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सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नेपाल में हिंसक प्रदर्शन, राजधानी में लगा कर्फ्यू

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नेपाल में हिंसक प्रदर्शन, राजधानी में लगा कर्फ्यू

काठमांडू। नेपाल में सरकार द्वारा बड़े सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ देशभर में विरोध तेज हो गया है। राजधानी काठमांडू सहित कई हिस्सों में आज हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया। दरअसल, नेपाल सरकार ने बीते सप्ताह फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप सहित कई प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर पाबंदी लगा दी थी। सूचना एवं संचार मंत्रालय के अनुसार इन कंपनियों ने मंत्रालय के पास अनिवार्य पंजीकरण नहीं कराया था, जिसके चलते यह कदम उठाया गया।

हजारों युवा उतरे सड़को पर

सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध में सोमवार को हजारों युवा सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी मैतीघर मंडला से संसद भवन की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की, आंसू गैस छोड़ी और पानी की बौछार की, जबकि कुछ जगहों पर हल्की फायरिंग भी की गई। इस दौरान हिंसक झड़पों में कम से कम एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और 42 अन्य घायल हुए। काठमांडू के न्यू बानेश्वर और झापा जिले के दमक में हालात सबसे गंभीर रहे।

सोशल मीडिया बैन बंद करो

युवाओं का कहना है कि यह प्रदर्शन सिर्फ सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार में बढ़ते भ्रष्टाचार, नेतृत्व की गैर-जिम्मेदारी और तानाशाही रवैये के विरोध में है। छात्र और युवा नेताओं ने नारे लगाए: “सोशल मीडिया पर प्रतिबंध बंद करो, भ्रष्टाचार खत्म करो।”

4 सितम्बर को सभी एप्प हुए बंद

सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को 28 अगस्त से पंजीकरण के लिए सात दिन का समय दिया था। जैसे ही समय सीमा समाप्त हुई, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप, एक्स (पूर्व में ट्विटर), रेडिट और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि अपंजीकृत प्लेटफॉर्म्स का उपयोग नफरत फैलाने और साइबर अपराध के लिए किया जा रहा था।

कौन कौन से एप्स हुए बैन

नेपाल सरकार के आदेश के दायरे में आने वाले प्लेटफॉर्म्स की सूची में दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स शामिल हैं। इनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, एक्स (पहले ट्विटर), यूट्यूब, स्नैपचैट, लिंक्डइन, रेडिट, वाइबर और बॉटिम प्रमुख हैं। ये सभी प्लेटफॉर्म नेपाल में करोड़ों यूज़र्स द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं और सरकार चाहती है कि ये कंपनियाँ स्थानीय स्तर पर पंजीकरण कराए।

पहले भी कई एप्स पर लगा प्रतिबंध

नेपाल इससे पहले भी कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा चुका है। जुलाई में सरकार ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए टेलीग्राम ऐप को ब्लॉक कर दिया था। वहीं, अगस्त 2024 में टिकटॉक पर लगाया गया नौ महीने का प्रतिबंध तब हटाया गया जब कंपनी ने नेपाली नियमों का पालन करने पर सहमति जताई।

राजधानी में लगा कर्फ्यू

प्रदर्शन के दौरान ‘हामी नेपाल’ जैसी युवा संगठनों ने पीड़ितों को प्राथमिक चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई। घटनाओं के बाद राजधानी में कर्फ्यू लगाया गया हैं  साथ ही, सेना को राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री निवास के बाहर तैनात किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्रांति नेपाल के युवाओं की राजनीतिक चेतना और डिजिटल युग में लोकतंत्र की मांग को दर्शाती है।

फिलहाल राजधानी काठमांडू में रात 10 बजे तक कर्फ्यू लागू है और संसद व प्रधानमंत्री आवास के बाहर सेना तैनात कर दी गई है।


पाकिस्तान में बड़ा डेटा लीक, केंद्रीय मंत्रियों तक की जानकारी ऑनलाइन बिक्री पर

कॉल रिकॉर्ड से लेकर विदेश यात्राओं तक की जानकारी ऑनलाइन बिक्री पर उपलब्ध

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक बार फिर साइबर सुरक्षा की गंभीर चूक सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हजारों नागरिकों और कई केंद्रीय मंत्रियों का संवेदनशील डेटा लीक होकर ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध है। लीक हुए डेटा में मोबाइल सिम डिटेल्स, कॉल रिकॉर्ड, राष्ट्रीय पहचान पत्र की जानकारी से लेकर विदेश यात्राओं तक की जानकारी शामिल है। बताया जा रहा है कि यह डेटा बेहद कम दामों में बेचा जा रहा है।

ऑनलाइन बिक रहा डेटा, सरकार पर उठे सवाल

इससे पहले भी पाकिस्तान में कई बार डेटा लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन सरकार ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रही है। ताजा मामले में मोबाइल लोकेशन डेटा मात्र 500 रुपये में और कॉल रिकॉर्ड 2000 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, विदेश यात्राओं की जानकारी 5000 रुपये में खरीदी जा सकती है। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि जिन लोगों का डेटा लीक हुआ है, उनका दुरुपयोग और उत्पीड़न हो सकता है।

जांच के आदेश, बनी 14 सदस्यीय कमेटी

घटना को लेकर आम जनता में नाराजगी बढ़ गई है और लोग सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने जांच के आदेश दिए हैं। इस संबंध में 14 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जिसे दो सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रहा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा लीक अब पूरी दुनिया में एक गंभीर चुनौती बन गया है। हाल ही में साइबर सुरक्षा रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दुनियाभर के करीब 16 अरब लोगों का डेटा लीक हुआ है, जिसे इंटरनेट इतिहास की सबसे बड़ी डेटा चोरी बताया गया।


अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा- टैरिफ नीति ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दी ताकत और वैश्विक वार्ता में बढ़ाया कौशल

ट्रंप ने बाइडन प्रशासन की तुलना अपने कार्यकाल से करते हुए कहा कि उनके पहले चार साल में अमेरिका आर्थिक रूप से पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने टैरिफ (आयात शुल्क) नीति का जोरदार बचाव किया और इसे “व्यापार के माध्यम से युद्धों को सुलझाने का उपकरण” बताया। उन्होंने कहा कि टैरिफ नीति ने अमेरिका को वैश्विक स्तर पर बेहतरीन बातचीत की क्षमता दी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की। ट्रंप ने अपने पूर्व राष्ट्रपति बाइडन प्रशासन की नीतियों की आलोचना भी की।

व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में ट्रंप ने टैरिफ को “जादुई उपाय” बताते हुए कहा कि इस नीति के कारण उन्होंने सात युद्धों को सुलझाने में सफलता हासिल की। उन्होंने दावा किया कि टैरिफ ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया और वैश्विक आर्थिक तनाव को नियंत्रित करने में मदद की।

ट्रंप ने बाइडन प्रशासन की तुलना अपने कार्यकाल से करते हुए कहा कि उनके पहले चार साल में अमेरिका आर्थिक रूप से पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ नीति अमेरिका को बेहतर वार्ताकार बनाती है और इसे अपनाने से देश को वित्तीय लाभ भी मिलता है।

भारत के साथ संबंधों पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत के रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन पिछले कई सालों में यह एकतरफा रहे हैं। उन्होंने भारत पर लगाए गए उच्च टैरिफ का उदाहरण देते हुए कहा कि इस कारण अमेरिका-भारत के बीच व्यापार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाया। ट्रंप ने हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल के मामले को भी उद्धृत करते हुए कहा कि अमेरिका भारत से शुल्क नहीं ले रहा, जबकि भारत अधिक टैरिफ वसूल रहा है।


पूर्वी अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंप ने मचाई तबाही, 600 से अधिक लोगों की मौत

कुनार और नंगरहार में कई गांव तबाह, राहत कार्य जारी

काबुल। पूर्वी अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सीमा के पास आए शक्तिशाली भूकंप ने कई गांवों को तहस-नहस कर दिया है। हादसे में अब तक 620 से अधिक लोगों की मौत और 1,300 से ज्यादा घायल होने की पुष्टि हुई है। बचाव और राहत कार्य जारी हैं और मृतकों तथा घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

तालिबान सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, कुनार और नंगरहार प्रांतों में भूकंप से भारी नुकसान हुआ है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन कानी ने बताया कि कुनार में 610 लोग मारे गए और 1,300 घायल हुए। नंगरहार में भी दर्जनों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए हैं।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप की तीव्रता 6.0 थी और इसका केंद्र जलालाबाद से 27 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में आठ किलोमीटर गहराई में था। विशेषज्ञों के अनुसार, कम गहराई वाले भूकंप अक्सर अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।

कुनार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि नूर गुल, सोकी, वातपुर, मनोगी और चापादारे जिलों में कम से कम 250 लोगों की मौत हुई और 500 अन्य घायल हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बताया कि कई गांव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और राहत कार्य जारी है।

जलालाबाद, जो पाकिस्तान की सीमा के पास स्थित एक व्यस्त व्यापारिक शहर है, इस आपदा से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। शहर की अधिकांश इमारतें कम ऊँचाई वाली हैं और बाहरी इलाके में मिट्टी और लकड़ी के घर हैं, जो भूकंप में आसानी से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

इससे पहले, 7 अक्टूबर 2023 को भी 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें तालिबान सरकार के अनुसार लगभग 4,000 लोगों की मौत हुई थी। संयुक्त राष्ट्र ने इस संख्या को लगभग 1,500 बताया था।


ट्रंप ने लगाया भारत पर रूसी तेल खरीद के बहाने 50% तक टैरिफ, यूरोपीय देशों पर भी दबाव

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर नाराजगी जताई है और भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है। ट्रंप का आरोप है कि भारत की यह खरीद यूक्रेन युद्ध को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका अब यूरोपीय देशों पर भी दबाव डाल रहा है कि वे भारत पर इसी तरह के प्रतिबंध और टैरिफ लागू करें। व्हाइट हाउस ने यूरोपीय देशों से आग्रह किया है कि भारत से खरीदे जाने वाले सभी तेल और गैस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं।

हालांकि अधिकांश यूरोपीय देश इस कदम पर चुप हैं और उन्होंने अमेरिका के टैरिफ का खुलकर समर्थन या विरोध नहीं किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का भारत पर ज्यादा असर नहीं होगा, लेकिन इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनयिक तनाव बढ़ सकता है।

ट्रंप भारत के अलावा यूरोप में भी रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष को लेकर भी नाराज हैं। पाकिस्तान ने ट्रंप के दावे को स्वीकार किया और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग भी की, जबकि भारत ने कहा कि संघर्ष रुकवाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत रूस से तेल खरीदना “राष्ट्रीय जरूरत” के तहत कर रहा है और यह निर्णय भारत की संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है।

विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के टैरिफ कदम से अमेरिका–भारत रणनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है, लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।


टोक्यो में बोले पीएम मोदी- जापान टेक्नोलॉजी का तो वहीं भारत टैलेंट का पावरहाउस है

भारत-जापान आर्थिक फोरम- पीएम मोदी ने साझा की 2030 और 2047 की ऊर्जा योजनाएं

टोक्यो। भारत-जापान आर्थिक फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी भाषा में संबोधन शुरू करकर दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी का संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि जापान टेक्नोलॉजी का पावरहाउस है, वहीं भारत टैलेंट का पावरहाउस है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी और विकास की अपार संभावनाओं पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी जापान यात्रा की शुरुआत बिजनेस जगत के दिग्गजों के साथ हो रही है और भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक अहम भागीदार रहा है। उन्होंने बताया कि मेट्रो, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्टअप्स तक हर क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग का भरोसा मजबूत रहा है। जापानी कंपनियों ने भारत में अब तक 40 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिनमें पिछले दो वर्षों में 30 बिलियन डॉलर का प्राइवेट निवेश शामिल है।

पीएम मोदी ने भारत में पिछले 11 वर्षों के दौरान हुए आर्थिक और राजनीतिक सुधारों का हवाला देते हुए कहा कि भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुका है और बहुत जल्द तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में है। उन्होंने बताया कि व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए कई सुधार किए गए हैं, जिनमें ‘सिंगल डिजिटल विंडो’ अप्रूवल और निजी क्षेत्र के लिए संवेदनशील क्षेत्रों का खुलापन शामिल है।

उन्होंने कहा कि ऑटो, बैट्री, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, शिप-बिल्डिंग और परमाणु ऊर्जा में भारत-जापान साझेदारी को और मजबूत किया जा सकता है। पीएम मोदी ने वैश्विक दक्षिण और अफ्रीका के विकास में सहयोग की भी अपील की।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत ने AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कम्प्यूटिंग, बायोटेक और अंतरिक्ष में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जापान की तकनीक और भारत के टैलेंट मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी और 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


नेपाल के बीरगंज में हैजा का कहर, तीन की मौत, सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती

बीरगंज अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की दी चेतावनी

बीरगंज। नेपाल के बीरगंज जिले में हैजा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले हफ्ते से जिले में दर्ज किए गए मामलों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। बीरगंज जिला सीमावर्ती और लंबे समय से सूखे की समस्या से जूझ रहा है, जिसे हैजा फैलने का मुख्य कारण माना जा रहा है।

मानसून में बढ़ती हैं बीमारियां
नारायणी अस्पताल के डॉक्टर उदय नारायण सिंह के अनुसार, बीते शुक्रवार से हैजा के मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। अधिकांश मरीज डायरिया की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं, जिनमें कई कोलेरा संक्रमण से प्रभावित पाए गए हैं। नारायणी अस्पताल में विशेष वार्ड केवल हैजा के मरीजों के लिए बनाए गए हैं। नेपाल में मानसून के दौरान पानी और भोजन से फैलने वाली बीमारियों में हैजा सबसे गंभीर है। हर साल हजारों लोग इससे प्रभावित होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी हैजा को एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट मानता है।

हैजा की गंभीरता
हैजा एक तीव्र संक्रमणकारी बीमारी है, जो उल्टी और दस्त के कारण शरीर में गंभीर जल की कमी पैदा कर सकती है। अगर तुरंत इलाज न मिले, तो मरीज की स्थिति घातक हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बीरगंज में फैली यह बीमारी 2009 में नेपाल के जाजरकोट जिले में हुई हैजा जैसी ही गंभीर स्थिति की याद दिलाती है, जब कई लोगों की मौत हुई थी।


गाजा में इजरायल के हमलों में 33 नागरिकों की मौत

गाजा में भूख और कुपोषण का संकट बढ़ा, पांच लाख लोग प्रभावित

गाजा। गाजा में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जहां इस्राइल के हालिया हमलों में बड़ी संख्या में नागरिकों की जानें चली गई हैं। शनिवार को हुए हमलों में कम से कम 33 फलस्तीनियों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और रोजमर्रा की जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे लोग शामिल थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक इस संघर्ष में कुल 62,622 फलस्तीनी जान गंवा चुके हैं।

विस्थापितों के तंबुओं पर हमला
नासिर अस्पताल और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, दक्षिणी गाजा के खान यूनिस में विस्थापितों के तंबुओं को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम 17 लोगों की मौत हुई। इनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे। उत्तरी गाजा के शेख रादवान फील्ड अस्पताल में भी इस्राइली गोलीबारी में कम से कम पांच सहायता चाहने वालों की मौत हुई, जो जिकिम क्रॉसिंग के पास थे।

पत्रकार भी हमलों में शिकार
फलस्तीनी पत्रकार सिंडिकेट ने पुष्टि की कि कैमरामैन खालिद अल-मधौन जिकिम क्रॉसिंग पर रिपोर्टिंग करते समय हमले में मारे गए। स्थानीय टीवी चैनलों ने भी उनकी मौत की पुष्टि की। अन्य हमलों में 11 नागरिकों की भी जान गई।

इस्राइली सेना का बयान
इस्राइली सेना ने खान यूनिस में हमले की जानकारी न होने का दावा किया और कहा कि वह अन्य घटनाओं की जांच कर रही है। सेना ने यह भी कहा कि जब लोग सैनिकों के पास आते हैं या खतरा पैदा करते हैं, तो उन्हें चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाने की आवश्यकता पड़ती है।

भूख और अकाल का संकट
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में पांच लाख लोग गहन भूख से जूझ रहे हैं। बच्चों में कुपोषण बढ़ रहा है, जिससे अब तक 281 मौतें हुई हैं। इस्राइल का कहना है कि उसने पर्याप्त मदद पहुंचाई है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और राहत संगठन इसे पर्याप्त नहीं मानते।

सैन्य अभियान की चेतावनी
इस्राइल के रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी है कि गाजा के हालात जल्द ही नए सैन्य अभियान के दौरान और भयावह हो सकते हैं। वहीं, सहायता समूह लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र में खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति की कमी गंभीर मानव संकट पैदा कर रही है।


भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव- पूर्व अमेरिकी अधिकारी जॉन केरी ने ट्रंप की नीति पर उठाए सवाल

केरी ने कहा- ओबामा प्रशासन के समय सहयोग और सम्मान से निर्णय होते थे, अब दबाव और टकराव बढ़ा है

वाशिंगटन। पूर्व अमेरिकी अधिकारी जॉन केरी ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने और बिगड़ते द्विपक्षीय संबंधों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना की है। केरी ने कहा कि कूटनीतिक प्रयासों के बिना अल्टीमेटम देना किसी भी देश की महानता का संकेत नहीं है और भारत-अमेरिका के रिश्तों में वर्तमान तनाव अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

केरी ने यह भी कहा कि ट्रंप और पीएम मोदी के बीच टकराव सही नहीं है। बड़े राष्ट्र अपनी शक्ति का प्रदर्शन केवल आदेश और दबाव देकर नहीं करते, बल्कि कूटनीतिक प्रयासों और बातचीत के माध्यम से समझौते तक पहुंचते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ओबामा प्रशासन के दौरान सहयोग और सम्मान के आधार पर निर्णय लिए जाते थे, जबकि अब दबाव और टकराव अधिक नजर आ रहा है।

केरी ने आशा जताई कि भारत और अमेरिका मिलकर व्यापार विवाद सुलझा लेंगे। उन्होंने भारत की पेशकशों की सराहना करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक बदलाव है।

इससे पहले, व्हाइट हाउस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जॉन बोल्टन ने भी ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ लगाया गया, जबकि चीन पर नहीं, जिससे भारत चीन-रूस गठबंधन की ओर जा सकता है।

अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ क्रिस्टोफर पैडिला और अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भी इस टैरिफ नीति की आलोचना की है। पैडिला ने कहा कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और जेफरी सैक्स ने इसे अमेरिकी विदेश नीति में सबसे गलत कदम करार दिया।


पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- युद्धविराम नहीं, स्थायी शांति समझौता जरूरी

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपनी कूटनीतिक पहल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि एक स्पष्ट और स्थायी शांति समझौता जरूरी है। ट्रंप ने यह टिप्पणी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात के बाद की।

डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि उनकी अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक सकारात्मक बैठक हुई। इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं से भी टेलीफोन पर बातचीत की।

ट्रंप ने कहा, “सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि युद्ध को समाप्त करने का सबसे कारगर और स्थायी तरीका एक स्पष्ट शांति समझौता है। केवल युद्धविराम पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि हालात फिर से खराब हो सकते हैं।”

ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की सोमवार को वॉशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस में उनसे मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर यह बैठक सकारात्मक रही, तो इसके बाद वह रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ अगली वार्ता का शेड्यूल भी तय करेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो महासचिव समेत अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ भी विचार-विमर्श करने की बात कही और दावा किया कि सभी इस युद्ध को खत्म करने के इच्छुक हैं।


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