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अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए नियम सख्त, बीच में पढ़ाई छोड़ने पर रद्द हो सकता है वीजा

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए नियम सख्त, बीच में पढ़ाई छोड़ने पर रद्द हो सकता है वीजा

अमेरिकी दूतावास ने कहा – वीजा रद्द होने के साथ भविष्य की पात्रता भी जा सकती है

अमेरिका। अमेरिका में पढ़ाई कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने कड़ी चेतावनी दी है। दूतावास ने कहा है कि यदि छात्र बिना जानकारी दिए पढ़ाई छोड़ते हैं या कक्षाओं में नियमित उपस्थिति नहीं रखते हैं, तो उनका वीजा रद्द हो सकता है।

भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से विदेशी छात्रों को सलाह दी कि वे अपने वीजा की शर्तों का सख्ती से पालन करें। दूतावास ने कहा, “यदि आप कक्षाएं छोड़ते हैं, पढ़ाई अधूरी छोड़ते हैं या अपने संस्थान को सूचित किए बिना कोर्स छोड़ते हैं, तो आपका छात्र वीजा निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा, भविष्य में अमेरिकी वीजा के लिए पात्रता भी समाप्त हो सकती है।”

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब बड़ी संख्या में भारतीय छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों में दाखिला ले रहे हैं। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास ने 2023 में भारत में 1.40 लाख से अधिक छात्र वीजा जारी किए थे, जो किसी भी अन्य देश से अधिक थे। यह लगातार तीसरा साल था जब भारत ने छात्र वीजा के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया।


अमेरिका-चीन व्यापार समझौते की नई शुरुआत, 90 दिनों के लिए टैरिफ में राहत

घोषणा के बाद शेयर बाजारों में उछाल, निवेशकों में बढ़ा भरोसा

वाशिंगटन/बीजिंग। अमेरिका और चीन ने अपने तनावपूर्ण व्यापार संबंधों को स्थिर करने के लिए एक बड़ी पहल की है। दोनों देश 90 दिनों की प्रारंभिक अवधि के लिए एक-दूसरे पर लगाए गए घोषित टैरिफ और जवाबी टैरिफ को अस्थायी रूप से वापस लेने पर सहमत हो गए हैं। इस दौरान चीन अमेरिकी उत्पादों पर 10% शुल्क लगाएगा, जबकि अमेरिका चीनी उत्पादों पर औसतन 30% शुल्क वसूलेगा।

संयुक्त बयान में क्या कहा गया?

सोमवार को जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपने व्यापारिक संबंधों की अहमियत को स्वीकार करते हैं। उन्होंने एक स्थायी, संतुलित और पारस्परिक लाभकारी आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।

बयान में यह भी कहा गया कि हालिया चर्चाओं ने स्पष्ट किया है कि संवाद की निरंतरता से दोनों पक्षों की चिंताओं को सुलझाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से अमेरिका और चीन ने नियमित चर्चाओं के लिए एक औपचारिक तंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है।

व्यापार वार्ताओं के लिए प्रतिनिधियों की घोषणा

चीन की ओर से वार्ताओं में स्टेट काउंसिल के वाइस प्रीमियर हे लिफेंग हिस्सा लेंगे, जबकि अमेरिका की ओर से ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर प्रतिनिधित्व करेंगे। ये वार्ताएं बारी-बारी से अमेरिका और चीन या किसी तीसरे देश में हो सकती हैं। आवश्यकतानुसार कार्य-स्तरीय बैठकें भी आयोजित की जा सकती हैं।

पृष्ठभूमि: ट्रम्प का टैरिफ रुख और पहले का निर्णय

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान व्यापार घाटे वाले देशों पर भारी शुल्क लगाए थे। हालांकि बाद में व्यापार समझौतों की संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने 90 दिनों के लिए टैरिफ स्थगित करने का फैसला लिया था। उस समय चीन के लिए टैरिफ दरें 245% तक जाने के संकेत दिए गए थे, जबकि अमेरिका पर चीनी टैरिफ 125% तक थे।

ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल में भी ‘टैरिफ पारस्परिकता’ की नीति को जारी रखते हुए, भारत समेत कई देशों के खिलाफ समान शुल्क लगाने की बात कही थी।

घोषणा का वैश्विक बाजार पर असर

इस ताजा व्यापार समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में उत्साह देखा गया। अमेरिकी फ्यूचर्स में 2% से ज्यादा की तेजी आई, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 3% चढ़ा और जर्मनी-फ्रांस के बेंचमार्क इंडेक्स में 0.7% का उछाल दर्ज हुआ।

हालांकि ट्रम्प प्रशासन की ओर से लगाए गए शुल्कों की लंबी श्रृंखला में चीन के साथ संघर्ष सबसे तीव्र रहा है—विशेष रूप से फेंटेनाइल जैसे खतरनाक पदार्थों की तस्करी रोकने के दबाव के संदर्भ में।


बलूचिस्तान में बीएलए का हिंसक अभियान, सुरक्षा एजेंसियों पर किये ताबड़तोड़ हमले

39 जगहों पर एकसाथ हमले, कई पुलिस स्टेशन कब्जे में, इलाके में फैला डर और तनाव

बलूचिस्तान। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान में 39 विभिन्न स्थानों पर समन्वित हमलों की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने दावा किया है कि उसने कई पुलिस स्टेशनों पर कब्जा कर लिया है और प्रमुख राजमार्गों पर नाकेबंदी की है। बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच के अनुसार, हमलों में पुलिस स्टेशन, सैन्य काफिले, राजमार्ग और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है। संगठन ने एक प्रेस बयान में कहा है कि यह अभियान अभी जारी है और इसके पीछे कुछ खास उद्देश्य हैं जिन्हें वह हासिल करना चाहता है।

बलूचिस्तान में जारी अलगाववादी आंदोलन

बलूचिस्तान में लंबे समय से आजादी की मांग को लेकर अलगाववादी गतिविधियां चल रही हैं। दशकों से जारी इस संघर्ष में हजारों लोग मारे गए और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। हालिया हमले इस लंबे संघर्ष को और उग्र बना सकते हैं, खासकर जब स्वायत्तता और संसाधनों के नियंत्रण की मांगें एक बार फिर प्रमुखता में आ रही हैं।

बीएलए का मकसद और विरोध

बीएलए पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय एक हथियारबंद संगठन है, जो बलूच लोगों के लिए स्वतंत्रता की मांग करता है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार बलूच समुदाय के साथ अन्याय और आर्थिक शोषण कर रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र के गैस और खनिज जैसे संसाधनों का दोहन तो हो रहा है, लेकिन बलूच लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। बीएलए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को भी शोषणकारी मानता है और इससे जुड़ी परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा चुका है।

मानवाधिकार हनन और बलूच जनता की पीड़ा

बलूचिस्तान, जहां अपार प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं, पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा इलाका बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों जैसे ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने हजारों बलूच कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों को गायब किया या मारा है। इन घटनाओं के पीछे जवाबदेही का अभाव और लगातार मिलने वाली सामूहिक कब्रें स्थानीय जनता में डर और आक्रोश को बढ़ा रही हैं।


झेलम नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी, पाकिस्तान ने भारत पर लगाया बिना सूचना उड़ी डैम से पानी छोड़ने का आरोप

झेलम नदी के किनारे बसे इलाकों में आपात राहत और बचाव टीमें तैनात

इस्लामाबाद। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में झेलम नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके चलते स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों से इलाके को खाली करने की अपील की है। पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि भारत ने बिना पूर्व सूचना उड़ी डैम से पानी छोड़ा, जिससे झेलम नदी में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। इससे PoK के कई इलाकों में खतरे की स्थिति बन गई है। हालांकि भारत की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पाकिस्तान की आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने चेतावनी जारी करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। झेलम नदी के किनारे बसे इलाकों में आपात राहत और बचाव टीमें तैनात कर दी गई हैं। पानी कश्मीर के अनंतनाग इलाके से प्रवेश करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के चकोथी इलाके में पहुंचा है। इससे कोहाला व धालकोट के निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है और फसलों तथा पशुओं को नुकसान पहुंचा है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत पर बिना सूचना पानी छोड़ने का आरोप लगाते हुए इसे नियमों का उल्लंघन बताया है।

उल्लेखनीय है कि पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का फैसला किया है। भारत सरकार ने घोषणा की है कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन विश्वसनीय व अपरिवर्तनीय रूप से नहीं छोड़ देता। समझौते के तहत पूर्वी नदियों रावी, बीस व सतलुज पर भारत को नियंत्रण प्राप्त है, जबकि जम्मू-कश्मीर से निकलने वाली सिंधु, झेलम व चेनाब पर पाकिस्तान को अधिकार प्रदान किया गया है।


कर्ज में डूबी अपनी सरकारी एयरलाइन को बेचेगा पाकिस्तान, अगले हफ्ते शुरू होगी बिक्री प्रक्रिया 

वर्षों से कर रही पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस को बेचने की कोशिश 

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने एक बार फिर कर्ज में डूबी अपनी सरकारी एयरलाइन पीआईए को बेचने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने बीते साल भी अपनी सरकारी एयरलाइन को बेचने की कोशिश की थी, लेकिन उस वक्त सही खरीददार न मिलने के चलते पाकिस्तान की सरकार को सफलता नहीं मिल पाई थी। अब एक बार फिर से पाकिस्तान ने पीआईए को बेचने की कोशिश शुरू कर दी है।

घाटे में चल रही पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) को बेचने की कोशिश पाकिस्तान की सरकार वर्षों से कर रही है, लेकिन साल 2024 में इसे लेकर गंभीर प्रयास शुरू किए गए, लेकिन कोई बड़ा खरीददार नहीं मिलने के चलते पाकिस्तान की सरकार सफल नहीं हो सकी। पाकिस्तान के निजीकरण और निवेश मंत्री अब्दुल अलीम खान ने बीते महीने बताया था कि पीआईए के निजीकरण को मई तक पूरा कर लिया जाएगा। निजीकरण आयोग की इस मुद्दे पर बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के निजीकरण के मुद्दे पर सलाहकार मोहम्मद अली ने की। इस बैठक में ही अगले हफ्ते पीआईए की बिक्री प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया गया।

पाकिस्तान की सरकार पीआईए के 51 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत शेयर बेचने पर विचार कर रही है। संभावित बोली दाताओं को चुनने के लिए पूर्व योग्यता मानदंडों को भी मंजूरी दी गई है। पीआईए ने करीब 21 वर्षों के बाद पहली बार साल 2024 में पहली बार लाभ प्राप्त किया। बीते साल पीआईए को करीब 2.26 अरब रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है। पीआईए पिछले कई वर्षों से वित्तीय संकट से जूझ रही है। घाटे के चलते साल 2023 में पीआईए ने हजारों कर्मचारियों को वेतन ही नहीं मिल पाया था। साथ साल 2020 में सुरक्षा चिंताओं के चलते यूरोपीय संघ ने पीआईए पर प्रतिबंध लगा दिया था।


प्रधानमंत्री मोदी को श्रीलंका की सरकार ने ‘मित्र विभूषण सम्मान’ से किया सम्मानित 

भारत और श्रीलंका ऐसे पड़ोसी हैं जिनके बीच गहरे ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं – राष्ट्रपति अनुरा कुमारा

कोलंबो/नई दिल्ली। श्रीलंका की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘श्रीलंका मित्र विभूषण सम्मान’ से सम्मानित किया है। श्रीलंका की सरकार यह सम्मान उन देशों के राष्ट्राध्यक्षों को देती है, जिनके श्रीलंका के साथ अच्छे संबंध होते हैं। भारत के ऐतिहासिक तौर पर श्रीलंका के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। साथ ही जब श्रीलंका आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था तो उस वक्त भी सबसे पहले भारत ने ही श्रीलंका के लिए मदद का हाथ बढ़ाया था। अब इन अच्छे संबंधों को ही मान्यता देते हुए श्रीलंका की सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान दिया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘मित्र विभूषण सम्मान’ का मेडल पहनाकर सम्मानत किया। सम्मान पाने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत के 140 करोड़ देशवासियों का सम्मान है।

श्रीलंका मित्र विभूषण सम्मान में एक चांदी का मेडल होता है, जिसमें बना धर्म चक्र बौद्ध विरासत का प्रतीक है। इस बौद्ध विरासत ने भारत और श्रीलंका की सांस्कृतिक परंपराओं को आकार दिया है। मेडल में बना पुन कलश (एक औपचारिक बर्तन) समृद्धि और नवीनीकरण का प्रतीक है। मेडल में बने नवरत्न दोनों देशों के बीच अमूल्य और स्थायी दोस्ती का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूर्य और चंद्रमा प्राचीन अतीत से अनंत भविष्य तक फैले बंधन को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मानित होने के बाद कहा कि ‘श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके द्वारा श्रीलंका मित्र विभूषण पुरस्कार से सम्मानित होना मेरे लिए नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए सम्मान की बात है। यह श्रीलंका और भारत के लोगों के बीच ऐतिहासिक संबंध और गहरी मित्रता को दर्शाता है और इसके लिए मैं राष्ट्रपति, श्रीलंका सरकार और यहां के लोगों को धन्यवाद देता हूं।’

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि ‘भारत और श्रीलंका के बीच बहुत गहरी दोस्ती है। हम ऐसे पड़ोसी हैं जिनके बीच गहरे ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं और ये संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं। हमारे संबंध साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और समान हितों पर आधारित हैं।’ पीएम मोदी ने कहा कि ‘भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और आत्मीयता भरे संबंध हैं। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि 1960 में गुजरात के अरावली में मिले भगवान बुद्ध के अवशेष को श्रीलंका में दर्शन के लिए भेजा जा रहा है। त्रिंकोमाली के थिरुकोनेश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार में भारत सहयोग देगा। हमने मछुआरों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। हम सहमत हैं कि हमें इस मामले में एक मानवीय सहायता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। हमने मछुआरों को तुरंत रिहा किये जाने और उनकी नौकाओं को वापस भेजने पर भी बल दिया। भारत और श्रीलंका का संबंध आपसी विश्वास और सद्भावना पर आधारित है।’


म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर के पास आया 5.1 तीव्रता का भूकंप 

अब तक 1,700 लोगों के मारे जाने की खबर 

थाईलैंड में भूकंप के कारण 47 अब भी लापता

नाएप्यीडॉ। म्यांमार शुक्रवार को आए शक्तिशाली भूकंप के बाद लगातार धरती कांप रही है। यूएसजीएस के मुताबिक, रविवार को म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर के पास 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। हालांकि, नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने इसकी तीव्रता 4.6 बताई। यह शुक्रवार के विनाशकारी भूकंप के बाद आए झटकों में सबसे नया था। भूकंप के झटके महसूस होने पर मांडले की सड़कों पर लोग चीखने लगे। इससे पहले शुक्रवार को शहर के पास 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे कई इमारतें गिर गईं और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। अब तक 1,700 लोगों के मारे जाने और 3,400 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है।

आशंका जताई जा रही है कि यह संख्या बढ़ सकती है। रविवार दोपहर आए झटके से पहले 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद म्यांमार में शनिवार शाम तक कम से कम पांच झटके महसूस किए गए थे। इसमें सबसे तेज झटका 6.4 तीव्रता का था। लगातार आ रहे झटकों से लोगों में दहशत है। म्यांमार सागाइंग फॉल्ट पर स्थित है, जो इंडिया प्लेट और सुंडा प्लेट को अलग करता है, जिस वजह से यहां भूकंप का खतरा बना रहता है।

इससे पहले शुक्रवार को आए भूकंप के चलते कई इमारतें ढहने से व्यापक क्षति हुई है। म्यांमार लंबे समय से चल रहे गृहयुद्ध की चपेट में है और वहां पहले से ही एक बड़ा मानवीय संकट बना हुआ है। ऐसे में राहत-बचाव कार्यों में  काफी मुश्किल हो रही है। म्यांमार के पड़ोसी देश थाईलैंड में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे और इसने राजधानी बैंकॉक समेत देश के अन्य क्षेत्रों को हिलाकर रख दिया था। हालात यह हैं कि अस्पतालों में जगह कम पड़ गई है और सड़कों पर अस्थाई तरीके से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इलाज सामग्री व दवाओं की भी काफी कमी हो गई है।

बैंकॉक के अधिकारियों ने बताया कि थाईलैंड में भूकंप के कारण अब तक 10 लोग मृत पाए गए हैं, 26 लोग घायल हैं और 47 अब भी लापता हैं। राजधानी के लोकप्रिय चतुचक बाजार के निकट एक निर्माण स्थल पर काफी तबाही हुई है। भूकंप आने पर, थाईलैंड की सरकार के लिए एक चीनी कंपनी द्वारा बनाई जा रही 33 मंजिला ऊंची इमारत हिली और धूल के गुबार के साथ धराशायी हो गई।


म्यांमार में आए भूकंप से 1002 से अधिक लोगों की मौत, सैंकड़ों लापता

भूकंप में 2300 से अधिक लोग घायल 

थाईलैंड में भी भूंकप से 10 लोगों की मौत 

म्यांमार की मदद के लिए भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत भेजी राहत सामग्री 

नेपीडॉ। म्यांमार में भूकंप में 1002 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सैंकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं इस भूकंप में अभी तक 2300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। 30 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत-बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। उधर थाईलैंड में करीब 10 लोगों की भूंकप से मौत हुई है। अचानक आई इस आपदा के बाद म्यांमार ने आपातकाल लगा दिया गया है। इस भंयकर भूकंप का असर सिर्फ म्यांमार पर ही नहीं बल्कि आसपास के देशों में देखने को मिला है। भूकंप का भारत, चीन नेपाल समेत पांच देशों में देखने को मिला है। भूकंप से प्रभावित म्यांमार की मदद के लिए भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत राहत सामग्री भेजी है। वायुसेना का विमान सी-130 जे करीब 15 टन राहत सामग्री लेकर यांगून पहुंच गया है।

म्यांमार के अलावा थाईलैंड, चीन, नेपाल और भारत में भूकंप के झटके महसूस किए गए। वहीं शनिवार रात में भी म्यांमार और अफगानिस्तान में फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह करीब 5 बजकर 16 मिनट पर अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 4.7 रही।  समाचार एजेंसी एएफपी ने म्यांमार की सेना (जुंटा) के हवाले से बताया है कि भूकंप में अबतक 694 लोगों की  मौत हुई है, जबकि 1,670 घायल हुए हैं।

वहीं अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण(यूएसजीएस) का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है। अस्पतालों में खून की भारी किल्लत की खबरें मिल रही हैं। म्यांमार में राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी हैं, लेकिन हर तरफ मलबे का ढेर, टूटी सड़कें, और ढही इमारतें नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि, अस्पतालों में घायलों की तादाद भी हजारों में है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण  के अनुसार, इस भूकंप से मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है। वहीं सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार के अनुसार, पांच शहरों और कई कस्बों में इमारतें गिर गई हैं, और दो प्रमुख पुल भी ढह चुके हैं।

इस विनाशकारी भूकंप ने मंडाले, नेपिटॉ, यांगून और कई अन्य शहरों में इमारतों, पुलों और सड़कों को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन सबसे अधिक मौतें नेपिटॉ में हुई हैं। यहां से 90 से अधिक लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख, सीनियर जनरल मिन आंग हलाइंग ने टेलीविजन पर बताया कि देश में अब तक 144 लोगों की मौत हो चुकी है और यह आंकड़ा बढ़ सकता है। भूकंप का केंद्र म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मंडाले के पास था। झटकों के बाद कई आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) भी महसूस किए गए, जिनमें से एक की तीव्रता 6.4 मापी गई। मंडाले में भूकंप ने कई इमारतों को जमींदोज कर दिया, जिनमें शहर का एक प्रमुख मठ भी शामिल था। राजधानी नेपिटॉ में भी कई सरकारी कर्मचारियों के आवासीय भवन मलबे में तब्दील हो गए, जहां बचाव दल पीड़ितों को निकालने में जुटा हुआ है।

म्यांमार सरकार के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में रक्तदान की अत्यधिक आवश्यकता है। अस्पतालों में खून की भारी कमी बताई जा रही है। आपदा में घायल लोगों से अस्पताल भरे पड़े हैं। म्यांमार ना इस आपदा में दवाओं और अन्य राहत सामाग्री की कमी से जूझ रहा है। सैन्य सरकार ने विदेशी सहायता स्वीकार करने की घोषणा की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने प्रारंभिक राहत कार्यों के लिए 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि जारी की है। वहीं चीन और रूस ने म्यांमार में बचाव दल भेजे हैं, राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अमेरिकी मदद की बात कही है।

एक ऑनलाइन वीडियो में देखा गया कि मंडाले की एक सड़क पर भिक्षु अपने मठ मा सोए याने की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तभी वह पूरी तरह धराशायी हो गया। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इस दुर्घटना में कोई घायल हुआ या नहीं। क्रिश्चियन एड नामक संगठन ने बताया कि भूकंप से एक बांध भी टूट गया, जिससे शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया है।

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी इस भूकंप का प्रभाव महसूस किया गया। यहां एक 33 मंजिला निर्माणाधीन इमारत पूरी तरह गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरते ही पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया, लोग घबराकर चीखने लगे और सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई। बैंकॉक प्रशासन के अनुसार, इस दुर्घटना में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, 16 घायल हैं और 101 लोग लापता हैं। थाईलैंड सरकार ने इसे “भयानक त्रासदी” करार दिया और कहा कि अभी भी कुछ लोगों के जीवित होने की उम्मीद है।

चीनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप चीन के युन्नान और सिचुआन प्रांतों में महसूस किया गया। वहीं म्यांमार की सीमा पर स्थित रुइली शहर में भूकंप से नुकसान और चोटें आईं। सामने आए एक वीडियो रुइली में सड़क पर इमारत का मलबा बिखरा हुआ दिख रहा है और एक व्यक्ति को स्ट्रेचर पर एम्बुलेंस की ओर ले जाया जा रहा था। रुइली से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित चीनी शहर मंगशी में भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग खड़े नहीं हो पा रहे थे।

भारत ने सहायता के तौर पर म्यांमार को 15 टन राहत सामग्री भेजी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर जानकारी साझा की है। ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत भारतीय वायुसेना (आईएएफ) सी-130जे विमान में सवार होकर म्यांमार को राहत सामग्री भेजी गई।  राहत पैकेज में टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, हाइजीन किट, सोलर लैंप, जनरेटर सेट और पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, सीरिंज, दस्ताने और पट्टियां जैसी आवश्यक जीचें शामिल हैं।


दक्षिण कोरिया में आग से 16 लोगों की हुई मौत, आग बुझाने में लगे 9,000 अग्निशामक

जल गई 43,000 एकड़ से अधिक भूमि 

19 लोग हुए घायल 

1,300 साल पुराना बौद्ध मंदिर गौंसा भी आग से हुआ नष्ट

सियोल। दक्षिण कोरिया के दक्षिणी क्षेत्रों में शुष्क मौसम और तेज हवाओं के चलते लगी आग से अब तक कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। सरकारी अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि आग से 19 लोग घायल हुए हैं। अंडोंग शहर और अन्य दक्षिण-पूर्वी कस्बों के अधिकारियों ने मंगलवार को लोगों को अपने घर छोड़ने का आदेश दिया, क्योंकि अग्निशामक दल शुष्क हवाओं के कारण कई क्षेत्रों में लगी आग को बुझाने की कोशिश कर रहे थे। आग से करीब 43,000 एकड़ से अधिक भूमि जल गई है। इसके अलावा, उइसोंग में 1,300 साल पुराना एक बौद्ध मंदिर गौंसा भी आग से नष्ट हो गया। हालांकि, इसमें किसी के घायल होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है। मंदिर के कुछ राष्ट्रीय खजाने, जिसमें पत्थर की बुद्ध प्रतिमा भी शामिल है, को लकड़ी की इमारतों तक आग पहुंचने से पहले ही खाली करा लिया गया था।

दक्षिण कोरिया के आंतरिक और सुरक्षा मंत्रालय के अनुसार, अंडोंग, उइसोंग, सांचोंग और उल्सान शहरों में 5,500 से अधिक लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने पहले कहा था कि अग्निशामकों ने सबसे बड़ी आग की लपटों को बुझा दिया है, लेकिन शुष्क मौसम ने उनकी कोशिशों में रुकावट डाली और आग फिर से फैल गई। आग बुझाने के लिए लगभग 9,000 अग्निशामक, 130 से अधिक हेलीकॉप्टर और सैकड़ों वाहन तैनात किए गए, लेकिन हवाओं के तेज होने से रात भर आग बुझाने के किए गए प्रयास आंशिक रूप से रुक गए, जिसके चलते एंडोंग और उइसोंग काउंटी के अधिकारियों ने कई गांवों और एंडोंग विश्वविद्यालय के आस-पास के निवासियों को सुरक्षित स्थानों या अस्थायी आश्रयों में जाने का आदेश दिया है।

इनमें स्कूल और इनडोर जिम भी शामिल हैं, क्योंकि उइसोंग में लगी आग तेज हवाओं के कारण फैलती रही।इसके अलावा, आग उइसोंग के पास के तटीय शहर योंगदेओक में भी फैल गई, जहां अधिकारियों ने सड़कें बंद कर दीं और कम से कम चार गांवों के निवासियों को घर खाली करने का आदेश दिया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उइसोंग के पास ही चेओंगसोंग काउंटी की एक जेल से लगभग 2,600 कैदियों को स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है।कोरिया वन सेवा के अनुसार, बुधवार सुबह तक अग्निशमन कर्मी देश भर में कम से कम पांच सक्रिय जंगल की आग बुझाने में लगे थे। इसके अलावा, शनिवार को तेज हवाओं के कारण तेजी से फैली आग की लपटों में फंसने से सांचोंग में चार अग्निशमन कर्मियों और सरकारी कर्मचारियों की मौत हो गई।


आखिर क्यों.. पेरू की एक महिला को संघीय आव्रजन अधिकारियों ने हनीमून से लौटने के बाद किया गिरफ्तार

अमेरिका। वीजा खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रह रहीं पेरू की एक महिला को संघीय आव्रजन अधिकारियों ने हनीमून से लौटने के बाद गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद महिला के पति और ट्रंप समर्थक ने कहा कि उसे अपने वोट पर कोई पछतावा नहीं है। ट्रंप ने यह प्रणाली नहीं बनाई, लेकिन उनके पास इसे सुधारने का अवसर है।

विस्कॉन्सिन के रहने वाले ब्रैडली बार्टेल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक हैं। उन्होंने चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वोट दिया था। उनकी पत्नी कैमिला मुनोज पेरू की नागरिक हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुनोज 2019 में वर्क-स्टडी वीजा पर विस्कॉन्सिन डेल्स पहुंची थीं। इस दौरान कोरोना के चलते अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर रोक लगने के कारण उनका वीजा समाप्त हो गया था। उन्होंने खेती और रेसेप्शनिस्ट का काम किया। इस दौरान उनकी मुलाकात मिस्टर बार्टेल से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और कुछ समय बाद उन्होंने शादी कर ली। मगर कोरोना के चलते वे हनीमून पर नहीं जा सके।

फरवरी में वे हनीमून के लिए प्यूर्टो रिको गए। हनीमून से लौटने पर आव्रजन अधिकारियों ने बार्टेल की पत्नी मुनोज से उनकी नागरिकता के बारे में पूछा। जब उन्होंने बताया कि वह ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रही हैं तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया। अब उन्हें लुइसियाना में एक ICE सुविधा में रखा गया है।

इसे लेकर मुनोज के पति बार्टेल ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह एक बुरे सपने के जैसा था। हमारे पास वकील है। मगर सिस्टम बहुत अक्षम है, इसलिए इसमें जितना समय लगना चाहिए, उससे ज़्यादा समय लग रहा है। मुझे बहुत से नफरत भरे संदेश मिले हैं, बहुत से लोगों ने कहा है कि हम इसके लायक हैं।

बार्टेल ने आव्रजन की आलोचना करते हुए सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि ICE के पास वास्तव में कोई जानकारी नहीं होती। विभागों के बीच बेहतर प्रक्रियाओं और संचार के लिए सिस्टम को नया रूप देने की आवश्यकता है। अगर मेरी पत्नी को निर्वासित किया जाता है तो मैं पेरू जाऊंगा। उन्होंने कहा कि यह मेरे दिमाग में आया है, लेकिन मेरे बेटे के लिए यह बहुत मुश्किल होगा।

राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका से करीब 1.1 करोड़ अवैध अप्रवासियों को निर्वासित करने की बात कही थी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने लैटिन अमेरिकी देशों में अवैध अप्रवासियों को लेकर छह उड़ानें भरी। ट्रंप ने  अप्रवासियों पर शिकंजा कसने के लिए सेना का भरपूर इस्तेमाल किया। सैन्य उड़ानें निर्वासितों को लेकर ग्वाटेमाला, होंडुरास, पनामा, इक्वाडोर, पेरू और भारत समेत कई देशों में लेकर गईं।


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