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कराची में आजादी का जश्न बना मातम, बेकाबू हवाई फायरिंग में तीन की मौत, 60 से ज्यादा लोग घायल

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

कराची में आजादी का जश्न बना मातम, बेकाबू हवाई फायरिंग में तीन की मौत, 60 से ज्यादा लोग घायल

लियाकताबाद, कोरंगी, ल्यारी समेत कई जगहों पर हुए हादसे

कराची। पाकिस्तान में 14 अगस्त को आजादी का जश्न इस बार कराची में खून और आंसुओं में बदल गया। आधी रात को शुरू हुई बेकाबू हवाई फायरिंग ने तीन लोगों की जान ले ली, जिनमें एक बुजुर्ग और आठ साल की मासूम बच्ची भी शामिल हैं।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, शहर के अलग-अलग इलाकों में हुई अंधाधुंध फायरिंग में 60 से अधिक लोग घायल हो गए। कई की हालत गंभीर बनी हुई है। लियाकताबाद, कोरंगी, ल्यारी, केमारी, ओरंगी टाउन और बलदिया जैसे इलाकों में लोग गोलियों का शिकार बने।

अजीजाबाद ब्लॉक-8 में खेल रही आठ साल की बच्ची को अचानक लगी गोली ने उसकी जिंदगी खत्म कर दी, जबकि कोरंगी में स्टीफन नाम के व्यक्ति की रास्ते में मौत हो गई। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जश्न मनाने के तरीके ऐसे हों, जो किसी की जान न लें।


रेडिस्ट्रिक्टिंग विवाद गरमाया, कैलिफोर्निया के गवर्नर ने ट्रंप को दी “सेकंड-टू-लास्ट वॉर्निंग”

कैलिफोर्निया के गवर्नर ने रेड स्टेट्स के नक्शे बदलने पर दी कानूनी कार्रवाई की धमकी

वॉशिंगटन। कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ॉम ने पुनर्वितरण (रेडिस्ट्रिक्टिंग) विवाद को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा और तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए न्यूज़ॉम ने ट्रंप को “सेकंड-टू-लास्ट वॉर्निंग” जारी की और साफ चेताया कि कैलिफोर्निया, रेड स्टेट्स में बनाए गए गैरकानूनी निर्वाचन नक्शों को कानूनी कार्रवाई से खत्म कर देगा।

न्यूज़ॉम के प्रेस ऑफिस की ओर से किए गए पोस्ट में ट्रंप की सोशल मीडिया शैली की नकल करते हुए बड़े अक्षरों, असामान्य विराम चिह्नों और हल्के व्यंग्य का इस्तेमाल किया गया। संदेश में कहा गया— “हालिया इतिहास के सबसे कम लोकप्रिय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, यह आपकी दूसरी और आखिरी से पहले वाली चेतावनी है। अगली चेतावनी अंतिम होगी। अभी पीछे हटें, वरना कैलिफोर्निया कानूनी जवाब देगा।”

पुनर्वितरण विवाद की पृष्ठभूमि
न्यूज़ॉम ने हाल ही में ट्रंप को एक पत्र लिखकर टेक्सास समेत कई रिपब्लिकन-शासित राज्यों में निर्वाचन सीमाएं बदलने की कोशिश तुरंत रोकने की मांग की थी। उन्होंने इस कदम को अमेरिकी लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया और कहा कि यह 2026 के चुनाव से पहले सत्ता बचाने की “रणनीतिक चाल” है।

ट्रंप की नीतियों पर सीधा वार
गवर्नर ने ट्रंप के हालिया आपातकालीन आदेश पर भी सवाल उठाए, जिसमें वॉशिंगटन डीसी में संघीय हस्तक्षेप की अनुमति दी गई थी। उन्होंने ट्रंप के इस दावे को “पुराना झूठ” बताया कि डेमोक्रेटिक शहरों में अराजकता फैली हुई है, साथ ही जोड़ा कि अपराध दर वास्तव में GOP-शासित राज्यों में अधिक है।

2028 के राजनीतिक संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैविन न्यूज़ॉम खुद को 2028 के डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में मजबूत कर रहे हैं। उनका यह बयान सिर्फ ट्रंप की नीतियों की आलोचना नहीं, बल्कि पार्टी समर्थकों को एकजुट करने का संदेश भी है। व्हाइट हाउस ने इस विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।


अमेरिका टैरिफ नीति से करेगा कर्ज का भुगतान, ट्रंप बोले- पहले ही लेना चाहिए था ये फैसला

अमेरिका को सैकड़ों अरब डॉलर का लाभ दिलाएगी टैरिफ नीति- ट्रंप

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाए गए पारस्परिक टैरिफ (प्रतिशोधात्मक कर) का पुरजोर बचाव किया है। ट्रंप का कहना है कि इन टैरिफों से अमेरिका को न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि वह देश का भारी कर्ज भी चुका सकेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कदम कई वर्षों पहले उठाया जाना चाहिए था।

‘कर्ज चुकाने के लिए टैरिफ से आएगा रिकॉर्ड राजस्व’
एक मीडिया बातचीत में ट्रंप ने कहा, “अमेरिका में बहुत सारा पैसा आने वाला है, इतना कभी एक साथ नहीं आया होगा। हम उस पैसे से कर्ज का भुगतान करेंगे। यह काम हमें कई साल पहले ही कर लेना चाहिए था। मैंने पहले कार्यकाल में चीन पर टैरिफ लगाए थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण अन्य देशों के साथ यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।”

‘सैकड़ों अरब डॉलर की कमाई करेगा अमेरिका’
ट्रंप ने अपनी नीति को ‘निष्पक्षता आधारित’ बताया। उन्होंने कहा, “मैं किसी पर दबाव नहीं बनाना चाहता, बस निष्पक्षता चाहता हूं। हम जितना संभव हो, पारस्परिक टैरिफ लगाना चाहते हैं। इससे हमारा देश सैकड़ों अरब डॉलर की कमाई करेगा।

2 अप्रैल को की थी टैरिफ नीति की घोषणा
2 अप्रैल को ट्रंप प्रशासन ने उन देशों से आयातित वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है। इसके अतिरिक्त लगभग सभी अन्य देशों पर 10 प्रतिशत आधारभूत कर भी लगाया गया। इस फैसले को ‘राष्ट्रीय आर्थिक आपातकाल’ करार देते हुए ट्रंप ने 1977 के कानून का हवाला दिया। आलोचनाओं के बीच उन्होंने 90 दिनों के लिए इन टैरिफों को स्थगित किया और बातचीत का रास्ता खोला, जिसके बाद कुछ देशों ने अमेरिका से व्यापार समझौते कर लिए।


थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर भीषण संघर्ष, 32 की मौत

आम नागरिक और सैनिकों की गई जान, हजारों लोग विस्थापित

UNSC ने बुलाई आपात बैठक, दोनों देशों से संयम बरतने की अपील

बैंकॉक/नोम पेन्ह। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई ताजा झड़पों में शनिवार को 12 और लोगों की मौत हो गई, जिससे अब तक मरने वालों की संख्या 32 तक पहुंच गई है। मृतकों में सैनिकों के साथ-साथ आम नागरिक भी शामिल हैं, जिससे संकट और गंभीर हो गया है।

संघर्ष के चलते सीमावर्ती इलाकों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक 58,000 से ज्यादा लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा चुके हैं, जबकि कंबोडिया में करीब 23,000 नागरिकों ने अपने घर छोड़ दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए बंद कमरे में आपात बैठक की और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

मध्यस्थता की कोशिशें तेज, ASEAN की पहल
कंबोडिया के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि ने संघर्ष को लेकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए दावा किया कि उनकी ओर से कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं हुई। इधर, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, जो इस समय आसियान अध्यक्ष हैं, ने बताया कि दोनों देशों ने संघर्षविराम की सैद्धांतिक सहमति दे दी है। ASEAN इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने की कोशिशों में जुट गया है।

संघर्ष की जड़  पुराना विवाद और हालिया घटनाएं
सीमा विवाद की चिंगारी मई में भड़की थी, जब एक कंबोडियाई सैनिक मारा गया था। हाल ही में सीमा पर बारूदी सुरंग फटने से पांच थाई सैनिक घायल हो गए, जिसके बाद दोनों देशों के बीच भारी गोलाबारी शुरू हो गई। थाई सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में कई ठिकानों को निशाना बनाया।

सीमावर्ती जनता त्राहिमाम, जनजीवन अस्त-व्यस्त
गोलाबारी और विस्फोटों से प्रभावित इलाकों में आम लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। हजारों लोगों को अस्थायी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी है, जहां भोजन और दवाइयों की भारी किल्लत देखी जा रही है। थाईलैंड के सुरिन जिले में स्कूलों और कॉलेजों को राहत शिविरों में तब्दील कर दिया गया है। कई लोगों ने अपने घरों के पास बंकर बनाकर किसी तरह जान बचाने की कोशिश की है।

नागरिक ठिकानों पर हमले का आरोप-प्रत्यारोप
तनाव के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। कंबोडियाई अधिकारियों ने दावा किया है कि थाई सेना ने बौद्ध मंदिरों और स्कूलों पर हमले किए, जबकि थाई सेना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कंबोडिया अपनी तोपें नागरिक इलाकों में छिपा रहा है। संघर्ष में बच्चों और बुजुर्गों की मौतों ने हालात को और ज्यादा भयावह बना दिया है।


भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत: विदेश मंत्री डॉ. एस.जयशंकर ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से की मुलाकात

SCO बैठक के दौरान सीमा तनाव के बाद पहली बार हुई सीधी बातचीत

जयशंकर बोले – मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए

बीजिंग– भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक नई सकारात्मक पहल सामने आई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक के अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच हालिया सीमा तनाव में कमी के बाद पहली उच्चस्तरीय सीधी बातचीत मानी जा रही है।

जयशंकर ने शी जिनपिंग को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए द्विपक्षीय संबंधों में हालिया प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों को स्थायित्व और दिशा देने में शीर्ष नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

सीमा विवाद और आपसी भरोसे पर हुई चर्चा
विदेश मंत्री ने SCO सम्मेलन के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने बताया कि बीते नौ महीनों में भारत-चीन संबंधों में ठोस सुधार हुआ है और सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि दोनों देश तनाव कम करने के साथ-साथ लंबित मुद्दों पर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को संघर्ष का रूप नहीं लेना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंधों को वैश्विक हित में भी बताया।

व्यापार, पर्यटन और संपर्क बढ़ाने पर जोर
बैठक में भारत-चीन व्यापार संबंधों पर भी बात हुई, जहां जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री के समक्ष भारत के विनिर्माण क्षेत्र को प्रभावित करने वाले चीनी प्रतिबंधों पर चिंता जताई। उन्होंने चीन से आग्रह किया कि दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाने के लिए सीधी उड़ानों को फिर से शुरू किया जाए, पर्यटन को प्रोत्साहन मिले और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाया जाए।

आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट रुख, कैलाश यात्रा बहाली का स्वागत
SCO मंच पर जयशंकर ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए कहा कि संगठन को चरमपंथ, अलगाववाद और आतंकवाद के विरुद्ध मिलकर काम करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः प्रारंभ करने के चीन के निर्णय का स्वागत किया, जो कोविड महामारी के कारण पांच वर्षों से बंद थी।


अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला: रूस ने यूक्रेन पर बरसाए 728 ड्रोन

लुत्स्क। यूक्रेन पर रूस ने बीती रात अब तक का सबसे भीषण हमला किया, जिसमें 728 ड्रोन और 13 मिसाइलें दागी गईं। यूक्रेनी वायुसेना ने इसे अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया है। हमले का मुख्य निशाना पश्चिमी यूक्रेन का वोलिन क्षेत्र और राजधानी लुत्स्क रही, जहां की सीमाएं पोलैंड और बेलारूस से लगती हैं। इस हमले से पूरे इलाके में दहशत फैल गई और बिजली-संचार व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा।

रातभर चला हमला, नागरिकों में मची अफरातफरी
यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, उन्होंने कुल 296 ड्रोनों और 7 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 415 ड्रोन रडार से गायब हो गए या फिर इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के ज़रिए निष्क्रिय कर दिए गए। यह हमला पूरी रात चला और कई इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। संचार सेवाएं भी बाधित हुईं, जिससे आम नागरिकों में दहशत फैल गई।

लुत्स्क और वोलिन पर रहा रूस का फोकस
राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि लुत्स्क शहर को विशेष रूप से निशाना बनाया गया, जहां यूक्रेनी एयरबेस स्थित हैं। ये बेस पश्चिमी सप्लाई लाइनों के लिए बेहद अहम हैं। रूस की यह रणनीति संभवतः यूक्रेन के सप्लाई चैन को कमजोर करने की कोशिश है।

ड्रोन हमलों पर बढ़ता रूस का भरोसा
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अब पारंपरिक मिसाइलों की बजाय ड्रोनों पर अधिक निर्भर हो रहा है। डिकॉय ड्रोन का इस्तेमाल कर यूक्रेन की एयर डिफेंस को भटकाने की कोशिश की गई, जिससे यह भी साफ है कि रूस अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है।

यूक्रेन की जवाबी रणनीति और मांग
यूक्रेनी अधिकारियों ने दावा किया कि वे इस हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों से और अधिक एयर डिफेंस सिस्टम, विशेषकर अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम की मांग दोहराई है। जेलेंस्की ने बताया कि देश में स्वदेशी इंटरसेप्टर ड्रोनों का उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया जा रहा है।

वैश्विक प्रतिक्रिया और मानवाधिकार चिंता
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने रूस के इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने रूस से आग्रह किया है कि वह नागरिक इलाकों को निशाना बनाना बंद करे और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करे। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षित आश्रयों में जाने की अपील की है।


अमेरिका विरोध पर ट्रंप का बड़ा फैसला, 10% टैरिफ लागू करने की चेतावनी

ब्रिक्स द्वारा ईरान-इस्राइल मसले पर अमेरिका की आलोचना के बाद ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया, ट्रुथ सोशल पर दी चेतावनी

वाशिंगटन। ब्राजील में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच वैश्विक मंच पर कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका विरोधी रुख अपनाने वाले देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप की यह प्रतिक्रिया ब्रिक्स द्वारा ईरान और इस्राइल के संघर्ष पर अमेरिका की नीतियों की आलोचना के बाद सामने आई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर बयान जारी करते हुए लिखा कि “जो भी देश अमेरिका विरोधी ब्रिक्स नीतियों का समर्थन करेगा, उस पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। इस फैसले में कोई अपवाद नहीं होगा।” ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि यह चेतावनी उन सभी देशों के लिए है जो वैश्विक व्यापार के नाम पर अमेरिका के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं।

इससे पहले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे देशों ने अमेरिका का नाम लिए बिना ईरान पर सैन्य हमले और बढ़ते व्यापार शुल्क (टैरिफ) की आलोचना की थी। इस्राइल की ओर से मध्य-पूर्व में जारी सैन्य कार्रवाइयों की भी निंदा की गई। ब्रिक्स नेताओं ने अपने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि विवादों को कूटनीतिक बातचीत से सुलझाना चाहिए, न कि सैन्य टकराव या आर्थिक दमन से।

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने भी कहा कि “शांति की तुलना में युद्ध में निवेश करना आसान होता है, लेकिन इसका दायरा सीमित और विनाशकारी होता है।” उन्होंने नाटो देशों द्वारा सैन्य खर्च बढ़ाने पर सवाल उठाया और वैश्विक स्थायित्व के लिए कूटनीतिक पहल को जरूरी बताया।

इस बीच, अमेरिका में टैरिफ निलंबन की समयसीमा 9 जुलाई को समाप्त होने जा रही है, जिसके चलते दुनिया भर में व्यापारिक हलकों में चिंता का माहौल है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे अधिकांश देशों के लिए टैरिफ में राहत की अवधि नहीं बढ़ाएंगे और पहले ही 10-12 देशों को नए शुल्क की सूचना देने वाले पत्रों पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन की थीम और भागीदारी:
इस बार ब्रिक्स सम्मेलन ब्राजील की मेजबानी में हुआ, जिसमें पुराने 5 देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के अलावा नए सदस्य देशों मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया ने हिस्सा लिया। ब्राजील ने 1 जनवरी 2025 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी। इस बार की थीम रही- समावेशी और टिकाऊ वैश्विक शासन के लिए ग्लोबल साउथ का सहयोग मजबूत करना।


ईरान-इस्राइल तनाव चरम पर, ड्रोन हमले और फांसी की सजा के बीच बढ़ा संघर्ष

तेहरान/जेरूसलम- इस्राइली सेना ने सोमवार सुबह दावा किया कि उसने ईरान में मिसाइल लांचरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। 15 से अधिक फाइटर जेट्स ने पश्चिमी ईरान के केरमानशाह और हमादान में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें मिसाइल भंडारण केंद्र, रडार और ड्रोन बेस शामिल हैं। ईरान ने इस्राइली “हर्मीस 900” ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है।

इस बीच, ईरान ने मोसाद से जासूसी के आरोप में तीसरे व्यक्ति को फांसी दी है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, मोहम्मद अमीन महदवी को सोमवार को फांसी दी गई, जबकि पिछले दिनों दो और लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है।

कूटनीति बनाम युद्ध:
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने क्षेत्र में युद्ध बढ़ने पर चिंता जताते हुए कूटनीति और संयम की अपील की है। अमेरिका ने भी संयुक्त राष्ट्र में ईरान से परमाणु हथियार छोड़ने और इस्राइल के खिलाफ हमलों को रोकने का आग्रह किया है।

ट्रंप पर लगा ‘युद्ध भड़काने’ का आरोप:
रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर क्षेत्र में नया युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है। वहीं, ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है।

IAEA प्रमुख ने चेताया कि फोर्डो जैसे गहरे भूमिगत ठिकानों पर हुए हमले के बाद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) खतरे में है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तत्काल लड़ाई रोकने का आग्रह किया।


G7 शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी करेगा फ्रांस का इवियन शहर

राष्ट्रपति मैक्रों ने कनाडा सम्मेलन के दौरान की घोषणा, ऐतिहासिक स्थल फिर बनेगा वैश्विक मंच

फ्रांस। कनाडा में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की कि अगला सम्मेलन फ्रांस के विख्यात स्पा टाउन इवियन-लेस-बेन्स में आयोजित किया जाएगा। वीडियो संदेश के जरिए इस घोषणा के तुरंत बाद मैक्रों ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस ऐतिहासिक शहर ने आयोजन के लिए पूरी तत्परता और प्रतिबद्धता दिखाई है।

इवियन: सिर्फ स्पा टाउन नहीं, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का भी गवाह
फ्रांसीसी आल्प्स की गोद में बसे इवियन-लेस-बेन्स को उसकी प्राकृतिक सुंदरता और खनिज जल के लिए जाना जाता है। 19वीं सदी में प्रसिद्धि पाने वाला यह शहर समय के साथ एक लक्ज़री रिसॉर्ट में तब्दील हो गया, जो कभी यूरोपीय राजघरानों और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की पसंदीदा मंज़िल रहा है।

इतिहास में दर्ज है इवियन समझौता
यह पहली बार नहीं है जब इवियन वैश्विक चर्चा के केंद्र में आया हो। 1962 में यहीं पर हुए इवियन समझौते ने फ्रांस और अल्जीरिया के बीच चले लंबे युद्ध को समाप्त किया था, जिससे अल्जीरिया को औपनिवेशिक शासन से मुक्ति मिली।

फ्रांस की दूसरी मेज़बानी, पिछली बार 2019 में था आयोजक
G7 सम्मेलन हर साल सात प्रमुख लोकतांत्रिक देशों—ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, इटली और जापान—के बीच बारी-बारी से आयोजित होता है। फ्रांस इससे पहले 2019 में बियारिट्ज़ शहर में इस सम्मेलन की मेज़बानी कर चुका है।


ईरान-इजरायल के बीच मिसाइल युद्ध हुआ और घातक

ईरान ने दागी 100 मिसाइलें, इजरायल में 224 लोगों की मौत का दावा

ईरान/ इजरायल। पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। सोमवार तड़के ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने एक नई दिशा ले ली जब ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र के नजदीक जोरदार धमाकों की खबर सामने आई। इन विस्फोटों के साथ ही इलाके में 2.5 तीव्रता के हल्के भूकंपीय झटके दर्ज किए गए, जिससे आस-पास के क्षेत्रों में दहशत फैल गई।

कोम शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर इन धमाकों की आवाजें इतनी तीव्र थीं कि नागरिकों को यह प्राकृतिक भूकंप का अहसास हुआ। क्षेत्र पहले से ही सीस्तान-बलूचिस्तान की अस्थिर भौगोलिक स्थिति के कारण संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इजरायल द्वारा फोर्डो न्यूक्लियर साइट को निशाना बनाकर मिसाइल हमला किया गया, जिससे ज़मीन में कंपन पैदा हुआ और गंभीर क्षति की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, ईरानी प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ईरान इंटरनेशनल और अन्य सोशल मीडिया चैनलों पर साझा किए गए वीडियो में भारी विस्फोटों के दृश्य देखे गए हैं। वहीं, जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी कथित तौर पर करीब 100 मिसाइलें इजरायल की ओर दागी हैं। बीते चार दिनों से दोनों देशों के बीच तीव्र युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है।

इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 224 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ईरानी हमलों से भी देश में व्यापक नुकसान हुआ है। सुरक्षा एजेंसियां मौके पर राहत और जांच कार्य में जुटी हुई हैं।


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