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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान को खुली चेतावनी, कहा- “परमाणु खतरे को हर हाल में खत्म करेंगे”

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान को खुली चेतावनी, कहा- “परमाणु खतरे को हर हाल में खत्म करेंगे”

इजरायल।  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए सैन्य कार्रवाई की मजबूरी और रणनीति का खुलासा किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान से उत्पन्न परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता।

अपने बयान में नेतन्याहू ने दो टूक कहा कि दशकों से ईरान खुलकर इजरायल के विनाश की बात करता रहा है और अब यह सिर्फ बयानबाजी नहीं, एक वास्तविक खतरा बन चुका है। उनके अनुसार, ईरान ने पर्याप्त मात्रा में उच्च संवर्धित यूरेनियम जमा कर लिया है, जिससे वह कुछ ही महीनों के भीतर परमाणु हथियार तैयार करने की स्थिति में आ सकता है।

इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि ईरान की नतांज परमाणु सुविधा, मिसाइल कार्यक्रम और वैज्ञानिकों को लक्ष्य बनाकर इजरायल ने गहरे और सटीक हमले किए हैं। यह कार्रवाई इजरायल की पारंपरिक युद्ध नीति से अलग, रणनीतिक और सीमित हमलों पर आधारित है।

नेतन्याहू ने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि यहूदियों ने अतीत में नाजी नरसंहार झेला है और अब वे दोबारा किसी ऐसे खतरे को जन्म नहीं लेने देंगे। उन्होंने साफ किया कि देश की सुरक्षा और अस्तित्व के लिए यह एक निर्णायक मोड़ है।

ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका के बीच यह घटनाक्रम मध्य पूर्व को और अधिक अस्थिर बना सकता है।


12 देशों पर अमेरिका की यात्रा पाबंदी, अफ्रीकी देशों में बढ़ी नाराजगी

नजदीकी संबंधों में तनाव, अफ्रीकी देशों में अमेरिका की नई यात्रा नीति को लेकर नाराजगी

चाड सरकार ने अमेरिका के खिलाफ सख्त प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी नागरिकों के लिए वीजा जारी करना बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने चाड समेत कई अन्य देशों के नागरिकों के अपने यहां प्रवेश पर पाबंदी लगाई है। इस कदम से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ सकती है।

राष्ट्रपति महामत इदरीस डेबी ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा, “हमारे पास दौलत नहीं है, लेकिन हमारी गरिमा और आत्मसम्मान हमारे सबसे बड़े संसाधन हैं।” उन्होंने कहा कि चाड सरकार अब पारस्परिकता के सिद्धांत पर चलते हुए अमेरिका के नागरिकों को वीजा जारी नहीं करेगी।

अमेरिका की नई यात्रा नीति के तहत अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, ईरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन जैसे देशों के नागरिकों पर अमेरिका आने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही सात अन्य देशों के लिए भी यात्रा नियमों को सख्त कर दिया गया है। यह नीति सोमवार से लागू मानी जाएगी।

जहां चाड ने तीव्र विरोध जाहिर किया है, वहीं कांगो गणराज्य ने कहा कि उनका नाम सूची में एक गलतफहमी के चलते शामिल किया गया है। प्रवक्ता थियरी मोंगल्ला ने स्पष्ट किया, “कांगो कोई आतंकी देश नहीं है और न ही हमारी कोई चरमपंथी नीति है। हम उम्मीद करते हैं कि यह गलती जल्द सुधारी जाएगी।”

दूसरी ओर, सिएरा लियोन ने इस स्थिति से निपटने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाने की बात कही है। सूचना मंत्री चेर्नोर बाह ने कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ संवाद के माध्यम से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तैयार है और यात्रा प्रतिबंध हटाने की दिशा में हरसंभव सहयोग करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह नीति उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं से जुड़ी है, लेकिन इसका असर उन देशों पर भी हो रहा है जो सहयोग की मुद्रा में हैं। चाड जैसे देश अमेरिका की कार्रवाई को भेदभावपूर्ण मानते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिससे अमेरिका और अफ्रीकी देशों के बीच संबंध और जटिल हो सकते हैं।


कोलंबिया में राष्ट्रपति पद के प्रमुख दावेदार मिगुएल उरीबे पर जानलेवा हमला, देश में छाया राजनीतिक संकट

राष्ट्रपति पद के दावेदार को मंच से संबोधन के दौरान मारी गईं गोलियां, हालत नाजुक

बोगोटा – कोलंबिया में 2026 के आम चुनाव से पहले राजनीतिक अस्थिरता गहराने लगी है। राजधानी बोगोटा में शनिवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया जब दक्षिणपंथी दल से राष्ट्रपति पद के प्रमुख प्रत्याशी मिगुएल उरीबे टर्बे पर गोलीबारी की गई। 39 वर्षीय उरीबे गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।

यह हमला उस समय हुआ जब उरीबे राजधानी के मॉडेलिया क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। चश्मदीदों के अनुसार, मंच से बोलते वक्त एक व्यक्ति ने उन पर कई गोलियां चलाईं, जिनमें कुछ उनकी पीठ और सिर पर जा लगीं। हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने हमलावर को घटनास्थल से पकड़ लिया।

पत्नी ने की प्रार्थना की अपील
घटना के बाद मिगुएल की पत्नी, मारिया क्लाउडिया तराजोना ने सोशल मीडिया के माध्यम से भावुक अपील की। उन्होंने लिखा, “मिगुएल जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कृपया ईश्वर से प्रार्थना करें कि वे उन्हें जीवनदान दें और डॉक्टरों को सही दिशा दें।”

राजनीतिक गलियारों में हलचल
घटना को लेकर देशभर में आक्रोश और शोक की लहर है। राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया और राजनीतिक हिंसा की संस्कृति को अस्वीकार्य बताया। पूर्व राष्ट्रपति अल्वारो उरीबे ने भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उरीबे टर्बे को “कोलंबिया की उम्मीद” कहा।

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच जारी
बोगोटा के मेयर कार्लोस फर्नांडो गैलन ने बताया कि हमलावर को तत्काल पकड़ लिया गया और पूछताछ की जा रही है। रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस हमले की साजिश में शामिल अन्य लोगों की जानकारी देने वालों को 3 बिलियन कोलंबियाई पेसो का इनाम घोषित किया है।

कोलंबिया के अतीत की छाया
इस हमले ने 20वीं सदी के अंत में हुई उन राजनीतिक हत्याओं की याद दिला दी है, जब लुइस कार्लोस गैलन और कार्लोस पिजारो जैसी हस्तियों की जान ली गई थी। विशेषज्ञ इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक बड़ा खतरा मान रहे हैं। सरकार ने अब आगामी चुनावों के मद्देनजर सभी उम्मीदवारों की सुरक्षा के लिए नए प्रोटोकॉल तैयार करने की बात कही है।


एक बार फिर , भारत ने दिया अपने मानवता का परिचय

भूकंप के बाद म्यांमार की मदद में भारत बना मजबूत पड़ोसी – राहत और बचाव कार्य में दिखाई तेजी

समीक्षा सिंह

देहरादून। जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तब असली मानवता की परीक्षा होती है। हाल ही में म्यांमार में आए भयंकर भूकंप ने सैकड़ों लोगों की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। कई इमारतें ज़मीन मे मिल गयी, जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत ने एक बार फिर साबित किया कि वह न सिर्फ एक पड़ोसी देश है, बल्कि एक सच्चा मित्र और मददगार साथी भी है।

भूकंप की सूचना मिलते ही भारत सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए NDRF की टीमें म्यांमार भेजीं। ये टीमें आधुनिक उपकरणों, स्निफर डॉग्स, जीवन रक्षक किट्स और मेडिकल सपोर्ट से पूरी तरह लैस थीं। भारत ने राहत सामग्री के साथ मेडिकल टीमें, मोबाइल हॉस्पिटल यूनिट्स, ज़रूरी दवाएं, फर्स्ट एड किट और साफ पेयजल की भी व्यवस्था की। भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर और C-130J सुपर हरक्यूलिस विमानों के ज़रिए टेंट, कंबल, रेडी-टू-ईट फूड और अन्य जरूरी संसाधन दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाए गए, जहाँ ज़मीनी रास्ते मुश्किल थे। यह मिशन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम नीति’ और ‘मानवता सर्वोपरि’ सोच का सशक्त उदाहरण है।

यह पहली बार नहीं है जब भारत ने किसी आपदा के समय आगे बढ़कर मदद का हाथ बढ़ाया हो। इससे पहले भी भारत ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मानवीय राहत अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है। 2015 में नेपाल में आए भीषण भूकंप के दौरान भारत ने ऑपरेशन मित्र” चलाया था, जिसके तहत सैकड़ों लोगों की जान बचाई गई और ज़रूरी राहत सामग्री पहुंचाई गई। 2013 में उत्तराखंड में आई भयंकर बाढ़ के समय ऑपरेशन राहत” के माध्यम से भारतीय सेना और वायुसेना ने हजारों फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला। इसके अलावा, 2023 में तुर्की और सीरिया में आए भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन दोस्त” चलाया और मेडिकल टीमों, राहत सामग्री तथा रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल मदद भेजी। ये सभी मिशन इस बात का सबूत हैं कि भारत न सिर्फ अपने नागरिकों, बल्कि पूरी दुनिया की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है – एक जिम्मेदार और संवेदनशील वैश्विक शक्ति के रूप में।


5 जून को मनाया जा रहा विश्व पर्यावरण दिवस, इस बार फोकस प्लास्टिक प्रदूषण पर

UNEP के नेतृत्व में कोरिया गणराज्य करेगा वैश्विक आयोजन की अगुवाई

मोनिका

पूरा विश्व आज पर्यावरण दिवस को मनाने में जुटा हुआ है, जिसमें इस बार दक्षिण कोरिया विश्व स्तर पर मेजबान की भूमिका निभा रहा है। यूनाइटेड नेशन एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP) के मुताबिक, इस साल के विश्व पर्यावरण दिवस का अभियान ‘प्लास्टिक प्रदूषण’ पर केंद्रित है — कि कैसे इस पर काबू पाया जाए। तमाम देशों और हर एक व्यक्ति को साथ में लेकर पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अपील की गई है।

ऐसे समय में जब प्लास्टिक रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है, पर साथ ही एक बहुत बड़ी समस्या भी, इसी को ध्यान में रखते हुए 2025 के विश्व पर्यावरण दिवस का विषय ‘बीट प्लास्टिक पॉल्युशन’ रखा गया है। UNEP ने बताया कि प्लास्टिक दुनिया के हर कोने में पाया जाता है — यहाँ तक कि हमारे शरीर में भी माइक्रोप्लास्टिक्स के रूप में।

इस बार का विश्व पर्यावरण दिवस सभी लोगों को पर्यावरण की सुरक्षा और प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करने का अवसर देता है। UNEP ने यह भी कहा कि इस बार का विश्व पर्यावरण दिवस दक्षिण कोरिया मेजबान की भूमिका निभा रहा है, जिसका उद्देश्य है कि प्लास्टिक को पूरे विश्व स्तर से ही समाप्त किया जाए।

प्लास्टिक प्रदूषण को उसकी जड़ से खत्म करना न केवल सतत विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन, समुद्री जीवों की सुरक्षा और पर्यावरण को सुधारने में एक अहम भूमिका निभाएगा।


भारत-पाक वार्ता पर फिर अमेरिका की दखल की मांग, शहबाज शरीफ ने ट्रंप से लगाई उम्मीदें

पाक PM शहबाज बोले- भारत से तनाव घटाने में ट्रंप निभा सकते हैं अहम भूमिका

इस्लामाबाद। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ चुका पाकिस्तान एक बार फिर भारत के साथ रिश्तों को सामान्य करने के नाम पर अमेरिका की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। इस्लामाबाद में एक अमेरिकी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी नेतृत्व से भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापक बातचीत की पहल करने की अपील की। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “शांति प्रयासों” की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि अमेरिका दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच तनाव कम करने में फिर से भूमिका निभा सकता है।

बिलावल की भाषा में बोले शहबाज

शहबाज का यह बयान पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के उस दावे की पुनरावृत्ति जैसा था, जिसमें उन्होंने ट्रंप को भारत-पाक के बीच संघर्ष विराम का श्रेय दिया था। बिलावल ने पहले कहा था कि ट्रंप ने एक से अधिक बार दोनों देशों के बीच युद्ध टालने की कोशिश की और इसमें कुछ हद तक कामयाबी भी पाई।

थरूर का करारा जवाब: बातचीत बंदूक की नोक पर नहीं होती

भारत की ओर से अमेरिका पहुंचे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख, सांसद शशि थरूर ने पाकिस्तान की पहल को खारिज करते हुए तीखा बयान दिया। थरूर ने कहा, “भारत का रुख स्पष्ट है – आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। कोई भी देश अपने बच्चों पर हमला करने वालों से सिर्फ इसलिए बातचीत नहीं करता कि हमला करने वाला अब ‘शांति की बात’ कर रहा है।”

‘तल्ख सच्चाई से भाग नहीं सकता पाकिस्तान’

थरूर ने पाकिस्तान को उसकी ही नीतियों की याद दिलाते हुए कहा कि आतंकवाद का सबसे बड़ा पोषक वही देश है जो अब खुद को उसका शिकार बता रहा है। उन्होंने कहा, “जिस आतंकवाद की आग में आज पाकिस्तान जल रहा है, उसकी चिंगारी उसने खुद ही बोई थी।”

‘शांति की बात शैतान के मुंह से’

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी पाकिस्तान के शांति संदेश को दिखावा बताया। उन्होंने कहा, “जो देश युद्ध और आतंक के जरिए अपनी विफल नीतियों को ढकने की कोशिश करता है, वह शांति की बात करे तो यह विडंबना ही है।”

अमेरिका का भी झुकाव भारत की ओर

इस पूरी स्थिति में अमेरिका का आधिकारिक रुख भी भारत समर्थक रहा। अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष ब्रायन मास्ट ने पहलगाम हमले पर भारत की जवाबी कार्रवाई को जायज बताया और कहा कि अमेरिका, भारत के साथ गहरे सहयोग और साझेदारी को भविष्य में और मजबूत देखना चाहता है।


भारत-पाक वार्ता पर फिर अमेरिका की दखल की मांग, शहबाज शरीफ ने ट्रंप से लगाई उम्मीदें

पाक PM शहबाज बोले- भारत से तनाव घटाने में ट्रंप निभा सकते हैं अहम भूमिका

इस्लामाबाद। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ चुका पाकिस्तान एक बार फिर भारत के साथ रिश्तों को सामान्य करने के नाम पर अमेरिका की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। इस्लामाबाद में एक अमेरिकी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी नेतृत्व से भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापक बातचीत की पहल करने की अपील की। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “शांति प्रयासों” की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि अमेरिका दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच तनाव कम करने में फिर से भूमिका निभा सकता है।

बिलावल की भाषा में बोले शहबाज

शहबाज का यह बयान पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के उस दावे की पुनरावृत्ति जैसा था, जिसमें उन्होंने ट्रंप को भारत-पाक के बीच संघर्ष विराम का श्रेय दिया था। बिलावल ने पहले कहा था कि ट्रंप ने एक से अधिक बार दोनों देशों के बीच युद्ध टालने की कोशिश की और इसमें कुछ हद तक कामयाबी भी पाई।

थरूर का करारा जवाब: बातचीत बंदूक की नोक पर नहीं होती

भारत की ओर से अमेरिका पहुंचे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख, सांसद शशि थरूर ने पाकिस्तान की पहल को खारिज करते हुए तीखा बयान दिया। थरूर ने कहा, “भारत का रुख स्पष्ट है – आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। कोई भी देश अपने बच्चों पर हमला करने वालों से सिर्फ इसलिए बातचीत नहीं करता कि हमला करने वाला अब ‘शांति की बात’ कर रहा है।”

‘तल्ख सच्चाई से भाग नहीं सकता पाकिस्तान’

थरूर ने पाकिस्तान को उसकी ही नीतियों की याद दिलाते हुए कहा कि आतंकवाद का सबसे बड़ा पोषक वही देश है जो अब खुद को उसका शिकार बता रहा है। उन्होंने कहा, “जिस आतंकवाद की आग में आज पाकिस्तान जल रहा है, उसकी चिंगारी उसने खुद ही बोई थी।”

‘शांति की बात शैतान के मुंह से’

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी पाकिस्तान के शांति संदेश को दिखावा बताया। उन्होंने कहा, “जो देश युद्ध और आतंक के जरिए अपनी विफल नीतियों को ढकने की कोशिश करता है, वह शांति की बात करे तो यह विडंबना ही है।”

अमेरिका का भी झुकाव भारत की ओर

इस पूरी स्थिति में अमेरिका का आधिकारिक रुख भी भारत समर्थक रहा। अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष ब्रायन मास्ट ने पहलगाम हमले पर भारत की जवाबी कार्रवाई को जायज बताया और कहा कि अमेरिका, भारत के साथ गहरे सहयोग और साझेदारी को भविष्य में और मजबूत देखना चाहता है।


अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए नियम सख्त, बीच में पढ़ाई छोड़ने पर रद्द हो सकता है वीजा

अमेरिकी दूतावास ने कहा – वीजा रद्द होने के साथ भविष्य की पात्रता भी जा सकती है

अमेरिका। अमेरिका में पढ़ाई कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने कड़ी चेतावनी दी है। दूतावास ने कहा है कि यदि छात्र बिना जानकारी दिए पढ़ाई छोड़ते हैं या कक्षाओं में नियमित उपस्थिति नहीं रखते हैं, तो उनका वीजा रद्द हो सकता है।

भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से विदेशी छात्रों को सलाह दी कि वे अपने वीजा की शर्तों का सख्ती से पालन करें। दूतावास ने कहा, “यदि आप कक्षाएं छोड़ते हैं, पढ़ाई अधूरी छोड़ते हैं या अपने संस्थान को सूचित किए बिना कोर्स छोड़ते हैं, तो आपका छात्र वीजा निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा, भविष्य में अमेरिकी वीजा के लिए पात्रता भी समाप्त हो सकती है।”

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब बड़ी संख्या में भारतीय छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों में दाखिला ले रहे हैं। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास ने 2023 में भारत में 1.40 लाख से अधिक छात्र वीजा जारी किए थे, जो किसी भी अन्य देश से अधिक थे। यह लगातार तीसरा साल था जब भारत ने छात्र वीजा के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया।


अमेरिका-चीन व्यापार समझौते की नई शुरुआत, 90 दिनों के लिए टैरिफ में राहत

घोषणा के बाद शेयर बाजारों में उछाल, निवेशकों में बढ़ा भरोसा

वाशिंगटन/बीजिंग। अमेरिका और चीन ने अपने तनावपूर्ण व्यापार संबंधों को स्थिर करने के लिए एक बड़ी पहल की है। दोनों देश 90 दिनों की प्रारंभिक अवधि के लिए एक-दूसरे पर लगाए गए घोषित टैरिफ और जवाबी टैरिफ को अस्थायी रूप से वापस लेने पर सहमत हो गए हैं। इस दौरान चीन अमेरिकी उत्पादों पर 10% शुल्क लगाएगा, जबकि अमेरिका चीनी उत्पादों पर औसतन 30% शुल्क वसूलेगा।

संयुक्त बयान में क्या कहा गया?

सोमवार को जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपने व्यापारिक संबंधों की अहमियत को स्वीकार करते हैं। उन्होंने एक स्थायी, संतुलित और पारस्परिक लाभकारी आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।

बयान में यह भी कहा गया कि हालिया चर्चाओं ने स्पष्ट किया है कि संवाद की निरंतरता से दोनों पक्षों की चिंताओं को सुलझाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से अमेरिका और चीन ने नियमित चर्चाओं के लिए एक औपचारिक तंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है।

व्यापार वार्ताओं के लिए प्रतिनिधियों की घोषणा

चीन की ओर से वार्ताओं में स्टेट काउंसिल के वाइस प्रीमियर हे लिफेंग हिस्सा लेंगे, जबकि अमेरिका की ओर से ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर प्रतिनिधित्व करेंगे। ये वार्ताएं बारी-बारी से अमेरिका और चीन या किसी तीसरे देश में हो सकती हैं। आवश्यकतानुसार कार्य-स्तरीय बैठकें भी आयोजित की जा सकती हैं।

पृष्ठभूमि: ट्रम्प का टैरिफ रुख और पहले का निर्णय

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान व्यापार घाटे वाले देशों पर भारी शुल्क लगाए थे। हालांकि बाद में व्यापार समझौतों की संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने 90 दिनों के लिए टैरिफ स्थगित करने का फैसला लिया था। उस समय चीन के लिए टैरिफ दरें 245% तक जाने के संकेत दिए गए थे, जबकि अमेरिका पर चीनी टैरिफ 125% तक थे।

ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल में भी ‘टैरिफ पारस्परिकता’ की नीति को जारी रखते हुए, भारत समेत कई देशों के खिलाफ समान शुल्क लगाने की बात कही थी।

घोषणा का वैश्विक बाजार पर असर

इस ताजा व्यापार समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में उत्साह देखा गया। अमेरिकी फ्यूचर्स में 2% से ज्यादा की तेजी आई, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 3% चढ़ा और जर्मनी-फ्रांस के बेंचमार्क इंडेक्स में 0.7% का उछाल दर्ज हुआ।

हालांकि ट्रम्प प्रशासन की ओर से लगाए गए शुल्कों की लंबी श्रृंखला में चीन के साथ संघर्ष सबसे तीव्र रहा है—विशेष रूप से फेंटेनाइल जैसे खतरनाक पदार्थों की तस्करी रोकने के दबाव के संदर्भ में।


बलूचिस्तान में बीएलए का हिंसक अभियान, सुरक्षा एजेंसियों पर किये ताबड़तोड़ हमले

39 जगहों पर एकसाथ हमले, कई पुलिस स्टेशन कब्जे में, इलाके में फैला डर और तनाव

बलूचिस्तान। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान में 39 विभिन्न स्थानों पर समन्वित हमलों की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने दावा किया है कि उसने कई पुलिस स्टेशनों पर कब्जा कर लिया है और प्रमुख राजमार्गों पर नाकेबंदी की है। बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच के अनुसार, हमलों में पुलिस स्टेशन, सैन्य काफिले, राजमार्ग और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है। संगठन ने एक प्रेस बयान में कहा है कि यह अभियान अभी जारी है और इसके पीछे कुछ खास उद्देश्य हैं जिन्हें वह हासिल करना चाहता है।

बलूचिस्तान में जारी अलगाववादी आंदोलन

बलूचिस्तान में लंबे समय से आजादी की मांग को लेकर अलगाववादी गतिविधियां चल रही हैं। दशकों से जारी इस संघर्ष में हजारों लोग मारे गए और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। हालिया हमले इस लंबे संघर्ष को और उग्र बना सकते हैं, खासकर जब स्वायत्तता और संसाधनों के नियंत्रण की मांगें एक बार फिर प्रमुखता में आ रही हैं।

बीएलए का मकसद और विरोध

बीएलए पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय एक हथियारबंद संगठन है, जो बलूच लोगों के लिए स्वतंत्रता की मांग करता है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार बलूच समुदाय के साथ अन्याय और आर्थिक शोषण कर रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र के गैस और खनिज जैसे संसाधनों का दोहन तो हो रहा है, लेकिन बलूच लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। बीएलए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को भी शोषणकारी मानता है और इससे जुड़ी परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा चुका है।

मानवाधिकार हनन और बलूच जनता की पीड़ा

बलूचिस्तान, जहां अपार प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं, पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा इलाका बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों जैसे ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने हजारों बलूच कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों को गायब किया या मारा है। इन घटनाओं के पीछे जवाबदेही का अभाव और लगातार मिलने वाली सामूहिक कब्रें स्थानीय जनता में डर और आक्रोश को बढ़ा रही हैं।


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