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भगवान श्री कृष्ण की नगरी ब्रज में महामहिम राष्ट्रपति का भव्य स्वागत

Category Archives: मथुरा

भगवान श्री कृष्ण की नगरी ब्रज में महामहिम राष्ट्रपति का भव्य स्वागत

सतीश मुखिया

मथुरा- महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु लगभग प्रातः 10 बजे वृन्दावन रोड रेलवे स्टेशन पहुँची। वृन्दावन रोड रेलवे स्टेशन पर महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु  का स्वागत  मंत्री गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग  लक्ष्मी नारायण चौधरी जी, माननीय महापौर  विनोद अग्रवाल , लै0 जनरल  वी0 हरिहरन (अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, 1 कोर मथुरा), महाप्रबंधक उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद नरेश पाल सिंह, अपर पुलिस महानिदेशक अनुपम कुलश्रेष्ठ, मण्डलायुक्त  शैलेन्द्र कुमार सिंह, मंडल रेल प्रबंधक आगरा  गगन गोयल, एफ (पी) टीएसी, सीडीआर, 8 टीएसी कैप्टन शिवम मनचंदा, जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट  चन्द्र प्रकाश सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  श्लोक कुमार द्वारा किया गया। वृन्दावन रोड रेलवे स्टेशन से महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु   बांके बिहारी  मंदिर के दर्शन करने हेतु रवाना हुई। महामहिम  श्री बांके बिहारी जी मंदिर के निकट बनी पार्किंग पहुंची, जहाँ से गोल्फ कार्ट के माध्यम से श्री बांके बिहारी जी मन्दिर को प्रस्थान किया।

श्री बांके बिहारी जी मंदिर वृन्दावन

श्री बांके बिहारी जी मन्दिर में महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु  ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की। उन्होंने ठा० श्री बांके बिहारी जी का आर्शीवाद प्राप्त किया। महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु  ने ठॉ० श्री बांके बिहारी जी मन्दिर में चन्दन कोठरी की देहरी पर इत्र सेवा की। उन्होंने सम्मान कुंज बिहारी अष्टक एवं दीप प्रज्जवलन किया। श्री बांके बिहारी जी के दर्शन के समय दिनेश गोस्वामी, विजय कृष्ण गोस्वामी, गौरव गोस्वामी, फैन्की गोस्वामी, शैलेन्द्र गोस्वामी तथा श्रीवर्धन गोस्वामी उपस्थित रहे। महामहिम  को गोस्वामियों एवं ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मन्दिर हाई पावर्ड मैनेजमेन्ट कमेटी वृन्दावन, मथुरा के अध्यक्ष मा० न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मा० उच्च न्यायालय इलाहाबाद  अशोक कुमार  ने ठाकुर श्री बांके बिहारी जी की आकर्षक स्मृति चिन्ह भेट की।

श्री निधिवन वृन्दावन
श्री बांके बिहारी जी के दर्शन के उपरान्त सभी लोग गोल्फ कार्ट के माध्यम से  निधिवन पहुँचे। जहां पर तुलसी वन के हरे भरे वृक्षों का दर्शन किया। महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु जी ने ललिता कुण्ड के दर्शन किए, श्री बांके बिहारी जी के प्राकट्य स्थल पर कमल की माला एवं पुष्प अर्पण किये। उन्होंने रंग महल में राधारानी को श्रृंगार अर्पण किया, जिसमें चादर, साड़ी, 16 श्रृंगार, लडडू, पान, इत्र आदि था। उन्होंने रास मण्डल में इत्र व पुष्प अर्पण किये। वंशीचोरी राधारानी में चुनरी अर्पण तथा चरण पादुका पर इत्र व पुष्प अर्पण किया। महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु  को वंशी प्रसादी के रूप में प्रदान किया गया। स्वामी हरिदास समाधि पर इत्र सेवा, चुनरी व हरिदासी अर्पण किया। निधिवन के मुख्य सेवायत  भीकचन्द गोस्वामी व  रोहित गोस्वामी ने महामहिम  को ललिता कुण्ड से लेकर स्वामी हरिदास समाधि तक सभी स्थलों का महत्व, निधिवन की प्राचीनता एवं पौराणिकता से अवगत कराया।

श्री सुदामा कुटी, वृन्दावन

श्री निधिवन दर्शन के पश्चात महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु  श्री सुदामा कुटी पहुँची। श्री सुदामा कुटी वृन्दावन में महामहिम राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु जी का स्वागत श्री सुतीक्ष्ण दास जी महाराज, श्री अमरदास जी महाराज, श्री नारायण दास अग्रवाल जी, श्री व्यासदेवा महन्त जी एवं श्री मोहन कुमार शर्मा जी द्वारा किया गया। महामहिम जी के मन्दिर में प्रवेश करते ही वेद पाठकों द्वारा स्वस्तिवाचन एवं मंगलाचरण किया गया। 16 ब्राहमणों द्वारा स्वस्तिवाचन किया गया। उन्होंने एक पेड मां के नाम के अन्तर्गत परिसर में पारिजात का वृक्ष लगाया। कार्यक्रम में महामहिम जी ने श्रीमते रामानन्दाचार्याय नमः सदगुरूदेव भगवान अनन्त श्री विभूषित वैष्णव कुलभूषण गौ-संत सेवा श्री महन्त श्री सुदामा दास जी महाराज की भजनकुटी का लोकार्पण किया। महामहिम जी के साथ सुदामा कुटी के पूज्य संतों ने एक सामूहिक छवि चित्र ली। छवि त्रिच में 51 संत मौजूद रहे। सुदामा कुटी में महामहिम जी द्वारा गौ पूजन किया गया। महामहिम जी ने बछिया को चुनरी व माला पहनायी एवं टीका किया। उन्होंने बछिया को गुड खिलाया। महामहिम जी ने मन्दिर में कौशल किशोर भगवान जी के दर्शन किये। महामहिम जी ने परिसर में मन्दिर में विधिविधान से पूजा अर्चना की। उन्होंने भगवान जी को पुष्प एवं माला अर्पण किया। महामहिम जी को कुटिया के पौराणिक महत्व का वर्णन मुख्य महाराज श्री सुतीक्ष्ण दास जी महाराज द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मा० मंत्री गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी जी एवं मा० विधायक मथुरा श्री श्रीकांत शर्मा जी उपस्थित रहे।

श्री कुब्जा कृष्ण मन्दिर, मथुरा
महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी ने होलीगेट क्षेत्र स्थित श्री कुब्जा कृष्ण मन्दिर के दर्शन किये। मन्दिर में ज्योत्सना एवं अदिति चतुर्वेदी द्वारा महामहिम जी का स्वागत किया गया। महामहिम जी ने श्री कुब्जा कृष्ण मन्दिर में विधिविधान से पूजा अर्चना की। आशीष चतुर्वेदी एवं बालकृष्ण चतुर्वेदी द्वारा मन्दिर में पूजा अर्चना कराई गई। महामहिम जी को मुख्य महन्त बी०बी० चतुर्वेदी द्वारा श्री कुब्जा कृष्ण मन्दिर की पौराणिकता एवं इतिहास से अवगत कराया गया।

श्री कृष्ण जन्मस्थान मन्दिर

महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी दर्शन हेतु श्रीकृष्ण जन्मस्थान मन्दिर पहुँची। महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी ने श्री केशव देव जी मन्दिर के दर्शन किये तथा विधिविधान से पूजा अर्चना की। उन्होंने श्री योग माया जी मन्दिर तथा गर्भगृह मन्दिर में पूजा की और आर्शीवाद प्राप्त किया। इसके उपरान्त महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी ने भागवत मन्दिर के दर्शन किये। भागवत मन्दिर में मंत्रोच्चारण के साथ महामहिम जी ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की। इसके साथ ही महामहिम जी ने श्री जगन्नाथ मन्दिर जी के दर्शन किये। मा० मंत्री गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी जी ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से महामहिम जी को श्री राधा कृष्ण जी की सुन्दर मूर्ति भेंट की। श्रीकृष्ण जन्मस्थान मन्दिर प्रबंधन द्वारा महामहिम जी को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। मन्दिर प्रबंधन से श्री अनुराग डालमिया, श्री गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी एवं श्री कपिल शर्मा मौजूद रहे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान मन्दिर के दर्शन के उपरान्त महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन पहुँची, जहां से दिल्ली के लिए प्रस्थान किया। मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर मा० मंत्री गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी जी, मा० महापौर श्री विनोद अग्रवाल, मा० जिला पंचायत अध्यक्ष श्री किशन सिंह, मा० विधायक मांट श्री राजेश चौधरी, मा० विधायक बल्देव श्री पूरन प्रकाश, मा० विधायक मथुरा श्री श्रीकांत शर्मा, मा० विधायक गोवर्धन श्री मेघश्याम सिंह, मा० एमएलसी श्री योगेश चौधरी, मा० एमएलसी श्री ओमप्रकाश सिंह, उ०प्र० ब्रजतीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष श्री शैलजा कांत मिश्र, महानगर अध्यक्ष श्री हरिशंकर राजू यादव आदि मौजूद रहे।

विभिन्न कार्यक्रम स्थलों पर उपस्थिति

इन कार्यक्रम के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक श्रीमती अनुपम कुलश्रेष्ठ, मण्डलायुक्त श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक श्री शैलेश कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी श्री चंद्र प्रकाश सिंह जी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री श्लोक कुमार, नगर आयुक्त श्री जग प्रवेश, मुख्य विकास अधिकारी श्री मनीष मीना, उपाध्यक्ष मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण / मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री श्याम बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व श्री पंकज कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन डा० अमरेश कुमार, अपर जिलाधिकारी न्यायिक श्री सुरेंद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे श्री राजेश कुमार, उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी, सचिव मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण श्री अरविन्द कुमार द्विवेदी, ओ०एस०डी० श्री प्रसून्न द्विवेदी, अपर नगर आयुक्त श्री सौरभ सिंहद्व नगर मजिस्ट्रेट श्री राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


सबका साथ, सबका विकास और सम्मान से अंतिम संस्कार बना सपना…?

सतीश मुखिया

ग्राम पंचायतो से श्मशान और मरघट विलुप्त होने के कगार पर

अंतिम समय, अंतिम क्रियाओ हेतु , अंतिम व्यक्ति दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर

जाते ही शमशान में मिट गई सारी लकीर,पास पास जल रहे थे राजा , रंक और फकीर

मथुरा: भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में पितरों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है ।आदिकाल से लेकर के वर्तमान समय तक धर्म शास्त्रों के अनुसार हमारे पितृ हम लोगों के साथ ही रहते हैं और जब वह रूठ जाते हैं तो परिवारजनों के जीवन की कुंडलिया बिगड़ जाती हैं ऐसा धर्म शास्त्रों में कहा गया है ।प्रत्येक वर्ष 15 दिन का प्रतिपक्ष आता है जिसमें हम लोग अपने अपने भूले बिछड़े पूर्वजों को याद करते हैं और उनको जल तर्पण कर के उनकी मुक्ति की कामनाएं करते हैं और अपने द्वारा हुए गलत कार्यों के लिए क्षमा याचना करते हैं । हम आग्रह करते हैं कि आप हमारे जीवन में हमारे परिवार पर इसी तरह आशीर्वाद बनाए रहे और संकटों से बचाने में सहयोग करें। इस पितृ पक्ष के दौरान देश-विदेश से आम जन भी गयाजी और वाराणसी में मां गंगा नदी के मणिकर्णिका घाट सहित अन्य नदियों पर अपने पितरों को जल अर्पण करने व उनका श्राद्ध करने हेतु पहुंचते हैं ।हमारे धर्म ग्रंथो में प्रितृपक्ष का विशेष महत्व है । महाभारत, रामायण और अन्य धर्म ग्रंथो में पितृपक्ष व उसके महत्व पर विशेष चर्चा की गई है । हम भारत वशीं राजा भागीरथ, भीष्म पिता और सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र जैसे महापुरुषों को हम लोग कैसे भूल सकते हैं ।

देश जब वर्ष 1947 में अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ और 1952 में भारत ने अपनी पहली स्वतंत्र सरकार बनाई उसके बाद पंचायती राज व्यवस्था के जनक और पितामह बलवंत राय मेहता की कमेटी के आदेश पर देश में पंचायती राज मंत्रालय का गठन हुआ और उस मंत्रालय की सिफारिश पर राजस्व विभाग द्वारा देश के समस्त राज्यों के प्रत्येक ग्राम पंचायत में श्मशान, मरघट , कब्रिस्तान और अंत्येष्टि स्थलों हेतु जमीने छोड़ी गई । आज आजादी के इतने वर्ष बाद यह गाँव / ग्राम पंचायतें तो अपनी जगह पर उपलब्ध हैं लेकिन स्थानीय निवासियों के अंतिम संस्कार हेतु छोड़ी गई मरघटो, शमशानो और कब्रिस्तानों की जमीन मौके से विलुप्त हो चुकी है या इन भूमियों पर अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है जिसमें राज्यों के राजस्व विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका संदेह के घेरे में रही है । देश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू है और इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रधान, सरपंच और मुखिया प्रत्येक 5 वर्ष में चुने जाते हैं । वह गांव का प्रथम व्यक्ति होता है और गांव के अंदर होने वाले समस्त विकास कार्यों से लेकर सभी चल अचल संपत्तियों की जिम्मेदारी इन जन्म प्रतिनिधियों की होती है लेकिन शिक्षा का अभाव , जागरूकता में कमी कहें या अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही कि जिन लोगों पर इन संपत्तियों को बचाने की जिम्मेदारी होती है वह सामाजिक ,राजनीतिक ,आर्थिक और पारिवारिक कारणो से अपना मुंह और आंखें बंद कर लेते हैं ।

उत्तर प्रदेश में अगले 6 महीने बाद वर्ष 2026 में पंचायत के चुनाव होने हैं और सभी जनप्रतिनिधि जो इस चुनाव में भागीदारी करना चाहते हैं । उन लोगों ने साम, दाम ,दंड, भेद से तैयारी करना शुरू कर दिया है लेकिन मूल सवाल अब भी कायम है कि जिस उद्देश्य के साथ हमारे पूर्वजों ने पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया था क्या उस व्यवस्था को निभाने में हम लोग सक्षम हैं और उनके दिखाए हुए मार्गदर्शन पर हम लोग चल रहे हैं ।भारतीय सामाजिक व्यवस्था में आज प्रधान सरपंच होना अपने आप में रसूख का परिचायक है लेकिन वर्तमान समय में चुनाव प्रक्रिया में भागीदारी करना बहुत महंगा हो चुका है जिससे आर्थिक रूप से पिछडें युवा और सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले कार्यकर्ता इसमें भाग लेने से वंचित रह जाते हैं ।केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा स्थानीय स्तर पर पंचायती राज व्यवस्था में आरक्षण लागू करके समाज के दलित, वंचित और पिछड़े वर्गों के लोगों को उचित हक दिलाने की कोशिश की है ।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबका साथ, सबका विकास का वादा कर रहे हैं लेकिन समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति जो सरकार की कार्य योजनाओं में विकास हेतु प्रथम स्थान पर है वह ग्राम पंचायत में सबसे अंतिम स्थान पर भी नहीं है ।भारतीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार सामाजिक दृष्टि से व्यक्ति का अंतिम स्थान श्मशान और कब्रिस्तान है जहां किसी व्यक्ति को उसकी मृत्यु होने के पश्चात उसके पार्थिव शरीर को जलाया और दफनाया जाता है लेकिन आज ग्राम पंचायतों, कस्बो , नगरों और शहरों में यह स्थिति उत्पन्न हो गई है कि जब मृत व्यक्ति के परिवार वाले उसके पार्थिव शरीर को लेकर के इन श्मशानों और मरघटो पर जाते हैं तब यह मौके पर मिलते ही नहीं है या इनके ऊपर दबंग प्रवृति के व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया होता है और वह शव को वहां पर फूंकने नहीं देते हैं जिस कारण पहले से ही दुख में गमगीन परिवार वाले उसके शरीर को जैसे तैसे रास्तों, खेतों और यमराज की बहन यमुना के किनारे जलाकर अंतिम संस्कार की रस्म को पूरा करते हैं ।केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा इन अंत्येष्टि स्थलों के विकास हेतु पंचायत निधि के अलावा अलग से धनराशि जारी की जा रही है लेकिन धरातल पर भौतिक स्थिति बड़ी ही दुखद और दयनीय है ।जिला मुख्यालय में बैठे अधिकारियों से सांठगांठ करके जनप्रतिनिधि और ग्राम पंचायत में कार्यरत शासकीय कर्मचारी फर्जी बिल बनाकर इन कार्य योजनाओं को पूर्ण दिखा देते।पंचायत द्वारा विभाग को कार्य योजना भेजी जाती है और उसे ई ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज किया जाता है लेकिन उसमें भी हेरा फेरी करके विकास कार्य कराए जाते हैं ।इन समस्त कार्यों का वार्षिक मूल्यांकन विभाग द्वारा थर्ड पार्टी से कराया जाता है लेकिन उनका वार्षिक ऑडिट भी कट्टर ईमानदार अधिकारियों द्वारा सही तरीके से पूर्ण कर दिया जाता है।

भारत में विभिन्न धर्म और संप्रदाय के लोग रहते हैं जिसमें सभी लोगों की धर्म अनुसार अपनी जीवन शैली और सामाजिक रहन-सहन है ।देश में आज भी 70% आबादी गांव में निवास करती है और इन गांव, मजरो, टोलो में विभिन्न जातियों के लोग निवास करते हैं ।देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश में समरसता और जातिवाद को मिटाने की अपील करते हैं लेकिन ग्राम पंचायत में आज भी जातिवाद का जहर साफ नजर आता है ।आज भी कई ग्राम पंचायतों में सभी जातियों के अपने-अपने शमशान और मरघट हैं । इन जातियों के द्वारा अपने समाज से करने वाले व्यक्ति के पार्थिव शरीर को अपनी जाति के लिए निर्धारित श्मशान घर पर उसकी अंतिम क्रिया की जाती है लेकिन शहरों में इस तरह का अंतर दिखाई नहीं पड़ता है ।

अभी मानसून वापस होने की ओर है और पितृपक्ष समाप्त होने को तैयार है लेकिन हम लोगों ने देखा कि मानसून के समय असमय मृत्यु का शिकार होने वाले लोगों को उनके परिवार वालों ने किन कठिनाइयों के साथ शमशान स्थलों पर उनके पार्थिव शरीर की अंतिम क्रियाएं की ।भगवान श्री कृष्ण के जन्म स्थान और ब्रज की धरती से कुछ ऐसे शर्मनाक वाकया देखने को मिले जिससे सिर शर्म से झुक जाए। जिसमें श्मशान पहुंचने हेतु रास्ते का नहीं होना,कीचड़ / दलदल की भरमार,पानी का भरा होना, पार्थिव शरीर को जलाने हेतु टीन शेड/पॉलिथीन / तिरपाल को टांगकर खड़े होना हृदय विदारक दृश्य रहे । जब हमारी टीम के द्वारा कुछ स्थानीय निवासियों और ग्राम प्रधानों व प्रतिनिधियों से इस समस्या को लेकर चर्चा की तब उन्होंने दबी जुबान में नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ग्राम पंचायत राल, अडिंग, पोरी , पिंगरी, ततरोता आदि में श्मशान या तो है नहीं, नहीं तो जीर्ण शीर्ण अवस्था में है । भू माफिया और दबंगों द्वारा राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मिली भगत करके हसनपुर, जिखन गांव, भरतिया, कोथरा , भदेरुआ,ढवाला,, सकरवा , परखम, बढैन खुर्द , बाजना आदि पर अतिक्रमण कर रखा है या यह जमीने बिक चुकी है । आज भी यह राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में खसरा खतौनी के नाम से मरघट भूमि के नाम पर दर्ज हैं लेकिन मौके पर इन जमीनों पर कोई आज नहीं सकता । हम लोगों के द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार और जिला मुख्यालय पर अधिकारियों को लगातार शिकायतें दर्ज कराई है लेकिन नतीजा डाक के तीन पात ही है हम लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है सिर्फ झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं और लगातार मूर्ख बनाया जा रहा है।हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था होने का दावा करते हैं लेकिन हमारी सरकारें आज भी ग्रामीण स्तर पर मूलभूत सुविधाओं को देने में असमर्थ दिखाई पड़ती हैं ।इसका दोषी कौन है यह मूलभूत सवाल हमेशा चर्चाओं में बना रहेगा !


अंत्येष्टि स्थलों के साथ भारतीय संस्कारों का भी हुआ अंतिम संस्कार….?

सतीश मुखिया 

नूँह/ मथुरा : सूबे की प्रदेश सरकार सबका साथ सबके विकास का वादा करती है वही समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को अपने अंतिम समय में अपने अंतिम संस्कार हेतु भी जूझना पड़ रहा है । खानपुर घाटी पंचायत के ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग पिछले काफी समय से श्मशान घाट के रास्ते पर अवैध कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन से करते आ रहे है लेकिन विवाह के कामों कानों पर जूं नहीं रेंग रही है और हमने आज मजबूरन रास्ते पर अंतिम संस्कार की क्रिया को संपन्न किया। इस पर पुलिस ने ग्रामीणों को चेतावनी देते हुए कहा कि आगे से इस तरह से रास्ते में अंतिम संस्कार ना करें। ऐसा किया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने भी जिला प्रशासन को कब्जा खाली कराने के लिए 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है।

गांव खानपुर घाटी निवासी अमर सिंह, कमल, दयाराम, यादराम, बलराम कुमार, सोहनलाल प्रजापति, महेश एडवोकेट ने बताया कि गांव में चकबंदी के समय पहाड़ के नजदीक करीब दो कनाल जमीन श्मशान भूमि के लिए दी गई थी। अरावली की पहाड़ियों मे श्मशान भूमि होना बताकर ग्रामीणों को गुमराह किया जाता रहा। जब तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड में देखा तो कागजों में उनकी दो कनाल जमीन श्मशान घाट के लिए चकबंदी के दौरान मिली हुई थी। श्मशान घाट की भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ था। ग्रामीणों के मुताबिक श्मशान की कुछ भूमि को वीटा प्लांट द्वारा कब्जा लिया गया। बाकी बची भूमि से रास्ता मॉडल संस्कृति स्कूल के लिए निकाल दिया गया।

स्थानी जनता ने बताया कि कई बार उनके घरों में छोटे बच्चों की मृत्यु हो जाती है। जिन्हें दफनाया जाता है लेकिन अरावली में पत्थर होने के चलते वहां से खुदाई नहीं हो पाती। जिससे उन्हें मजबूरी में अपने बच्चों का दाह संस्कार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही गांव के कुछ लोगों ने यह कहकर गुमराह कर रखा है कि उनकी जमीन वहां से बिक चुकी है। उन्हें अब पता चला है कि उनकी जमीन तो है लेकिन उस पर कब्जा है। इस कब्जा को लेकर करीब 10 दिन पहले समाज के लोग डीसी अखिल पिलानी को लिखित में एक शिकायत देकर आए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार को जहां मूल चंद नामक व्यक्ति का दाह संस्कार किया गया, वहां से चार कदम की दूरी पर स्कूल में बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। बच्चे भी यह देख घबरा गए। किसी व्यक्ति ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। पुलिस के पहुंचने से पहले अंतिम संस्कार हो चुका था।


पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में प्लास्टिक मुक्त परिसर अभियान की हुई शुरुआत

सतीश मुखिया

मथुरा : उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, मथुरा में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिजित मित्र के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आज दिनांक 20 सितंबर, 2025 से 19 अक्टूबर, 2025 तक स्वच्छता अभियान चलाकर, विश्वविद्यालय परिसर को प्लास्टिक मुक्त किया जाएगा। जिसका शुभांरभ आज दिनांक 20 सितंबर 2025 को विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा किया गया ।

उन्होंने बताया कि प्लास्टिक नॉन डिग्रेडेबल केमिकल का बना होता है जो प्राकृतिक रूप से विघटित नहीं होते और लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं । जिससे प्रदूषण फैलता रहता है। प्लास्टिक, प्रकृति तथा हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है । इसलिए हम सभी को प्लास्टिक के प्रयोग से बचना चाहिए । प्लास्टिक की थैलियों या डिब्बों के स्थान पर हमें जूट, कपड़ा या पेपर के थैलों का प्रयोग करना चाहिए। जिससे हमारी प्रकृति, समाज तथा परिवार स्वस्थ बना रहे। विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी प्रो. देश दीपक सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक, कर्मचारी तथा छात्र-छात्राओं ने परिसर में फैले हुए प्लास्टिक के पैकेटों, थैलीयो, बोतलों आदि को एकत्रित कर निस्तारित कराया।


विकास योजनाओं को पलीता लगाते कट्टर ईमानदार …?

सतीश मुखिया

पंचायत चुनाव 2026 में जनता किसको चुनेगी प्रधान या प्रधान पति

विकास की दौड़ में पीछे छूटता अंतिम व्यक्ति

अंतिम संस्कार के इंतजार में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण )

मथुरा : उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव वर्ष 2026 की उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तैयारियां शुरू हो चुकी है और पंचायत द्वारा कुछ ही समय में बस्तो को जिला मुख्यालय में जमा कर दिया जाएगा । इन चुनाव को लेकर गांव /पंचायतो में उत्सव जैसा माहौल है । स्थानीय राजनीति में उठा पटक शुरू हो चुकी है ।एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगना शुरू कर दिया गया है और हारे हुए प्रत्याशी वर्तमान प्रधान , प्रधान पति ,प्रधान पुत्र ,प्रधान देवर , प्रधान प्रतिनिधियों की शिकायतों का पुलिंदा लेकर जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन,जांच हेतु मांगे कर रहे हैं. सभी प्रतिनिधि अपनी सुविधा अनुसार पंचायत के पदों को संरक्षित करवा रहे हैं लेकिन इन सब के बीच जिस मतदाता/ जनता के लिए इस चुनाव को होना है वह मौन साधकर इन सब कलाबाजियों को देख रहा है क्योंकि उसे पता है कि जब चुनाव आएगा तब मुझे चुपचाप से मतदान केंद्र पर जाकर मत पत्र पर अपनी मोहर लगा देनी है ,मना किसी को नहीं करना है क्योंकि यह चुनाव स्थानीय है और दुश्मनी, रंजिश कौन मौल ले । इसमें भागीदार भैया, भाभी ,चाची ,चाचा,ताऊ ताई और बचपन में साथ खेले मित्र ही तो हैं लेकिन इन सब के बीच कुछ ऐसे मौका परस्त लोग भी हैं जो बेसब्री से इस पर्व का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यही तो चुनावी सीजन है, वैसे तो देसी पीके गुजारा हो जाता है लेकिन चुनाव में बढ़िया अंग्रेजी पीने को मिलेगी और 15 दिन ठाट का जीवन कुछ रहेगा । इसी में तो अगले 5 साल की भरपाई करनी है और कुछ अपनी व्यक्तिगत रंजिश निकालने हेतु इस मौके का फायदा उठाने को तैयार बैठे हैं कि बच्चू अब आए हो मेरे चक्कर में , अब तुमको बताऊंगा कि तुमने मेरे साथ कैसा व्यवहार किया वोट तो मेरे पास से ही लेने आओगे ना !

आज भी 70% आबादी के गांवों में निवास करती है । त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने हेतु विभिन्न योजनाओं को लागू किया जा रहा है लेकिन यह योजनाएं धरातल पर लागू नहीं हो पाती । ग्रामीण विकास मंत्रालय, जल मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय द्वारा पंचायतों में रहने वाले निवासियों के सर्वांगीण विकास हेतु पंचायत निधि के रूप में धनराशि आवंटित करते हैं जिससे यह पंचायतें अपना विकास कर सकें और अपने खर्च स्वयं वहन कर सके लेकिन जनपद स्तर से कार्य योजना लागू होने के बाद भूतल पर यह योजनाएं सही तरीके से लागू नहीं हो पाती । पंचायतो के विकास की जिम्मेदारी प्रधान , ग्राम विकास अधिकारी (सचिव ),रोजगार सेवक पंचायत सहायक आदि की होती है लेकिन भाई भतीजाबाद, जाति, धर्म, संप्रदाय और स्थानीय राजनीति विकास को अवरुद्ध मुख्य भूमिका निभाते है ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ , सबका विकास के नारे के साथ समानता का संदेश दे रहे है लेकिन जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा सही तरीके से क्रियावनन ना करने के कारण विकास कार्यों में स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता, स्थायित्व,उत्तरदायित्व,भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की कमी सामने आ रही है ।

पंचायतो के विकास हेतु सरकार द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में चुनाव कराया जाता है लेकिन क्या वास्तव में इस चुनाव प्रक्रिया के तहत चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा जनता की समस्याओं का निराकरण सही तरीके से किया जाता है और वह अपना इन पंचायत के विकास में शत प्रतिशत योगदान दे पाते हैं ।ऐसा नहीं है कि सभी प्रधान गलत है, कुछ प्रधान अलग करना चाहते हैं लेकिन शासन प्रशासन और स्थानीय स्तर पर पूर्ण सहयोग न मिलने के कारण वह इन कार्य योजनाओं को सही तरीके से लागू कर पाने में असमर्थ साबित होते हैं ।

आज ग्राम प्रधान होना राजनीतिक रसूख / रुतबा कायम करता है लेकिन आज के समय में प्रधान के चुनाव में भागीदारी करना बहुत महंगा हो गया है जिससे कई युवा जो पंचायत के लिए कुछ करना चाहते हैं वह इसमें भागीदार नहीं बन पाते वहीं दूसरी ओर प्रधान/ पंचायत के प्रथम व्यक्ति/ प्रतिनिधियों द्वारा अपने चुनावी खर्चों को निकालने हेतु विकास योजनाओं में शासकीय कर्मचारियों के साथ मिलकर अप्रत्यक्ष रूप से हेर फेर को अंजाम देना शुरू कर देते हैं ।

सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं को चलाया जा रहा है जिसमें मॉडल पंचायत, सौर ऊर्जा, आंगनवाड़ी, स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा, अंत्येष्टि स्थल विकास योजना,पंचायत घरों का निर्माण,पुस्तकालयों का निर्माण,अमृत सरोवर योजना,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र,स्थानीय बैंक,पोस्ट ऑफि,पशुपालन/ मछली पालन को बढ़ावा,सामुदायिक शौचालय,प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण,नलकूपों की स्थापना,सामुदायिक केन्द्,जल जीवन मिशन, गौशाला ,कचरा से कंचन कचरा केंद्र , रोड , नाली आदि का निर्माण कार्य प्रमुख रूप से शामिल है लेकिन प्रधान,ग्राम सचिव, रोजगार सेवको के द्वारा इन योजनाओं को धरातल पर सही तरीके से क्रियान्वित नहीं किया जाता और इनमें आधे से अधिक योजनाओं को तो सिर्फ कागजो पर दिखाकर पंचायत निधि का दुरुपयोग कर लिया जाता है और मनरेगा के तहत बाहर नौकरी कर रहे स्थानीय निवासियों के फर्जी जॉब कार्ड बनाकर उनके खातों से अंगूठा लगाकर अवैध , फर्जी तरीके से धन निकासी करना एक आम बात है जिसकी विभिन्न पंचायत में लगातार शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं । जिस कारण विभाग को भारी भरकम मात्रा में राजस्व की हानि होती है ।

ऐसा नहीं है कि जिला मुख्यालय में बैठे उच्च अधिकारियों को इन सब मामलों का संज्ञान नहीं होता है लेकिन मेरे दोस्त यह भारत है , यहां कुछ चले या ना चले , लेकिन जुगाड़ जरूर चलता है। सभी अधिकारी और कर्मचारी गलत नहीं है लेकिन कुछ कट्टर ईमानदार अधिकारी अपनी आंखों को बंद कर लेते हैं । जब कोई जागरूक नागरिक इन मुद्दों को लेकर के उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर और सूबे के ग्रामीण विकास मंत्रालय की कमान संभाल रहे केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री, पंचायत राज विभाग के मुख्य विकास अधिकारी, पंचायत राज अधिकारी,डीसी (मनरेगा ) ,जिला विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी के कार्यालय में इनकी शिकायत करता है तब उनकी नींद खुलती है । वह बार-बार शिकायत करने के बाद जांच कमेटी का गठन करते हैं फिर उसके बाद मौके पर AC कार्यालय से बाहर निकलकर जमीन पर आकर भौतिक सत्यापन करने का कष्ट उठाते हैं और फिर उसके बाद शुरू होती है जांच प्रक्रिया जो जांच लगातार चलती रहती हैं । इन सब के बीच पंचवर्षीय योजना बदल जाती है और जांच अधिकारियों का तबादला दूसरे जनपदों में हो जाता है । इस बीच उस जागरूक नागरिक को विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित करवाया जाता है लेकिन देशभक्ति के जज्बात में डूबा वह पागल व्यक्ति अपने घर परिवार की ओर ना देखते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाता रहता है और कई बार उसमें अपने प्राणों को न्यौछावर कर काल के गर्त में समा जाता है फिर उसके बाद अगला चुनाव आ जाता है ।

देश में भ्रष्टाचार,पारदर्शिता के खिलाफ लड़ाई पुरानी नहीं है लेकिन कैसे जोड़ तोड करके विकास कार्यों की योजनाओं में से धनराशि को निकालना/ खुर्द बुर्ध करके भारत के संघीय ढांचे को कमजोर किया जा रहा है । यह एक यक्ष प्रश्न हम सब भारतीयों के सामने खड़ा है लेकिन हम सब लोग दूसरे के घर में भगत सिंह चाहते हैं अपने घर में नहीं। जब हमारी टीम ने पंचायत में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता को लेकर भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली, मथुरा के कुछ मामले निकलकर सामने आए, यह सिर्फ उदाहरण मात्र है !

Case: 01
ग्राम पंचायत : जुगसना विकासखंड: बल्देव
शिकायतकर्ता :मानसिंह ,
पूर्व सैनिक
इस पंचवर्षीय योजना के दौरान पंचायत निधि से फर्जी कार्यों के बिलों का भुगतान कर दिया गया है । मनरेगा, स्ट्रीट लाइट और तालाब सफाई के कार्यों में भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमितता है । प्रधान ने स्वयं के निजी खेतों पर पंचायत निधि से बोरिंग करवा ली है ।जिला पंचायत कार्यालय में की गई है ।

Case:02
ग्राम पंचायत: लाडपुर महावन
विकासखंड: राया
शिकायतकर्ता: ग्रामवासी
ग्राम वासियों ने आरोप लगाया के प्रधान द्वारा नलों और समर रीबोर के नाम पर लाखों रुपए की पंचायत निधि का हेरफेर किया है । इन्होंने फर्जी बिल बनाकर अवैध फर्म को बिलों का भुगतान भी कर दिया गया है जिसकी शिकायत जिला मुख्यालय में की गई और उसकी जांच डॉक्टर एन के शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी आदि की टीम कर रही है ।

Case : 03
ग्राम पंचायत: ककरारी
विकासखंड : राया
शिकायतकर्त्ता: रेशम पाल सिंह, पूर्व सैनिक
वर्ष 2017 /18 से वर्ष 20/21 के प्रधान रहे लेखराज सिंह के खिलाफ पंचायत निधि से ₹40 लाख अवैध धन निकासी की शिकायत जिला पंचायत कार्यालय में की जिसकी जांच चल रही है ।

Case :04
ग्राम पंचायत : हसनपुर विकासखंड :नोहझील
शिकायतकर्ता: रमेश चंद्र आदि
समाज के अंतिम व्यक्ति हेतु पंचायत द्वारा निर्धारित श्मशान की भूमि पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जे की शिकायत की गई है जिसकी जांच प्रक्रिया जिला मुख्यालय में लंबित है ।

इन पंचायत के विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार , वित्तीय अनियमितता , फर्जीवाड़ा को लेकर के जब हमारी टीम के द्वारा जिला मुख्यालय में पदस्थ अधिकारियों से दूरभाष पर उनका पक्ष जानना चाहा तब उनमें से कई लोगों का फोन बजता रहा, उठाया नहीं और आउट ऑफ कवरेज एरिया बताता रहा .

सभी ग्राम पंचायतो में कार्य कार्ययोजनाओं के अनुसार हुए हैं अगर किसी ग्राम पंचायत मे भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के खिलाफ शिकायत प्राप्त होती है तब उस ग्राम पंचायत की जिला स्तर से उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी । किसी भी दोषी को बक्शा नहीं जाएगा ।
गरिमा खरे, जिला विकास अधिकारी ,मथुरा


मथुरा रिफाइनरी ने करवाई अपने संविदा कर्मियों और सफाई मित्रों की स्वास्थ जांच

स्वच्छता ही सेवा 2025 के अंतर्गत स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

सतीश मुखिया

मथुरा: स्वच्छता पखवाड़े को ध्यान में रखते हुए कार्यकारी निदेशक व रिफाइनरी प्रमुख श्री मुकुल अग्रवाल के निर्देशानुसार एवं अपने संविदा कर्मियों के लिए सदैव सजग रिफाइनरी प्रबंधन के मार्गदर्शन के अंतर्गत आज मथुरा रिफाइनरी के प्राथमिक उपचार केंद्र में सफाई मित्रों एवं संविदा कर्मियों के लिए एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वच्छता शपथ के साथ हुई, जिसमें स्वच्छता और सामूहिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY), मुख्यमंत्री आरोग्य सहायता कोष तथा मिशन इंद्रधनुष जैसी विभिन्न महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी गई। ये योजनाएँ प्रत्येक नागरिक, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए, सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

स्वास्थ्य नीतियों के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ प्रतिभागियों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों ने इस शिविर में भाग लेकर अपने स्वास्थ्य की जांच करवाई तथा निवारक एवं उपचारात्मक उपायों के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस पहल का उद्देश्य कर्मियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। यह स्वास्थ्य शिविर इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसने न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की अहमियत को रेखांकित किया बल्कि इसे स्वच्छता, स्वच्छ जीवनशैली और सतत् जीवन के व्यापक संदेश से भी जोड़ा। स्वास्थ्य जागरूकता और समय पर स्वास्थ्य परीक्षण बेहतर उत्पादकता, जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि और सामुदायिक देखभाल की मजबूत भावना विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

शिविर का समापन सकारात्मक प्रभाव के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों में जागरूकता का संचार हुआ, आत्मविश्वास बढ़ा तथा स्वास्थ्य और स्वच्छता दोनों को एक बेहतर समाज के प्रमुख स्तंभ के रूप में पुनः स्थापित किया गया।


भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता अंतिम व्यक्ति का विकास

भाई भतीजाबाद, विकास योजनाएं और ग्राम पंचायते

असली भारत गांव में बसता है!

सतीश मुखिया
हाथरस/ मथुरा : भारत गांवों का देश है और आज भी 70% आबादी के गांवों में निवास करती है । केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने हेतु विभिन्न योजनाओं को लागू किया जा रहा है लेकिन यह योजनाएं धरातल पर लागू होती हुई दिखाई नहीं पड़ती है । ग्रामीण विकास मंत्रालय, जल मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा ग्राम पंचायतों में रहने वाले निवासियों के सर्वांगीण विकास हेतु भारी मात्रा में पंचायत निधि के रूप में धनराशि आवंटित की जा रही है जिससे यह पंचायतें अपना विकास कर सकें और अपने खर्च स्वयं वहन कर सके लेकिन पंचायत स्तर पर यह देखने में आ रहा है कि जनपद स्तर से कार्य योजना लागू होने के बाद भूतल पर यह योजनाएं सही तरीके से लागू नहीं हो पाती जिस कारण गांव के विकास में अड़चन पैदा होती है । ग्राम पंचायत के विकास की जिम्मेदारी प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी की होती है लेकिन आपसी सामजस्य सही से न बैठने के कारण विकास की गाड़ी का पहिया उतर जाता है और जिस पंचायत का विकास होना चाहिए था वह पंचायत विकास के रास्ते पर आगे ना बढ़कर पीछे की ओर बढ़ती हुई दिखाई देती है । जिसमें भाई भतीजाबाद, जाति, धर्म, संप्रदाय और स्थानीय राजनीति मुख्य भूमिका निभाती है ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से वादा किया वह उसको भरसक निभाने की कोशिश कर रहे हैं और सबका साथ , सबका विकास के नारे के साथ समानता का संदेश दे रहे है ।इन दोनों के द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत ग्राम पंचायत के विकास हेतु धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है लेकिन जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा सही तरीके से इस धनराशि का उपयोग न होने के कारण विकास कार्यों में स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता सामने आ रही है ।

उत्तर प्रदेश में अगले 6 महीने में पंचायत चुनाव 2026 के चुनाव होने को है और कुछ ही समय में पंचायत के बस्ती जमा होना शुरू हो जाएंगे लेकिन सवाल वहीं खड़ा है कि जिन पंचायत के विकास हेतु सरकार द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में चुनाव कराया जाता है क्या वास्तव में इन चुनाव प्रक्रिया के तहत चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा जनता की समस्याओं का निराकरण सही तरीके से किया जाता है और वह अपना इन पंचायत के विकास में सत प्रतिशत योगदान दे पाते हैं ।रहे हैं ।ऐसा नहीं है कि सभी प्रधान गलत है कुछ प्रधान अलग करना चाहते हैं लेकिन शासन प्रशासन और स्थानीय स्तर पर पूर्ण सहयोग न मिलने के कारण वह इन कार्य योजनाओं को सही तरीके से लागू कर पाने में असमर्थ साबित होते हैं ।

आज राजनीति के बदलते परिदृश्य में ग्राम प्रधान होना अपने आप में एक बड़ी बात है और समाज में यह राजनीतिक रसूख / रुतबा कायम करता है ।आज के समय में प्रधान के चुनाव में भागीदारी करना बहुत महंगा हो गया है इसीलिए प्रधान/ पंचायत के प्रथम व्यक्ति/ प्रतिनिधियों द्वारा अपने चुनावी खर्चों को निकालने हेतु विकास योजनाओं में अप्रत्यक्ष रूप से हेर फेर को अंजाम देना शुरू कर दिया है ।उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विकास हेतु विभिन्न योजनाओं को चलाया जा रहा है जिसमें मॉडल पंचायत, सौर ऊर्जा, आंगनवाड़ी, स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा, अंत्येष्टि स्थल विकास योजना,पंचायत घरों का निर्माण,पुस्तकालयों का निर्माण,अमृत सरोवर योजना,सामुदायिक शौचालय,प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण,नलकूपों की स्थापना,सामुदायिक केन्द्, गौशाला ,कचरा से कंचन कचरा केंद्र , रोड , नाली आदि का निर्माण कार्य प्रमुख रूप से शामिल है लेकिन प्रधान,ग्राम सचिव, रोजगार सेवको के द्वारा इन योजनाओं को धरातल पर सही तरीके से क्रियान्वित नहीं किया जाता।

इनमें आधे से अधिक योजनाओं को तो सिर्फ कागजो पर दिखाकर पंचायत निधि का दुरुपयोग कर लिया जाता है और मनरेगा के तहत बाहर नौकरी कर रहे स्थानीय निवासियों के फर्जी जॉब कार्ड बनाकर उनके खातों से अंगूठा लगाकर अवैध , फर्जी तरीके से धन निकासी करना एक आम बात है जिसकी विभिन्न पंचायत में लगातार शिकायत है प्राप्त होती रहती हैं । जिस कारण उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग को भारी भरकम मात्रा में राजस्व की हानि होती है । ऐसा नहीं है कि जिला मुख्यालय में बैठे उच्च अधिकारियों को इन सब मामलों का संज्ञान नहीं होता है लेकिन मेरे दोस्त यह भारत है , यहां कुछ चले या ना चले , लेकिन जुगाड़ जरूर चलता है। सभी अधिकारी और कर्मचारी गलत नहीं है लेकिन कुछ भ्रष्टाचारी रूपी मिठाई लेकर अधिकारी अपनी आंखों को बंद कर लेते हैं ।

जब कोई जागरूक नागरिक इन मुद्दों को लेकर के उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर और सूबे के ग्रामीण विकास मंत्रालय की कमान संभाल रहे केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री, पंचायत राज विभाग के मुख्य विकास अधिकारी, पंचायत राज अधिकारी,डीसी (मनरेगा ) ,जिला विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी के कार्यालय में इनकी शिकायत करता है तब उनकी नींद खुलती है । वह बार-बार शिकायत करने के बाद जांच कमेटी का गठन करते हैं फिर उसके बाद मौके पर AC कार्यालय से बाहर निकलकर जमीन पर आकर भौतिक सत्यापन करने का कष्ट उठाते हैं और फिर उसके बाद शुरू होती है जांच प्रक्रिया जो जांच लगातार चलती रहती हैं ।इन सब के बीच पंचवर्षीय योजना बदल जाती है और जांच अधिकारियों का तबादला दूसरे जनपदों में हो जाता है । इस बीच उस जागरूक नागरिक को विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित करवाया जाता है लेकिन देशभक्ति के जज्बात में डूबा वह पागल व्यक्ति अपने घर परिवार की ओर ना देखते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाता रहता है और कई बार उसमें अपने प्राणों को न्यौछावर कर काल के गर्त में समा जाता है फिर उसके बाद अगला चुनाव आ जाता है ।

देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पुरानी नहीं है लेकिन कैसे जोड़ तोड करके विकास कार्यों की योजनाओं में से धनराशि को निकालना/ खुर्द बुर्ध करके भारत के संघीय ढांचे को कमजोर किया जा रहा है । यह एक यक्ष प्रश्न हम सब भारतीयों के सामने खड़ा है लेकिन हम सब लोग दूसरे के घर में मंगल पांडे चाहते हैं अपने घर में नहीं। जब हमारी टीम ने पंचायत में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता को लेकर के कुछ मामलों को देखा तब हाथरस के कुछ मामले निकलकर सामने आए यह सिर्फ उदाहरण मात्र है !

Case: 01
ग्राम पंचायत : गुतहरा, विकासखंड: हसायन
निर्माण कार्य हेतु ईट रोड़ी और तालाब सफाई हेतु बार-बार अवैध तरीके से Rs1.70 और Rs 1.60 लाख धनराशि निकासी की शिकायत स्थानीय नागरिक पंकज कुमार द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आइजीआरएस पोर्टल के माध्यम से जन शिकायत की गई ।जिसकी जांच लगातार चल रही है ।

Case:02
ग्राम पंचायत: लोधीपुर पट्टी देवरी
विकासखंड: हसायन
ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के खिलाफ 9 सूत्रीय माँग पत्र स्थानीय निवासी विपिन कुमार द्वारा विकासखंड अधिकारी, हसायन कार्यालय हाथरस को दिया गया ।जिसकी जांच ADO प्रेम किशोर यादव , अवर अभियंता हिमांशु सिंह और ग्राम विकास अधिकारी की कमेटी जांच कर रही है ।

Case : 03
ग्राम पंचायत: मोहब्बतपुर
विकासखंड :हाथरस
शिकायत कर्त्ता: अंकित सिंह
ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों के लिए अवैध धन निकासी और मनरेगा में बाहर नौकरी कर रहे स्थानीय नागरिकों के फर्जी जॉब कार्ड बनाकर उनके खाते से रोजगार सेवक द्वारा धन निकासी की शिकायत जिला पंचायत कार्यालय हाथरस में की गई । जिसकी जांच सत्येंद्र शर्मा, लोकपाल द्वारा की जा रही है ।

Case :04
ग्राम पंचायत: देवर पनाखर विकासखंड :सिकंदराराऊ
शिकायतकर्ता: पंकज कुमार आदि
इस ग्राम पंचायत में इस पंचवर्षीय योजना के दौरान पंचायत निधि से विकास कार्यों में हुई वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ वर्ष 2020 से लगातार शिकायतें जिला मुख्यालय के विभिन्न विभागों में की जा रही है ।
इन पंचायत के विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार , वित्तीय अनियमितता , फर्जीवाड़ा को लेकर के जब हमारी टीम के द्वारा जिला मुख्यालय में पदस्थ अधिकारियों से दूरभाष पर उनका पक्ष जानना चाहा तब उनमें से कई लोगों का फोन बजता रहा, उठाया नहीं ,आउट ऑफ कवरेज एरिया बताता रहा और कुछ अधिकारियों ने कहा कि जांच प्रक्रिया चल रही है उसके बाद ही कुछ जानकारी आपको दी जा सकती है ।

एक तरफ केंद्र सरकार और राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास का वादा देश के लाल किले से करती है और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मिशन अंत्योदय को ध्यान में रखते हुए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के सर्वांगीण विकास हेतु समग्र संसाधनों को लगा करके उस अंतिम व्यक्ति को पंक्ति के पहले स्थान पर लाना चाहती है लेकिन कवि अदम गोंडवी ने सही ही कहा है कि

तुम्हारी फाइलों में
गांव का मौसम गुलाबी है ।
मगर यह आंकड़े झूठे हैं
यह दावा किताबी है ॥


गोवर्धन में अग्रसेन जयंती महोत्सव की तैयारियां पूर्ण : अध्यक्ष बांचे लाला

सतीश मुखिया

20 सितंबर से शुरू होगा पांच दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ

मथुरा: गोवर्धन में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी महाराजा श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव हर्ष धूमधाम व उल्लास के साथ मनाया जाएगा। जयंती महोत्सव के अध्यक्ष घनश्याम अग्रवाल उर्फ बांचे लाला ने बताया पांच दिवसीय महोत्सव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। समाज के लोगों को निमंत्रण दिए जा चुके हैं। महोत्सव को भव्य बनाने के लिए सभी पदाधिकारी और समाज के लोग जुटे हुए। 20 सितंबर को सुबह हाथी दरवाजा स्थित ठाकुर श्री राधा रमन जी का अभिषेक पूजन किया जायेगा। दोपहर 3 बजे होटल चंद्रा गार्डन से श्री गणेश कलश शोभा यात्रा महिलाओं के द्वारा निकाली जाएगी। इसमें सभी महिलाएं एक ही वस्त्र धारण किए हुए नजर आयेंगी।21 सितंबर को मुरारी कुंज सरस्वती विद्या मंदिर में दोपहर 1 बजे बालिकाओं के लिए रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिता दोपहर 3 बजे बालक एवं बालिकाओं के लिए पोस्टर प्रतियोगिता होगी। 22 सितंबर को मुरारी कुंज में दोपहर दीप प्रज्ज्वलन, रूप सजा प्रतियोगिता एवं फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता दोपहर 3 बजे आजीवन सदस्यों का सम्मान समारोह और शायद 4 बजे स्वलप आहार होगा।

23 सितंबर को महाराजा श्री अग्रसेन के 18 राजकुमारो सहित आकर्षक झाकियो के साथ भव्य शोभा यात्रा मुरारी कुंज से सायं 7 बजे कस्बे में निकाली जाएगी। 24 सितंबर को 5 बजे प्रतियोगिता पुरस्कार एवं स्वरूप सम्मान व धर्मशाला हेतु भूमि दानदाताओं का सम्मान समारोह और रात्रि को 9 बजे से कवि सम्मेलन बरसाना रोड स्थित होटल चंद्रा गार्डन में होगा। जिसमें कवि कमल मनोहर लक्ष्मण नेपाली अजय राजेश लोपोट कोमल नाजुक साबिया असर कवि सम्मेलन की शोभा बढ़ाएंगे। महोत्सव को सफल बनाने के लिए उपाध्यक्ष बांके बिहारी सिंघल गिरधारी लाल सिंघल मुकेश चंद्र अग्रवाल, महामंत्री लक्ष्मी चंद्र अग्रवाल कोषाध्यक्ष पवन कुमार अग्रवाल मंत्री बांके बिहारी सिंगल संगठन मंत्री राजेंद्र अग्रवाल प्रचार प्रसार मंत्री गजेंद्र अग्रवाल गज्जू चक्की वाले आदि तैयारी में जुटे हुए हैं।


विकास को पलीता लगाते जन प्रतिनिधि और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठती आवाजें

सतीश मुखिया

हाथरस/मथुरा  – काका हाथरसी के नाम से मशहूर हाथरस किसी पहचान का मोहताज नहीं है लेकिन आजकल चर्चा हींग , गुलाल, बूरा और कुटीर उद्योग को ना लेकर कुछ समय से सामाजिक ,राजनीतिक और धार्मिक विवादों को लेकर के ज्यादा है जिसमें एक दलित युवती के साथ हुए दुराचार,धार्मिक सत्संग के कार्यक्रम में भगदड़ से हुई मौतें और सामाजिक जीवन में जातियों द्वारा आपसी वर्चस्व की लड़ाई इन दिनों जोरों पर है और इसी कड़ी में विकासखंड हसायन के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय जाटव !

ग्राम पंचायत बसई बाबस विकासखंड हसायन के क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय जाटव अपने जीवन की सबसे कठिन लड़ाई का सामना कर रहे हैं वैसे तो यह विकलांग है लेकिन अपने होसले और निश्चय के कारण पिछले 35 दिनों से अपनी ग्राम पंचायत में अपने घर के बाहर विकासखंड को योजनाओं में वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं वह विभिन्न तरीकों से शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं । वह अपनी शिकायतों को लेकर खुलकर अधिकारियों और जनमानस के सामने अपना पक्ष रख रहे हैं उनके द्वारा इस पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत लगभग 100 आईजीआरएस/ शिकायत विभिन्न विभाग को की गई जिसमें उन्होंने मनरेगा में भ्रष्टाचार, विकासखंड में हुए कार्यों में अनियमितता के खिलाफ शिकायतें की . उन्होंने दूरभाष पर संपर्क करने पर बताया कि हसायन ब्लॉक में इस पंचवर्षीय योजना में जो भी कार्य कराए गए हैं उनमें भारी अनियमितता है और हम लगातार सुबोध जोशी, जिला पंचायत राज अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी व जिला विकास अधिकारी अन्य अधिकारियों से मांग कर रहे कि हैं कि इन कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए लेकिन अधिकारियों द्वारा जांच ना कर कर उल्टे हमको ही डराया और धमकाया जा रहा है वह कह रहे हैं कि आप यह धरना समाप्त करिए जिसके लिए विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया जा रहा है ।

हम दलित और वंचित हैं इसीलिए अधिकारी हमारे धरने पर आना नहीं चाहते हैं.ब्लॉक में हुए विकास कार्यों में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है । यह एक बड़ा सवाल है कि कैसे एक रोजगार सेवक (अमित कुमार शर्मा) द्वारा अपने रिश्तेदारों और सगे संबंधियों के नाम से फर्म बनाकर के विकासखंड में कार्य कराया जा रहा है और फर्जी बिल लगा करके पेमेंट ली जा रही हैं जिसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है । हमारे द्वारा मुख्यमंत्री को भी शिकायती पत्र भेजे गए हैं और जिला स्तर पर भी कार्यवाही की गई है लेकिन पिछले 3 वर्षों से जांच के सिर्फ झूठे आश्वासन मिल रहे हैं और कोई जांच नहीं हो रही है ।ऐसा अंदेशा है कि इसमें कुछ जिला स्तरीय अधिकारियों की मिली भगत है वह नहीं चाहते कि इस मामले की सही तरीके से जांच हो अगर मुझे और मेरे परिवार के साथ कोई दुर्घटना होती है तब उसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी । देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहां करते थे कि असली भारत गांव में बसता है लेकिन आजादी के 75 वर्ष से अधिक बीतने के बाद भी भारत की ग्राम पंचायतें अपनी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है और आम जनमानस को अपने जीवन यापन में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है ।

इस मुद्दे पर विभिन्न अधिकारियों से दूरभाष पर की गई वार्ता के अनुसार वर्जन:
फोन लगातार बजना रहा लेकिन उनके द्वारा फोन को रिसीव नहीं किया गया ।
प्रेम किशोर ,ADO, हसायन, जिला: हाथरस

जांच प्रक्रिया चल रही है और जांच के बीच में कुछ भी बताना बड़ा मुश्किल है , बाकी आप समझते हैं ।
अनुज कुमार मिश्र, खंड विकास अधिकारी, हसायन, हाथरस
यह लगातार शिकायत करते रहते हैं , शिकायत करना इनका काम है । आप ब्लॉक में स्वयं पता कर लीजिए कि गलत कौन है और सही कौन, स्वयं दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा ।
डी पी सिंह , ब्लॉक प्रमुख
हसायन, हाथरस
हमारे द्वारा कोई जांच अभी नहीं की गई है ,पहले की गई होगी आप सीडीओ साहब से बात कर लें ।
पी एन यादव ,जिला विकास अधिकारी,हाथरस
जांच कमेटी गठित कर दी गई है 7 दिन में रिपोर्ट आने दीजिए, उसके बाद बात करते हैं ।
प्रदीप नारायण दीक्षित,मुख्य विकास अधिकारी , जनपद: हाथरस


मथुरा: प्रेम विवाह की उम्मीद में थाने पहुंचा युवक, अपहरण के आरोप में गया जेल

मथुरा: मथुरा जनपद के नौहझील थाना क्षेत्र में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया, जब एक युवक एक किशोरी को साथ लेकर थाने पहुंचा और पुलिस से कहा कि वह उससे शादी करना चाहता है। पहले तो पुलिस भी हैरान रह गई, लेकिन जब जांच की गई तो मामला कुछ और ही निकला।

पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि जिस किशोरी को युवक अपने साथ लेकर थाने आया था, उसके परिजन—विशेषकर भाई—पहले ही अपहरण का मामला दर्ज करा चुके हैं। यह जानने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए युवक को गिरफ्तार कर लिया।

क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार युवक और किशोरी आपस में एक-दूसरे को जानते थे और कथित तौर पर शादी करना चाहते थे। युवक किशोरी को अपने साथ लेकर सीधे थाने पहुंच गया ताकि वैधानिक रूप से शादी की अनुमति मांगी जा सके। हालांकि, पुलिस को जब अपहरण की रिपोर्ट के बारे में पता चला, तो मामला पूरी तरह पलट गया।

थाना प्रभारी का बयान:
नौहझील थाना प्रभारी ने बताया कि, “युवक द्वारा थाने में स्वयं आकर शादी की इच्छा जताई गई थी, लेकिन जब किशोरी की उम्र और दर्ज केस की जानकारी ली गई, तो अपहरण का मामला सामने आया। युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और किशोरी को काउंसलिंग के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पास भेजा गया है।”

किशोरी की उम्र:
पुलिस सूत्रों के अनुसार, किशोरी की उम्र 18 साल से कम बताई जा रही है, जिसके कारण यह मामला पॉक्सो एक्ट के दायरे में भी आ सकता है। मेडिकल परीक्षण और अन्य कानूनी प्रक्रिया के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों की प्रतिक्रिया:
किशोरी के परिवार वालों ने युवक पर आरोप लगाया है कि उसने लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाया था और वे जल्द से जल्द उसे सजा दिलाना चाहते हैं।


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