हिंद प्रशांत में देशों का सहयोग ज्यादा संसाधन जुटाने में अहम साबित हो सकता है- विदेश मंत्री एस. जयशंकर
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लंदन। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन और पश्चिमी देशों पर हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमले की धमकी दी है, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यदि हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति पद संभालने से पहले ही तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो सकता है।
पुतिन की धमकी और नाटो की चुप्पी
पुतिन लगातार यूक्रेन पर मिसाइल हमले कर रहे हैं और अब परमाणु हमलों की धमकी भी दे रहे हैं। वहीं, नाटो और ब्रिटेन ने इस गंभीर स्थिति पर अब तक कोई बैठक नहीं बुलाई है। पुतिन की इस आक्रामक नीति ने पैन-यूरोपीय संघर्ष का खतरा बढ़ा दिया है।
खतरे के बढ़ते संकेत
शीत युद्ध के बाद पहली बार ऐसा संकट देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन, ब्रिटेन और अमेरिका की मिसाइलों को रूस के अंदर तैनात करके क्रेमलिन को उकसाया जा रहा है। अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव और उनके शपथ ग्रहण के बीच 76 दिनों का यह अंतराल दुनिया के लिए भारी पड़ सकता है।
बाइडेन की नीतियों पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीतियों को इस संकट का प्रमुख कारण माना जा रहा है। उन्होंने यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें देने में देरी की, जिससे रूस का जवाबी हमला और आक्रामक हो गया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के रूस के अंदर हमलों ने क्रेमलिन को परमाणु प्रतिशोध की धमकी देने पर मजबूर कर दिया है।
दुनिया के अन्य नेताओं की भूमिका
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आक्रामक बयानबाजी से तनाव को और बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका को कमजोर करने की कोशिश में जुटे हैं। यूरोपीय सेनाएं रूस की तुलना में कमजोर मानी जा रही हैं, जिससे यह संकट और जटिल हो गया है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
1962 के क्यूबा मिसाइल संकट और दो विश्व युद्धों के अनुभवों से यह साफ है कि दुनिया एक बड़े संघर्ष के बेहद करीब है। यदि वैश्विक नेताओं ने जल्द और प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो यह संकट तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले सकता है।
ईरान। हिजाब के विरोध में अक्सर महिलाओं के विरोध प्रदर्शन देखने को मिलते हैं, लेकिन हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया। ईरान की एक यूनिवर्सिटी कैंपस में एक युवती को सिर्फ अंडरगारमेंट्स में घूमते हुए देखा गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। पब्लिक प्लेस में न्यूडिटी को प्रमोट करने के आरोप में उस युवती को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन अब इस मामले में अदालत का फैसला आ गया है।
अदालत ने दी मानसिक स्वास्थ्य को अहमियत
तेहरान की अदालत ने फैसला सुनाया कि इस छात्रा के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। अदालत ने कहा कि छात्रा अहौ दारयाई मानसिक रूप से बीमार थीं, और चिकित्सकों ने इसकी पुष्टि की है। न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने बताया कि छात्रा को अस्पताल भेजा गया था, जहां डॉक्टरों ने उसकी मानसिक स्थिति स्पष्ट की। इस आधार पर अदालत ने कहा कि छात्रा पर मुकदमा चलाने का कोई औचित्य नहीं है और उसे उसके परिवार को सौंप दिया गया है।
विरोध प्रदर्शन और वायरल वीडियो
इस महीने की शुरुआत में, अहौ दारयाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में वह तेहरान की इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी के कैंपस में केवल अंडरगारमेंट्स में घूमती नजर आईं। बताया गया कि यह घटना इस्लामिक ड्रेस कोड के विरोध में हुई थी। यूनिवर्सिटी की सिक्योरिटी द्वारा रोके जाने के बाद, उन्होंने अपने कपड़े उतारकर विरोध प्रदर्शन किया।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने किया समर्थन
इस घटना के बाद, मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ईरान सरकार से छात्रा को तुरंत रिहा करने की अपील की थी। संगठन ने कहा था कि अहौ दारयाई को सभी प्रकार की यातनाओं और दुर्व्यवहार से बचाया जाए और उसे परिवार और वकील से संपर्क की सुविधा दी जाए।
पारिवारिक और मानसिक दबाव का असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रा पारिवारिक समस्याओं के चलते मानसिक तनाव में थीं। उनके करीबी लोगों और सहपाठियों ने पहले भी उनके असामान्य व्यवहार के बारे में बताया था। अदालत ने इसे ध्यान में रखते हुए नरमी बरती और मामले को खत्म कर दिया। अहौ दारयाई की यह घटना ईरान में महिलाओं के अधिकारों और इस्लामिक ड्रेस कोड को लेकर चल रही बहस का हिस्सा बन गई है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में उनकी मानसिक स्थिति को प्राथमिकता देते हुए इंसानियत का उदाहरण पेश किया है।
तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता और 85 वर्षीय अली खामेनेई कथित तौर पर गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और जल्द ही अपने पद से हटने की तैयारी कर रहे हैं। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने बेटे मोजतबा खामेनेई को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है।
विशेष बैठक में हुई नियुक्ति
26 सितंबर को अली खामेनेई के अनुरोध पर ईरान के विशेषज्ञों की सभा के 60 सदस्यों की एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में खामेनेई ने उत्तराधिकार के संबंध में तत्काल निर्णय लेने का निर्देश दिया। विशेषज्ञों की सभा ने सर्वसम्मति से उनके बेटे मोजतबा को नया सर्वोच्च नेता चुन लिया।
दबाव में हुआ फैसला?
हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों की सभा के सदस्यों ने विरोध जताया। लेकिन खामेनेई और उनके समर्थकों ने उन पर कथित रूप से दबाव बनाया। कुछ रिपोर्ट्स में यहां तक कहा गया कि सदस्यों को निर्णय लेने के लिए धमकियों का सामना करना पड़ा।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई, अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। उनका जन्म 1969 में मशहद में हुआ। उन्होंने धर्मशास्त्र की पढ़ाई अपने पिता और अन्य प्रभावशाली शिक्षकों के संरक्षण में की और अब कोम सेमिनरी में पढ़ाते हैं। मोजतबा की पत्नी ज़हरा हद्दाद-अदेल हैं और उनके तीन बच्चे हैं।
राजनीतिक सफर
2005 और 2009 के ईरानी चुनावों में मोजतबा महमूद अहमदीनेजाद के समर्थक थे। 2009 में, अहमदीनेजाद की विवादास्पद जीत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने में मोजतबा की भूमिका बताई गई थी। हालांकि, बाद में उनके और अहमदीनेजाद के बीच रिश्ते खराब हो गए।
गबन का आरोप और चुनौतियां
मोजतबा पर सरकारी खजाने से धन के गबन का आरोप भी लगा था। हालांकि, अब उनके सर्वोच्च नेता बनने की प्रक्रिया में विशेषज्ञों की सभा से कुछ असहमति का सामना हो सकता है। सभा भले ही औपचारिक निकाय हो, लेकिन मोजतबा के खिलाफ असंतोष ने इस नियुक्ति को विवादास्पद बना दिया है।
भविष्य के संकेत
मोजतबा खामेनेई का नाम लंबे समय से उनके पिता के उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में था। अब जब उन्हें उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया है, यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान की राजनीति और समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
(रिपोर्ट: एजेंसी)
नई दिल्ली। कैरेबियाई देश डोमिनिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर’ देने की घोषणा की है। यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को कोविड-19 महामारी के दौरान डोमिनिका के लिए उनके योगदान और दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने के प्रति उनके समर्पण के लिए प्रदान किया जा रहा है।
डोमिनिका के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि राष्ट्रपति सिल्वेनी बर्टन यह पुरस्कार 19 से 21 नवंबर तक गुयाना के जॉर्जटाउन में होने वाले भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन के दौरान प्रदान करेंगे।
कोविड-19 टीके की 70,000 खुराकें भेजने पर जताई थी कृतज्ञता
फरवरी 2021 में भारत ने डोमिनिका को एस्ट्राजेनेका की 70,000 कोविड-19 टीके की खुराकें भेजी थीं, जिसे डोमिनिका ने “दिल को छू लेने वाला उपहार” बताया था। इस सहायता से डोमिनिका ने अपने साथ-साथ पड़ोसी कैरेबियाई देशों की भी मदद की।
डोमिनिका के प्रधानमंत्री का बयान
डोमिनिका के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी हमारे सच्चे साथी रहे हैं। वैश्विक स्वास्थ्य संकट के समय में उनकी एकजुटता का प्रतीक यह सम्मान है। हमारे दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का प्रतीक मानते हुए हम उन्हें यह सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार देने पर गर्व महसूस करते हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान की पेशकश को स्वीकारते हुए जलवायु परिवर्तन और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग का संकल्प दोहराया और डोमिनिका एवं कैरेबियाई देशों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
पाकिस्तान। क्वेटा शहर से एक बार फिर धमाके की भयावह घटना सामने आई है। यहां के रेलवे स्टेशन पर हुए बम विस्फोट के चलते 21 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस धमाके के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई, और स्थानीय पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां घटना स्थल पर पहुंचकर जांच में जुट गई हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि आसपास के कई लोग बुरी तरह से घायल हो गए। घायलों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को आतंकवाद से जुड़ा माना है और कहा है कि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की और उन्हें राष्ट्रपति चुनाव में जीत पर बधाई दी। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने विश्व शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। बातचीत के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि पूरी दुनिया उन्हें पसंद करती है और भारत एक “शानदार देश” है। उन्होंने पीएम मोदी को एक “सच्चा दोस्त” मानने की बात भी कही।
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जीत के बाद जिन विश्व नेताओं से उन्होंने सबसे पहले बात की, उनमें पीएम मोदी शामिल हैं। इससे पहले, पीएम मोदी ने ट्रंप को ट्वीट के माध्यम से बधाई दी थी और भारत-अमेरिका साझेदारी को और मजबूत करने की बात कही थी।
270 वोटों से ट्रंप की जीत
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की दौड़ में जीत हासिल करने के लिए 270 चुनावी वोट प्राप्त किए, विस्कॉन्सिन में जीत के साथ उन्होंने राष्ट्रपति पद पर अपना दावा मजबूत किया। वहीं मिशिगन, एरिजोना, और अलास्का में वोटों की गिनती अभी जारी है। रिपब्लिकन पार्टी ने अमेरिकी सीनेट पर भी नियंत्रण कर लिया है और अमेरिकी सदन में अपना बहुमत बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी और ट्रंप की कुछ पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने की बात कही।
पीएम मोदी ने ट्रंप को जीत की दी बधाई
चुनाव जीत कमला हैरिस को दी मात
जानिए किसको मिले कितने वोट
जीत के बाद ट्रंप ने समर्थकों का किया धन्यवाद
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव जीतने की बधाई दी है। पीएम ने कहा कि मेरे मित्र डोनाल्ड ट्रंप को चुनाव जीतने पर मैं ह्दय से बधाई देता हूं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप का जादू चल गया है। उन्होंने इस चुनाव में जीत हासिल की है और कमला हैरिस को हरा दिया है। ऐसे में ये साफ है कि अब अमेरिका की कमान डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में होगी।
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के अब तक जो परिणाम सामने आए हैं, उसके मुताबिक, कमला हैरिस को 224 इलेक्टोरल वोट हासिल हुए हैं। दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप 267 इलेक्टोरल वोट जीत चुके हैं औक कई अन्य राज्यों में कमला से आगे चल रहे हैं। इसलिए ये अब कंफर्म हो गया है कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही होंगे। डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस ने चुनाव के बाद दी जाने वाली अपनी स्पीच को कैंसल कर दिया है। स्पीच कैंसल होने के बाद उनके समर्थक हावर्ड विश्वविद्यालय परिसर से चले गए। बड़ी संख्या में समर्थकों के वापस जाने का वीडियो भी सामने आया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावों में जीत के बाद अपने भाषण में कहा कि देखो आज मैं कहां हूं। उन्होंने अपने समर्थकों का धन्यवाद दिया और कहा कि मैंने ऐसा जश्न पहले नहीं देखा। उन्होंने कहा कि वह देश को सुरक्षित करने के लिए सबकुछ करेंगे। इस दौरान उनके समर्थक USA-USA के नारे लगाते रहे। उन्होंने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का नारा दोहराते हुए कहा कि मैं अमेरिका के लिए हर पल काम करूंगा। उन्होंने कहा कि ये मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण पल है और मेरा सबकुछ अमेरिका के लिए समर्पित है। ट्रंप ने कहा कि मैं हर नागरिक, आपके लिए, आपके परिवार के लिए और आपके भविष्य के लिए लड़ूंगा। हर दिन, मैं अपने शरीर की हर सांस के साथ आपके लिए लड़ता रहूंगा।
भारतीय उच्चायोग ने खालिस्तानियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की
सिख समुदाय ने भी हिंदुओं पर हमले की निंदा की
ओटावा। कनाडा में हिंदू समुदाय के लोगों को मंदिर के बाहर खालिस्तानियों द्वारा निशाना बनाए जाने से भारत और कनाडा के रिश्तों में जारी तनाव और बढ़ सकता है। कनाडा स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस मुद्दे को लेकर बयान जारी किया है और कनाडा की सरकार के सामने नाराजगी जाहिर की है। इस बयान में भारतीय उच्चायोग ने कनाडा की सरकार से चरमपंथी खालिस्तानियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कनाडा में एक बार फिर हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया. खालिस्तानियों ने ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडों से हमला किया। कनाडा के हिंदुओं पर खालिस्तानियों के इस हमले की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है. कनाडा में भारतीय मूल के सांसद चंद्र आर्य ने इस हमले को लेकर कहा है कि अब खालिस्तानियों ने हद (Red Line) पार कर दी है।
कनाडा में हिंदुओं पर खालिस्तानियों के हमले की सिख समुदाय ने भी निंदा की है। ओंटारियों सिख एंड गुरुद्वारा काउंसिल ने बयान जारी कर कहा है कि ‘मंदिर के बाहर हुई घटना दुखद है। हम कनाडा में सभी धर्म, समुदाय के लोगों की भलाई के लिए समर्पित हैं और चाहते हैं कि ऐसा माहौल रहे, जिसमें सभी लोग सुरक्षित महसूस करें और अपनी आस्था का बिना किसी डर से पालन कर सकें। जांच एजेंसियों को इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच करनी चाहिए क्योंकि हमारे समाज में हिंसा की कोई जगह नहीं है। हम ये भी उम्मीद करते हैं कि समुदायों के नेता साथ आकर एकता और दयालुता का माहौल बनाएं।’