें।”

उनका यह बयान एशिया दौरे से लौटने के बाद आया है। ट्रंप ने दावा किया कि डेमोक्रेट्स ने सरकार को शटडाउन की स्थिति में पहुंचा दिया है और रिपब्लिकन पार्टी को अब निर्णायक कदम उठाना चाहिए।

फिलिबस्टर विवाद फिर गर्माया

अमेरिकी राजनीति में फिलिबस्टर एक ऐसा नियम है, जिसके तहत सीनेट में किसी भी विधेयक को पारित करने के लिए 60 वोटों की आवश्यकता होती है। यह नियम लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसके जरिए विपक्ष किसी भी विधेयक को रोक सकता है।

ट्रंप ने कहा कि अतीत में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने भी इस नियम को समाप्त करने की बात कही थी, ताकि मतदान अधिकार और गर्भपात से जुड़े कानून पारित किए जा सकें, लेकिन उन्हें अपनी ही पार्टी से पूरा समर्थन नहीं मिला।

“अगर डेमोक्रेट्स सत्ता में होते, तो वे फिलिबस्टर खत्म कर देते” – ट्रंप

राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि अगर डेमोक्रेट्स को मौका मिलता, तो वे अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए यह नियम खत्म करने में हिचकिचाते नहीं। उन्होंने कहा कि अब जबकि रिपब्लिकन सत्ता में हैं, उन्हें देशहित में वही कदम उठाना चाहिए।

शटडाउन से अमेरिका की सेवाओं पर असर

सरकारी शटडाउन को एक माह से अधिक हो चुका है। इससे कई फेडरल एजेंसियों के कामकाज प्रभावित हुए हैं और एसएनएपी (खाद्य सहायता) जैसी योजनाओं पर भी असर पड़ने का खतरा है।

कई रिपब्लिकन सीनेटर अस्थायी रूप से 60 वोटों के नियम को निलंबित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं, जबकि डेमोक्रेट्स फंडिंग बिल में अफोर्डेबल केयर एक्ट की सब्सिडी बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं।

सीनेट में फिलहाल रिपब्लिकन के पास 53 सीटें हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं है कि फिलिबस्टर खत्म करने के लिए पार्टी के पास पर्याप्त समर्थन मौजूद है या नहीं।


कैरिबियाई देशों में तबाही: तूफान ‘मेलिसा’ की चपेट में क्यूबा, हैती और जमैका, कई लोगों की मौत

सदी के सबसे भीषण तूफानों में शामिल ‘मेलिसा’, 295 किमी/घंटा की रफ्तार से चली हवाएं

सैंटियागो डी क्यूबा।  सदी के सबसे शक्तिशाली तूफानों में शामिल ‘मेलिसा’ ने क्यूबा, हैती और जमैका में भारी तबाही मचा दी है। 295 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने सैकड़ों घरों की छतें उड़ा दीं, पेड़-पौधे और बिजली के खंभे उखाड़ दिए, जबकि दर्जनों लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और कई इलाके अब भी पानी में डूबे हैं।

जमैका के सेंट एलिजाबेथ जिले में भूस्खलन के कारण मुख्य सड़कें बंद हैं। कई घरों में कमर तक पानी भरा है, और राहत शिविरों में करीब 25 हजार से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। बिजली मंत्री डिक्सन के मुताबिक, 77 प्रतिशत इलाके अंधेरे में डूबे हैं। प्रधानमंत्री एंड्रयू होलनेस ने कहा कि “पुनर्निर्माण में समय लगेगा, लेकिन सरकार राहत कार्य में पूरी तरह जुटी है।”

हैती में 25 लोगों की मौत और 18 के लापता होने की पुष्टि हुई है। नागरिक सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी तटीय इलाकों में बाढ़ से कई घर बह गए हैं। पेटिट-गोआव कस्बे में 160 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त और 80 पूरी तरह तबाह हो गए। मृतकों में 10 बच्चे भी शामिल हैं।

क्यूबा के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में हालात बेहद गंभीर हैं। कई इमारतें जमींदोज हो गईं, सड़कें बंद हैं और अस्पतालों में क्षति हुई है। 7.3 लाख से अधिक लोग अब भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। राष्ट्रपति मिगेल डियास-कानेल ने कहा कि जैसे ही मौसम स्थिर होगा, पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अब यह तूफान श्रेणी-2 में कमजोर हुआ है और अगले कुछ घंटों में बहामास में तेज हवाओं और बाढ़ का कारण बन सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद की पेशकश शुरू हो गई है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां और अमेरिकी राहत दल प्रभावित क्षेत्रों में सहायता भेजने की तैयारी में हैं। वहीं, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि असली नुकसान का आंकलन बिजली और संचार बहाल होने के बाद ही संभव होगा।


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