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साल 2047 में भारत को विकसित बनाने में भारतीय कामगारों की रहेगी अहम भूमिका- प्रधानमंत्री मोदी 

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साल 2047 में भारत को विकसित बनाने में भारतीय कामगारों की रहेगी अहम भूमिका- प्रधानमंत्री मोदी 

गरीबों के घर में शौचालय भी मेरे लिए विकास – प्रधानमंत्री मोदी

कुवैत/दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कुवैत में गल्फ स्पिक लेबर कैंप का दौरा किया, जहां उन्होंने कुवैत में काम कर रहे भारतीय कामगारों से मुलाकात की। इस मुलाकात में प्रधानमंत्री ने देश के विकास में भारतीय कामगारों के योगदान का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि साल 2047 में भारत को विकसित बनाने में भारतीय कामगारों की अहम भूमिका रहेगी। प्रधानमंत्री ने भारतीय कामगारों के साथ बातचीत में कहा कि ‘जब मैं साल 2047 में विकसित भारत की बात करता हूं तो मैं ये इसलिए करता हूं क्योंकि अपने घर से इतनी दूर काम कर रहे भारत के मेरे मजदूर भाई भी ये सोचते हैं कि कैसे उनके गांव में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन सकता है। ये महत्वकांक्षा ही मेरे देश की ताकत है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मैं लगातार इस बारे में सोचता रहता हूं कि मेरे देश के किसान, मजदूर कितनी कड़ी मेहनत करते हैं।

जब मैं लोगों को कड़ी मेहनत करते देखता हूं तो मुझे लगता है कि अगर वे 10 घंटे काम कर सकते हैं तो मुझे भी 11 घंटे काम करना चाहिए। अगर वे 11 घंटे काम करते हैं तो मुझे भी 12 घंटे काम करना चाहिए। आप अपने परिवार के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, मैं भी परिवार के लिए मेहनत करता हूं। 140 करोड़ देशवासी मेरा परिवार हैं, इसलिए मुझे थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी होगी।’ पीएम मोदी ने कहा कि ‘मेरे लिए विकास का मतलब सिर्फ सड़कें, हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन ही नहीं हैं बल्कि गरीबों के घर में शौचालय भी मेरे लिए विकास है। हमने देश में 11 करोड़ शौचालय बनाने का फैसला किया। गरीबों का पक्का मकान होना चाहिए।

अब तक चार करोड़ पक्के मकान बन चुके हैं, जिनमें 15-16 करोड़ लोग रह रहे हैं, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। मैं लोगों को नल से जल देने की कोशिश कर रहा हूं। मेरे लिए गरीबों की गरिमा और सम्मान ही सबसे अहम है। उन्हें ये सभी चीजें मिलनी चाहिए।’ प्रधानमंत्री ने भारतीय कामगारों से बात करते हुए कहा कि ‘भारत में सबसे सस्ता इंटरनेट मिल रहा है। अब देश से दुनिया में कहीं भी ऑनलाइन बात की जा सकती है और इसकी लागत भी काफी कम है। वीडियो कॉल करने की लागत भी बेहद कम है। इससे लोगों को काफी आसानी हुई है और अब वे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपने परिजनों से बात कर सकते हैं।’


रूस ने यूक्रेन पर कर दी क्रूज मिसाइलों की बरसात, ड्रोन्स से भी किया अटैक

मॉस्को (आरएनएस)। रूस ने यूक्रेन पर भीषण हमले किए हैं। रूस ने इन हमलों में दर्जनों क्रूज मिसाइलों और ड्रोन्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। रूसी सेना ने यूक्रेन के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। यूक्रेन के ऊर्जा मंत्री हर्मन हेलूशेंको ने फेसबुक पेज पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, दुश्मन का आतंक जारी है। यूक्रेन की वायु सेना ने बताया कि बीती रात यूक्रेन पर कई ड्रोन हमले किए गए और उसके बाद देश के हवाई क्षेत्र में क्रूज मिसाइल भी दागी गईं। वायुसेना ने कहा कि रूस ने यूक्रेन के पश्चिमी क्षेत्रों के खिलाफ ‘किंजल’ बैलिस्टिक मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया। इन हमलों के बाद आशंका बढ़ गई है कि रूस का लक्ष्य सर्दी की शुरुआत में यूक्रेन की बिजली उत्पादन क्षमता को नष्ट करना है।

इस बीच यहां यह भी बता दं कि, रूस और यूक्रेन में जंग के बीच यूक्रेन के शीर्ष सैन्य कमांडर ने कहा है कि रूस के लगातार आक्रमण के बाद पूर्वी यूक्रेन के प्रमुख शहर पोक्रोवस्क के आसपास जंग और भीषण हो गई है। रूसी सेना अब शहर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। पोक्रोवस्क शहर यूक्रेन के लिए बेहद अहम है।

हाल ही में यूक्रेनी सेना प्रमुख जनरल ओलेक्सांद्र सिरस्की ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा था कि कब्जा करने वाले रूसी अपनी सारी उपलब्ध ताकतें आगे बढ़ा रहे हैं और हमारे सैनिकों की सुरक्षा को तोडऩे की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि उनकी सेना संख्या में कम है। रूसी सेनाएं यूक्रेन की सुरक्षा को ग्लाइड बमों के साथ ध्वस्त करने की कोशिश कर रही हैं।


फिलीपींस में फिर फटा कनलाओन ज्वालामुखी, 87,000 लोगों को पहुंचाया गया सुरक्षित स्थान पर

मनिला। फिलीपींस के कनलाओन ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट हुआ है। विस्फोट के बाद आसमान में हजारों मीटर तक राख का गुबार फैल गया। प्रशासन ने आसपास के गांवों को खाली कराने का आदेश दिया है और राहत कार्य जारी है। फिलीपींस के नागरिक सुरक्षा कार्यालय ने कहा कि कनलाओन ज्वालामुखी के विस्फोट के कारण लगभग 87,000 लोगों को तत्काल प्रभाव से रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है।

नेग्रोस द्वीप पर स्थित कनलाओन ज्वालामुखी समुद्र तल से 2,400 मीटर (लगभग 8,000 फीट) की ऊंचाई पर है। यह फिलीपींस के 24 सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। इस ज्वालामुखी में पहले भी कई बार विस्फोट कर चुके हैं और इसके पास बसे गांवों के लिए यह हमेशा खतरे का संकेत रहा है।

फिलीपींस इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी ने चेतावनी स्तर को बढ़ा दिया है। संस्थान ने चेतावनी दी है कि विस्फोट शुरू हो गया है जो आगे बड़े विस्फोटों में बदल सकता है। कनलाओन ज्वालामुखी आखिरी बार इसी साल जून में फटा था। यह ज्वालामुखी नीग्रोस द्वीप पर नीग्रोस ओरिएंटल और नीग्रोस ऑक्सिडेंटल प्रांतों में फैला हुआ है और देश के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।

गौरतलब है कि, फिलीपींस प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर में स्थित है, जो इसे भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील बनाता है। देश में 24 सक्रिय ज्वालामुखी हैं, जिनमें से कनलाओन भी एक है। यहां अक्सर ज्वालामुखी विस्फोट और भूकंप गतिविधियां देखने को मिलती हैं जो स्थानीय निवासियों के लिए बड़ा खतरा है।


बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर अमेरिकी सांसद ने उठाए सवाल, अंतरिम सरकार से की जिम्मेदारी लेने की अपील

ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। कट्टरपंथी संगठनों द्वारा हिंदुओं पर अत्याचार और उनके मंदिरों को ध्वस्त करने की घटनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही है। इस बीच, अमेरिकी सांसद ब्रैड शेरमन ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने की अपील की है।

कांग्रेस सदस्य ब्रैड शेरमन ने मंगलवार को एक बयान में कहा, “बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का यह पूर्ण दायित्व है कि वह अपने हिंदू अल्पसंख्यकों की रक्षा करें।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह हजारों अल्पसंख्यक हिंदुओं के विरोध प्रदर्शनों का सार्थक समाधान निकाले।

हिंसा के कृत्यों को खत्म करना चाहिए
शेरमन ने आगे कहा कि वह बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पतन के समय और उसके बाद हुए हिंसक दंगों के दौरान हुई हत्याओं और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच की मांग का समर्थन करते हैं। यह मांग बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क द्वारा की गई है। शेरमन ने कहा कि वर्तमान प्रशासन को हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही हिंसा को खत्म करने के लिए मजबूत कदम उठाने चाहिए।

व्हाइट हाउस के बाहर की गई रैली आयोजित
अमेरिकी हिंदुओं ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग करते हुए व्हाइट हाउस के बाहर एक रैली आयोजित की। इस रैली में पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की भी मांग की गई थी।

भारत ने भी जताई चिंता
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे पर भारत ने भी चिंता जताई है। लोकसभा में लिखित प्रश्नों के जवाब में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि ढाका में भारतीय उच्चायोग इस मामले पर बारीकी से नजर रख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी वहां की अंतरिम सरकार की है।


हिंदुओं पर अत्याचार जारी- इस्कॉन मंदिर के एक और ब्रह्मचारी श्यामदास प्रभु को किया गया गिरफ्तार 

स्वामी चिन्मय कृष्णदास को पहले ही किया जा चुका है गिरफ्तार 

ढाका। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार जारी है। इस्कॉन मंदिर के पुजारी और हिंदू नेता स्वामी चिन्मय कृष्णदास की गिरफ्तारी के विरोध में हुए प्रदर्शन के बीच दूसरे हिंदू पुजारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। पश्चिम बंगाल में इस्कॉन मंदिर के प्रवक्ता राधारमण दास ने ट्वीट करके बताया कि बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर के एक और ब्रह्मचारी श्यामदास प्रभु को चत्तोग्राम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में श्यामदास प्रभु की फोटो शेयर करके लिखा कि क्या ये आपको आतंकवादी दिखते हैं?

बता दें कि इससे पहले बांग्लादेश के इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) के पूर्व सदस्य चिन्मॉय कृष्ण दास को सोमवार को राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों ने बताया कि आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद बांग्लादेश के चट्टोग्राम में एक और हिंदू पुजारी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार पुजारी की पहचान श्याम दास प्रभु के रूप में हुई, जो कथित तौर पर जेल में चिन्मय कृष्ण दास से मिलने गए थे। 

बिना किसी वारंट के हुई श्याम दास प्रभु की गिरफ्तारी

सूत्रों ने कहा कि श्याम दास प्रभु को बिना किसी आधिकारिक वारंट के गिरफ्तार किया गया है। यह प्रथा अधिकारियों को किसी को हिरासत में लेने और बाद में रिहा करने की अनुमति देती है। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास ने भी एक्स पर भिक्षु की गिरफ्तारी के बारे में पोस्ट किया। बांग्लादेश में हिंदू साधु की गिरफ्तारी और हिंसा का दौर जारी है। इस्कॉन के पूर्व सदस्य व हिंदू पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की देशद्रोह के मामले में गिरफ्तारी से राजधानी ढाका और चट्टोग्राम सहित बांग्लादेश के विभिन्न स्थानों पर हिंदू समुदाय के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

चिन्मय कृष्ण दास को मंगलवार को चट्टोग्राम अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनकी रिहाई की मांग कर रहे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। झड़प में सहायक लोक अभियोजक सैफुल इस्लाम की मौत हो गई।  पुलिस ने शनिवार को कहा कि बांग्लादेश पुलिस ने वकील की हत्या के मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। 46 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया, जिनमें ज्यादातर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के सफाई कर्मचारी थे।

मुस्लिमों ने हिंदू मंदिरों को तोड़ा

हिंदुओं के विरोध प्रदर्शन के बाद चट्टोग्राम में शुक्रवार को जुमे की नमाज करने के बाद मुसलमानों की भीड़ ने तीन हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की, जहां इस्कॉन के एक पूर्व सदस्य पर राजद्रोह के आरोप के तहत मामला दर्ज होने के बाद से विरोध प्रदर्शन और हिंसा देखी गई है। समाचार पोर्टल BDNews24.com की रिपोर्ट के अनुसार, हमला दोपहर करीब 2:30 बजे बंदरगाह शहर के हरीश चंद्र मुंसेफ लेन में हुआ, जहां शांतनेश्वरी मातृ मंदिर, पास के शोनी मंदिर और शांतनेश्वरी कालीबाड़ी मंदिर को निशाना बनाया गया।  “नारेबाजी कर रहे कई सौ लोगों के एक समूह ने मंदिरों पर ईंट-पत्थर फेंके, जिससे शोनी मंदिर और अन्य दो मंदिरों के द्वार क्षतिग्रस्त हो गए।” कोतवाली थाना प्रमुख अब्दुल करीम ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि हमलावरों ने मंदिरों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया.

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा

चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर तनाव के बीच हुई है, जहां पूर्व प्रधान मंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से व्यापक राजनीतिक हिंसा देखी गई है। पूर्व प्रधान मंत्री शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद से, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली नई सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार को अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि को रोकने में विफल रहने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है।  बता दें कि बांग्लादेश की 170 मिलियन आबादी में लगभग 8 प्रतिशत हिंदू हैं।


बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति खराब, मंदिरों पर हमले तेज

ढाका। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। मोहम्मद युनूस की सरकार के सत्ता में आने के चार महीने बाद से कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों के हौसले बुलंद हो गए हैं। शेख हसीना सरकार द्वारा बैन किए गए कई कट्टरपंथी समूहों ने अब हिंदू समुदाय और उनके पूजा स्थलों के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है, जिससे धार्मिक तनाव बढ़ गया है।

मंदिरों पर लगातार हमले
हाल के दिनों में ढाका और अन्य इलाकों में हिंदू मंदिरों पर हमले तेज हो गए हैं। कट्टरपंथी संगठनों ने लोकनाथ मंदिर, मनसा माता मंदिर और हजारी लेन स्थित काली माता मंदिर पर हमला किया। जुमे की नमाज के बाद इन संगठनों ने दो और मंदिरों – राधा गोविंदा मंदिर और शांतनेश्वरी मंदिर – को निशाना बनाया। इन हमलों ने हिंदू समुदाय को गहरे भय में डाल दिया है और धार्मिक सहिष्णुता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कट्टरपंथियों का बढ़ा प्रभाव
शेख हसीना की सरकार द्वारा जिन कट्टरपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया था, वे अब पहले से ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। हिंदू समुदाय के लोग आरोप लगा रहे हैं कि नई सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर उदासीन है, जिससे कट्टरपंथी ताकतों का मनोबल और बढ़ गया है। यह स्थिति बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए चिंता का कारण बन चुकी है।

अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल
लगातार हो रहे हमलों ने हिंदू समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल बना दिया है। पूजा स्थलों पर हो रहे हमलों से न केवल धार्मिक स्वतंत्रता, बल्कि सामाजिक सहिष्णुता पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। स्थानीय हिंदू संगठनों ने सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है ताकि इन हमलों पर काबू पाया जा सके और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सरकार की चुप्पी पर सवाल
मोहम्मद युनूस सरकार ने इन घटनाओं पर अब तक कोई कड़ा कदम नहीं उठाया है, जिसे लेकर हिंदू संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकार की चुप्पी से कट्टरपंथी तत्वों के हौसले और बढ़े हैं, और यह स्थिति बांग्लादेश में शांति और धार्मिक सहिष्णुता को खतरे में डाल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही आलोचना
इन हमलों के बाद, बांग्लादेश की नई सरकार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ रहा है कि वह अपने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यदि यह स्थिति जल्दी काबू में नहीं आई, तो बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाने की अपील की है, ताकि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय को सुरक्षा और सम्मान मिल सके।


सोशल मीडिया प्रतिबंध का मकसद बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, नहीं कर पाईं तो कंपनियां होंगी जिम्मेदार- पीएम एंथनी अल्बानीज

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने घोषणा की, कि सोशल मीडिया कंपनियों की बच्चों की सुरक्षा करने की सामाजिक जिम्मेदारी है, क्योंकि संसद ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को उनके प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से प्रतिबंधित करने वाला कानून पारित किया है।

अल्बानीज ने कहा कि 16 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को सोशल मीडिया तक पहुंचने से प्रतिबंधित करने वाला दुनिया का पहला कानून युवा ऑस्ट्रेलियाई बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्लेटफॉर्म की सामाजिक जिम्मेदारी होगी यही उनकी प्राथमिकता में शामिल होगा।
देर रात सीनेट ने सरकार के कानून के पक्ष में मतदान किया। यह कानून संसद के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा में शुक्रवार सुबह प्रक्रियात्मक सत्र में दूसरी बार पारित हुआ, जिससे 12 महीनों में कानून लागू होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

सरकार ने यह निर्दिष्ट नहीं किया है कि नए कानून कैसे लागू किए जाएंगे। कानून के तहत, सोशल मीडिया कंपनियां जो 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से रोकने के लिए उचित कदम उठाने में विफल रहती हैं, उन्हें 50 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ($32.5 मिलियन) तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।

अल्बानीज ने कहा कि हम यह तर्क नहीं देते कि इसका कार्यान्वयन एकदम सही होगा, ठीक वैसे ही जैसे 18 साल से कम आयु के लोगों के लिए शराब पर प्रतिबंध का मतलब यह नहीं है कि 18 साल से कम आयु के लोगों को कभी भी शराब नहीं मिलेगी, लेकिन हम जानते हैं कि ऐसा करना सही है।

प्रतिबंध के पारित होने पर प्रतिक्रिया देते हुए, मेटा – फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी ने कहा कि वह संसद के माध्यम से जिस गति से आगे बढ़ी, उससे चिंतित है।

कंपनी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि हम उस प्रक्रिया से चिंतित हैं, जिसमें साक्ष्यों पर उचित रूप से विचार किए बिना, आयु-उपयुक्त अनुभव सुनिश्चित करने के लिए उद्योग पहले से क्या कर रहा है और युवा लोगों की आवाजों पर विचार किए बिना कानून को जल्दबाजी में पारित कर दिया गया।


हिंद प्रशांत में देशों का सहयोग ज्यादा संसाधन जुटाने में अहम साबित हो सकता है- विदेश मंत्री एस. जयशंकर

हिंद-प्रशांत इस वक्त बड़े बदलावों को अनुभव कर रहा – विदेश मंत्री एस. जयशंकर
इटली में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक 
रोम/नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर क्वाड की स्थापना और इसकी उन्नति को पूरी दुनिया के लिए एक अहम घटनाक्रम करार दिया है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत इस वक्त बड़े बदलावों को अनुभव कर रहा है। इनमें नई साझेदारियां और साझा हितों का साथ आना शामिल है। इटली के फियुगी शहर में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में आमंत्रित जयशंकर ने कहा, “ऐसे समय, जब सहयोग बढ़ाने से जुड़ी कोशिशें जारीं हैं, तब हिंद-प्रशांत क्षेत्र को भी व्यवहारिक समाधान, तेज कूटनीति, बेहतर समायोजन और ज्यादा खुली बातचीत की जरूरत है। इस काम में जी7 एक अच्छा साझेदार हो सकता है।”
बता दें कि क्वाड समूह ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका का गठबंधन है। इसकी स्थापना हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के मकसद से हुई थी। विदेश मंत्री इसी मुद्दे को लेकर जी7 के विदेश मंत्रियों की 24-26 नवंबर को होने वाली आधिकारिक बैठक में भारत की तरफ से बतौर अतिथि पहुंचे। जयशंकर ने इस सत्र के खत्म होने के बाद कहा, “क्वाड का विकास एक अहम घटनाक्रम रहा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र का आज का परिदृश्य बड़े स्तर पर सहयोगात्मक दृष्टिकोण के पक्ष में तर्क पेश करता है। यह सहयोग नौसैन्य क्षेत्र के अलावा सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन व अन्य क्षेत्रों में हो सकता है।”
जयशंकर ने चीन का नाम लिए बिना उसकी बेल्ट एंड रोड परियोजना की तरफ इशारा करते हुए कहा कि हिंद प्रशांत में देशों का सहयोग ज्यादा संसाधन जुटाने, खराब कर्ज या अवहनीय कर्ज को रोकने और क्षेत्र में ज्यादा गतिविधि का समर्थन करने में अहम साबित हो सकता है। इसके अलावा शासन, स्वास्थ्य, तकनीक, आपदा और प्राकृतिक संसाधान के प्रबंधन में भी नई और अहम क्षमताएं पैदा की जा सकती हैं।

क्या शुरू होगा तीसरा विश्व युद्ध? व्लादिमीर पुतिन की धमकी और बढ़ता वैश्विक तनाव

लंदन। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन और पश्चिमी देशों पर हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमले की धमकी दी है, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यदि हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति पद संभालने से पहले ही तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो सकता है।

पुतिन की धमकी और नाटो की चुप्पी
पुतिन लगातार यूक्रेन पर मिसाइल हमले कर रहे हैं और अब परमाणु हमलों की धमकी भी दे रहे हैं। वहीं, नाटो और ब्रिटेन ने इस गंभीर स्थिति पर अब तक कोई बैठक नहीं बुलाई है। पुतिन की इस आक्रामक नीति ने पैन-यूरोपीय संघर्ष का खतरा बढ़ा दिया है।

खतरे के बढ़ते संकेत
शीत युद्ध के बाद पहली बार ऐसा संकट देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन, ब्रिटेन और अमेरिका की मिसाइलों को रूस के अंदर तैनात करके क्रेमलिन को उकसाया जा रहा है। अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव और उनके शपथ ग्रहण के बीच 76 दिनों का यह अंतराल दुनिया के लिए भारी पड़ सकता है।

बाइडेन की नीतियों पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीतियों को इस संकट का प्रमुख कारण माना जा रहा है। उन्होंने यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें देने में देरी की, जिससे रूस का जवाबी हमला और आक्रामक हो गया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के रूस के अंदर हमलों ने क्रेमलिन को परमाणु प्रतिशोध की धमकी देने पर मजबूर कर दिया है।

दुनिया के अन्य नेताओं की भूमिका
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आक्रामक बयानबाजी से तनाव को और बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका को कमजोर करने की कोशिश में जुटे हैं। यूरोपीय सेनाएं रूस की तुलना में कमजोर मानी जा रही हैं, जिससे यह संकट और जटिल हो गया है।

विशेषज्ञों की चेतावनी
1962 के क्यूबा मिसाइल संकट और दो विश्व युद्धों के अनुभवों से यह साफ है कि दुनिया एक बड़े संघर्ष के बेहद करीब है। यदि वैश्विक नेताओं ने जल्द और प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो यह संकट तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले सकता है।


ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन- अंडरगारमेंट्स में घूमते हुए युवती को किया गया रिहा

ईरान।  हिजाब के विरोध में अक्सर महिलाओं के विरोध प्रदर्शन देखने को मिलते हैं, लेकिन हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया। ईरान की एक यूनिवर्सिटी कैंपस में एक युवती को सिर्फ अंडरगारमेंट्स में घूमते हुए देखा गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। पब्लिक प्लेस में न्यूडिटी को प्रमोट करने के आरोप में उस युवती को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन अब इस मामले में अदालत का फैसला आ गया है।

अदालत ने दी मानसिक स्वास्थ्य को अहमियत
तेहरान की अदालत ने फैसला सुनाया कि इस छात्रा के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। अदालत ने कहा कि छात्रा अहौ दारयाई मानसिक रूप से बीमार थीं, और चिकित्सकों ने इसकी पुष्टि की है। न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने बताया कि छात्रा को अस्पताल भेजा गया था, जहां डॉक्टरों ने उसकी मानसिक स्थिति स्पष्ट की। इस आधार पर अदालत ने कहा कि छात्रा पर मुकदमा चलाने का कोई औचित्य नहीं है और उसे उसके परिवार को सौंप दिया गया है।

विरोध प्रदर्शन और वायरल वीडियो
इस महीने की शुरुआत में, अहौ दारयाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में वह तेहरान की इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी के कैंपस में केवल अंडरगारमेंट्स में घूमती नजर आईं। बताया गया कि यह घटना इस्लामिक ड्रेस कोड के विरोध में हुई थी। यूनिवर्सिटी की सिक्योरिटी द्वारा रोके जाने के बाद, उन्होंने अपने कपड़े उतारकर विरोध प्रदर्शन किया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने किया समर्थन
इस घटना के बाद, मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ईरान सरकार से छात्रा को तुरंत रिहा करने की अपील की थी। संगठन ने कहा था कि अहौ दारयाई को सभी प्रकार की यातनाओं और दुर्व्यवहार से बचाया जाए और उसे परिवार और वकील से संपर्क की सुविधा दी जाए।

पारिवारिक और मानसिक दबाव का असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रा पारिवारिक समस्याओं के चलते मानसिक तनाव में थीं। उनके करीबी लोगों और सहपाठियों ने पहले भी उनके असामान्य व्यवहार के बारे में बताया था। अदालत ने इसे ध्यान में रखते हुए नरमी बरती और मामले को खत्म कर दिया। अहौ दारयाई की यह घटना ईरान में महिलाओं के अधिकारों और इस्लामिक ड्रेस कोड को लेकर चल रही बहस का हिस्सा बन गई है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में उनकी मानसिक स्थिति को प्राथमिकता देते हुए इंसानियत का उदाहरण पेश किया है।


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