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डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को बताया वेनेजुएला का ‘कार्यवाहक राष्ट्रपति’, मचा वैश्विक हलचल

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को बताया वेनेजुएला का ‘कार्यवाहक राष्ट्रपति’, मचा वैश्विक हलचल

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का विवादित पोस्ट, वेनेजुएला को लेकर नई सनसनी

वाशिंगटन। अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट साझा की। पहले ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और सैन्य कार्रवाई के दावों से सुर्खियों में रहे ट्रंप ने अब खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति बताकर वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें उन्हें वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति दर्शाया गया है। यह तस्वीर डिजिटल रूप से संपादित बताई जा रही है, लेकिन इसके साथ किए गए दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है। पोस्ट ऐसे समय में सामने आई है, जब ट्रंप लगातार वेनेजुएला के तेल भंडार को लेकर अमेरिकी तेल कंपनियों के साथ बैठकें कर रहे हैं और वैश्विक मामलों पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

पोस्ट में साझा की गई तस्वीर एक संपादित विकिपीडिया पेज जैसी प्रतीत होती है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप को जनवरी 2026 तक वेनेजुएला का मौजूदा राष्ट्रपति बताया गया है। ट्रंप इससे पहले भी यह दावा कर चुके हैं कि जब तक वेनेजुएला में सुरक्षित और व्यवस्थित सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका वहां की शासन व्यवस्था की निगरानी करेगा।

इसी कड़ी में ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में दुनिया की प्रमुख तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वेनेजुएला में भविष्य का निवेश सीधे अमेरिका के माध्यम से होगा, न कि वहां की मौजूदा सरकार के साथ। ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों को सुरक्षा और स्थिरता का भरोसा दिलाते हुए बड़े पैमाने पर निवेश के लिए प्रोत्साहित किया।

ट्रंप का कहना है कि यदि अमेरिका ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो चीन या रूस वेनेजुएला में अपनी मजबूत पकड़ बना सकते थे। उनका तर्क है कि अमेरिकी दखल का उद्देश्य वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाना और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करना है।

जानकारों के मुताबिक अमेरिका की रणनीति वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों पर प्रभाव बनाए रखने, तेल उत्पादन और बुनियादी ढांचे को पुनर्जीवित करने और वैश्विक आपूर्ति पर नियंत्रण मजबूत करने से जुड़ी हुई है। हालांकि ट्रंप का यह कदम कूटनीतिक मर्यादाओं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को लेकर कई सवाल भी खड़े कर रहा है।


बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ता संकट, 18 दिनों में 6 हिंदुओं की हत्या से दहशत

भारत में भी उठा मुद्दा, भाजपा नेताओं ने बांग्लादेश सरकार को घेरा

ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। बीते 18 दिनों के भीतर देश के अलग-अलग हिस्सों में छह हिंदुओं की हत्या ने न सिर्फ स्थानीय समुदाय को दहशत में डाल दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामलों में एक किराना व्यापारी और एक हिंदू पत्रकार की नृशंस हत्या सामने आई है।

सोमवार को राजधानी ढाका के बाहरी क्षेत्र नरसिंगदी में किराना दुकान चलाने वाले शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शरत अपने चारसिंदूर बाजार स्थित दुकान पर मौजूद थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर अचानक हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल शरत को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि शरत पहले दक्षिण कोरिया में काम कर चुके थे और कुछ वर्ष पूर्व ही अपने देश लौटे थे। हत्या के बाद इलाके में तनाव का माहौल है, जबकि पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है। इसी दिन जशोर जिले के मनीरामपुर क्षेत्र में हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की भी निर्मम हत्या कर दी गई। 45 वर्षीय राणा एक फैक्ट्री मालिक होने के साथ-साथ स्थानीय अखबार के संपादक के रूप में कार्यरत थे। हमलावरों ने पहले उन्हें गोली मारी और फिर धारदार हथियार से उनका गला रेत दिया। पुलिस के अनुसार, घटना शाम करीब छह बजे हुई और हमलावर फरार हो गए।

लगातार हो रही इन हत्याओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों में गहरी नाराजगी है। सामाजिक कार्यकर्ता बप्पादित्य बसु ने आरोप लगाया कि यदि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले वर्षों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि पीड़ितों को पहले से धमकियां दी जा रही थीं और प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

भारत में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदुओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए जाने की जरूरत पर जोर दिया।

लगातार बढ़ती हिंसा की घटनाओं के बीच बांग्लादेश सरकार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षा और न्याय की मांग कर रहा है, जबकि हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।


अमेरिका के एरिजोना में निजी हेलिकॉप्टर क्रैश, चार लोगों की मौत

सुपीरियर (अमेरिका)- अमेरिका के एरिजोना राज्य में शुक्रवार को एक भीषण हवाई हादसा हो गया। पहाड़ी क्षेत्र में उड़ान भर रहा एक निजी हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और जांच एजेंसियों में हड़कंप मच गया।

अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना सुबह करीब 11 बजे टेलीग्राफ कैन्यन क्षेत्र के पास हुई, जो फीनिक्स से लगभग 100 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। हेलिकॉप्टर एक मनोरंजन गतिविधि के लिए लगाए गए लंबे स्टील केबल से टकरा गया, जिसके बाद संतुलन बिगड़ने से वह गहरी खाई में जा गिरा।

हादसे में 59 वर्षीय पायलट और तीन युवा महिलाओं की जान गई है, जिनकी उम्र 21 और 22 वर्ष बताई जा रही है। पिनाल काउंटी शेरिफ कार्यालय ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतकों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हेलिकॉप्टर उड़ान के दौरान अचानक एक केबल से टकराया और कुछ ही पलों में नीचे गिर गया। हादसे की सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय किया गया, लेकिन दुर्गम इलाका होने के कारण बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में कई घंटे लग गए।

जानकारी के अनुसार हेलिकॉप्टर ने क्वीन क्रीक शहर के एक एयरफील्ड से उड़ान भरी थी। सुरक्षा कारणों के चलते हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में हवाई गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी गई।

इस दुर्घटना की जांच संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) और राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (एनटीएसबी) द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि हादसे के सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी।


नववर्ष के जश्न के दौरान खेरसॉन में ड्रोन हमला, 24 लोगों की मौत, कई घायल

रूस ने यूक्रेन पर लगाया नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप

मॉस्को। नए साल के पहले दिन रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष और अधिक तीव्र हो गया। रूस ने आरोप लगाया है कि गुरुवार को यूक्रेन की ओर से किए गए ड्रोन हमले में कम से कम 24 लोगों की जान चली गई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। यह हमला दक्षिणी खेरसॉन प्रांत में नववर्ष समारोह के दौरान हुआ बताया जा रहा है।

रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन ने रूस के नियंत्रण वाले खेरसॉन क्षेत्र में एक होटल और कैफे को निशाना बनाया, जहां लोग नए साल का जश्न मना रहे थे। मंत्रालय ने कहा कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक हमले में 50 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।

खेरसॉन के गवर्नर ने लगाया जानबूझकर हमले का आरोप
रूस द्वारा नियुक्त खेरसॉन के क्षेत्रीय गवर्नर व्लादिमीर साल्डो ने दावा किया कि तटीय गांव खोरली में नववर्ष समारोह स्थल पर तीन ड्रोन से हमला किया गया। उन्होंने इसे नागरिकों के खिलाफ किया गया सुनियोजित आतंकवादी हमला करार दिया। साल्डो के अनुसार, हमले के बाद आग लगने से कई लोग झुलस गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ड्रोन ने उन स्थानों को जानबूझकर निशाना बनाया, जहां नागरिक एकत्र थे। मंत्रालय ने इस हमले को युद्ध अपराध बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

रूस ने पश्चिमी देशों पर भी साधा निशाना
हमले के बाद रूसी अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल पर चारों ओर आग की लपटें और धुएं के गुबार दिखाई दिए। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि इस हमले के लिए यूक्रेन को समर्थन देने वाले पश्चिमी देशों की भी जिम्मेदारी बनती है। रूस की संसद के दोनों सदनों के अध्यक्षों समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने कीव की कड़ी आलोचना की है।

यूक्रेन ने नागरिकों को निशाना बनाने से किया इनकार
दूसरी ओर, यूक्रेन ने रूस के आरोपों को खारिज किया है। यूक्रेन के एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि उसकी सेना केवल सैन्य ठिकानों, ईंधन, ऊर्जा सुविधाओं और अन्य वैध लक्ष्यों पर ही कार्रवाई करती है और नागरिकों को निशाना नहीं बनाती।

गौरतलब है कि खेरसॉन उन चार यूक्रेनी क्षेत्रों में शामिल है, जिन पर रूस ने वर्ष 2022 में अपने नियंत्रण का दावा किया था। इस ताजा घटना ने दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता और बढ़ा दी है।


इंडोनेशिया के एक वृद्धाश्रम में लगी भीषण आग, 16 बुजुर्गों की दर्दनाक मौत

दो घंटे की मशक्कत के बाद काबू में आई आग, इलाके में शोक का माहौल

मनाडो (इंडोनेशिया)। इंडोनेशिया के उत्तरी सुलावासी प्रांत में एक वृद्धाश्रम में आग लगने से 16 बुजुर्गों की जान चली गई। यह हादसा मनाडो शहर के एक रिहायशी इलाके में उस समय हुआ, जब वृद्धाश्रम में रह रहे अधिकांश लोग सो रहे थे। अचानक लगी आग ने कुछ ही देर में पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस के मुताबिक, एक मंजिला इमारत में संचालित इस रिटायरमेंट होम में कई बुजुर्ग रह रहे थे। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। हादसे में 15 लोगों की मौत झुलसने से हुई, जबकि एक व्यक्ति की दम घुटने के कारण जान चली गई। वहीं 15 अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दमकल की छह गाड़ियां, दो घंटे में काबू
आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान आसपास के स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में मदद की। घायलों और मृतकों की पहचान के लिए परिजनों को अस्पताल बुलाया गया है।

शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच जारी
प्राथमिक जांच में आग लगने की वजह बिजली की फिटिंग में खराबी मानी जा रही है। हालांकि पुलिस और फायर विभाग ने कहा है कि घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है और प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।


अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे ट्रक चालकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 30 भारतीय गिरफ्तार

ट्रक हादसों के बाद अमेरिका में कड़ा एक्शन

वॉशिंगटन। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे विदेशी ट्रक चालकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बॉर्डर पेट्रोल पुलिस ने 30 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये सभी लोग कमर्शियल ड्राइवर लाइसेंस के आधार पर ट्रक चला रहे थे। यह कार्रवाई यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) द्वारा चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत की गई, जिसका मकसद अमेरिकी राजमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है।

सीबीपी की ओर से जारी बयान के अनुसार, कैलिफोर्निया के एल सेंट्रो सेक्टर में इमिग्रेशन चेकपॉइंट्स पर जांच के दौरान कुल 49 अवैध अप्रवासियों को पकड़ा गया। इनमें से 30 भारतीय नागरिक हैं, जबकि अन्य अल सल्वाडोर, चीन, एरिट्रिया, हैती, होंडुरास, मैक्सिको, रूस, सोमालिया, तुर्किये और यूक्रेन से संबंध रखते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान 23 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच चलाया गया, जिसमें कुल 42 ऐसे ट्रक चालकों की पहचान हुई जो अवैध रूप से अमेरिका में रहकर व्यावसायिक वाहन चला रहे थे।

जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए 31 लोगों के पास कैलिफोर्निया राज्य द्वारा जारी कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस थे, जबकि अन्य के लाइसेंस फ्लोरिडा, इलिनोइस, इंडियाना, ओहायो, मैरीलैंड, मिनेसोटा, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, पेंसिल्वेनिया और वाशिंगटन जैसे राज्यों से जारी किए गए थे। इमिग्रेशन एजेंसियों का कहना है कि इन चालकों को कभी भी व्यावसायिक ट्रक चलाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए थी।

अधिकारियों के मुताबिक, यह सख्त कदम हाल के महीनों में सामने आई कई गंभीर सड़क दुर्घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें अवैध रूप से रह रहे ट्रक चालकों की लापरवाही से लोगों की जान गई। एजेंसी ने साफ किया कि इस अभियान का उद्देश्य इमिग्रेशन कानूनों को सख्ती से लागू करना, कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेक्टर में नियमों का पालन सुनिश्चित करना और आम जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।

बॉर्डर पेट्रोल अधिकारियों ने कहा कि होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन और अन्य संघीय एजेंसियों के सहयोग से इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिन राज्यों ने नियमों के बावजूद ऐसे लोगों को कमर्शियल लाइसेंस जारी किए, उनकी भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी।


अज्ञात बंदूकधारियों ने अवैध शराबखाने में की ताबड़तोड़ फायरिंग, नौ लोगों की मौत

दिसंबर महीने में दक्षिण अफ्रीका में यह दूसरी बड़ी गोलीबारी की घटना

जोहानिसबर्ग। दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े शहर जोहानिसबर्ग में रविवार को हुई सामूहिक गोलीबारी ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के पश्चिमी हिस्से में स्थित बेकर्सडाल टाउनशिप में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक अवैध शराबखाने को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर अचानक शराबखाने में दाखिल हुए और बिना किसी चेतावनी के वहां मौजूद लोगों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। प्रारंभिक तौर पर मृतकों की संख्या दस बताई जा रही थी, लेकिन बाद में अधिकारियों ने नौ मौतों की पुष्टि की।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हमलावर दो वाहनों में सवार होकर आए थे। फायरिंग के बाद वे घटनास्थल से फरार हो गए और भागते समय भी गोलियां चलाते रहे। प्रांतीय पुलिस आयुक्त मेजर जनरल फ्रेड केकाना के अनुसार, मृतकों में एक व्यक्ति वह भी शामिल है जो शराबखाने के बाहर वाहन चला रहा था और गोलीबारी की चपेट में आ गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि गंभीर रूप से घायल लोगों के चलते मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक न तो हमलावरों की पहचान हो सकी है और न ही हमले के पीछे के मकसद का खुलासा हुआ है। अवैध शराबखानों से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों के एंगल से भी जांच की जा रही है।

गौरतलब है कि दिसंबर महीने में दक्षिण अफ्रीका में यह दूसरी बड़ी गोलीबारी की घटना है। इससे पहले प्रिटोरिया के पास एक हॉस्टल में हुए हमले में तीन साल के बच्चे समेत 12 लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने देश में कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।


अमेरिकी राष्ट्रपति का बीबीसी पर भ्रामक रिपोर्टिंग का आरोप, 10 अरब डॉलर के हर्जाने का मुकदमा दायर

बीबीसी की माफी के बाद भी नहीं थमे ट्रंप, अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश सार्वजनिक प्रसारक बीबीसी के खिलाफ बड़ा कानूनी कदम उठाया है। ट्रंप ने बीबीसी पर मानहानि और भ्रामक रिपोर्टिंग का आरोप लगाते हुए 10 अरब अमेरिकी डॉलर के हर्जाने की मांग के साथ मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि बीबीसी ने जानबूझकर उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

फ्लोरिडा में दायर 33 पन्नों की याचिका में ट्रंप ने कहा है कि बीबीसी ने उनके खिलाफ “झूठी, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण” सामग्री प्रसारित की। मुकदमे में दावा किया गया है कि प्रसारक ने न केवल पत्रकारिता की मर्यादाओं का उल्लंघन किया, बल्कि अनुचित व्यापारिक व्यवहार अपनाते हुए राजनीतिक हस्तक्षेप भी किया।

भाषण की एडिटिंग को लेकर विवाद

ट्रंप का कहना है कि बीबीसी ने 6 जनवरी 2021 को दिए गए उनके भाषण के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर इस तरह पेश किया, जिससे उनके बयान का अर्थ पूरी तरह बदल गया। आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील वाले हिस्से को हटा दिया गया और ऐसे शब्दों को जोड़ दिया गया, जो उन्होंने कहे ही नहीं थे।

पहले माफी, अब मुकदमा

इस विवाद को लेकर ट्रंप पहले भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे चुके थे। इसके बाद बीते महीने बीबीसी ने भाषण की एडिटिंग को लेकर ट्रंप से माफी तो मांगी थी, लेकिन मानहानि के आरोपों को खारिज कर दिया था। बीबीसी के अध्यक्ष समीर शाह ने इसे संपादकीय निर्णय में हुई चूक बताया था। इस मामले के सामने आने के बाद बीबीसी के शीर्ष समाचार अधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था।

डॉक्यूमेंट्री बनी विवाद की जड़

विवाद की जड़ बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री है, जो 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले ‘ट्रंप: ए सेकेंड चांस?’ शीर्षक से प्रसारित की गई थी। इस डॉक्यूमेंट्री में 6 जनवरी 2021 के भाषण के तीन अलग-अलग बयानों को जोड़कर एक ही संदर्भ में दिखाया गया, जबकि वे कथन लगभग एक घंटे के अंतराल में दिए गए थे। इससे ऐसा प्रतीत हुआ कि ट्रंप ने समर्थकों को उग्र कदम उठाने के लिए प्रेरित किया, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील वाले अंश को प्रसारण से बाहर रखा गया।

ट्रंप का तीखा बयान

व्हाइट हाउस में बिना सवाल-जवाब के दिए गए बयान में ट्रंप ने कहा कि बीबीसी ने उनके “मुंह में ऐसे शब्द डाल दिए, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं”। उन्होंने कहा कि उन्होंने देशभक्ति और शांति की बात की थी, लेकिन वही हिस्से जानबूझकर नहीं दिखाए गए।

कानूनी चुनौतियां भी संभव

यह मुकदमा फ्लोरिडा की अदालत में दायर किया गया है, क्योंकि ब्रिटेन में मानहानि से जुड़े मामलों की समयसीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में भी इस केस को लेकर चुनौतियां सामने आ सकती हैं, क्योंकि विवादित डॉक्यूमेंट्री वहां आधिकारिक रूप से प्रसारित नहीं की गई थी।


भारतीय समुद्री सीमा में पकड़े गए पाकिस्तानी मछुआरे, परिजनों ने लगाई रिहाई की गुहार

कराची- भारत की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने इस सप्ताह समुद्री सीमा उल्लंघन के आरोप में 11 पाकिस्तानी मछुआरों को हिरासत में लिया है। इन मछुआरों में दो नाबालिग भी शामिल बताए जा रहे हैं। गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद पाकिस्तान में उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है और उन्होंने दोनों देशों की सरकारों से मानवीय आधार पर रिहाई की अपील की है।

गिरफ्तार मछुआरों के परिवारों का कहना है कि वे बेहद गरीब हैं और समुद्र में मछली पकड़ना ही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। परिजनों ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह कूटनीतिक स्तर पर भारत से बातचीत कर जल्द से जल्द उनके स्वजनों को वापस लाने का प्रयास करे।

कराची के इब्राहिम हैदरी मछुआरा गांव में रहने वाले गुलाम मुस्तफा के पिता अहमद ब्रोही ने बताया कि उनका परिवार पहले भी ऐसी पीड़ा झेल चुका है। उन्होंने कहा कि चार साल पहले भी इसी इलाके के कुछ मछुआरे पकड़े गए थे, जो अब तक भारतीय जेलों में बंद हैं। उनका कहना है कि लगातार ऐसी घटनाएं मछुआरा समुदाय के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय तटरक्षक बल ने बुधवार को गुजरात के जखाऊ तट के पास इन मछुआरों की नाव को भारतीय जलक्षेत्र में पाए जाने के बाद कार्रवाई की। वहीं, सिंध फिशरीज विभाग की प्रमुख फातिमा मजीद का कहना है कि समुद्र में स्पष्ट सीमा रेखा न होने के कारण मछुआरे कई बार अनजाने में सीमा पार कर जाते हैं।

उन्होंने बताया कि सर क्रीक और काजर क्रीक जैसे क्षेत्रों में अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जहां दोनों देशों के मछुआरे पकड़े जाते हैं। फातिमा मजीद ने कहा कि समुद्र में काम करने वाले गरीब मछुआरों के लिए रोजी-रोटी सबसे बड़ी चिंता होती है, न कि सीमाएं।

इस बार हिरासत में लिए गए मछुआरों में 12 वर्षीय जहीर और 15 वर्षीय हबीब भी शामिल हैं। पाकिस्तान की ओर से भारत से विशेष रूप से अपील की गई है कि नाबालिगों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए रिहा किया जाए।

पाकिस्तान फिशरफोक फोरम के अनुसार, इस घटना के बाद भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तानी मछुआरों की संख्या बढ़कर करीब 74 हो गई है। आमतौर पर भारत और पाकिस्तान के बीच मछुआरों सहित कैदियों की अदला-बदली होती रही है, लेकिन हाल के समय में दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हुई है।


दित्वाह तूफान ने श्रीलंका में मचाई भीषण तबाही, अब तक 486 लोगों की मौत, कई लापता

भारत–श्रीलंका साझेदारी के तहत पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर हुई महत्वपूर्ण बातचीत

कोलंबो। श्रीलंका में चक्रवाती तूफान दित्वाह ने भीषण तबाही मचाते हुए भारी जन–धन की हानि की है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 486 लोगों की मौत, 341 लोग लापता, और हजारों परिवार विस्थापित हो गए हैं। तूफान के बाद आई भीषण बाढ़ और लगातार हो रहे भूस्खलन ने राहत-बचाव कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इस गंभीर स्थिति के बीच भारत ने मानवीय आधार पर तत्काल सहायता बढ़ाते हुए श्रीलंका के पुनर्निर्माण प्रयासों में सहयोग देने की घोषणा की है।

भारत की मदद पर चर्चा

श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने शुक्रवार को आवास और निर्माण मंत्री सुसील रानासिंघे से मुलाकात कर तूफान से हुई तबाही, राहत कार्यों की प्रगति और आगे की आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा की। उच्चायुक्त ने बताया कि भारत श्रीलंका के पुनर्वास और पुनर्निर्माण अभियानों में हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उच्चायुक्त संतोष झा ने एक्स (X) पर साझा पोस्ट में कहा कि चर्चा के दौरान दोनों देशों के बीच आवास निर्माण और पुनर्निर्माण क्षेत्र में विकास सहयोग को मजबूत करने के विकल्पों पर भी विचार किया गया।

भीषण तबाही के आँकड़े

श्रीलंका के आपदा प्रबंधन विभाग की शुक्रवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार:

486 लोगों की मौत

341 लोग लापता

2,303 घर पूरी तरह ध्वस्त

52,489 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त

तूफान की मार से प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी जलभराव, भूस्खलन और सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति बनी हुई है।

भारत का राहत अभियान जारी

भारत, ऑपरेशन सागर बंधु के तहत श्रीलंका के लिए बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता भेज रहा है। इसमें हवाई, समुद्री और जमीनी मार्गों से राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता, खाद्य पैकेट, पानी और अन्य आवश्यक संसाधन पहुंचाए जा रहे हैं। भारतीय टीमों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज़ी से संचालित किया जा रहा है।


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