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नववर्ष के जश्न के दौरान खेरसॉन में ड्रोन हमला, 24 लोगों की मौत, कई घायल

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

नववर्ष के जश्न के दौरान खेरसॉन में ड्रोन हमला, 24 लोगों की मौत, कई घायल

रूस ने यूक्रेन पर लगाया नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप

मॉस्को। नए साल के पहले दिन रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष और अधिक तीव्र हो गया। रूस ने आरोप लगाया है कि गुरुवार को यूक्रेन की ओर से किए गए ड्रोन हमले में कम से कम 24 लोगों की जान चली गई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। यह हमला दक्षिणी खेरसॉन प्रांत में नववर्ष समारोह के दौरान हुआ बताया जा रहा है।

रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन ने रूस के नियंत्रण वाले खेरसॉन क्षेत्र में एक होटल और कैफे को निशाना बनाया, जहां लोग नए साल का जश्न मना रहे थे। मंत्रालय ने कहा कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक हमले में 50 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।

खेरसॉन के गवर्नर ने लगाया जानबूझकर हमले का आरोप
रूस द्वारा नियुक्त खेरसॉन के क्षेत्रीय गवर्नर व्लादिमीर साल्डो ने दावा किया कि तटीय गांव खोरली में नववर्ष समारोह स्थल पर तीन ड्रोन से हमला किया गया। उन्होंने इसे नागरिकों के खिलाफ किया गया सुनियोजित आतंकवादी हमला करार दिया। साल्डो के अनुसार, हमले के बाद आग लगने से कई लोग झुलस गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ड्रोन ने उन स्थानों को जानबूझकर निशाना बनाया, जहां नागरिक एकत्र थे। मंत्रालय ने इस हमले को युद्ध अपराध बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

रूस ने पश्चिमी देशों पर भी साधा निशाना
हमले के बाद रूसी अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल पर चारों ओर आग की लपटें और धुएं के गुबार दिखाई दिए। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि इस हमले के लिए यूक्रेन को समर्थन देने वाले पश्चिमी देशों की भी जिम्मेदारी बनती है। रूस की संसद के दोनों सदनों के अध्यक्षों समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने कीव की कड़ी आलोचना की है।

यूक्रेन ने नागरिकों को निशाना बनाने से किया इनकार
दूसरी ओर, यूक्रेन ने रूस के आरोपों को खारिज किया है। यूक्रेन के एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि उसकी सेना केवल सैन्य ठिकानों, ईंधन, ऊर्जा सुविधाओं और अन्य वैध लक्ष्यों पर ही कार्रवाई करती है और नागरिकों को निशाना नहीं बनाती।

गौरतलब है कि खेरसॉन उन चार यूक्रेनी क्षेत्रों में शामिल है, जिन पर रूस ने वर्ष 2022 में अपने नियंत्रण का दावा किया था। इस ताजा घटना ने दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता और बढ़ा दी है।


इंडोनेशिया के एक वृद्धाश्रम में लगी भीषण आग, 16 बुजुर्गों की दर्दनाक मौत

दो घंटे की मशक्कत के बाद काबू में आई आग, इलाके में शोक का माहौल

मनाडो (इंडोनेशिया)। इंडोनेशिया के उत्तरी सुलावासी प्रांत में एक वृद्धाश्रम में आग लगने से 16 बुजुर्गों की जान चली गई। यह हादसा मनाडो शहर के एक रिहायशी इलाके में उस समय हुआ, जब वृद्धाश्रम में रह रहे अधिकांश लोग सो रहे थे। अचानक लगी आग ने कुछ ही देर में पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस के मुताबिक, एक मंजिला इमारत में संचालित इस रिटायरमेंट होम में कई बुजुर्ग रह रहे थे। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। हादसे में 15 लोगों की मौत झुलसने से हुई, जबकि एक व्यक्ति की दम घुटने के कारण जान चली गई। वहीं 15 अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दमकल की छह गाड़ियां, दो घंटे में काबू
आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान आसपास के स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में मदद की। घायलों और मृतकों की पहचान के लिए परिजनों को अस्पताल बुलाया गया है।

शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच जारी
प्राथमिक जांच में आग लगने की वजह बिजली की फिटिंग में खराबी मानी जा रही है। हालांकि पुलिस और फायर विभाग ने कहा है कि घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है और प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।


अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे ट्रक चालकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 30 भारतीय गिरफ्तार

ट्रक हादसों के बाद अमेरिका में कड़ा एक्शन

वॉशिंगटन। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे विदेशी ट्रक चालकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बॉर्डर पेट्रोल पुलिस ने 30 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये सभी लोग कमर्शियल ड्राइवर लाइसेंस के आधार पर ट्रक चला रहे थे। यह कार्रवाई यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) द्वारा चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत की गई, जिसका मकसद अमेरिकी राजमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है।

सीबीपी की ओर से जारी बयान के अनुसार, कैलिफोर्निया के एल सेंट्रो सेक्टर में इमिग्रेशन चेकपॉइंट्स पर जांच के दौरान कुल 49 अवैध अप्रवासियों को पकड़ा गया। इनमें से 30 भारतीय नागरिक हैं, जबकि अन्य अल सल्वाडोर, चीन, एरिट्रिया, हैती, होंडुरास, मैक्सिको, रूस, सोमालिया, तुर्किये और यूक्रेन से संबंध रखते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान 23 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच चलाया गया, जिसमें कुल 42 ऐसे ट्रक चालकों की पहचान हुई जो अवैध रूप से अमेरिका में रहकर व्यावसायिक वाहन चला रहे थे।

जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए 31 लोगों के पास कैलिफोर्निया राज्य द्वारा जारी कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस थे, जबकि अन्य के लाइसेंस फ्लोरिडा, इलिनोइस, इंडियाना, ओहायो, मैरीलैंड, मिनेसोटा, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, पेंसिल्वेनिया और वाशिंगटन जैसे राज्यों से जारी किए गए थे। इमिग्रेशन एजेंसियों का कहना है कि इन चालकों को कभी भी व्यावसायिक ट्रक चलाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए थी।

अधिकारियों के मुताबिक, यह सख्त कदम हाल के महीनों में सामने आई कई गंभीर सड़क दुर्घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें अवैध रूप से रह रहे ट्रक चालकों की लापरवाही से लोगों की जान गई। एजेंसी ने साफ किया कि इस अभियान का उद्देश्य इमिग्रेशन कानूनों को सख्ती से लागू करना, कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेक्टर में नियमों का पालन सुनिश्चित करना और आम जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।

बॉर्डर पेट्रोल अधिकारियों ने कहा कि होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन और अन्य संघीय एजेंसियों के सहयोग से इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिन राज्यों ने नियमों के बावजूद ऐसे लोगों को कमर्शियल लाइसेंस जारी किए, उनकी भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी।


अज्ञात बंदूकधारियों ने अवैध शराबखाने में की ताबड़तोड़ फायरिंग, नौ लोगों की मौत

दिसंबर महीने में दक्षिण अफ्रीका में यह दूसरी बड़ी गोलीबारी की घटना

जोहानिसबर्ग। दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े शहर जोहानिसबर्ग में रविवार को हुई सामूहिक गोलीबारी ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के पश्चिमी हिस्से में स्थित बेकर्सडाल टाउनशिप में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक अवैध शराबखाने को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर अचानक शराबखाने में दाखिल हुए और बिना किसी चेतावनी के वहां मौजूद लोगों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। प्रारंभिक तौर पर मृतकों की संख्या दस बताई जा रही थी, लेकिन बाद में अधिकारियों ने नौ मौतों की पुष्टि की।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हमलावर दो वाहनों में सवार होकर आए थे। फायरिंग के बाद वे घटनास्थल से फरार हो गए और भागते समय भी गोलियां चलाते रहे। प्रांतीय पुलिस आयुक्त मेजर जनरल फ्रेड केकाना के अनुसार, मृतकों में एक व्यक्ति वह भी शामिल है जो शराबखाने के बाहर वाहन चला रहा था और गोलीबारी की चपेट में आ गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि गंभीर रूप से घायल लोगों के चलते मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक न तो हमलावरों की पहचान हो सकी है और न ही हमले के पीछे के मकसद का खुलासा हुआ है। अवैध शराबखानों से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों के एंगल से भी जांच की जा रही है।

गौरतलब है कि दिसंबर महीने में दक्षिण अफ्रीका में यह दूसरी बड़ी गोलीबारी की घटना है। इससे पहले प्रिटोरिया के पास एक हॉस्टल में हुए हमले में तीन साल के बच्चे समेत 12 लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने देश में कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।


अमेरिकी राष्ट्रपति का बीबीसी पर भ्रामक रिपोर्टिंग का आरोप, 10 अरब डॉलर के हर्जाने का मुकदमा दायर

बीबीसी की माफी के बाद भी नहीं थमे ट्रंप, अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश सार्वजनिक प्रसारक बीबीसी के खिलाफ बड़ा कानूनी कदम उठाया है। ट्रंप ने बीबीसी पर मानहानि और भ्रामक रिपोर्टिंग का आरोप लगाते हुए 10 अरब अमेरिकी डॉलर के हर्जाने की मांग के साथ मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि बीबीसी ने जानबूझकर उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

फ्लोरिडा में दायर 33 पन्नों की याचिका में ट्रंप ने कहा है कि बीबीसी ने उनके खिलाफ “झूठी, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण” सामग्री प्रसारित की। मुकदमे में दावा किया गया है कि प्रसारक ने न केवल पत्रकारिता की मर्यादाओं का उल्लंघन किया, बल्कि अनुचित व्यापारिक व्यवहार अपनाते हुए राजनीतिक हस्तक्षेप भी किया।

भाषण की एडिटिंग को लेकर विवाद

ट्रंप का कहना है कि बीबीसी ने 6 जनवरी 2021 को दिए गए उनके भाषण के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर इस तरह पेश किया, जिससे उनके बयान का अर्थ पूरी तरह बदल गया। आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील वाले हिस्से को हटा दिया गया और ऐसे शब्दों को जोड़ दिया गया, जो उन्होंने कहे ही नहीं थे।

पहले माफी, अब मुकदमा

इस विवाद को लेकर ट्रंप पहले भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे चुके थे। इसके बाद बीते महीने बीबीसी ने भाषण की एडिटिंग को लेकर ट्रंप से माफी तो मांगी थी, लेकिन मानहानि के आरोपों को खारिज कर दिया था। बीबीसी के अध्यक्ष समीर शाह ने इसे संपादकीय निर्णय में हुई चूक बताया था। इस मामले के सामने आने के बाद बीबीसी के शीर्ष समाचार अधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था।

डॉक्यूमेंट्री बनी विवाद की जड़

विवाद की जड़ बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री है, जो 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले ‘ट्रंप: ए सेकेंड चांस?’ शीर्षक से प्रसारित की गई थी। इस डॉक्यूमेंट्री में 6 जनवरी 2021 के भाषण के तीन अलग-अलग बयानों को जोड़कर एक ही संदर्भ में दिखाया गया, जबकि वे कथन लगभग एक घंटे के अंतराल में दिए गए थे। इससे ऐसा प्रतीत हुआ कि ट्रंप ने समर्थकों को उग्र कदम उठाने के लिए प्रेरित किया, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील वाले अंश को प्रसारण से बाहर रखा गया।

ट्रंप का तीखा बयान

व्हाइट हाउस में बिना सवाल-जवाब के दिए गए बयान में ट्रंप ने कहा कि बीबीसी ने उनके “मुंह में ऐसे शब्द डाल दिए, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं”। उन्होंने कहा कि उन्होंने देशभक्ति और शांति की बात की थी, लेकिन वही हिस्से जानबूझकर नहीं दिखाए गए।

कानूनी चुनौतियां भी संभव

यह मुकदमा फ्लोरिडा की अदालत में दायर किया गया है, क्योंकि ब्रिटेन में मानहानि से जुड़े मामलों की समयसीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में भी इस केस को लेकर चुनौतियां सामने आ सकती हैं, क्योंकि विवादित डॉक्यूमेंट्री वहां आधिकारिक रूप से प्रसारित नहीं की गई थी।


भारतीय समुद्री सीमा में पकड़े गए पाकिस्तानी मछुआरे, परिजनों ने लगाई रिहाई की गुहार

कराची- भारत की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने इस सप्ताह समुद्री सीमा उल्लंघन के आरोप में 11 पाकिस्तानी मछुआरों को हिरासत में लिया है। इन मछुआरों में दो नाबालिग भी शामिल बताए जा रहे हैं। गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद पाकिस्तान में उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है और उन्होंने दोनों देशों की सरकारों से मानवीय आधार पर रिहाई की अपील की है।

गिरफ्तार मछुआरों के परिवारों का कहना है कि वे बेहद गरीब हैं और समुद्र में मछली पकड़ना ही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। परिजनों ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह कूटनीतिक स्तर पर भारत से बातचीत कर जल्द से जल्द उनके स्वजनों को वापस लाने का प्रयास करे।

कराची के इब्राहिम हैदरी मछुआरा गांव में रहने वाले गुलाम मुस्तफा के पिता अहमद ब्रोही ने बताया कि उनका परिवार पहले भी ऐसी पीड़ा झेल चुका है। उन्होंने कहा कि चार साल पहले भी इसी इलाके के कुछ मछुआरे पकड़े गए थे, जो अब तक भारतीय जेलों में बंद हैं। उनका कहना है कि लगातार ऐसी घटनाएं मछुआरा समुदाय के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय तटरक्षक बल ने बुधवार को गुजरात के जखाऊ तट के पास इन मछुआरों की नाव को भारतीय जलक्षेत्र में पाए जाने के बाद कार्रवाई की। वहीं, सिंध फिशरीज विभाग की प्रमुख फातिमा मजीद का कहना है कि समुद्र में स्पष्ट सीमा रेखा न होने के कारण मछुआरे कई बार अनजाने में सीमा पार कर जाते हैं।

उन्होंने बताया कि सर क्रीक और काजर क्रीक जैसे क्षेत्रों में अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जहां दोनों देशों के मछुआरे पकड़े जाते हैं। फातिमा मजीद ने कहा कि समुद्र में काम करने वाले गरीब मछुआरों के लिए रोजी-रोटी सबसे बड़ी चिंता होती है, न कि सीमाएं।

इस बार हिरासत में लिए गए मछुआरों में 12 वर्षीय जहीर और 15 वर्षीय हबीब भी शामिल हैं। पाकिस्तान की ओर से भारत से विशेष रूप से अपील की गई है कि नाबालिगों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए रिहा किया जाए।

पाकिस्तान फिशरफोक फोरम के अनुसार, इस घटना के बाद भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तानी मछुआरों की संख्या बढ़कर करीब 74 हो गई है। आमतौर पर भारत और पाकिस्तान के बीच मछुआरों सहित कैदियों की अदला-बदली होती रही है, लेकिन हाल के समय में दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हुई है।


दित्वाह तूफान ने श्रीलंका में मचाई भीषण तबाही, अब तक 486 लोगों की मौत, कई लापता

भारत–श्रीलंका साझेदारी के तहत पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर हुई महत्वपूर्ण बातचीत

कोलंबो। श्रीलंका में चक्रवाती तूफान दित्वाह ने भीषण तबाही मचाते हुए भारी जन–धन की हानि की है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 486 लोगों की मौत, 341 लोग लापता, और हजारों परिवार विस्थापित हो गए हैं। तूफान के बाद आई भीषण बाढ़ और लगातार हो रहे भूस्खलन ने राहत-बचाव कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इस गंभीर स्थिति के बीच भारत ने मानवीय आधार पर तत्काल सहायता बढ़ाते हुए श्रीलंका के पुनर्निर्माण प्रयासों में सहयोग देने की घोषणा की है।

भारत की मदद पर चर्चा

श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने शुक्रवार को आवास और निर्माण मंत्री सुसील रानासिंघे से मुलाकात कर तूफान से हुई तबाही, राहत कार्यों की प्रगति और आगे की आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा की। उच्चायुक्त ने बताया कि भारत श्रीलंका के पुनर्वास और पुनर्निर्माण अभियानों में हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उच्चायुक्त संतोष झा ने एक्स (X) पर साझा पोस्ट में कहा कि चर्चा के दौरान दोनों देशों के बीच आवास निर्माण और पुनर्निर्माण क्षेत्र में विकास सहयोग को मजबूत करने के विकल्पों पर भी विचार किया गया।

भीषण तबाही के आँकड़े

श्रीलंका के आपदा प्रबंधन विभाग की शुक्रवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार:

486 लोगों की मौत

341 लोग लापता

2,303 घर पूरी तरह ध्वस्त

52,489 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त

तूफान की मार से प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी जलभराव, भूस्खलन और सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति बनी हुई है।

भारत का राहत अभियान जारी

भारत, ऑपरेशन सागर बंधु के तहत श्रीलंका के लिए बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता भेज रहा है। इसमें हवाई, समुद्री और जमीनी मार्गों से राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता, खाद्य पैकेट, पानी और अन्य आवश्यक संसाधन पहुंचाए जा रहे हैं। भारतीय टीमों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज़ी से संचालित किया जा रहा है।


श्रीलंका- चक्रवात दित्वाह ने मचाई तबाही, अब तक 334 की मौत, 370 लोग लापता

11 लाख से अधिक लोग प्रभावित

कोलंबो। श्रीलंका इन दिनों चक्रवात दित्वाह की विनाशकारी मार झेल रहा है, जिसने देश के कई हिस्सों में व्यापक तबाही मचा दी है। लगातार बारिश, तेज हवाओं और भारी बाढ़ के कारण हालात इतने बिगड़ गए हैं कि हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं और कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। देश के डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अब तक 334 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 370 से अधिक लोग लापता हैं। सबसे अधिक नुकसान कैंडी जिला में दर्ज किया गया है, जहां अकेले 88 लोगों की जान गई और 150 लोग अभी भी लापता हैं।

आपदा का असर कई जिलों में गहरा रहा—बादुला में 71, नुवारा एलिया में 68 और मटाले में 23 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। DMC ने बताया कि कुल 3,09,607 परिवारों के 11 लाख से अधिक लोग किसी न किसी रूप में इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ ने नदियों के जलस्तर को ऐतिहासिक स्तर तक पहुंचा दिया, जिससे कई शहर पूरी तरह जलमग्न हो गए है, बड़े पुल बह गए और कई महत्वपूर्ण सड़कें और इमारतें ढह गईं।

नेपाल की आपात सहायता

चक्रवात से जूझ रहे श्रीलंका की कठिनाइयों को देखते हुए नेपाल सरकार ने आगे आकर 2 लाख अमेरिकी डॉलर की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह राशि राहत और बचाव कार्यों को गति देने के लिए उपयोग की जाएगी। कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण संचार और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

स्टारलिंक की बड़ी घोषणा—मुफ़्त इंटरनेट

आपदा के दौरान संचार व्यवस्था को बनाए रखने की कोशिश में, स्टारलिंक ने प्रभावित क्षेत्रों में मुफ़्त इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने की घोषणा की है। कंपनी ने कहा कि दिसंबर 2025 तक नए और पुराने सभी उपयोगकर्ताओं को मुफ्त कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी, ताकि राहत और बचाव कार्यों में तेजी आ सके।

भारत का ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू

श्रीलंका की स्थिति को देखते हुए भारत ने मानवीय आधार पर ऑपरेशन सागर बंधु की शुरुआत की है। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से 21 टन राहत सामग्री, 80 से अधिक NDRF के जवान और 8 टन महत्वपूर्ण उपकरण कोलंबो पहुंचाए गए। इसके अलावा पुणे से भी NDRF की एक टीम और अतिरिक्त उपकरण एयरलिफ्ट किए गए।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ने मुश्किल हालात में भी तेज और समन्वित राहत कार्य करते हुए अपने पड़ोसी देश के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।


सुमात्रा में मूसलाधार बारिश का कहर, बाढ़–भूस्खलन से 10 की मौत, 2,000 से ज्यादा घर जलमग्न

राहत शिविर बनाए गए, लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील

मेदान सुमात्रा।  इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में लगातार हो रही तेज बारिश ने व्यापक तबाही मचा दी है। भारी बारिश से आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार पिछले सप्ताह से जारी मानसूनी बारिश के कारण कई नदियों के तटबंध टूट गए, जिससे हालात और बिगड़ गए।

स्थानीय पुलिस के मुताबिक, उत्तर सुमात्रा के पहाड़ी इलाकों में कीचड़, चट्टानों और बड़े-बड़े पेड़ों के गिरने से व्यापक क्षति हुई है। कई गांवों में घर मलबे के नीचे दब गए हैं, जिससे राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज़्यादा प्रभावित सिबोल्गा शहर में अब तक पांच शव बरामद किए गए हैं, जबकि तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, मध्य तपनौली जिले में भूस्खलन के कारण कई मकान ढह गए, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। बाढ़ से करीब 2,000 घर और सार्वजनिक भवन जलमग्न हो गए हैं।

दक्षिण तपनौली जिले में पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत और एक अन्य के घायल होने की पुष्टि की गई है। मंडेलिंग नटाल जिले में एक पुल बह गया और 470 से अधिक घर पानी में डूब गए। नियास द्वीप पर कीचड़ और मलबे के ढेर ने मुख्य सड़क को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है।

सिबोल्गा के पुलिस प्रमुख एडी इंगंटा ने बताया कि प्रशासन ने आपातकालीन राहत शिविर स्थापित कर दिए हैं और खतरे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तुरंत स्थान खाली करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार हो रही बारिश नए भूस्खलन का खतरा बढ़ा रही है। खराब मौसम और रास्तों के बाधित होने के कारण बचाव अभियान भी धीमा पड़ गया है।

उधर, राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने जावा द्वीप के दो जिलों में 10 दिनों से चल रहे राहत अभियान की समाप्ति की घोषणा की थी, लेकिन ठीक उसके बाद ही सुमात्रा में बाढ़ और भूस्खलन का नया संकट पैदा हो गया। मध्य जावा के सिलाकैप और बंजारनेगारा जिलों में भूस्खलन से हुई तबाही में अब तक 38 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।


सऊदी अरब में भीषण सड़क हादसा, यात्रियों से भरी बस में लगी आग, 40 से अधिक भारतीयों की मौत की आशंका

उमराह के लिए गए भारतीयों की बस हादसे का शिकार, पीएम मोदी ने जताया दुख; दूतावास अलर्ट पर

रियाद। सऊदी अरब में देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। उमराह के लिए गए यात्रियों को ले जा रही बस मदीना के पास एक तेल टैंकर से टकरा गई, जिसके बाद वाहन में आग लग गई। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, 40 से अधिक भारतीय यात्रियों की मौत की संभावना है, जिनमें कई हैदराबाद के निवासी बताए जा रहे हैं।

बस और डीज़ल टैंकर की जोरदार टक्कर, आग की लपटों में घिरी बस

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मक्का से मदीना जा रही बस मदीना से लगभग 160 किलोमीटर दूर मुहरास/मुफरिआत क्षेत्र में एक डीज़ल टैंकर से जा टकराई। हादसा तड़के करीब 1:30 बजे हुआ, जब अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। टक्कर के तुरंत बाद बस में आग लग गई, जिससे कई लोग बच नहीं सके। घटना की भयावहता इतनी थी कि कई शवों की शिनाख्त करना भी मुश्किल बताया जा रहा है। शुरुआती अनुमानों में कम से कम 42 लोगों के मारे जाने की सूचना है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल माने जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, दूतावास सक्रिय

हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। पीएम ने कहा कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दाह का महावाणिज्य दूतावास लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। भारतीय अधिकारी सऊदी अरब प्रशासन के संपर्क में हैं और अपडेट जुटा रहे हैं।

तेलंगाना सरकार भी हरकत में

तेलंगाना सीएमओ द्वारा जारी बयान में बताया गया कि मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और डीजीपी को तुरंत हादसे से संबंधित सभी विवरण एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मृतकों और घायलों में हैदराबाद के कितने लोग शामिल हैं। राज्य सरकार ने विदेश मंत्रालय और सऊदी दूतावास से नियमित संपर्क बनाए रखने को कहा है। सचिवालय में कंट्रोल रूम स्थापित किए जाने के भी आदेश दिए गए हैं ताकि परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके।

महावाणिज्य दूतावास ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

जेद्दाह स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने 24×7 सहायता के लिए कंट्रोल रूम की स्थापना की है। पीड़ितों से जुड़े परिवार इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
टोल फ्री: 8002440003

ओवैसी ने भी जताई चिंता, दूतावास से मांगी जानकारी

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी हादसे पर दुख जताते हुए बताया कि उन्होंने शहर की दो ट्रैवल एजेंसियों और भारतीय दूतावास के अधिकारियों से जानकारी मांगी है। सांसद ने कहा कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन अबु मैथ्यू जॉर्ज ने उनसे संपर्क में रहते हुए बताया कि विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

विदेश मंत्री जयशंकर और केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने दी प्रतिक्रिया

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार पीड़ितों की मदद के लिए तत्पर है और दूतावास हादसे से प्रभावित सभी लोगों को सहायता प्रदान कर रहा है। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और घायलों के स्वस्थ होने की कामना की।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी संवेदना जताते हुए कहा कि दूतावास अधिकारी पीड़ितों और उनके परिजनों को जानकारी उपलब्ध कराने में जुटे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नीचे दिए गए हेल्पलाइन नंबरों पर आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सकती है:

हेल्पलाइन नंबर:

8002440003 (टोल फ्री)

0122614093

0126614276

0556122301 (व्हाट्सऐप)


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