Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

यदि होर्मुज को बंद करने की कोशिश की गई, तो ईरान अमेरिकी जहाजों को बनाएगा निशाना- रेजाई

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

यदि होर्मुज को बंद करने की कोशिश की गई, तो ईरान अमेरिकी जहाजों को बनाएगा निशाना- रेजाई

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, बंदरगाहों की नाकेबंदी से बढ़ा संकट

तेहरान। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ा है, वहीं ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को सीधी चेतावनी दे दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं, जिससे किसी भी देश के जहाजों का ईरानी बंदरगाहों तक आना-जाना लगभग ठप हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

इस घटनाक्रम पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश की गई, तो ईरान अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरानी मिसाइलें अमेरिकी नौसेना के जहाजों को आसानी से तबाह कर सकती हैं।

रेजाई ने अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अमेरिका खुद को इस क्षेत्र का “पुलिस” बनाना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो ईरान इसका जवाब और अधिक आक्रामक तरीके से देगा। उन्होंने यहां तक दावा किया कि ईरान अमेरिकी सैनिकों को बंदी बनाकर बदले में भारी कीमत वसूल सकता है।

इस बीच, बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात वैश्विक शांति और मानवता के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

वहीं, पोप लियो ने भी शांति की अपील करते हुए कहा कि दुनिया को अब युद्ध और हिंसा से दूर हटकर प्रेम, संवाद और न्याय का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघर्ष से होने वाला विनाश और मानवीय पीड़ा अब और स्वीकार्य नहीं है।


US में बड़ा आर्थिक फैसला संभव: Donald Trump का टैरिफ वार, भारतीय कंपनियां सतर्क

रत्नप्रिया

Donald Trump Tariff Policy: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बड़ा आर्थिक कदम उठाने की तैयारी में हैं, जिसका असर वैश्विक फार्मा सेक्टर पर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार उन दवा कंपनियों पर कड़ा रुख अपनाने जा रही है, जो अमेरिकी बाजार में दवाओं की कीमत कम करने को लेकर सहमत नहीं हुई हैं। ऐसे में इन कंपनियों पर 100% तक आयात शुल्क लगाने की योजना बनाई जा रही है।

ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर लागू हो सकता है टैरिफ

सूत्रों के अनुसार, यह टैरिफ खासतौर पर ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर लागू हो सकता है। हालांकि, जिन कंपनियों ने पहले ही कीमतों को नियंत्रित करने या अमेरिका में निवेश बढ़ाने का वादा किया है, उन्हें इस सख्त कदम से राहत मिल सकती है।

फैसले का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखने की संभावना

इस फैसले का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी दिख सकता है। भारत जैसे देशों की फार्मा कंपनियों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। खबर सामने आते ही भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर के स्टॉक्स में गिरावट देखी गई, जहां कई कंपनियों के शेयर नीचे आए।

अंतरराष्ट्रीय हालत पहले से ही तनावपूर्ण

यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब अंतरराष्ट्रीय हालात पहले से ही तनावपूर्ण हैं और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।

अगर यह योजना लागू होती है, तो दवा कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में काम करना महंगा हो सकता है, और उन्हें अपनी रणनीति में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।


ईरान ने कुवैत के पावर प्लांट को बनाया निशाना, हमले में भारतीय नागरिक की मौत

कुवैत सिटी।  ध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कुवैत से एक दुखद खबर सामने आई है, जहां ईरान की ओर से हुए एक हमले में भारतीय नागरिक की जान चली गई। इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को लेकर चिंता बढ़ा दी है, वहीं कुवैत सरकार ने हालात को नियंत्रण में रखने के लिए तत्काल कदम उठाए हैं।

कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, एक महत्वपूर्ण पावर और पानी के डीसैलिनेशन प्लांट की सर्विस बिल्डिंग को निशाना बनाकर हमला किया गया। इस हमले में वहां कार्यरत एक भारतीय कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि प्लांट के ढांचे को भी भारी क्षति पहुंची है।

घटना के बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आया और तकनीकी व इमरजेंसी टीमों को मौके पर तैनात किया गया। अधिकारियों का कहना है कि जरूरी सेवाओं को बहाल रखने और हालात सामान्य बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर तेजी से काम किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सरकार ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है, साथ ही भरोसा दिलाया है कि हर स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।

इस बीच, लेबनान में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के एक ठिकाने पर प्रोजेक्टाइल गिरने से एक शांति सैनिक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे गंभीर घटना बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की है।

वहीं, इजराइल की सेना ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में कुछ सशस्त्र लड़ाकों को मार गिराया है, जो हमले की तैयारी में थे। सेना के मुताबिक, मौके से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए गए हैं। इन घटनाओं के चलते पूरे क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।


नेपाल की राजनीति में नया दौर, युवा नेता बालेंद्र शाह ने ली प्रधानमंत्री पद की शपथ

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने बालेंद्र शाह को आधिकारिक रूप से किया प्रधानमंत्री नियुक्त

काठमांडू। नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेता बालेंद्र शाह ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाल लिया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री नियुक्त किया, जिसके बाद उन्होंने शपथ लेकर कार्यभार ग्रहण किया। इसके साथ ही शाह नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री बन गए हैं।

राष्ट्रपति कार्यालय में आयोजित एक औपचारिक समारोह में बालेंद्र शाह ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह समारोह पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ, जिसमें शंखनाद के साथ शुभारंभ किया गया। हाल ही में हुए संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी को बड़ी सफलता मिली थी, जिसके बाद उन्हें संसदीय दल का नेता चुना गया और प्रधानमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

नई सरकार के गठन को लेकर भी तैयारियां तेज हैं। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल में कई नए चेहरों को जगह दी जा सकती है, जिसमें सुदन गुरुंग को गृह मंत्री बनाए जाने की चर्चा है।

बालेंद्र शाह का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी पहचान बनाई और फिर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखते हुए बड़ी जीत हासिल की। हालिया चुनाव में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भारी मतों से हराकर अपनी लोकप्रियता साबित की।

इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आने वाले शाह को शहरी विकास और बुनियादी ढांचे की अच्छी समझ मानी जाती है। ऐसे में उनके नेतृत्व में नेपाल में विकास और प्रशासनिक सुधारों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


ईरान का बड़ा कदम, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से वसूलेगा 20 लाख डॉलर

अलाएद्दीन बोरोजेर्दी बोले—“युद्ध की एक कीमत होती है”

तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने बड़ा कदम उठाते हुए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क लगाने का फैसला किया है। इस निर्णय से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में नई हलचल तेज होने की आशंका है।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर करीब 20 लाख डॉलर (लगभग 18 करोड़ रुपये) का शुल्क लगाने की घोषणा की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से जुड़े अलाएद्दीन बोरोजेर्दी ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए इसे देश की संप्रभुता और रणनीतिक ताकत का प्रतीक बताया है।

बोरोजेर्दी ने कहा कि मौजूदा हालात में इस तरह का कदम उठाना जरूरी है और “युद्ध की एक कीमत होती है”, इसलिए जहाजों से शुल्क वसूला जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए होर्मुज मार्ग को पूरी तरह खोलने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, ईरान की ओर से पहले यह कहा गया था कि यह रास्ता उसके विरोधियों को छोड़कर अन्य देशों के लिए खुला है, लेकिन अब शुल्क लगाने के फैसले ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल है, जहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की पाबंदी या अतिरिक्त शुल्क का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है और वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।


दुबई में तेज धमाकों से मचा हड़कंप, आसमान में उठा काले धुएं का गुबार

संभावित हमले को सुरक्षा बलों ने किया नाकाम, कोई हताहत नहीं

दुबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुबई में शुक्रवार को तेज धमाकों की आवाज से हड़कंप मच गया। शहर के मध्य क्षेत्र में हुए इन धमाकों के बाद आसमान में काले धुएं का गुबार देखा गया, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई के केंद्रीय इलाके में शुक्रवार को अचानक दो तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी, जिससे आसपास की कई इमारतों में कंपन महसूस किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाकों के बाद आसमान में काले धुएं का घना गुबार उठता दिखाई दिया, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं।

घटना के संबंध में दुबई मीडिया ऑफिस ने जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा बलों ने संभावित हमले को समय रहते विफल कर दिया। कार्रवाई के दौरान हमले से जुड़ा कुछ मलबा पास की एक इमारत के बाहरी हिस्से पर गिर गया, जिससे भवन को आंशिक नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की खबर नहीं है।

धमाकों के तुरंत बाद शहर की प्रमुख सड़क शेख जायद रोड पर पुलिस और आपातकालीन वाहनों के सायरन सुनाई देने लगे। सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन आसपास के क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी। यह घटना दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर के नजदीक बताई जा रही है।

गौरतलब है कि दुबई में लगातार दूसरे दिन इस तरह की घटना सामने आई है। इससे पहले गुरुवार को भी शहर के अल बदा इलाके में ड्रोन से जुड़ी एक संदिग्ध गतिविधि की खबर सामने आई थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया था।

क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।


ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी, तेल आपूर्ति रोकने पर होगी बड़ी कार्रवाई

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को दी धमकी

वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश की, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया बेहद कठोर होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई का जवाब पहले से कहीं अधिक सख्ती के साथ दिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति को रोकने या बाधित करने की किसी भी कोशिश को अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि ईरान ऐसा कदम उठाता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ऐसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है, जिनसे ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि हालात इतने खराब नहीं होंगे और तनाव को टाला जा सकेगा।

वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्ग

Strait of Hormuz को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निर्यात होने वाले बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में यदि यहां किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

कई देशों की निर्भरता

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि उन सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो इस रास्ते से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं। इनमें एशिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं, जिनकी ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर करती हैं।

ऑपरेशन ‘मिडनाइट हैमर’ का भी जिक्र

अपने बयान में ट्रंप ने अमेरिका की ओर से चलाए गए कथित अभियान ‘मिडनाइट हैमर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा है और इससे क्षेत्र में संभावित बड़े खतरे को टालने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है।


इंडोनेशिया में बड़ा हादसा, भारी बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर ढहा, पांच लोगों की मौत

मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी

जकार्ता। इंडोनेशिया में भारी बारिश के बाद एक बड़े लैंडफिल में कचरे का विशाल ढेर अचानक ढह गया, जिससे बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव दल मौके पर लगातार अभियान चला रहे हैं।

यह हादसा इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के पास बेकासी शहर में स्थित बंटारगेबांग वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी में हुआ। लगातार हो रही तेज बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर अचानक खिसककर गिर गया और आसपास मौजूद कई लोग इसकी चपेट में आ गए।

घटना के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए 300 से अधिक बचावकर्मियों को तैनात किया गया है। बचाव दल भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं।

जकार्ता सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस की प्रमुख देसियाना कार्तिका बहारी के मुताबिक कचरे के ढेर अभी भी अस्थिर स्थिति में हैं, इसलिए बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ काम कर रहे हैं ताकि किसी और हादसे से बचा जा सके।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में जान गंवाने वालों में दो कचरा ट्रक चालक और दो खाद्य स्टॉल संचालक शामिल हैं, जो उस समय लैंडफिल के पास मौजूद थे। वहीं चार लोग सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। पुलिस, सेना और स्वयंसेवी संगठनों की टीमें अभी भी तीन लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

बंटारगेबांग लैंडफिल जकार्ता का सबसे बड़ा कचरा निस्तारण स्थल है, जहां शहर का अधिकांश घरेलू कचरा डाला जाता है। लंबे समय से इसकी क्षमता से अधिक कचरा जमा होने को लेकर चेतावनी दी जाती रही है। इससे पहले भी ऐसे हादसों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए पिछले साल के अंत में इस लैंडफिल को साफ करने की योजना बनाई थी, जिसके तहत कचरे को ऊर्जा में बदलने की परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि खुले में कचरा जमा करने की पुरानी व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म किया जा सके।


गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्कार्दू में विरोध-प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा, गोलीबारी में 38 लोगों की मौत

स्कार्दू में हालात तनावपूर्ण, कई इलाकों में कर्फ्यू लागू

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। क्षेत्र के प्रमुख शहर स्कार्दू में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी, जिसमें पाकिस्तानी सेना और अर्द्धसैन्य बलों की गोलीबारी में कई लोगों की मौत की खबर है। घटनाओं के बाद आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिसके चलते प्रशासन को कई इलाकों में कर्फ्यू लागू करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार पहली मार्च से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन उस समय उग्र हो गए जब प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों द्वारा कार्रवाई की गई। शुरुआती रिपोर्ट में 13 लोगों की मौत की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में घायल लोगों के दम तोड़ने से मृतकों की संख्या बढ़कर 38 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं।

घटनाओं से नाराज प्रदर्शनकारियों ने स्कार्दू और आसपास के क्षेत्रों में कई सरकारी और सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया। इस दौरान कई भवनों में तोड़फोड़ की गई और कुछ जगहों पर आगजनी भी की गई। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की है।

इसी बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामनेई की कथित मौत को लेकर पाकिस्तान में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। अल्पसंख्यक शिया समुदाय के लोगों ने राजधानी इस्लामाबाद सहित कई शहरों में रैलियां निकालकर अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ नारेबाजी की।

स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा परामर्श जारी किया है। दूतावास ने बलोचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह दी है।

स्कार्दू में हिंसा के दौरान कई महत्वपूर्ण भवनों को नुकसान पहुंचा है। इनमें सैन्य अधिकारियों के आवास, नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री से जुड़े कार्यालय, आर्मी पब्लिक स्कूल, पुलिस अधिकारियों के कार्यालय, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क और पर्यटन विभाग के दफ्तर शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर संचार से जुड़े संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कार्यालयों को भी आग के हवाले कर दिया गया।

फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और हालात को सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।


डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान—एलियंस और UFO से जुड़ी फाइलें होंगी सार्वजनिक

बराक ओबामा के बयान पर बवाल, ट्रंप ने उठाए सवाल

वाशिंगटन। एलियंस और UFO को लेकर लंबे समय से चल रही बहस एक बार फिर सुर्खियों में है। डोनाल्ड ट्रंप ने अब बड़ा कदम उठाते हुए एलियंस और अनआइडेंटिफाइड एरियल फेनोमेना (UAP) से जुड़ी सरकारी फाइलों को सार्वजनिक करने की बात कही है। इस घोषणा के बाद दुनियाभर में जिज्ञासा और चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि लोग लंबे समय से इन रहस्यमयी घटनाओं के सच को जानना चाहते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर किए गए अपने पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वह पेंटागन और अन्य एजेंसियों को निर्देश देंगे कि वे UFO और एलियन से जुड़ी फाइलों की पहचान कर उन्हें सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू करें। उन्होंने इसे “लोगों की दिलचस्पी से जुड़ा अहम मुद्दा” बताते हुए पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।

इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर आरोप लगाया कि उन्होंने एलियंस के विषय में सार्वजनिक टिप्पणी कर संवेदनशील जानकारी को उजागर किया। हालांकि, ट्रंप ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ओबामा की बात खुफिया जानकारी पर आधारित थी, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला हो सकता है।

दरअसल, एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान ओबामा से एलियंस के अस्तित्व को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा था कि ब्रह्मांड की विशालता को देखते हुए अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उन्होंने खुद कभी एलियंस को नहीं देखा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में एलियंस के पृथ्वी से संपर्क का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।

ट्रंप की इस घोषणा और ओबामा के बयानों के बाद UFO और एलियन से जुड़े रहस्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गए हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या वाकई इन फाइलों के सार्वजनिक होने से दशकों पुराने रहस्यों से पर्दा उठ पाएगा या यह मुद्दा सिर्फ अटकलों तक ही सीमित रहेगा।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp