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गाजा में इस्राइली हमलों से 38 लोगों की मौत

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

गाजा में इस्राइली हमलों से 38 लोगों की मौत

नुसेरात कैंप में एक ही परिवार के 9 सदस्य मारे गए, तुफाह इलाके में घर ढहने से 11 की जान गई

गाजा। गाजा में इस्राइली हवाई हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात हुए हमलों में कम से कम 38 लोगों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम की अपीलें तेज हो रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हमले रोकने के बजाय और कड़े रुख पर कायम हैं।

शनिवार तड़के मध्य और उत्तरी गाजा में कई घरों पर बमबारी हुई। नुसेरात शरणार्थी शिविर में एक ही परिवार के नौ सदस्य मारे गए, जबकि गाजा सिटी के तुफाह इलाके में एक घर पर हुए हमले में 11 लोगों की मौत हो गई। इनमें आधे से ज्यादा महिलाएं और बच्चे थे। एक अन्य शिविर पर हमले में चार और लोगों की जान गई।

अस्पताल और मानवीय संकट

लगातार बमबारी से गाजा के अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र लगभग ढह चुके हैं। कई अस्पताल दवाओं, उपकरणों और ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं। दो क्लिनिक पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और कई डॉक्टर-नर्स सुरक्षा कारणों से अस्पताल छोड़ने को मजबूर हुए हैं। ‘डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ ने भी शुक्रवार को गाजा सिटी में अपनी सेवाएं निलंबित कर दीं, क्योंकि इस्राइली टैंक उनके स्वास्थ्य केंद्रों के बेहद करीब पहुंच गए थे।

गाजा प्रशासन के मुताबिक, 12 सितंबर से राहत सामग्री की आपूर्ति बंद है और अब तक 65,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 1.67 लाख घायल हैं। मृतकों में लगभग आधी संख्या महिलाओं और बच्चों की है।

संयुक्त राष्ट्र में विवादित भाषण

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर चले गए। भाषण के बीच विरोध के नारे लगे, हालांकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल उनके साथ खड़ा दिखा। कुछ हिस्सों में तालियां भी गूंजीं। अपने संबोधन में नेतन्याहू ने ‘अभिशाप’ नामक क्षेत्रीय मानचित्र दिखाते हुए गाजा में जारी अभियान को जायज ठहराया।

अमेरिका की कोशिशें

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि गाजा युद्ध को खत्म करने और बंधकों की रिहाई को लेकर समझौता करीब है। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही इस्राइल और फलस्तीन के बीच शांति वार्ता की रूपरेखा तय की जा सकती है। इस बीच, अमेरिका ने 21 बिंदुओं वाला एक शांति प्रस्ताव कई देशों के साथ साझा किया है, जिसमें बंधकों की सुरक्षित रिहाई और मानवीय आपूर्ति बहाल करने पर जोर दिया गया है।


यमन की राजधानी सना में इस्राइल के हवाई हमले में 9 की मौत, कई घायल

हूथी ड्रोन हमले के जवाब में इस्राइल ने सना में किया हमला

सना। यमन की राजधानी सना में इस्राइल के हवाई हमले में कम से कम नौ लोग मारे गए और कई घायल हुए। हूथी विद्रोहियों ने शुक्रवार को इस जानकारी की पुष्टि की। यह हमला गाजा संघर्ष को लेकर बढ़ते तनाव के बीच आया है।

हमले का सिलसिला गुरुवार से शुरू हुआ, जब हूथियों ने दक्षिणी इस्राइल के ईलात शहर पर ड्रोन हमला किया, जिसमें 22 लोग घायल हुए थे। इसके जवाब में इस्राइल ने सना में हवाई हमले किए।

हूथी नियंत्रित क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मृतकों में चार बच्चे, दो महिलाएं और तीन बुजुर्ग शामिल हैं। इसके अलावा, 59 बच्चे, 35 महिलाएं और 80 बुजुर्ग घायल हुए हैं। राहतकर्मी अभी भी मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

इस्राइली सेना का बयान:
इस्राइली सेना ने कहा कि उन्होंने सना में हूथी सैन्य कमांड सेंटर, कैंप और सुरक्षा केंद्रों को निशाना बनाया।

हूथियों का दावा:
हूथी प्रवक्ता ने बताया कि इस्राइली हमलों ने आवासीय इलाकों और बिजली की सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया, हालांकि उनकी सुरक्षा प्रणालियों ने कई हमलों को रोकने में मदद की।

स्थानीय निवासी की प्रतिक्रिया:
सना के स्थानीय निवासी के अनुसार, एक हमले में हूथी नेता के भवन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आस-पास के कई घर और वाहन भी प्रभावित हुए। विस्फोट के बाद पूरे इलाके में धूल और काले धुएं का गुबार फैल गया।

यह संघर्ष फिलहाल गाजा युद्ध में फलस्तीनियों के समर्थन में जारी है, जिसमें हूथी मिसाइल और ड्रोन से इस्राइल पर हमले कर रहे हैं और इस्राइल लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है।


रूस-यूक्रेन युद्ध में फिर बढ़े हमले, मास्को की ओर बढ़ रहे 40 से अधिक ड्रोन नष्ट

कीव। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध ने एक बार फिर खतरनाक रूप ले लिया है। रूस ने मास्को की ओर बढ़ रहे 40 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है, जबकि यूक्रेन ने रूसी हमलों में दो नागरिकों की मौत की पुष्टि की है। इसी बीच, राष्ट्रपति जेलेंस्की न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।

लगातार तीन साल से अधिक समय से युद्ध का सामना कर रहे यूक्रेनी सैनिकों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जेलेंस्की इस हफ्ते न्यूयॉर्क में वैश्विक नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और युद्धविराम व हथियार सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।

अमेरिकी सहयोग:
जेलेंस्की ने अमेरिकी विशेष दूत कीथ केलॉग से मुलाकात की, जिसमें यूक्रेन की ड्रोन निर्माण और हथियार खरीद में सहयोग पर चर्चा हुई। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम यूक्रेन को तकनीकी बढ़त दिला सकता है।

यूरोप और नाटो की चिंता:
यूरोपीय देश जेलेंस्की की कूटनीति का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन इस्राइल-हमास संघर्ष भी संयुक्त राष्ट्र में मुख्य विषय बना हुआ है। एस्टोनिया ने रूसी विमानों के अपनी सीमा में प्रवेश की शिकायत की, जिस पर नाटो ने औपचारिक चर्चा बुलाई है।

युद्ध में बढ़ते हमले:
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार रूस ने रातभर में तीन इस्कंदर मिसाइलें और 115 ड्रोन दागे, जिनमें से अधिकांश को मार गिराया गया। मिसाइल हमलों में जापोरिज्जिया और ओडेसा क्षेत्रों में दो नागरिकों की मौत हुई।

नागरिकों पर संकट:
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने बताया कि 2025 के पहले आठ महीनों में यूक्रेनी नागरिक हताहतों की संख्या 40 प्रतिशत बढ़ गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि रूस ने कब्जे वाले इलाकों में हजारों नागरिकों को हिरासत में लिया और उनके साथ यातना व यौन हिंसा जैसी घटनाएँ हुईं।

रूस का दावा:
रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने 69 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। मास्को में उड़ानें कुछ समय के लिए बाधित हुईं और मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने राजधानी की ओर बढ़ रहे दर्जनों ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया।


H-1B वीजा शुल्क में भारी बढ़ोतरी से मचा हड़कंप, भारतीय पेशेवर सबसे ज्यादा प्रभावित

वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा शुल्क में भारी इजाफे की घोषणा ने आईटी और टेक सेक्टर में खलबली मचा दी है। नए प्रस्ताव के अनुसार, H-1B वीजा पर काम करने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए अब सालाना शुल्क $100,000 (करीब ₹83 लाख) तक हो सकता है। इसका सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

माइक्रोसॉफ्ट और जेपी मॉर्गन की चेतावनी

ट्रंप के एलान के बाद माइक्रोसॉफ्ट, जेपी मॉर्गन और कई अन्य मल्टीनेशनल कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक आंतरिक ईमेल एडवाइजरी जारी करते हुए H-1B और H-4 वीजा धारकों से निकट भविष्य में अमेरिका में ही रहने और जल्द लौटने की सिफारिश की है। कंपनी ने अमेरिका से बाहर मौजूद वीजा धारक कर्मचारियों को तत्काल वापस लौटने का आग्रह किया है। वहीं जेपी मॉर्गन के इमिग्रेशन काउंसल ने भी कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचने और अगली सूचना तक अमेरिका में ही बने रहने की सलाह दी है।

ट्रंप का तर्क, “केवल सर्वश्रेष्ठ को देंगे प्रवेश”

ओवल ऑफिस में वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक की मौजूदगी में ट्रंप ने घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा, “हमें कामगारों की ज़रूरत है, बेहतरीन कामगारों की। यह शुल्क यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिका में केवल असाधारण प्रतिभाएं ही प्रवेश पाएं, जो अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां न छीनें बल्कि उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करें।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि वीजा शुल्क से जुटाई गई धनराशि का इस्तेमाल सरकारी कर्ज चुकाने और करों में कटौती के लिए किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से अमेरिका के खजाने को 100 अरब डॉलर से अधिक का लाभ होगा।

व्हाइट हाउस की दलील, “H-1B प्रणाली का हो रहा दुरुपयोग”

व्हाइट हाउस के स्टाफ सचिव विल शार्फ के अनुसार, H-1B वीजा कार्यक्रम अमेरिकी इमिग्रेशन प्रणाली में सबसे अधिक दुरुपयोग होने वाले विकल्पों में से एक बन चुका है। उनका कहना है कि यह वीजा ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले विदेशी कामगारों को अनुमति देता है जहां अमेरिकी नागरिक कार्य नहीं करते, लेकिन इसका इस्तेमाल व्यापक रूप से कम वेतन वाले कामगारों को लाकर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह लेने के लिए किया जा रहा है।

क्या है H-1B वीजा?

H-1B वीजा एक गैर-अप्रवासी (Non-Immigrant) वीजा है जो अमेरिका (USA) उन विदेशी नागरिकों को देता है जो किसी विशेष पेशेवर क्षेत्र जैसे इंजीनियरिंग, आईटी, विज्ञान, फाइनेंस, मेडिकल आदि में विशेष कौशल या डिग्री रखते हैं और अमेरिकी कंपनियों के लिए अस्थायी रूप से काम करना चाहते हैं।

भारतीय पेशेवरों पर सबसे बड़ा असर

भारत, खासकर आईटी सेक्टर, से हर साल हजारों पेशेवर H-1B वीजा के तहत अमेरिका जाते हैं। ऐसे में इस फैसले का सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों और कर्मचारियों पर पड़ने की आशंका है। नई नीति के तहत भारतीय पेशेवरों को अमेरिका में स्थायी रोजगार प्राप्त करना न सिर्फ महंगा, बल्कि जटिल भी हो सकता है।


Nepal SC in White Tent: नेपाल में अंतरिम सरकार के बीच सुप्रीम कोर्ट ने टेंट में शुरू किया कामकाज

काठमांडू। नेपाल में हाल ही में बने अंतरिम सरकार के बीच न्यायपालिका ने धीरे-धीरे कामकाज फिर से शुरू कर दिया है। बीते सप्ताह हिंसक प्रदर्शनों में सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिसमें नेपाल की सुप्रीम कोर्ट की इमारत भी बुरी तरह से जलकर खाक हो गई। हालात को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाते हुए रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यवाही अस्थायी टेंट में शुरू की।

सुप्रीम कोर्ट परिसर में लगाया सफ़ेद टेंट

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट परिसर में सफेद टेंट लगाए गए जिन पर ‘सुप्रीम कोर्ट नेपाल’ लिखा था। इन टेंटों में अदालत के कर्मचारी मौजूद रहे और मुकदमों की नई तारीखें दी गईं। हालांकि, परिसर के चारों ओर अभी भी जले हुए वाहनों का ढेर नजर आया, जो हिंसक घटनाओं की भयावह तस्वीर बयां करता है।

सबसे बड़ी चिंता क्या?

सबसे बड़ी चिंता यह है कि आगजनी में कम से कम 26,000 मामलों के रिकॉर्ड और लगभग 36,000 फाइलें नष्ट हो गईं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पूर्ण मान शाक्य ने पुष्टि की कि दस्तावेजों की इस बड़ी क्षति से न्यायिक प्रक्रिया पर गहरा असर पड़ेगा। वहीं, नेपाल की नवनियुक्त प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने भी इस नुकसान को गंभीर बताया और कहा कि न्यायपालिका को अब सभी रिकॉर्ड और फाइलों को नए सिरे से तैयार करना होगा।

पहले दिन ली मामलों की जानकारी 

नेपाली मीडिया ‘खबरहब’ के अनुसार, कोर्ट ने पहले दिन केवल मामलों की जानकारी दर्ज की और कुछ नए रिट याचिकाएं स्वीकार कीं। हालांकि, पुराने मामलों की सुनवाई अभी स्थगित रखी गई है क्योंकि संबंधित दस्तावेज फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। कोर्ट ने फिलहाल तारीखें देकर मामलों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

व्यवस्थाओं को पटरी में लाने की कोशिश  

सेना ने हालात संभालने के लिए कर्फ्यू में कुछ ढील दी है, लेकिन देश में अभी भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। सुप्रीम कोर्ट की टेंट में शुरू हुई कार्यवाही इस बात का संकेत है कि नेपाल अपनी लोकतांत्रिक और न्यायिक व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश में है।


ब्राजील के राष्ट्रपति ने अमेरिका पर साधा निशाना, कहा- “ब्राजील का लोकतंत्र बिकाऊ नहीं”

राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला ने ट्रंप प्रशासन के 50% टैरिफ को बताया राजनीतिक और अतार्किक

ब्रासीलिया। ब्राजील के राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिका पर एक बार फिर सीधा हमला बोला है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन द्वारा ब्राजील पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को “राजनीतिक और अव्यावहारिक” करार दिया। लूला ने न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित अपने लेख में साफ शब्दों में लिखा कि उनकी सरकार बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन “ब्राजील का लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है।”

अमेरिकी टैरिफ से विवाद भड़का
जुलाई में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील पर भारी-भरकम टैरिफ लगाते हुए आरोप लगाया था कि लूला सरकार पूर्व राष्ट्रपति जेर बोल्सोनारो के खिलाफ बदले की राजनीति कर रही है। हालांकि, ठीक इसी हफ्ते ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने बोल्सोनारो को 2022 में तख्तापलट की साजिश के लिए दोषी ठहराते हुए 27 साल की सजा सुनाई है।

लूला ने दिया दो टूक जवाब
लूला ने कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह ब्राजील की लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फैसले से पहले महीनों लंबी जांच हुई थी, जिसमें यहां तक सामने आया कि उनकी, उपराष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की हत्या की साजिश रची गई थी। अमेरिकी टैरिफ पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “यह न केवल गुमराह करने वाला है, बल्कि पूरी तरह से अतार्किक कदम है।”

अमेरिका की चेतावनी पर ब्राजील का पलटवार
बोल्सोनारो की सजा के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री ने सख्त बयान दिया था कि ट्रंप प्रशासन हालात को देखते हुए कदम उठाएगा। इस पर ब्राजील ने नाराजगी जताई और विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी टिप्पणी को “अनुचित धमकी” बताया। मंत्रालय ने साफ किया कि ब्राजील की न्यायपालिका पूरी तरह स्वतंत्र है और बोल्सोनारो मामले में सभी कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ है।


नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की, भ्रष्टाचार विरोधी छवि से बनाई पहचान

काठमांडू। नेपाल में पहली बार किसी महिला ने अंतरिम प्रधानमंत्री पद संभाला है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को शुक्रवार रात राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शपथ दिलाई। जन-जेनरेशन (Gen-Z) प्रदर्शनकारियों के समर्थन से सत्ता में आईं सुशीला कार्की को देश में एक ईमानदार और सख्त छवि वाली नेता माना जाता है। इसके साथ ही वे नेपाल के 220 सालों के इतिहास में इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला बन गईं हैं।

नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रही कार्की

कार्की पहले भी इतिहास रच चुकी हैं। 2016 में वे नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस बनी थीं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई अहम फैसले दिए, जिनमें सरोगेसी को बिजनेस बनने से रोकना शामिल है। उनके नेतृत्व वाली बेंच ने कहा था कि किराए की कोख गरीब महिलाओं का शोषण कर रही है, जिसके बाद नेपाल में सरोगेसी टूरिज्म पर रोक लगी।

2017 में कार्की के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव 

2017 में उस समय की प्रचंड सरकार ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया था। आरोप लगाया गया कि वे राजनीतिक दबाव को नज़रअंदाज़ कर फैसले देती हैं। लेकिन कार्की के समर्थन में हजारों लोग काठमांडू की सड़कों पर उतर आए और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके पक्ष में आदेश दिया। नतीजा यह हुआ कि संसद को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।

कार्की का निजी जीवन भी रहा सुर्खिया में 

कार्की का निजी जीवन भी सुर्खियों में रहा। उनके पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी कभी क्रांतिकारी आंदोलनों में सक्रिय रहे और 1973 में उन्होंने साथियों के साथ एक विमान हाइजैक किया था। यह घटना नेपाल के इतिहास की पहली हाइजैकिंग थी। हालांकि, कार्की ने पति के विवादित अतीत से दूरी रखते हुए अपनी पहचान मेहनत और ईमानदारी से बनाई।

कार्की का भारत से जुड़ाव गहरा 

सुशीला कार्की का भारत से भी गहरा जुड़ाव है। उन्होंने वाराणसी के बीएचयू से पढ़ाई की और अक्सर कहा कि गंगा किनारे बिताए दिन उनकी जिंदगी की सबसे यादगार यादें हैं। बिराटनगर की रहने वाली कार्की भारत-नेपाल सीमा से बेहद नज़दीक पली-बढ़ी और हिंदी भी समझती हैं।

भारत-नेपाल रिश्ते पर रुख सकारात्मक

भारत-नेपाल रिश्तों पर वे हमेशा सकारात्मक रुख रखती हैं। उनका कहना है कि दोनों देशों की जनता भावनात्मक रूप से जुड़ी है और छोटे-मोटे मतभेद रिश्तों की मजबूती को प्रभावित नहीं कर सकते।

देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर अब कार्की पर राजनीतिक स्थिरता और भ्रष्टाचार विरोधी उम्मीदों का बोझ है। आम लोगों को विश्वास है कि वे अपने सख्त और निष्पक्ष फैसलों  से नेपाल की राजनीति को नई दिशा देंगी।


नेपाल में जेलों से हज़ारों कैदी फरार, हालात बेकाबू

सोशल मीडिया प्रतिबंध और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बीच भड़की हिंसा

काठमांडू। नेपाल इस समय अभूतपूर्व राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं का गुस्सा अब हिंसक प्रदर्शनों में बदल चुका है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि देशभर की जेलों पर भी इसका असर साफ दिखने लगा है। कैदियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं, जिसमें कुछ कैदी मारे जा चुके हैं और हजारों फरार हो गए हैं। हालात काबू से बाहर होते देख सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है, जबकि नेपाल-भारत सीमा पर भी चौकसी तेज कर दी गई है।

गुरुवार को रामेछाप जिले की जेल में कैदियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हिंसक भिड़ंत हो गई। कैदियों ने गैस सिलेंडर से धमाका कर जेल से भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों की फायरिंग में तीन कैदियों की मौत हो गई और 13 घायल हो गए।

इससे पहले मंगलवार से अब तक देशभर की 25 से अधिक जेलों में हिंसा भड़क चुकी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार करीब 15,000 कैदी विभिन्न जेलों से फरार हो गए हैं। इनमें काठमांडू की सुंदरहर जेल से 3,300, नक्कू जेल से 1,400 और डिल्लीबजार जेल से 1,100 कैदी शामिल हैं।

अन्य जिलों में भी हालात गंभीर हैं। सुनसरी के झुम्का जेल से 1,575, चितवन से 700, कपिलवस्तु से 459, कैलाली से 612, कंचनपुर से 478 और सिन्धुली से 500 कैदी भाग निकले। रौतहट के गौर जेल में 291 कैदियों में से 260 भाग गए थे, जिनमें से अब तक केवल 31 को ही पकड़ा जा सका है।

स्थिति और भयावह तब हो गई जब पश्चिम नेपाल के बांके जिले के नौबस्ता नाबालिग सुधार गृह में भी हिंसा भड़क उठी। यहां सुरक्षाबलों की गोलीबारी में पांच नाबालिग कैदी मारे गए, जब वे गार्ड से हथियार छीनने की कोशिश कर रहे थे।

नेपाल में लगातार बढ़ते इन घटनाक्रमों के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे जेन जेड युवाओं का आंदोलन अब पूरे देश को हिला रहा है।

भारत-नेपाल सीमा पर भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। सुरक्षाबलों की निगरानी कड़ी कर दी गई है, क्योंकि आशंका है कि फरार कैदी सीमा पार करने की कोशिश कर सकते हैं।


जानिए कौन हैं सुशीला कार्की, जिन्हें युवा बनाना चाहते हैं नेपाल का अगला पीएम!

Nepal Conflict & Sushila Karki: नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकार का तख्तापलट हो चुका है और अब वहां नई अंतरिम सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इस बीच सबसे अहम नाम सामने आया है देश की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का। माना जा रहा है कि सेना और राजनीतिक दलों की सहमति से उन्हें अंतरिम सरकार की मुखिया बनाया जा सकता है। गुरुवार को आर्मी चीफ की अगुवाई में होने वाली बैठक को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि आज इस पर बड़ा फैसला हो सकता है।  नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच Gen Z की पसंदीदा नेता के रूप में उभारा गया है।

कौन है सुशीला कार्की? 

सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को नेपाल के बिराटनगर, जिला मोरांग में हुआ। वे नेपाल की पहली महिला सुप्रीम कोर्ट जज रही हैं और न्यायपालिका में अपने साहसिक व निष्पक्ष फैसलों के लिए जानी जाती हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर करने के बाद उन्होंने वकालत और न्यायिक सेवा में कदम रखा। 2016 में उन्हें नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) नियुक्त किया गया। कार्की ने अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक निर्णय दिए और भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्ती दिखाई।

सुशीला कार्की का भारत से रिश्ता 

सुशीला कार्की का भारत से गहरा जुड़ाव रहा है। वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर कर चुकी हैं। वहीं उनकी मुलाकात अपने पति और नेपाल के लोकप्रिय नेता रहे दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुई थी। शिक्षा और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की इस कड़ी से उनके भारत के साथ मधुर संबंधों की झलक मिलती है।

भारत के लिए भी संवेदनशील राजनीतिक अस्थिरता 

विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता भारत के लिए भी संवेदनशील विषय है। पूर्व राजदूत रंजीत रे का कहना है कि भारत एक स्थिर नेपाल चाहता है और जनता की आकांक्षाओं से जो भी नेतृत्व उभर कर आएगा, भारत उसके साथ काम करेगा। कार्की का नेतृत्व इस लिहाज से आशाजनक है क्योंकि पिछली ओली सरकार ने चीन की तरफ ज्यादा झुकाव दिखाया था जिससे भारत-नेपाल रिश्तों में दूरी आई थी।

अंतरिम सरकार और नेपाल- भारत के रिश्ते

भारत और नेपाल के बीच 1751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जो दोनों देशों के बीच सुरक्षा, सांस्कृतिक और जनसंपर्क संबंधों को और भी महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में अगर सुशीला कार्की अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभालती हैं तो यह नेपाल और भारत दोनों के लिए राहत की खबर हो सकती है। नेपाल की जनता ने एक बड़ा बदलाव कर नई उम्मीद जगाई है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सुशीला कार्की के नेतृत्व में नेपाल लोकतांत्रिक स्थिरता और भारत संग मजबूत संबंधों की दिशा में कदम बढ़ा पाएगा।

नेपाल के मौजूदा हालातों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सरकार बनने पर भारत से उसके रिश्ते कैसे होंगे। इस पर सुशीला कार्की ने अपने पहले इंटरव्यू में ही संकेत दे दिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा की और कहा कि वह भारत के नेताओं को सकारात्मक दृष्टि से देखती हैं।


नेपाल में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने लिया हिंसक रूप, कई इलाकों में कर्फ्यू लागू

देशभर में 27 लोग गिरफ्तार, सेना ने शांति बनाए रखने की अपील की

काठमांडू। नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने राजनीतिक हालात पूरी तरह बदल दिए हैं। राजधानी काठमांडू समेत देशभर में जेनरेशन जेड की अगुवाई में हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने अब हिंसक रूप ले लिया है। आगजनी, लूटपाट और झड़पों के बीच सुरक्षा बलों ने सख्ती बढ़ाते हुए 27 लोगों को गिरफ्तार किया और कई इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तारियां मंगलवार रात से बुधवार सुबह के बीच हुईं।

सुरक्षा बलों ने काठमांडू के गौशाला-चाबाहिल-बौद्ध क्षेत्र से चोरी की गई 33.7 लाख नेपाली रुपये नकद और बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए हैं। इनमें 31 गन, मैगजीन और गोला-बारूद शामिल हैं। झड़पों में 23 पुलिसकर्मी और 3 आम नागरिक घायल हुए, जिनका इलाज सैन्य अस्पतालों में चल रहा है।

कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू
बढ़ती हिंसा को देखते हुए सेना ने देशभर में कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू कर दी है। कर्फ्यू गुरुवार सुबह 6 बजे से प्रभावी रहेगा, जबकि निषेधाज्ञा बुधवार शाम 5 बजे तक जारी रहेगी। सेना का कहना है कि हिंसा और लूटपाट में अराजक तत्व शामिल हैं, जिन्हें रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

भारी तबाही और राजनीतिक संकट
इस हिंसा में सबसे ज्यादा नुकसान काठमांडू में हुआ है। हिल्टन होटल जलकर खाक हो गया, राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में तोड़फोड़ और आगजनी हुई। पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल के घर में आग लगने से उनकी पत्नी की मौत हो गई। कांतिपुर मीडिया ग्रुप के दफ्तर में भी आगजनी हुई।

स्थिति बिगड़ने के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। बता दें कि यह विरोध प्रदर्शन 8 सितंबर से शुरू हुए थे, जब सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग भ्रष्टाचार पर रोक, सरकार में पारदर्शिता और जनता के सवालों के जवाब हैं।


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